Chapter 9. आविन्यों | BSEB 10 Hindi Subjective


बिहार बोर्ड कक्षा 10 हिन्दी (गद्य खंड) | पाठ 9: "आविन्यों" — अशोक वाजपेयी
सम्पूर्ण 50 महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ, लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

भाग 1: एक-पंक्ति / अति-लघु उत्तरीय प्रश्न (प्रश्न 1 से 30)
1. 'आविन्यों' पाठ के लेखक कौन हैं?

उत्तर: अशोक वाजपेयी।

2. अशोक वाजपेयी का जन्म कब हुआ था?

उत्तर: 16 जनवरी 1941 ई० में।

3. अशोक वाजपेयी का जन्म कहाँ हुआ था और उनका मूल निवास कहाँ था?

उत्तर: जन्म दुर्ग (छत्तीसगढ़) में तथा मूल निवास सागर (मध्य प्रदेश) में।

4. अशोक वाजपेयी की माता और पिता का क्या नाम था?

उत्तर: माता का नाम निर्मला देवी और पिता का नाम परमानंद वाजपेयी था।

5. अशोक वाजपेयी ने अंग्रेजी में एम० ए० किस कॉलेज से किया?

उत्तर: सेंट स्टीफेंस कॉलेज, दिल्ली से।

6. अशोक वाजपेयी किस विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति रहे?

उत्तर: महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय (वर्धा) के।

7. अशोक वाजपेयी के प्रमुख कविता संग्रहों के नाम क्या हैं?

उत्तर: 'शहर अब भी संभावना है', 'एक पतंग अनंत में', 'तत्पुरुष', 'कहीं नहीं वहीं', 'बहुरि अकेला', 'थोड़ी सी जगह' और 'दुख चिठ्ठीरसा है'।

8. अशोक वाजपेयी को कौन-कौन से प्रमुख पुरस्कार एवं सम्मान प्राप्त हुए?

उत्तर: साहित्य अकादमी पुरस्कार, दयावती मोदी कवि शेखर सम्मान और फ्रेंच सरकार का 'ऑफिसर आव् द आर्डर आव् क्रॉस 2004'।

9. 'आविन्यों' पाठ लेखक की किस पुस्तक से संकलित है?

उत्तर: 'आविन्यों' नामक गद्य एवं कविता के सृजनात्मक संग्रह से।

10. आविन्यों किस देश में स्थित है?

उत्तर: दक्षिणी फ्रांस में।

11. आविन्यों किस नदी के किनारे बसा एक पुराना शहर है?

उत्तर: रोन (Rhône) नदी के किनारे।

12. आविन्यों में कभी किसकी राजधानी थी?

उत्तर: पोप की।

13. पीटर ब्रुक का कौन-सा विवादस्पद नाटक आविन्यों में पहली बार प्रस्तुत किया जाने वाला था?

उत्तर: 'महाभारत'।

14. आविन्यों में रंग-समारोह हर वर्ष किस ऋतु में होता है?

उत्तर: गर्मियों में।

15. रोन नदी के दूसरी ओर आविन्यों का कौन-सा नया हिस्सा (कस्बा) है?

उत्तर: 'वीलनव्व ल आविन्यों' (आविन्यों का नया गाँव)।

16. 'ला शत्रूज' क्या है?

उत्तर: कार्थूसियन संप्रदाय का एक पुराना ईसाई मठ।

17. ला शत्रूज का धार्मिक उपयोग कब से कब तक होता रहा?

उत्तर: चौदहवीं सदी से फ्रेंच क्रांति तक।

18. कार्थूसियन संप्रदाय किस गुण में विश्वास करता है?

उत्तर: मौन में।

19. लेखक ला शत्रूज में कितने दिनों तक रहे?

उत्तर: 19 दिन (24 अक्टूबर से 10 नवम्बर 1994 की दोपहर तक)।

20. लेखक अपने साथ ला शत्रूज क्या-क्या सामान ले गए थे?

उत्तर: हिन्दी का टाइपराइटर, तीन-चार पुस्तकें और कुछ संगीत के टेप्स।

21. लेखक ने 19 दिनों के एकांत प्रवास में कुल कितनी रचनाएँ लिखीं?

उत्तर: 35 कविताएँ और 27 गद्य रचनाएँ।

22. पिकासो की आविन्यों पर बनी विख्यात कृति (चित्र) का शीर्षक क्या है?

उत्तर: 'ल मादामोजेल द आविन्यों'।

23. किन तीन अति-यथार्थवादी कवियों ने आविन्यों में रहकर 30 संयुक्त कविताएँ लिखी थीं?

उत्तर: आन्द्रे ब्रेताँ, रेने शॉ और पाल एलुआर।

24. पाठ में संकलित पहली कविता का शीर्षक क्या है?

उत्तर: 'प्रतीक्षा करते हैं पत्थर'।

25. पाठ में संकलित दूसरी गद्य-कविता का शीर्षक क्या है?

उत्तर: 'नदी के किनारे भी नदी है'।

26. विनोद कुमार शुक्ल की किस कविता का संदर्भ पाठ में आया है?

उत्तर: 'नदी-चेहरा लोगों' से मिलने जाने वाली कविता का।

27. लेखक के अनुसार 'नदी तट पर बैठना' किसके समान है?

उत्तर: नदी के साथ बहने के समान (नदी होने के समान)।

28. नदी के समान सदियों से हमारे साथ कौन बहती रही है?

उत्तर: कविता।

29. "कैसी तुम नदी हो ?" का उत्तर लेखक ने क्या दिया है?

उत्तर: "जैसी तुम कविता हो !"

30. ला शत्रूज में औसतन प्रतिदिन कितने सैलानी घूमने आते हैं?

उत्तर: पचासेक (लगभग 50) सैलानी।

भाग 2: लघु उत्तरीय प्रश्न (प्रश्न 31 से 45)
31. आविन्यों क्या है और यह कहाँ अवस्थित है?

उत्तर: आविन्यों दक्षिणी फ्रांस में रोन नदी के किनारे बसा एक ऐतिहासिक और मध्ययुगीन शहर है, जहाँ गर्मियों में यूरोप का प्रसिद्ध वार्षिक रंग-समारोह आयोजित होता है।

32. लेखक को आविन्यों जाने का निमंत्रण क्यों और किसने दिया था?

उत्तर: पीटर ब्रुक के विवादस्पद और भव्य नाटक 'महाभारत' के पहले मंचन को देखने के लिए लेखक को वहाँ आमंत्रित किया गया था।

33. 'ला शत्रूज' का ऐतिहासिक परिचय दीजिए।

उत्तर: फ्रेंच शासकों द्वारा पोप पर नजर रखने के लिए बनवाए गए किले में चौदहवीं सदी में कार्थूसियन संप्रदाय का ईसाई मठ बना, जिसे 'ला शत्रूज' कहा जाता है।

34. फ्रेंच क्रांति के बाद ला शत्रूज का स्वरूप कैसे बदल गया?

उत्तर: क्रांति के बाद साधारण लोगों ने इमारतों पर कब्जा कर लिया था; बाद में 20वीं सदी की शुरुआत में सरकार ने इसे खरीदकर संरक्षित स्मारक और कलाकारों के कार्य-केंद्र के रूप में विकसित किया।

35. ला शत्रूज में रहने वाले रचनाकारों (रेजिडेंट्स) को क्या सुविधाएँ मिलती हैं?

उत्तर: उन्हें दो-दो कमरों के शांत चैंबर (कमरे), आधुनिक रसोई, नहानघर और संगीत-व्यवस्था मिलती है ताकि वे एकांत में निर्बाध रचनात्मक कार्य कर सकें।

36. लेखक ने ला शत्रूज में बिताए 19 दिनों को किस रूप में याद किया है?

उत्तर: लेखक ने इसे सघन, सुनसान, पवित्र और अत्यंत उत्पादक प्रवास माना, जहाँ उन्होंने निपट एकांत में 35 कविताएँ और 27 गद्य रचनाएँ सृजित कीं।

37. 'वीलनव्व ल आविन्यों' का क्या अर्थ और विशेषता है?

उत्तर: इसका अर्थ है 'आविन्यों का नया गाँव'। यह रोन नदी के दूसरी ओर बसा एक छोटा, शांत कस्बा है जहाँ पुस्तकें, कैफे, बार और ऐतिहासिक मठ स्थित हैं।

38. "प्रतीक्षा करते हैं पत्थर" कविता का क्या भाव है?

उत्तर: पत्थर सदियों से धूप, वर्षा, अंधेरा और प्राकृतिक थपेड़ों को झेलते हुए बिना शिकायत, बिना माथा झुकाए मौन साधना में किसी अनजानी प्रतीक्षा में अडिग खड़े हैं।

39. लेखक ने नदी और कविता में क्या समानताएँ बताई हैं?

उत्तर: जिस प्रकार नदी कभी जल-रिक्त नहीं होती और विभिन्न जलधाराओं को समाहित करती है, उसी प्रकार कविता भी कभी शब्द-रिक्त नहीं होती और उसमें अनंत जीवन-छवियाँ समाहित होती रहती हैं।

40. "नदी के पास होना नदी होना है" का क्या तात्पर्य है?

उत्तर: नदी के तट पर एकाग्रचित्त होकर बैठने से मनुष्य अपने संकीर्ण अस्तित्व को भूलकर नदी के निरंतर प्रवाह और उसकी विराटता का अभिन्न अंग बन जाता है।

41. पिकासो और आविन्यों का क्या संबंध है?

उत्तर: विश्वप्रसिद्ध चित्रकार पाब्लो पिकासो ने आविन्यों के कला-परिवेश से प्रेरित होकर अपनी अमर चित्र-कृति 'ल मादामोजेल द आविन्यों' की रचना की थी।

42. आन्द्रे ब्रेताँ, रेने शॉ और पाल एलुआर ने आविन्यों में क्या रचनात्मक कार्य किया था?

उत्तर: इन तीनों प्रख्यात अति-यथार्थवादी कवियों ने आविन्यों में एक साथ रहकर लगभग 30 संयुक्त कविताओं का ऐतिहासिक सृजन किया था।

43. लेखक के अनुसार रचना प्रक्रिया में स्थान और परिवेश की क्या भूमिका होती है?

उत्तर: रचना केवल भाषा का खेल नहीं है; लेखक की प्रतिभा के साथ-साथ एक शांत, सांस्कृतिक और निश्चित भौगोलिक परिवेश मन को एकाग्र कर उत्कृष्ट सृजन को जन्म देता है।

44. "जैसी तुम कविता हो !" — इस संवाद का क्या मर्म है?

उत्तर: नदी और कविता दोनों ही निरंतरता, जीवनदायिनी शक्ति, नश्वरता को अमरत्व प्रदान करने और सबको अपने भीतर समेटने के गुण में एक समान हैं।

45. अशोक वाजपेयी की प्रशासनिक व साहित्यिक पहचान क्या है?

उत्तर: वे भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के वरिष्ठ अधिकारी, महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति तथा हिन्दी के मूर्धन्य कवि, आलोचक व संपादक रहे हैं।

भाग 3: दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (प्रश्न 46 से 50)
46. 'आविन्यों' पाठ का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर: प्रस्तुत पाठ 'आविन्यों' लेखक अशोक वाजपेयी का एक विचारोत्तेजक और सांस्कृतिक यात्रा-संस्मरण है। लेखक पीटर ब्रुक के 'महाभारत' नाटक के मंचन के सिलसिले में दक्षिणी फ्रांस के आविन्यों शहर गए थे। वहाँ उन्होंने रोन नदी के पार स्थित ऐतिहासिक ईसाई मठ 'ला शत्रूज' में 19 दिनों का एकांत प्रवास किया। यह मठ कार्थूसियन संप्रदाय का था, जो मौन साधना के लिए जाना जाता था। उस निपट एकांत और शांत वातावरण में लेखक ने भरपूर रचनात्मक ऊर्जा का अनुभव किया और 35 कविताएँ तथा 27 गद्य रचनाएँ लिखीं। लेखक ने आविन्यों के कला-इतिहास (पिकासो की पेंटिंग, तीन फ्रांसीसी कवियों की संयुक्त कविताएँ), रोन नदी के प्रवाह और मौन पत्थरों की प्रतीक्षा का दार्शनिक विवेचन करते हुए सिद्ध किया कि प्रकृति, नदी और कविता मनुष्य के नश्वर जीवन को अमरता प्रदान करती हैं।

47. 'ला शत्रूज' का वातावरण और लेखक के रचनात्मक प्रवास पर उसका क्या प्रभाव पड़ा? समीक्षा कीजिए।

उत्तर: ला शत्रूज का वातावरण पूरी तरह मौन, शांत, ऐतिहासिक और कलात्मक ऊर्जा से भरा हुआ था। चौदहवीं सदी के इस पुराने मठ को आधुनिक सुविधाओं से युक्त एक ऐसा कला-केंद्र बनाया गया था जहाँ लेखक, नाटककार और संगीतकार बिना किसी सांसारिक व्यवधान के सृजन कर सकें। चारों ओर फैली खामोशी, संतों के प्राचीन कक्ष और सुनसान रातें लेखक के भीतर की संवेदनशीलता को तीव्र कर देती थीं। इस बाह्य मौन ने लेखक के आंतरिक मानस को इतना जाग्रत किया कि वे मात्र 19 दिनों की अल्पावधि में 35 कविताओं और 27 गद्य रचनाओं का विपुल संसार रच सके। यह सिद्ध करता है कि शांत परिवेश रचनात्मकता को नई ऊँचाइयाँ देता है।

48. "नदी और कविता दोनों हमारे जीवन की निरंतरता का प्रतीक हैं" — पाठ के आधार पर इस दार्शनिक विचार की विवेचना कीजिए।

उत्तर: लेखक ने नदी और कविता के बीच अत्यंत सुंदर और गहरा संबंध स्थापित किया है:

  • अक्षय प्रवाह: नदी सदियों से बह रही है और उसमें कभी जल का टोटा नहीं पड़ता; वैसे ही कविता भी युगों-युगों से प्रवाहित है और कभी शब्द-रिक्त या भाव-शून्य नहीं होती।
  • समावेशी प्रकृति: नदी में विभिन्न स्रोत और जलधाराएँ आकर मिलती हैं; कविता में भी नाना प्रकार के जीवन-अनुभव, बिंब और संवेदनाएँ एकाकार होती हैं।
  • अमृतत्व का अभिषेक: जिस प्रकार नदी में जाने पर मनुष्य उसकी बिरादरी का हिस्सा बन जाता है, उसी प्रकार कविता में डूबने से व्यक्ति का संकीर्ण अहंकार मिट जाता है और वह विराट जीवन-चेतना से जुड़ जाता है। दोनों मनुष्य की नश्वरता का अनंत से अभिषेक करती हैं।

49. 'आविन्यों' शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: 'आविन्यों' शीर्षक सर्वथा उपयुक्त और सार्थक है क्योंकि संपूर्ण निबंध इसी प्राचीन फ्रांसीसी शहर के भूगोल, इतिहास, संस्कृति और कला-चेतना के इर्द-गिर्द घूमता है। आविन्यों केवल एक शहर नहीं, बल्कि कला, रंगमंच, मौन, नदी (रोन) और रचनात्मक साधना का वैश्विक केंद्र है। लेखक के संस्मरण, विचार और कविताएँ सब इसी भूमि की प्रेरणा से प्रस्फुटित हुए हैं। यह शीर्षक पाठक को एक नए सांस्कृतिक भूगोल से परिचित कराता है और लेखक की रचना-प्रक्रिया के मूल स्रोत को उजागर करता है।

50. निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए:
"नदी के समान ही कविता सदियों से हमारे साथ रही है। उसमें न जाने कहाँ-कहाँ से जल आकर मिलते और विलीन होते रहते हैं... जैसे नदी जल-रिक्त नहीं होती, वैसे ही कविता शब्द-रिक्त नहीं होती। न नदी के किनारे, न ही कविता के पास हम तटस्थ रह पाते हैं। अगर हम खुलेपन से गए हैं तो हम उसकी अभिभूति से बच नहीं सकते।"

उत्तर:

  • प्रसंग: प्रस्तुत गद्यांश वरिष्ठ कवि व लेखक अशोक वाजपेयी द्वारा रचित संस्मरण 'आविन्यों' के उप-अध्याय 'नदी के किनारे भी नदी है' से उद्धृत है।
  • व्याख्या: लेखक कहते हैं कि मानवीय संस्कृति की यात्रा में नदी और कविता दोनों का साथ शाश्वत रहा है। जिस प्रकार संसार के अनेक स्रोतों से जल लेकर नदी निरंतर बहती है और कभी सूखती नहीं, उसी प्रकार संपूर्ण मानव जीवन के सुख-दुख, आशा-निराशा और अनुभूतियों को समेटकर कविता भी कभी रिक्त नहीं होती। नदी के किनारे जाने पर जिस प्रकार उसकी शीतलता हमें भिगो देती है, उसी प्रकार यदि हम खुले और संवेदनशील मन से कविता के निकट जाएँ, तो उसकी भावात्मक अनुभूति हमारे अंतःकरण को गहराई से छू लेती है। नदी और कविता दोनों ही मनुष्य को संवेदनशीलता और जीवन का व्यापक अर्थ प्रदान करती हैं।

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