पाठ 1: श्रम विभाजन और जाति प्रथा
बिहार बोर्ड (BSEB) कक्षा 10वीं हिंदी (गोधूलि भाग-2, गद्य खंड) | सम्पूर्ण नोट्स
1. पाठ का संक्षिप्त परिचय (Overview)
- पाठ का नाम: श्रम विभाजन और जाति प्रथा
- विधा: भाषण / निबंध
- लेखक: बाबा साहेब डॉ० भीमराव आंबेडकर
- अनुवादक: ललई सिंह यादव (हिंदी रूपांतर: 'जाति-भेद का उच्छेद')
- मूल भाषण: 'एनीहिलेशन ऑफ कास्ट' (Annihilation of Caste)
- मूल भाव: भारतीय समाज में श्रम विभाजन के नाम पर मध्ययुगीन जाति प्रथा के दोषों, ऊँच-नीच के अस्वाभाविक विभाजन, आर्थिक हानि तथा बेरोजगारी की समस्या का विश्लेषण। लेखक स्वतंत्रता, समता और भ्रातृत्व (भाईचारे) पर आधारित एक गतिशील आदर्श लोकतांत्रिक समाज की स्थापना पर बल देते हैं।
2. लेखक परिचय (डॉ० भीमराव आंबेडकर)
- जन्म: 14 अप्रैल 1891 ई० को महू (मध्य प्रदेश) के एक दलित परिवार में।
- उच्च शिक्षा: प्राथमिक शिक्षा के बाद बड़ौदा नरेश के प्रोत्साहन पर उच्चतर शिक्षा के लिए न्यूयॉर्क (अमेरिका) तथा बाद में लंदन (इंग्लैंड) गए।
- व्यक्तित्व: वे इतिहास-मीमांसक, विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, समाजशास्त्री, शिक्षाविद् तथा धर्म-दर्शन के व्याख्याता थे।
- चिंतन के तीन प्रेरक व्यक्ति: बुद्ध, कबीर और ज्योतिबा फुले।
- विशेष पहचान: भारतीय संविधान के निर्माता (प्रारूप समिति के अध्यक्ष)।
- निधन: दिसंबर 1956 ई० में दिल्ली में।
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प्रमुख अंग्रेजी रचनाएँ एवं भाषण:
- 'द कास्ट्स इन इंडिया : देयर मैकेनिज्म'
- 'जेनेसिस एंड डेवलपमेंट'
- 'द अनटचेबल्स, हू आर दे'
- 'हू आर शूद्राज'
- 'बुद्धिज्म एंड कम्युनिज्म'
- 'बुद्धा एंड हिज धम्मा'
- 'थाट्स ऑन लिंग्विस्टिक स्टेट्स'
- 'द राइज एंड फॉल ऑफ द हिन्दू वीमेन'
- 'एनीहिलेशन ऑफ कास्ट'
- समग्र साहित्य: भारत सरकार के कल्याण मंत्रालय द्वारा 'बाबा साहेब आंबेडकर संपूर्ण वाङ्मय' नाम से 21 खंडों में प्रकाशित।
- भाषण की पृष्ठभूमि: यह भाषण सन् 1936 ई० में 'जाति-पाँति तोड़क मंडल' (लाहौर) के वार्षिक सम्मेलन के अध्यक्षीय भाषण के रूप में तैयार किया गया था, परंतु क्रांतिकारिता के कारण सम्मेलन स्थगित हो गया और बाद में इसे स्वतंत्र पुस्तिका का रूप दिया गया।
3. पाठ का विस्तृत सारांश एवं मुख्य बिंदु (Detailed Summary)
1. विडंबना और जातिवाद के पोषक:
- आज के युग में भी 'जातिवाद' के पोषकों की कमी नहीं होना एक बड़ी विडंबना है।
- पोषकों का तर्क है कि आधुनिक सभ्य समाज 'कार्यकुशलता' के लिए श्रम विभाजन को आवश्यक मानता है और जाति प्रथा भी श्रम विभाजन का ही दूसरा रूप है।
- लेखक का आक्षेप: जाति प्रथा केवल श्रम का विभाजन ही नहीं करती, बल्कि श्रमिकों का भी अस्वाभाविक विभाजन करती है तथा समाज को एक-दूसरे के प्रति ऊँच-नीच के वर्गों में बाँट देती है, जो विश्व के किसी अन्य समाज में नहीं पाया जाता।
2. जाति प्रथा के प्रमुख दोष:
- व्यक्तिगत रुचि का अभाव: जाति प्रथा में मनुष्य के पेशे का निर्धारण उसकी योग्यता, रुचि या प्रशिक्षण के आधार पर नहीं, बल्कि उसके माता-पिता के सामाजिक स्तर (गर्भधारण के समय से ही) के अनुसार कर दिया जाता है।
- बेरोजगारी का प्रमुख कारण: उद्योग-धंधों की तकनीक में निरंतर परिवर्तन होने पर यदि मनुष्य को अपना पेशा बदलने की स्वतंत्रता न हो, तो उसके सामने भुखमरी की नौबत आ जाती है। हिंदू धर्म की जाति प्रथा पैतृक पेशा न होने पर नया पेशा चुनने की अनुमति नहीं देती, जिसके कारण यह बेरोजगारी का एक प्रमुख व प्रत्यक्ष कारण बनी हुई है।
- आर्थिक पहलू से हानिकारक: स्वेच्छा और रुचि के अभाव में मनुष्य काम में दिल और दिमाग नहीं लगा पाता, जिससे वह टालू काम करने और कम काम करने के लिए विवश होता है।
3. लेखक की दृष्टि में 'आदर्श समाज':
- लेखक के अनुसार आदर्श समाज स्वतंत्रता, समता और भ्रातृत्व (भाईचारे) पर आधारित होना चाहिए।
- समाज में इतनी गतिशीलता होनी चाहिए कि कोई भी वांछित परिवर्तन समाज के एक छोर से दूसरे छोर तक आसानी से पहुँच सके।
- भाईचारे का वास्तविक रूप: भाईचारा दूध और पानी के मिश्रण की तरह होना चाहिए, जिसमें सब घुल-मिलकर रहें।
- सच्चा लोकतंत्र: लोकतंत्र केवल शासन की एक पद्धति नहीं है, बल्कि यह मूलतः सामूहिक जीवनचर्या की एक रीति और समाज के सम्मिलित अनुभवों के आदान-प्रदान का नाम है, जिसमें साथियों के प्रति श्रद्धा और सम्मान का भाव हो।
4. परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Important One-Liners)
- 'श्रम विभाजन और जाति प्रथा' के लेखक कौन हैं — बाबा साहेब डॉ० भीमराव आंबेडकर।
- भीमराव आंबेडकर का जन्म कब और कहाँ हुआ — 14 अप्रैल 1891 ई० को महू (मध्य प्रदेश) में।
- आंबेडकर जी के उच्चतर शिक्षा हेतु किसने प्रोत्साहन दिया — बड़ौदा नरेश ने।
- आंबेडकर जी के चिंतन और रचनात्मकता के मुख्य तीन प्रेरक व्यक्ति कौन थे — बुद्ध, कबीर और ज्योतिबा फुले।
- आंबेडकर जी का निधन कब और कहाँ हुआ — दिसंबर 1956 ई० में दिल्ली में।
- 'एनीहिलेशन ऑफ कास्ट' का हिंदी रूपांतरण किसने किया — ललई सिंह यादव ने ('जाति-भेद का उच्छेद' नाम से)।
- यह भाषण किस सम्मेलन के लिए तैयार किया गया था — 'जाति-पाँति तोड़क मंडल' (लाहौर) के वार्षिक सम्मेलन (1936 ई०) के लिए।
- आंबेडकर जी का संपूर्ण वाङ्मय कितने खंडों में प्रकाशित है — 21 खंडों में।
- भारतीय संविधान के निर्माता किन्हें कहा जाता है — डॉ० भीमराव आंबेडकर को।
- जाति प्रथा भारत में किस समस्या का एक प्रमुख और प्रत्यक्ष कारण बनी हुई है — बेरोजगारी की समस्या का।
- आधुनिक सभ्य समाज कार्यकुशलता के लिए किसे आवश्यक मानता है — श्रम विभाजन को।
- जाति प्रथा किस आधार पर मनुष्य का पेशा तय करती है — माता-पिता के सामाजिक स्तर पर (गर्भधारण के समय से)।
- लेखक के अनुसार आदर्श समाज किन तीन तत्वों पर आधारित होना चाहिए — स्वतंत्रता, समता और भ्रातृत्व (भाईचारा)।
- लेखक ने सच्चे भाईचारे की तुलना किससे की है — दूध और पानी के मिश्रण से।
- 'लोकतंत्र मूलतः सामूहिक जीवनचर्या की एक रीति और समाज के सम्मिलित अनुभवों के आदान-प्रदान का नाम है' — यह परिभाषा किसने दी — डॉ० भीमराव आंबेडकर ने।
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