Chapter 7. परम्परा का मूल्यांकन | BSEB 10 Hindi Subjective


बिहार बोर्ड कक्षा 10 हिन्दी (गद्य खंड) | पाठ 7: "परम्परा का मूल्यांकन" — डॉ० रामविलास शर्मा
सम्पूर्ण 50 महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ, लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

भाग 1: एक-पंक्ति / अति-लघु उत्तरीय प्रश्न (प्रश्न 1 से 30)
1. 'परम्परा का मूल्यांकन' निबंध के लेखक कौन हैं?

उत्तर: डॉ० रामविलास शर्मा।

2. डॉ० रामविलास शर्मा का जन्म कब हुआ था?

उत्तर: 10 अक्टूबर 1912 ई० में।

3. डॉ० रामविलास शर्मा का जन्म कहाँ हुआ था?

उत्तर: उच्चगाँव सानी (उन्नाव जिला, उत्तर प्रदेश) में।

4. डॉ० रामविलास शर्मा ने अंग्रेजी साहित्य में एम० ए० किस विश्वविद्यालय से किया?

उत्तर: लखनऊ विश्वविद्यालय से (1934 ई० में)।

5. डॉ० रामविलास शर्मा 1949 से 1953 ई० तक किस संस्था के महामंत्री रहे?

उत्तर: भारतीय प्रगतिशील लेखक संघ के।

6. डॉ० रामविलास शर्मा का निधन कब और कहाँ हुआ?

उत्तर: 30 मई 2000 ई० को दिल्ली में।

7. डॉ० रामविलास शर्मा को किस पुस्तक पर 'साहित्य अकादमी पुरस्कार' मिला?

उत्तर: 'निराला की साहित्य साधना' पर।

8. लेखक की अन्य प्रमुख आलोचनात्मक कृतियाँ कौन-सी हैं?

उत्तर: 'आचार्य रामचंद्र शुक्ल और हिंदी आलोचना', 'भारतेन्दु हरिश्चंद्र', 'प्रेमचंद और उनका युग', 'भाषा और समाज' और 'महावीर प्रसाद द्विवेदी और हिंदी नवजागरण'।

9. प्रस्तुत पाठ 'परम्परा का मूल्यांकन' लेखक की किस पुस्तक से संकलित है?

उत्तर: 'परम्परा का मूल्यांकन' नामक पुस्तक से।

10. साहित्य की परम्परा का ज्ञान किनके लिए सबसे अधिक आवश्यक है?

उत्तर: जो लोग साहित्य में युग-परिवर्तन करना चाहते हैं, जो लकीर के फकीर नहीं हैं और रूढ़ियाँ तोड़कर क्रांतिकारी साहित्य रचना चाहते हैं।

11. जो लोग समाज में बुनियादी परिवर्तन करके वर्गहीन शोषणमुक्त समाज की रचना करना चाहते हैं, वे अपने सिद्धांतों को क्या कहते हैं?

उत्तर: ऐतिहासिक भौतिकवाद।

12. जो महत्व ऐतिहासिक भौतिकवाद के लिए इतिहास का है, वही आलोचना के लिए किसका है?

उत्तर: साहित्य की परम्परा का।

13. साहित्य की परम्परा के ज्ञान से किसका विकास होता है?

उत्तर: प्रगतिशील आलोचना का।

14. साहित्य की परम्परा का मूल्यांकन करते हुए सबसे पहले किस साहित्य का मूल्य निर्धारित किया जाता है?

उत्तर: जो शोषक वर्गों के विरुद्ध श्रमिक जनता के हितों को प्रतिबिंबित करता है।

15. साहित्य किस प्रकार स्वाधीन होता है?

उत्तर: सापेक्ष रूप में।

16. गुलामी अमेरिका में भी थी और एथेंस में भी, किंतु किस सभ्यता ने सारे यूरोप को प्रभावित किया?

उत्तर: एथेंस की सभ्यता ने।

17. सामंती दुनिया में महान कविता के दो प्रमुख केंद्र कौन-से थे?

उत्तर: भारत और ईरान।

18. रैफेल, लेओनार्दो दा विंची और माइकेल एंजेलो किस देश की देन हैं?

उत्तर: इटली की।

19. लैटिन कवि वर्जिल पर किस अंग्रेज कवि ने कविता लिखी थी?

उत्तर: कवि टेनीसन ने।

20. किसका वैभव समाप्त हो गया, किंतु वर्जिल के काव्य-सागर की ध्वनि-तरंगें आज भी आनंदित करती हैं?

उत्तर: रोमन साम्राज्य का वैभव।

21. यूरोप के सांस्कृतिक विकास में किस प्राचीन जाति की विशेष भूमिका रही है?

उत्तर: प्राचीन यूनानियों (ग्रीस) की।

22. 19वीं सदी में किन कवियों ने यूनानियों की स्वाधीनता के लिए बड़ा परिश्रम किया?

उत्तर: शेली और बायरन ने।

23. जब तक पूर्वी और पश्चिमी बंगाल के लोगों को किसका ज्ञान रहेगा, तब तक वे अविभाजित रहेंगे?

उत्तर: अपनी साहित्यिक परम्परा का ज्ञान।

24. हिटलर ने किस देश पर आक्रमण किया था जिसके बाद वहाँ राष्ट्रीय अस्मिता जाग्रत हुई?

उत्तर: सोवियत संघ (रूस) पर।

25. जारशाही रूस के कौन-से साहित्यकार सोवियत समाज में अत्यंत लोकप्रिय रहे?

उत्तर: टॉलस्टॉय (लियो टॉल्स्टॉय)।

26. सोवियत संघ में रूसी क्रांति किस वर्ष हुई थी?

उत्तर: 1917 ई० की क्रांति।

27. भारतीय संस्कृति से किन दो महाकाव्यों को अलग करने पर भारतीय साहित्य की आंतरिक एकता टूट जाएगी?

उत्तर: 'रामायण' और 'महाभारत' को।

28. बहुजातीय राष्ट्र की हैसियत से इतिहास के मामले में संसार का कोई भी देश किसका मुकाबला नहीं कर सकता?

उत्तर: भारत का।

29. भारत की राष्ट्रीय क्षमता का पूर्ण विकास किस व्यवस्था में ही संभव है?

उत्तर: समाजवादी व्यवस्था में।

30. तमिलनाडु के लोग किसकी रचनाएँ मूल भाषा में पढ़ेंगे और उत्तर भारत के लोग किसकी?

उत्तर: तमिलनाडु के लोग रवीन्द्रनाथ की तथा उत्तर भारत के लोग सुब्रह्मण्य भारती की।

भाग 2: लघु उत्तरीय प्रश्न (प्रश्न 31 से 45)
31. परम्परा का ज्ञान किनके लिए आवश्यक है और क्यों?

उत्तर: जो साहित्यकार रूढ़ियों को तोड़कर क्रांतिकारी साहित्य रचना चाहते हैं और समाज में युग-परिवर्तन के आकांक्षी हैं, उनके लिए परम्परा का ज्ञान अनिवार्य है ताकि वे पूर्ववर्ती ज्ञान के आधार पर नए प्रतिमान गढ़ सकें।

32. साहित्य की परम्परा और ऐतिहासिक भौतिकवाद में क्या समानता है?

उत्तर: जिस प्रकार समाज को समझने और वर्गहीन समाज बनाने के लिए ऐतिहासिक भौतिकवाद को इतिहास के ज्ञान की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार साहित्य के विकास और प्रगतिशील आलोचना के लिए साहित्य की परम्परा का ज्ञान आवश्यक है।

33. "साहित्य सापेक्ष रूप से स्वाधीन होता है" — इस कथन का क्या आशय है?

उत्तर: साहित्य केवल आर्थिक परिस्थितियों या भौतिक साधनों का प्रतिबिंब नहीं होता; मनुष्य की चेतना और भावनाएँ आर्थिक बंधनों से परे स्वतंत्र निर्णय लेती हैं, जिससे साहित्य में एक सापेक्ष स्वाधीनता बनी रहती है।

34. औद्योगिक उत्पादन और कलात्मक उत्पादन में क्या अंतर है?

उत्तर: औद्योगिक उत्पादन (जैसे मशीनें या एटम बम) की हूबहू नकल या पुनर्निर्माण संभव है, किंतु कलात्मक उत्पादन (जैसे शेक्सपियर के नाटक या कालिदास का काव्य) अद्वितीय होता है और उसकी पुनरावृत्ति असंभव है।

35. एथेंस और अमेरिका की गुलामी की तुलना लेखक ने किस प्रकार की है?

उत्तर: अमेरिका के गुलाम-मालिकों ने विश्व संस्कृति को कुछ नहीं दिया, जबकि प्राचीन एथेंस (यूनान) की दास-व्यवस्था के बावजूद वहाँ का साहित्य और कला समूचे यूरोप की संस्कृति का स्थायी आधार बने।

36. सामंतवाद के संदर्भ में भारत और ईरान का क्या महत्व है?

उत्तर: जब दुनिया भर में सामंतवाद कायम था, तब महान कविता के केवल दो ही वैश्विक केंद्र थे—भारत और ईरान, जहाँ सामंती काल में भी अमर और लोकोन्मुख काव्य रचा गया।

37. व्यक्ति पूजा और साहित्य के मूल्यों में क्या अंतर है?

उत्तर: राजनीतिक मूल्य और साम्राज्य समय के साथ नष्ट हो जाते हैं (जैसे ब्रिटिश या रोमन साम्राज्य), किंतु शेक्सपियर, मिल्टन, वर्जिल और कालिदास के साहित्यिक मूल्य युगों-युगों तक शाश्वत प्रकाश बिखेरते रहते हैं।

38. राष्ट्रीय अस्मिता के निर्माण में साहित्य की क्या भूमिका होती है?

उत्तर: जब किसी राष्ट्र पर संकट आता है (जैसे सोवियत संघ पर हिटलर का आक्रमण), तब साहित्य और सांस्कृतिक परम्परा ही जनता को एकजुट कर स्वाधीनता संग्राम की सबसे बड़ी प्रेरक शक्ति बनती है।

39. विभाजित बंगाल और विभाजित पंजाब के संदर्भ में लेखक ने क्या तर्क दिया है?

उत्तर: बंगाल भौगोलिक रूप से बँटकर भी अपनी साझी साहित्यिक परम्परा (रवीन्द्रनाथ, नजरुल) के कारण सांस्कृतिक रूप से एक है, जबकि पंजाब में साहित्य की परम्परा का ज्ञान कम होने से यह एकात्मता कमजोर पड़ी।

40. रामायण और महाभारत का भारतीय संस्कृति की एकता में क्या योगदान है?

उत्तर: वाल्मीकि और व्यास द्वारा रचित ये दोनों महाकाव्य भारत की बहुजातीय और बहुभाषी अस्मिता को एक सूत्र में पिरोते हैं; इनके बिना भारतीय साहित्य की आंतरिक एकता बिखर जाएगी।

41. समाजवादी व्यवस्था में साहित्य की परम्परा का पूर्ण विकास कैसे संभव है?

उत्तर: समाजवाद पुरानी संस्कृति को नष्ट नहीं करता बल्कि आत्मसात करता है। जब करोड़ों निर्धन और निरक्षर लोग साक्षर होंगे, तो वे वाल्मीकि, व्यास, कालिदास और टैगोर के नए पाठक बनकर संस्कृति को समृद्ध करेंगे।

42. भारत में राष्ट्रीयता का विकास यूरोप से किस प्रकार भिन्न है?

उत्तर: यूरोप में राष्ट्रीयता अक्सर युद्धों और एक जाति द्वारा दूसरी जाति पर प्रभुत्व से बनी, जबकि भारत में राष्ट्रीयता किसी राजनीतिक दमन से नहीं बल्कि साझा इतिहास, संस्कृति और कवियों की वाणी से स्वतः विकसित हुई।

43. लेखक के अनुसार 'साहित्य की नकल करना' किस बात का सूचक है?

उत्तर: जो साहित्य दूसरों की अंधी नकल करके रचा जाता है, वह अधम (निम्न) कोटि का होता है और रचनाकार की सांस्कृतिक असमर्थता व मौलिकता के अभाव का प्रमाण होता है।

44. डॉ० रामविलास शर्मा की आलोचना दृष्टि की मुख्य विशेषता क्या है?

उत्तर: वे प्रगतिवादी (मार्क्सवादी) चेतना और राष्ट्रप्रेम के समन्वयकारी आलोचक हैं, जिन्होंने भाषाविज्ञान और हिन्दी आलोचना को वैज्ञानिक, तथ्यपरक और पारदर्शी दृष्टि प्रदान की।

45. "कला का पूर्णतः निर्दोष होना भी एक दोष है" — इसका क्या अभिप्राय है?

उत्तर: यदि कला पूरी तरह नियमों में बंधकर निर्दोष बन जाए तो वह निर्जीव और यांत्रिक हो जाती है; महान कलाकारों की कृतियों में कुछ कमियाँ रहने पर ही आगे के कलाकारों के लिए नया रचने की गुंजाइश बनी रहती है।

भाग 3: दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (प्रश्न 46 से 50)
46. 'परम्परा का मूल्यांकन' निबंध का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर: प्रस्तुत निबंध में डॉ० रामविलास शर्मा ने समाज, संस्कृति और साहित्य के विकास में परम्परा के महत्व का सांगोपांग विवेचन किया है। लेखक स्पष्ट करते हैं कि जो रचनाकार समाज में क्रांतिकारी परिवर्तन लाना चाहते हैं, उनके लिए परम्परा का ज्ञान सबसे अधिक आवश्यक है। साहित्य केवल आर्थिक परिस्थितियों का यांत्रिक प्रतिबिंब नहीं होता, बल्कि वह अपनी सापेक्ष स्वाधीनता बनाए रखता है। भौतिक साम्राज्य (जैसे रोमन या ब्रिटिश) नष्ट हो जाते हैं, किंतु वर्जिल, शेक्सपियर, वाल्मीकि और कालिदास का साहित्य अमर रहता है। भारत जैसे बहुजातीय देश में 'रामायण' और 'महाभारत' राष्ट्रीय एकता के प्राण हैं। लेखक का मानना है कि पूँजीवाद की तुलना में समाजवादी व्यवस्था में ही जनता के साक्षर होने पर साहित्य की परम्परा का पूर्ण, बहुआयामी और वैश्विक विकास संभव है।

47. "साहित्य विचारधारा मात्र नहीं है, वह मनुष्य के संपूर्ण जीवन से संबद्ध है" — निबंध के आलोक में इस कथन की समीक्षा कीजिए।

उत्तर: डॉ० शर्मा मार्क्सवादी होते हुए भी इस संकीर्ण सोच का खंडन करते हैं कि साहित्य केवल आर्थिक वर्ग-हित या राजनीतिक विचारधारा का औजार है। वे तर्क देते हैं कि आर्थिक जीवन के अलावा मनुष्य एक संवेदनशील प्राणी के रूप में भी जीता है। साहित्य में मनुष्य का इंद्रिय-बोध, उसकी कोमल आदिम भावनाएँ, प्रेम, करुणा और प्रकृति से उसका शाश्वत नाता प्रतिफलित होता है। यही कारण है कि समाज में दास-प्रथा या सामंतवाद समाप्त हो जाने पर भी उस युग में रचा गया वाल्मीकि, होमर या कालिदास का साहित्य आज भी हमें उतना ही भाव-विभोर और आनंदित करता है। अतः साहित्य का मानवीय और संवेदनात्मक पक्ष विचारधारा से कहीं अधिक व्यापक और स्थायी होता है।

48. भारत की बहुजातीय राष्ट्रीयता और सांस्कृतिक एकता के निर्माण में कवियों (व्यास और वाल्मीकि) की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।

उत्तर: लेखक के अनुसार भारत संसार का सबसे अनूठा बहुजातीय और बहुभाषी राष्ट्र है। यहाँ की राष्ट्रीयता किसी एक जाति द्वारा दूसरी जातियों पर सैनिक या राजनीतिक प्रभुत्व कायम करके नहीं बनाई गई, बल्कि यह इतिहास और सांस्कृतिक परम्परा की देन है। इस साझी संस्कृति के निर्माण में महाकवि व्यास (महाभारत) और वाल्मीकि (रामायण) की भूमिका निर्णायक रही है। उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक भारत की सभी भाषाओं का साहित्य इन्हीं दो महाकाव्यों से जीवन-रस प्राप्त करता है। यदि भारतीय संस्कृति से रामायण और महाभारत को अलग कर दिया जाए, तो संपूर्ण देश की आंतरिक भावात्मक एकता छिन्न-भिन्न हो जाएगी।

49. 'परम्परा का मूल्यांकन' शीर्षक की सार्थकता प्रमाणित कीजिए।

उत्तर: प्रस्तुत निबंध का शीर्षक 'परम्परा का मूल्यांकन' सर्वथा सटीक, गंभीर और विचारोत्तेजक है। 'मूल्यांकन' का अर्थ है गुण-दोषों के आधार पर किसी वस्तु का वास्तविक मूल्य तय करना। निबंध में लेखक ने परम्परा को न तो आँख मूँदकर स्वीकार किया है और न ही उसे पुरानी कहकर पूरी तरह नकारा है। उन्होंने शोषक वर्ग की जड़ रूढ़ियों का विरोध करते हुए श्रमजीवी जनता के हितैषी और सौंदर्यपरक साहित्य को सहेजने पर बल दिया है। वे परम्परा को आधुनिक प्रगतिशील साहित्य और समाजवाद के निर्माण की अनिवार्य आधारशिला सिद्ध करते हैं। अतः यह शीर्षक निबंध के केंद्रीय भाव को पूरी प्रामाणिकता के साथ व्यक्त करता है।

50. निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए:
"राजनीतिक मूल्यों की अपेक्षा साहित्य के मूल्य अधिक स्थायी हैं। अंग्रेज कवि टेनीसन ने लैटिन कवि वर्जिल पर एक बड़ी अच्छी कविता लिखी थी। इसमें उन्होंने कहा है कि रोमन साम्राज्य का वैभव समाप्त हो गया पर वर्जिल के काव्य-सागर की ध्वनि-तरंगें हमें आज भी सुनाई देती हैं और हृदय को आनन्द-विह्वल कर देती हैं।"

उत्तर:

  • प्रसंग: प्रस्तुत गद्यांश प्रख्यात प्रगतिशील आलोचक डॉ० रामविलास शर्मा द्वारा रचित वैचारिक निबंध 'परम्परा का मूल्यांकन' से उद्धृत है।
  • व्याख्या: लेखक राजनीति और साहित्य के मूल्यों की तुलना करते हुए स्पष्ट करते हैं कि भौतिक सत्ता, राजनैतिक शक्ति और विशाल साम्राज्य नश्वर होते हैं, किंतु महान साहित्यकार की कला शाश्वत और अमर होती है। उदाहरण देते हुए वे कहते हैं कि प्राचीन रोमन साम्राज्य का अपार सैनिक बल, धन-दौलत और वैभव आज इतिहास के पन्नों में दफन हो चुका है, किंतु उसी काल के महाकवि वर्जिल की काव्यात्मक रचनाएँ आज सदियों बाद भी जीवित हैं और पाठकों के हृदय को अपार आनंद से सराबोर कर देती हैं। इसी प्रकार जब ब्रिटिश साम्राज्य का नामलेवा भी नहीं बचेगा, तब भी शेक्सपियर और मिल्टन का साहित्य विश्व संस्कृति के आकाश में जगमगाता रहेगा। यह साहित्य की अमिट शक्ति का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

0 Comments