Chapter 5. धरती कब तक घूमेगी | BSEB 10 Hindi Subjective


बिहार बोर्ड (BSEB) कक्षा 10वीं हिंदी (वर्णिका भाग-2)

अध्याय 5 : धरती कब तक घूमेगी | लेखक : साँवर दइया

संपूर्ण 50 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर (वस्तुनिष्ठ, लघु एवं दीर्घ उत्तरीय)

एक पंक्ति वाले प्रश्न-उत्तर (One-Liner Q&A : 1 से 20)
1. 'धरती कब तक घूमेगी' पाठ के लेखक कौन हैं?

उत्तर: साँवर दइया।

2. साँवर दइया किस भाषा के प्रमुख कहानीकार हैं?

उत्तर: राजस्थानी भाषा के।

3. प्रस्तुत कहानी 'धरती कब तक घूमेगी' का हिंदी अनुवाद किसने किया है?

उत्तर: स्वयं कहानीकार (साँवर दइया) ने।

4. कहानी की मुख्य पात्र (नायिका) कौन है?

उत्तर: सीता।

5. सीता के कितने बेटे थे?

उत्तर: तीन बेटे (कैलास, नारायण और बिज्जू)।

6. सीता के सबसे बड़े बेटे का नाम क्या था?

उत्तर: कैलास।

7. सीता के मंझले बेटे का नाम क्या था?

उत्तर: नारायण।

8. सीता के सबसे छोटे बेटे का नाम क्या था?

उत्तर: बिज्जू।

9. कैलास की पत्नी का नाम क्या था?

उत्तर: राधा।

10. नारायण की पत्नी का नाम क्या था?

उत्तर: भँवरी।

11. बिज्जू की पत्नी का नाम क्या था?

उत्तर: पुष्पा।

12. सीता क्या देखकर रुआँसी हो गई थी?

उत्तर: अपना काला ‘ओढ़ना’ देखकर।

13. होली के दिन कैलास की पत्नी राधा ने क्या बनाया था?

उत्तर: दाल का हलुआ।

14. नारायण की पत्नी भँवरी ने अपने लड़के के जन्मदिन पर सीता को क्या भेजा था?

उत्तर: कटोरी में रसमलाई।

15. रसमलाई भेजने पर किस बहू ने ताना मारा था?

उत्तर: बिज्जू की पत्नी पुष्पा ने।

16. बच्चे शाम के समय सरालगियों के पाटे पर कौन-सा खेल खेलते थे?

उत्तर: ‘माई-माई रोटी दे’ वाला खेल।

17. शुरुआत में बेटों ने माँ के भरण-पोषण के लिए क्या नियम तय किया?

उत्तर: तीनों बेटे बारी-बारी से एक-एक महीने माँ को अपने पास रखेंगे।

18. अंत में बेटों ने माँ को प्रति माह कितने-कितने रुपये देने का फैसला किया?

उत्तर: पचास-पचास (₹50-₹50) रुपये।

19. तीनों बेटों से सीता को हर महीने कुल कितने रुपये मिलते?

उत्तर: डेढ़ सौ (₹150) रुपये।

20. सीता ने अंततः घर छोड़ने का फैसला कब और कैसे किया?

उत्तर: अपने दो-चार कपड़ों (पूर-पल्लों) की गठरी बाँधी और अंधेरे-अंधेरे ही घर से निकल गई।

लघु उत्तरीय प्रश्न-उत्तर (Short Answer Q&A : 21 से 40)
21. सीता अपने ही घर में घुटन क्यों महसूस करती थी?

उत्तर: भरा-पूरा परिवार होने के बावजूद बेटों और बहुओं में अपनत्व नहीं था। उसे दो वक्त की रोटी के लिए उपेक्षा और तिरस्कार सहना पड़ता था, जिससे उसका दम घुटता था।

22. सीता को अपने पति के जीवित रहने के दिनों की याद क्यों आती है?

उत्तर: जब उसके पति जीवित थे, तब घर में सुख, शांति और अपनापन था। बच्चों की किलकारियाँ संगीत जैसी लगती थीं और उसे रोटी के लिए किसी के सामने मोहताज नहीं होना पड़ता था।

23. कैलास ने अपने भाइयों को बुलाकर माँ के विषय में क्या कहा?

उत्तर: कैलास ने कहा कि माँ को अकेले रखने का ठेका सिर्फ उसी ने नहीं लिया है, सबने घर से हिस्सा लिया है इसलिए सबका बराबर फर्ज बनता है।

24. सीता के भरण-पोषण को लेकर पहली पंचायत में क्या निर्णय लिया गया?

उत्तर: यह निर्णय लिया गया कि तीनों बेटे माँ को बारी-बारी से एक-एक महीना अपने साथ रखेंगे और भोजन कराएंगे।

25. इस फैसले पर सीता की क्या मानसिक दशा थी?

उत्तर: सीता मूक और स्तब्ध (अर्द्धविक्षिप्त-सी) खड़ी रही। किसी ने भी उसकी इच्छा जानने की कोशिश नहीं की और उसे लगा कि वह बेटों के बीच एक बोझ बन गई है।

26. होली के अवसर पर राधा ने सीता के लिए क्या बनाया और सीता को कैसा महसूस हुआ?

उत्तर: राधा ने दाल का हलुआ बनाया था। दाल भुनती देखकर सीता को ऐसा लगा मानो वह स्वयं तवे पर भुनी जा रही हो।

27. सीता बच्चों के ‘माई-माई रोटी दे’ खेल से अपनी तुलना क्यों करती है?

उत्तर: खेल में जब भिखारिन रोटी माँगती है तो कहा जाता है 'यह घर छोड़, दूसरे घर जा'। सीता को भी महीना पूरा होते ही अगला घर पकड़ने का आदेश मिलता था।

28. रसमलाई को लेकर भँवरी और पुष्पा के बीच क्या विवाद हुआ?

उत्तर: भँवरी ने बेटे के जन्मदिन पर सीता को रसमलाई भेजी, तो पुष्पा ने ताना मारा कि जब सीता उनके हिस्से में थी तब रूखी रोटी खिलाई और अब रईसी दिखाई जा रही है।

29. राधा की बीमारी के दौरान सीता ने क्या किया और उस पर भँवरी ने क्या प्रतिक्रिया दी?

उत्तर: राधा के बीमार होने पर सीता ने उसके बच्चों के लिए रोटियाँ बनाईं। इस पर भँवरी ने जहरबुझे बोल बोले कि "रोटी तो मेरे यहाँ खाती हैं और गुलामी तुम्हारी करती हैं"।

30. बहुओं के झगड़ों के बीच सीता की स्थिति कैसी हो जाती थी?

उत्तर: लड़ाई बहुओं की होती थी लेकिन ताने सीता को दिए जाते थे। वह रोती और सोचती कि मौत भी उसके हाथ में नहीं है, जितनी साँसें लिखी हैं भुगतनी ही पड़ेंगी।

31. "सीता को महसूस होने लगा कि आकाश अनंत नहीं है, धरती सिकुड़ गई है"—इसका क्या भाव है?

उत्तर: इसका अर्थ है कि इस विशाल संसार और भरे-पूरे परिवार में भी एक बूढ़ी माँ के लिए सिर छिपाने और शांति से रहने भर की जगह नहीं बची थी।

32. कैलास ने अंत में पचास-पचास रुपये देने की नई योजना क्यों रखी?

उत्तर: कैलास ने कहा कि माँ का हर महीने इधर-उधर लुढ़कना अच्छा नहीं लगता, इसलिए तीनों बेटे ₹50-₹50 दे दें ताकि वह अपनी रोटी खुद बनाकर खा सके।

33. कैलास के नए फैसले पर नारायण और बिज्जू की क्या प्रतिक्रिया थी?

उत्तर: नारायण ने कहा "जैसी आपकी मर्जी, मुझे मंजूर है" और बिज्जू ने भी समर्थन करते हुए कहा कि इधर-उधर लुढ़कने से अच्छा है कि माँ अपनी जगह पड़ी रहेगी।

34. पचास रुपये वाले फैसले को सुनकर सीता पर क्या गुजरी?

उत्तर: सीता की आँखों के आगे अँधेरा छा गया, दिल रो पड़ा और आँखों में आँसुओं का समंदर भर गया।

35. सीता ने बेटों के रुपये लेने से बेहतर क्या समझा?

उत्तर: सीता ने सोचा कि जब यहाँ भी मेहनत और मजदूरी करके ही खाना है, तो वह बाहर किसी दूसरे के घर बर्तन-भांडे मांजकर मजदूरी कर लेगी और स्वाभिमान से जिएगी।

36. सीता ने घर से निकलते वक्त अपने साथ क्या लिया?

उत्तर: उसने अपने दो-चार पुराने कपड़ों (पूर-पल्लों) की एक छोटी-सी गठरी बाँधी और निकल पड़ी।

37. घर से निकलते समय सीता की मनोदशा में क्या परिवर्तन आया?

उत्तर: उसकी आँखों से अँधेरा और मन की घुटन समाप्त हो गई थी। उसे खुला आकाश और चौड़ा रास्ता अपनी बाँहें फैलाए नजर आ रहा था।

38. कहानी में 'रोटी' किस बात का प्रतीक बन गई है?

उत्तर: रोटी केवल भूख का नहीं, बल्कि परिवार में बिखरते मानवीय रिश्तों, संवेदनहीनता और स्वार्थपरकता का प्रतीक बन गई है।

39. सीता के चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?

उत्तर: सीता सहनशील, ममतामयी, स्वाभिमानी, धैर्यवान और आत्मसम्मान से जीने वाली भारतीय माँ है।

40. 'धरती कब तक घूमेगी' शीर्षक की सार्थकता क्या है?

उत्तर: जिस प्रकार धरती निरंतर बिना रुके घूमती है, उसी प्रकार सीता की जिंदगी भी तीनों बेटों के घरों के बीच चक्रव्यूह की तरह घूम रही थी। अतः यह शीर्षक अत्यंत सटीक है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-उत्तर (Long Answer Q&A : 41 से 50)
41. 'धरती कब तक घूमेगी' कहानी का मूल सारांश अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर: यह कहानी एक असहाय और स्वाभिमानी वृद्ध माँ 'सीता' की व्यथा पर केंद्रित है। पति की मृत्यु के बाद उसके तीन बेटे (कैलास, नारायण, बिज्जू) उसे बोझ समझने लगते हैं। पहले वे माँ को एक-एक महीने बारी-बारी से रखने का फैसला करते हैं, जहाँ उसे बहुओं के ताने और अपमान सहना पड़ता है। अंत में, बेटे उसे ₹50-₹50 प्रति माह देकर खुद पकाकर खाने का फरमान सुनाते हैं। इस अपमान से आहत होकर सीता अपने आत्मसम्मान की रक्षा हेतु घर छोड़कर निकल जाती है।

42. सीता के तीनों बेटों के स्वभाव और उनके व्यवहार का तुलनात्मक वर्णन कीजिए।
उत्तर:
  • कैलास (बड़ा बेटा): अधिकार जताने वाला, क्रोधी और संवेदनहीन है। माँ को बोझ समझकर वही दोनों बार बटवारे और पैसों की योजना बनाता है।
  • नारायण (मंझला बेटा): वह बड़े भाई की हाँ में हाँ मिलाने वाला और जिम्मेदारी से बचने की प्रवृत्ति रखने वाला व्यक्ति है।
  • बिज्जू (छोटा बेटा): वह प्रायः शांत और मूक दर्शक बना रहता है, लेकिन माँ को लेकर उसकी सोच भी स्वार्थ और कठोरता से भरी है।
43. कहानी में तीनों बहुओं (राधा, भँवरी और पुष्पा) के आपसी संबंध और सीता के प्रति उनके रवैये का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर: तीनों बहुएँ ईर्ष्यालु और कलहप्रिय हैं। वे आपस में एक-दूसरे को नीचा दिखाने के लिए लड़ती हैं और इन झगड़ों का शिकार बूढ़ी सास सीता बनती है। रसमलाई या रोटी बनाने जैसी छोटी-छोटी बातों पर वे कटु वचन और ताने बाण चलाकर सीता के आत्मसम्मान को आहत करती हैं।

44. "सीता अपने ही घर में अजनबी और भिखारिन जैसी स्थिति में थी।" पाठ के आधार पर स्पष्ट करें।

उत्तर: सीता जिस घर की मालकिन थी, वहीं वह बेगानी हो गई। बच्चों का 'माई-माई रोटी दे' खेल उसकी असल जिंदगी बन गया था। महीना समाप्त होते ही उसे दूसरे बेटे के यहाँ जाना पड़ता था। बेटों के लिए वह प्रेम की पात्र न होकर केवल रोटी की एक बाध्यता बन चुकी थी।

45. सीता के घर छोड़ने के ऐतिहासिक निर्णय की परिस्थितियों और उसके महत्व पर प्रकाश डालिए।

उत्तर: जब बेटों ने सीता को ₹50-₹50 देकर स्वयं चूल्हा चौका करने को कहा, तो सीता को लगा कि यह उसकी ममता और मातृत्व की मजदूरी तय की गई है। उसने सोचा कि जब मेहनत करके ही खाना है, तो बेटों के अहसान और तानों के साए में क्यों जिया जाए। उसने घर छोड़कर भारतीय नारी के स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की।

46. "रोटी ही मुख्य समस्या थी या संकीर्ण मानसिकता?" अपने विचार व्यक्त कीजिए।

उत्तर: परिवार में रोटी या धन की कोई वास्तविक कमी नहीं थी। मुख्य समस्या संकीर्ण मानसिकता, स्वार्थ और संस्कारों का अभाव था। तीनों बेटे अपनी माँ को प्रेम और सम्मान से दो निवाले नहीं खिला सके, बल्कि उन्होंने मातृत्व को नफा-नुकसान के तराजू पर तौल दिया।

47. 'धरती कब तक घूमेगी' कहानी आधुनिक संयुक्त परिवार के विघटन की त्रासदी कैसे बयां करती है?

उत्तर: यह कहानी दर्शाती है कि आधुनिक युग में संयुक्त परिवार किस प्रकार टूट रहे हैं। भौतिकता की अंधी दौड़ में बुजुर्गों को अप्रासंगिक मानकर किनारे कर दिया जाता है। पारिवारिक मूल्यों का ह्रास और संवेदनाहीनता इस कहानी का सबसे मर्मस्पर्शी पक्ष है।

48. सीता के अंतर्मन के द्वंद्व का वर्णन कीजिए जब वह आकाश और धरती की ओर देखती है।

उत्तर: प्रारंभ में जब सीता धरती खुरचती और आकाश की ओर देखती, तो उसे अपनी छाती जैसी ही घुटन दोनों के बीच महसूस होती थी। उसे लगता था कि धरती और आकाश दोनों सिमट गए हैं। परंतु जब वह घर छोड़ती है, तो वही आकाश उसे अनंत और धरती बहुत चौड़ी प्रतीत होती है।

49. कहानी के अंत का संदेश स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: कहानी का अंत यह कड़ा संदेश देता है कि स्वाभिमान और आत्मसम्मान किसी भी रोटी या छत से बढ़कर है। साथ ही यह समाज को सचेत करती है कि यदि संतानों ने अपने बुजुर्ग माता-पिता की उपेक्षा की, तो माँ भी अपने अस्तित्व के लिए विद्रोह कर सकती है।

50. साँवर दइया की भाषा-शैली एवं कहानी-कला की विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर: साँवर दइया ने राजस्थानी परिवेश और ठेठ पारिवारिक संवादों का सजीव चित्रण किया है। उनकी भाषा अत्यंत सरल, मर्मस्पर्शी और प्रतीकात्मक है। वे पात्रों के आंतरिक मनोविज्ञान और सामाजिक विसंगतियों को सीधे हृदय तक पहुँचाने में सफल रहे हैं।

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