Chapter 1. दही वाली मंगम्मा | BSEB 10 Hindi Subjective


बिहार बोर्ड (BSEB) कक्षा 10वीं हिंदी (वर्णिका भाग-2)

अध्याय 1 : दही वाली मंगम्मा | लेखक : श्रीनिवास

संपूर्ण 50 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर (वस्तुनिष्ठ, लघु एवं दीर्घ उत्तरीय)

एक पंक्ति वाले प्रश्न-उत्तर (One-Liner Q&A : 1 से 20)
1. 'दही वाली मंगम्मा' कहानी के लेखक कौन हैं?

उत्तर: श्रीनिवास।

2. श्रीनिवास जी का पूरा नाम क्या है?

उत्तर: मास्ती वेंकटेश अय्यंगार।

3. श्रीनिवास जी का जन्म कब और कहाँ हुआ था?

उत्तर: 6 जून 1891 ई० में कोलार (कर्नाटक) में।

4. 'दही वाली मंगम्मा' किस भाषा की कहानी है?

उत्तर: कन्नड़ भाषा की।

5. इस कहानी का हिंदी अनुवाद किसने किया है?

उत्तर: बी० आर० नारायण ने।

6. श्रीनिवास जी को उनके किस कहानी संकलन के लिए 1968 में साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था?

उत्तर: ‘सण्णा कथेगुलु’ के लिए।

7. मंगम्मा क्या बेचती थी?

उत्तर: दही।

8. मंगम्मा किस गाँव की रहने वाली थी?

उत्तर: अवलूर के पास वेंकटपुर गाँव की।

9. मंगम्मा दही बेचने कहाँ जाती थी?

उत्तर: बेंगलूर (बेंगलुरु) शहर में।

10. मंगम्मा की बहू का क्या नाम था?

उत्तर: नजम्मा।

11. सास-बहू (मंगम्मा और नजम्मा) के बीच विवाद का मुख्य कारण क्या था?

उत्तर: पोते की पिटाई।

12. मंगम्मा ने अपनी बहू को क्या कहकर डांटा था?

उत्तर: "क्यों री राक्षसी, इस छोटे से बच्चे को क्यों पीट रही है?"

13. मंगम्मा अपने पैसे किस कपड़े के ब्लाउज में बनवाना चाहती थी?

उत्तर: मखमल के ब्लाउज (जाकिट) में।

14. गाँव का जुआरी और लंपट व्यक्ति कौन था?

उत्तर: रंगप्पा।

15. रंगप्पा मंगम्मा से कहाँ मिलता था?

उत्तर: अमराई के कुएँ के पास।

16. रंगप्पा मंगम्मा से क्या माँगता था?

उत्तर: चूना-पान और कर्ज के रूप में रुपये।

17. मंगम्मा अपने पैसे सुरक्षित रखने के लिए किसके पास जमा करना चाहती थी?

उत्तर: कथावाचिका (माँ जी) के पास।

18. टोकरी में रखी मिठाई की पुड़िया को कौन झपट ले गया था?

उत्तर: आम के पेड़ पर बैठा कौआ।

19. नजम्मा ने अपनी सास (मंगम्मा) को मनाने के लिए किसे माध्यम बनाया?

उत्तर: अपने छोटे बेटे (मंगम्मा के पोते) को।

20. कहानी के अंत में दही बेचने का काम किसने संभाल लिया?

उत्तर: बहू (नजम्मा) ने।

लघु उत्तरीय प्रश्न-उत्तर (Short Answer Q&A : 21 से 40)
21. मंगम्मा का 'बारी' से दही बेचने का क्या नियम था?

उत्तर: वह प्रतिदिन शहर आकर घरों में दही देती थी और पैसे महीने के अंत में या अगले दिन लेती थी।

22. मंगम्मा का अपनी कथावाचिका (माँ जी) के साथ कैसा संबंध था?

उत्तर: दोनों के बीच अत्यधिक घनिष्ठता और आत्मीयता थी; मंगम्मा अपने घर-परिवार के सारे सुख-दुख माँ जी से साझा करती थी।

23. मंगम्मा अपने पति के बारे में माँ जी को क्या बताती है?

उत्तर: मंगम्मा बताती है कि उसके पति ने कभी उसकी कद्र नहीं की और वह दूसरी स्त्री के चक्कर में पड़कर घर से मुँह मोड़ चुका था।

24. मंगम्मा के अनुसार पति को वश में रखने के क्या उपाय हैं?

उत्तर: अच्छा खाना बनाकर देना, सुंदर व साफ कपड़े पहनना, हँसमुख रहना और कभी-कभार अपनी जरूरत के पैसे देना।

25. मंगम्मा और उसकी बहू के बीच अलग होने का निर्णय कैसे हुआ?

उत्तर: पोते की पिटाई पर बहस के बाद बेटे ने अपनी पत्नी का पक्ष लिया, जिससे आहत होकर मंगम्मा ने दोपहर से अलग खाना बनाने का फैसला किया।

26. अलग होने के बाद मंगम्मा ने अपना खाना कैसे पकाया?

उत्तर: उसने अलग बर्तन-भांडे लिए और कुठले में से रागी, चावल, नमक-मिर्च निकालकर अपने लिए 'हिद्दू' बनाकर खाया।

27. मंगम्मा ने मखमल का ब्लाउज क्यों सिलवाया?

उत्तर: बेटे-बहू से अलग होने के बाद उसने सोचा कि अब पैसे किसके लिए जोड़े, इसलिए उसने अपने शौक पूरे करने के लिए आठ रुपये में मखमल का ब्लाउज सिलवाया।

28. मखमल के ब्लाउज को लेकर बहू ने क्या ताना मारा?

उत्तर: बहू ने ताना मारा कि "बहू को तो कभी एक जाकिट नहीं दिलाई और अब खुद बुढ़ापे में मखमल का जाकिट पहनकर घूम रही है"।

29. रंगप्पा कौन था और उसकी नजर मंगम्मा पर क्यों पड़ी?

उत्तर: रंगप्पा गाँव का एक लंपट और जुआरी था। मंगम्मा को अकेली और उसके पास जमा पैसे देखकर वह उससे धन ऐंठना चाहता था।

30. अमराई के कुएँ के पास रंगप्पा ने मंगम्मा के साथ क्या धृष्टता की?

उत्तर: उसने मंगम्मा को जबरन रोककर उसका हाथ पकड़ लिया और मीठी-मीठी बातें बनाकर उससे कर्ज माँगने लगा।

31. कौए द्वारा मिठाई ले जाने पर मंगम्मा क्यों डर गई थी?

उत्तर: लोकमान्यता के अनुसार कौए का स्पर्श अशुभ और जान का खतरा माना जाता है; मंगम्मा को लगा कि उसके दिन पूरे हो चुके हैं।

32. मंगम्मा का पोता अपनी दादी के पास क्यों रहने लगा?

उत्तर: बहू ने चालाकी से बच्चे को दादी के पास भेज दिया ताकि मिठाई और दुलार के बहाने वह दादी से जुड़ा रहे।

33. बहू नजम्मा ने अपनी सास से सुलह करने की क्या योजना बनाई?

उत्तर: उसने अपने बेटे को सिखा-पढ़ाकर दादी के पास भेजा ताकि पोते के मोह में मंगम्मा पिघल जाए और घर में वापस आ जाए।

34. बहू ने रंगप्पा की चाल को कैसे विफल किया?

उत्तर: जब बहू को पता चला कि रंगप्पा सास से पैसे ऐंठने की फिराक में है, तो उसने तुरंत सास से समझौता कर परिवार को एकजुट कर लिया।

35. मंगम्मा ने फिर से बहू के साथ रहना क्यों स्वीकार किया?

उत्तर: पोते के असीम प्रेम और गाँव के पंचों व बेटे-बहू के समझाने पर उसने बड़प्पन दिखाते हुए समझौता कर लिया।

36. सुलह के बाद परिवार में क्या नई व्यवस्था बनी?

उत्तर: मंगम्मा घर पर रहकर आराम से खाना बनाने लगी और बाहर धूप में घूमकर दही बेचने की जिम्मेदारी बहू ने ले ली।

37. नजम्मा ने कथावाचिका (माँ जी) से अपनी सफाई में क्या कहा?

उत्तर: नजम्मा ने कहा कि वह कोई राक्षसी नहीं है, वह सिर्फ अपने पति और बेटे पर अपना अधिकार चाहती थी।

38. कहानी में सास और बहू के बीच के विवाद का मूल कारण क्या बताया गया है?

उत्तर: अधिकार की भावना; सास अपने बेटे पर और बहू अपने पति पर पूर्ण अधिकार जमाना चाहती थी।

39. "मगरमच्छ और माँ" के उदाहरण से लेखक ने क्या स्पष्ट किया है?

उत्तर: लेखक के अनुसार बहू पानी में बच्चे का पाँव खींचने वाले मगरमच्छ जैसी है और माँ ऊपर से बाँह पकड़कर बचाने जैसी स्थिति में होती है।

40. 'दही वाली मंगम्मा' कहानी किस सामाजिक वर्ग की तस्वीर पेश करती है?

उत्तर: यह ग्रामीण मध्यमवर्गीय परिवार, विशेषकर कामकाजी और स्वाभिमानी महिलाओं के पारिवारिक संघर्ष की तस्वीर पेश करती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-उत्तर (Long Answer Q&A : 41 से 50)
41. 'दही वाली मंगम्मा' कहानी का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर: 'दही वाली मंगम्मा' कन्नड़ साहित्यकार श्रीनिवास द्वारा रचित एक लोकप्रिय पारिवारिक कहानी है। मंगम्मा दही बेचकर अपना जीवन यापन करती है। पोते की पिटाई को लेकर उसका अपनी बहू नजम्मा से झगड़ा हो जाता है और वह अलग रहने लगती है। गाँव का लंपट रंगप्पा उसकी संपत्ति हड़पने की कोशिश करता है। बहू स्थिति को भाँपकर अपने बेटे के माध्यम से मंगम्मा से सुलह कर लेती है और परिवार पुनः एक हो जाता है।

42. मंगम्मा का चरित्र-चित्रण कीजिए।

उत्तर: मंगम्मा एक परिश्रमी, स्वाभिमानी, ममतामयी और सरल हृदय वाली ग्रामीण महिला है। वह जीवन भर मेहनत करके परिवार को पालती है। आत्मसम्मान पर चोट लगने पर वह अलग रहने का फैसला करती है, लेकिन अपने पोते और परिवार के प्रति उसका वात्सल्य कभी कम नहीं होता।

43. नजम्मा (बहू) का चरित्र-चित्रण कीजिए।

उत्तर: नजम्मा एक चतुर, व्यावहारिक, दूरदर्शी और अधिकार-सचेत महिला है। वह अपनी सास के धन को रंगप्पा जैसे धूर्त के हाथों में जाने से बचाने के लिए अपने बेटे को कूटनीतिक रूप से ढाल बनाती है और कुशलता से घर की एकता बहाल करती है।

44. मंगम्मा और उसकी बहू के बीच तनाव और फिर समाधान के कारणों का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर: तनाव का कारण पीढ़ीगत अंतर और बेटे/पति पर अधिकार को लेकर होने वाला नारी-सुलभ ईर्ष्या-भाव था। समाधान का कारण पोते का अटूट प्रेम और रंगप्पा से धन की रक्षा करने की व्यावहारिक समझ थी। दोनों ने समय रहते समझौते का महत्व समझा।

45. रंगप्पा के चरित्र और उसकी कुत्सित मंशा पर प्रकाश डालिए।

उत्तर: रंगप्पा अवसरवादी, आलसी और चरित्रहीन व्यक्ति है। वह असहाय और अकेली मंगम्मा के पैसे हड़पने के लिए चिकनी-चुपड़ी बातें करता है और अमराई में उसका हाथ पकड़कर मर्यादा का उल्लंघन करता है।

46. कहानी में कथावाचिका (माँ जी) की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।

उत्तर: माँ जी मंगम्मा की सच्ची हितैषी, मार्गदर्शक और संवेदनशील श्रोता हैं। वे मंगम्मा के दुखों को धीरज से सुनती हैं, उसे सही सलाह देती हैं और अंत में सास-बहू के रिश्ते को मधुर बनाने में उत्प्रेरक का काम करती हैं।

47. 'दही वाली मंगम्मा' शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: पूरी कहानी मंगम्मा और उसके दही बेचने के व्यवसाय के इर्द-गिर्द घूमती है। मंगम्मा का परिचय, उसका संघर्ष और उसकी पारिवारिक गाथा सब दही बेचने की प्रक्रिया से ही आगे बढ़ते हैं। अतः शीर्षक पूर्णतः उपयुक्त एवं सार्थक है।

48. "सास और बहू में स्वतंत्रता की होड़ लगी है।" इस कथन के आधार पर भारतीय पारिवारिक संरचना पर टिप्पणी करें।

उत्तर: यह कथन भारतीय परिवारों के शाश्वत अंतर्द्वंद्व को रेखांकित करता है। माँ जन्म देने के नाते बेटे पर अधिकार छोड़ना नहीं चाहती, जबकि पत्नी अपने भविष्य और घर की स्वामिनी बनने की होड़ में पति पर एकाधिकार चाहती है। इसी खींचतान में पुरुष पिस जाता है।

49. इस कहानी से आज के समाज और परिवारों को क्या सीख मिलती है?

उत्तर: यह कहानी सिखाती है कि पारिवारिक कलह का लाभ बाहरी असामाजिक तत्व उठाते हैं। परिवार में कटुता के बजाय संवाद, त्याग, बड़ों का सम्मान और आपसी सामंजस्य से ही घर का वातावरण सुखमय बनाया जा सकता है।

50. श्रीनिवास जी की भाषा-शैली और कथा-शिल्प की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर: श्रीनिवास जी की भाषा अत्यंत सरल, स्वाभाविक, लोकधर्मी और मुहावरेदार है। उनके संवाद दैनिक बोलचाल के अनुकूल हैं और वे सूक्ष्म मनोवैज्ञानिक अनुभूतियों को सहजता से पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करने में सिद्धहस्त हैं।

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