बिहार बोर्ड (BSEB) कक्षा 10वीं हिंदी (वर्णिका भाग-2)
अध्याय 1 : दही वाली मंगम्मा | लेखक : श्रीनिवास
संपूर्ण 50 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर (वस्तुनिष्ठ, लघु एवं दीर्घ उत्तरीय)
उत्तर: श्रीनिवास।
उत्तर: मास्ती वेंकटेश अय्यंगार।
उत्तर: 6 जून 1891 ई० में कोलार (कर्नाटक) में।
उत्तर: कन्नड़ भाषा की।
उत्तर: बी० आर० नारायण ने।
उत्तर: ‘सण्णा कथेगुलु’ के लिए।
उत्तर: दही।
उत्तर: अवलूर के पास वेंकटपुर गाँव की।
उत्तर: बेंगलूर (बेंगलुरु) शहर में।
उत्तर: नजम्मा।
उत्तर: पोते की पिटाई।
उत्तर: "क्यों री राक्षसी, इस छोटे से बच्चे को क्यों पीट रही है?"
उत्तर: मखमल के ब्लाउज (जाकिट) में।
उत्तर: रंगप्पा।
उत्तर: अमराई के कुएँ के पास।
उत्तर: चूना-पान और कर्ज के रूप में रुपये।
उत्तर: कथावाचिका (माँ जी) के पास।
उत्तर: आम के पेड़ पर बैठा कौआ।
उत्तर: अपने छोटे बेटे (मंगम्मा के पोते) को।
उत्तर: बहू (नजम्मा) ने।
उत्तर: वह प्रतिदिन शहर आकर घरों में दही देती थी और पैसे महीने के अंत में या अगले दिन लेती थी।
उत्तर: दोनों के बीच अत्यधिक घनिष्ठता और आत्मीयता थी; मंगम्मा अपने घर-परिवार के सारे सुख-दुख माँ जी से साझा करती थी।
उत्तर: मंगम्मा बताती है कि उसके पति ने कभी उसकी कद्र नहीं की और वह दूसरी स्त्री के चक्कर में पड़कर घर से मुँह मोड़ चुका था।
उत्तर: अच्छा खाना बनाकर देना, सुंदर व साफ कपड़े पहनना, हँसमुख रहना और कभी-कभार अपनी जरूरत के पैसे देना।
उत्तर: पोते की पिटाई पर बहस के बाद बेटे ने अपनी पत्नी का पक्ष लिया, जिससे आहत होकर मंगम्मा ने दोपहर से अलग खाना बनाने का फैसला किया।
उत्तर: उसने अलग बर्तन-भांडे लिए और कुठले में से रागी, चावल, नमक-मिर्च निकालकर अपने लिए 'हिद्दू' बनाकर खाया।
उत्तर: बेटे-बहू से अलग होने के बाद उसने सोचा कि अब पैसे किसके लिए जोड़े, इसलिए उसने अपने शौक पूरे करने के लिए आठ रुपये में मखमल का ब्लाउज सिलवाया।
उत्तर: बहू ने ताना मारा कि "बहू को तो कभी एक जाकिट नहीं दिलाई और अब खुद बुढ़ापे में मखमल का जाकिट पहनकर घूम रही है"।
उत्तर: रंगप्पा गाँव का एक लंपट और जुआरी था। मंगम्मा को अकेली और उसके पास जमा पैसे देखकर वह उससे धन ऐंठना चाहता था।
उत्तर: उसने मंगम्मा को जबरन रोककर उसका हाथ पकड़ लिया और मीठी-मीठी बातें बनाकर उससे कर्ज माँगने लगा।
उत्तर: लोकमान्यता के अनुसार कौए का स्पर्श अशुभ और जान का खतरा माना जाता है; मंगम्मा को लगा कि उसके दिन पूरे हो चुके हैं।
उत्तर: बहू ने चालाकी से बच्चे को दादी के पास भेज दिया ताकि मिठाई और दुलार के बहाने वह दादी से जुड़ा रहे।
उत्तर: उसने अपने बेटे को सिखा-पढ़ाकर दादी के पास भेजा ताकि पोते के मोह में मंगम्मा पिघल जाए और घर में वापस आ जाए।
उत्तर: जब बहू को पता चला कि रंगप्पा सास से पैसे ऐंठने की फिराक में है, तो उसने तुरंत सास से समझौता कर परिवार को एकजुट कर लिया।
उत्तर: पोते के असीम प्रेम और गाँव के पंचों व बेटे-बहू के समझाने पर उसने बड़प्पन दिखाते हुए समझौता कर लिया।
उत्तर: मंगम्मा घर पर रहकर आराम से खाना बनाने लगी और बाहर धूप में घूमकर दही बेचने की जिम्मेदारी बहू ने ले ली।
उत्तर: नजम्मा ने कहा कि वह कोई राक्षसी नहीं है, वह सिर्फ अपने पति और बेटे पर अपना अधिकार चाहती थी।
उत्तर: अधिकार की भावना; सास अपने बेटे पर और बहू अपने पति पर पूर्ण अधिकार जमाना चाहती थी।
उत्तर: लेखक के अनुसार बहू पानी में बच्चे का पाँव खींचने वाले मगरमच्छ जैसी है और माँ ऊपर से बाँह पकड़कर बचाने जैसी स्थिति में होती है।
उत्तर: यह ग्रामीण मध्यमवर्गीय परिवार, विशेषकर कामकाजी और स्वाभिमानी महिलाओं के पारिवारिक संघर्ष की तस्वीर पेश करती है।
उत्तर: 'दही वाली मंगम्मा' कन्नड़ साहित्यकार श्रीनिवास द्वारा रचित एक लोकप्रिय पारिवारिक कहानी है। मंगम्मा दही बेचकर अपना जीवन यापन करती है। पोते की पिटाई को लेकर उसका अपनी बहू नजम्मा से झगड़ा हो जाता है और वह अलग रहने लगती है। गाँव का लंपट रंगप्पा उसकी संपत्ति हड़पने की कोशिश करता है। बहू स्थिति को भाँपकर अपने बेटे के माध्यम से मंगम्मा से सुलह कर लेती है और परिवार पुनः एक हो जाता है।
उत्तर: मंगम्मा एक परिश्रमी, स्वाभिमानी, ममतामयी और सरल हृदय वाली ग्रामीण महिला है। वह जीवन भर मेहनत करके परिवार को पालती है। आत्मसम्मान पर चोट लगने पर वह अलग रहने का फैसला करती है, लेकिन अपने पोते और परिवार के प्रति उसका वात्सल्य कभी कम नहीं होता।
उत्तर: नजम्मा एक चतुर, व्यावहारिक, दूरदर्शी और अधिकार-सचेत महिला है। वह अपनी सास के धन को रंगप्पा जैसे धूर्त के हाथों में जाने से बचाने के लिए अपने बेटे को कूटनीतिक रूप से ढाल बनाती है और कुशलता से घर की एकता बहाल करती है।
उत्तर: तनाव का कारण पीढ़ीगत अंतर और बेटे/पति पर अधिकार को लेकर होने वाला नारी-सुलभ ईर्ष्या-भाव था। समाधान का कारण पोते का अटूट प्रेम और रंगप्पा से धन की रक्षा करने की व्यावहारिक समझ थी। दोनों ने समय रहते समझौते का महत्व समझा।
उत्तर: रंगप्पा अवसरवादी, आलसी और चरित्रहीन व्यक्ति है। वह असहाय और अकेली मंगम्मा के पैसे हड़पने के लिए चिकनी-चुपड़ी बातें करता है और अमराई में उसका हाथ पकड़कर मर्यादा का उल्लंघन करता है।
उत्तर: माँ जी मंगम्मा की सच्ची हितैषी, मार्गदर्शक और संवेदनशील श्रोता हैं। वे मंगम्मा के दुखों को धीरज से सुनती हैं, उसे सही सलाह देती हैं और अंत में सास-बहू के रिश्ते को मधुर बनाने में उत्प्रेरक का काम करती हैं।
उत्तर: पूरी कहानी मंगम्मा और उसके दही बेचने के व्यवसाय के इर्द-गिर्द घूमती है। मंगम्मा का परिचय, उसका संघर्ष और उसकी पारिवारिक गाथा सब दही बेचने की प्रक्रिया से ही आगे बढ़ते हैं। अतः शीर्षक पूर्णतः उपयुक्त एवं सार्थक है।
उत्तर: यह कथन भारतीय परिवारों के शाश्वत अंतर्द्वंद्व को रेखांकित करता है। माँ जन्म देने के नाते बेटे पर अधिकार छोड़ना नहीं चाहती, जबकि पत्नी अपने भविष्य और घर की स्वामिनी बनने की होड़ में पति पर एकाधिकार चाहती है। इसी खींचतान में पुरुष पिस जाता है।
उत्तर: यह कहानी सिखाती है कि पारिवारिक कलह का लाभ बाहरी असामाजिक तत्व उठाते हैं। परिवार में कटुता के बजाय संवाद, त्याग, बड़ों का सम्मान और आपसी सामंजस्य से ही घर का वातावरण सुखमय बनाया जा सकता है।
उत्तर: श्रीनिवास जी की भाषा अत्यंत सरल, स्वाभाविक, लोकधर्मी और मुहावरेदार है। उनके संवाद दैनिक बोलचाल के अनुकूल हैं और वे सूक्ष्म मनोवैज्ञानिक अनुभूतियों को सहजता से पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करने में सिद्धहस्त हैं।
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