Chapter 9. हमारी नींद | BSEB 10 Hindi Solution


Class 10 Hindi (गोधूलि भाग-2: काव्य खंड)

अध्याय 9: हमारी नींद (रचयिता: वीरेन डंगवाल)

I. कविता के साथ (प्रश्न-उत्तर)
प्रश्न 1: कविता के प्रथम अनुच्छेद में कवि एक बिम्ब की रचना करता है। उसे स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
कविता के प्रथम अनुच्छेद में कवि ने प्राकृतिक विकास और समय की निरंतरता को दर्शाने वाले सजीव दृश्य बिम्ब की रचना की है। कवि कहता है कि जब हम बेखबर सोए रहते हैं (हमारी नींद के दौरान), तब भी प्रकृति शांत भाव से अपना कार्य करती रहती है। बीज की फूली हुई छाल को भीतर से धकेलते हुए कोमल अंकुर (सींग) बाहर आते हैं, पौधे सूत भर बड़े हो जाते हैं और पेड़ कुछ इंच बढ़ जाते हैं। यह बिम्ब यह दर्शाता है कि मानव की निष्क्रियता या असावधानी के बावजूद जीवन और विकास की गति कभी नहीं रुकती।
प्रश्न 2: मक्खी के जीवन-क्रम का कवि द्वारा उल्लेख किए जाने का क्या आशय है?
उत्तर:
मक्खी के जीवन-क्रम (जन्म, शिशु अवस्था, वृद्धि और अंततः दंगे, आगजनी व बमबारी में मृत्यु) का उल्लेख करके कवि तुच्छ और साधारण जीवन की क्षणभंगुरता तथा समाज की हिंसक व विषैली परिस्थितियों को उजागर करना चाहता है। यह दर्शाता है कि जहाँ एक ओर जीवन चक्र अपने आप पूरा हो रहा है, वहीं दूसरी ओर सामाजिक उपद्रवों और हिंसा के कारण असामयिक मौतें हो रही हैं।
प्रश्न 3: कवि गरीब बस्तियों का क्यों उल्लेख करता है?
उत्तर:
कवि गरीब बस्तियों का उल्लेख इसलिए करता है ताकि यह दिखाया जा सके कि किस प्रकार लाउडस्पीकर जैसे आधुनिक साधनों के माध्यम से धर्म या अनुष्ठान के नाम पर ढोंग और शोर-शराबा फैलाकर गरीब, अनपढ़ व शोषित जनता का मानसिक व आर्थिक शोषण किया जाता है। 'धमाके से हुआ देवी जागरण' इस बात का प्रतीक है कि साधनहीन बस्तियों में अंधविश्वास और दिखावे का बाजारीकरण किस हद तक हावी हो चुका है।
प्रश्न 4: कवि किन अत्याचारियों का और क्यों ज़िक्र करता है?
उत्तर:
कवि उन सत्ताधारियों, शोषकों और अत्याचारियों का ज़िक्र करता है जिन्होंने शोषण, दमन और जनता को वश में रखने के तमाम आधुनिक साधन और तंत्र जुटा लिए हैं। कवि इनका ज़िक्र यह चेतावनी देने के लिए करता है कि अत्याचारियों के तमाम षड्यंत्रों और दमनकारी नीतियों के बावजूद आम जनता का हठीला जीवन-संघर्ष थमता नहीं है, बल्कि वह लगातार आगे बढ़ता रहता है।
प्रश्न 5: इंकार करना न भूलने वाले कौन हैं? कवि का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
'इंकार करना न भूलने वाले' वे सचेत, जुझारू और जागरूक लोग हैं जो हर प्रकार के अन्यायी शासन, शोषण और अत्याचार के खिलाफ निर्भीकता से 'ना' (विरोधाभास) कहने का साहस रखते हैं।

कवि का भाव: कवि का भाव यह है कि भले ही बहुसंख्यक समाज नींद (अज्ञानता, सुस्ती व बेपरवाही) में सोया हो, लेकिन समाज में अभी भी कुछ ऐसे प्रतिरोधी लोग जीवित हैं जो अन्याय के सामने झुकते नहीं हैं और अपने साफ एवं मजबूत इंकार से क्रांति की मशाल जलाए रखते हैं।
प्रश्न 6: कविता के शीर्षक की सार्थकता पर विचार कीजिए।
उत्तर:
कविता का शीर्षक 'हमारी नींद' पूर्णतः सार्थक, व्यंग्यात्मक और प्रतीकात्मक है। यहाँ 'नींद' केवल शारीरिक विश्राम नहीं है, बल्कि यह आम जनता की सुस्ती, बेपरवाही, सामाजिक अज्ञानता और अन्याय के प्रति निष्क्रियता का प्रतीक है। हमारी इस नींद के दौरान जहाँ एक तरफ प्रकृति बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ अत्याचारी अपने पैर पसार रहे हैं। शीर्षक पाठक को अपनी इस नींद (निष्क्रियता) से त्यागकर जागरूक होने का सीधा संदेश देता है।
प्रश्न 7: व्याख्या करें –
(क) "गरीब बस्तियों में भी
धमाके से हुआ देवी जागरण
लाउडस्पीकर पर।"
प्रसंग: प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक 'गोधूलि भाग-2' की 'हमारी नींद' शीर्षक कविता से उद्धृत हैं, जिसके रचयिता समकालीन कवि वीरेन डंगवाल हैं।
व्याख्या: इन पंक्तियों में कवि ने गरीब बस्तियों में व्याप्त अंधविश्वास और लाउडस्पीकर के माध्यम से फैलाए जाने वाले शोरगुल पर करारा व्यंग्य किया है। कवि कहते हैं कि अत्यंत निर्धन और साधनहीन बस्तियों में भी देवी जागरण जैसे धार्मिक आयोजनों को लाउडस्पीकर के धमाके के साथ किया जाता है। यह दिखावा और धर्म का बाजारीकरण गरीबों की बेबसी और उनकी अज्ञानता का फायदा उठाने का एक तरीका बन गया है।
(ख) "याने साधन तो सभी जुटा लिए हैं अत्याचारियों ने"
प्रसंग: प्रस्तुत पंक्तियाँ 'हमारी नींद' कविता से ली गई हैं।
व्याख्या: कवि स्पष्ट करते हैं कि समाज के शोषकों और अत्याचारियों ने जनता को दबाने, उन्हें भ्रमित रखने और उन पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए हर प्रकार के आधुनिक साधन, शक्ति और तंत्र हासिल कर लिए हैं। वे हर तरफ से आम आदमी को पंगु बनाने के षड्यंत्र रच चुके हैं।
(ग) "हमारी नींद के बावजूद"
प्रसंग: प्रस्तुत पंक्ति 'हमारी नींद' कविता की एक प्रमुख पंक्ति है।
व्याख्या: कवि कहते हैं कि आम जनता भले ही अपनी अज्ञानता, आलस्य और निष्क्रियता की नींद में सोई रहे, लेकिन जीवन का हठीला संघर्ष रुकता नहीं है। परिस्थितियाँ कितनी भी प्रतिकूल हों और अत्याचारियों के साधन कितने भी मजबूत हों, जीवन हमेशा आगे बढ़ता रहता है और प्रगति का पहिया थमता नहीं है।
प्रश्न 8: कविता में एक शब्द भी ऐसा नहीं है जिसका अर्थ जानने की कोशिश करनी पड़े। यह कविता की भाषा की शक्ति है या सीमा? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
यह कविता की भाषा की बहुत बड़ी शक्ति है, सीमा नहीं।

वीरेन डंगवाल जी ने कविता में आम बोलचाल की सहज, व्यावहारिक और देसज भाषा का प्रयोग किया है। जब कविता की भाषा सरल और सहज होती है, तो उसका संदेश सीधे आम जनता (पाठक) के हृदय तक पहुँचता है। जटिल और अलंकृत शब्दों के बिना भी इतनी गहरी सामाजिक-राजनीतिक चेतना और व्यंग्य को प्रस्तुत कर देना कवि की भाषाई सामर्थ्य और शिल्प कला की श्रेष्ठता को दर्शाता है।
II. कविता के आस-पास
1. वीरेन डंगवाल का कविता संग्रह 'दुष्चक्र में स्रष्टा' अपने पुस्तकालय से उपलब्ध कर पढ़ें तथा यह जानने का प्रयत्न करें कि कवि ने अपने संग्रह का नाम यह क्यों रखा?
उत्तर:
'दुष्चक्र में स्रष्टा' का अर्थ है— शोषण, भ्रष्टाचार, हिंसा और विषमताओं के ऐसे कुचक्र (दुष्चक्र) के बीच भी किसी रचनाकार (स्रष्टा) द्वारा उम्मीद, जीवन और नए विचारों का सृजन करना। कवि ने इस संग्रह का नाम यह इसलिए रखा क्योंकि उनकी कविताएँ अत्यंत विकट, प्रतिकूल और शोषक सामाजिक परिस्थितियों के बीच भी आम आदमी के जीवट, प्रतिरोध और जीवन-सृजन की गाथा गाती हैं।
2. आप वीरेन डंगवाल की तुलना उनके समकालीन बिहार के किन कवियों से करेंगे और क्यों?
उत्तर:
हम वीरेन डंगवाल की तुलना बिहार के समकालीन जनवादी कवियों जैसे अनामिका, अरुण कमल या आलोकधन्वा से कर सकते हैं।

कारण: इन सभी कवियों की कविताओं में आम आदमी की पीड़ा, सामाजिक विसंगतियों, शोषित वर्ग के जीवन-संघर्ष और जनवादी चेतना का यथार्थवादी एवं सजीव चित्रण देखने को मिलता है। इनकी भाषा भी जन-साधारण के निकट है।
III. भाषा की बात

1. निम्नांकित के दो-दो समानार्थी शब्द लिखें –

शब्द समानार्थी शब्द
पेड़ वृक्ष, विटप (तरु)
शिशु बालक, बच्चा
दंगा उपद्रव, फसाद
गरीब निर्धन, दीन
अत्याचारी ज़ालिम, अनाचारी
हठीला ज़िद्दी, हठी
साफ स्वच्छ, स्पष्ट
इनकार अस्वीकृति, मनाही

2. निम्नांकित वाक्यों में कर्ता कारक बताएँ –

(कर्ता कारक वह होता है जो क्रिया को संपन्न करता है, इसका चिह्न 'ने' होता है या यह अप्रत्यक्ष रूप से उपस्थित रहता है।)

  • (क) मेरी नींद के दौरान / कुछ इंच बढ़ गए / कुछ सूत पौधे।
    कर्ता कारक: पौधे (तथा पेड़) — बढ़ने की क्रिया पौधों/पेड़ों द्वारा हो रही है।
  • (ख) अंकुर ने अपने नाममात्र कोमल सींगों से / धकेलना शुरू की / बीज की फूली हुई / छत भीतर से।
    कर्ता कारक: अंकुर ने — यहाँ 'ने' विभक्ति चिह्न के साथ कर्ता 'अंकुर' है।
  • (ग) गरीब बस्तियों में भी / धमाके से हुआ देवी जागरण / लाउडस्पीकर पर।
    कर्ता कारक: देवी जागरण — होने की क्रिया 'देवी जागरण' की है।
  • (घ) मगर जीवन हठीला फिर भी / बढ़ता ही जाता आगे / हमारी नींद के बावजूद।
    कर्ता कारक: जीवन — आगे बढ़ने की क्रिया 'जीवन' कर रहा है।

3. निम्नलिखित वाक्यों में कर्म कारक की पहचान कीजिए –

(कर्म कारक वह संज्ञा या सर्वनाम है जिस पर क्रिया का फल पड़ता है, इसका विभक्ति चिह्न 'को' होता है या यह अप्रत्यक्ष रहता है।)

  • (क) अंकुर ने अपने नाममात्र कोमल सींगों से / धकेलना शुरू की / बीज की फूली हुई / छत भीतर से।
    कर्म कारक: छत (या 'बीज की फूली हुई छत') — धकेलने की क्रिया का फल 'छत' पर पड़ रहा है।
  • (ख) कई लोग हैं / अभी भी / जो भूले नहीं करना / साफ और मजबूत / इनकार।
    कर्म कारक: इनकार (साफ और मजबूत इनकार) — भूलने/करने की क्रिया का विषय 'इनकार' है।

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