BSEB Class 10 Hindi Chapter 4 "नाखून क्यों बढ़ते हैं" PDF Download
बिहार बोर्ड (BSEB) कक्षा 10वीं के विद्यार्थियों के लिए हिंदी (गोधूलि भाग-2) गद्य खंड का अध्याय 4 "नाखून क्यों बढ़ते हैं" (Nakhun Kyun Barhte Hain) आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी द्वारा रचित एक अत्यंत प्रसिद्ध एवं विचारोत्तेजक ललित निबंध है। यदि आप इस पाठ की PDF को ऑनलाइन पढ़ना चाहते हैं या डाउनलोड करना चाहते हैं, तो नीचे एम्बेडेड PDF व्यूअर और डाउनलोड बटन का उपयोग कर सकते हैं।
| बोर्ड (Board) | बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) |
|---|---|
| कक्षा (Class) | 10वीं (Class 10th) |
| विषय (Subject) | हिंदी (गोधूलि भाग-2 - गद्य खंड) |
| अध्याय (Chapter) | अध्याय 4 (Chapter 4) - नाखून क्यों बढ़ते हैं |
| लेखक (Author) | आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी |
| विधा (Genre) | ललित निबंध (Lalit Nibandh) |
पाठ का सारांश (Chapter Overview)
'नाखून क्यों बढ़ते हैं' हिंदी के महान निबंधकार आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी द्वारा रचित एक प्रसिद्ध ललित निबंध है। निबंध की शुरुआत लेखक की छोटी बेटी द्वारा पूछे गए एक मासूम सवाल से होती है—"पिताजी, नाखून क्यों बढ़ते हैं?"
लेखक इस प्रश्न के माध्यम से मानव सभ्यता, संस्कृति और उसके भीतर छिपी पशुता पर गहरा विचार-विमर्श करते हैं। वे बताते हैं कि आदिमानव काल में नाखून रक्षा और आक्रमण का हथियार हुआ करते थे, जो हमारी बर्बरता व पशुता (पशु-वृत्ति) की निशानी हैं। वहीं, नाखूनों को काटना मानव के विवेक, आत्म-नियंत्रण, अहिंसा और सभ्यता (मनुष्यता) का प्रतीक है। लेखक कहते हैं कि अस्त्र-शस्त्रों की होड़ बढ़ाना पशुता है, जबकि मनुष्य की असली पहचान अपनी पशु प्रवृत्ति पर विजय पाकर करुणा, प्रेम और स्वाधीनता को अपनाना है।
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परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न (Important Points)
- 'नाखून क्यों बढ़ते हैं' निबंध के लेखक कौन हैं? - आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी।
- नाखूनों का बढ़ना और काटना किसका प्रतीक है? - नाखून का बढ़ना हमारी पशुता (पशु-वृत्ति) का प्रतीक है तथा उन्हें काटना मनुष्यता व आत्म-नियंत्रण का प्रतीक है।
- लेखक के अनुसार स्वाधीनता का असली अर्थ क्या है? - अपने ही नियमों और अनुशासन द्वारा अनुशासित होना।
- सफलता और चरितार्थता में क्या अंतर है? - अस्त्र-शस्त्रों का संचय सफलता हो सकती है, लेकिन प्रेम, मैत्री और त्याग ही मनुष्य की असली चरितार्थता है।
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