Chapter 1. राम बिनु बिरथे जगि जनमा, जो नर दुख में दुख नहिं मानै | BSEB 10 Hindi Book PDF download


BSEB Class 10 Hindi Chapter 1 "राम बिनु बिरथे जगि जनमा" PDF Download

बिहार बोर्ड (BSEB) कक्षा 10वीं के विद्यार्थियों के लिए हिंदी (गोधूलि भाग-2) काव्य खंड का पहला अध्याय "राम बिनु बिरथे जगि जनमा / जो नर दुख में दुख नहिं मानै" सिख धर्म के प्रवर्तक एवं निर्गुण भक्ति धारा के महान संत गुरु नानक द्वारा रचित एक अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी पाठ है। यदि आप इस पाठ की PDF को पढ़ना या डाउनलोड करना चाहते हैं, तो नीचे एम्बेडेड PDF व्यूअर और डाउनलोड बटन दिया गया है।

बोर्ड (Board) बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB)
कक्षा (Class) 10वीं (Class 10th)
विषय (Subject) हिंदी (गोधूलि भाग-2 - काव्य खंड)
अध्याय (Chapter) अध्याय 1 (Chapter 1) - राम बिनु बिरथे जगि जनमा
कवि (Poet) गुरु नानक (Guru Nanak Dev Ji)

पाठ का सारांश (Chapter Overview)

यह अध्याय सिखों के प्रथम गुरु गुरु नानक द्वारा रचित दो पदों में संकलित है:

प्रथम पद ('राम बिनु बिरथे जगि जनमा'): इसमें गुरु नानक जी ने बाहरी आडंबरों, पूजा-पाठ और दिखावे का खंडन करते हुए सच्चे मन से 'राम-नाम' (ईश्वर) के स्मरण को ही सर्वोपरि माना है। उनका कहना है कि राम नाम का जप किए बिना मनुष्य का जीवन व्यर्थ है। जो व्यक्ति ईश्वर का नाम नहीं लेता, वह विष (ज़हर) खाता है और उसकी बातें निष्फल होती हैं।

द्वितीय पद ('जो नर दुख में दुख नहिं मानै'): इसमें एक सच्चे और समदर्शी साधक के गुणों की व्याख्या की गई है। ऐसा मनुष्य दुख और सुख दोनों स्थितियों में समान रहता है। उसे न तो सुख में अहंकार होता है और न ही दुख में व्याकुलता। वह कंचन (सोना) और मिट्टी में कोई भेद नहीं समझता। गुरु नानक जी कहते हैं कि जिस मनुष्य पर ईश्वर की कृपा होती है, वह गोविंद (ईश्वर) में उसी प्रकार लीन हो जाता है जैसे पानी में पानी मिल जाता है।

मुख्य संदेश: "राम बिनु बिरथे जगि जनमा" - बाहरी कर्मकांडों की अपेक्षा सच्चे हृदय से ईश्वर के नाम का जप करना और सुख-दुख में समभाव बनाए रखना ही जीवन का सच्चा ज्ञान है।

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परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न (Important Points)

  • 'राम बिनु बिरथे जगि जनमा' पद के रचयिता कौन हैं? - गुरु नानक।
  • कवि के अनुसार किसका जन्म व्यर्थ है? - जो मनुष्य राम-नाम का जाप नहीं करता, उसका इस संसार में जन्म लेना व्यर्थ है।
  • गुरु नानक के अनुसार ईश्वर की कृपा किस मनुष्य पर होती है? - जो मनुष्य सुख-दुख, मान-अपमान और लाभ-हानि में समान रहता है तथा कंचन को मिट्टी समझता है।

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