ध्रुवोपाख्यानम् (पाठ - 25)
50 बहुविकल्पीय वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Questions) उत्तर एवं व्याख्या सहित
1–10: पात्र परिचय एवं सम्बन्ध (Characters & Relationships)
1. राज्ञः नाम किम् आसीत्? (राजा का क्या नाम था?)
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उत्तर: (B) उत्तानपादः
व्याख्या: पाठ के प्रारम्भ में स्पष्ट लिखा है— "पुरा उत्तानपाडो नाम राजा आसीत्।"
2. राजा उत्तानपादस्य कति पत्न्यः आस्ताम्? (राजा उत्तानपाद की कितनी पत्नियाँ थीं?)
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उत्तर: (B) द्वे
व्याख्या: राजा उत्तानपाद की दो पत्नियाँ थीं— सुनीति और सुरुचि।
3. उत्तानपादस्य ज्येष्ठा पत्नी का आसीत्? (उत्तानपाद की बड़ी पत्नी कौन थीं?)
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उत्तर: (B) सुनीतिः
व्याख्या: गद्यांश के अनुसार सुनीति राजा की ज्येष्ठ (बड़ी) पत्नी थीं।
4. कनिष्ठा पत्नी का आसीत्? (छोटी पत्नी कौन थीं?)
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उत्तर: (B) सुरुचिः
व्याख्या: "सुरुचिः तु कनिष्ठा आसीत्।" (सुरुचि छोटी पत्नी थीं।)
5. पत्युः अतीव प्रिया का आसीत्? (पति को अत्यधिक प्रिय कौन थीं?)
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उत्तर: (B) सुरुचिः
व्याख्या: पाठ में वर्णित है कि छोटी रानी सुरुचि अपने पति राजा उत्तानपाद को बहुत प्रिय थीं।
6. सुनीतेः पुत्रस्य नाम किम् आसीत्? (सुनीति के पुत्र का नाम क्या था?)
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उत्तर: (B) ध्रुवः
व्याख्या: बड़ी रानी सुनीति के पुत्र का नाम ध्रुव था।
7. सुरुचेः पुत्रस्य नाम किम् आसीत्? (सुरुचि के पुत्र का नाम क्या था?)
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उत्तर: (B) उत्तमः
व्याख्या: छोटी रानी सुरुचि के पुत्र का नाम उत्तम था।
8. नृपस्य प्रियतरः पुत्रः कः आसीत्? (राजा का अधिक प्रिय पुत्र कौन था?)
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उत्तर: (B) उत्तमः
व्याख्या: सुरुचि प्रिय रानी थीं, इसलिए उनका पुत्र उत्तम राजा को अधिक प्रिय था।
9. ध्रुवस्य विमाता का आसीत्? (ध्रुव की सौतेली माँ कौन थीं?)
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उत्तर: (B) सुरुचिः
व्याख्या: सुरुचि ध्रुव की सौतेली माँ (विमाता) थीं।
10. ध्रुवस्य जननी का आसीत्? (ध्रुव की माता कौन थीं?)
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उत्तर: (B) सुनीतिः
व्याख्या: ध्रुव की सगी माता का नाम सुनीति था।
11–20: मुख्य घटनाक्रम एवं संवाद (Story Events & Dialogues)
11. पितुः अङ्के कः आसीनः आसीत्? (पिता की गोद में कौन बैठा था?)
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उत्तर: (B) उत्तमः
व्याख्या: पाठ के अनुसार उत्तम अपने पिता उत्तानपाद की गोद (क्रोडे) में बैठा हुआ था।
12. ध्रुवस्य का इच्छा सञ्जाता? (ध्रुव की क्या इच्छा हुई?)
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उत्तर: (B) पितुः अङ्कम् आरोढुम्
व्याख्या: उत्तम को गोदी में देखकर ध्रुव की भी अपने पिता की गोद में बैठने की इच्छा हुई।
13. पितुः अङ्कम् आरोढुम् इच्छन्तं ध्रुवं का न्यवारयत्? (पिता की गोद में चढ़ने की इच्छा वाले ध्रुव को किसने रोका?)
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उत्तर: (B) विमाता सुरुचिः
व्याख्या: सौतेली माँ सुरुचि ने ध्रुव को पिता की गोद में बैठने से रोक दिया।
14. "त्वं मम पुत्रः नासि" इति कः/का अवदत्? ("तुम मेरे पुत्र नहीं हो" यह किसने कहा?)
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उत्तर: (B) सुरुचिः
व्याख्या: सुरुचि ने ध्रुव से कहा कि तुम मेरे गर्भ से उत्पन्न नहीं हुए हो, इसलिए पिता की गोद के योग्य नहीं हो।
15. विमात्रा अनादृतः ध्रुवः कीदृशः अभवत्? (सौतेली माँ द्वारा अपमानित होकर ध्रुव कैसा हुआ?)
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उत्तर: (B) दुःखितः
व्याख्या: सौतेली माँ के कटु वचनों से ध्रुव बहुत दुःखी हुआ।
16. दुःखितः ध्रुवः कस्याः समीपम् अगच्छत्? (दुःखी ध्रुव किसके पास गया?)
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उत्तर: (B) स्वमातुः सुनीतेः
व्याख्या: अपमानित होकर ध्रुव अपनी सगी माँ सुनीति के पास गया।
17. ध्रुवस्य दुःखानां कारणं का अपृच्छत्? (ध्रुव के दुःख का कारण किसने पूछा?)
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उत्तर: (B) सुनीतिः
व्याख्या: रोते हुए ध्रुव को देखकर माँ सुनीति ने दुःख का कारण पूछा।
18. "तपसा पितुरङ्कं लभस्व" इति का अवदत्? ("तपस्या से पिता की गोद प्राप्त करो" यह किसने कहा?)
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उत्तर: (B) सुनीतिः
व्याख्या: माँ सुनीति ने ध्रुव को सांत्वना देते हुए ईश्वर की भक्ति और तप करने की सलाह दी।
19. तपोवनं गच्छन् ध्रुवः कतिवर्षीयः आसीत्? (तपोवन जाते समय ध्रुव कितने वर्ष का था?)
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उत्तर: (B) पञ्चवर्षीयः
व्याख्या: गद्यांश में स्पष्ट उल्लेख है— "पञ्चवर्षीयः बालकः ध्रुवः तपोवनम् अगच्छत्।"
20. मातरं प्रणम्य ध्रुवः कुत्र अगच्छत्? (माता को प्रणाम करके ध्रुव कहाँ गया?)
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उत्तर: (B) तपोवनम्
व्याख्या: ध्रुव अपनी माता का आशीर्वाद लेकर तपोवन के लिए निकल पड़ा।
21–30: देवर्षि नारद मिलाप एवं उपदेश (Meeting Devarshi Narada)
21. मार्गे ध्रुवम् कः अपृच्छत्? (मार्ग में ध्रुव से किसने पूछा?)
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उत्तर: (A) देवर्षिः नारदः
व्याख्या: वन के रास्ते में ध्रुव की भेंट देवर्षि नारद से हुई।
22. नारदः ध्रुवं किम् अपृच्छत्? (नारद ने ध्रुव से क्या पूछा?)
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उत्तर: (A) "वत्स, त्वं कुत्र किमर्थञ्च गच्छसि?"
व्याख्या: नारदजी ने ध्रुव से पूछा कि हे वत्स! तुम कहाँ और किसलिए जा रहे हो?
23. ध्रुवः किम् न इच्छति स्म? (ध्रुव क्या नहीं चाहता था?)
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उत्तर: (A) ऐश्वर्यं राज्यसुखानि वा
व्याख्या: ध्रुव ने कहा— "अहम् ऐश्वर्यं राज्यसुखानि वा न अभीप्सामि।" (मुझे राज्य या ऐश्वर्य नहीं चाहिए।)
24. ध्रुवः नारदं किम् उपदेष्टुम् प्रार्थयत्? (ध्रुव ने नारद से किस मार्ग का उपदेश देने की प्रार्थना की?)
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उत्तर: (B) तपोमार्गम्
व्याख्या: ध्रुव ने नारदजी से तप का मार्ग (तपोमार्गम्) बताने की प्रार्थना की।
25. ध्रुवस्य कीदृशं निश्चयं दृष्ट्वा नारदः प्रसन्नः अभवत्? (ध्रुव का कैसा निश्चय देखकर नारद प्रसन्न हुए?)
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उत्तर: (B) दृढम्
व्याख्या: इतने छोटे बालक का दृढ निश्चय (दृढ निश्चयं) देखकर नारदजी प्रभावित हुए।
26. नारदः ध्रुवं कस्य तटस्थितं वनं गन्तुम् अकथयत्? (नारद ने ध्रुव को किस नदी के तट पर स्थित वन जाने को कहा?)
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उत्तर: (B) यमुनातटस्थितम्
व्याख्या: नारदजी ने ध्रुव को यमुना किनारे जाने का निर्देश दिया— "यमुनातटस्थितं मधुसंज्ञं वनं गच्छ।"
27. नारदस्य कथनानुसारं वनस्य नाम किम् आसीत्? (नारद के अनुसार वन का क्या नाम था?)
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उत्तर: (A) मधुवनम् / मधुसंज्ञं वनम्
व्याख्या: यमुना तट पर स्थित उस वन का नाम 'मधुवन' (मधुसंज्ञम्) था।
28. तत्र गत्वा ध्रुवः कस्य आराधनं कुर्यात् इति नारदः अवदत्? (वहाँ जाकर ध्रुव किसकी आराधना करे ऐसा नारद ने कहा?)
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उत्तर: (B) वासुदेवस्य
व्याख्या: नारदजी ने ध्रुव को भगवान वासुदेव (विष्णु) की आराधना करने की सलाह दी।
29. "हरिः एव तव मनोरथं पूरयिष्यति" इति कः अवदत्? ("भगवान हरि ही तुम्हारी मनोकामना पूरी करेंगे" यह किसने कहा?)
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उत्तर: (A) नारदः
व्याख्या: नारद जी ने ध्रुव को आश्वासन दिया कि श्रीहरि उसकी मनोकामना पूर्ण करेंगे।
30. मधुकाननं प्राप्य ध्रुवः कं ध्यातुम् आरब्धवान्? (मधुवन पहुँचकर ध्रुव ने किसका ध्यान शुरू किया?)
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उत्तर: (B) विष्णुम्
व्याख्या: मधुवन पहुँचकर ध्रुव ने भगवान विष्णु का ध्यान प्रारम्भ कर दिया।
31–40: तपस्या एवं देवानाम भयः (Penance & Devata's Fear)
31. ध्रुवस्य ध्यानभङ्गं कर्तुम् के प्रयासम् अकुर्वन्? (ध्रुव का ध्यान भंग करने का प्रयास किसने किया?)
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उत्तर: (B) देवाः इन्द्रेण सह
व्याख्या: इन्द्र के साथ अन्य देवताओं ने ध्रुव की तपस्या भंग करने की कोशिश की।
32. ध्रुवस्य ध्यानभङ्गे देवाः कीदृशाः जाताः? (ध्रुव का ध्यान भंग करने में देवता कैसे रहे?)
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उत्तर: (B) विफलप्रयलाः
व्याख्या: बालक ध्रुव की निश्चल भक्ति के कारण देवताओं के सभी प्रयास विफल (विफलप्रयत्नाः) हो गए।
33. कति मासानन्तरं देवाः तपसः भीताः अभवन्? (कितने महीनों के बाद देवता तप से भयभीत हो गए?)
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उत्तर: (B) षट्
व्याख्या: पाठ के अनुसार— "षट् मासानन्तरं ध्रुवस्य तपसः भीताः..." (6 महीने बाद देवता भयभीत हो गए)।
34. भीताः देवाः कस्य समीपम् अगच्छन्? (भयभीत देवता किसके पास गए?)
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उत्तर: (C) विष्णोः
व्याख्या: देवता रक्षा के लिए भगवान विष्णु (श्रीहरि) की शरण में पहुँचे।
35. देवाः विष्णुं किम् अवदन्? (देवताओं ने विष्णु से क्या कहा?)
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उत्तर: (B) "तं तपसः निवर्तय"
व्याख्या: देवताओं ने कहा कि ध्रुव के उग्र तप से हम तप्त हो रहे हैं, उसे तपस्या से रोकिए।
36. विष्णुः देवान् किम् अवदत्? (विष्णु ने देवताओं से क्या कहा?)
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उत्तर: (A) "ध्रुवः इन्द्रत्वं नेच्छति"
व्याख्या: विष्णुजी ने बताया कि ध्रुव इन्द्र का पद या धन-दौलत नहीं चाहता, इसलिए डरने की आवश्यकता नहीं है।
37. "भवन्तः स्वस्थानं गच्छन्तु" इति कः अवदत्? ("आप सभी अपने स्थान जाएँ" यह किसने कहा?)
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उत्तर: (B) हरिः (श्रीहरिः)
व्याख्या: भगवान श्रीहरि ने देवताओं को आश्वस्त करते हुए अपने-अपने लोक लौटने को कहा।
38. श्रीहरिः कस्य पुरः आविर्भवत्? (श्रीहरि किसके सामने प्रकट हुए?)
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उत्तर: (B) ध्रुवस्य
व्याख्या: देवताओं के जाने के पश्चात् श्रीहरि ध्रुव के सामने प्रकट हुए।
39. श्रीहरिः ध्रुवं करेण किम् अकरोत्? (श्रीहरि ने ध्रुव को हाथ से क्या किया?)
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उत्तर: (B) अस्पृशत्
व्याख्या: भगवान विष्णु ने वात्सल्य से ध्रुव को स्पर्श (अस्पृशत्) किया।
40. भगवान् श्रीहरिः ध्रुवं किम् अवदत्? (भगवान श्रीहरि ने ध्रुव से क्या कहा?)
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उत्तर: (A) "पुत्र, वरं वरय"
व्याख्या: भगवान ने ध्रुव से प्रसन्न होकर वरदान माँगने को कहा— "पुत्र, वरं वरय।"
41–50: वरदान, फल एवं व्याकरण/शिक्षा (Boon, Outcome & Grammar)
41. ध्रुवः हरौ किं ययाचे/अयाचत? (ध्रुव ने श्रीहरि से क्या माँगा?)
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उत्तर: (B) प्रजां, प्रज्ञां, पितुरङ्कं च
व्याख्या: ध्रुव ने निर्मल बुद्धि (प्रज्ञा) तथा अपने पिता का स्नेह/गोद माँगा।
42. सन्तुष्टः हरिः ध्रुवाय किम् अयच्छत्? (संतुष्ट होकर श्रीहरि ने ध्रुव को क्या दिया?)
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उत्तर: (A) दुर्लभं ध्रुवपदम्
व्याख्या: श्रीहरि ने ध्रुव को आकाश में अटल व सर्वोच्च 'ध्रुवपद' प्रदान किया।
43. गृहं प्रतिनिवृत्ते ध्रुवे कयोः चित्ते निर्मले अभवताम्? (घर वापस लौटने पर किन दोनों के मन निर्मल/पवित्र हो गए?)
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उत्तर: (B) पितुः उत्तानपादस्य विमातुः सुरुचेः च
व्याख्या: ध्रुव की भक्ति से उसके पिता उत्तानपाद और सौतेली माँ सुरुचि का हृदय भी शुद्ध व निर्मल हो गया।
44. पञ्चवर्षीयः अपि बालकः ध्रुवः कस्मात् उच्चस्थानम् प्राप्नोत्? (पाँच वर्ष के बालक ध्रुव ने किससे उच्च स्थान प्राप्त किया?)
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उत्तर: (B) भगवतः प्रसादात्
व्याख्या: भगवान की कृपा और कठोर तपस्या के बल से ध्रुव ने ध्रुवपद प्राप्त किया।
45. "कठोरतपसा किम् लभते?" (कठोर तपस्या से क्या मिलता है?)
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उत्तर: (A) सिद्धिम्
व्याख्या: पाठ के श्लोक में कहा गया है— "कठोरतपसा सिद्धिं लभते नात्र संशयः॥"
46. "दृढेन मनसा कार्यं चिन्तयित्वा नरो..." - श्लोकांशं पूरयत। (श्लोक की पंक्ति पूरी करें।)
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उत्तर: (C) व्रती
व्याख्या: पाठ के अंतिम श्लोक की पंक्ति है— "दृढेन मनसा कार्यं चिन्तयित्वा नरो व्रती।"
47. ध्रुवोपाख्यानं काम् शिक्षां ददाति? (ध्रुव की कथा क्या शिक्षा देती है?)
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उत्तर: (A) दृढनिश्चयेन तपसा च सिद्धिः लभ्यते
व्याख्या: यह कथा सिखाती है कि संकल्प और कठिन परिश्रम/तपस्या से असम्भव कार्य भी सिद्ध हो जाता है।
48. 'सुनीतिः' पदस्य विलोमपदं गद्यांशात् चित्वा लिखत। ('सुनीति' शब्द का विलोम पद क्या है?)
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उत्तर: (A) सुरुचिः
व्याख्या: पाठ में सुनीति (अच्छी नीति/आचरण) और सुरुचि (केवल अपनी रुचि) दो परस्पर विरोधी स्वभाव वाली रानियों के नाम/गुण के रूप में प्रस्तुत हैं।
49. 'आरोढुम्' इति पदे कः प्रत्ययः अस्ति? ('आरोढुम्' पद में कौन-सा प्रत्यय है?)
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उत्तर: (B) तुमुन्
व्याख्या: आ + रुह् + तुमुन् = आरोढुम् (चढ़ने के लिए)।
50. 'अगच्छत्' इति क्रियापदे कः लकारः अस्ति? ('अगच्छत्' क्रियापद में कौन-सा लकार है?)
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उत्तर: (B) लङ् लकारः
व्याख्या: 'अगच्छत्' भूतकाल (लङ् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन) का रूप है।
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