Chapter 3. माँ | BSEB 10 Hindi Subjective


बिहार बोर्ड (BSEB) कक्षा 10वीं हिंदी (वर्णिका भाग-2)

अध्याय 3 : माँ | लेखक : ईश्वर पेटलीकर

संपूर्ण 50 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर (वस्तुनिष्ठ, लघु एवं दीर्घ उत्तरीय)

एक पंक्ति वाले प्रश्न-उत्तर (One-Liner Q&A : 1 से 20)
1. 'माँ' कहानी के लेखक कौन हैं?

उत्तर: ईश्वर पेटलीकर.

2. ईश्वर पेटलीकर किस भाषा के लोकप्रिय कथाकार हैं?

उत्तर: गुजराती भाषा के.

3. ईश्वर पेटलीकर की प्रसिद्ध कहानी और उपन्यास कौन-से हैं?

उत्तर: प्रसिद्ध कहानी ‘खून की सगाई’ तथा लोकप्रिय उपन्यास ‘काला पानी’ है.

4. 'माँ' कहानी का संपादन एवं हिंदी अनुवाद किसने किया है?

उत्तर: गोपालदास नागर ने.

5. मंगु कैसी लड़की थी?

उत्तर: जन्म से ही पागल और गूँगी.

6. मंगु के अलावा उसकी माँ की कुल कितनी संतानें थीं?

उत्तर: तीन संतानें (दो पुत्र और एक पुत्री).

7. मंगु सहित माँ की कुल कितनी संतानें थीं?

उत्तर: चार संतानें (दो पुत्र और दो पुत्रियाँ).

8. मंगु की बड़ी बहन का नाम क्या था?

उत्तर: कम्मु.

9. अस्पताल के प्रति माँ जी की क्या धारणा थी?

उत्तर: माँ जी अस्पताल को अपंग जानवरों की 'गौशाला' समझती थीं.

10. ज्योतिषी ने किस महीने में मंगु के ठीक होने की भविष्यवाणी की थी?

उत्तर: अगहन (अग्रहायण) के महीने में.

11. अगहन का महीना आने पर मंगु कितने वर्ष की पूरी होने वाली थी?

उत्तर: चौदह (14) वर्ष की.

12. गाँव की कौन-सी लड़की पढ़ते समय अचानक पागल हो गई थी?

उत्तर: कुसुम.

13. कुसुम कहाँ पढ़ती थी?

उत्तर: शहर के कन्या विद्यालय में.

14. अस्पताल में कितने महीने रहने के बाद कुसुम पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौटी?

उत्तर: लगभग तीन महीने बाद.

15. कुसुम के ठीक होने के बाद माँ जी ने मंगु को अस्पताल भेजने के लिए किसे पत्र लिखवाया?

उत्तर: अपने बड़े पुत्र को.

16. मंगु को अस्पताल में भर्ती कराने के लिए किसका ऑर्डर प्राप्त किया गया?

उत्तर: मजिस्ट्रेट का ऑर्डर.

17. मंगु को घर से ले जाते समय माँ जी ने किस सवारी का उपयोग किया?

उत्तर: बैलगाड़ी और फिर ट्रेन का.

18. अस्पताल की मेट्रन ने माँ जी को आश्वस्त करते हुए क्या कहा?

उत्तर: "आज तक आप इसकी माँ थीं, आज से मैं इसकी नई माँ हुई हूँ।"

19. अस्पताल से लौटकर माँ जी और उनका पुत्र घर कितने बजे पहुँचे?

उत्तर: रात में पौने ग्यारह (10:45) बजे.

20. कहानी के अंत में सुबह माँ जी की क्या दशा हुई?

उत्तर: माँ जी भी मंगु के वियोग और पुत्र-ममता के चरम पागलपन में मंगु की श्रेणी में मिल गईं (पागल हो गईं).

लघु उत्तरीय प्रश्न-उत्तर (Short Answer Q&A : 21 से 40)
21. लोग माँ जी को मंगु के संबंध में क्या सलाह देते थे?

उत्तर: लोग माँ जी को सलाह देते थे कि मंगु को पागलों के अस्पताल में भर्ती करा दिया जाए ताकि उसकी सही देखभाल हो सके.

22. अस्पताल भेजने की सलाह पर माँ जी क्या तर्क देती थीं?

उत्तर: माँ जी कहती थीं कि "मैं सगी माँ होकर सेवा नहीं कर सकती, तो अस्पताल के पराए कर्मचारियों को क्या पड़ी है? यह तो अपंग जानवर को गौशाला में भेजने जैसा है।"

23. पुत्रवधुओं (बहुओं) को माँ जी के व्यवहार से क्या शिकायत थी?

उत्तर: बहुओं की शिकायत थी कि माँ जी अपने पोते-पोतियों से प्यार नहीं करतीं और पागल मंगु को चौबीसों घंटे छाती से चिपकाए रखती हैं.

24. कम्मु (मंगु की बहन) अपनी माँ से क्या कहती थी?

उत्तर: कम्मु कहती थी कि माँ के झूठे लाड़-प्यार ने ही मंगु को अधिक बिगाड़ दिया है; यदि मार-डांट कर आदत डाली जाती तो वह मल-मूत्र का ध्यान रखने लगती.

25. माँ जी के अनुसार मंगु का असली सगा कौन था?

उत्तर: माँ जी मानती थीं कि जो निस्वार्थ भाव से सेवा करे वही सच्चा सगा है; पुत्र और पुत्री अपने परिवार में मस्त हैं, इसलिए केवल माँ ही मंगु की सच्ची सगी है.

26. माँ जी अगहन के महीने की प्रतीक्षा क्यों कर रही थीं?

उत्तर: एक ज्योतिषी ने कहा था कि अगहन के महीने में मंगु का पागलपन ठीक हो जाएगा, इसलिए यह महीना माँ जी के लिए आराध्यदेव बन गया था.

27. अगहन के महीने को लेकर माँ जी क्या कल्पनाएँ करने लगी थीं?

उत्तर: माँ जी सोचने लगी थीं कि अगहन में मंगु ठीक हो जाएगी और वह चौदह वर्ष की रूपवती कन्या का विवाह तय कर देंगी.

28. कुसुम के पागल होने पर माँ जी को क्या संतोष हुआ?

उत्तर: माँ जी को लगा कि जब पढ़ी-लिखी और सयानी लड़की पागल होने पर विवेक खो देती है, तो जन्म से पागल मंगु का क्या दोष।

29. कुसुम के ठीक होकर लौटने पर गाँव वालों ने माँ जी से क्या कहा?

उत्तर: गाँव वालों ने कहा कि अस्पताल में कुसुम पूरी तरह ठीक हो गई है, इसलिए मंगु को भी एक बार अस्पताल में भर्ती कराकर देखना चाहिए.

30. कुसुम से बातचीत के बाद माँ जी के मन में क्या बदलाव आया?

उत्तर: अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सों के दयालु व्यवहार की बात सुनकर माँ जी के मन से अस्पताल के प्रति बैठा डर और पूर्वाग्रह दूर हो गया.

31. मंगु को अस्पताल भेजने का निर्णय लेते समय माँ जी के मन में क्या द्वंद्व चल रहा था?

उत्तर: माँ जी को लगता था कि वृद्धावस्था में बहुएँ उसकी सेवा नहीं करेंगी, परंतु अस्पताल भेजने का फैसला करते ही उन्हें लगता कि वे माँ होकर भी पुत्री से ऊब गई हैं।

32. पुत्र द्वारा तुरंत मजिस्ट्रेट का ऑर्डर लाने पर माँ जी को क्या संदेह हुआ?

उत्तर: माँ जी को लगा कि पुत्र अपनी पागल बहन को अस्पताल में धकेलकर जल्दी से जल्दी बोझ से छुटकारा पाना चाहता है.

33. घर से विदा होते समय मंगु की क्या प्रतिक्रिया थी?

उत्तर: मंगु नए कपड़े देखकर प्रसन्न थी और माँ की ओर देखकर हँस रही थी, क्योंकि वह अबोध थी और नहीं जानती थी कि उसे कहाँ ले जाया जा रहा है.

34. ट्रेन में सहयात्रियों ने मंगु को देखकर क्या टिप्पणियाँ कीं?

उत्तर: यात्रियों ने कहा कि माँ-बाप होकर खाते-पीते घर की लड़की को अस्पताल में लावारिस छोड़ रहे हैं, वहाँ तो जानवरों जैसा हाल होगा।

35. अस्पताल में परिचारिकाओं (नर्सों) का व्यवहार देखकर माँ जी को क्या राहत मिली?

उत्तर: एक पागल स्त्री के नखरे सहते हुए और उसका मुँह धोते हुए नर्स को देखकर माँ जी को विश्वास हुआ कि यहाँ के कर्मचारी दयालु और सेवाभावी हैं।

36. माँ जी ने मेट्रन से मंगु के खान-पान के संबंध में क्या निर्देश दिए?

उत्तर: उन्होंने कहा कि मंगु बिना खिलाए नहीं खाती, वह रूखी रोटी नहीं खाती और शाम को रोटी दूध या दाल के साथ ही खाती है।

37. अस्पताल से लौटते समय माँ जी और उनके पुत्र की मानसिक दशा कैसी थी?

उत्तर: दोनों के चेहरों पर गहरा शोक था; माँ जी की आँखों से लगातार आँसू बह रहे थे और पुत्र के सीने पर अपराधबोध का भारी पत्थर रखा था।

38. घर लौटकर माँ जी रात भर क्यों नहीं सो सकीं?

उत्तर: रात में उन्हें मंगु की ठंड, उसके बिस्तर गीला करने और अकेलेपन की चिंता सता रही थी; वे खुद को पापी समझकर तड़प रही थीं।

39. रात में पुत्र ने अपने मन में क्या प्रतिज्ञा की?

उत्तर: पुत्र ने संकल्प लिया कि वह जीते-जी मंगु को पालेगा और यदि उसकी पत्नी तैयार नहीं होगी, तो वह स्वयं मंगु का मल-मूत्र धोएगा।

40. "माँ जी मंगु की श्रेणी में मिल गईं"—इस वाक्य का क्या अर्थ है?

उत्तर: इसका अर्थ है कि मंगु के वियोग, असीम पीड़ा और पुत्र-मोह की पराकाष्ठा में माँ जी का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और वे भी पागल हो गईं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-उत्तर (Long Answer Q&A : 41 से 50)
41. 'माँ' कहानी का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर: 'माँ' ईश्वर पेटलीकर की अत्यंत मार्मिक कहानी है। कहानी की नायिका माँ जी अपनी जन्मजात पागल और गूँगी बेटी मंगु से अगाध प्रेम करती हैं और उसे अस्पताल भेजने के सख्त खिलाफ हैं। जब गाँव की कुसुम अस्पताल में ठीक होकर लौटती है, तो माँ जी विवश होकर मंगु को अस्पताल में भर्ती करा देती हैं। परंतु अस्पताल से लौटने के बाद मंगु के वियोग और चिंता में माँ जी स्वयं अपना मानसिक संतुलन खो बैठती हैं और मंगु की तरह ही पागल हो जाती हैं।

42. माँ जी का चरित्र-चित्रण कीजिए।

उत्तर: माँ जी भारतीय नारी और वात्सल्य की प्रतिमूर्ति हैं। वे अपनी असमर्थ और विक्षिप्त संतान के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर देती हैं। समाज और परिवार के तानों के बावजूद उनका मातृ-स्नेह कभी कम नहीं होता। उनका प्रेम इतना गहरा है कि मंगु का वियोग वे सहन नहीं कर पातीं और अंततः पागल हो जाती हैं।

43. कहानी में माँ जी और उनकी संतानों के बीच के संबंधों का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर: माँ जी के दो पुत्र और एक अन्य पुत्री थी। पुत्र शहर में कमाते थे और बहुएँ मंगु के कारण माँ से खिंची रहती थीं। बड़ी बेटी कम्मु माँ के लाड़-प्यार को मंगु की आदत बिगड़ने का कारण मानती थी। परिवार में सभी लोग मंगु को एक बोझ समझते थे, जबकि माँ जी के लिए मंगु ही उनके जीवन का केंद्र थी।

44. कुसुम के चरित्र की कहानी में क्या भूमिका है?

उत्तर: कुसुम कहानी का एक महत्वपूर्ण मोड़ (turning point) है। वह शहर में पढ़ते समय पागल हो गई थी, परंतु अस्पताल में रहकर स्वस्थ हो गई। कुसुम के ठीक होने से माँ जी के मन में अस्पताल के प्रति जमी गलतफहमी दूर हुई और उन्होंने भारी मन से मंगु को अस्पताल भेजने का साहस जुटाया।

45. मंगु को अस्पताल में भर्ती कराते समय माँ जी की भावनात्मक स्थिति का वर्णन कीजिए।

उत्तर: अस्पताल में प्रवेश करते ही माँ जी का कलेजा काँप उठा। वे डॉक्टरों और नर्सों से एक-एक छोटी बात के लिए गिड़गिड़ाने लगीं कि मंगु को रात में ओढ़ाना, प्यार से खिलाना। जब मंगु को अंदर ले जाया गया, तो माँ जी के मुँह से मर्मवेधी चीख निकल पड़ी और उनकी आँखों से आँसुओं की धारा बह निकली।

46. अस्पताल के कर्मचारियों (डॉक्टर, मेट्रन और परिचारिकाओं) का व्यवहार कैसा था?

उत्तर: अस्पताल के कर्मचारी संवेदनशील, धैर्यवान और सहृदय थे। वे पागलों की हरकतों से खीझते नहीं थे, बल्कि उन्हें प्यार से संभालते थे। मेट्रन ने माँ जी को ढांढस बंधाया और आश्वासन दिया कि वह मंगु की नई माँ बनकर उसकी देखभाल करेगी।

47. पुत्र के अंतर्मन के पश्चाताप और संकल्प को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: माँ जी की सिसकियों और बेबसी को देखकर पुत्र का हृदय विदीर्ण हो गया। उसे अपनी स्वार्थपरता पर धिक्कार हुआ कि उसने माँ के जीते-जी बहन को अस्पताल में धकेल दिया। उसने प्रण लिया कि वह खुद मंगु की सेवा करेगा और कभी उसे बेसहारा नहीं छोड़ेगा।

48. 'माँ' शीर्षक की सार्थकता पर प्रकाश डालिए।

उत्तर: कहानी की पूरी धुरी माँ के निस्वार्थ और असीम वात्सल्य के इर्द-गिर्द घूमती है। एक माँ अपनी अक्षम संतान के लिए किस हद तक त्याग और पीड़ा सह सकती है, यह इस पाठ में जीवंत हुआ है। कहानी का अंत माँ के पागलपन के साथ मातृत्व की पराकाष्ठा को छूता है, इसलिए शीर्षक शत-प्रतिशत सार्थक है।

49. कहानी के माध्यम से समाज को क्या संदेश मिलता है?

उत्तर: यह कहानी संदेश देती है कि मानसिक रूप से दिव्यांग और असहाय बच्चों को केवल दया नहीं, बल्कि परिवार के सच्चे अपनत्व और प्रेम की आवश्यकता होती है। समाज और परिवार को अपनी संतानों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए और माता-पिता के त्याग का सम्मान करना चाहिए।

50. ईश्वर पेटलीकर की भाषा और शिल्पगत विशेषताएँ बताइए।

उत्तर: ईश्वर पेटलीकर ने ग्रामीण परिवेश और मानवीय संवेदनाओं का अत्यंत सजीव, मनोवैज्ञानिक और कारुणिक चित्रण किया है। उनकी भाषा सहज, मुहावरेदार और पाठकों के हृदय को छू लेने वाली है। संवाद अत्यंत स्वाभाविक और पात्रों की मनोस्थिति के सर्वथा अनुकूल हैं।

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