बिहार बोर्ड (BSEB) कक्षा 10वीं हिंदी (वर्णिका भाग-2)
अध्याय 2 : ढहते विश्वास | लेखक : सातकोड़ी होता
संपूर्ण 50 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर (वस्तुनिष्ठ, लघु एवं दीर्घ उत्तरीय)
उत्तर: सातकोड़ी होता।
उत्तर: 29 अक्टूबर 1929 ई० में मयूरभंज (ओड़ीसा) में।
उत्तर: उड़िया भाषा से।
उत्तर: राजेंद्र प्रसाद मिश्र ने।
उत्तर: लक्ष्मी।
उत्तर: लक्ष्मण; वह कलकत्ता (कोलकाता) में नौकरी करता था।
उत्तर: देवी नदी और उस पर स्थित ‘दलेई बाँध’।
उत्तर: लगभग एक बीघा जमीन।
उत्तर: अच्युत।
उत्तर: चार संतानें (दो पुत्र और दो पुत्रियाँ)।
उत्तर: गुणनिधि।
उत्तर: स्वेच्छासेवक दल (Voluntary Group)।
उत्तर: महाराज ययाति केशरी ने।
उत्तर: हीराकुंड बाँध।
उत्तर: हीराकुंड बाँध में काम करते समय पत्थर के नीचे दबकर।
उत्तर: टीले पर बने स्कूल और देवी चंडेश्वरी के थान पर।
उत्तर: शिव मंदिर के पास वाले बरगद के पेड़ पर।
उत्तर: अपनी आधी साड़ी खोलकर कमर को पेड़ की डाल से लपेट लिया।
उत्तर: एक अज्ञात मृत बच्चे का फूला हुआ शव।
उत्तर: माँ चंडेश्वरी पर।
उत्तर: आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय थी। पति द्वारा कलकत्ता से भेजे गए पैसों से गुजारा नहीं होता था, इसलिए लक्ष्मी तहसीलदार साहब के घर का छिटपुट काम करके कमी पूरी करती थी।
उत्तर: लक्ष्मी के जीवन में पहले भयंकर तूफान ने घर उजाड़ा, फिर सूखे ने एक बीघे की फसल झुलसा दी और उसके बाद लगातार बारिश और प्रलयंकारी बाढ़ ने सब कुछ तबाह कर दिया।
उत्तर: गुणनिधि के नेतृत्व में युवकों और ग्रामीणों ने रात-दिन रतजगा किया, कमजोर स्थानों पर मिट्टी और रेत की बोरियाँ डालीं तथा पत्थरों से बाँध को मजबूत किया।
उत्तर: गुणनिधि कटक से पढ़ा-लिखा एक कर्मठ, साहसी और समाज-सेवी युवक था, जिसने संकट के समय गाँव वालों को संगठित कर स्वेच्छासेवक दल का निर्माण किया।
उत्तर: अच्युत अपने पिता की तरह कर्मठ और बलिष्ठ था। बाँध की सुरक्षा और गाँव को बचाने के लिए लक्ष्मी ने उसे अन्य स्वयंसेवकों के साथ रात में निगरानी के लिए भेजा।
उत्तर: सरपंच ने गुणनिधि से कहा कि घर-घर खबर पहुँचा दो और सभी ग्रामीणों को सतर्क कर दो कि वे सुरक्षित और ऊँचे स्थानों पर चले जाएँ।
उत्तर: उसने मवेशियों (गाय, बछड़े, बकरियों) के पगाहे खोलकर खुला छोड़ दिया, घर की जरूरी चीजों को कमरे में बंद कर ताला लगाया और थोड़ा चिउड़ा व काँसे के बर्तन बोरे में बाँध लिए।
उत्तर: ताड़ के पेड़ के पास से बाँध टूटते ही नदी का पानी विकराल वेग से गाँव में घुस गया। ताड़ के पेड़ बह गए और चारों ओर चीख-पुकार व हाहाकार मच गया।
उत्तर: टीले के नीचे स्थित स्कूल के चार कमरों में लगभग दो सौ लोग खचाखच भर गए, बाकी लोग टीले पर चढ़ गए। बाद में स्कूल भी पूरी तरह पानी में डूब गया।
उत्तर: लक्ष्मी अच्युत के लौटने का इंतजार करती रही। बाँध टूटते देख उसने बेटे को ऊँची आवाज में पुकारा, परंतु वह नहीं आया और लक्ष्मी बच्चों को लेकर भागने पर विवश हो गई।
उत्तर: जब पानी उसके गले तक पहुँच गया, तो उसने अपने छोटे बच्चे को ऊपर उठाया और बरगद की जटाओं को पकड़कर पेड़ पर चढ़ गई तथा साड़ी से खुद को बाँध लिया।
उत्तर: कोई अपने पिता, कोई पति और कोई अपने बच्चों को ढूँढ रहा था। पूरा गाँव जलमग्न हो गया और चारों ओर केवल लाशें व मवेशियों के शव तैरते दिखे।
उत्तर: जब लक्ष्मी को होश आया, तो उसने पाया कि उसकी गोद से उसका छोटा बेटा गायब हो चुका था। वह जोर-जोर से रोने और गुहार लगाने लगी।
उत्तर: यद्यपि वह उसका अपना बेटा नहीं था, फिर भी वात्सल्य के वशीभूत होकर उसने उस अज्ञात शव को अपने सीने से चिपका लिया और अपना स्तन उसके मुँह से लगा दिया।
उत्तर: इसका आशय है कि प्राकृतिक आपदा (बाढ़) ने गाँव के खुशहाल, सीधे-सादे और आशावादी लोगों की हँसी, उल्लास और जीवन को पल भर में लील लिया।
उत्तर: इसमें कटक शहर, महानदी, देवी नदी, दलेई बाँध, हीराकुंड बाँध और राजा ययाति केशरी का उल्लेख है।
उत्तर: पानी के तेज बहाव में असहाय जानवर बह गए और कई गाय-बैलों के फूले हुए शव पेड़ों की डालियों और पानी की सतह पर तैरते दिखाई दिए।
उत्तर: सदियों से माँ चंडेश्वरी की पूजा-अर्चना करने के बावजूद जब देवी ने गाँव को जलप्रलय से नहीं बचाया और सब कुछ नष्ट हो गया, तो लोगों का विश्वास डगमगा गया।
उत्तर: बुजुर्गों और लक्ष्मी को 1955 की विनाशकारी बाढ़ याद थी, जब दलेई बाँध टूटा था और वैसी ही विभीषिका वर्तमान में फिर घटित हो रही थी।
उत्तर: यह प्राकृतिक आपदाओं (बाढ़, सूखा, तूफान) से त्रस्त ओड़ीसा के जनजीवन, विस्थापन और मानवीय बेबसी की समस्या पर आधारित है।
उत्तर: 'ढहते विश्वास' सातकोड़ी होता की अत्यंत मार्मिक कहानी है। ओड़ीसा में लगातार बारिश के कारण देवी नदी का दलेई बाँध टूटने के कगार पर पहुँच जाता है। गुणनिधि और अच्युत जैसे युवक बाँध बचाने का भरसक प्रयास करते हैं, लेकिन बाँध टूट जाता है। जलप्रलय में पूरा गाँव तबाह हो जाता है। लक्ष्मी अपने बच्चों को बचाने के संघर्ष में बरगद के पेड़ पर चढ़ जाती है, जहाँ उसका छोटा बेटा बिछड़ जाता है। कहानी प्राकृतिक आपदा और उसके समक्ष ढहते मानवीय विश्वास की करुण दास्तान है।
उत्तर: लक्ष्मी एक साहसी, कर्मठ, धैर्यवान और संघर्षशील ग्रामीण महिला है। पति के परदेस में रहने पर भी वह खेती और मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करती है। तूफान और सूखे की मार झेलने के बाद भी वह हिम्मत नहीं हारती। बाढ़ के समय वह अपने बच्चों की रक्षा हेतु अकेले जूझती है और अंत में एक मृत बच्चे को सीने से लगाकर मातृत्व की सर्वोच्च मिसाल पेश करती है।
उत्तर: कहानी में बाढ़ के रौद्र रूप का भयानक वर्णन है। नदी की प्रचंड धारा मकान, पेड़, मनुष्य और मवेशियों को तिनके की तरह बहा ले जाती है। ऊँचे टीले और स्कूल जलमग्न हो जाते हैं। परिवार बिछड़ जाते हैं, चारों तरफ लाशें तैरती हैं और जीवित बचे लोग भूख, प्यास और आंसुओं के बीच असहाय खड़े रह जाते हैं।
उत्तर: गाँव के लोग देवी चंडेश्वरी, दलेई बाँध और अपनी एकजुटता पर अटूट विश्वास करते थे कि वे सुरक्षित रहेंगे। परंतु बाढ़ ने बाँध, इंसानी मेहनत और आस्था के सभी स्तंभों को एक झटके में ध्वस्त कर दिया। जब विपत्ति में कोई रक्षा नहीं कर सका, तो इंसान का विश्वास पूरी तरह ढह गया। अतः यह शीर्षक पूर्णतः सार्थक और सटीक है।
उत्तर: गुणनिधि आधुनिक और शिक्षित युवा पीढ़ी का आदर्श प्रतीक है। उसने संकट के समय निष्क्रिय बैठने के बजाय युवाओं को संगठित कर स्वेच्छासेवक दल बनाया। उसने रात भर जागकर बाँध की पहरेदारी की, रेत की बोरियाँ डालीं और पूरे गाँव को सतर्क किया। यद्यपि प्रकृति के आगे उनकी मेहनत हार गई, परंतु उनका प्रयास अत्यंत प्रेरणादायी था।
उत्तर: टीले पर पहुँचे ग्रामीण आतंक, भय और अनिश्चितता से थर-थर काँप रहे थे। किसी के अपने परिजन बाढ़ में पीछे छूट गए थे। लोग एक-दूसरे से अपने बच्चों, पति या माता-पिता के बारे में पूछ रहे थे। स्कूल में पानी भरने पर वे छत पर चढ़ गए और अपनी आँखों के सामने सब कुछ डूबते देखने को विवश थे।
उत्तर: यह घटना मातृत्व की अमरता और असीम करुणा का प्रतीक है। अपने बेटे को खोने के बाद भी जब लक्ष्मी को एक अज्ञात बच्चे का शव मिलता है, तो उसकी ममता जाग उठती है। वह अपने और पराए के भेद से ऊपर उठकर मातृत्व के पवित्र धर्म को निभाती है, जो पाठक को भीतर तक झकझोर देता है।
उत्तर: महानदी और देवी नदी की उपजाऊ मिट्टी और जल से सभ्यताएँ पनपीं, फसलें लहलहाईं और लोगों का जीवन चला। लोग नदी को माँ मानकर पूजते रहे। परंतु जब वही नदी रौद्र रूप धारण कर तटबंध तोड़ देती है, तो जीवनदायिनी से संहारक बनकर उसी सभ्यता और बस्तियों को उजाड़ देती है।
उत्तर: यह कहानी स्थायी आपदा प्रबंधन, मजबूत तटबंधों के निर्माण और समय पर राहत व बचाव तंत्र स्थापित करने की आवश्यकता पर बल देती है। साथ ही यह संदेश देती है कि केवल अंधविश्वास और भाग्य के भरोसे रहने के बजाय आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों से आपदाओं से निपटने की तैयारी करनी चाहिए।
उत्तर: सातकोड़ी होता की शैली अत्यंत यथार्थवादी, चित्रात्मक और मार्मिक है। वे ग्रामीण परिवेश, स्थानीय शब्दावली और पात्रों के अंतर्द्वंद्व को जीवंत कर देते हैं। बाढ़ के दृश्य का उनका वर्णन इतना सजीव और गतिमान है कि पाठक के सामने पूरा जलप्रलय साक्षात घटित होता हुआ प्रतीत होता है।
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