Chapter 11. नौबतखाने में इबादत | BSEB 10 Hindi Subjective


बिहार बोर्ड कक्षा 10 हिन्दी (गद्य खंड) | पाठ 11: "नौबतखाने में इबादत" — यतींद्र मिश्र
सम्पूर्ण 50 महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ, लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

भाग 1: एक-पंक्ति / अति-लघु उत्तरीय प्रश्न (प्रश्न 1 से 30)
1. 'नौबतखाने में इबादत' पाठ के लेखक कौन हैं?

उत्तर: यतींद्र मिश्र।

2. यतींद्र मिश्र का जन्म कब और कहाँ हुआ था?

उत्तर: सन् 1977 में अयोध्या, उत्तर प्रदेश में।

3. यतींद्र मिश्र ने किस विश्वविद्यालय से हिन्दी में एम० ए० किया?

उत्तर: लखनऊ विश्वविद्यालय से।

4. यतींद्र मिश्र के प्रकाशित तीन काव्य-संग्रहों के नाम क्या हैं?

उत्तर: 'यदा-कदा', 'अयोध्या तथा अन्य कविताएँ' और 'ड्योढ़ी पर आलाप'।

5. प्रख्यात शास्त्रीय गायिका गिरिजा देवी के जीवन पर यतींद्र मिश्र ने कौन-सी पुस्तक लिखी?

उत्तर: 'गिरिजा'।

6. 'देवप्रिया' पुस्तक में किनके साथ यतींद्र मिश्र का संवाद संकलित है?

उत्तर: प्रख्यात नृत्यांगना सोनल मान सिंह के साथ।

7. यतींद्र मिश्र 1999 ई० से किस न्यास का संचालन कर रहे हैं?

उत्तर: 'विमला देवी फाउंडेशन' का।

8. यतींद्र मिश्र ने प्रसिद्ध गीतकार गुलजार की कविताओं का संपादन किस नाम से किया?

उत्तर: 'यार जुलाहे' नाम से।

9. 'नौबतखाने में इबादत' किस विधा की रचना है और यह किस महान कलाकार पर केंद्रित है?

उत्तर: यह व्यक्तिचित्र (संस्मरण) है, जो भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ पर केंद्रित है।

10. बिस्मिल्ला खाँ का बचपन का नाम क्या था?

उत्तर: कमरुद्दीन।

11. बिस्मिल्ला खाँ के बड़े भाई का क्या नाम था?

उत्तर: शम्सुद्दीन।

12. बिस्मिल्ला खाँ का जन्म कब और कहाँ हुआ था?

उत्तर: सन् 1916 ई० में डुमराँव (बिहार) के एक संगीत प्रेमी परिवार में।

13. शहनाई बजाने के लिए किसका प्रयोग होता है?

उत्तर: रीड (नरकट) का।

14. रीड किस प्रकार की घास से बनाई जाती है और यह कहाँ पाई जाती है?

उत्तर: नरकट (एक प्रकार की घास) से, जो डुमराँव के आसपास की नदियों के कछारों में पाई जाती है।

15. बिस्मिल्ला खाँ के परदादा, पिता और माता का नाम क्या था?

उत्तर: परदादा उस्ताद सलार हुसैन खाँ, पिता पैगंबरबख्श खाँ और माता मिठन थीं।

16. बिस्मिल्ला खाँ के मामाद्वय कौन थे जो जाने-माने शहनाई वादक थे?

उत्तर: सादिक हुसैन तथा अलीबख्श।

17. बिस्मिल्ला खाँ के ननिहाल में किस मंदिर की ड्योढ़ी पर रोज शहनाई बजती थी?

उत्तर: काशी के पंचगंगा घाट स्थित बालाजी मंदिर की ड्योढ़ी पर।

18. बिस्मिल्ला खाँ को बचपन में संगीत की आरंभिक प्रेरणा किन गायिका बहनों से मिली?

उत्तर: रसूलनबाई और बतूलनबाई से।

19. शहनाई को संगीत शास्त्रों में किस प्रकार के वाद्य में गिना जाता है?

उत्तर: 'सुषिर-वाद्यों' में।

20. अरब देश में फूँककर बजाए जाने वाले वाद्य को क्या कहते हैं?

उत्तर: 'नय'।

21. शहनाई को 'शाहनेय' क्यों कहा गया है?

उत्तर: सुषिर वाद्यों में शाह (सर्वश्रेष्ठ) होने के कारण।

22. दक्षिण भारत का कौन-सा वाद्य शहनाई की तरह मंगलध्वनि का पूरक है?

उत्तर: 'नागस्वरम्'।

23. बिस्मिल्ला खाँ नमाज के बाद खुदा से सजदे में क्या माँगते थे?

उत्तर: एक सच्चे और असरदार 'सुर' की नेमत।

24. मुहर्रम की कौन-सी तारीख खाँ साहब के लिए विशेष महत्व की होती थी?

उत्तर: आठवीं तारीख (जिस दिन वे खड़े होकर दालमंडी से फातमान तक 8 किमी पैदल रोते हुए नौहा बजाते जाते थे)।

25. खाँ साहब की पसंदीदा हीरोइन कौन थीं?

उत्तर: सुलोचना।

26. पक्का महाल में किसकी देशी घी की कचौड़ी की दुकान प्रसिद्ध थी?

उत्तर: कुलसुम हलवाइन की।

27. संकटमोचन मंदिर में हनुमान जयंती पर कितने दिनों का संगीत आयोजन होता है?

उत्तर: पाँच दिनों तक।

28. शास्त्रों में काशी को किस नाम से प्रतिष्ठित किया गया है?

उत्तर: 'आनंदकानन' के नाम से।

29. शिष्या द्वारा फटी तहमत (लुंगी) बदलने को कहने पर खाँ साहब ने क्या कहा था?

उत्तर: "धत्! पगली ई भारतरत्न हमको शहनईया पे मिला है, लुंगिया पे नहीं... मालिक से यही दुआ है कि फटा सुर न बख्शें"।

30. उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ का निधन कब और किस उम्र में हुआ?

उत्तर: 21 अगस्त 2006 को, 90 वर्ष की भरी-पूरी आयु में।

भाग 2: लघु उत्तरीय प्रश्न (प्रश्न 31 से 45)
31. डुमराँव का महत्व शहनाई और बिस्मिल्ला खाँ के संदर्भ में क्यों है?

उत्तर: डुमराँव बिस्मिल्ला खाँ की जन्मभूमि है और वहाँ की नदियों के कछारों में 'नरकट' घास पाई जाती है, जिससे शहनाई में फूँकने वाली 'रीड' बनाई जाती है।

32. बालाजी मंदिर का बिस्मिल्ला खाँ के जीवन में क्या महत्व था?

उत्तर: बालाजी मंदिर की ड्योढ़ी पर उनके खानदान की पीढ़ियों ने शहनाई बजाई। बिस्मिल्ला खाँ ने 14 वर्ष की उम्र से वहाँ के नौबतखाने में रियाज कर संगीत की साधना की।

33. रसूलनबाई और बतूलनबाई के प्रति बिस्मिल्ला खाँ का क्या दृष्टिकोण था?

उत्तर: उनके घर के रास्ते से गुजरते हुए बिस्मिल्ला खाँ ने ठुमरी, टप्पे और दादरा के बोल सुने, जिससे उनके बाल-मन की स्लेट पर संगीत की पहली वर्णमाला उकेरी गई।

34. शहनाई को 'सुषिर वाद्यों में शाह' क्यों कहा गया है?

उत्तर: फूँककर बजने वाले सभी सुषिर वाद्यों में शहनाई की मंगलध्वनि, सुरों का लालित्य और मिठास सर्वश्रेष्ठ है, इसलिए इसे 'शाहनेय' कहा गया।

35. बिस्मिल्ला खाँ खुदा से क्या दुआ माँगते थे और क्यों?

उत्तर: वे खुदा से सिर्फ 'सच्चे सुर की नेमत' माँगते थे, ऐसा सुर जिसमें वह तासीर हो कि सुनने वाले की आँखों से सच्चे मोती जैसे अनगढ़ आँसू छलक पड़ें।

36. मुहर्रम के दिनों में बिस्मिल्ला खाँ का खानदान क्या नियम निभाता था?

उत्तर: मुहर्रम के पूरे 10 दिनों तक उनके खानदान का कोई भी व्यक्ति न शहनाई बजाता था और न ही किसी संगीत कार्यक्रम में भाग लेता था।

37. कुलसुम हलवाइन की कचौड़ी को 'संगीतमय कचौड़ी' क्यों कहा गया?

उत्तर: क्योंकि जब कुलसुम खौलते घी में कचौड़ी डालती थी, तो छन से उठने वाली आवाज में खाँ साहब को संगीत के सारे आरोह-अवरोह सुनाई देते थे।

38. काशी से बाहर रहने पर बिस्मिल्ला खाँ अपनी आस्था कैसे प्रकट करते थे?

उत्तर: वे काशी से बाहर होने पर हमेशा काशी विश्वनाथ और बालाजी मंदिर की दिशा की ओर मुँह करके बैठते थे और उसी ओर शहनाई का प्याला घुमाकर बजाते थे।

39. "काशी संस्कृति की पाठशाला है" — इस कथन से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: काशी में संगीत, कला, धर्म और भाईचारे का अनूठा संगम है; यहाँ हनुमान और विश्वनाथ के साथ बिस्मिल्ला खाँ और गंगा की साझी तहजीब बसती है।

40. बिस्मिल्ला खाँ ने फटी लुंगी की तुलना सुर से किस प्रकार की?

उत्तर: उन्होंने कहा कि लुंगी का क्या है, वह फटने पर सिल सकती है, लेकिन यदि एक बार सुर फट गया (बेसुरा हो गया), तो ईश्वर भी उसे माफ नहीं करेगा।

41. सन् 2000 के बाद काशी के किन बदलावों ने खाँ साहब को व्यथित किया?

उत्तर: पक्का महाल से मलाई-बरफ बेचने वालों का जाना, कचौड़ी-जलेबी की पुरानी खुशबू का खोना और संगीत व संगतकारों के प्रति घटता आदर उन्हें दुखी करता था।

42. बिस्मिल्ला खाँ को किन-किन राष्ट्रीय सम्मानों से अलंकृत किया गया?

उत्तर: उन्हें देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न', 'पद्मविभूषण' और 'संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार' सहित अनेक मानद उपाधियों से सम्मानित किया गया।

43. लेखक यतींद्र मिश्र का सांस्कृतिक योगदान क्या है?

उत्तर: वे कवि और संपादक हैं, जिन्होंने 'विमला देवी फाउंडेशन' तथा 'थाती' व 'सहित' पत्रिकाओं के माध्यम से शास्त्रीय संगीत और लोक-कलाओं का संवर्धन किया।

44. बिस्मिल्ला खाँ के लिए काशी और शहनाई का क्या महत्व था?

उत्तर: वे कहते थे कि जिस जमीन ने तालीम और अदब दी, उसे छोड़कर कहाँ जाएँ; उनके लिए शहनाई और काशी से बढ़कर इस धरती पर कोई जन्नत नहीं थी।

45. बिस्मिल्ला खाँ की सबसे बड़ी मानवीय विशेषता क्या थी?

उत्तर: अपार ख्याति और भारत रत्न पाने के बाद भी उनका स्वभाव अत्यंत सरल, निरहंकारी और जीवन भर संगीत सीखने के प्रति समर्पित रहा।

भाग 3: दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (प्रश्न 46 से 50)
46. 'नौबतखाने में इबादत' पाठ का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर: प्रस्तुत पाठ में लेखक यतींद्र मिश्र ने भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ के जीवन, संगीत साधना, धार्मिक सद्भाव और सादगी का सजीव चित्रण किया है। डुमराँव में जन्मे कमरुद्दीन ने काशी के बालाजी मंदिर के नौबतखाने में वर्षों रियाज कर शहनाई को विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित किया। वे सच्चे नमाजी मुस्लिम थे, किंतु काशी विश्वनाथ और गंगा मैया के प्रति उनकी अनन्य भक्ति थी। वे मुहर्रम के शोक को पूरे समर्पण से मनाते थे। जीवन भर पुरस्कारों और ऐश्वर्य से दूर रहकर वे केवल 'सच्चे सुर' की इबादत करते रहे। यह पाठ उनकी सादगी, गंगा-जमुनी तहजीब और संगीत के प्रति असीम समर्पण की अमर गाथा है।

47. "बिस्मिल्ला खाँ भारत की साझी संस्कृति (गंगा-जमुनी तहजीब) के प्रतीक थे" — पाठ के आधार पर सिद्ध कीजिए।

उत्तर: बिस्मिल्ला खाँ का व्यक्तित्व भारत की मिली-जुली संस्कृति का सबसे उत्कृष्ट उदाहरण है:

  • वे पाँचों वक्त नमाज पढ़ने वाले समर्पित मुस्लिम थे और मुहर्रम में 8 किमी पैदल रोते हुए नौहा बजाते थे।
  • साथ ही वे बाबा विश्वनाथ और बालाजी के परम भक्त थे; संकटमोचन मंदिर में नियमित बजाते थे और बाहर रहने पर मंदिर की ओर मुँह करके शहनाई का रुख करते थे।
  • वे गंगा मैया को अपनी माँ मानते थे और काशी को स्वर्ग से भी बढ़कर समझते थे।
उनके जीवन में धर्म की संकीर्णता कभी नहीं आई; उन्होंने सिद्ध किया कि संगीत और भक्ति किसी मजहब की सीमाओं में नहीं बँधते।

48. 'नौबतखाने में इबादत' शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: 'नौबतखाना' प्रवेश द्वार के ऊपर वह स्थान होता है जहाँ मांगलिक वाद्य बजाए जाते हैं, और 'इबादत' का अर्थ ईश्वर की प्रार्थना/उपासना है। बिस्मिल्ला खाँ के लिए शहनाई वादन केवल एक पेशा नहीं था, बल्कि नौबतखाने में बैठकर की जाने वाली खुदा की सच्ची इबादत थी। वे हर धुन और सुर के माध्यम से ईश्वर से साक्षात्कार करते थे। यह शीर्षक खाँ साहब के संगीत को पूजा और अध्यात्म का दर्जा देता है, इसलिए यह पूर्णतः सटीक और सार्थक है।

49. बिस्मिल्ला खाँ के सादगीपूर्ण जीवन और सुर के प्रति निष्ठा का वर्णन कीजिए।

उत्तर: भारत रत्न मिलने के बाद भी खाँ साहब का जीवन सादगी की मिसाल था। जब उनकी शिष्या ने उन्हें फटी तहमत (लुंगी) न पहनने की सलाह दी, तो उन्होंने सहजता से कहा कि भारत रत्न उनकी शहनाई को मिला है, लुंगी को नहीं। वे ईश्वर से कभी धन-दौलत नहीं माँगते थे, बल्कि केवल एक ही प्रार्थना करते थे कि उनका सुर कभी न फटे। 90 वर्ष की आयु तक वे संगीत के एक समर्पित विद्यार्थी की तरह निरंतर सीखने की ललक बनाए रखे।

50. निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए:
"क्या करें गियाँ, ई काशी छोड़कर कहाँ जाएँ, गंगा मइया यहाँ, बाबा विश्वनाथ यहाँ, बालाजी का मंदिर यहाँ, यहाँ हमारे खानदान की कई पुश्तों ने शहनाई बजाई है... शहनाई और काशी से बढ़कर कोई जन्नत नहीं इस धरती पर हमारे लिए।"

उत्तर:

  • प्रसंग: प्रस्तुत पंक्तियाँ यतींद्र मिश्र द्वारा रचित व्यक्तिचित्र 'नौबतखाने में इबादत' से उद्धृत हैं। इसमें उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ का काशी और अपनी मिट्टी के प्रति अगाध प्रेम प्रकट हुआ है।
  • व्याख्या: खाँ साहब कहते हैं कि काशी उनके जीवन की आत्मा है। जहाँ गंगा मैया का पावन तट, बाबा विश्वनाथ का सान्निध्य और बालाजी का वह मंदिर है जहाँ उनके पूर्वज पीढ़ियों से रियाज करते आए हैं, उस पावन भूमि को छोड़कर वे कहीं नहीं जा सकते। जिस काशी ने उन्हें संस्कार, अदब और संगीत की तालीम दी, वही उनके लिए संसार का सबसे बड़ा स्वर्ग (जन्नत) है। यह उनकी जन्मभूमि और कर्मभूमि के प्रति अनन्य कृतज्ञता को दर्शाता है।

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