Chapter 10. मछली | BSEB 10 Hindi Notes


पाठ 10: मछली

बिहार बोर्ड (BSEB) कक्षा 10वीं हिंदी (गोधूलि भाग-2, गद्य खंड) | सम्पूर्ण नोट्स

1. पाठ का संक्षिप्त परिचय (Overview)

  • पाठ का नाम: मछली
  • विधा: कहानी
  • लेखक: विनोद कुमार शुक्ल
  • कहानी संकलन: 'महाविद्यालय' कहानी संग्रह से संकलित।
  • मूल भाव: यह कहानी एक छोटे शहर के निम्न-मध्यमवर्गीय परिवार के भीतरी वातावरण, जीवन-यथार्थ, बच्चों की मासूमियत, संवेदनशीलता और घर के भीतर व्याप्त लैंगिक भेदभाव (स्त्री की विवशता) को दर्शाती है। कहानी में 'मछली' और घर की 'दीदी' की स्थिति में एक गहरी प्रतीकात्मक समानता दिखाई गई है।

2. लेखक परिचय (विनोद कुमार शुक्ल)

  • जन्म: 1 जनवरी 1937 ई० को राजनाँदगाँव (छत्तीसगढ़) में हुआ था।
  • पेशा/कार्य:
    • वृत्ति के रूप में प्राध्यापन को अपनाया।
    • इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर रहे।
    • 1994 से 1996 ई० तक 'निराला सृजनपीठ' में अतिथि साहित्यकार रहे।
  • प्रमुख कृतियाँ:
    • कविता संग्रह: 'लगभग जयहिंद' (पहचान सीरीज - 1971 ई०), 'वह आदमी नया गरम कोट पहिनकर चला गया विचार की तरह', 'सबकुछ होना बचा रहेगा', 'अतिरिक्त नहीं'।
    • उपन्यास: 'नौकर की कमीज़', 'खिलेगा तो देखेंगे', 'दीवार में एक खिड़की रहती थी'।
    • कहानी संग्रह: 'पेड़ पर कमरा', 'महाविद्यालय'।
  • विशेष तथ्य:
    • उनके उपन्यासों का कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद हुआ है।
    • इतालवी भाषा में उनकी कविताओं एवं 'पेड़ पर कमरा' कहानी संग्रह का अनुवाद हुआ है।
    • 'नौकर की कमीज़' उपन्यास पर प्रसिद्ध फिल्मकार मणि कौल द्वारा फिल्म का निर्माण भी किया गया है।
  • पुरस्कार एवं सम्मान:
    • रघुवीर सहाय स्मृति पुरस्कार: 1992 ई० में।
    • दयावती मोदी कवि शेखर सम्मान: 1997 ई० में।
    • साहित्य अकादमी पुरस्कार: 1990 ई० में।

3. कहानी का विस्तृत सारांश (Summary)

1. बाजार से मछली खरीदना और बच्चों की योजना:
  • पिताजी ने बाजार से तीन मछलियाँ खरीदी थीं।
  • लेखक और उनका छोटा भाई संतु बारिश में भीगते हुए पतली गली से घर की ओर दौड़ रहे थे ताकि मछलियाँ बिना पानी के झोले में ही न मर जाएँ।
  • झोले में तीन में से एक मछली खरीदते समय ही मर चुकी थी, जबकि दो मछलियाँ ज़िंदा थीं।
  • लेखक और संतु ने मन ही मन सोचा था कि पिताजी से एक मछली माँगकर कुएँ में डाल देंगे और जब मन होगा बाल्टी से निकालकर खेलेंगे, फिर वापस कुएँ में डाल देंगे।
2. नहानघर (स्नानघर) की घटना और मोहरा नदी:
  • घर पहुँचकर दोनों नहानघर (बाथरूम) में गए और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। बाल्टी को आधा खाली करके झोले की तीनों मछलियों को उसमें उलट दिया।
  • एक बार एक छोटी मछली लेखक के हाथ से फिसलकर नहानघर की नाली में घुस गई थी। दीदी ने उन्हें बताया था कि यह नाली शहर की बड़ी नाली से मिलती है और फिर तीन मील दूर मोहरा नदी में चली जाती है।
3. आँखों में परछाईं का रहस्य:
  • संतु ठंड से काँप रहा था। दोनों ने अपनी गीली कमीजें निचोड़ लीं।
  • दीदी ने बताया था कि जो मछली मर जाती है, उसकी आँख में झाँकने पर अपनी परछाईं (छाया) नहीं दिखाई देती।
  • लेखक ने बाल्टी में मरी पड़ी मछली को फर्श पर रखकर देखा और संतु से भी देखने को कहा। लेखक को उसकी आँख में एक धुंधली-सी परछाईं दिखी, जिससे उसे लगा कि शायद उसमें अभी थोड़ी जान बाकी है।
4. माँ, दीदी और भग्गू का प्रसंग:
  • संतु को जब पता चला कि माँ मछली के लिए मसाला पीस रही है और मछली आज ही कटेगी, तो वह उदास हो गया।
  • घर में केवल पिताजी मछली और गोश्त खाते थे; माँ और दीदी इसे छूती भी नहीं थीं।
  • घर का नौकर भग्गू था, जो मछली काटने का काम करता था। मछली काटने के लिए परछी में ड्रम के पीछे एक पाटा रखा रहता था, जिस पर चाकू के आड़े-तिरछे निशान बने हुए थे।
5. संतु का मछली लेकर भागना और पिताजी का क्रोध:
  • दीदी अपने कमरे में साड़ी से मुँह ढँककर सिसक-सिसक कर रो रही थी। उसने संतु और लेखक के गीले कपड़े बदलवाए और संतु के बालों में तेल लगाया।
  • भग्गू ने पाटे पर रखकर जैसे ही एक मछली की गर्दन काटी, संतु अचानक अंगोछे में से एक ज़िंदा मछली उठाकर सरपट बाहर की तरफ भागा।
  • भग्गू मछली छीनने के लिए "अरे! अरे! अरे!" चिल्लाता हुआ संतु के पीछे भागा।
  • बाड़े के पास कुएँ के समीप संतु ज़मीन पर पट पड़ गया और मछली को पेट के पास छिपा लिया ताकि भग्गू उसे छीन न सके। भग्गू ने उससे मछली छीन ली।
  • अंदर कमरे में पिताजी बहुत गुस्से में थे। ऐसा लग रहा था कि पिताजी ने दीदी को मारा था।
  • पिताजी ने दहाड़कर नौकर भग्गू से कहा—
    "भग्गू! अगर नरेन घर में घुसे तो साले के हाथ-पैर तोड़ बाहर फेंक देना, बाद में जो होगा मैं भुगत लूँगा!"
  • संतु सहमा हुआ कीचड़ से सने कपड़ों में खड़ा था और पूरे घर में मछलियों की गंध फैल गई थी।

4. प्रतीकात्मक भावार्थ एवं समीक्षा (Symbolic Significance)

  • मछली और दीदी का सादृश्य: कहानी में मछली और दीदी दोनों की स्थिति एक समान है। जिस प्रकार मछली पानी से अलग होकर छटपटाती है और काटी जाती है, उसी प्रकार पितृसत्तात्मक परिवार में दीदी भी घर की चारदीवारी और सामाजिक बंधनों के भीतर घुट रही है और सिसक-सिसक कर रोने को विवश है।
  • संतु का बाल-मनोविज्ञान: संतु का मछली लेकर भागना जीव-दया, मासूमियत और हिंसा के प्रति एक मूक बाल-विद्रोह को प्रकट करता है।

5. परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Important One-Liners)

  • 'मछली' कहानी के लेखक कौन हैं — विनोद कुमार शुक्ल
  • 'मछली' कहानी किस संकलन से ली गई है — 'महाविद्यालय' कहानी संग्रह से
  • विनोद कुमार शुक्ल का जन्म कब और कहाँ हुआ था — 1 जनवरी 1937 ई० को राजनाँदगाँव (छत्तीसगढ़) में
  • विनोद कुमार शुक्ल को साहित्य अकादमी पुरस्कार कब मिला — 1990 ई० में
  • 'नौकर की कमीज़' उपन्यास पर किसने फिल्म बनाई — मणि कौल ने
  • बाजार से कुल कितनी मछलियाँ खरीदी गई थीं — तीन (3) मछलियाँ
  • झोले में कितनी मछलियाँ ज़िंदा थीं और कितनी मरी हुई — दो ज़िंदा और एक मरी हुई
  • बच्चे मछली को कहाँ डालकर पालना चाहते थे — कुएँ में
  • लेखक के छोटे भाई का नाम क्या है — संतु
  • घर में मछली काटने का काम कौन करता था — भग्गू (घर का नौकर)
  • घर में मछली कौन खाता था — केवल पिताजी (माँ और दीदी नहीं खाती थीं)
  • मरी हुई मछली की आँख में क्या नहीं दिखती — परछाईं (छाया)
  • नहानघर की नाली किस नदी में जाकर मिलती है — मोहरा नदी में (शहर से 3 मील दूर)
  • संतु मछली लेकर क्यों भागा था — मछली को कुएँ में डालने (उसे कटने से बचाने) के लिए
  • संतु के पीछे कौन भागा था — भग्गू
  • पिताजी ने किसके हाथ-पैर तोड़ने की बात कही थी — नरेन के
  • कमरे में सिसक-सिसक कर कौन रो रही थी — दीदी

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