खण्ड - 'अ' : वस्तुनिष्ठ प्रश्न (100 Objective Questions)
निर्देश: प्रश्न संख्या 1 से 100 तक के प्रत्येक प्रश्न के साथ चार विकल्प दिए गए हैं। सभी 100 प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर एवं विस्तृत व्याख्याएँ नीचे दी गई हैं।
1. 'बाबा साहेब भीमराव आम्बेडकर' का जन्म किस सामाजिक परिवेश में हुआ था?
(A) क्षत्रिय परिवार में
(B) दलित परिवार में
(C) ब्राह्मण परिवार में
(D) वैश्य परिवार में
उत्तर: (B) दलित परिवार में
व्याख्या: बाबा साहेब आम्बेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को महू (मध्य प्रदेश) में एक शोषित दलित (महार) परिवार में हुआ था।
2. 'आम्बेडकर की दृष्टि में भाईचारे का वास्तविक रूप कैसा होता है?'
(A) पानी और नमक के मिश्रण जैसा
(B) दूध और पानी के मिश्रण जैसा
(C) तेल और पानी के मिश्रण जैसा
(D) चीनी और पानी के मिश्रण जैसा
उत्तर: (B) दूध और पानी के मिश्रण जैसा
व्याख्या: आम्बेडकर जी के अनुसार लोकतंत्र में समाज के सभी वर्गों का परस्पर संबंध दूध और पानी के अटूट मिश्रण की तरह एकरस होना चाहिए।
3. 'विष के दाँत' कहानी में 'खोखा' किसे कहा गया है?
(A) मदन को
(B) काशू को
(C) गिरधर को
(D) शैलेश को
उत्तर: (B) काशू को
व्याख्या: बंगाली भाषा में छोटे बच्चे को 'खोखा' कहा जाता है; सेन साहब के बिगड़े हुए लाडले बेटे काशू को खोखा कहा गया है।
4. 'मदन' के पिता का क्या नाम था?
(A) सेन साहब
(B) गिरधरलाल
(C) मुरलीधर
(D) सोफर
उत्तर: (B) गिरधरलाल
व्याख्या: गिरधरलाल सेन साहब की फैक्ट्री में एक साधारण किरानी था और मदन उसी का स्वाभिमानी पुत्र था।
5. 'मैक्समूलर' ने संस्कृत भाषा का अध्ययन किस उम्र में प्रारंभ किया था?
(A) 15 वर्ष की उम्र में
(B) 18 वर्ष की उम्र में
(C) 20 वर्ष की उम्र में
(D) 22 वर्ष की उम्र में
उत्तर: (B) 18 वर्ष की उम्र में
व्याख्या: मैक्समूलर ने 18 वर्ष की अल्पायु में लिपजिंग विश्वविद्यालय (जर्मनी) में संस्कृत भाषा और साहित्य का गहन अध्ययन शुरू किया था।
6. 'शाहनामा' का रचनाकाल क्या माना जाता है?
(A) सातवीं-आठवीं सदी
(B) दसवीं-ग्यारहवीं सदी
(C) चौथी-पाँचवीं सदी
(D) तेरहवीं सदी
उत्तर: (B) दसवीं-ग्यारहवीं सदी
व्याख्या: 'भारत से हम क्या सीखें' पाठ के अनुसार महाकवि फिरदौसी रचित 'शाहनामा' का ऐतिहासिक रचनाकाल दसवीं-ग्यारहवीं सदी है।
7. 'नाखून क्यों बढ़ते हैं' पाठ में लेखक से किसने यह विचित्र प्रश्न पूछा था?
(A) लेखक की पत्नी ने
(B) लेखक की छोटी लड़की ने
(C) लेखक के मित्र ने
(D) लेखक के नौकर ने
उत्तर: (B) लेखक की छोटी लड़की ने
व्याख्या: एक दिन लेखक हजारी प्रसाद द्विवेदी की अबोध छोटी बेटी ने सहज भाव से पूछा— "पिताजी, नाखून क्यों बढ़ते हैं?"
8. 'शहथक' (सिक्थक) का क्या अर्थ होता है?
(A) साबुन
(B) मोम
(C) महावर
(D) दर्पण
उत्तर: (B) मोम
व्याख्या: 'कामसूत्र' और द्विवेदी जी के निबंध में उल्लिखित 'सिक्थक' शब्द का अर्थ मोम (Wax) होता है, जिससे नाखूनों को चिकना किया जाता था।
9. 'नागरी लिपि' के आरंभिक ऐतिहासिक अभिलेख किस भाषा में मिलते हैं?
(A) प्राकृत और संस्कृत
(B) पालि
(C) अपभ्रंश
(D) मागधी
उत्तर: (A) प्राकृत और संस्कृत
व्याख्या: प्राचीन शिलालेखों, दानपत्रों और ताम्रपत्रों में नागरी लिपि के प्रारंभिक रूप मुख्य रूप से संस्कृत और प्राकृत भाषा में मिलते हैं।
10. 'मिहिरभोज' की ग्वालियर प्रशस्ति किस भाषा में उत्कीर्ण है?
(A) प्राकृत
(B) संस्कृत
(C) हिन्दी
(D) अपभ्रंश
उत्तर: (B) संस्कृत
व्याख्या: गुर्जर-प्रतिहार नरेश मिहिरभोज की विख्यात ग्वालियर प्रशस्ति नागरी लिपि तथा संस्कृत भाषा में उत्कीर्ण है।
11. 'बहादुर' अपने घर से किसके डर से भागा था?
(A) पिता के डर से
(B) माँ की मार के डर से
(C) चाचा के डर से
(D) पुलिस के डर से
उत्तर: (B) माँ की मार के डर से
व्याख्या: प्रिय भैंस को पीटने के कारण माँ द्वारा अत्यधिक पीटे जाने के क्षोभ और भय से बहादुर घर छोड़कर भाग आया था।
12. लेखक के बड़े लड़के का क्या नाम था?
(A) किशोर
(B) मलय
(C) मदन
(D) सुरेश
उत्तर: (A) किशोर
व्याख्या: अमरकांत की कहानी 'बहादुर' में लेखक के उद्दंड और शान-शौकत पसंद बड़े बेटे का नाम किशोर था।
13. 'जारशाही' का अंत किस क्रांति के द्वारा हुआ था?
(A) 1789 की फ्रांसीसी क्रांति
(B) 1917 की रूसी (बोल्शेविक) क्रांति
(C) 1949 की चीनी क्रांति
(D) 1857 की भारतीय क्रांति
उत्तर: (B) 1917 की रूसी (बोल्शेविक) क्रांति
व्याख्या: रूस में 1917 की महान समाजवादी क्रांति के बाद निरंकुश जारशाही का पूर्ण उन्मूलन हुआ था।
14. 'परंपरा का मूल्यांकन' पाठ में लेखक ने किसे जातीय अस्मिता का आधार माना है?
(A) अर्थनीति को
(B) साहित्य और संस्कृति को
(C) सैन्य शक्ति को
(D) भूगोल को
उत्तर: (B) साहित्य और संस्कृति को
व्याख्या: डॉ० रामविलास शर्मा के अनुसार किसी भी राष्ट्र अथवा जाति की अमर अस्मिता का निर्माण उसके साहित्य व सांस्कृतिक धरोहर से होता है।
15. बिरजू महाराज के चाचा का क्या नाम था जो स्वयं कथक नर्तक थे?
(A) शंभु महाराज
(B) शिव महाराज
(C) दया महाराज
(D) हरि महाराज
उत्तर: (A) शंभु महाराज
व्याख्या: पंडित शंभु महाराज और लच्छू महाराज दोनों बिरजू महाराज के सगे चाचा और कथक के दिग्गज कलाकार थे।
16. बिरजू महाराज ने गंडा बाँधने पर अपने पिता को नजराने के रूप में कितने रुपये दिए थे?
(A) ₹200
(B) ₹500
(C) ₹1000
(D) ₹100
उत्तर: (B) ₹500
व्याख्या: बिरजू महाराज ने ट्यूशन से जुटाकर गंडा बँधाई (शागिर्दी की दक्षिणा) के रूप में बाबूजी को ₹500 नजराना दिया था।
17. 'आविन्यों' किस देश का एक प्रमुख कला-केंद्र है?
(A) इंग्लैंड
(B) फ्रांस
(C) रूस
(D) जर्मनी
उत्तर: (B) फ्रांस
व्याख्या: आविन्यों दक्षिणी फ्रांस का ऐतिहासिक सांस्कृतिक नगर है, जहाँ प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय रंगमंच समारोह आयोजित होता है।
18. 'नदी के किनारे भी नदी है' काव्य-कृति के रचयिता कौन हैं?
(A) अशोक वाजपेयी
(B) कुंवर नारायण
(C) विनोद कुमार शुक्ल
(D) अज्ञेय
उत्तर: (A) अशोक वाजपेयी
व्याख्या: 'नदी के किनारे भी नदी है', 'शहर अब भी संभावना है' आदि कवि अशोक वाजपेयी की विशिष्ट काव्य-कृतियाँ हैं।
19. 'मछली' कहानी में लेखक के छोटे भाई का क्या नाम था?
(A) संतू
(B) मंतू
(C) पिंटू
(D) छोटू
उत्तर: (A) संतू
व्याख्या: 'मछली' कहानी में लेखक के मासूम छोटे भाई का नाम संतू था जो मछली को कटने से बचाना चाहता था।
20. 'पेड़ पर कमरा' किसकी प्रसिद्ध कहानी-संग्रह है?
(A) अमरकांत
(B) विनोद कुमार शुक्ल
(C) यतीन्द्र मिश्र
(D) मैक्समूलर
उत्तर: (B) विनोद कुमार शुक्ल
व्याख्या: 'मछली' कहानी विनोद कुमार शुक्ल के सुप्रसिद्ध कहानी-संग्रह 'पेड़ पर कमरा' से ही संकलित की गई है।
21. उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ को किस वर्ष 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया था?
(A) 1998 ई०
(B) 2001 ई०
(C) 2005 ई०
(D) 2010 ई०
उत्तर: (B) 2001 ई०
व्याख्या: शहनाई के जादुई फनकार बिस्मिल्ला खाँ को सन् 2001 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से नवाजा गया था।
22. बिस्मिल्ला खाँ के ननिहाल का संबंध किस पवित्र नगर से था?
(A) काशी (वाराणसी)
(B) प्रयागराज
(C) अयोध्या
(D) हरिद्वार
उत्तर: (A) काशी (वाराणसी)
व्याख्या: बिस्मिल्ला खाँ का जन्म डुमराँव में हुआ था, किंतु उनका पालन-पोषण और संगीत-साधना ननिहाल काशी (बालाजी मंदिर परिसर) में हुई।
23. गाँधी जी के अनुसार शिक्षा की शुरुआत किससे होनी चाहिए?
(A) किताबी ज्ञान से
(B) किसी उपयोगी हस्तकला (दस्तकारी) से
(C) संगीत सीखने से
(D) विदेशी भाषा से
उत्तर: (B) किसी उपयोगी हस्तकला (दस्तकारी) से
व्याख्या: 'बेसिक शिक्षा' (बुनियादी शिक्षा) में गाँधी जी ने बच्चों को किसी स्थानीय दस्तकारी या हस्तकला से शिक्षण प्रारंभ करने पर बल दिया।
24. 'सत्य के साथ मेरे प्रयोग' (My Experiments with Truth) किसकी विश्वविख्यात आत्मकथा है?
(A) जवाहरलाल नेहरू
(B) महात्मा गाँधी
(C) डॉ० राजेंद्र प्रसाद
(D) सरदार पटेल
उत्तर: (B) महात्मा गाँधी
व्याख्या: यह अमर आत्मकथा राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी द्वारा मूल रूप से गुजराती भाषा में लिखी गई थी।
25. 'सिख धर्म' के प्रवर्तक कौन थे?
(A) गुरु नानक देव जी
(B) गुरु गोविंद सिंह जी
(C) गुरु अर्जुन देव जी
(D) गुरु तेग बहादुर जी
उत्तर: (A) गुरु नानक देव जी
व्याख्या: सिख धर्म की स्थापना प्रथम पातशाही गुरु नानक देव जी ने निर्गुण भक्ति और सामाजिक समरसता के आधार पर की थी।
26. गुरु नानक के पिता का क्या नाम था?
(A) कालूचंद खत्री
(B) अमरदास
(C) दयालदास
(D) रामदास
उत्तर: (A) कालूचंद खत्री
व्याख्या: गुरु नानक जी के पिता का नाम कालूचंद खत्री और माता का नाम तृप्ता देवी था।
27. 'रसखान' ने चितचोर किसे कहा है?
(A) बलराम को
(B) श्रीकृष्ण को
(C) राधा को
(D) यशोदा को
उत्तर: (B) श्रीकृष्ण को
व्याख्या: "मन मानिक लै गयो, चितचोर नंद-नंद" अर्थात् रसखान कहते हैं कि नंद के लाल श्रीकृष्ण ने मेरा चित्त (हृदय) चुरा लिया है।
28. रसखान किस राजवंश से संबंधित पठान थे?
(A) लोदी राजवंश
(B) खिलजी राजवंश
(C) पठान राजवंश (दिल्ली के शाही पठान)
(D) मुगल राजवंश
उत्तर: (C) पठान राजवंश (दिल्ली के शाही पठान)
व्याख्या: रसखान दिल्ली के संपन्न शाही पठान कुल में उत्पन्न हुए थे, किंतु कृष्ण भक्ति में रंगकर ब्रजभूमि में बस गए।
29. 'घनानंद' ने अपने काव्य में किसे संबोधित किया है?
(A) राधा को
(B) सुजान को (लौकिक प्रेमिका व अलौकिक कृष्ण)
(C) मीरा को
(D) शबाना को
उत्तर: (B) सुजान को (लौकिक प्रेमिका व अलौकिक कृष्ण)
व्याख्या: घनानंद के काव्य में 'सुजान' शब्द लौकिक स्तर पर उनकी प्रेमिका और अलौकिक स्तर पर सर्वज्ञ श्रीकृष्ण का द्योतक है।
30. 'सुजान सागर' और 'विरह लीला' किसकी अमर रचनाएँ हैं?
(A) रसखान
(B) घनानंद
(C) भूषण
(D) बिहारी
उत्तर: (B) घनानंद
व्याख्या: 'सुजान सागर', 'विरह लीला' और 'रसकेलि वल्ली' रीतिमुक्त कवि घनानंद के प्रमुख काव्य-ग्रंथ हैं।
31. 'बदरीनारायण चौधरी प्रेमघन' की भाषा मुख्यतः कौन-सी थी?
(A) खड़ी बोली और ब्रजभाषा
(B) मैथिली
(C) भोजपुरी
(D) अवधी
उत्तर: (A) खड़ी बोली और ब्रजभाषा
व्याख्या: प्रेमघन जी ने अपने पद्य में ब्रजभाषा तथा गद्य में अलंकृत मानक खड़ी बोली का अत्यंत प्रौढ़ प्रयोग किया है।
32. 'स्वदेशी' कविता का मूल स्वर क्या है?
(A) शृंगारिक चेतना
(B) राष्ट्रीय चेतना और स्वदेशी प्रेम
(C) भक्ति भावना
(D) रहस्यवाद
उत्तर: (B) राष्ट्रीय चेतना और स्वदेशी प्रेम
व्याख्या: इस कविता में विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार कर अपनी भाषा, संस्कृति और स्वदेशी मूल्यों को अपनाने का राष्ट्रीय आह्वान है।
33. 'सुमित्रानंदन पंत' का जन्म अल्मोड़ा (उत्तराखंड) के किस गाँव में हुआ था?
(A) कौसानी
(B) बागेश्वर
(C) रानीखेत
(D) चंपावत
उत्तर: (A) कौसानी
व्याख्या: प्रकृति के सुकुमार कवि पंत जी का जन्म 20 मई 1900 को कौसानी (जिला: अल्मोड़ा, उत्तराखंड) में हुआ था।
34. 'शरदिन्दुहासिनी' किसे कहा गया है?
(A) लक्ष्मी को
(B) भारतमाता को
(C) सरस्वती को
(D) प्रकृति को
उत्तर: (B) भारतमाता को
व्याख्या: पंत जी ने भारतमाता के प्राचीन वैभव का स्मरण करते हुए लिखा है: "शरदिन्दुहासिनी, सुखदा, वरदा, मातरम्।"
35. दिनकर जी किस विश्वविद्यालय के कुलपति (Vice Chancellor) भी रहे थे?
(A) पटना विश्वविद्यालय
(B) भागलपुर विश्वविद्यालय
(C) मगध विश्वविद्यालय
(D) दिल्ली विश्वविद्यालय
उत्तर: (B) भागलपुर विश्वविद्यालय
व्याख्या: राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित उपकुलपति रहे थे।
36. 'जनतंत्र का जन्म' में 'देवता' किसे कहा गया है?
(A) मंदिर के पुजारियों को
(B) सड़कों पर गिट्टी तोड़ते और खेतों में काम करते मजदूरों-किसानों को
(C) राजाओं को
(D) देवताओं की मूर्तियों को
उत्तर: (B) सड़कों पर गिट्टी तोड़ते और खेतों में काम करते मजदूरों-किसानों को
व्याख्या: दिनकर जी ने स्पष्ट कहा है: "देवता कहीं सड़कों पर गिट्टी तोड़ रहे, देवता मिलेंगे खेतों में खलिहानों में।"
37. 'हिरोशिमा' कविता में सूरज किस दिशा से नहीं निकला था?
(A) पूर्व से
(B) पश्चिम से
(C) क्षितिज से
(D) उत्तर से
उत्तर: (C) क्षितिज से
व्याख्या: अज्ञेय जी ने लिखा: "क्षितिज पर नहीं, नगर के चौक : धूप बरसी, पर अंतरिक्ष से नहीं, फटी मिट्टी से।"
38. अज्ञेय जी को किस काव्य-कृति पर 'ज्ञानपीठ पुरस्कार' मिला था?
(A) कितनी नावों में कितनी बार
(B) आँगन के पार द्वार
(C) हरी घास पर क्षण भर
(D) भग्नदूत
उत्तर: (A) कितनी नावों में कितनी बार
व्याख्या: अज्ञेय जी को 1978 में 'कितनी नावों में कितनी बार' काव्य-संग्रह हेतु भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया।
39. 'एक वृक्ष की हत्या' कविता में कवि वृक्ष को किससे बचाने की बात करता है?
(A) आंधी-तूफान से
(B) कुल्हाड़ी और संवेदनहीन लुटेरों से
(C) जानवरों से
(D) धूप से
उत्तर: (B) कुल्हाड़ी और संवेदनहीन लुटेरों से
व्याख्या: कवि कुंवर नारायण पर्यावरण और वृक्षों को अंधाधुंध काटने वाले लालची संवेदनहीन मनुष्यों से बचाने का आह्वान करते हैं।
40. 'हमारी नींद' कविता किस काव्य-संग्रह से उद्धृत है?
(A) इसी दुनिया में
(B) दुष्चक्र में स्रष्टा
(C) स्याही ताल
(D) हवा में हस्ताक्षर
उत्तर: (B) दुष्चक्र में स्रष्टा
व्याख्या: वीरेन डंगवाल की प्रसिद्ध कविता 'हमारी नींद' उनके साहित्य अकादमी पुरस्कृत संग्रह 'दुष्चक्र में स्रष्टा' से ली गई है।
41. 'अक्षर ज्ञान' कविता में 'क' से क्या कबूतर की तरह फुदक जाता है?
(A) बालक का ध्यान
(B) 'क' अक्षर (चौखटे में नहीं अँटता)
(C) चिड़िया
(D) कलम
उत्तर: (B) 'क' अक्षर (चौखटे में नहीं अँटता)
व्याख्या: "चौखटे में नहीं अँटता बेटे का 'क', कबूतर ही है न! फुदक जाता है जरा-सा।"
42. कवयित्री अनामिका किस विश्वविद्यालय में अंग्रेजी की प्राध्यापिका हैं?
(A) दिल्ली विश्वविद्यालय
(B) पटना विश्वविद्यालय
(C) जे०एन०यू०
(D) बी०एच०यू०
उत्तर: (A) दिल्ली विश्वविद्यालय
व्याख्या: कवयित्री अनामिका दिल्ली विश्वविद्यालय के सत्यवती कॉलेज में अंग्रेजी साहित्य की प्रोफेसर रही हैं।
43. 'बनलता सेन' किसकी कालजयी बांग्ला काव्य-रचना है?
(A) जीवनानंद दास
(B) रवींद्रनाथ ठाकुर
(C) शरतचंद्र
(D) बंकिमचंद्र
उत्तर: (A) जीवनानंद दास
व्याख्या: 'बनलता सेन' बांग्ला भाषा की आधुनिकतम प्रेम और प्रकृति की सर्वश्रेष्ठ कविताओं में गिनी जाती है।
44. 'लौटकर आऊँगा फिर' कविता में कवि किस वेश में लौटने की संभावना व्यक्त करता है?
(A) हंस या कौआ बनकर
(B) उल्लू या सारस बनकर
(C) एक बंगाली मनुष्य बनकर
(D) उपर्युक्त सभी रूपों में
उत्तर: (D) उपर्युक्त सभी रूपों में
व्याख्या: जीवनानंद दास बंगाल की प्रकृति से इतने जुड़े हैं कि वे मनुष्य, पक्षी (हंस, कौआ, उल्लू) किसी भी रूप में लौटने को तैयार हैं।
45. 'मेरे बिना तुम प्रभु' कविता में भगवान की कृपा-दृष्टि कहाँ विश्राम करती थी?
(A) कवि के कपोलों (गालों) की नरम शैय्या पर
(B) मंदिरों में
(C) आकाश में
(D) सागर में
उत्तर: (A) कवि के कपोलों (गालों) की नरम शैय्या पर
व्याख्या: रिल्के लिखते हैं कि भक्त के बिना भगवान की कृपा-दृष्टि आश्रयहीन हो जाएगी जो पहले भक्त के कपोलों पर विश्राम पाती थी।
46. 'दही वाली मगम्मा' कहानी में मगम्मा किस समुदाय से संबंधित थी?
(A) बुनकर
(B) गँवार/गोरस बेचने वाले (यादव/गोप वर्ग)
(C) कुम्हार
(D) लोहार
उत्तर: (B) गँवार/गोरस बेचने वाले (यादव/गोप वर्ग)
व्याख्या: मगम्मा पारंपरिक रूप से गाय-भैंस पालने और दही मथकर बेचने वाले ग्रामीण समुदाय से थी।
47. रंगप्पा मगम्मा से क्या चाहता था?
(A) दही खरीदना
(B) धन (रुपये) उधार लेना और अनुचित संबंध
(C) जमीन खरीदना
(D) झगड़ा सुलझाना
उत्तर: (B) धन (रुपये) उधार लेना और अनुचित संबंध
व्याख्या: रंगप्पा जुआरी था और वह मगम्मा के अकेलेपन का फायदा उठाकर उसके पैसे ऐंठना चाहता था।
48. 'ढहते विश्वास' कहानी में किस नदी के भयानक प्रकोप का वर्णन है?
(A) गंगा नदी
(B) महानदी (काठजोड़ी और देवी नदी)
(C) कावेरी नदी
(D) नर्मदा नदी
उत्तर: (B) महानदी (काठजोड़ी और देवी नदी)
व्याख्या: ओडिशा की जीवनदायिनी किंतु बाढ़ में प्रलयंकारी सिद्ध होने वाली महानदी का इसमें जीवंत वर्णन है।
49. लक्ष्मी का बड़ा लड़का कौन था?
(A) अच्युत
(B) गुणनिधि
(C) प्रशांत
(D) दीपक
उत्तर: (A) अच्युत
व्याख्या: लक्ष्मी के बड़े बेटे का नाम अच्युत था, जिसे उसने गाँव के बाँध की सुरक्षा हेतु भेजा था।
50. 'मंगु' जन्म से ही कैसी थी?
(A) अंधी और बहरी
(B) पागल और गूँगी
(C) लंगड़ी
(D) केवल अंधी
उत्तर: (B) पागल और गूँगी
व्याख्या: ईश्वर पेटलीकर की कहानी में मंगु जन्म से ही मानसिक रूप से विक्षिप्त (पागल) और मूक (गूँगी) थी।
51. 'माँ' कहानी में किस महीने को मंगु की माँ शुभ मानती थी?
(A) चैत्र महीना
(B) अगहन (अग्रहायण) महीना
(C) कार्तिक महीना
(D) फाल्गुन महीना
उत्तर: (B) अगहन (अग्रहायण) महीना
व्याख्या: किसी ज्योतिषी ने कहा था कि अगहन के महीने में मंगु ठीक हो जाएगी, इसलिए माँ अगहन का बेसब्री से इंतजार करती थी।
52. 'पप्पाति' की माँ का क्या नाम था?
(A) वल्लि अम्माल
(B) नंजम्मा
(C) सीता
(D) लक्ष्मी
उत्तर: (A) वल्लि अम्माल
व्याख्या: 'नगर' कहानी की मुख्य पात्रा वल्लि अम्माल अपनी बीमार बेटी पप्पाति को लेकर मदुरै आई थी।
53. 'सीता' के कितने बेटे थे?
(A) दो
(B) तीन
(C) चार
(D) पाँच
उत्तर: (B) तीन
व्याख्या: 'धरती कब तक घूमेगी' में सीता के तीन बेटे थे— कैलाश, नारायण और बिज्जू।
54. 'सीता' को अपनी ही संतानों के बीच कैसा महसूस होता था?
(A) बहुत गर्व
(B) घुटन और अकेलापन
(C) सुख और शांति
(D) उल्लास
उत्तर: (B) घुटन और अकेलापन
व्याख्या: बहुओं के व्यंग्य और बेटों की बारी-बारी से रोटी देने की संकीर्णता से सीता भारी घुटन महसूस करती थी।
55. 'ग' वर्ण का उच्चारण स्थान क्या है?
(A) तालु
(B) कंठ
(C) दंत
(D) मूर्धा
उत्तर: (B) कंठ
व्याख्या: सूत्र 'अकुहविसर्जनीयानां कण्ठः' के अनुसार कवर्ग के सभी वर्णों का उच्चारण कंठ से होता है।
56. 'ठ' वर्ण का उच्चारण स्थान क्या है?
(A) दंत
(B) मूर्धा
(C) तालु
(D) ओष्ठ
उत्तर: (B) मूर्धा
व्याख्या: सूत्र 'ऋटुरषाणां मूर्धा' के अनुसार टवर्ग (ट, ठ, ड, ढ, ण) का उच्चारण स्थान मूर्धा है।
57. 'म' वर्ण का उच्चारण स्थान क्या है?
(A) ओष्ठ (और नासिका)
(B) कंठ
(C) तालु
(D) दंत
उत्तर: (A) ओष्ठ (और नासिका)
व्याख्या: पवर्ग का पंचमाक्षर होने के कारण 'म' का मूल उच्चारण स्थान ओष्ठ और नासिका दोनों है।
58. 'ए' और 'ऐ' का उच्चारण स्थान क्या है?
(A) कंठतालु
(B) कंठोष्ठ
(C) दंतोष्ठ
(D) मूर्धा
उत्तर: (A) कंठतालु
व्याख्या: सूत्र 'एदैतोः कण्ठतालु' के अनुसार 'ए' और 'ऐ' का उच्चारण कंठ तथा तालु के संयुक्त सहयोग से होता है।
59. 'व' वर्ण का उच्चारण स्थान क्या है?
(A) दंतोष्ठ
(B) कंठतालु
(C) ओष्ठ
(D) नासिका
उत्तर: (A) दंतोष्ठ
व्याख्या: सूत्र 'वकारस्य दन्तोष्ठम्' के अनुसार 'व' का उच्चारण दाँत और ओंठ के मिलन से होता है।
60. 'स्पर्श व्यंजनों' की कुल संख्या कितनी है?
(A) 20
(B) 25
(C) 30
(D) 33
उत्तर: (B) 25
व्याख्या: क-वर्ग से लेकर प-वर्ग तक के 5 वर्गों के कुल 25 वर्ण 'स्पर्श व्यंजन' कहलाते हैं।
61. 'नयन' का सही संधि-विच्छेद क्या होगा?
(A) ने + अन
(B) नै + अन
(C) नय + न
(D) ना + यन
उत्तर: (A) ने + अन
व्याख्या: ने + अन = नयन (ए + अ = अय्, अयादि स्वर संधि)।
62. 'गायक' का सही संधि-विच्छेद क्या है?
(A) गै + अक
(B) गे + अक
(C) गाय + क
(D) गा + यक
उत्तर: (A) गै + अक
व्याख्या: गै + अक = गायक (ऐ + अ = आय्, अयादि स्वर संधि)।
63. 'पावक' का सही संधि-विच्छेद क्या होगा?
(A) पो + अक
(B) पौ + अक
(C) पाव + क
(D) पा + वक
उत्तर: (B) पौ + अक
व्याख्या: पौ + अक = पावक (औ + अ = आव्, अयादि स्वर संधि)।
64. 'महर्षि' में कौन-सी संधि है?
(A) दीर्घ संधि
(B) गुण संधि
(C) वृद्धि संधि
(D) यण संधि
उत्तर: (B) गुण संधि
व्याख्या: महा + ऋषि = महर्षि (आ + ऋ = अर्, गुण स्वर संधि)।
65. 'दिग्गज' का सही संधि-विच्छेद क्या है?
(A) दिक् + गज
(B) दिग् + गज
(C) दिग + गज
(D) दिक + अज
उत्तर: (A) दिक् + गज
व्याख्या: दिक् + गज = दिग्गज (व्यंजन संधि: 'क्' का अपने वर्ग के तीसरे वर्ण 'ग्' में परिवर्तन)।
66. 'निष्कपट' का सही संधि-विच्छेद क्या होगा?
(A) निः + कपट
(B) निस् + कपट
(C) निष् + कपट
(D) नि + कपट
उत्तर: (A) निः + कपट
व्याख्या: निः + कपट = निष्कपट (विसर्ग संधि के नियमानुसार विसर्ग का 'ष्' में परिवर्तन)।
67. 'गंगाजल' शब्द कौन-सी संज्ञा है?
(A) द्रव्यवाचक
(B) जातिवाचक
(C) व्यक्तिवाचक
(D) भाववाचक
उत्तर: (A) द्रव्यवाचक
व्याख्या: गंगाजल एक पवित्र तरल (द्रव्य) पदार्थ है, अतः मुख्य रूप से द्रव्यवाचक संज्ञा है।
68. 'शहर' शब्द कौन-सी संज्ञा है?
(A) व्यक्तिवाचक
(B) जातिवाचक
(C) समूहवाचक
(D) भाववाचक
उत्तर: (B) जातिवाचक
व्याख्या: 'शहर' संपूर्ण नगरों की सामान्य जाति को दर्शाता है, अतः यह जातिवाचक संज्ञा है।
69. 'क्रोध' शब्द किस संज्ञा के अंतर्गत आता है?
(A) भाववाचक संज्ञा
(B) व्यक्तिवाचक संज्ञा
(C) जातिवाचक संज्ञा
(D) द्रव्यवाचक संज्ञा
उत्तर: (A) भाववाचक संज्ञा
व्याख्या: 'क्रोध' एक मानसिक मनोभाव और अवस्था का नाम है जिसे देखा या छुआ नहीं जा सकता, केवल अनुभव किया जाता है।
70. 'वर्ग' या 'कक्षा' शब्द कौन-सी संज्ञा है?
(A) समूहवाचक संज्ञा
(B) जातिवाचक संज्ञा
(C) भाववाचक संज्ञा
(D) व्यक्तिवाचक संज्ञा
उत्तर: (A) समूहवाचक संज्ञा
व्याख्या: कक्षा या वर्ग विद्यार्थियों के समूह का बोध कराता है, अतः यह समूहवाचक संज्ञा है।
71. 'तू', 'तुम', 'आप' किस प्रकार के सर्वनाम हैं?
(A) मध्यम पुरुषवाचक
(B) उत्तम पुरुषवाचक
(C) अन्य पुरुषवाचक
(D) निश्चयवाचक
उत्तर: (A) मध्यम पुरुषवाचक
व्याख्या: श्रोता (सुनने वाले) के लिए प्रयुक्त होने वाले सर्वनाम मध्यम पुरुषवाचक कहलाते हैं।
72. 'दाल में कुछ काला है'— इस वाक्य में 'कुछ' कौन-सा सर्वनाम है?
(A) निश्चयवाचक
(B) अनिश्चयवाचक
(C) निजवाचक
(D) संबंधवाचक
उत्तर: (B) अनिश्चयवाचक
व्याख्या: 'कुछ' से किसी वस्तु का निश्चित बोध नहीं होता, अतः यह अनिश्चयवाचक सर्वनाम है।
73. 'जैसा करोगे वैसा भरोगे' में 'जैसा-वैसा' कौन-सा सर्वनाम है?
(A) संबंधवाचक सर्वनाम
(B) प्रश्नवाचक सर्वनाम
(C) निश्चयवाचक सर्वनाम
(D) निजवाचक सर्वनाम
उत्तर: (A) संबंधवाचक सर्वनाम
व्याख्या: दो उपवाक्यों में परस्पर संबंध सूचित करने के कारण यह संबंधवाचक सर्वनाम है।
74. 'धार्मिक व्यक्ति' में 'धार्मिक' शब्द क्या है?
(A) संज्ञा
(B) सर्वनाम
(C) विशेषण (गुणवाचक)
(D) क्रिया
उत्तर: (C) विशेषण (गुणवाचक)
व्याख्या: धर्म (संज्ञा) + इक = धार्मिक; यह व्यक्ति की विशेषता बताने वाला गुणवाचक विशेषण है।
75. 'दो लीटर तेल' में कौन-सा विशेषण है?
(A) निश्चित परिमाणबोधक
(B) अनिश्चित परिमाणबोधक
(C) संख्यावाचक
(D) गुणवाचक
उत्तर: (A) निश्चित परिमाणबोधक
व्याख्या: 'दो लीटर' द्रव की एक निश्चित माप को सूचित करता है, अतः निश्चित परिमाणबोधक है।
76. 'वह लड़का स्कूल जाता है' में 'वह' शब्द क्या है?
(A) सार्वनामिक विशेषण
(B) गुणवाचक विशेषण
(C) संख्यावाचक विशेषण
(D) केवल सर्वनाम
उत्तर: (A) सार्वनामिक विशेषण
व्याख्या: जब कोई सर्वनाम संज्ञा शब्द (लड़का) के ठीक पहले आकर उसकी विशेषता या संकेत बताता है, तो सार्वनामिक विशेषण कहलाता है।
77. 'हँसना' किस प्रकार की क्रिया है?
(A) सकर्मक क्रिया
(B) अकर्मक क्रिया
(C) प्रेरणार्थक क्रिया
(D) द्विकर्मक क्रिया
उत्तर: (B) अकर्मक क्रिया
व्याख्या: हँसना, रोना, सोना, जागना आदि स्वाभाविक क्रियाओं का फल सीधे कर्ता पर पड़ता है, अतः ये अकर्मक हैं।
78. 'माँ बच्चे को दूध पिलाती है'— इस वाक्य में कौन-सी क्रिया है?
(A) प्रेरणार्थक क्रिया (द्विकर्मक)
(B) अकर्मक क्रिया
(C) पूर्वकालिक क्रिया
(D) नामधातु क्रिया
उत्तर: (A) प्रेरणार्थक क्रिया (द्विकर्मक)
व्याख्या: पिलाना प्रेरणार्थक क्रिया है और इसमें दो कर्म (बच्चे को, दूध) उपस्थित हैं।
79. 'वह पढ़ रहा था' किस काल का उदाहरण है?
(A) सामान्य भूतकाल
(B) अपूर्ण भूतकाल
(C) पूर्ण भूतकाल
(D) संदिग्ध भूतकाल
उत्तर: (B) अपूर्ण भूतकाल
व्याख्या: भूतकाल में क्रिया जारी रहने (समाप्त न होने) का बोध कराने के कारण यह अपूर्ण भूतकाल है।
80. 'संबोधन कारक' का विभक्ति चिह्न क्या है?
(A) हे, अरे, अहो!
(B) से
(C) में, पर
(D) को
उत्तर: (A) हे, अरे, अहो!
व्याख्या: किसी को पुकारने या संबोधित करने के लिए 'हे! अरे! अजी!' का प्रयोग संबोधन कारक में होता है।
81. 'वृक्ष से पत्ते गिरते हैं' में किस कारक की प्रधानता है?
(A) करण कारक
(B) अपादान कारक
(C) कर्म कारक
(D) अधिकरण कारक
उत्तर: (B) अपादान कारक
व्याख्या: आधार से किसी वस्तु के अलग होने (अलगाव) में अपादान कारक (पंचमी विभक्ति) होता है।
82. 'पृथ्वी' का पर्यायवाची शब्द निम्नलिखित में से कौन-सा है?
(A) भू
(B) धरा
(C) वसुंधरा
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (D) उपर्युक्त सभी
व्याख्या: भू, भूमि, धरा, धरित्री, वसुंधरा, अचला सभी पृथ्वी के पर्यायवाची शब्द हैं।
83. 'हवा' का पर्यायवाची शब्द नहीं है—
(A) समीर
(B) पवन
(C) अनिल
(D) अनल
उत्तर: (D) अनल
व्याख्या: 'अनल' का अर्थ आग (अग्नि) होता है, जबकि अनिल, समीर, पवन, वात हवा के पर्याय हैं।
84. 'सापेक्ष' का विलोम शब्द क्या होगा?
(A) निरपेक्ष
(B) प्रत्यक्ष
(C) परोक्ष
(D) उपेक्षा
उत्तर: (A) निरपेक्ष
व्याख्या: सापेक्ष (तुलनात्मक/शर्तयुक्त) का सही विलोम 'निरपेक्ष' (शर्तरहित/तटस्थ) होता है।
85. 'आगम' का विलोम शब्द क्या है?
(A) सुगम
(B) लोप / निर्गम
(C) दुर्गम
(D) गमन
उत्तर: (B) लोप / निर्गम
व्याख्या: आगम (आना/उत्पत्ति) का विपरीतार्थक 'लोप' अथवा 'निर्गम' होता है। (यदि अगम होता तो सुगम होता)।
86. 'चौराहा' में कौन-सा समास है?
(A) द्विगु समास
(B) द्वंद्व समास
(C) तत्पुरुष समास
(D) बहुव्रीहि समास
उत्तर: (A) द्विगु समास
व्याख्या: चार राहों का समाहार = चौराहा। प्रथम पद संख्यावाचक होने से द्विगु समास है।
87. 'चंद्रशेखर' में कौन-सा समास है?
(A) तत्पुरुष
(B) बहुव्रीहि (भगवान शिव)
(C) कर्मधारय
(D) द्विगु
उत्तर: (B) बहुव्रीहि (भगवान शिव)
व्याख्या: चंद्र है शिखर (मस्तक) पर जिसके अर्थात् भगवान शिव। अन्य पद प्रधान होने से बहुव्रीहि समास है।
88. 'यथामति' में कौन-सा समास है?
(A) अव्ययीभाव
(B) तत्पुरुष
(C) कर्मधारय
(D) बहुव्रीहि
उत्तर: (A) अव्ययीभाव
व्याख्या: मति के अनुसार = यथामति। प्रथम पद 'यथा' अव्यय होने के कारण अव्ययीभाव समास है।
89. 'राधा-कृष्ण' में कौन-सा समास है?
(A) द्वंद्व समास
(B) तत्पुरुष समास
(C) कर्मधारय समास
(D) द्विगु समास
उत्तर: (A) द्वंद्व समास
व्याख्या: राधा और कृष्ण— दोनों पद समान रूप से प्रधान हैं, अतः यह द्वंद्व समास है।
90. 'देशभक्ति' में कौन-सा समास है?
(A) तत्पुरुष समास (देश के लिए भक्ति)
(B) कर्मधारय समास
(C) अव्ययीभाव समास
(D) बहुव्रीहि समास
उत्तर: (A) तत्पुरुष समास (देश के लिए भक्ति)
व्याख्या: देश के लिए भक्ति = देशभक्ति। कारक चिह्न 'के लिए' का लोप होने से संप्रदान तत्पुरुष है।
91. 'स्वागत' शब्द में कौन-सा उपसर्ग है?
(A) स्व
(B) सु
(C) स्वा
(D) स
उत्तर: (B) सु
व्याख्या: सु + आगत = स्वागत (यण संधि के नियमानुसार 'सु' उपसर्ग प्रयुक्त हुआ है)।
92. 'दुर्व्यवहार' में कौन-सा उपसर्ग लगा है?
(A) दुर्
(B) दुस्
(C) दु
(D) दूर
उत्तर: (A) दुर्
व्याख्या: दुर् (बुरा) + वि + अव + हार = दुर्व्यवहार। मुख्य उपसर्ग 'दुर्' है।
93. 'लिखावट' शब्द में कौन-सा प्रत्यय है?
(A) आवट
(B) वट
(C) ट
(D) खावट
उत्तर: (A) आवट
व्याख्या: लिखना (लिख्) धातु + आवट = लिखावट।
94. 'भारतीय' शब्द में कौन-सा प्रत्यय लगा है?
(A) ईय
(B) य
(C) तीय
(D) इय
उत्तर: (A) ईय
व्याख्या: भारत + ईय (दीर्घ ई) = भारतीय।
95. 'गाल बजाना' मुहावरे का सही अर्थ क्या है?
(A) डींग हांकना (व्यर्थ बकवास करना)
(B) तमाचा मारना
(C) हँसना
(D) रोना
उत्तर: (A) डींग हांकना (व्यर्थ बकवास करना)
व्याख्या: अपनी झूठी प्रशंसा या बड़बोलापन दिखाने को 'गाल बजाना' कहते हैं।
96. 'आपे से बाहर होना' मुहावरे का अर्थ है—
(A) अत्यधिक क्रोधित होना
(B) घर से बाहर जाना
(C) बीमार होना
(D) भाग जाना
उत्तर: (A) अत्यधिक क्रोधित होना
व्याख्या: अत्यधिक गुस्से में अपने विवेक और आत्म-नियंत्रण को खो देना।
97. 'जो सबमें व्याप्त हो'— के लिए एक शब्द है:
(A) सर्वव्यापी
(B) सर्वज्ञ
(C) सर्वशक्तिमान
(D) अंतर्यामी
उत्तर: (A) सर्वव्यापी
व्याख्या: जो संसार के प्रत्येक कण में मौजूद रहे, उसे 'सर्वव्यापी' (विभु) कहते हैं।
98. 'जिसका पति मर गया हो'— उस स्त्री को क्या कहते हैं?
(A) विधवा
(B) सधवा
(C) परित्यक्ता
(D) अनाथ
उत्तर: (A) विधवा
व्याख्या: जिसका पति जीवित न हो = विधवा; जिसका पति जीवित हो = सधवा।
99. निम्नलिखित में से 'शुद्ध शब्द' कौन-सा है?
(A) ऐतिहासिक
(B) एतिहासिक
(C) ऐतिहासीक
(D) अतिहासिक
उत्तर: (A) ऐतिहासिक
व्याख्या: इतिहास + इक = ऐतिहासिक (आदि स्वर 'इ' का 'ऐ' में वृद्धि रूप)।
100. निम्नलिखित में से 'शुद्ध वाक्य' छाँटिए:
(A) साहित्य और समाज का घोर संबंध है।
(B) साहित्य और समाज का घनिष्ठ संबंध है।
(C) साहित्य और समाज का निकट संबंध है।
(D) साहित्य और समाज में गहरा मित्रता है।
उत्तर: (B) साहित्य और समाज का घनिष्ठ संबंध है।
व्याख्या: 'घोर' शब्द नकारात्मक अर्थ (जैसे घोर संकट) में आता है, सकारात्मक अभिन्न संबंधों हेतु 'घनिष्ठ संबंध' शुद्ध होता है।
खण्ड - 'ब' : विषयनिष्ठ प्रश्न (Descriptive Questions)
प्रश्न संख्या 1: गद्यांश पठन एवं प्रश्नोत्तर (गद्यांश क एवं ख)
गद्यांश 1 (क)
मानव जीवन में वाणी का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। वाणी ही मनुष्य को पशुओं से अलग कर एक विवेकशील सामाजिक प्राणी बनाती है। मधुर वाणी अमृत के समान है, जो शत्रु को भी मित्र बना देती है। इसके विपरीत, कटु वाणी विष बुझे तीर की तरह होती है, जो मनुष्य के हृदय को छलनी कर देती है और जीवन भर के लिए वैमनस्य उत्पन्न कर देती है। कबीरदास जी ने ठीक ही कहा था— "ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय। औरन को सीतल करै, आपहु सीतल होय॥" अतः प्रत्येक मनुष्य को सदा सोच-समझकर, तौलकर और मीठे वचनों का प्रयोग करना चाहिए।
प्रश्न (i): मनुष्य को पशुओं से अलग क्या बनाता है?
उत्तर: वाणी और उसके विवेकपूर्ण प्रयोग की क्षमता ही मनुष्य को पशुओं से भिन्न और श्रेष्ठ बनाती है।
प्रश्न (ii): मधुर वाणी की तुलना किससे की गई है और उसका क्या प्रभाव होता है?
उत्तर: मधुर वाणी की तुलना अमृत से की गई है; यह विरोधी और शत्रु को भी अपना परम मित्र बना लेती है।
प्रश्न (iii): कटु वाणी का क्या दुष्परिणाम होता है?
उत्तर: कटु वाणी विष बुझे बाण के समान दूसरों के हृदय को घायल करती है और स्थायी कलह उत्पन्न करती है।
प्रश्न (iv): कबीरदास जी की साखी का क्या केंद्रीय संदेश है?
उत्तर: अहंकार त्यागकर ऐसी प्रिय वाणी बोलनी चाहिए जो सुनने वाले को शांति दे और स्वयं को भी आनंदित करे।
प्रश्न (v): प्रस्तुत गद्यांश का एक उपयुक्त शीर्षक दीजिए।
उत्तर: उपयुक्त शीर्षक: 'मीठी वाणी का महत्व' अथवा 'वाणी की शक्ति'।
गद्यांश 1 (ख)
श्रम ही मानव सभ्यता और संस्कृति का वास्तविक निर्माता है। संसार का कोई भी महान कार्य बिना कठोर परिश्रम के सिद्ध नहीं हुआ है। संस्कृत में कहा गया है— "उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः। न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः॥" अर्थात् केवल सोचने या मनोरथ करने से नहीं, बल्कि उद्यम करने से ही कार्य सिद्ध होते हैं। जिस समाज या देश के लोग आलसी होते हैं, वह राष्ट्र कभी समृद्धि के शिखर पर नहीं पहुँच सकता। परिश्रम करने वाले किसान, मजदूर और वैज्ञानिक ही किसी देश के वास्तविक भाग्यविधाता होते हैं।
प्रश्न (i): मानव सभ्यता और संस्कृति का वास्तविक निर्माता किसे माना गया है?
उत्तर: कठोर और निष्ठावान शारीरिक व बौद्धिक श्रम को ही मानव सभ्यता का सच्चा निर्माता माना गया है।
प्रश्न (ii): संस्कृत श्लोक का क्या भावार्थ है?
उत्तर: कार्य केवल इच्छा करने से नहीं, परिश्रम करने से सफल होते हैं; सोते हुए सिंह के मुँह में हिरण स्वतः नहीं आता।
प्रश्न (iii): कौन-सा राष्ट्र समृद्धि के शिखर पर नहीं पहुँच सकता?
उत्तर: जिस देश या समाज के नागरिक अकर्मण्य, भाग्यवादी और आलसी होते हैं, वह राष्ट्र कभी समृद्ध नहीं हो सकता।
प्रश्न (iv): किसी राष्ट्र के वास्तविक भाग्यविधाता कौन हैं?
उत्तर: दिन-रात पसीना बहाकर उत्पादन करने वाले किसान, मजदूर, शिल्पकार और वैज्ञानिक ही देश के सच्चे निर्माता हैं।
प्रश्न (v): प्रस्तुत गद्यांश का एक सटीक शीर्षक लिखिए।
उत्तर: उपयुक्त शीर्षक: 'श्रम की महत्ता' अथवा 'उद्यम ही जीवन है'।
प्रश्न संख्या 2: द्वितीय गद्यांश समुच्चय (गद्यांश क एवं ख)
गद्यांश 2 (क)
भारतीय लोकतंत्र विश्व का सबसे विशाल और सशक्त लोकतंत्र है। हमारे संविधान ने देश के प्रत्येक वयस्क नागरिक को बिना किसी जाति, धर्म, लिंग या वर्ग के भेदभाव के मताधिकार (वोट देने का अधिकार) प्रदान किया है। मतदान केवल एक अधिकार नहीं, बल्कि एक पुनीत राष्ट्रीय कर्तव्य है। जब नागरिक बिना किसी लोभ, भय या जातिवाद के प्रभाव में आकर एक योग्य और ईमानदार जनप्रतिनिधि का चुनाव करते हैं, तभी सच्चा लोकतंत्र मजबूत होता है। अपने मत का दुरुपयोग करना अथवा मतदान न करना राष्ट्र के प्रति विश्वासघात के समान है।
प्रश्न (i): भारतीय लोकतंत्र की क्या विशेषता है?
उत्तर: भारतीय लोकतंत्र विश्व का सबसे विशाल, विविधतापूर्ण और स्वतंत्र जन-सहभागिता पर आधारित लोकतंत्र है।
प्रश्न (ii): संविधान ने नागरिकों को कौन-सा महत्वपूर्ण अधिकार दिया है?
उत्तर: संविधान ने प्रत्येक वयस्क नागरिक को समान रूप से सार्वभौमिक मताधिकार (वोट का अधिकार) दिया है।
प्रश्न (iii): सच्चा लोकतंत्र कब मजबूत होता है?
उत्तर: जब मतदाता जाति, धर्म, धन या बाहुबल के प्रभाव से मुक्त होकर योग्य व निष्ठावान प्रतिनिधि चुनते हैं।
प्रश्न (iv): मतदान न करने को किसके समान बताया गया है?
उत्तर: अपने मताधिकार का प्रयोग न करना अथवा उसका सौदा करना देश और समाज के प्रति विश्वासघात तुल्य है।
प्रश्न (v): गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक लिखिए।
उत्तर: उपयुक्त शीर्षक: 'मतदान का महत्व और लोकतंत्र'।
गद्यांश 2 (ख)
जल ही जीवन है। पृथ्वी पर समस्त जीवधारियों, वनस्पतियों और कृषि का अस्तित्व केवल जल पर ही निर्भर है। प्रकृति ने हमें वर्षा, नदियों, तालाबों और भूजल के रूप में जल का अमूल्य भंडार दिया है। परंतु आज अंधाधुंध औद्योगिकीकरण, जल-स्रोतों के प्रदूषण और भूजल के अत्यधिक दोहन के कारण भीषण जल-संकट गहरा रहा है। "रहिमन पानी राखिये, बिनु पानी सब सून। पानी गये न ऊबरै, मोती, मानुष, चून॥" यदि हमने वर्षा जल का संचयन (Water Harvesting) नहीं किया और जल की एक-एक बूँद को नहीं बचाया, तो अगला विश्वयुद्ध जल के लिए ही लड़ा जाएगा।
प्रश्न (i): पृथ्वी पर समस्त जीवन किस पर निर्भर है?
उत्तर: समस्त प्राणियों, पेड़-पौधों, वनस्पतियों और कृषि का अस्तित्व केवल और केवल 'जल' पर निर्भर है।
प्रश्न (ii): आज के समय में जल-संकट क्यों गहरा रहा है?
उत्तर: जल-प्रदूषण, वनों की कटाई, अंधाधुंध बर्बादी और भूजल के अत्यधिक दोहन के कारण जल-संकट गहरा रहा है।
प्रश्न (iii): रहीम कवि के दोहे का क्या संदेश है?
उत्तर: जल (पानी) के बिना सब कुछ व्यर्थ है; पानी के नष्ट होने पर मोती, मनुष्य और आटा तीनों का अस्तित्व समाप्त हो जाता है।
प्रश्न (iv): जल-संकट से बचने का प्रमुख उपाय क्या है?
उत्तर: वर्षा जल का वैज्ञानिक संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) करना और जल की बर्बादी को पूरी तरह रोकना।
प्रश्न (v): प्रस्तुत गद्यांश का शीर्षक दीजिए।
उत्तर: उपयुक्त शीर्षक: 'जल संरक्षण: आज की आवश्यकता'।
प्रश्न संख्या 3: निबंध लेखन (कुल 5 संपूर्ण निबंध रूपरेखा सहित)
1. समय का सदुपयोग और मानव जीवन
भूमिका:
समय संसार की सर्वाधिक मूल्यवान और अपरिवर्तनीय संपदा है। धन खो जाने पर पुनः कमाया जा सकता है, स्वास्थ्य बिगड़ने पर पुनः सुधारा जा सकता है, परंतु बीता हुआ एक पल भी संसार की समस्त संपदा देकर वापस नहीं लाया जा सकता। शेक्सपियर ने कहा था— "मैंने समय को नष्ट किया, और अब समय मुझे नष्ट कर रहा है।"
समय की अबाध गति:
समय किसी राजा या रंक के लिए अपनी चाल नहीं बदलता। यह निरंतर प्रवाहित होने वाली वह नदी है जिसके घाट पर केवल कर्मठ मनुष्य ही प्यास बुझा पाते हैं। इतिहास में वे ही महापुरुष अमर हुए हैं, जिन्होंने अपनी दिनचर्या में समय के प्रत्येक क्षण का सदुपयोग किया— चाहे वे महात्मा गाँधी हों, डॉ० कलाम हों या स्वामी विवेकानंद।
विद्यार्थी जीवन में समय प्रबंधन:
विद्यार्थियों के लिए समय का सदुपयोग सफलता की प्रथम सीढ़ी है। जो विद्यार्थी आज का काम कल पर टालते हैं, वे परीक्षा के समय भारी तनाव और असफलता का शिकार होते हैं। एक आदर्श समय सारिणी (Time Table) बनाकर नियमित अध्ययन, खेल और विश्राम करना ही विद्यार्थी का धर्म है।
आलस्य: समय का सबसे बड़ा शत्रु:
"आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः।" आलसी मनुष्य केवल भाग्य को कोसता रहता है, जबकि समयनिष्ठ व्यक्ति अपने पुरुषार्थ से अपना भाग्य स्वयं लिखता है। जो समय की कद्र नहीं करता, समय उसे इतिहास के कूड़ेदान में फेंक देता है।
उपसंहार:
"काल करे सो आज कर, आज करे सो अब। पल में परलै होएगी, बहुरि करेगा कब॥" हमें समय के मूल्य को पहचानते हुए उसके प्रत्येक क्षण को राष्ट्र निर्माण और आत्मोन्नति में लगाना चाहिए।
2. भारतीय समाज में नारी सशक्तीकरण
भूमिका:
"यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।" भारतीय सनातन संस्कृति में नारी को शक्ति, विद्या और लक्ष्मी की साक्षात् प्रतिमूर्ति माना गया है। परंतु मध्यकाल में पर्दा प्रथा, अशिक्षा और सती प्रथा जैसी कुरीतियों ने नारी को घर की चहारदीवारी में असहाय बना दिया। आज 21वीं सदी में नारी को पुरुषों के समान अधिकार, स्वावलंबन और सम्मान दिलाना ही 'नारी सशक्तीकरण' है।
विविध क्षेत्रों में नारी की स्वर्णिम उपस्थिति:
आज की भारतीय नारी ने हर उस रूढ़ि को तोड़ दिया है जो उसकी प्रगति में बाधक थी। अंतरिक्ष के क्षेत्र में कल्पना चावला, राजनीति में इंदिरा गाँधी व राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, खेल के मैदान में मैरी कॉम व पी० वी० सिंधु, और सीमाओं पर राफेल लड़ाकू विमान उड़ाती महिला पायलट यह सिद्ध कर रही हैं कि नारी किसी भी दृष्टि से पुरुषों से कमतर नहीं है।
सरकारी प्रयास और योजनाएँ:
भारत सरकार का 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान और बिहार सरकार द्वारा बालिकाओं के लिए चलाई गई 'मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना', 'साइकिल-पोशाक योजना' तथा पंचायती राज संस्थाओं एवं सरकारी नौकरियों में 50% व 35% आरक्षण ने राज्य में महिला साक्षरता और सामाजिक चेतना में युगांतरकारी क्रांति ला दी है।
विद्यमान चुनौतियाँ:
यद्यपि स्थितियाँ सुधरी हैं, तथापि समाज में आज भी कन्या भ्रूण हत्या, दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा और असुरक्षा की भावना जैसी विकृतियाँ मौजूद हैं। जब तक समाज की मानसिकता में बेटियों के प्रति पूर्ण समानता का भाव नहीं आएगा, तब तक वास्तविक सशक्तीकरण अधूरा रहेगा।
उपसंहार:
नारी समाज की जननी और धुरी है। जिस दिन भारत की प्रत्येक बेटी शिक्षित, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनेगी, उसी दिन भारत विश्व की महाशक्ति और विश्वगुरु के पद पर पुनः प्रतिष्ठित होगा।
3. पर्यावरण प्रदूषण: कारण और निवारण
भूमिका:
प्रकृति और मानव का संबंध माता और शिशु के समान है। प्रकृति ने हमें जीवन जीने के लिए शुद्ध वायु, निर्मल जल और उपजाऊ भूमि प्रदान की थी। परंतु भौतिकवादी विकास की अंधी अंधी दौड़, कल-कारखानों के धुएँ और अंधाधुंध शहरीकरण ने प्रकृति के इस संतुलन को नष्ट कर दिया है। पर्यावरण में हानिकारक विषैले तत्वों का मिलना ही 'प्रदूषण' कहलाता है।
प्रदूषण के विविध रूप:
1. वायु प्रदूषण: वाहनों और कारखानों से निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड हवा को जहरीला बना रही है, जिससे दमा और फेफड़ों के रोग बढ़ रहे हैं।
2. जल प्रदूषण: प्लास्टिक, औद्योगिक रसायन और सीवेज का गंदा पानी नदियों में मिलने से जीवनदायिनी नदियाँ गंदे नाले बन गई हैं।
3. ध्वनि प्रदूषण: लाउडस्पीकरों और भारी वाहनों के कर्कश शोर से उच्च रक्तचाप और बहरापन फैल रहा है।
4. मृदा प्रदूषण: रासायनिक खादों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से धरती की प्राकृतिक उर्वरा शक्ति नष्ट हो रही है।
पर्यावरणीय संकट के दुष्परिणाम:
प्रदूषण के कारण पृथ्वी का तापमान निरंतर बढ़ रहा है (Global Warming), जिससे ध्रुवीय बर्फ पिघल रही है और समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है। मौसम चक्र में परिवर्तन से कहीं सूखा तो कहीं प्रलयंकारी बाढ़ आ रही है।
निवारण के उपाय:
प्रदूषण मुक्ति के लिए प्रत्येक नागरिक को 'एक पेड़ माँ के नाम' लगाकर उसका संरक्षण करना चाहिए। सौर ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रयोग बढ़ाया जाए, प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध लगे और औद्योगिक कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण अनिवार्य किया जाए।
उपसंहार:
"धरती को मत करो लाचार, प्रकृति से करो प्यार।" पर्यावरण की रक्षा किसी एक का नहीं, हम सभी का सामूहिक दायित्व है। स्वच्छ पर्यावरण में ही स्वस्थ मानव सभ्यता जीवित रह सकती है।
4. मेरा प्रिय त्योहार: छठ पर्व
भूमिका:
भारत उत्सवों का पावन देश है, परंतु बिहार की माटी से जुड़ा 'छठ महापर्व' अपनी अलौकिक पवित्रता, सादगी और लोक-आस्था के कारण विश्व में अद्वितीय है। यह पर्व वर्ष में दो बार— चैत्र और कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाया जाता है, जिसमें कार्तिक छठ का विशेष धार्मिक महत्व है।
चार दिवसीय साधना का अनुष्ठान:
छठ पर्व चार दिनों का अत्यंत कठोर और आत्मसंयम का अनुष्ठान है:
1. नहाय-खाय: पहले दिन व्रती गंगा या पवित्र नदी में स्नान कर शुद्ध घी और सेंधा नमक में बना कद्दू-भात ग्रहण करते हैं।
2. खरना: दूसरे दिन दिनभर निर्जला उपवास रखकर शाम को मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से गुड़ की खीर और रोटी बनाकर पूजा की जाती है।
3. संध्या अर्घ्य: तीसरे दिन अस्ताचलगामी (डूबते हुए) सूर्यदेव को नदी-तालाब के पवित्र जल में खड़े होकर बाँस के सूप में ठेकुआ, फल रखकर अर्घ्य दिया जाता है।
4. उषा अर्घ्य: चौथे दिन प्रातःकाल उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर 36 घंटे के निर्जला व्रत का पारण होता है।
सामाजिक समरसता और प्रकृति प्रेम:
छठ पर्व की सबसे अनूठी विशेषता यह है कि यह पूर्णतः प्रकृति को समर्पित है। इसमें प्रत्यक्ष देवता सूर्य और जल की उपासना होती है। घाटों पर राजा-रंक, अमीर-गरीब और जाति-वर्ण का भेद पूरी तरह समाप्त हो जाता है। मिट्टी के चूल्हे, दउरा, सूप और स्थानीय मौसमी फल इसकी ग्रामीण संस्कृति को दर्शाते हैं।
उपसंहार:
छठ केवल एक पर्व नहीं, बल्कि स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और समानता की साक्षात् जीवन-शैली है। यह पर्व हमारी बिहारी संस्कृति की पहचान और गौरव है।
5. इंटरनेट और आज का विद्यार्थी जीवन
भूमिका:
21वीं सदी में विज्ञान और सूचना क्रांति ने मानव सभ्यता को जो सबसे चमत्कारी उपहार दिया है, वह है— 'इंटरनेट'। इंटरनेट ने संपूर्ण संसार की ज्ञान-राशि को हमारी उंगलियों के पोरों पर ला दिया है। आज के विद्यार्थी जीवन में इंटरनेट ज्ञान अर्जन का सर्वाधिक सशक्त और अनिवार्य माध्यम बन चुका है।
विद्यार्थियों के लिए वरदान के रूप में:
1. ऑनलाइन अध्ययन सामग्री: अब किसी भी कठिन विषय, गणित के प्रमेय या विज्ञान के प्रयोग को यूट्यूब और ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म्स पर देश के सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों से सरलता से समझा जा सकता है।
2. डिजिटल पुस्तकालय: विश्व के किसी भी कोने की प्रामाणिक पुस्तकें, शब्दकोश और पूर्व वर्षों के प्रश्न-पत्र (PYQs) इंटरनेट पर एक क्लिक में उपलब्ध हैं।
3. समय और धन की बचत: घर बैठे प्रतियोगी परीक्षाओं के फॉर्म भरना, परिणाम देखना और ऑनलाइन टेस्ट देना संभव हो गया है।
इंटरनेट के दुरुपयोग से खतरे:
जहाँ इंटरनेट अमृत है, वहीं असावधानी से यह विष भी बन सकता है। सोशल मीडिया (इंस्टाग्राम, फेसबुक), रील्स और ऑनलाइन गेम्स (फ्री फायर, पबजी) की लत ने लाखों छात्रों का अमूल्य समय, एकाग्रता और आँखों की रोशनी छीन ली है। शारीरिक खेलकूद छूट जाने से छात्र मानसिक तनाव और चिड़चिड़ेपन के शिकार हो रहे हैं।
उपसंहार:
इंटरनेट एक बहुत अच्छा सेवक है, परंतु बहुत बुरा स्वामी। यह विद्यार्थी पर निर्भर करता है कि वह इसका उपयोग ज्ञानार्जन और अपने उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए करता है या समय की बर्बादी के लिए। हमें तकनीक का सदुपयोग कर अपने लक्ष्य को साधना चाहिए।
प्रश्न संख्या 4: पत्र लेखन एवं संवाद लेखन (दोनों प्रश्न पूर्ण रूप से)
(क) पत्र लेखन: विद्यालय का पुस्तकालय समृद्ध करने हेतु प्रधानाध्यापक को प्रार्थना-पत्र
सेवा में,
श्रीमान् प्रधानाध्यापक महोदय,
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, समस्तीपुर (बिहार)
विषय: विद्यालय पुस्तकालय में नई ज्ञानवर्धक एवं पाठ्य-पुस्तकों की व्यवस्था के संबंध में।
महाशय,
सविनय निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय की दसवीं कक्षा (वर्ग 'अ') का छात्र प्रतिनिधि हूँ। मैं आपका ध्यान हमारे विद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय की वर्तमान स्थिति की ओर आकृष्ट करना चाहता हूँ।
हमारे विद्यालय का पुस्तकालय ज्ञान का एक महत्वपूर्ण केंद्र है, जहाँ सभी छात्र अध्ययन करते हैं। परंतु अत्यंत खेद का विषय है कि विगत दो वर्षों से पुस्तकालय में नई पुस्तकें नहीं खरीदी गई हैं। वर्तमान में मैट्रिक बोर्ड परीक्षा के बदले हुए पाठ्यक्रम (Syllabus) के अनुसार आधुनिक संदर्भ पुस्तकें, एनसीईआरटी / बीटीसी की नई पुस्तकें, पिछले दस वर्षों के मॉडल पेपर्स और हिन्दी साहित्य की श्रेष्ठ कृतियों का भारी अभाव है। विज्ञान और सामान्य ज्ञान की पत्रिकाओं की भी कमी महसूस हो रही है।
अतः श्रीमान् से विनम्र प्रार्थना है कि विद्यार्थियों के व्यापक शैक्षणिक हित और आगामी बोर्ड परीक्षा की उत्कृष्ट तैयारी को दृष्टिगत रखते हुए पुस्तकालय में नवीन पाठ्यक्रम की सहायक पुस्तकें, प्रश्न-बैंक और ज्ञानवर्धक पत्रिकाएँ यथाशीघ्र मँगवाने की कृपा की जाए। इस कृपा के लिए हम सभी विद्यार्थी आपके सदैव आभारी रहेंगे।
सधन्यवाद!
आपका आज्ञाकारी छात्र
हर्ष कुमार (छात्र प्रतिनिधि)
कक्षा: दशम (10वीं 'अ')
क्रमांक: 04
दिनांक: 16 फरवरी, 2024
(ख) संवाद लेखन: सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन पर दो मित्रों के बीच संवाद
रोहित: अरे सुमित! तुम्हारी बाईं बाँह पर यह पट्टी कैसी बंधी है? क्या हुआ था?
सुमित: अरे रोहित! कल शाम मैं बाइक से बाजार जा रहा था। जल्दी पहुँचने के चक्कर में मैंने हेलमेट भी नहीं पहना था और सामने से आ रहे एक ऑटो से टक्कर हो गई। ईश्वर की कृपा से हाथ में केवल खरोंच आई, सिर बच गया!
रोहित: यह तो बहुत गंभीर बात है सुमित! तुम इतनी बड़ी लापरवाही कैसे कर सकते हो? तुम्हें पता है कि सड़क पर तेज गति से चलना और बिना हेलमेट के दोपहिया वाहन चलाना कितना जानलेवा हो सकता है!
सुमित: सच कह रहे हो रोहित! कल अस्पताल में डॉक्टर साहब ने भी मुझे बहुत डांटा। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में अधिकांश मौतें सिर में गंभीर चोट लगने के कारण ही होती हैं।
रोहित: बिल्कुल! 'दुर्घटना से देर भली।' हमें सदैव यातायात के नियमों का पालन करना चाहिए— लाल बत्ती पर रुकना, मोड़ पर गति धीमी रखना, मोबाइल पर बात करते हुए गाड़ी न चलाना और बाइक चलाते समय सदैव आईएसआई मार्क वाला हेलमेट पहनना अनिवार्य है।
सुमित: मैंने कल की घटना से एक बहुत बड़ा सबक सीख लिया है। अब से मैं बिना हेलमेट और वैध ड्राइविंग लाइसेंस के कभी बाइक नहीं चलाऊँगा और अपने सभी दोस्तों को भी यातायात नियमों के पालन हेतु प्रेरित करूँगा।
रोहित: बहुत खूब सुमित! हमारी अपनी और दूसरों की जान अनमोल है। चलो, अब घर चलकर आराम करो।
प्रश्न संख्या 5: लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (पाठ्यपुस्तक गोधूलि एवं वर्णिका से 10 प्रश्न)
प्रश्न 1: लेखक भीमराव आम्बेडकर के अनुसार 'आदर्श समाज' की क्या-क्या प्रमुख विशेषताएँ होनी चाहिए?
उत्तर:
डॉ० आम्बेडकर के अनुसार एक आदर्श समाज स्वतंत्रता, समता और भ्रातृत्व (भाईचारे) के तीन स्तंभों पर आधारित होना चाहिए। उस समाज में इतनी गतिशीलता होनी चाहिए कि कोई भी वांछित परिवर्तन समाज के एक छोर से दूसरे छोर तक अबाध रूप से संचारित हो सके। सभी नागरिकों को अपनी रुचि के अनुसार पेशा चुनने की पूर्ण स्वतंत्रता हो और सबके अधिकारों की रक्षा हो।
प्रश्न 2: 'विष के दाँत' कहानी के शीर्षक की सार्थकता पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
यह शीर्षक अत्यंत प्रतीकात्मक और व्यंग्यात्मक है। कहानी में अमीर सेन साहब का बेटा काशू अहंकार, निरंकुशता और अमीरी के दंभ रूपी 'विष' से भरा हुआ था। जब गरीब मदन उसके आगे के दो दाँत तोड़ देता है, तो वह वास्तव में काशू के केवल शारीरिक दाँत नहीं तोड़ता, बल्कि अमीरों के उस झूठे अहंकार और दमनकारी प्रवृत्ति के विषैले दाँतों को तोड़कर नष्ट कर देता है।
प्रश्न 3: मैक्समूलर ने भारत के किस वर्ग के अध्ययन को नवयुवकों और सिविल सेवा के अधिकारियों के लिए अनिवार्य माना है?
उत्तर:
मैक्समूलर ने इंग्लैंड से भारत आने वाले युवा सिविल सेवकों (आईसीएस अधिकारियों) को भारत के भाषा-विज्ञान, संस्कृत साहित्य, ग्रामीण दर्शन, पुरातत्व और विधि-शास्त्र के अध्ययन की सलाह दी। उनका मानना था कि भारत को समझे बिना न तो मानव जाति के विकास का इतिहास समझा जा सकता है और न ही भारत की विशाल जनता पर न्यायपूर्ण शासन किया जा सकता है।
प्रश्न 4: लेखक हजारी प्रसाद द्विवेदी द्वारा 'सफलता' और 'चरितार्थता' में क्या अंतर स्पष्ट किया गया है?
उत्तर:
द्विवेदी जी के अनुसार भौतिक सुख-साधनों, अस्त्र-शस्त्रों और विपुल धन-दौलत का संचय कर लेना केवल बाह्य 'सफलता' (Success) है। परंतु मनुष्य की वास्तविक 'चरितार्थता' ( सार्थकता) प्रेम, मैत्री, त्याग, दया और प्राणिमात्र के कल्याण में अपने को निस्वार्थ भाव से समर्पित कर देने में है। अस्त्र बढ़ाना पशुता की सफलता है, जबकि आत्म-संयम ही मनुष्यता की चरितार्थता है।
प्रश्न 5: बहादुर के चले जाने के बाद लेखक अमरकांत के मन में क्या आत्मग्लानि और विचार उत्पन्न हुए?
उत्तर:
बहादुर के चले जाने पर लेखक को गहरा मानसिक आघात पहुँचा। उसने सोचा कि यदि उन्होंने बहादुर पर झूठा संदेह न किया होता और उसके साथ मारपीट न की होती, तो वह कभी न भागता। बहादुर ने स्वाभिमान के कारण अपना कोई भी सामान या पगार नहीं ली। लेखक को लगा कि वे एक सीधे-सादे, निष्कपट पहाड़ी अनाथ बालक की ईमानदारी की रक्षा न कर सके और स्वयं ही अपनी दृष्टि में गिर गए।
प्रश्न 6: पंडित बिरजू महाराज अपने पिता के अंतिम संस्कार और कठिन दिनों की क्या स्मृति साझा करते हैं?
उत्तर:
बिरजू महाराज बताते हैं कि जब उनके पिता की मृत्यु हुई, तब वे मात्र साढ़े नौ वर्ष के थे। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी दयनीय थी कि पिता के श्राद्ध और तेरहवीं के लिए भी पैसे नहीं थे। बिरजू महाराज ने उस छोटी सी उम्र में दो-दो ट्यूशन पढ़ाए और ₹500 इकट्ठे करके बाबूजी का श्राद्ध संपन्न किया। उन कठिन दिनों ने उन्हें जीवन में संघर्ष करने की अपार शक्ति दी।
प्रश्न 7: बिस्मिल्ला खाँ 'काशी' को छोड़कर अन्यत्र बसने से क्यों इनकार करते थे?
उत्तर:
जब बिस्मिल्ला खाँ के एक शिष्य ने उन्हें अमेरिका में बसने का प्रस्ताव दिया, तो उन्होंने कहा कि वे काशी छोड़कर कहीं नहीं जा सकते। उन्होंने शिष्य से पूछा— "क्या तुम वहाँ बाबा विश्वनाथ और बालाजी का मंदिर ला सकोगे? क्या वहाँ गंगा मैया का पावन घाट ला सकोगे?" खाँ साहब के लिए काशी उनकी संगीत-साधना, गंगा-जमुनी संस्कृति और आत्मा की सांस थी।
प्रश्न 8: कवि रसखान ब्रजभूमि के कुंजों और करील के वृक्षों पर करोड़ों सोने के महलों को क्यों न्योछावर करना चाहते हैं?
उत्तर:
रसखान का श्रीकृष्ण और उनकी लीलाभूमि ब्रज के प्रति अनन्य और विशुद्ध प्रेम है। वे कहते हैं कि जहाँ मेरे आराध्य नंदलाल ने गायें चराईं और रासलीला की, उन ब्रज के काँटेदार 'करील के कुंजों' की छाँव में जो आध्यात्मिक परमानंद मिलता है, उसके समक्ष इंद्रलोक और कुबेर के करोड़ों सोने-चाँदी के महल (कलधौत के धाम) भी अत्यंत तुच्छ और धूल समान हैं।
प्रश्न 9: 'माँ' कहानी के आधार पर बताइए कि माँ अपनी पागल पुत्री मंगु की सेवा किस प्रकार करती थी?
उत्तर:
मंगु जन्म से पागल और मूक थी, जो अपने मलमूत्र और कपड़ों का भी होश नहीं रखती थी। माँ अपने अन्य तीनों स्वस्थ बच्चों की तुलना में मंगु पर अपना सारा वात्सल्य उड़ेल देती थी। वह अपने हाथों से उसे नहलाती, खाना खिलाती, सूखे बिस्तर पर सुलाती और रात-रात भर जागकर उसकी देख-रेख करती थी। माँ का यह मातृत्व निष्काम, असीम और ईश्वरीय प्रेम का साक्षात् रूप था।
प्रश्न 10: 'धरती कब तक घूमेगी' कहानी में सीता की व्यथा क्या है और वह समाज के किस वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है?
उत्तर:
सीता आधुनिक स्वार्थी और संवेदनहीन समाज की उस उपेक्षित वृद्ध माँ की व्यथा का प्रतीक है, जिसे अपने ही बेटों के घरों में रोटी के लिए अपमानित होना पड़ता है। तीन बेटों के होते हुए भी माँ लावारिस की तरह एक-एक महीने बारी-बारी से भोजन करने को विवश है। यह कहानी संयुक्त परिवारों के विघटन और संतानों द्वारा बूढ़े माँ-बाप के प्रति बढ़ते अमानवीय व्यवहार की मर्मभेदी त्रासदी को उजागर करती है।
प्रश्न संख्या 6: सप्रसंग व्याख्या (गद्य खंड एवं पद्य खंड)
(क) गद्य खंड से सप्रसंग व्याख्या
"मानव का जो अस्त्र-शस्त्र बढ़ाने का यह रूप है, वह उसकी बर्बरता का प्रमाण है... मनुष्य नाखूनों को अब भी काटता है, क्योंकि वह अपनी पाशविकता को पीछे छोड़ना चाहता है।"
प्रसंग:
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक 'गोधूलि भाग-2' में संकलित मूर्धन्य निबंधकार आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी द्वारा रचित सुप्रसिद्ध ललित निबंध 'नाखून क्यों बढ़ते हैं' से उद्धृत हैं। यहाँ लेखक ने आधुनिक युग में हथियारों की अंधी होड़ और मानवीय संस्कृति के शाश्वत द्वंद्व का दार्शनिक विश्लेषण प्रस्तुत किया है।
व्याख्या:
लेखक का मत है कि आदिम काल में जब मनुष्य जंगली था, तब नाखून उसके जीवन की रक्षा के लिए अनिवार्य अस्त्र थे। परंतु जैसे-जैसे मनुष्य सभ्य होता गया, उसने नाखूनों को काटना प्रारंभ कर दिया, जो इस बात का प्रतीक था कि मनुष्य अपनी पशुता को त्यागकर मानवता की ओर अग्रसर हो रहा है।
विडंबना यह है कि आज 21वीं सदी का तथाकथित सभ्य मनुष्य एक ओर तो नाखूनों को काटता है, परंतु दूसरी ओर परमाणु बम, मिसाइलें और रासायनिक हथियार बनाकर संपूर्ण विश्व को भस्म करने की तैयारी कर रहा है। लेखक सचेत करते हैं कि अस्त्र-शस्त्रों को बढ़ाना वास्तव में उसी आदिम पाशविक बर्बरता का भयानक आधुनिक रूप है। मनुष्य की वास्तविक विजय विध्वंस में नहीं, बल्कि विश्व-बंधुत्व, प्रेम और करुणा में है।
(ख) पद्य खंड से सप्रसंग व्याख्या
"सदियों की ठंढी-बुझी राख सुगबुगा उठी,
मिट्टी सोने का ताज पहन इठलाती है।
दो राह, समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो,
सिंहासन खाली करो कि जनता आती है!"
प्रसंग:
प्रस्तुत अमर काव्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'गोधूलि भाग-2' में संकलित राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर द्वारा रचित ओजस्वी कविता 'जनतंत्र का जन्म' से अवतरित है। इस कविता में कवि ने भारत में सदियों की औपनिवेशिक पराधीनता के अंत और जनतंत्र (लोकतंत्र) के ऐतिहासिक अभ्युदय का शंखनाद किया है।
व्याख्या:
कवि दिनकर जी कहते हैं कि भारत की जो करोड़ों शोषित, मूक और पीड़ित जनता सदियों के विदेशी अत्याचारों और सामंतवादी दमन को सहते-सहते बुझी हुई राख जैसी निष्प्राण हो चुकी थी, अब स्वाधीनता के पावन सवेरे में उसमें नवचेतना की ज्वाला प्रज्वलित हो उठी है।
जिस जनता को मिट्टी के समान तुच्छ और पददलित समझा जाता था, आज वही मिट्टी लोकतंत्र का स्वर्णिम मुकुट पहनकर गौरव के साथ सिर उठाकर खड़ी हो गई है। कवि तत्कालीन शोषक वर्ग और हुक्मरानों को स्पष्ट चेतावनी देते हैं कि समय का चक्र घूम चुका है, समय के रथ के पहियों की भयानक गड़गड़ाहट ('घर्घर-नाद') को सुनो और रास्ता छोड़ दो। राजसिंहासन को तुरंत खाली कर दो, क्योंकि अब इस देश की वास्तविक भाग्यविधाता और संप्रभु 'जनता' अपने अधिकारों को प्राप्त करने आ रही है।
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