मानक हिंदी वर्तनी | BSEB 10 Hindi Grammar


मानक हिंदी वर्तनी (हिज्जे) : नियम, अपवाद एवं व्यावहारिक प्रयोग

मानक हिंदी वर्तनी (Orthography) : नियम एवं प्रयोग

1. वर्तनी : अवधारणा एवं सैद्धांतिक स्वरूप

वर्तनी को उर्दू में 'हिज्जे' तथा अंग्रेजी में 'स्पेलिंग' (Spelling) कहते हैं। किसी भाषा में उच्चरित होने वाले शब्द के वर्णों, स्वरों, व्यंजनों, अनुनासिकता, अनुस्वार तथा मात्राओं के क्रमिक एवं सुव्यवस्थित स्थान-निर्धारण और यथास्थान प्रयोग को ही वर्तनी कहा जाता है।

वर्तनी में शुद्ध तथा अशुद्ध रूपों के चलते कोई विशेष समस्या नहीं होती है; क्योंकि अशुद्ध रूप को व्याकरणिक नियमों के अभ्यास द्वारा सुधारा जा सकता है। वास्तविक समस्या वहाँ उत्पन्न होती है जहाँ एक ही शब्द के दो या अधिक शुद्ध रूप परस्पर विवादास्पद हो जाते हैं। उदाहरणार्थ:

  • क्रिया रूपों में विविधता: कोई 'आयेंगे' लिखता है, कोई 'जाएँगे' लिखता है, तो कोई 'जायें' लिखता है।
  • विभक्ति की स्थिति को लेकर विवाद: कोई संज्ञा के साथ 'राम को' अलग लिखना सही मानता है, तो कोई 'रामको' मिलाकर लिखता है (जैसे सर्वनाम में 'आपको')।
महत्वपूर्ण सिद्धांत: विवाद के अनावश्यक विवरण से बचते हुए हमें अपेक्षाकृत सर्वमान्य, निर्णयित और आधुनिकतम मानक रूपों को अपनाना चाहिए। जहाँ किसी वर्ण के दो रूप या किसी शब्द की दो वर्तनियाँ पूर्णतः शुद्ध और व्याकरण-सम्मत हैं, वहाँ विकल्प के साथ दोनों रूपों को स्वीकार करना चाहिए (जैसे—चिह्न और चिन्ह, अथवा सिद्धि और सिद्धी)। प्रयोग या रूप का वैविध्य भाषा की विपुल समृद्धि का सूचक है। हमारा दृष्टिकोण "विवाद खत्म करें; वैविध्य नहीं" का होना चाहिए।

2. मानक वर्तनी के व्यावहारिक नियम एवं सूत्र

सूत्र 1 (संज्ञा + विभक्ति): $\text{संज्ञा पद} + \text{विभक्ति} \implies \text{दो पृथक् पद (वियोगात्मक)}$
उदाहरण: राम + को = राम को | पेड़ + से = पेड़ से | घर + में = घर में
सूत्र 2 (सर्वनाम + विभक्ति): $\text{सर्वनाम पद} + \text{विभक्ति} \implies \text{एक संयुक्त पद (संयोगात्मक)}$
उदाहरण: आप + की = आपकी | उन + को = उनको | मुझ + से = मुझसे
सूत्र 3 (पूर्वकालिक क्रिया): $\text{धातु} + \text{'कर'} \implies \text{एक संयुक्त पद}$
उदाहरण: मिल + कर = मिलकर | खा + कर = खाकर | पूछ + कर = पूछकर
सूत्र 4 (शिरोरेखा नियम): $\text{शिरोरेखा के ऊपर मात्रा} + \text{अनुनासिक (ँ)} \implies \text{स्थान-लाघव हेतु केवल बिंदु (ं)}$
उदाहरण: खायें (खायेँ नहीं), जायें (जायेँ नहीं), ईंट, गोंद, मैं
सूत्र 5 (अंतःस्थ/ऊष्म वर्ण): $\text{अनुस्वार} + (\text{य, र, ल, व, श, ष, स, ह}) \implies \text{केवल अनुस्वार (पंचमाक्षर निषेध)}$
उदाहरण: सं + योग = संयोग | सं + रक्षण = संरक्षण | सं + वाद = संवाद | सं + शोधन = संशोधन

3. केंद्रीय हिंदी संस्थान एवं मानक व्याकरण द्वारा स्वीकृत शुद्ध रूप

व्याकरणिक कोटि मानक एवं शुद्ध रूप (स्वीकृत उदाहरण)
आदरार्थक / विधि क्रियाएँ (ए-कार रूप) आइए, जाइए, गाइए, दिखाइए, कीजिए, लीजिए, पीजिए, उठिए, बैठिए, बुलाइए, रहिए, चलिए, करिए, पढ़िए आदि।
स्त्रीलिंग एवं भाववाचक संज्ञाएँ / विशेषण नई, विजयी, पढ़ाई, लिखाई, खिंचाई, कमाई आदि।
भविष्यत्कालिक क्रियाएँ (य-श्रुति) जाएगा, पाएगा, खाएगा, करवाएगा आदि।
पुल्लिंग बहुवचन एवं भूतकालिक रूप हुए, लिए, कछुए, कौए आदि।
पंचमाक्षर एवं अनुस्वार का वैकल्पिक प्रयोग दन्त – दंत, पम्प – पंप, चञ्चल – चंचल, कङ्क – कंक आदि (दोनों रूप विकल्प से शुद्ध हैं)।
प्रसिद्ध व्यक्तियों के सामासिक नाम हजारीप्रसाद द्विवेदी, महावीरप्रसाद द्विवेदी, सूरदास, कबीरदास, तुलसीदास, बिहारीलाल आदि ही सही हैं। 'प्रसाद', 'दास' आदि को नाम से अलग करके नहीं लिखना चाहिए।
संज्ञा पदों के साथ कारक विभक्तियाँ राम को, मोहन को, श्याम के लिए, पेड़ से, घर में आदि (पृथक् लिखा जाना सर्वमान्य है)।
सर्वनाम पदों के साथ कारक विभक्तियाँ आपकी, उनको, उसके लिए, आपसे, मुझसे, तुममें आदि (मिलाकर लिखा जाना सर्वमान्य है)।
पूर्वकालिक कृदंत क्रिया रूप मिलकर जाना, पूछकर आना चाहिए, खाकर बैठो, करके बोलो आदि प्रयोग शुद्ध एवं सर्वमान्य हैं।
अनुनासिकता (चंद्रबिंदु) का नियम स्वरगत अनुनासिकता के लिए चंद्रबिंदु (ँ) ही मान्य है; जैसे—हँसना, फँसना, खाँसी, चाँद आदि।
शिरोरेखा के ऊपर अनुनासिकता का अंकन शिरोरेखा के ऊपर मात्रा होने पर चंद्रबिंदु के स्थान पर सुविधा हेतु केवल बिंदु (ं) दिया जाता है, परंतु इसे अनुस्वार कहना ठीक नहीं; जैसे—खायें, जायें, गोंद आदि।
अनिवार्य अनुस्वार वाले तत्सम शब्द संज्ञा, संयत, अंश, संरक्षण, संवाद, संशोधन, संशय आदि (इनमें पंचमाक्षर का संयोग नहीं चल सकता)।

25 बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी (Objective Questions with Explanations)

1 किसी शब्द के स्वर, व्यंजन, मात्रा और अनुनासिकता के क्रमिक एवं शुद्ध विन्यास को क्या कहते हैं?
  • (A) लिपि
  • (B) वर्तनी (हिज्जे)
  • (C) व्याकरण
  • (D) पदक्रम
उत्तर: (B) वर्तनी (हिज्जे)
व्याख्या: उच्चरित ध्वनियों को लिपि चिह्नों के व्यवस्थित क्रम में अंकित करने की रीति को वर्तनी या हिज्जे (Spelling) कहा जाता है।
2 मानक हिंदी वर्तनी के अनुसार आदरार्थक या आज्ञार्थक क्रिया का कौन-सा रूप शुद्ध है?
  • (A) कीजीये
  • (B) किजिये
  • (C) कीजिए
  • (D) कीजियें
उत्तर: (C) कीजिए
व्याख्या: मानक नियमों के अनुसार 'कीजिए', 'लीजिए', 'पीजिए' में स्वर रूप 'ए' का प्रयोग ही सर्वमान्य और शुद्ध है।
3 भविष्यत् काल की क्रियाओं में 'जाएगा/जायेगा' में से आधुनिक मानक रूप किसे माना गया है?
  • (A) जाएगा
  • (B) जाएगॉ
  • (C) जायगा
  • (D) जावेगा
उत्तर: (A) जाएगा
व्याख्या: आधुनिक मानक वर्तनी में 'जाएगा', 'पाएगा', 'खाएगा' को प्राथमिक मानक रूप माना गया है।
4 संज्ञा पदों के साथ कारक विभक्तियों को लिखने का सर्वमान्य नियम क्या है?
  • (A) संज्ञा के साथ जोड़कर (संयोगात्मक)
  • (B) संज्ञा से अलग (वियोगात्मक)
  • (C) योजक चिह्न लगाकर
  • (D) कोष्ठक में बंद करके
उत्तर: (B) संज्ञा से अलग (वियोगात्मक)
व्याख्या: मानक नियम के अनुसार संज्ञा के साथ विभक्तियाँ सदैव अलग लिखी जाती हैं; जैसे—'राम को', 'घर में', 'पेड़ से'।
5 सर्वनाम शब्दों के साथ कारक विभक्तियों को किस प्रकार लिखा जाना चाहिए?
  • (A) सदैव अलग करके
  • (B) सर्वनाम के साथ मिलाकर (संयुक्त रूप में)
  • (C) बिंदु लगाकर
  • (D) रेखांकित करके
उत्तर: (B) सर्वनाम के साथ मिलाकर (संयुक्त रूप में)
व्याख्या: सर्वनाम के साथ कारक विभक्ति मिलाकर लिखी जाती है; जैसे—'आपकी', 'उनको', 'मुझसे'।
6 यदि सर्वनाम के साथ दो कारक चिह्न एक साथ आ जाएँ (जैसे 'उसके लिए'), तो दूसरा कारक चिह्न कैसे लिखा जाएगा?
  • (A) मिलाकर
  • (B) अलग करके
  • (C) नहीं लिखा जाता
  • (D) दोनों मिलाकर
उत्तर: (B) अलग करके
व्याख्या: पहले सर्वनाम के साथ पहला कारक जुड़ता है (उसके), किंतु दूसरा कारक चिह्न अलग लिखा जाता है (लिए) $\to$ 'उसके लिए'।
7 प्रसिद्ध ऐतिहासिक एवं साहित्यिक व्यक्तियों के नाम में 'प्रसाद' या 'दास' किस प्रकार लिखा जाना चाहिए?
  • (A) मूल नाम से अलग (उदा. कबीर दास)
  • (B) मूल नाम के साथ संयुक्त रूप में (उदा. कबीरदास)
  • (C) योजक चिह्न लगाकर (उदा. कबीर-दास)
  • (D) केवल आद्याक्षर रूप में
उत्तर: (B) मूल नाम के साथ संयुक्त रूप में (उदा. कबीरदास)
व्याख्या: पाठ के अनुसार हजारीप्रसाद, तुलसीदास, कबीरदास, सूरदास, बिहारीलाल में उपाधि या नाम-अंश को जोड़कर लिखना ही शुद्ध है।
8 पूर्वकालिक कृदंत में 'कर' प्रत्यय धातु के साथ किस प्रकार लिखा जाता है?
  • (A) धातु से अलग हटाकर
  • (B) धातु के साथ मिलाकर
  • (C) योजक चिह्न के साथ
  • (D) केवल बिंदु के रूप में
उत्तर: (B) धातु के साथ मिलाकर
व्याख्या: पूर्वकालिक क्रिया में 'कर' धातु के साथ मिलाकर लिखा जाता है; जैसे—'खाकर', 'पूछकर', 'मिलकर'।
9 'संवाद', 'संशोधन' और 'संरक्षण' शब्दों में अनुस्वार के स्थान पर पंचमाक्षर का प्रयोग क्यों नहीं हो सकता?
  • (A) क्योंकि ये तद्भव शब्द हैं
  • (B) क्योंकि अनुस्वार के बाद अंतःस्थ (य, र, ल, व) या ऊष्म (श, ष, स, ह) वर्ण हैं
  • (C) क्योंकि ये विदेशी शब्द हैं
  • (D) इनमें पंचमाक्षर लुप्त रहता है
उत्तर: (B) क्योंकि अनुस्वार के बाद अंतःस्थ (य, र, ल, व) या ऊष्म (श, ष, स, ह) वर्ण हैं
व्याख्या: अंतःस्थ और ऊष्म वर्णों का कोई अपना वर्गीय पंचमाक्षर नहीं होता, अतः इनसे पूर्व केवल अनुस्वार (ं) ही आता है।
10 'हँसना' शब्द में कौन-सा चिह्न लगाना व्याकरण-सम्मत और अनिवार्य है?
  • (A) केवल अनुस्वार (ं)
  • (B) चंद्रबिंदु (ँ)
  • (C) विसर्ग (ः)
  • (D) हलंत (्)
उत्तर: (B) चंद्रबिंदु (ँ)
व्याख्या: स्वरगत अनुनासिकता (जहाँ हवा मुँह और नाक दोनों से निकले) के लिए चंद्रबिंदु ही प्रामाणिक है; जैसे—हँसना, फँसना।
11 'खायें' या 'जायें' में शिरोरेखा के ऊपर केवल बिंदु क्यों लगाया जाता है?
  • (A) क्योंकि वह वास्तविक अनुस्वार है
  • (B) स्थान के अभाव (मात्रा होने) के कारण चंद्रबिंदु के स्थान पर बिंदु दिया जाता है
  • (C) क्योंकि वहाँ पंचमाक्षर है
  • (D) यह अशुद्ध रूप है
उत्तर: (B) स्थान के अभाव (मात्रा होने) के कारण चंद्रबिंदु के स्थान पर बिंदु दिया जाता है
व्याख्या: जब शिरोरेखा के ऊपर कोई मात्रा (जैसे 'े', 'ै', 'ी') हो, तो स्थान की कमी के कारण चंद्रबिंदु का केवल बिंदु लिखा जाता है, पर वह वस्तुतः अनुनासिक ही होता है।
12 'दन्त' और 'दंत' में से कौन-सा रूप मानक हिंदी में ग्राह्य है?
  • (A) केवल 'दन्त'
  • (B) केवल 'दंत'
  • (C) दोनों रूप विकल्प से शुद्ध हैं
  • (D) दोनों अशुद्ध हैं
उत्तर: (C) दोनों रूप विकल्प से शुद्ध हैं
व्याख्या: पंचमाक्षर और अनुस्वार के वैकल्पिक प्रयोग के नियमानुसार 'दन्त' और 'दंत' दोनों ही पूर्णतः शुद्ध माने जाते हैं।
13 निम्नलिखित में से शुद्ध वर्तनी वाले विकल्प का चयन कीजिए:
  • (A) आईए, जाईए
  • (B) आइए, जाइए
  • (C) आयिए, जायिए
  • (D) आइऐ, जाइऐ
उत्तर: (B) आइए, जाइए
व्याख्या: स्वर 'इ' के साथ 'ए' का संयोजन ही मानक है—आइए, जाइए, गाइए।
14 स्त्रीलिंग रूप 'नयी' और 'नई' में आधुनिकता की दृष्टि से सर्वाधिक स्वीकृत रूप कौन-सा है?
  • (A) नई
  • (B) नयाई
  • (C) नयि
  • (D) नइ
उत्तर: (A) नई
व्याख्या: 'नई', 'विजयी', 'पढ़ाई' आदि में स्वर रूप 'ई' का प्रयोग आधुनिक हिंदी वर्तनी में मानक माना गया है।
15 'चिह्न' और 'चिन्ह' के संबंध में पाठ के लेखक का क्या दृष्टिकोण है?
  • (A) केवल पहला शुद्ध है
  • (B) केवल दूसरा शुद्ध है
  • (C) जहाँ दोनों रूप शुद्ध हैं, वहाँ विकल्प से दोनों को स्वीकार करें
  • (D) दोनों को अमान्य कर देना चाहिए
उत्तर: (C) जहाँ दोनों रूप शुद्ध हैं, वहाँ विकल्प से दोनों को स्वीकार करें
व्याख्या: लेखक के अनुसार वैविध्य भाषा की समृद्धि का सूचक है, अतः अनावश्यक विवाद न बढ़ाकर दोनों को विकल्प से स्वीकार करना चाहिए।
16 'कौए' और 'कछुए' शब्दों की मानक वर्तनी क्या दर्शाती है?
  • (A) इनमें 'ए' का प्रयोग शुद्ध है
  • (B) इनमें 'ये' का प्रयोग होना चाहिए
  • (C) इनमें केवल चंद्रबिंदु होना चाहिए
  • (D) ये तद्भव नहीं हैं
उत्तर: (A) इनमें 'ए' का प्रयोग शुद्ध है
व्याख्या: बहुवचन रूपों में 'हुए', 'लिए', 'कछुए', 'कौए' मानक रूप हैं ('कौवे' या 'कछुवे' की तुलना में)।
17 निम्नलिखित में से किस शब्द में अनुस्वार अनिवार्य है और पंचमाक्षर का प्रयोग वर्जित है?
  • (A) चंचल
  • (B) संपदा
  • (C) संयत
  • (D) कंकण
उत्तर: (C) संयत
व्याख्या: 'संयत' में अनुस्वार के बाद 'य' (अंतःस्थ वर्ण) है, इसलिए यहाँ केवल अनुस्वार ही मान्य है।
18 'रामको पुस्तक दो' वाक्य में वर्तनी की क्या त्रुटि है?
  • (A) 'पुस्तक' अशुद्ध है
  • (B) संज्ञा 'राम' के साथ विभक्ति 'को' मिलाकर लिखी गई है, जो पृथक् होनी चाहिए
  • (C) 'दो' के स्थान पर 'दीजिए' होना चाहिए
  • (D) कोई त्रुटि नहीं है
उत्तर: (B) संज्ञा 'राम' के साथ विभक्ति 'को' मिलाकर लिखी गई है, जो पृथक् होनी चाहिए
व्याख्या: संज्ञा के साथ विभक्ति अलग लिखी जाती है, अतः शुद्ध रूप 'राम को' होगा।
19 'आप से' के स्थान पर मानक रूप क्या होगा?
  • (A) आप-से
  • (B) आपसे
  • (C) आपमें
  • (D) आप पे
उत्तर: (B) आपसे
व्याख्या: सर्वनाम के साथ कारक चिह्न सदैव मिलाकर लिखा जाता है $\to$ 'आपसे'।
20 'खाँसी' शब्द में किस नासिक्य चिह्न का प्रयोग हुआ है?
  • (A) अनुस्वार
  • (B) चंद्रबिंदु (अनुनासिक)
  • (C) विसर्ग
  • (D) अर्धचंद्र
उत्तर: (B) चंद्रबिंदु (अनुनासिक)
व्याख्या: 'खाँसी' में स्वरगत अनुनासिकता है, अतः चंद्रबिंदु का प्रयोग ही व्याकरण-सम्मत है।
21 'पम्प' को 'पंप' लिखना किस नियम के अंतर्गत आता है?
  • (A) स्वर संधि नियम
  • (B) पंचमाक्षर के स्थान पर अनुस्वार का वैकल्पिक प्रयोग
  • (C) वर्ण विपर्यय
  • (D) बलाघात नियम
उत्तर: (B) पंचमाक्षर के स्थान पर अनुस्वार का वैकल्पिक प्रयोग
व्याख्या: प-वर्ग का पंचमाक्षर 'म्' है, जिसके विकल्प में शिरोरेखा पर अनुस्वार (ं) लगाया जाता है।
22 "विवाद खत्म करें; वैविध्य नहीं"—इस कथन से क्या तात्पर्य है?
  • (A) किसी भी नियम का पालन न करना
  • (B) शुद्ध वैकल्पिक रूपों को उदारतापूर्वक स्वीकार कर भाषा को समृद्ध बनाना
  • (C) केवल पुरानी वर्तनी का समर्थन करना
  • (D) वर्तनी के सारे नियम समाप्त कर देना
उत्तर: (B) शुद्ध वैकल्पिक रूपों को उदारतापूर्वक स्वीकार कर भाषा को समृद्ध बनाना
व्याख्या: जहाँ एक से अधिक रूप व्याकरण-सम्मत हों, वहाँ कट्टरता छोड़कर भाषा के स्वाभाविक वैविध्य को सम्मान देना चाहिए।
23 निम्नलिखित में से कौन-सा संयुक्त नाम शुद्ध रूप से लिखा गया है?
  • (A) तुलसी दास
  • (B) तुलसी-दास
  • (C) तुलसीदास
  • (D) तुलसी दाश
उत्तर: (C) तुलसीदास
व्याख्या: कबीरदास, सूरदास, तुलसीदास जैसे नामों को संयुक्त रूप में लिखना ही मानक वर्तनी है।
24 'पूछ कर आना' के स्थान पर मानक रूप क्या होगा?
  • (A) पूछकर आना
  • (B) पूछ-कर आना
  • (C) पूछी कर आना
  • (D) पूछिके आना
उत्तर: (A) पूछकर आना
व्याख्या: पूर्वकालिक क्रिया में 'कर' धातु के साथ संयुक्त होकर लिखा जाता है—'पूछकर'।
25 'अंश' शब्द में अनुस्वार का प्रयोग क्यों अनिवार्य है?
  • (A) क्योंकि इसके बाद ऊष्म वर्ण 'श' है
  • (B) क्योंकि यह विदेशी शब्द है
  • (C) क्योंकि यह बहुवचन है
  • (D) क्योंकि यह अव्यय है
उत्तर: (A) क्योंकि इसके बाद ऊष्म वर्ण 'श' है
व्याख्या: 'श' ऊष्म व्यंजन है और इसका कोई पंचमाक्षर नहीं होता, अतः 'अंश' में अनुस्वार ही शुद्ध रूप है।

25 विषयनिष्ठ प्रश्नोत्तर (Subjective Questions with Comprehensive Explanations)

प्रश्न 1: 'वर्तनी' किसे कहते हैं? भाषा में इसका क्या महत्व है?

उत्तर: किसी भाषा के शब्दों में प्रयुक्त होने वाले वर्णों, स्वरों, व्यंजनों, मात्राओं और अनुनासिकता के क्रमिक, सटीक एवं नियमबद्ध विन्यास को वर्तनी (हिज्जे / Spelling) कहा जाता है।

महत्व: वर्तनी भाषा की समरूपता, स्पष्टता और संप्रेषणीयता की आधारशिला है। अशुद्ध वर्तनी से न केवल भाषा का सौंदर्य विकृत होता है, अपितु अर्थ का अनर्थ भी हो जाता है (जैसे—'अलि' = भौंरा, किंतु 'अली' = सखी)।

प्रश्न 2: "वर्तनी में अशुद्ध रूपों से उतनी समस्या नहीं होती जितनी शुद्ध रूपों के विवाद से होती है।" स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: अशुद्ध वर्तनी को व्याकरण के ज्ञात नियमों के आधार पर सरलता से पहचाना और सुधारा जा सकता है। किंतु समस्या वहाँ गंभीर हो जाती है जहाँ विद्वानों और प्रकाशकों द्वारा एक ही शब्द के दो भिन्न-भिन्न रूपों को शुद्ध मानकर प्रयोग किया जाता है। जैसे—कुछ विद्वान 'जाएँगे' लिखते हैं और कुछ 'जायेंगे'; कुछ 'राम को' अलग लिखते हैं और कुछ 'रामको' मिलाकर। इस द्वैध से शिक्षार्थियों में संशय उत्पन्न होता है।

प्रश्न 3: "विवाद खत्म करें; वैविध्य नहीं"—इस सिद्धांत का भाषा के संदर्भ में क्या आशय है?

उत्तर: इस सिद्धांत का तात्पर्य यह है कि जहाँ किसी शब्द की दो वर्तनियाँ व्याकरणिक रूप से पूर्णतः शुद्ध हों (जैसे—'चिह्न' और 'चिन्ह', अथवा 'सिद्धि' और 'सिद्धी'), वहाँ किसी एक रूप को जबरन थोपने या दूसरे को गलत ठहराने के विवाद से बचना चाहिए। रूप का वैविध्य भाषा की विपुलता और ऐतिहासिक समृद्धि का परिचायक है, अतः दोनों को वैकल्पिक रूप से मान्यता दी जानी चाहिए।

प्रश्न 4: आदरार्थक एवं विधि क्रियाओं में 'ए' और 'ये' के प्रयोग का मानक नियम क्या है?

उत्तर: आधुनिक मानक हिंदी वर्तनी के अनुसार आदरार्थक या आज्ञार्थक क्रियाओं के अंत में स्वर रूप 'ए' का प्रयोग ही सर्वमान्य है।

शुद्ध रूप: आइए, जाइए, गाइए, दिखाइए, कीजिए, लीजिए, पीजिए, उठिए, बैठिए, बुलाइए, रहिए, चलिए, करिए, पढ़िए आदि। (इनमें 'आईये', 'जाईये' लिखना अमानक माना जाता है)।

प्रश्न 5: भाववाचक संज्ञाओं और स्त्रीलिंग शब्दों में 'ई' और 'यी' में से किसे प्राथमिकता दी गई है? उदाहरण दें।

उत्तर: स्त्रीलिंग, भाववाचक संज्ञाओं तथा कृदंत रूपों में स्वर रूप 'ई' का प्रयोग ही निर्णयित और सर्वमान्य है।

प्रामाणिक उदाहरण: नई, विजयी, पढ़ाई, लिखाई, खिंचाई, कमाई आदि। ('नयी' के स्थान पर 'नई' को अधिक मानक स्वीकार किया गया है)।

प्रश्न 6: भविष्यत् काल की क्रियाओं के लेखन में मानक रूप क्या है? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर: भविष्यत् काल की अन्य पुरुष एकवचन क्रियाओं में 'जाएगा', 'पाएगा', 'खाएगा', 'करवाएगा' आदि रूपों को मानक माना गया है। यहाँ 'जायेगा' या 'पायेगा' की तुलना में 'जाएगा' और 'पाएगा' का प्रयोग आधुनिक हिंदी वर्तनी में अधिक सुसंगत और ग्राह्य है।

प्रश्न 7: भूतकालिक एवं बहुवचन रूपों में 'ए' का प्रयोग किस प्रकार होता है? उदाहरण दें।

उत्तर: भूतकाल के बहुवचन रूपों तथा आकारांत पुल्लिंग के बहुवचन में 'ए' स्वर का प्रयोग शुद्ध है।

उदाहरण: हुए, लिए, कछुए, कौए आदि। (यहाँ 'हुवे', 'लिये', 'कछुवे' या 'कौवे' की तुलना में स्वर रूप अधिक मानक माने गए हैं)।

प्रश्न 8: पंचमाक्षर और अनुस्वार के वैकल्पिक प्रयोग को सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: संस्कृत के तत्सम शब्दों में किसी वर्ग (क, च, ट, त, प वर्ग) के पंचमाक्षर (ङ्, ञ्, ण्, न्, म्) के स्थान पर विकल्प से शिरोरेखा पर अनुस्वार (ं) का प्रयोग मान्य है। दोनों ही रूप शुद्ध माने जाते हैं:

  • दन्त = दंत (त्-वर्ग का पंचमाक्षर 'न्')
  • पम्प = पंप (प्-वर्ग का पंचमाक्षर 'म्')
  • चञ्चल = चंचल (च्-वर्ग का पंचमाक्षर 'ञ्')
  • कङ्क = कंक (क्-वर्ग का पंचमाक्षर 'ङ्')
प्रश्न 9: संज्ञा शब्दों के साथ कारक विभक्तियों को लिखने का क्या नियम है? तीन उदाहरण दीजिए।

उत्तर: नियम: संज्ञा पदों के साथ कारक विभक्तियों को सदैव अलग (वियोगात्मक रूप में) लिखा जाना चाहिए। उन्हें संज्ञा के साथ मिलाकर लिखना अशुद्ध है।

उदाहरण:

  1. राम को (न कि 'रामको')
  2. पेड़ से (न कि 'पेड़से')
  3. श्याम के लिए (न कि 'श्यामकेलिए')
प्रश्न 10: सर्वनाम शब्दों के साथ कारक विभक्तियों को लिखने का क्या नियम है? सोदाहरण स्पष्ट करें।

उत्तर: नियम: सर्वनाम शब्दों के साथ कारक विभक्तियाँ सदैव मिलाकर (संयोगात्मक रूप में) लिखी जाती हैं।

उदाहरण: आपकी, उनको, आपसे, मुझसे, तुममें, किसका आदि।
विशेष नियम: यदि सर्वनाम के साथ दो विभक्तियाँ हों, तो पहली मिलाकर और दूसरी अलग लिखी जाएगी; जैसे—'उसके लिए', 'उनमें से'।

प्रश्न 11: साहित्यिक महापुरुषों के नामों में 'प्रसाद' और 'दास' को किस प्रकार लिखा जाना चाहिए और क्यों?

उत्तर: साहित्यिक एवं ऐतिहासिक व्यक्तियों के नाम में 'प्रसाद', 'दास' या 'लाल' को मूल नाम के साथ संयुक्त रूप में (मिलाकर) ही लिखना चाहिए; जैसे—महावीरप्रसाद द्विवेदी, हजारीप्रसाद द्विवेदी, तुलसीदास, कबीरदास, सूरदास, बिहारीलाल।

कारण: ये शब्द अलग से कोई उपनाम या जाति नहीं हैं, बल्कि व्यक्ति के मूल नाम के अभिन्न अंग हैं। इन्हें अलग लिखने से व्यक्तिवाचक संज्ञा खंडित हो जाती है।

प्रश्न 12: पूर्वकालिक कृदंत क्रियाओं में 'कर' के प्रयोग का नियम क्या है?

उत्तर: नियम: पूर्वकालिक क्रिया बनाते समय 'कर' प्रत्यय को मुख्य धातु के साथ अनिवार्यतः मिलाकर लिखा जाता है। इसे अलग लिखना अशुद्ध माना जाता है।

उदाहरण: मिलकर जाना, पूछकर आना, खाकर बैठो, करके बोलो, रोकर कहना आदि।

प्रश्न 13: अनुनासिकता के लिए चंद्रबिंदु (ँ) का प्रयोग कब अनिवार्य होता है?

उत्तर: जब किसी स्वर का उच्चारण मुख और नासिका दोनों से एक साथ होता है (स्वरगत अनुनासिकता), तब वहाँ अनिवार्य रूप से चंद्रबिंदु (ँ) लगाया जाता है।

उदाहरण: हँसना, फँसना, खाँसी, चाँद, आँख, गाँव आदि। यदि यहाँ केवल बिंदु लगाया जाए तो उच्चारण और अर्थ में अशुद्धि आ सकती है (जैसे 'हंस' = जलपक्षी, किंतु 'हँस' = हँसने की क्रिया)।

प्रश्न 14: शिरोरेखा के ऊपर मात्रा होने पर चंद्रबिंदु के स्थान पर बिंदु क्यों दिया जाता है? क्या इसे अनुस्वार कहना उचित है?

उत्तर: जब किसी वर्ण पर शिरोरेखा के ऊपर निकलने वाली कोई मात्रा (जैसे—ि, ी, े, ै, ो, औ) लगी हो, तो वहाँ स्थान-लाघव (मुद्रण व लेखन में जगह की कमी) के कारण चंद्रबिंदु (ँ) के स्थान पर केवल बिंदु (ं) दिया जाता है; जैसे—खायें, जायें, ईंट, मैं, गोंद।

अनुस्वार न कहने का कारण: इसे अनुस्वार कहना सर्वथा अनुचित है; क्योंकि यह मूलतः नासिक्य व्यंजन (पंचमाक्षर) नहीं है, बल्कि चंद्रबिंदु (अनुनासिक स्वर) का ही व्यावहारिक स्थानापन्न रूप है।

प्रश्न 15: किन शब्दों में केवल अनुस्वार (ं) का प्रयोग ही मान्य है और पंचमाक्षर का प्रयोग पूर्णतः वर्जित है?

उत्तर: जब अनुस्वार के ठीक बाद अंतःस्थ व्यंजन (य, र, ल, व) या ऊष्म व्यंजन (श, ष, स, ह) आते हैं, तो वहाँ केवल और केवल अनुस्वार (ं) का प्रयोग ही मान्य होता है। वहाँ पंचमाक्षर का प्रयोग संभव नहीं है।

उदाहरण: संज्ञा, संयत, अंश, संरक्षण, संवाद, संशोधन, संशय, संहार आदि।

प्रश्न 16: निम्नलिखित अशुद्ध वाक्यों की वर्तनी शुद्ध करके पुनः लिखिए:
(क) रामको कल दिल्ली जाना है।
(ख) आप से मिलकर प्रसन्नता हुई।

उत्तर:

  • (क) अशुद्ध: रामको कल दिल्ली जाना है।
    शुद्ध रूप: राम को कल दिल्ली जाना है। (संज्ञा से कारक विभक्ति अलग लिखी जाती है)।
  • (ख) अशुद्ध: आप से मिलकर प्रसन्नता हुई।
    शुद्ध रूप: आपसे मिलकर प्रसन्नता हुई। (सर्वनाम के साथ कारक विभक्ति मिलाकर लिखी जाती है)।
प्रश्न 17: 'चिह्न' शब्द के मानक स्वरूप पर टिप्पणी लिखिए।

उत्तर: संस्कृत के मूल तत्सम रूप में 'ह्' आधा और 'न्' पूरा होता है—चिह्न [चिह् + न]। मुद्रण की सुगमता और बोलचाल में बहुत से लोग इसे 'चिन्ह' भी लिखते हैं। पाठ के अनुसार दोनों ही रूप ग्राह्य हैं और शिक्षार्थियों को इनके वैविध्य को सहर्ष स्वीकार करना चाहिए, यद्यपि परंपरानुकूल 'चिह्न' अधिक प्रामाणिक माना जाता है।

प्रश्न 18: 'किए' और 'किये', 'लिए' और independence of 'लिये' में मानक रूप कौन-सा है और क्यों?

उत्तर: केंद्रीय हिंदी निदेशालय के मानक वर्तनी नियमों के अनुसार जहाँ 'ए' स्वतंत्र स्वर के रूप में उच्चरित हो, वहाँ स्वर रूप 'किए' और 'लिए' ही मानक हैं। 'किये' या 'लिये' में 'य' श्रुति अनावश्यक है; क्योंकि मूल धातु 'कर' या अव्यय में 'य' का कोई व्युत्पत्तिगत आधार नहीं है।

प्रश्न 19: निम्नलिखित शब्दों में से मानक वर्तनी वाले शुद्ध शब्द छाँटकर लिखिए:
(पढाई, पढ़ाई, कीजीये, कीजिए, सम्पादक, संपादक, कबीर दास, कबीरदास)

उत्तर:

  • पढाई / पढ़ाई $\to$ पढ़ाई (शुद्ध)
  • कीजीये / कीजिए $\to$ कीजिए (शुद्ध)
  • सम्पादक / संपादक $\to$ संपादक (तथा सम्पादक दोनों विकल्प से शुद्ध, आधुनिक मानक: संपादक)
  • कबीर दास / कबीरदास $\to$ कबीरदास (शुद्ध)
प्रश्न 20: 'संशोधन' शब्द का वर्ण-विच्छेद करते हुए बताइए कि यहाँ 'म्' क्यों नहीं लिखा जा सकता?

उत्तर: 'संशोधन' का विच्छेद सम् + शोधन होता है। यहाँ संधि के नियमानुसार 'म्' के बाद ऊष्म वर्ण 'श' आया है। चूंकि 'श' का कोई अपना नासिक्य पंचमाक्षर नहीं होता, अतः 'म्' अनिवार्य रूप से अनुस्वार (ं) में परिवर्तित हो जाता है। इसे 'सम्शोधन' लिखना वर्तनी की दृष्टि से अशुद्ध है।

प्रश्न 21: 'हंस' और 'हँस' में वर्तनी-भेद से क्या अर्थ-भेद उत्पन्न होता है?

उत्तर:

  • हंस (अनुस्वार युक्त): यह एक संज्ञा शब्द है, जिसका अर्थ मानसरोवर का प्रसिद्ध पवित्र श्वेत जलपक्षी अथवा जीवात्मा होता है।
  • हँस (चंद्रबिंदु युक्त): यह हँसना क्रिया की मूल धातु (आज्ञार्थक रूप) है; जैसे—'सदा हँसते रहो'।

अतः अनुस्वार और चंद्रबिंदु के असावधानीपूर्ण प्रयोग से अर्थ सर्वथा बदल जाता है।

प्रश्न 22: 'खा कर बैठो' के स्थान पर 'खाकर बैठो' लिखना क्यों अनिवार्य है? व्याकरणिक कारण स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: हिंदी व्याकरण में 'खाकर' एक पूर्वकालिक कृदंत (Conjunctive Participle) है। नियम है कि मुख्य क्रिया से पूर्व संपन्न होने वाली क्रिया को प्रकट करने के लिए धातु में 'कर' जोड़कर एक संयुक्त शब्द बनाया जाता है। यदि 'कर' को अलग लिखा जाए तो वह 'करना' क्रिया या 'हाथ/टैक्स' संज्ञा का भ्रम उत्पन्न कर सकता है।

प्रश्न 23: हिंदी में 'ए' और 'ऐ' के मात्रात्मक प्रयोग में क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

उत्तर: क्रियाओं के अंत में 'ए' स्वर (जैसे—जाए, खाए, नए) आता है, जिसकी मात्रा शिरोरेखा के ऊपर एक डंडी (े) होती है। बहुधा लोग 'जाइऐ' या 'आइऐ' लिख देते हैं जो सर्वथा अशुद्ध है। 'ऐ' का प्रयोग केवल मूल शब्दों (जैसे—ऐनक, ऐसा, ऐतिहासिक) या 'है/हैं' में होता है।

प्रश्न 24: आधुनिक युग में कंप्यूटर एवं मुद्रण (Printing) तकनीक ने हिंदी वर्तनी के मानकीकरण को किस प्रकार प्रभावित किया है?

उत्तर: कंप्यूटर, फॉन्ट और की-बोर्ड के आगमन से हिंदी वर्तनी में सरलीकरण और एकरूपता को बल मिला है।

  • जटिल संयुक्त वर्णों (जैसे—ङ्क, च्छ, द्ध) के स्थान पर हलंत युक्त रूप (द्‍ध) अथवा पंचमाक्षर के स्थान पर अनुस्वार (ं) का प्रयोग बढ़ा है।
  • टाइपिंग में सुगमता के कारण 'जाएगा', 'नई', 'कीजिए' जैसे स्वर-प्रधान रूपों को वैश्विक स्तर पर स्वीकार्यता मिली है।
प्रश्न 25: बिहार बोर्ड (BSEB) की परीक्षाओं में वर्तनी की शुद्धता का परीक्षार्थी के प्राप्तांकों पर क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तर: भाषा के प्रश्नपत्र में वर्तनी की शुद्धता का प्रत्यक्ष प्रभाव अंकों पर पड़ता है।

  • विषयनिष्ठ प्रश्नों (निबंध, संक्षेपण, व्याख्या, पत्र-लेखन) में अशुद्ध वर्तनी होने पर परीक्षक अंक काट लेते हैं।
  • शुद्ध वर्तनी से उत्तर प्रभावशाली, पठनीय और प्रामाणिक बनता है, जिससे परीक्षार्थी को शत-प्रतिशत अंक प्राप्त करने में सहायता मिलती है।

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