अध्याय 5: तत्वों का आवर्त वर्गीकरण
BSEB Matric Class 10 Chemistry (रसायन विज्ञान) Complete Chapter Notes & Periodic Trends
1. तत्वों के वर्गीकरण के प्रारंभिक प्रयास
प्रकृति में वर्तमान में 118 तत्व ज्ञात हैं। तत्वों के गुणों का व्यवस्थित और सरल अध्ययन करने के लिए उनके वर्गीकरण की आवश्यकता हुई।
(A) डॉबेराइनर का त्रिक नियम (Dobereiner's Triads - 1817):
सोडियम (Na) का द्रव्यमान = (6.9 + 39.0) / 2 = 22.95 ≈ 23
अन्य त्रिक: (Ca, Sr, Ba) तथा (Cl, Br, I)सीमा: डॉबेराइनर उस समय ज्ञात तत्वों में से केवल तीन ही त्रिक ज्ञात कर सके।
(B) न्यूलैंड्स का अष्टक नियम (Newlands' Law of Octaves - 1866):
- न्यूलैंड्स ने तत्वों को उनके बढ़ते परमाणु द्रव्यमान के क्रम में व्यवस्थित किया (हाइड्रोजन H से शुरू कर 56वें तत्व थोरियम Th तक)।
- नियम: प्रत्येक आठवें तत्व के गुणधर्म पहले तत्व के गुणधर्म के समान होते हैं (जैसे संगीत के सात सुरों में आठवाँ सुर पहले सुर के समान होता है — सा, रे, ग, म, प, ध, नि, सा)।
- यह नियम केवल कैल्शियम (Ca - परमाणु भार 40) तक ही लागू होता था; इसके बाद प्रत्येक आठवें तत्व के गुण पहले से नहीं मिलते थे।
- न्यूलैंड्स ने कल्पना की कि प्रकृति में केवल 56 तत्व ही हैं और भविष्य में कोई नया तत्व नहीं खोजा जाएगा, जो गलत सिद्ध हुआ।
- सारणी में तत्वों को समंजित करने के लिए असमान गुणों वाले तत्वों को एक साथ रख दिया (उदा. Co और Ni को हैलोजन समूह F, Cl, Br के साथ रखा गया; जबकि लोहे Fe को इनसे दूर रखा गया)।
2. मेंडेलीफ की आवर्त सारणी (Mendeleev's Periodic Table)
रूसी रसायनज्ञ दिमित्री मेंडेलीफ (1869) ने उस समय ज्ञात 63 तत्वों को उनके मूल गुणधर्म, परमाणु द्रव्यमान तथा रासायनिक गुणधर्मों (हाइड्रोजन व ऑक्सीजन के साथ बने हाइड्राइड और ऑक्साइड के सूत्रों) के आधार पर व्यवस्थित किया।
"तत्वों के भौतिक एवं रासायनिक गुणधर्म उनके परमाणु द्रव्यमानों के आवर्ती फलन (Periodic Functions) होते हैं।"
(अर्थात् तत्वों को बढ़ते परमाणु द्रव्यमान में रखने पर एक निश्चित अंतराल के बाद समान गुणों वाले तत्व दोहराए जाते हैं।)- अज्ञात तत्वों के लिए रिक्त स्थान: मेंडेलीफ ने कुछ अज्ञात तत्वों के लिए पहले से खाली स्थान छोड़ दिए और उनके गुणों की सटीक भविष्यवाणी की:
- एका-बोरॉन → बाद में खोजा गया स्कैंडियम (Sc)
- एका-एल्युमिनियम → बाद में खोजा गया गैलियम (Ga)
- एका-सिलिकॉन → बाद में खोजा गया जर्मेनियम (Ge)
- उत्कृष्ट / अक्रिय गैसों का स्थान: जब हीलियम (He), नियॉन (Ne) और ऑर्गन (Ar) जैसी अक्रिय गैसों की खोज हुई, तो उन्हें पिछली व्यवस्था को छेड़े बिना एक नए 'शून्य समूह' में आसानी से रख दिया गया।
- हाइड्रोजन की अनिश्चित स्थिति: हाइड्रोजन क्षार धातुओं (समूह 1) और हैलोजनों (समूह 7) दोनों के समान गुण दर्शाता है, अतः इसे कोई निश्चित स्थान नहीं दिया जा सका।
- समस्थानिकों (Isotopes) का स्थान: समस्थानिकों के रासायनिक गुण समान परंतु परमाणु द्रव्यमान भिन्न होते हैं। बढ़ते परमाणु द्रव्यमान के आधार पर इन्हें अलग स्थान मिलना चाहिए था, जो संभव नहीं हुआ।
- परमाणु द्रव्यमान की विसंगति: कुछ स्थानों पर अधिक परमाणु द्रव्यमान वाले तत्व को कम परमाणु द्रव्यमान वाले तत्व से पहले रखा गया (उदा. कोबाल्ट Co - 58.9 को निकेल Ni - 58.7 से पहले रखा गया)।
3. आधुनिक आवर्त सारणी (Modern Periodic Table)
सन् 1913 में हेनरी मोस्ले (Henry Moseley) ने दर्शाया कि तत्व के परमाणु द्रव्यमान की तुलना में उसका परमाणु संख्या / क्रमांक (Atomic Number - Z) अधिक आधारभूत गुणधर्म है।
"तत्वों के भौतिक एवं रासायनिक गुणधर्म उनकी परमाणु संख्या (Atomic Number) के आवर्ती फलन होते हैं।"
आधुनिक आवर्त सारणी की संरचना:
- समूह / वर्ग (Groups): ऊर्ध्वाधर स्तंभों (Vertical Columns) को समूह कहते हैं। इनकी कुल संख्या 18 है।
- एक ही समूह के सभी तत्वों के संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है (उदा. समूह 1 के सभी तत्वों की बाह्यतम कक्षा में 1 इलेक्ट्रॉन होता है)।
- आवर्त (Periods): क्षैतिज पंक्तियों (Horizontal Rows) को आवर्त कहते हैं। इनकी कुल संख्या 7 है।
- एक ही आवर्त के तत्वों में कोशों (Shells - K, L, M, N) की संख्या समान होती है।
- किसी कोश में अधिकतम इलेक्ट्रॉनों की संख्या सूत्र 2n2 द्वारा दी जाती है (जहाँ n = कोश की संख्या)।
4. आधुनिक आवर्त सारणी में आवर्तिता / प्रवृत्तियाँ (Periodic Trends)
| गुणधर्म (Property) | आवर्त में परिवर्तन (बाएं से दाएं →) | समूह में परिवर्तन (ऊपर से नीचे ↓) | परिवर्तन का वैज्ञानिक कारण |
|---|---|---|---|
| 1. संयोजकता (Valency) | पहले 1 से 4 तक बढ़ती है, फिर घटकर 0 हो जाती है। | समान रहती है (अपरिवर्तित)। | समूह में संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान रहती है। |
| 2. परमाणु आकार / त्रिज्या (Atomic Radius) | घटता है (↓) | बढ़ता है (↑) |
• आवर्त में: नाभिकीय आवेश बढ़ता है, जिससे इलेक्ट्रॉन नाभिक की ओर खिंचते हैं। • समूह में: नीचे जाने पर नए कोश जुड़ते हैं जिससे नाभिक से दूरी बढ़ती है। |
| 3. धात्विक लक्षण (Metallic Character) | घटता है (↓) (इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति घटती है) |
बढ़ता है (↑) (इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति बढ़ती है) |
प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ने से इलेक्ट्रॉन त्यागना कठिन होता है; समूह में कोश बढ़ने से आसान होता है। |
| 4. अधात्विक लक्षण / विद्युत ऋणात्मकता | बढ़ता है (↑) (इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति) |
घटता है (↓) | नाभिकीय आकर्षण बढ़ने से इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की क्षमता बढ़ती है। |
| 5. ऑक्साइडों की प्रकृति | क्षारीय से अम्लीय होती जाती है। | क्षारीय प्रकृति बढ़ती है। | धातुओं के ऑक्साइड क्षारीय तथा अधातुओं के ऑक्साइड अम्लीय होते हैं। |
आधुनिक आवर्त सारणी में एक टेढ़ी-मेढ़ी (Zig-zag) रेखा धातुओं को अधातुओं से अलग करती है। इस रेखा पर आने वाले तत्व धातुओं और अधातुओं दोनों के गुण प्रदर्शित करते हैं।
- उदाहरण: बोरॉन (B), सिलिकॉन (Si), जर्मेनियम (Ge), आर्सेनिक (As), एंटीमनी (Sb), टेल्यूरियम (Te) तथा पोलोनियम (Po)।
5. मेंडेलीफ बनाम आधुनिक आवर्त सारणी
| लक्षण | मेंडेलीफ की आवर्त सारणी | आधुनिक आवर्त सारणी |
|---|---|---|
| वर्गीकरण का आधार | परमाणु द्रव्यमान (Atomic Mass) | परमाणु संख्या (Atomic Number - Z) |
| कुल समूह (वर्ग) | 8 समूह | 18 समूह |
| कुल आवर्त | 6 आवर्त | 7 आवर्त |
| समस्थानिकों की स्थिति | समस्थानिकों के लिए कोई स्थान नहीं था। | समान परमाणु संख्या होने के कारण एक ही स्थान मिला। |
| हाइड्रोजन का स्थान | अनिश्चित व विवादित था। | इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर समूह 1 के शीर्ष पर। |
6. महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर
- तत्वों को उनके बढ़ते परमाणु द्रव्यमान के क्रम में व्यवस्थित करना।
- समान रासायनिक गुणधर्म वाले तत्वों को एक साथ रखना, जिसके लिए उन्होंने तत्वों द्वारा ऑक्सीजन और हाइड्रोजन के साथ बनने वाले ऑक्साइडों (R2O, RO आदि) तथा हाइड्राइडों (RH, RH2 आदि) के सूत्रों को मूल रासायनिक गुण माना।
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