अध्याय 5 – समांतर श्रेढ़िया | BSEB 10 Mathematics Notes


BSEB Class 10 Exam Special • 8–10 अंक पक्का

अध्याय 5: समांतर श्रेढ़ियाँ (Arithmetic Progressions) – सम्पूर्ण नोट्स

बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा (NCERT आधारित) के लिए n-वाँ पद, योगफल सूत्र, सुपरफास्ट ऑब्जेक्टिव ट्रिक्स व हल प्रश्न

1. अध्याय परिचय (Chapter Introduction)

प्रकृति और हमारे दैनिक जीवन में अनेक प्रतिरूप (Patterns) देखने को मिलते हैं; जैसे—सीढ़ी के डंडों की लंबाई, मधुमक्खी के छत्ते के खाने या बैंक में प्रत्येक वर्ष जमा की गई निश्चित राशि।

गणित में संख्याओं की ऐसी सूची को जिसमें प्रत्येक पद अपने ठीक पूर्व पद में एक निश्चित संख्या जोड़ने से प्राप्त होता है, समांतर श्रेढ़ी (Arithmetic Progression - संक्षेप में A.P.) कहते हैं।

बिहार बोर्ड परीक्षा में महत्व:
बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा में इस अकेले अध्याय से लगभग 8 से 10 अंक के प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें 4 से 5 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (1 अंक), 2 लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक) और कभी-कभी 1 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक) निश्चित रूप से शामिल होता है।

2. मूल परिभाषाएँ एवं शब्दावली (Key Definitions)

(A) समांतर श्रेढ़ी (A.P.) की मानक परिभाषा

एक समांतर श्रेढ़ी संख्याओं की ऐसी सूची है जिसमें प्रत्येक पद अपने पिछले पद में एक निश्चित संख्या जोड़कर प्राप्त होता है (प्रथम पद के अतिरिक्त)।

(B) प्रथम पद (First Term - a)

श्रेढ़ी की सबसे पहली संख्या को प्रथम पद कहा जाता है। इसे सामान्यतः a या a1 से दर्शाया जाता है।

(C) सार्व अंतर (Common Difference - d)

प्रत्येक क्रमागत पद और उसके पूर्ववर्ती पद के निश्चित अंतर को सार्व अंतर (d) कहते हैं।

सार्व अंतर का सूत्र:
d = ak+1 − ak = a2 − a1 = a3 − a2 = ...
BSEB बार-बार पूछा जाने वाला तथ्य:
सार्व अंतर (d) का मान धनात्मक (+), ऋणात्मक (−) अथवा शून्य (0) कुछ भी हो सकता है।
उदाहरण:
• 2, 4, 6, 8, ... ➜ d = 4 − 2 = +2 (धनात्मक)
• 10, 7, 4, 1, ... ➜ d = 7 − 10 = −3 (ऋणात्मक)
• 5, 5, 5, 5, ... ➜ d = 5 − 5 = 0 (शून्य)

(D) A.P. का व्यापक रूप (General Form of an A.P.)

यदि प्रथम पद a तथा सार्व अंतर d हो, तो A.P. का सामान्य रूप होता है:

a,   a + d,   a + 2d,   a + 3d,   a + 4d, ...

(E) परिमित बनाम अपरिमित A.P.

  • परिमित A.P. (Finite A.P.): वह A.P. जिसमें पदों की संख्या सीमित (परिमित) होती है। इसका एक अंतिम पद होता है। (जैसे: 2, 4, 6, ..., 50)।
  • अपरिमित A.P. (Infinite A.P.): वह A.P. जिसमें पदों की संख्या असीमित होती है। इसका कोई अंतिम पद नहीं होता। (जैसे: 1, 3, 5, 7, ...)।

3. A.P. का n-वाँ पद (nth Term of an A.P.)

यदि किसी समांतर श्रेढ़ी का प्रथम पद a और सार्व अंतर d हो, तो उसका n-वाँ पद (व्यापक पद - an या Tn या l) निम्नलिखित सूत्र से ज्ञात किया जाता है:

A.P. के n-वें पद का सूत्र:
an = a + (n − 1)d

जहाँ: a = प्रथम पद, d = सार्व अंतर, n = पदों की संख्या, an = n-वाँ पद (अंतिम पद l)।

महत्वपूर्ण नियम: पदों की संख्या (n) की प्रकृति:
पदों की संख्या n सदैव एक धनात्मक पूर्णांक (प्राकृत संख्या) होनी चाहिए (अर्थात n = 1, 2, 3, ...)। यदि गणना में n का मान भिन्न (जैसे 15/2) या ऋणात्मक आता है, तो वह संख्या दी गई A.P. का पद नहीं हो सकती।

अंत से n-वाँ पद (nth Term from the End)

यदि किसी परिमित A.P. का अंतिम पद l और सार्व अंतर d हो, तो अंतिम पद से पीछे की ओर n-वाँ पद:

अंत से n-वाँ पद:
a'n = l − (n − 1)d

4. प्रथम n पदों का योगफल (Sum of First n Terms - Sn)

किसी समांतर श्रेढ़ी के प्रथम n पदों का योगफल Sn दो प्रमुख सूत्रों द्वारा निकाला जाता है:

सूत्र 1: जब प्रथम पद (a), सार्व अंतर (d) और पदों की संख्या (n) ज्ञात हों:
Sn = n 2 [2a + (n − 1)d]
सूत्र 2: जब प्रथम पद (a) और अंतिम पद (l = an) ज्ञात हों:
Sn = n 2 (a + l)

(A) Sn और an के बीच गहरा संबंध

यदि किसी श्रेढ़ी के प्रथम n पदों का योग Sn दिया हो, तो उसका n-वाँ पद ज्ञात करने का सूत्र:

an = Sn − Sn−1

साथ ही प्रथम पद a1 = S1 होता है।

(B) प्रथम n धन पूर्णांकों (प्राकृत संख्याओं) का योगफल

1 + 2 + 3 + ... + n का योगफल (BSEB ऑब्जेक्टिव में बार-बार पूछा जाता है):

Sn = n(n + 1) 2

(C) प्रथम n विषम एवं सम संख्याओं का योग

  • प्रथम n विषम प्राकृत संख्याओं (1 + 3 + 5 + ...) का योग = n2
  • प्रथम n सम प्राकृत संख्याओं (2 + 4 + 6 + ...) का योग = n(n + 1)

5. समांतर माध्य एवं A.P. के पद मानना (Special Concepts)

(A) समांतर माध्य (Arithmetic Mean - A.M.)

यदि तीन राशियाँ a, b, c समांतर श्रेढ़ी (A.P.) में हों, तो मध्य राशि b को a और c का समांतर माध्य कहते हैं:

b = a + c 2     या     2b = a + c

(B) प्रश्नों को सरल करने के लिए पदों का चयन

जब पदों का योगफल दिया हो, तो गणना को सरल बनाने के लिए पदों को इस प्रकार माना जाता है:

पदों की संख्या माने जाने वाले पद सार्व अंतर
3 पद (a − d),   a,   (a + d) d
4 पद (a − 3d),   (a − d),   (a + d),   (a + 3d) 2d
5 पद (a − 2d),   (a − d),   a,   (a + d),   (a + 2d) d

6. बिहार बोर्ड मॉडल हल प्रश्न (Board Exam Solved Questions)

उदाहरण 1: समांतर श्रेढ़ी 2, 7, 12, ... का 10वाँ पद ज्ञात कीजिए। [BSEB 2019, 2021, 2023]
हल:
दी गई A.P.: 2, 7, 12, ...
प्रथम पद (a) = 2
सार्व अंतर (d) = 7 − 2 = 5
पदों की संख्या (n) = 10

सूत्र से: an = a + (n − 1)d
a10 = 2 + (10 − 1) × 5
a10 = 2 + 9 × 5
a10 = 2 + 45 = 47

उत्तर: दी गई A.P. का 10वाँ पद 47 है।
उदाहरण 2: A.P. 21, 18, 15, ... का कौन-सा पद −81 है? [BSEB 2 अंक]
हल:
यहाँ प्रथम पद (a) = 21
सार्व अंतर (d) = 18 − 21 = −3
माना कि n-वाँ पद an = −81 है।

सूत्र से:
an = a + (n − 1)d
−81 = 21 + (n − 1)(−3)
−81 − 21 = (n − 1)(−3)
−102 = (n − 1)(−3)

(n − 1) = −102 −3 = 34
n = 34 + 1 = 35

उत्तर: इस श्रेढ़ी का 35वाँ पद −81 है।
उदाहरण 3: उस A.P. का 31वाँ पद ज्ञात कीजिए जिसका 11वाँ पद 38 है और 16वाँ पद 73 है। [BSEB बार-बार पूछा गया दीर्घ/लघु उत्तरीय प्रश्न]
हल:
माना A.P. का प्रथम पद a और सार्व अंतर d है।
प्रश्नानुसार:
11वाँ पद: a11 = a + 10d = 38  ---- (समीकरण 1)
16वाँ पद: a16 = a + 15d = 73  ---- (समीकरण 2)

समीकरण (2) में से समीकरण (1) को घटाने पर:
(a + 15d) − (a + 10d) = 73 − 38
5d = 35
d = 7

d का मान समीकरण (1) में रखने पर:
a + 10(7) = 38
a + 70 = 38
a = 38 − 70 = −32

अब 31वाँ पद (a31):
a31 = a + 30d
a31 = −32 + 30(7)
a31 = −32 + 210 = 178

उत्तर: A.P. का 31वाँ पद 178 है।
उदाहरण 4: श्रेढ़ी 8, 3, −2, ... के प्रथम 22 पदों का योग ज्ञात कीजिए। [BSEB 2 अंक]
हल:
यहाँ प्रथम पद (a) = 8
सार्व अंतर (d) = 3 − 8 = −5
पदों की संख्या (n) = 22

योगफल सूत्र से:
Sn = n2 [2a + (n − 1)d]

S22 = 222 [2(8) + (22 − 1)(−5)]
S22 = 11 [16 + 21(−5)]
S22 = 11 [16 − 105]
S22 = 11 × (−89) = −979

उत्तर: प्रथम 22 पदों का योग −979 है।

7. वस्तुनिष्ठ (Objective) स्पेशल सुपरफास्ट ट्रिक्स

BSEB 1 अंक के प्रश्नों के लिए 5-सेकंड शॉर्टकट:
  • रैखिक व्यंजक (Linear Expression) ट्रिक: यदि A.P. का n-वाँ पद रैखिक रूप में दिया हो (अर्थात् an = An + B), तो n का गुणांक ही सार्व अंतर (d = A) होता है।
    उदाहरण: यदि an = 9 − 5n, तो सार्व अंतर सीधे d = −5 होगा।
  • योगफल व्यंजक ट्रिक: यदि प्रथम n पदों का योग Sn = An2 + Bn दिया हो, तो सार्व अंतर d = 2A (अर्थात n2 के गुणांक का दोगुना) होता है।
    उदाहरण: यदि Sn = 3n2 + 5n, तो सार्व अंतर d = 2 × 3 = 6 होगा।
  • यदि p, q, r A.P. में हों, तो मध्य पद: 2q = p + r।
  • प्रथम 10 प्राकृत संख्याओं का योग = 10 × 112 = 55।

8. परीक्षा उपयोगी टिप्स (BSEB Exam Strategy)

बोर्ड कॉपी में हल करते समय इन बातों का विशेष ध्यान रखें:
  • सार्व अंतर (d) निकालते समय सावधानी: हमेशा (दूसरा पद − पहला पद) करें, न कि बड़े पद में से छोटा पद। यदि श्रेढ़ी घट रही हो, तो d अनिवार्य रूप से ऋणात्मक (−) होगा।
  • सूत्र का स्पष्ट उल्लेख: मान रखने से पहले मानक सूत्र (an या Sn) एक बॉक्स में जरूर लिखें। बिहार बोर्ड में स्टेप मार्किंग होती है।
  • ऋणात्मक संख्याओं के साथ कोष्ठक: यदि d = −3 है, तो गुणा करते समय (n − 1)(−3) लिखें। बिना ब्रैकेट के लिखने पर यह घटाव प्रतीत होता है और गणना गलत हो जाती है।
  • विभाज्य संख्याओं वाले प्रश्न: जैसे "दो अंकों वाली कितनी संख्याएँ 3 से विभाज्य हैं?" ऐसे प्रश्नों में पहली संख्या (12), अंतिम संख्या (99) और सार्व अंतर (3) स्पष्ट लिखकर n ज्ञात करें।

9. निष्कर्ष (Conclusion)

समांतर श्रेढ़ियाँ (अध्याय 5) बिहार बोर्ड मैट्रिक गणित का सबसे तार्किक, अंकदायी और सीधा अध्याय है। इसमें केवल दो मुख्य सूत्रों — n-वें पद का सूत्र [an = a + (n−1)d] और n पदों के योगफल का सूत्र [Sn = n/2 (2a + (n−1)d)] की स्पष्ट समझ आवश्यक है। यदि आप इन दोनों सूत्रों का प्रयोग और सार्व अंतर (d) की सही पहचान करना सीख लेते हैं, तो बोर्ड परीक्षा में इस अध्याय से पूछे जाने वाले सभी वस्तुनिष्ठ और विषयनिष्ठ प्रश्नों में शत-प्रतिशत अंक प्राप्त कर सकते हैं। नियमित अभ्यास करें और सफलता सुनिश्चित करें!

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