अध्याय 1 – वास्तविक संख्या | BSEB 10 Mathematics Book PDF Download


BSEB मैट्रिक परीक्षा कक्षा 10

अध्याय 1: वास्तविक संख्याएँ (Real Numbers)

बिहार बोर्ड कक्षा 10 गणित – यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका, HCF-LCM, शांत/अशांत दशमलव एवं Book PDF

अध्याय का संक्षिप्त परिचय (Chapter Overview)

वास्तविक संख्याएँ (Real Numbers) परिमेय (Rational) और अपरिमेय (Irrational) संख्याओं के समूह को कहा जाता है। कक्षा 10 के प्रथम अध्याय में मुख्य रूप से यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका, अंकगणित की आधारभूत प्रमेय, अपरिमेय संख्याओं की सिद्धि तथा परिमेय संख्याओं के शांत व अशांत दशमलव प्रसारों का अध्ययन किया जाता है।

वास्तविक संख्याएँ (R) परिमेय संख्याएँ (Q) अपरिमेय संख्याएँ (Q') पूर्णांक → पूर्ण → प्राकृत √2, √3, √5, π

1. यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका (Euclid's Division Lemma)

प्रमेय 1.1: यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका

दो धनात्मक पूर्णांक a और b दिए रहने पर, ऐसी अद्वितीय पूर्ण संख्याएँ q और r विद्यमान हैं कि:

a = bq + r      ( जहाँ 0 ≤ r < b )

भाज्य = (भाजक × भागफल) + शेषफल

महत्वपूर्ण निष्कर्ष (Important Deductions):
  • प्रत्येक धनात्मक सम पूर्णांक को 2q के रूप में लिखा जा सकता है।
  • प्रत्येक धनात्मक विषम पूर्णांक को 2q + 1 या 4q + 1, 4q + 3 या 6q + 1, 6q + 3, 6q + 5 के रूप में लिखा जा सकता है।

2. अंकगणित की आधारभूत प्रमेय एवं HCF-LCM संबंध

अंकगणित की आधारभूत प्रमेय (Fundamental Theorem of Arithmetic)

प्रत्येक भाज्य संख्या (Composite Number) को अभाज्य संख्याओं के एक गुणनफल के रूप में अद्वितीय रूप से गुणनखंडित किया जा सकता है, भले ही उनके गुणनखंडों का क्रम कुछ भी हो।

दो संख्याओं के म.स. (HCF) एवं ल.स. (LCM) में संबंध

किन्हीं दो धनात्मक पूर्णांकों a और b के लिए:

HCF(a, b) × LCM(a, b) = a × b

म.स. × ल.स. = दोनों संख्याओं का गुणनफल

HCF(a, b) = a × b LCM(a, b)
LCM(a, b) = a × b HCF(a, b)

3. दशमलव प्रसार एवं अपरिमेयता के नियम (Decimal Expansions)

माना x = pq एक परिमेय संख्या है जहाँ p और q सह-अभाज्य (Co-prime) पूर्णांक हैं:

हर (q) का अभाज्य गुणनखंडन दशमलव प्रसार की प्रकृति उदाहरण
2n × 5m के रूप का
(जहाँ n, m ऋणेतर पूर्णांक हैं)
शांत (Terminating) दशमलव 38 = 32³ × 5⁰ = 0.375
2n × 5m के रूप का नहीं
(2 और 5 के अतिरिक्त अन्य गुणनखंड जैसे 3, 7 आदि)
अशांत आवर्ती (Non-terminating Repeating) 17 = 0.142857...
अपरिमेय संख्याओं का प्रसार अशांत अनावर्ती (Non-terminating Non-repeating) √2 = 1.4142135...
अपरिमेयता सिद्ध करने का प्रमेय (Theorem 1.3):
माना p एक अभाज्य संख्या है। यदि p, को विभाजित करती है, तो p, a को भी विभाजित करेगी (जहाँ a एक धनात्मक पूर्णांक है)।
इस प्रमेय का उपयोग √2, √3, √5 को अपरिमेय सिद्ध करने के लिए विरोधाभास विधि (Contradiction Method) में किया जाता है।

अध्याय 1 गणित बुक PDF पूर्वावलोकन (Embedded Book PDF)

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