अध्याय 4: कार्बन एवं उसके यौगिक | BSEB 10 Science Subjective


अध्याय 4: कार्बन एवं उसके यौगिक

BSEB Class 10 विज्ञान (रसायनशास्त्र) | सहसंयोजक बंध, हाइड्रोकार्बन, समजातीय श्रेणी, एथेनॉल एवं साबुन सम्पूर्ण अध्याय नोट्स

खण्ड 1: 50 वस्तुनिष्ठ एक-पंक्ति प्रश्नोत्तर (One-Liners)
  1. भूपर्पटी (खनिजों जैसे कार्बोनेट, कोयला आदि) में कार्बन की कुल मात्रा कितनी है? — मात्र 0.02%
  2. पृथ्वी के वायुमंडल में गैसीय कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) का प्रतिशत कितना है? — 0.03%
  3. कार्बन (C) का परमाणु क्रमांक (संख्या) कितना होता है? — 6 (इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: 2, 4)।
  4. कार्बन की संयोजकता कितनी होती है? — 4 (चतुःसंयोजकता / Tetravalency)
  5. दो परमाणुओं के बीच एक-एक इलेक्ट्रॉन युग्म की साझेदारी से बनने वाला रासायनिक बंध क्या कहलाता है? — सहसंयोजक बंध (Covalent Bond)
  6. सहसंयोजक यौगिकों के गलनांक एवं क्वथनांक सामान्यतः कम क्यों होते हैं? — क्योंकि इनके अणुओं के बीच आंतराण्विक आकर्षण बल अत्यंत दुर्बल होता है।
  7. सहसंयोजक यौगिक विद्युत के कुचालक क्यों होते हैं? — क्योंकि इनमें कोई मुक्त इलेक्ट्रॉन या आयन उपस्थित नहीं होते
  8. मेथेन (CH4) के एक अणु में कुल कितने एकल सहसंयोजक बंध पाए जाते हैं? — 4 एकल सहसंयोजक बंध
  9. ऑक्सीजन अणु (O2) में दोनों परमाणुओं के मध्य कितने सहसंयोजक बंध होते हैं? — द्वि-आबंध (Double Bond, O=O)
  10. नाइट्रोजन अणु (N2) में दोनों नाइट्रोजन परमाणुओं के मध्य कितने बंध होते हैं? — त्रि-आबंध (Triple Bond, N≡N)
  11. जल (H2O) के एक अणु में कुल कितने एकल बंध होते हैं? — दो एकल बंध (H-O-H)
  12. कार्बन परमाणुओं के आपस में जुड़कर लंबी खुली, शाखित अथवा वलयदार शृंखलाएं बनाने के अद्वितीय गुण को क्या कहते हैं? — शृंखलन (Catenation)
  13. कार्बन के अतिरिक्त किस तत्व में शृंखलन का गुण पाया जाता है (यद्यपि यह अस्थाई होता है)? — सिलिकॉन (Si) में (7-8 परमाणुओं तक)।
  14. कार्बन-कार्बन (C-C) एकल बंध की अत्यधिक मजबूती और स्थिरता का मुख्य कारण क्या है? — कार्बन परमाणु का अत्यंत छोटा आकार
  15. प्रकृति में पाया जाने वाला अब तक का सबसे कठोरतम प्राकृतिक पदार्थ कौन-सा है? — हीरा (Diamond)
  16. हीरे में प्रत्येक कार्बन परमाणु अन्य कितने कार्बन परमाणुओं से जुड़ा होता है? — 4 अन्य कार्बन परमाणुओं से (त्रिविमीय चतुष्फलकीय जालक)
  17. वह कौन-सा कार्बन का अपररूप है जो अधातु होते हुए भी विद्युत का सुचालक होता है? — ग्रेफाइट (Graphite)
  18. ग्रेफाइट विद्युत का सुचालक क्यों होता है? — क्योंकि इसमें प्रत्येक कार्बन के पास एक स्वतंत्र (मुक्त) इलेक्ट्रॉन उपस्थित होता है।
  19. ग्रेफाइट की संरचना कैसी होती है? — षट्कोणीय परतों (Hexagonal Layers) वाली।
  20. कार्बन के फुटबॉल जैसी गोलाकार गुंबदनुमा अपररूप का नाम क्या है? — बकमिनिस्टरफुलेरीन (C60)
  21. फुलेरीन का नामकरण किस प्रसिद्ध अमेरिकी वास्तुकार के नाम पर किया गया? — रिचर्ड बकमिनिस्टर फुलर
  22. केवल कार्बन और हाइड्रोजन तत्वों से बने यौगिक क्या कहलाते हैं? — हाइड्रोकार्बन (Hydrocarbons)
  23. कार्बन परमाणुओं के मध्य केवल एकल बंध वाले हाइड्रोकार्बन क्या कहलाते हैं? — संतृप्त हाइड्रोकार्बन (ऐल्केन / Alkanes)
  24. ऐल्केन (संतृप्त हाइड्रोकार्बन) श्रेणी का सामान्य रासायनिक सूत्र क्या है? — CnH2n+2
  25. प्राकृतिक गैस और बायोगैस का मुख्य घटक कौन-सा हाइड्रोकार्बन है? — मेथेन (CH4) (मार्श गैस)।
  26. द्वि-आबंध (C=C) अथवा त्रि-आबंध (C≡C) युक्त हाइड्रोकार्बन क्या कहलाते हैं? — असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (Unsaturated Hydrocarbons)
  27. ऐल्कीन (द्वि-आबंध युक्त) श्रेणी का सामान्य रासायनिक सूत्र क्या है? — CnH2n
  28. ऐल्काइन (त्रि-आबंध युक्त) श्रेणी का सामान्य रासायनिक सूत्र क्या होता है? — CnH2n-2
  29. ऐल्कीन श्रेणी के प्रथम सदस्य (एथीन) का अणुसूत्र क्या है? — C2H4 (CH2=CH2)।
  30. ऐल्काइन श्रेणी के प्रथम सदस्य (एथाइन / एसिटिलीन) का सूत्र क्या है? — C2H2 (CH≡CH)।
  31. चक्रीय असंतृप्त एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन बेंजीन का रासायनिक सूत्र क्या है? — C6H6
  32. संतृप्त चक्रीय हाइड्रोकार्बन साइक्लोहेक्सेन का अणुसूत्र क्या होता है? — C6H12
  33. समान आण्विक सूत्र परंतु भिन्न-भिन्न संरचनात्मक सूत्रों वाले कार्बनिक यौगिक क्या कहलाते हैं? — संरचनात्मक समावयवी (Structural Isomers)
  34. ब्यूटेन (C4H10) के कुल कितने संरचनात्मक समावयवी संभव हैं? — 2 समावयवी (n-ब्यूटेन तथा आइसोब्यूटेन)।
  35. पेन्टेन (C5H12) के कुल कितने संरचनात्मक समावयवी होते हैं? — 3 समावयवी (n-पेन्टेन, आइसोपेंटेन, नियोपेंटेन)।
  36. ऐल्कोहॉल (Alcohol) प्रकार्यात्मक समूह का रासायनिक सूत्र क्या है? — -OH
  37. ऐल्डिहाइड (Aldehyde) प्रकार्यात्मक समूह का सूत्र क्या होता है? — -CHO
  38. कीटोन (Ketone) प्रकार्यात्मक समूह का प्रतीक क्या है? — >C=O (कार्बोनिल समूह)।
  39. कार्बोक्सिलिक अम्ल (Carboxylic Acid) प्रकार्यात्मक समूह का सूत्र क्या है? — -COOH
  40. समजातीय श्रेणी के किन्हीं दो उत्तरोत्तर (क्रमागत) सदस्यों के मध्य किसका अंतर होता है? — -CH2- (मेथिलीन इकाई) का।
  41. समजातीय श्रेणी के दो क्रमागत सदस्यों के आण्विक द्रव्यमान में कितने का अंतर होता है? — 14 u (यूनिफाइड मास) का।
  42. एथेनॉल (C2H5OH) का सामान्य व्यापारिक नाम क्या है? — एथिल ऐल्कोहॉल (स्पिरिट / शराब)
  43. एथेनोइक अम्ल (CH3COOH) का सामान्य प्रचलित नाम क्या है? — एसिटिक अम्ल (Acetic Acid)
  44. एसिटिक अम्ल के 5% से 8% तनु जलीय विलयन को क्या कहा जाता है? — सिरका (Vinegar)
  45. सर्दियों के दिनों में जम जाने के कारण शुद्ध एथेनोइक अम्ल को क्या कहा जाता है? — ग्लेशल एसिटिक अम्ल (Glacial Acetic Acid)
  46. एथेनॉल और एथेनोइक अम्ल की सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल की उपस्थिति में क्रिया से क्या बनता है? — एस्टर (CH3COOC2H5)
  47. मीठे फलों जैसी विशिष्ट सुगंध (Fruity Smell) किस कार्बनिक यौगिक वर्ग की पहचान है? — एस्टर (Esters) की।
  48. एस्टर की सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) से क्रिया कराकर साबुन बनाने की अभिक्रिया क्या कहलाती है? — साबुनीकरण (Saponification)
  49. असंतृप्त वनस्पति तेलों को वनस्पति घी (डालडा) में बदलने की क्रिया क्या कहलाती है? — हाइड्रोजनीकरण (संकलन अभिक्रिया)
  50. प्रयोगशाला में अकार्बनिक पदार्थ (अमोनियम सायनेट) से संश्लेषित होने वाला प्रथम कार्बनिक यौगिक कौन-सा था? — यूरिया (NH2CONH2) (फ्रेडरिक वोहलर द्वारा, 1828 में)।
खण्ड 2: 25 लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Questions)
प्रश्न 1: कार्बन न तो C4+ धनायन बना सकता है और न ही C4- ऋणायन। क्यों?

कार्बन का परमाणु क्रमांक 6 है (इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 4)।
1. यदि यह 4 इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर C4- बनाए, तो नाभिक के 6 प्रोटॉनों के लिए 10 इलेक्ट्रॉनों को संभालना अत्यंत कठिन और अस्थिर होगा।
2. यदि यह 4 इलेक्ट्रॉन त्यागकर C4+ बनाए, तो 4 इलेक्ट्रॉनों को नाभिकीय आकर्षण से बाहर निकालने हेतु अत्यधिक मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता होगी, जो संभव नहीं है। अतः कार्बन केवल इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी करके सहसंयोजक बंध बनाता है।

प्रश्न 2: कार्बन के दो विशिष्ट गुण कौन-से हैं जिनके कारण प्रकृति में इसके लाखों यौगिक पाए जाते हैं?

1. शृंखलन (Catenation): कार्बन में कार्बन के ही अन्य परमाणुओं के साथ सहसंयोजक बंध बनाकर अत्यंत लंबी सीधी, शाखित तथा वलयदार शृंखलाएं बनाने की अद्वितीय क्षमता होती है।
2. चतुःसंयोजकता (Tetravalency): कार्बन की संयोजकता 4 होने के कारण यह अपने साथ अन्य 4 कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन या हैलोजन परमाणुओं के साथ दृढ़ता से बंध बना सकता है।

प्रश्न 3: हीरा और ग्रेफाइट दोनों कार्बन के अपररूप हैं, फिर भी इनके भौतिक गुणों में भारी अंतर क्यों है?

यह अंतर दोनों की आंतरिक त्रिविमीय संरचना के कारण है:
हीरा: इसमें प्रत्येक कार्बन परमाणु 4 अन्य कार्बन परमाणुओं से दृढ़ सहसंयोजक बंधों द्वारा जुड़कर एक कठोर त्रि-आयामी चतुष्फलकीय जालक बनाता है। कोई मुक्त इलेक्ट्रॉन न होने से यह विद्युत का कुचालक और संसार का सबसे कठोर पदार्थ है।
ग्रेफाइट: इसमें प्रत्येक कार्बन केवल 3 कार्बन परमाणुओं से जुड़कर षट्कोणीय परतदार संरचना बनाता है। दुर्बल वांडरवाल्स बलों के कारण परतें एक-दूसरे पर फिसलती हैं (चिकना/मुलायम) तथा एक स्वतंत्र संयोजी इलेक्ट्रॉन उपस्थित होने से यह विद्युत का सुचालक है।

प्रश्न 4: संतृप्त और असंतृप्त हाइड्रोकार्बन में कोई दो मुख्य अंतर लिखिए।

1. आबंधन: संतृप्त हाइड्रोकार्बन (ऐल्केन) में कार्बन परमाणुओं के मध्य केवल एकल बंध (C-C) होता है; जबकि असंतृप्त हाइड्रोकार्बन में कम से कम एक द्वि-आबंध (C=C, ऐल्कीन) अथवा त्रि-आबंध (C≡C, ऐल्काइन) होता है।
2. क्रियाशीलता: संतृप्त हाइड्रोकार्बन कम क्रियाशील होते हैं और प्रतिस्थापन अभिक्रिया देते हैं; जबकि असंतृप्त हाइड्रोकार्बन अत्यधिक क्रियाशील होते हैं और संकलन (योगात्मक) अभिक्रियाएं दर्शाते हैं।

प्रश्न 5: समजातीय श्रेणी (Homologous Series) किसे कहते हैं? इसकी दो विशेषताएं लिखिए।

कार्बनिक यौगिकों की वह श्रेणी जिसके सभी सदस्यों में एक ही समान प्रकार्यात्मक समूह उपस्थित होता है तथा जिन्हें एक ही सामान्य रासायनिक सूत्र द्वारा व्यक्त किया जा सकता है, समजातीय श्रेणी कहलाती है।
विशेषताएं:
1. किसी भी दो उत्तरोत्तर सदस्यों के आण्विक सूत्रों में -CH2- इकाई तथा आण्विक द्रव्यमान में 14 u का निश्चित अंतर होता है।
2. श्रेणी के सभी सदस्यों के रासायनिक गुणधर्म समान होते हैं, परंतु आण्विक द्रव्यमान बढ़ने से उनके भौतिक गुणों (गलनांक, क्वथनांक) में क्रमिक परिवर्तन होता है।

प्रश्न 6: संरचनात्मक समावयवता (Structural Isomerism) क्या है? ब्यूटेन (C4H10) के दो समावयवियों के नाम और संरचना सूत्र लिखिए।

वे कार्बनिक यौगिक जिनके अणुसूत्र तो पूर्णतः समान होते हैं, परंतु उनकी शृंखला में परमाणुओं के जुड़ने की व्यवस्था (संरचनात्मक सूत्र) भिन्न-भिन्न होती है, संरचनात्मक समावयवी कहलाते हैं।
ब्यूटेन (C4H10) के 2 समावयवी हैं:
1. n-ब्यूटेन (सीधी शृंखला): CH3-CH2-CH2-CH3
2. आइसोब्यूटेन (2-मेथिलप्रोपेन): CH3-CH(CH3)-CH3

प्रश्न 7: मेथेन के क्लोरीन के साथ 'प्रतिस्थापन अभिक्रिया' (Substitution Reaction) का रासायनिक समीकरण लिखिए।

सूर्य के प्रकीर्णित प्रकाश (धूप) की उपस्थिति में मेथेन क्लोरीन से अत्यंत तीव्र अभिक्रिया करती है, जिसमें क्लोरीन का एक परमाणु मेथेन के हाइड्रोजन परमाणु को एक-एक करके प्रतिस्थापित कर देता है:

CH4 + Cl2सूर्य का प्रकाश CH3Cl + HCl   (क्लोरोमेथेन)
(यह अभिक्रिया आगे बढ़कर अंततः CCl4 तक चलती है)।

प्रश्न 8: तेलों का हाइड्रोजनीकरण (Hydrogenation of Oils) क्या है? इसका औद्योगिक महत्व क्या है?

असंतृप्त कार्बनिक यौगिकों (जैसे वनस्पति तेलों) में निकेल (Ni) अथवा पैलेडियम उत्प्रेरक की उपस्थिति में हाइड्रोजन गैस प्रवाहित करने पर हाइड्रोजन द्वि-आबंध पर जुड़ जाती है और संतृप्त यौगिक (वनस्पति घी / डालडा) बन जाता है। इसे हाइड्रोजनीकरण (संकलन अभिक्रिया) कहते हैं:

वनस्पति तेल (असंतृप्त द्रव) + H2Ni उत्प्रेरक, 473 K वनस्पति घी (संतृप्त ठोस)
महत्व: खाद्य तेलों को अधिक समय तक सुरक्षित ठोस वसा में बदलने हेतु इसका व्यापक औद्योगिक उपयोग होता है।

प्रश्न 9: एस्टरीकरण अभिक्रिया (Esterification) किसे कहते हैं? रासायनिक समीकरण दीजिए।

जब किसी कार्बोक्सिलिक अम्ल (जैसे एथेनोइक अम्ल) की सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4) की कुछ बूंदों की उपस्थिति में किसी ऐल्कोहॉल (जैसे एथेनॉल) के साथ क्रिया कराई जाती है, तो मीठे फलों जैसी सुगंध वाला यौगिक एस्टर बनता है:

CH3COOH + C2H5OH →सांद्र H2SO4, Δ CH3COOC2H5 + H2O
यहाँ बनने वाला एथिल एथेनोएट (CH3COOC2H5) इत्र, परफ्यूम और स्वाद कर्मक (Flavouring agents) बनाने में प्रयुक्त होता है।

प्रश्न 10: साबुनीकरण (Saponification) किसे कहते हैं? समीकरण सहित समझाइए।

जब किसी एस्टर को सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) जैसे प्रबल क्षार के साथ गर्म किया जाता है, तो एस्टर जल-अपघटित होकर पुनः ऐल्कोहॉल तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल का सोडियम लवण (साबुन) बना लेता है। इस प्रक्रिया को साबुनीकरण कहते हैं:

CH3COOC2H5 + NaOH → CH3COONa + C2H5OH
(एथिल एथेनोएट + सोडियम हाइड्रॉक्साइड → सोडियम एसीटेट [साबुन] + एथेनॉल)।

प्रश्न 11: एथेनॉल के सोडियम धातु के साथ अभिक्रिया का संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए।

जब एथेनॉल में सोडियम धातु का टुकड़ा डाला जाता है, तो तीव्र बुदबुदाहट के साथ रंगहीन एवं ज्वलनशील हाइड्रोजन गैस (H2) निकलती है तथा सोडियम एथॉक्साइड बनता है:

2C2H5OH + 2Na → 2C2H5ONa + H2
(एथेनॉल + सोडियम → सोडियम एथॉक्साइड + हाइड्रोजन गैस)।

प्रश्न 12: एथेनॉल का सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल द्वारा निर्जलीकरण (Dehydration) समझाइए।

जब एथेनॉल को आधिक्य सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4) के साथ 443 K (170°C) तापमान पर गर्म किया जाता है, तो सल्फ्यूरिक अम्ल एक शक्तिशाली निर्जलीकारक की भांति एथेनॉल से जल का एक अणु खींच लेता है और एथीन बनती है:

CH3-CH2OH →सांद्र H2SO4, 443 K CH2=CH2 + H2O

प्रश्न 13: सिरका (Vinegar) क्या है? इसका दैनिक जीवन में क्या उपयोग है?

एथेनोइक अम्ल (एसिटिक अम्ल) के 5% से 8% तनु जलीय विलयन को सिरका कहते हैं।
उपयोग: इसका उपयोग भारतीय रसोई में भोजन को खट्टा स्वाद देने तथा आचार, चटनी और मुरब्बों में परिरक्षक (Preservative) के रूप में किया जाता है, क्योंकि इसका अम्लीय माध्यम जीवाणुओं की वृद्धि को रोकता है।

प्रश्न 14: विकृत स्प्रिट (Denatured Alcohol) क्या है? इसे क्यों बनाया जाता है?

औद्योगिक कार्यों में उपयोग होने वाले व्यावसायिक एथेनॉल के दुरुपयोग (शराब की तरह अवैध रूप से पीने) को रोकने के लिए उसमें कुछ विषैले पदार्थ जैसे मेथेनॉल (CH3OH), पिरीडीन तथा तांबे का सल्फेट (नीला रंग देने हेतु) मिला दिए जाते हैं। ऐसे अप्रिय और विषैले बने ऐल्कोहॉल को विकृत स्प्रिट कहते हैं। यह पीने योग्य नहीं रहता।

प्रश्न 15: साबुन कठोर जल में झाग क्यों नहीं देता? स्कम (Scum) क्या है?

कठोर जल में कैल्शियम (Ca2+) और मैग्नीशियम (Mg2+) के घुलनशील लवण उपस्थित होते हैं। जब साबुन को कठोर जल में मिलाया जाता है, तो साबुन के सोडियम लवण इन कैल्शियम व मैग्नीशियम आयनों से क्रिया करके जल में पूरी तरह अघुलनशील चिपचिपा सफेद अवक्षेप बना लेते हैं, जिसे स्कम (Scum) कहते हैं। जब तक सारा कैल्शियम/मैग्नीशियम अवक्षेपित नहीं हो जाता, साबुन झाग नहीं दे पाता और व्यर्थ नष्ट होता है।

प्रश्न 16: अपमार्जक (Detergent) कठोर जल में भी आसानी से मैल कैसे साफ कर देते हैं?

अपमार्जक लंबी कार्बन शृंखला वाले सल्फोनिक अम्लों के सोडियम लवण अथवा अमोनियम क्लोराइड/ब्रोमाइड लवण होते हैं। अपमार्जकों के आवेशित सिरे कठोर जल में उपस्थित Ca2+ और Mg2+ आयनों के साथ कोई अघुलनशील अवक्षेप (स्कम) नहीं बनाते। अतः ये कठोर जल में भी अप्रभावित रहकर तुरंत प्रचुर झाग उत्पन्न करते हैं और मैल को साफ कर देते हैं।

प्रश्न 17: मिसेल (Micelle) क्या है? इसका स्वच्छ नामांकित आरेखीय विवरण दें।

जल में साबुन को घोलने पर उसके अणु एक विशिष्ट गोलीय पुंज के रूप में व्यवस्थित हो जाते हैं जिसे मिसेल कहते हैं। इसमें साबुन के अणुओं की तेल-आकर्षक हाइड्रोकार्बन पूंछें (जलविरागी सिरा) केंद्र की ओर अंदर की तरफ मैल (ग्रीस) की बूंद में धंस जाती हैं, जबकि जल-आकर्षक आयनिक सिरे (-COO-Na+) मिसेल की बाहरी सतह पर बाहर जल की ओर निकले रहते हैं।

प्रश्न 18: ऑक्सीकारक (Oxidising Agents) क्या हैं? एथेनॉल के ऑक्सीकरण में प्रयुक्त दो अभिकर्मक बताइए।

वे रासायनिक पदार्थ जो अन्य पदार्थों को ऑक्सीजन देने अथवा उनसे हाइड्रोजन हटाने की क्षमता रखते हैं, ऑक्सीकारक कहलाते हैं।
एथेनॉल को एथेनोइक अम्ल में ऑक्सीकृत करने वाले दो प्रमुख प्रबल रासायनिक ऑक्सीकारक हैं:
1. क्षारीय पोटैशियम परमैंगनेट (Alkaline KMnO4)
2. अम्लीकृत पोटैशियम डाइक्रोमेट (Acidified K2Cr2O7)

प्रश्न 19: संतृप्त और असंतृप्त हाइड्रोकार्बन में विभेद करने के लिए एक सरल रासायनिक परीक्षण लिखिए।

ब्रोमीन जल परीक्षण (Bromine Water Test): ब्रोमीन जल का रंग लाल-भूरा होता है।
• जब असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (ऐल्कीन या ऐल्काइन) में ब्रोमीन जल मिलाया जाता है, तो संकलन अभिक्रिया के कारण ब्रोमीन का लाल-भूरा रंग तुरंत गायब (रंगहीन) हो जाता है।
• संतृप्त हाइड्रोकार्बन (ऐल्केन) सामान्य ताप पर ब्रोमीन जल के साथ कोई क्रिया नहीं करते और ब्रोमीन जल का लाल-भूरा रंग वैसा का वैसा बना रहता है

प्रश्न 20: एथेनोइक अम्ल के सोडियम कार्बोनेट के साथ अभिक्रिया का समीकरण लिखिए।

एथेनोइक अम्ल सोडियम कार्बोनेट (Na2CO3) के साथ तीव्र बुदबुदाहट के साथ क्रिया करके कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) गैस मुक्त करता है, जो चूने के पानी को दूधिया कर देती है:

2CH3COOH + Na2CO3 → 2CH3COONa + H2O + CO2
(एथेनोइक अम्ल + सोडियम कार्बोनेट → सोडियम एसीटेट + जल + कार्बन डाइऑक्साइड)।

प्रश्न 21: कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) की इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना (Lewis Structure) समझाइए।

कार्बन का विन्यास (2, 4) है और ऑक्सीजन का (2, 6)। CO2 के निर्माण में केंद्रीय कार्बन परमाणु अपने दोनों ओर स्थित दो ऑक्सीजन परमाणुओं के साथ दो-दो इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी करता है। इससे कार्बन और प्रत्येक ऑक्सीजन के मध्य दोहरा सहसंयोजक बंध (द्वि-आबंध) बनता है और तीनों परमाणुओं का अष्टक पूर्ण हो जाता है:

:Ö = C = Ö:   अथवा   O::C::O

प्रश्न 22: जल (H2O) की इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना बनाइए।

ऑक्सीजन के बाह्यतम कोश में 6 इलेक्ट्रॉन होते हैं तथा दो हाइड्रोजन परमाणुओं के पास 1-1 इलेक्ट्रॉन होता है। ऑक्सीजन परमाणु दोनों हाइड्रोजन परमाणुओं के साथ एक-एक इलेक्ट्रॉन की साझेदारी करके दो एकल सहसंयोजक बंध बनाता है। ऑक्सीजन के पास दो एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (Lone pairs) शेष बचते हैं:

H - Ö̈ - H   (H : Ö̈ : H)

प्रश्न 23: प्रोपेनोन (ऐसीटोन) का संरचना सूत्र एवं IUPAC नाम लिखिए।

प्रोपेनोन तीन कार्बन वाला सबसे सरल कीटोन है।
संरचना सूत्र: CH3-CO-CH3
IUPAC नाम: प्रोपेन-2-ओन (Propan-2-one / प्रोपेनोन)
सामान्य नाम: ऐसीटोन (Acetone, नेल पॉलिश रिमूवर)।

प्रश्न 24: एथिल ऐल्कोहॉल पीने से मानव स्वास्थ्य पर क्या दुष्प्रभाव पड़ते हैं?

1. एथेनॉल केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को शिथिल (Depress) कर देता है, जिससे सोचने-समझने की क्षमता, मांसपेशियों का शारीरिक संतुलन और निर्णय क्षमता समाप्त हो जाती है।
2. लगातार अत्यधिक सेवन से यकृत (Liver) में सिरोसिस (Cirrhosis) नामक जानलेवा बीमारी हो जाती है तथा यकृत व आमाशय पूर्णतः क्षतिग्रस्त हो जाते हैं।

प्रश्न 25: मेथेनॉल (CH3OH) का सेवन प्राणघातक क्यों सिद्ध होता है?

मेथेनॉल की अत्यंत अल्प मात्रा भी शरीर के अंदर जाने पर यकृत में पहुंचकर मेथेनैल (फॉर्मेल्डिहाइड) में ऑक्सीकृत हो जाती है। मेथेनैल कोशिकाद्रव्य के प्रोटीनों को उसी प्रकार थक्का जमाकर जमा देता है जैसे अंडा उबालने पर जमता है। इसके अतिरिक्त यह आंखों की दृक तंत्रिकाओं (Optic nerves) को नष्ट कर व्यक्ति को स्थायी रूप से अंधा बना देता है और कुछ ही घंटों में मृत्यु हो जाती है।

खण्ड 3: 15 दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Long Answer Questions)
प्रश्न 1: कार्बन की सर्वतोमुखी (अद्वितीय) प्रकृति की विवेचना कीजिए। क्या कारण है कि प्रकृति में कार्बन यौगिकों की संख्या अन्य सभी तत्वों के कुल यौगिकों से भी कई गुना अधिक है?

आज लगभग 30 लाख से भी अधिक ज्ञात कार्बनिक यौगिक अस्तित्व में हैं। कार्बन की इस अद्भुत सर्वतोमुखी प्रकृति के मुख्य वैज्ञानिक कारण निम्नलिखित हैं:

  • 1. शृंखलन की अद्वितीय क्षमता (Unique Catenation Property): कार्बन में कार्बन के ही अन्य परमाणुओं के साथ जुड़कर स्थिर और मजबूत सहसंयोजक बंध बनाने की असीम क्षमता होती है। इस क्षमता के कारण कार्बन:
    लंबी सीधी शृंखलाएं (Straight Chains): जैसे ऑक्टेन (C8H18)।
    शाखित शृंखलाएं (Branched Chains): जैसे आइसोब्यूटेन।
    चक्रीय वलय (Closed Rings): जैसे साइक्लोहेक्सेन (C6H12) तथा बेंजीन (C6H6) बना सकता है।
  • 2. कार्बन-कार्बन बंध की अत्यधिक मजबूती और स्थिरता: आवर्त सारणी में कार्बन परमाणु का आकार अत्यधिक छोटा होता है। छोटा आकार होने के कारण इसका नाभिक साझे के इलेक्ट्रॉन युग्म को अत्यधिक मजबूती से जकड़े रहता है, जिससे C-C बंध की बंध ऊर्जा (∼ 348 kJ/mol) बहुत अधिक होती है। सिलिकॉन जैसे भारी तत्व अपने बड़े आकार के कारण ऐसी लंबी स्थिर शृंखलाएं नहीं बना पाते।
  • 3. चतुःसंयोजकता (Tetravalency): कार्बन के बाह्यतम कोश में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं। अष्टक पूरा करने के लिए यह एक साथ 4 अन्य एक-संयोजी परमाणुओं (जैसे H, Cl), द्वि-संयोजी (O, S) अथवा त्रि-संयोजी (N) परमाणुओं से बंध सकता है।
  • 4. बहु-आबंध बनाने की क्षमता (Multiple Bond Formation): कार्बन परमाणु आपस में एकल बंध (C-C) के अतिरिक्त द्वि-आबंध (C=C) तथा त्रि-आबंध (C≡C) भी आसानी से बना लेते हैं, जिससे यौगिकों की विविधता अनंत गुना बढ़ जाती है।
  • 5. समावयवता (Isomerism): एक ही अणुसूत्र के कई अलग-अलग संरचना वाले यौगिक बन सकते हैं, जिससे यौगिकों की संख्या में भारी वृद्धि होती है।
प्रश्न 2: कार्बन के तीन प्रमुख अपररूपों—हीरा, ग्रेफाइट और बकमिनिस्टरफुलेरीन की संरचना, भौतिक गुणधर्मों और औद्योगिक उपयोगों की विस्तृत तुलनात्मक समीक्षा कीजिए।

जब कोई तत्व दो या अधिक ऐसे रूपों में पाया जाए जिनके रासायनिक गुण समान परंतु भौतिक गुण भिन्न हों, तो उन्हें अपररूप कहते हैं:

विशेषता हीरा (Diamond) ग्रेफाइट (Graphite) फुलेरीन (C60)
आंतरिक संरचना प्रत्येक कार्बन 4 अन्य कार्बनों से त्रिविमीय दृढ़ चतुष्फलकीय (Tetrahedral) जालक बनाता है। प्रत्येक कार्बन 3 अन्य कार्बनों से जुड़कर षट्कोणीय (Hexagonal) परतदार चादरें बनाता है। 60 कार्बन परमाणु परस्पर 20 षट्कोणों व 12 पंचकोणों से जुड़कर फुटबॉल जैसी गुंबद संरचना बनाते हैं।
कठोरता अत्यधिक कठोर (प्रकृति का कठोरतम पदार्थ)। मुलायम, चिकना और फिसलनदार (परतें फिसलती हैं)। कमरे के ताप पर एक गहरा ठोस चूर्ण
विद्युत चालकता विद्युत का पूर्णतः कुचालक (कोई मुक्त इलेक्ट्रॉन नहीं)। विद्युत का उत्तम सुचालक (एक मुक्त विस्थानीकृत इलेक्ट्रॉन उपस्थित)। विशुद्ध रूप में कुचालक, डोपिंग पर अर्धचालक/अतिचालक।
प्रमुख उपयोग कांच काटने वाले कटर, चट्टान वेधन (ड्रिलिंग) और आभूषणों में। पेंसिल लेड, ड्राई लुब्रिकेंट (स्नेहक) और इलेक्ट्रोड बनाने में। नैनो-प्रौद्योगिकी, कैंसर औषधि वितरण और स्नेहक के रूप में।
प्रश्न 3: समजातीय श्रेणी (Homologous Series) क्या है? इसके चार प्रमुख लक्षणों का उल्लेख कीजिए। ऐल्केन तथा ऐल्कोहॉल श्रेणियों के प्रथम चार-चार सदस्यों के नाम, अणुसूत्र और संरचना सूत्र लिखिए।

समजातीय श्रेणी: कार्बनिक यौगिकों का ऐसा परिवार जिसके सभी सदस्यों में एक ही प्रकार का प्रकार्यात्मक समूह उपस्थित होता है और सभी को एक ही सामान्य सूत्र द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है, समजातीय श्रेणी कहलाती है।

चार प्रमुख लक्षण:

  • 1. श्रेणी के किन्हीं दो क्रमागत सदस्यों के आण्विक सूत्रों में सदैव एक मेथिलीन इकाई (-CH2-) का अंतर होता है।
  • 2. दो क्रमागत सदस्यों के आण्विक द्रव्यमान में निश्चित रूप से 14 u का अंतर होता है।
  • 3. सभी सदस्यों में समान प्रकार्यात्मक समूह होने के कारण उनके रासायनिक गुणधर्म पूर्णतः समान होते हैं।
  • 4. आण्विक द्रव्यमान बढ़ने के साथ-साथ उनके भौतिक गुणों (जैसे गलनांक, क्वथनांक और घनत्व) में एक नियमित क्रमिक प्रवणता (Gradation) दिखाई देती है।

1. ऐल्केन समजातीय श्रेणी (CnH2n+2):

  • n=1 : मेथेन (CH4) → CH4
  • n=2 : एथेन (C2H6) → CH3-CH3
  • n=3 : प्रोपेन (C3H8) → CH3-CH2-CH3
  • n=4 : ब्यूटेन (C4H10) → CH3-CH2-CH2-CH3

2. ऐल्कोहॉल समजातीय श्रेणी (CnH2n+1OH):

  • n=1 : मेथेनॉल (CH3OH)
  • n=2 : एथेनॉल (C2H5OH अथवा CH3-CH2-OH)
  • n=3 : प्रोपेनॉल (C3H7OH अथवा CH3-CH2-CH2-OH)
  • n=4 : ब्यूटेनॉल (C4H9OH अथवा CH3-CH2-CH2-CH2-OH)
प्रश्न 4: कार्बन यौगिकों के चार प्रमुख रासायनिक गुणधर्मों—दहन, ऑक्सीकरण, संकलन (योगात्मक) तथा प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं का संतुलित रासायनिक समीकरणों सहित विस्तृत वर्णन कीजिए।

कार्बन और उसके यौगिक निम्नलिखित चार मौलिक रासायनिक अभिक्रियाएं प्रदर्शित करते हैं:

  • 1. दहन अभिक्रिया (Combustion): कार्बन और उसके सभी हाइड्रोकार्बन वायु (ऑक्सीजन) में जलकर कार्बन डाइऑक्साइड, जलवाष्प तथा प्रचुर मात्रा में ऊष्मा और प्रकाश ऊर्जा उत्पन्न करते हैं:
    CH4 + 2O2 → CO2 + 2H2O + ऊष्मा + प्रकाश
    (संतृप्त हाइड्रोकार्बन नीली स्वच्छ ज्वाला देते हैं, जबकि असंतृप्त हाइड्रोकार्बन पीली धुएँदार ज्वाला के साथ जलते हैं)।
  • 2. ऑक्सीकरण अभिक्रिया (Oxidation): दहन के अतिरिक्त, कार्बन यौगिकों को रासायनिक ऑक्सीकारकों (जैसे क्षारीय KMnO4 या अम्लीकृत K2Cr2O7) द्वारा नियंत्रित रूप से ऑक्सीजन जोड़कर अन्य यौगिकों में बदला जा सकता है:
    CH3CH2OH + 2[O] →क्षारीय KMnO4 + ऊष्मा CH3COOH + H2O
    (एथेनॉल ऑक्सीकृत होकर एथेनोइक अम्ल में परिवर्तित हो जाता है)।
  • 3. संकलन / योगात्मक अभिक्रिया (Addition Reaction): असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (ऐल्कीन व ऐल्काइन) निकेल (Ni) या पैलेडियम उत्प्रेरक की उपस्थिति में हाइड्रोजन, क्लोरीन आदि अभिकर्मकों को अपने बहु-बंधों पर जोड़कर संतृप्त यौगिक बना लेते हैं:
    CH2=CH2 + H2Ni, 473 K CH3-CH3   (एथीन से एथेन)
  • 4. प्रतिस्थापन अभिक्रिया (Substitution Reaction): संतृप्त हाइड्रोकार्बन अत्यधिक स्थायी होने के कारण अत्यंत अक्रिय होते हैं, परंतु सूर्य के प्रकीर्णित प्रकाश की उपस्थिति में क्लोरीन इनके हाइड्रोजन परमाणुओं को एक-एक करके हटा देती है:
    CH4 + Cl2सूर्य का प्रकाश CH3Cl + HCl   (मेथेन से क्लोरोमेथेन)
प्रश्न 5: एथेनॉल (C2H5OH) के भौतिक एवं रासायनिक गुणधर्मों का विस्तृत विवरण दीजिए। इसकी (i) सोडियम धातु से तथा (ii) सांद्र H2SO4 से अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए।

एथेनॉल (एथिल ऐल्कोहॉल): यह समजातीय ऐल्कोहॉल श्रेणी का दूसरा महत्वपूर्ण सदस्य है।

भौतिक गुणधर्म:

  • यह कमरे के ताप पर एक रंगहीन, विशिष्ट मधुर गंध वाला तथा तीक्ष्ण स्वाद वाला ज्वलनशील द्रव है।
  • इसका क्वथनांक 351 K (78°C) तथा गलनांक 156 K होता है।
  • हाइड्रोजन बंध बनाने के कारण यह जल में सभी अनुपातों में पूर्णतः विलेय (घुलनशील) है।
  • यह लिटमस पत्र के प्रति पूर्णतः उदासीन होता है (न अम्लीय, न क्षारीय)।

रासायनिक गुणधर्म एवं महत्वपूर्ण अभिक्रियाएं:

  • (i) सोडियम धातु के साथ अभिक्रिया: एथेनॉल सोडियम धातु के साथ शांत गति से क्रिया करके हाइड्रोजन गैस मुक्त करता है और सोडियम एथॉक्साइड बनाता है:
    2CH3CH2OH + 2Na → 2CH3CH2ONa + H2
    (यह अभिक्रिया ऐल्कोहॉल समूह की पहचान के लिए एक मानक प्रयोगशाला परीक्षण है)।
  • (ii) सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ निर्जलीकरण: एथेनॉल को आधिक्य सांद्र H2SO4 के साथ 443 K ताप पर गर्म करने पर यह जल का अणु त्यागकर असंतृप्त एथीन बनाता है:
    CH3-CH2-OH →सांद्र H2SO4, 443 K CH2=CH2 + H2O
  • (iii) दहन: यह वायु में नीली धुआं-रहित ज्वाला के साथ जलता है:
    C2H5OH + 3O2 → 2CO2 + 3H2O + ऊष्मा

उपयोग: विलायक के रूप में, कफ सिरप, टिंचर आयोडीन और टॉनिकों के निर्माण में, तथा पेट्रोल के साथ मिलाकर 'पावर ऐल्कोहॉल' (स्वच्छ ईंधन) के रूप में।

प्रश्न 6: एथेनोइक अम्ल (एसिटिक अम्ल) के भौतिक एवं रासायनिक गुणों की विवेचना कीजिए। इसकी निम्नलिखित के साथ रासायनिक अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए: (i) सोडियम हाइड्रॉक्साइड, (ii) सोडियम कार्बोनेट, (iii) सोडियम बाइकार्बोनेट।

एथेनोइक अम्ल (CH3COOH): इसे सामान्यतः एसिटिक अम्ल कहा जाता है।

भौतिक गुणधर्म: यह तीक्ष्ण सिरके जैसी गंध वाला खट्टा रंगहीन द्रव है। इसका क्वथनांक 391 K (118°C) है। इसका गलनांक 290 K (17°C) होता है, जिसके कारण यह शीत ऋतु में बर्फ की भांति जम जाता है (ग्लेशल एसिटिक अम्ल)। यह नीले लिटमस को लाल कर देता है।

रासायनिक अभिक्रियाएं:

  • (i) सोडियम हाइड्रॉक्साइड (क्षार) के साथ उदासीनीकरण: यह क्षार से क्रिया करके सोडियम एथेनोएट (सोडियम एसीटेट) लवण और जल बनाता है:
    CH3COOH + NaOH → CH3COONa + H2O
  • (ii) सोडियम कार्बोनेट के साथ अभिक्रिया: कार्बोनेट को अपघटित कर यह तीव्र बुदबुदाहट के साथ कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनाता है:
    2CH3COOH + Na2CO3 → 2CH3COONa + H2O + CO2
  • (iii) सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट (मीठा सोडा) के साथ अभिक्रिया:
    CH3COOH + NaHCO3 → CH3COONa + H2O + CO2
    (निकलने वाली CO2 गैस चूने के पानी को दूधिया कर देती है। यह परीक्षण एथेनोइक अम्ल को एथेनॉल से अलग पहचानने हेतु प्रयुक्त होता है)।
  • (iv) एथेनॉल के साथ एस्टरीकरण: सांद्र H2SO4 की उपस्थिति में यह एस्टर बनाता है:
    CH3COOH + C2H5OH →H+ CH3COOC2H5 + H2O
प्रश्न 7: साबुन की सफाई प्रक्रिया की संपूर्ण क्रियाविधि का सचित्र वैज्ञानिक वर्णन कीजिए। मिसेल (Micelle) का निर्माण कैसे होता है और यह तैलीय मैल को कपड़े से कैसे अलग करता है?

साबुन के अणु की संरचना: साबुन दीर्घ शृंखला वाले कार्बोक्सिलिक अम्लों के सोडियम लवण होते हैं (जैसे सोडियम स्टीयरेट C17H35COO-Na+)। इसके अणु के दो सिरे होते हैं:

  • 1. जलविरागी सिरा (Hydrophobic tail): लंबी हाइड्रोकार्बन पूंछ जो अध्रुवीय होती है। यह जल से प्रतिकर्षित होती है परंतु तेल, ग्रीस और मैल में घुलनशील होती है।
  • 2. जलरागी सिरा (Hydrophilic head): आयनिक सिरा (-COO-Na+) जो ध्रुवीय होता है। यह जल के अणुओं के प्रति आकर्षित होता है और जल में घुलनशील होता है।

मिसेल का निर्माण एवं मैल हटाने की क्रियाविधि:

  • अधिकांश मैल और गंदगी तैलीय या ग्रीस प्रकृति की होती है जो पानी में अघुलनशील होती है।
  • जब मैले कपड़े पर साबुन लगाया जाता है, तो साबुन के अणुओं की जलविरागी पूंछें तैलीय मैल की बूंद में धंस जाती हैं और उसे चारों ओर से घेर लेती हैं।
  • साबुन के जलरागी आयनिक सिरे बाहर जल की ओर निकले रहते हैं। इस प्रकार साबुन के सैकड़ों अणु मिलकर एक गोलाकार त्रिविमीय पुंज बना लेते हैं जिसे मिसेल (Micelle) कहते हैं।
  • मिसेल की बाहरी सतह पर ऋणायनों (-COO-) का समान आवेश होने के कारण मिसेल आपस में चिपकते नहीं हैं और आयनिक प्रतिकर्षण के कारण जल में एक स्थायी इमल्शन (कोलाइडल निलंबन) के रूप में तैरते रहते हैं।
  • जब कपड़े को रगड़ा, पीटा या वाशिंग मशीन में घुमाया जाता है, तो जलरागी सिरों पर लगने वाले जल के खिंचाव के कारण मिसेल तैलीय मैल को कपड़े के रेशों से खींचकर बाहर पानी में ले आते हैं। पानी खंगालने पर मैल पानी के साथ बह जाता है और कपड़ा पूर्णतः स्वच्छ हो जाता है।
प्रश्न 8: साबुन और संश्लेषित अपमार्जक (Detergents) के बीच रासायनिक संरचना, कार्यप्रणाली, कठोर जल में व्यवहार तथा पर्यावरणीय प्रभाव के आधार पर विस्तृत अंतर स्पष्ट कीजिए।
तुलना का आधार साबुन (Soaps) संश्लेषित अपमार्जक (Detergents)
रासायनिक प्रकृति ये उच्च वसीय अम्लों (पामिटिक, स्टीयरिक) के सोडियम या पोटैशियम लवण होते हैं। (R-COO-Na+) ये लंबी हाइड्रोकार्बन शृंखला वाले ऐल्किल बेंजीन सल्फोनेट या अमोनियम लवण होते हैं। (R-SO3-Na+)
कठोर जल में क्रियाशीलता कठोर जल के Ca2+, Mg2+ आयनों के साथ अघुलनशील स्कम (सफेद दही जैसा मैल) बनाकर व्यर्थ नष्ट होते हैं। कठोर जल के आयनों के साथ कोई अवक्षेप नहीं बनाते; कठोर जल में भी प्रचुर झाग देते हैं।
सफाई क्षमता इनकी शोधन क्षमता अपेक्षाकृत मध्यम और केवल मृदु जल में प्रभावी होती है। इनकी शोधन क्षमता अत्यधिक तीव्र होती है (मृदु, कठोर और अम्लीय जल में भी)।
कच्चा माल प्राकृतिक वनस्पति तेलों अथवा जंतु वसा से बनाए जाते हैं। पेट्रोलियम से प्राप्त हाइड्रोकार्बनों और रसायनों से संश्लेषित होते हैं।
जैव-निम्नीकरणीयता ये 100% जैव-निम्नीकरणीय (Biodegradable) होते हैं; जल प्रदूषण नहीं फैलाते। शाखित शृंखला वाले अपमार्जक अजैव-निम्नीकरणीय होते हैं, जो नदियों व जलस्रोतों में गंभीर प्रदूषण फैलाते हैं।
प्रश्न 9: समावयवता (Isomerism) किसे कहते हैं? पेन्टेन (C5H12) के सभी तीनों संरचनात्मक समावयवियों के शृंखला सूत्र, संघनित सूत्र तथा IUPAC नाम लिखिए।

समावयवता: वह परिघटना जिसमें दो या दो से अधिक यौगिकों का आण्विक सूत्र (अणुसूत्र) पूर्णतः समान होता है, परंतु उनके परमाणुओं की स्थानिक व्यवस्था भिन्न होने के कारण उनके संरचनात्मक सूत्र और भौतिक/रासायनिक गुणधर्म भिन्न-भिन्न होते हैं, समावयवता कहलाती है। ऐसे यौगिक समावयवी (Isomers) कहलाते हैं।

पेन्टेन (C5H12) के कुल तीन संरचनात्मक समावयवी होते हैं:

  • 1. n-पेन्टेन (Normal Pentane):
    संरचना: पाँचों कार्बन एक सीधी असाखित शृंखला में जुड़े होते हैं।
    CH3 - CH2 - CH2 - CH2 - CH3
    IUPAC नाम: पेन्टेन (Pentane)
  • 2. आइसोपेंटेन (Isopentane):
    संरचना: चार कार्बनों की मुख्य शृंखला होती है और दूसरे कार्बन पर एक मेथिल समूह जुड़ा होता है।
    CH3 - CH(CH3) - CH2 - CH3
    IUPAC नाम: 2-मेथिलब्यूटेन (2-Methylbutane)
  • 3. नियोपेंटेन (Neopentane):
    संरचना: तीन कार्बनों की मुख्य शृंखला होती है और केंद्रीय कार्बन पर ऊपर-नीचे दो मेथिल समूह जुड़े होते हैं।
    C(CH3)4   अथवा   CH3 - C(CH3)2 - CH3
    IUPAC नाम: 2,2-डाइमेथिलप्रोपेन (2,2-Dimethylpropane)
प्रश्न 10: कार्बनिक रसायन में प्रयुक्त होने वाले किन्हीं पाँच प्रमुख प्रकार्यात्मक समूहों (Functional Groups) के नाम, संरचना सूत्र, पूर्वलग्न/अनुलग्न तथा प्रत्येक का एक-एक उदाहरण IUPAC नाम सहित सारणीबद्ध कीजिए।
प्रकार्यात्मक समूह संरचना सूत्र अनुलग्न / पूर्वलग्न यौगिक का उदाहरण एवं सूत्र IUPAC नाम
1. हैलो (हैलोजन) -Cl, -Br, -I पूर्वलग्न: क्लोरो-, ब्रोमो- CH3-CH2-Cl क्लोरोएथेन
2. ऐल्कोहॉल -OH अनुलग्न: -ऑल (-ol) CH3-CH2-OH एथेनॉल
3. ऐल्डिहाइड -CHO (-CH=O) अनुलग्न: -अल (-al) CH3-CHO एथेनल
4. कीटोन >C=O अनुलग्न: -ओन (-one) CH3-CO-CH3 प्रोपेनोन
5. कार्बोक्सिलिक अम्ल -COOH अनुलग्न: -ओइक अम्ल (-oic acid) CH3-COOH एथेनोइक अम्ल
प्रश्न 11: निम्नलिखित अणुओं की इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना (Lewis Electron Dot Structures) खींचिए और प्रत्येक में उपस्थित सहसंयोजक बंधों की संख्या बताइए: (i) मेथेन (CH4), (ii) एथीन (C2H4), (iii) एथाइन (C2H2), तथा (iv) अमोनिया (NH3)।

इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना में बाह्यतम कोश के संयोजी इलेक्ट्रॉनों को बिन्दुओं (•) या क्रॉस (×) द्वारा दर्शाया जाता है:

  • (i) मेथेन (CH4):
    केंद्रीय कार्बन परमाणु (2, 4) अपने चारों इलेक्ट्रॉनों को चार हाइड्रोजन परमाणुओं के 1-1 इलेक्ट्रॉन के साथ साझा करता है।
        H
        :
    H : C : H  &implies;  4 एकल सहसंयोजक बंध (Single C-H bonds)
        :
        H
  • (ii) एथीन (C2H4):
    दो कार्बन परमाणुओं के बीच दो-दो इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी से एक द्वि-आबंध बनता है, तथा प्रत्येक कार्बन दो हाइड्रोजनों से एकल बंध से जुड़ता है।
    H          H
     \        /
      C : : C  &implies;  1 द्वि-आबंध (C=C) तथा 4 एकल बंध (C-H)
     /        \
    H          H
  • (iii) एथाइन (C2H2):
    दो कार्बन परमाणु आपस में तीन-तीन इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी कर त्रि-आबंध बनाते हैं और प्रत्येक कार्बन एक-एक हाइड्रोजन से जुड़ता है।
    H : C ::: C : H  &implies;  1 त्रि-आबंध (C≡C) तथा 2 एकल बंध (C-H)
  • (iv) अमोनिया (NH3):
    नाइट्रोजन (2, 5) तीन इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी तीन हाइड्रोजन परमाणुओं से करता है तथा 1 एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (Lone pair) शेष बचता है।
       ..        (एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म)
    H : N : H  &implies;  3 एकल सहसंयोजक बंध (N-H)
        :
        H
प्रश्न 12: असंतृप्त हाइड्रोकार्बनों में संकलन (योगात्मक) अभिक्रिया का क्या महत्व है? वनस्पति तेलों के औद्योगिक हाइड्रोजनीकरण की प्रक्रिया, प्रयुक्त उत्प्रेरक तथा इसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

संकलन अभिक्रिया: असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (द्वि-आबंध या त्रि-आबंध वाले) अभिकर्मकों (जैसे H2, Br2, HCl) के साथ सीधे जुड़कर एकल बंध वाले संतृप्त उत्पाद बनाते हैं। इस प्रक्रिया में कोई सह-उत्पाद नहीं निकलता।

औद्योगिक हाइड्रोजनीकरण:

R2C=CR2 (असंतृप्त तेल / द्रव) + H2Ni उत्प्रेरक, 473 K R2CH-CHR2 (संतृप्त वसा / ठोस घी)
  • प्रक्रिया: मूंगफली, सोयाबीन या बिनौले के असंतृप्त वनस्पति तेलों को 200°C तक गर्म करके बारीक पिसे हुए निकेल (Ni) उत्प्रेरक की उपस्थिति में उच्च दाब पर हाइड्रोजन गैस गुजारी जाती है। इससे तेल के दोहरे बंध टूटकर एकल बंध में बदल जाते हैं और द्रव तेल ठोस 'वनस्पति घी' (मार्जरीन/डालडा) में रूपांतरित हो जाता है।
  • स्वास्थ्य पर प्रभाव (Health Implications):
    वनस्पति तेल: इनमें लंबी असंतृप्त वसीय अम्ल शृंखलाएं (जैसे ओलिक और लिनोलिक अम्ल) होती हैं, जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होती हैं और रक्त में खराब कोलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ातीं।
    वनस्पति घी: हाइड्रोजनीकरण के दौरान 'ट्रांस-फैट्स' (Trans-fats) का निर्माण होता है। संतृप्त वसाएं मानव रक्त में LDL कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाती हैं, जिससे धमनियां अवरुद्ध होती हैं और हार्ट अटैक (हृदय रोग) तथा उच्च रक्तचाप का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। अतः चिकित्सकों द्वारा असंतृप्त तेलों के सेवन की ही सलाह दी जाती है।
प्रश्न 13: आप प्रयोगशाला में रासायनिक परीक्षणों द्वारा निम्नलिखित युग्मों में किस प्रकार अंतर स्पष्ट करेंगे? समीकरण सहित समझाइए:
(i) एथेनॉल एवं एथेनोइक अम्ल
(ii) संतृप्त घी एवं असंतृप्त वनस्पति तेल।

(i) एथेनॉल एवं एथेनोइक अम्ल में रासायनिक विभेद:

  • 1. सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट परीक्षण (मीठा सोडा परीक्षण):
    एथेनोइक अम्ल: परखनली में NaHCO3 डालते ही तीव्र बुदबुदाहट के साथ रंगहीन CO2 गैस निकलती है, जो चूने के पानी को दूधिया कर देती है:
    CH3COOH + NaHCO3 → CH3COONa + H2O + CO2
    एथेनॉल: यह सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट से कोई अभिक्रिया नहीं करता और कोई गैस नहीं निकलती।
  • 2. लिटमस पत्र परीक्षण:
    • एथेनोइक अम्ल नीले लिटमस पत्र को लाल कर देता है।
    • एथेनॉल उदासीन होने के कारण लिटमस पत्र के रंग पर कोई प्रभाव नहीं डालता।

(ii) संतृप्त घी एवं असंतृप्त वनस्पति तेल में विभेद:

  • ब्रोमीन जल परीक्षण: दोनों पदार्थों के नमूनों में लाल-भूरे रंग का ब्रोमीन जल मिलाया जाता है।
    वनस्पति तेल (असंतृप्त): संकलन अभिक्रिया द्वारा ब्रोमीन जल के लाल-भूरे रंग को तुरंत उड़ाकर रंगहीन कर देता है।
    संतृप्त घी: यह संतृप्त होने के कारण ब्रोमीन जल से क्रिया नहीं करता और ब्रोमीन जल का लाल-भूरा रंग अपरिवर्तित रहता है
प्रश्न 14: एथाइन (एसिटिलीन) के दहन के लिए वायु के स्थान पर शुद्ध ऑक्सीजन का उपयोग क्यों किया जाता है? वेल्डिंग में प्रयुक्त होने वाली गैस ज्वाला का रासायनिक सिद्धांत समझाइए।

रासायनिक पृष्ठभूमि: एथाइन (C2H2 या CH≡CH) एक असंतृप्त हाइड्रोकार्बन है जिसमें कार्बन का प्रतिशत अनुपात (∼ 92.3%) हाइड्रोजन की तुलना में अत्यधिक उच्च होता है।

वायु में दहन की सीमा:
वायु में केवल 21% ऑक्सीजन होती है और 78% निष्क्रिय नाइट्रोजन होती है। जब एथाइन को सामान्य वायु में जलाया जाता है, तो ऑक्सीजन की अपर्याप्त आपूर्ति के कारण एथाइन का अपूर्ण दहन होता है। अजले कार्बन के कणों के कारण अत्यधिक काले धुएं और कालिख वाली पीली ज्वाला निकलती है। इस अपूर्ण दहन से उत्पन्न तापमान बहुत कम (लगभग 1800°C से 2000°C) होता है, जो धातुओं (लोहे/स्टील) को पिघलाने हेतु बिल्कुल पर्याप्त नहीं होता।

शुद्ध ऑक्सीजन के साथ दहन (ऑक्सी-एसिटिलीन ज्वाला):
जब एथाइन को शुद्ध ऑक्सीजन गैस के साथ एक विशिष्ट अनुपात में वेल्डिंग टॉर्च में जलाया जाता है, तो एथाइन का पूर्ण दहन होता है:

2C2H2 + 5O2 → 4CO2 + 2H2O + प्रचुर ऊष्मा
पूर्ण दहन के कारण बिना किसी धुएं की स्वच्छ, नीली और अत्यंत तीक्ष्ण ज्वाला उत्पन्न होती है। इस ज्वाला का तापमान लगभग 3000°C से 3300°C (अत्यधिक उच्च) तक पहुँच जाता है। यह प्रचंड तापमान धातुओं को क्षण भर में पिघलाकर परस्पर वेल्ड (जोड़ने) अथवा मोटी लोहे की चादरों को काटने के लिए पूर्णतः आदर्श होता है।

प्रश्न 15: संश्लेषित अपमार्जक (Detergents) क्या हैं? इनकी रासायनिक संरचना, प्रदूषणकारी प्रभाव तथा इनके स्थान पर 'जैव-निम्नीकरणीय अपमार्जकों' के विकास की आवश्यकता पर विस्तृत निबंध लिखिए।

संश्लेषित अपमार्जक (साबुन-रहित साबुन / Soapless Soaps): ये पेट्रोलियम हाइड्रोकार्बनों से निर्मित ऐसे विशेष पृष्ठ-सक्रिय (Surfactant) कार्बनिक यौगिक हैं जो साबुन न होते हुए भी साबुन के समान मैल साफ करने का उत्कृष्ट गुण रखते हैं। रासायनिक रूप से ये लंबी शृंखला वाले सोडियम ऐल्किल सल्फेट (R-OSO3Na) अथवा सोडियम ऐल्किल बेंजीन सल्फोनेट (R-C6H4-SO3Na) होते हैं।

अपमार्जकों से उत्पन्न गंभीर पर्यावरणीय समस्याएं:

  • अजैव-निम्नीकरणीयता: प्रारंभिक संश्लेषित अपमार्जकों में हाइड्रोकार्बन शृंखला अत्यधिक शाखित (Branched) होती थी। सीवेज के जल में उपस्थित प्राकृतिक सूक्ष्मजीव और जीवाणु इन जटिल शाखित शृंखलाओं का जैविक अपघटन करने में पूरी तरह असमर्थ होते हैं।
  • जलस्रोतों में झाग के विशाल पर्वत: अपघटन न होने के कारण ये अपमार्जक नदियों, नालों, झीलों और तालाबों में वर्षों तक जमा रहते हैं, जिससे नदियों की सतह पर कई-कई फीट ऊंचे जहरीले सफेद झाग के पहाड़ बन जाते हैं (जैसे दिल्ली की यमुना नदी में)।
  • जलीय जीवन का दम घुटना: झाग की मोटी परत सूर्य के प्रकाश और वायुमंडलीय ऑक्सीजन को जल में घुलने से रोक देती है। इससे जल में घुलित ऑक्सीजन (DO) का स्तर गिर जाता है और मछलियां व जलीय वनस्पतियां तड़पकर मर जाती हैं।
  • सुपोषण (Eutrophication): अपमार्जकों में झाग और सफाई बढ़ाने हेतु फॉस्फेट लवण मिलाए जाते हैं। ये फॉस्फेट जलस्रोतों में शैवालों की अनियंत्रित वृद्धि (Algal bloom) कराते हैं, जिससे तालाब दलदल में बदल जाते हैं।

जैव-निम्नीकरणीय (Biodegradable) अपमार्जकों का विकास:
इस भयानक प्रदूषण से निपटने हेतु आधुनिक वैज्ञानिकों ने पूर्णतः सीधी (अशाखित / Linear) हाइड्रोकार्बन शृंखला वाले अपमार्जक (जैसे लीनियर ऐल्किल बेंजीन सल्फोनेट - LAS) विकसित किए हैं। इन अशाखित शृंखलाओं का जीवाणु सरलता से विखंडन कर देते हैं। आज वैश्विक स्तर पर केवल जैव-निम्नीकरणीय अपमार्जकों के उपयोग को ही कानूनी रूप से अनिवार्य बनाया जा रहा है ताकि हमारा पर्यावरण और जलस्रोत सुरक्षित रह सकें।

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