BSEB Class 10 Science Solutions
अध्याय 3: धातु एवं अधातु
अध्याय 3: धातु एवं अधातु
(Metals and Non-Metals)
पाठगत (In-Text) एवं मुख्य अभ्यास प्रश्नों के पूर्ण, सटीक एवं रासायनिक समीकरण सहित हल
स्वागत है आपका! यदि आप बिहार बोर्ड (BSEB) कक्षा 10वीं के छात्र हैं और रसायन विज्ञान के अध्याय 3 – "धातु एवं अधातु" के सभी पाठगत और अभ्यास प्रश्नों के संपूर्ण तथा आसान उत्तर खोज रहे हैं, तो यह विस्तृत मार्गदर्शिका आपके लिए तैयार की गई है। यहाँ धातुओं की सक्रियता श्रेणी, रासायनिक समीकरणों, इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण (आयनिक आबंध) और धातु निष्कर्षण के प्रामाणिक उत्तर दिए गए हैं।
⚡ धातुओं की सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series of Metals):
(शीर्ष से नीचे की ओर अभिक्रियाशीलता घटती जाती है)
K (पोटैशियम) >
Na (सोडियम) >
Ca (कैल्सियम) >
Mg (मैग्नीशियम) >
Al (ऐलुमिनियम) >
Zn (जिंक) >
Fe (आयरन) >
Pb (लेड) >
[H] (हाइड्रोजन) >
Cu (कॉपर) >
Hg (मर्करी) >
Ag (सिल्वर) >
Au (गोल्ड)
📌 पृष्ठ संख्या 44-45 के प्रश्न (In-Text Questions)
प्रश्न 1
ऐसी धातु का उदाहरण दीजिए जो —
- (i) कमरे के ताप पर द्रव होती है: पारा या मर्करी (Hg) [नोट: गैलियम व सीज़ियम हथेली पर पिघलती हैं]।
- (ii) चाकू से आसानी से काटा जा सकता है: सोडियम (Na), पोटैशियम (K) तथा लीथियम (Li) (ये अत्यंत मुलायम क्षार धातुएँ हैं)।
- (iii) ऊष्मा की सबसे अच्छी चालक होती है: चाँदी / सिल्वर (Ag) तथा कॉपर / ताँबा (Cu)।
- (iv) ऊष्मा की कुचालक (तुलनात्मक रूप से मंद चालक) होती है: सीसा / लेड (Pb) तथा मर्करी (Hg)।
प्रश्न 2
आघातवर्ध्य तथा तन्य का अर्थ बताइए।
उत्तर:
- आघातवर्ध्यता (Malleability): धातुओं का वह यांत्रिक गुण जिसके कारण उन्हें हथौड़े से पीट-पीटकर बिना टूटे अत्यंत पतली चादरों (पत्रों) में परिवर्तित किया जा सकता है, आघातवर्ध्यता कहलाता है।
उदाहरण: सोना (Au) तथा चाँदी (Ag) सर्वाधिक आघातवर्ध्य धातुएँ हैं। - तन्यता (Ductility): धातुओं का वह गुण जिसके कारण उन्हें खींचकर अत्यंत महीन और पतले तारों के रूप में ढाला जा सकता है, तन्यता कहलाता है।
उदाहरण: सोना सबसे अधिक तन्य धातु है; मात्र 1 ग्राम सोने से लगभग 2 किलोमीटर लंबा महीन तार खींचा जा सकता है।
📌 पृष्ठ संख्या 50-51 के प्रश्न (In-Text Questions)
प्रश्न 1
सोडियम को किरोसिन में डुबो कर क्यों रखा जाता है?
उत्तर: सोडियम (Na) एक अत्यधिक तीव्र अभिक्रियाशील क्षार धातु है।
- यह कमरे के सामान्य ताप पर भी वायु में उपस्थित ऑक्सीजन और नमी (जलवाष्प) के साथ अत्यंत प्रचंड और ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया करती है, जिससे उत्पन्न होने वाली हाइड्रोजन गैस तत्काल आग पकड़ लेती है:
4Na(s) + O2(g) → 2Na2O(s)
- सोडियम किरोसिन (मिट्टी के तेल) के साथ कोई रासायनिक अभिक्रिया नहीं करता है और यह किरोसिन में भारी होने के कारण डूब जाता है।
- अतः आकस्मिक आग लगने की दुर्घटना को रोकने और इसे वायु व नमी के संपर्क से विलग रखने हेतु सोडियम को किरोसिन में डुबोकर संग्रहित किया जाता है।
प्रश्न 2
इन अभिक्रियाओं के लिए संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए:
(i) भाप के साथ आयरन की अभिक्रिया:
लोहा ठंडे या गर्म जल से क्रिया नहीं करता, केवल लाल तप्त होकर भाप से क्रिया करता है और फेरसोफेरिक ऑक्साइड बनाता है:
3Fe(s) + 4H2O(g) → Fe3O4(s) + 4H2(g)↑
(ii) जल के साथ पोटैशियम तथा कैल्सियम की अभिक्रिया:
- पोटैशियम के साथ (अत्यंत प्रचंड एवं ऊष्माक्षेपी):
2K(s) + 2H2O(l) → 2KOH(aq) + H2(g)↑ + ऊष्मा(उत्सर्जित ऊष्मा से H2 गैस तुरंत प्रज्वलित हो जाती है)
- कैल्सियम के साथ (धीमी व कम ऊष्माक्षेपी):
Ca(s) + 2H2O(l) → Ca(OH)2(aq) + H2(g)↑(उत्पन्न H2 गैस के बुलबुले कैल्सियम धातु की सतह पर चिपक जाते हैं, जिससे कैल्सियम पानी पर तैरने लगता है)
प्रश्न 3
धातुओं A, B, C एवं D के नमूनों को विभिन्न लवण विलयनों में डाला गया (NCERT सारणी आधारित प्रश्न):
सारणी प्रेक्षण:
- धातु A: FeSO4 में कोई क्रिया नहीं, CuSO4 से कॉपर को विस्थापित करती है।
- धातु B: FeSO4 से आयरन को विस्थापित करती है, ZnSO4 में कोई क्रिया नहीं।
- धातु C: केवल AgNO3 से सिल्वर को विस्थापित करती है।
- धातु D: किसी भी विलयन से विस्थापन नहीं करती।
- (i) सबसे अधिक अभिक्रियाशील धातु कौन सी है?
उत्तर: धातु B। क्योंकि यह आयरन सल्फेट (FeSO4) से आयरन को विस्थापित करती है, जबकि अन्य धातुएँ ऐसा नहीं कर पातीं। - (ii) धातु B को कॉपर(II) सल्फेट के विलयन में डाला जाए तो क्या होगा?
उत्तर: धातु B, कॉपर(II) सल्फेट से कॉपर को विस्थापित कर देगी, क्योंकि B आयरन से अधिक सक्रिय है और आयरन कॉपर से अधिक सक्रिय है (B > Fe > Cu)। विलयन का नीला रंग फीका पड़ जाएगा और लाल-भूरा कॉपर अवक्षेपित होगा। - (iii) धातु A, B, C एवं D को अभिक्रियाशीलता के घटते हुए क्रम में व्यवस्थित कीजिए:
उत्तर: B > A > C > D
प्रश्न 4
कौन सी गैस निकलती है जब कोई धातु तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से अभिक्रिया करती है? आयरन के साथ तनु H2SO4 की रासायनिक अभिक्रिया लिखिए।
उत्तर:
- जब कोई सक्रिय धातु तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) से अभिक्रिया करती है, तो हाइड्रोजन गैस (H2) उत्सर्जित होती है।
- आयरन के साथ तनु सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4) की अभिक्रिया का संतुलित समीकरण:
Fe(s) + H2SO4(aq) → FeSO4(aq) + H2(g)↑
(आयरन + तनु सल्फ्यूरिक अम्ल → आयरन(II) सल्फेट + हाइड्रोजन गैस)
प्रश्न 5
जिंक को आयरन(II) सल्फेट के विलयन में डालने से क्या होता है? इसकी रासायनिक अभिक्रिया लिखिए।
उत्तर: सक्रियता श्रेणी में जिंक (Zn) आयरन (Fe) से ऊपर स्थित है, अतः जिंक अधिक अभिक्रियाशील है।
- जब जिंक को आयरन(II) सल्फेट के हरे विलयन में डाला जाता है, तो जिंक आयरन को उसके लवण विलयन से विस्थापित कर देता है।
- प्रेक्षण: विलयन का हल्का हरा रंग धीरे-धीरे रंगहीन हो जाता है (जिंक सल्फेट बनने के कारण) और जिंक की सतह पर धूसर-काले रंग की आयरन धातु जमा हो जाती है।
- रासायनिक समीकरण:
Zn(s) + FeSO4(aq) [हरा] → ZnSO4(aq) [रंगहीन] + Fe(s)↓
📌 पृष्ठ संख्या 54 के प्रश्न (In-Text Questions)
प्रश्न 1
(i) Na, O एवं Mg के लिए इलेक्ट्रॉन-बिंदु संरचना, (ii) Na2O व MgO का निर्माण, (iii) उपस्थित आयन।
(i) इलेक्ट्रॉन-बिंदु संरचना (Electron-dot structure):
- सोडियम (Na, Z = 11 : 2, 8, 1) ⇒ Na • (1 संयोजकता इलेक्ट्रॉन)
- मैग्नीशियम (Mg, Z = 12 : 2, 8, 2) ⇒ • Mg • (2 संयोजकता इलेक्ट्रॉन)
- ऑक्सीजन (O, Z = 8 : 2, 6) ⇒ :Ö: (6 संयोजकता इलेक्ट्रॉन)
(ii) इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण द्वारा यौगिकों का निर्माण:
1. सोडियम ऑक्साइड (Na2O) का निर्माण:
2Na • → 2Na+ + 2e-
:Ö: + 2e- → [:Ö:]2-
अतः आयनिक सूत्र = [Na+]2 [:Ö:]2- ⇒ Na2O
2. मैग्नीशियम ऑक्साइड (MgO) का निर्माण:
• Mg • → Mg2+ + 2e-
:Ö: + 2e- → [:Ö:]2-
अतः आयनिक सूत्र = [Mg2+] [:Ö:]2- ⇒ MgO
2Na • → 2Na+ + 2e-
:Ö: + 2e- → [:Ö:]2-
अतः आयनिक सूत्र = [Na+]2 [:Ö:]2- ⇒ Na2O
2. मैग्नीशियम ऑक्साइड (MgO) का निर्माण:
• Mg • → Mg2+ + 2e-
:Ö: + 2e- → [:Ö:]2-
अतः आयनिक सूत्र = [Mg2+] [:Ö:]2- ⇒ MgO
(iii) इन यौगिकों में उपस्थित आयन:
- Na2O में: सोडियम धनायन (Na+) तथा ऑक्साइड ऋणायन (O2-)।
- MgO में: मैग्नीशियम धनायन (Mg2+) तथा ऑक्साइड ऋणायन (O2-)।
प्रश्न 2
आयनिक यौगिकों का गलनांक उच्च क्यों होता है?
उत्तर: आयनिक यौगिक (जैसे NaCl, MgO) विपरीत आवेशित धनायनों और ऋणायनों से मिलकर बने क्रिस्टलीय जालक होते हैं।
इन विपरीत आवेशित आयनों के मध्य अत्यधिक शक्तिशाली अंतर-आयनिक स्थिरवैद्युत आकर्षण बल (Strong Electrostatic Force of Attraction) कार्य करता है। इस प्रबल जालक बंधन को तोड़ने और आयनों को पृथक करने के लिए अत्यधिक मात्रा में ऊष्मीय ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि आयनिक यौगिकों के गलनांक (Melting Points) एवं क्वथनांक अत्यधिक उच्च होते हैं।
इन विपरीत आवेशित आयनों के मध्य अत्यधिक शक्तिशाली अंतर-आयनिक स्थिरवैद्युत आकर्षण बल (Strong Electrostatic Force of Attraction) कार्य करता है। इस प्रबल जालक बंधन को तोड़ने और आयनों को पृथक करने के लिए अत्यधिक मात्रा में ऊष्मीय ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि आयनिक यौगिकों के गलनांक (Melting Points) एवं क्वथनांक अत्यधिक उच्च होते हैं।
📌 पृष्ठ संख्या 58 के प्रश्न (In-Text Questions)
प्रश्न 1
निम्न पदों की परिभाषा दीजिए: (i) खनिज, (ii) अयस्क, (iii) गैंग
उत्तर:
- खनिज (Minerals): पृथ्वी की भूपर्पटी (Crust) में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले अकार्बनिक तत्वों या यौगिकों को खनिज कहते हैं (जैसे बॉक्साइट, क्ले, कॉपर पाइराइट)।
- अयस्क (Ores): वे विशिष्ट खनिज जिनमें किसी धातु की सांद्रता (प्रतिशत मात्रा) काफी अधिक होती है और जिनसे उस धातु को व्यापारिक स्तर पर कम लागत में और सरलता से निष्कर्षित किया जा सकता है, अयस्क कहलाते हैं (उदा. ऐलुमिनियम का अयस्क बॉक्साइट Al2O3·2H2O)।
[नोट: सभी अयस्क खनिज होते हैं, परंतु सभी खनिज अयस्क नहीं होते।] - गैंग (Gangue): पृथ्वी से खनित किए गए प्राकृतिक अयस्कों में उपस्थित मिट्टी, रेत, कंकड़, चूना पत्थर तथा सिलिका जैसी अवांछनीय अशुद्धियों को सामूहिक रूप से गैंग या आधात्री कहते हैं।
प्रश्न 2
दो धातुओं के नाम बताइए जो प्रकृति में मुक्त अवस्था में पाई जाती हैं।
उत्तर: सोना / गोल्ड (Au) तथा प्लैटिनम (Pt)।
कारण: ये धातुएँ सक्रियता श्रेणी के सबसे निचले भाग में स्थित हैं। इनकी रासायनिक अभिक्रियाशीलता नगण्य होती है, अतः ये वायु, ऑक्सीजन, जल या CO2 से अप्रभावित रहकर प्रकृति में स्वतंत्र (मुक्त) अवस्था में पाई जाती हैं। (चाँदी भी कभी-कभी मुक्त अवस्था में मिलती है)।
कारण: ये धातुएँ सक्रियता श्रेणी के सबसे निचले भाग में स्थित हैं। इनकी रासायनिक अभिक्रियाशीलता नगण्य होती है, अतः ये वायु, ऑक्सीजन, जल या CO2 से अप्रभावित रहकर प्रकृति में स्वतंत्र (मुक्त) अवस्था में पाई जाती हैं। (चाँदी भी कभी-कभी मुक्त अवस्था में मिलती है)।
प्रश्न 3
धातु को उसके ऑक्साइड से प्राप्त करने के लिए किस रासायनिक प्रक्रम का उपयोग किया जाता है?
उत्तर: अपचयन प्रक्रम (Reduction Process):
धातु ऑक्साइड से ऑक्सीजन हटाकर शुद्ध धातु प्राप्त करने के लिए धातु की क्रियाशीलता के आधार पर निम्नलिखित अपचयन विधियों का उपयोग होता है:
धातु ऑक्साइड से ऑक्सीजन हटाकर शुद्ध धातु प्राप्त करने के लिए धातु की क्रियाशीलता के आधार पर निम्नलिखित अपचयन विधियों का उपयोग होता है:
- कार्बन (कोक) द्वारा रासायनिक अपचयन: मध्यम सक्रिय धातुओं (जैसे जिंक, आयरन, लेड) के ऑक्साइडों को कोक के साथ गर्म करके:
ZnO(s) + C(s) → Zn(s) + CO(g)↑
- अत्यधिक सक्रिय धातुओं द्वारा विस्थापन (थर्मिट प्रक्रम): ऐलुमिनियम चूर्ण द्वारा अपचयन (Fe2O3 + 2Al → 2Fe + Al2O3)।
- विद्युत अपघटनी अपचयन (Electrolytic Reduction): अत्यधिक सक्रिय धातुओं (Na, Mg, Al) के गलित क्लोराइड या ऑक्साइड का विद्युत अपघटन करके।
📌 पृष्ठ संख्या 60-61 के प्रश्न (In-Text Questions)
प्रश्न 1
जिंक, मैग्नीशियम एवं कॉपर के धातुई ऑक्साइडों को निम्न धातुओं के साथ गर्म किया गया... किस स्थिति में विस्थापन अभिक्रिया घटित होगी?
उत्तर: सक्रियता श्रेणी का नियम है कि केवल अधिक अभिक्रियाशील धातु ही कम अभिक्रियाशील धातु के ऑक्साइड को विस्थापित कर सकती है (Mg > Zn > Cu):
| धातु ऑक्साइड | जिंक (Zn) के साथ | मैग्नीशियम (Mg) के साथ | कॉपर (Cu) के साथ |
|---|---|---|---|
| जिंक ऑक्साइड (ZnO) | कोई अभिक्रिया नहीं | विस्थापन होगा (ZnO + Mg → MgO + Zn) |
कोई अभिक्रिया नहीं |
| मैग्नीशियम ऑक्साइड (MgO) | कोई अभिक्रिया नहीं | कोई अभिक्रिया नहीं | कोई अभिक्रिया नहीं |
| कॉपर ऑक्साइड (CuO) | विस्थापन होगा (CuO + Zn → ZnO + Cu) |
विस्थापन होगा (CuO + Mg → MgO + Cu) |
कोई अभिक्रिया नहीं |
प्रश्न 2
कौन सी धातु आसानी से संक्षारित नहीं होती है?
उत्तर: सोना (Au) तथा प्लैटिनम (Pt) जैसी उत्कृष्ट धातुएँ (Noble Metals) नमी, वायुमंडल की ऑक्सीजन, अम्ल या क्षारों से अप्रभावित रहती हैं और कभी संक्षारित (जंग लगना) नहीं होतीं।
प्रश्न 3
मिश्रधातु क्या होते हैं?
उत्तर: मिश्रधातु (Alloys):
दो या दो से अधिक धातुओं, अथवा एक धातु एवं एक अधातु के समांगी मिश्रण (Homogeneous Mixture) को मिश्रधातु कहते हैं। इन्हें मूल धातु को पिघलाकर उसमें अन्य तत्वों को एक निश्चित अनुपात में घोलकर ठंडा करके तैयार किया जाता है।
प्रमुख उदाहरण:
दो या दो से अधिक धातुओं, अथवा एक धातु एवं एक अधातु के समांगी मिश्रण (Homogeneous Mixture) को मिश्रधातु कहते हैं। इन्हें मूल धातु को पिघलाकर उसमें अन्य तत्वों को एक निश्चित अनुपात में घोलकर ठंडा करके तैयार किया जाता है।
प्रमुख उदाहरण:
- पीतल (Brass): ताँबा (Cu 70%) + जिंक (Zn 30%)
- काँसा (Bronze): ताँबा (Cu 90%) + टिन (Sn 10%)
- स्टेनलेस स्टील: लोहा (Fe) + निकेल (Ni) + क्रोमियम (Cr) + कार्बन (C) (जंग-मुक्त व कठोर)
- सोल्डर (Solder): लेड (Pb) + टिन (Sn) (कम गलनांक, तारों की वेल्डिंग में)
📌 पाठ के अंत में दिए गए अभ्यास प्रश्न (Textbook Exercises)
प्रश्न 1
निम्न में कौन सा युग्म विस्थापन अभिक्रिया प्रदर्शित करता है?
✅ उत्तर: (d) AgNO3 विलयन एवं कॉपर धातु
(समीकरण: Cu(s) + 2AgNO3(aq) → Cu(NO3)2(aq) + 2Ag(s); क्योंकि कॉपर, सिल्वर से अधिक सक्रिय है।)
(समीकरण: Cu(s) + 2AgNO3(aq) → Cu(NO3)2(aq) + 2Ag(s); क्योंकि कॉपर, सिल्वर से अधिक सक्रिय है।)
प्रश्न 2
लोहे के फ्राइंग पैन (Frying Pan) को जंग से बचाने के लिए निम्न में से कौन सी विधि उपयुक्त है?
✅ उत्तर: (c) जिंक की परत चढ़ाकर (यशदलेपन / Galvanisation)
(स्पष्टीकरण: फ्राइंग पैन को गर्म किया जाता है, अतः ग्रीस या पेंट लगाने से वे जलकर भोजन को विषाक्त कर देंगे। जिंक की परत उच्च ताप पर स्थायी सुरक्षा देती है।)
(स्पष्टीकरण: फ्राइंग पैन को गर्म किया जाता है, अतः ग्रीस या पेंट लगाने से वे जलकर भोजन को विषाक्त कर देंगे। जिंक की परत उच्च ताप पर स्थायी सुरक्षा देती है।)
प्रश्न 3
कोई धातु ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया कर उच्च गलनांक वाला यौगिक निर्मित करती है। यह यौगिक जल में विलेय है। वह तत्व संभवतः क्या हो सकता है?
✅ उत्तर: (a) कैल्सियम (Ca)
(कैल्सियम ऑक्सीजन से क्रिया कर आयनिक यौगिक CaO बनाता है जिसका गलनांक 2845 K (अत्यधिक उच्च) है और यह जल में घुलकर Ca(OH)2 बनाता है।)
(कैल्सियम ऑक्सीजन से क्रिया कर आयनिक यौगिक CaO बनाता है जिसका गलनांक 2845 K (अत्यधिक उच्च) है और यह जल में घुलकर Ca(OH)2 बनाता है।)
प्रश्न 4
खाद्य पदार्थ के डिब्बों पर टिन का लेप होता है न कि जिंक का क्योंकि:
✅ उत्तर: (c) टिन की अपेक्षा जिंक अधिक अभिक्रियाशील है।
(जिंक भोजन में उपस्थित कार्बनिक अम्लों के साथ क्रिया करके विषाक्त यौगिक बना सकता है, जबकि टिन कम क्रियाशील होने से खाद्य पदार्थों को सुरक्षित रखता है।)
(जिंक भोजन में उपस्थित कार्बनिक अम्लों के साथ क्रिया करके विषाक्त यौगिक बना सकता है, जबकि टिन कम क्रियाशील होने से खाद्य पदार्थों को सुरक्षित रखता है।)
प्रश्न 5
आपको एक हथौड़ा, बैटरी, बल्ब, तार एवं स्विच दिया गया है — (a) नमूनों में विभेद कैसे करेंगे? (b) उपयोगिता का आकलन कीजिए।
उत्तर:
(a) विभेद करने की विधि:
(a) विभेद करने की विधि:
- हथौड़े द्वारा (आघातवर्ध्यता परीक्षण): नमूने पर हथौड़े से चोट मारते हैं। यदि वह बिना टूटे पतली चादर में फैल जाता है, तो वह धातु है। यदि वह टूटकर चूर्ण-चूर्ण हो जाता है (भंगुर), तो वह अधातु है (जैसे कोयला, सल्फर)।
- विद्युत परिपथ द्वारा (विद्युत चालकता परीक्षण): बैटरी, बल्ब, तार और स्विच की सहायता से एक खुला परिपथ बनाते हैं। दोनों सिरों के बीच नमूना जोड़ते हैं। यदि बल्ब जल उठता है, तो नमूना विद्युत का सुचालक यानी धातु है। यदि बल्ब नहीं जलता, तो वह अधातु है (अपवाद: ग्रेफाइट अधातु होकर भी सुचालक है)।
प्रश्न 6
दो धातुओं के नाम बताइए जो तनु अम्ल से हाइड्रोजन को विस्थापित कर दें तथा दो धातुएँ जो ऐसा न कर सकें।
उत्तर:
- तनु अम्ल से हाइड्रोजन विस्थापित करने वाली धातुएँ (सक्रियता श्रेणी में H से ऊपर):
मैग्नीशियम (Mg) तथा जिंक (Zn)।
(उदा. Zn + 2HCl → ZnCl2 + H2↑) - तनु अम्ल से हाइड्रोजन विस्थापित न कर सकने वाली धातुएँ (सक्रियता श्रेणी में H से नीचे):
कॉपर / ताँबा (Cu) तथा चाँदी / सिल्वर (Ag)।
(क्योंकि ये हाइड्रोजन की तुलना में कम अभिक्रियाशील हैं और H+ आयनों को इलेक्ट्रॉन नहीं दे सकतीं।)
प्रश्न 7
किसी धातु M के विद्युत अपघटनी परिष्करण में आप ऐनोड, कैथोड एवं विद्युत अपघट्य किसे बनाएँगे?
उत्तर: धातु M के विद्युत अपघटनी परिष्करण (Electrolytic Refining) में:
- ऐनोड (धनात्मक इलेक्ट्रोड): अशुद्ध धातु M की मोटी छड़ / ब्लॉक।
- कैथोड (ऋणात्मक इलेक्ट्रोड): विशुद्ध धातु M की अत्यंत पतली पट्टी।
- विद्युत अपघट्य: धातु M के विलेय लवण का अम्लीकृत जलीय विलयन (जैसे कॉपर हेतु अम्लीकृत CuSO4 विलयन)।
प्रश्न 8
प्रत्यूष ने सल्फर चूर्ण को स्पैचुला में लेकर गर्म किया और परखनली को उल्टा करके उत्सर्जित गैस को एकत्र किया:
(a) गैस की क्रिया क्या होगी:
- (i) शुष्क लिटमस पत्र पर: कोई प्रभाव नहीं होगा (लिटमस का रंग अपरिवर्तित रहेगा), क्योंकि शुष्क अवस्था में गैस अम्लीय आयन H+ मुक्त नहीं कर सकती।
- (ii) आर्द्र (नम) लिटमस पत्र पर: नम नीला लिटमस पत्र लाल हो जाएगा, क्योंकि SO2 गैस नमी में घुलकर सल्फ्यूरस अम्ल बनाती है जो अम्लीय प्रकृति दर्शाता है।
1. सल्फर का दहन: S(s) + O2(g) → SO2(g) (सल्फर डाइऑक्साइड)
2. जल से क्रिया: SO2(g) + H2O(l) → H2SO3(aq) (सल्फ्यूरस अम्ल)
2. जल से क्रिया: SO2(g) + H2O(l) → H2SO3(aq) (सल्फ्यूरस अम्ल)
प्रश्न 9
लोहे को जंग से बचाने के दो तरीके बताइए।
उत्तर: लोहे को जंग (संक्षारण) से बचाने के प्रमुख उपाय:
- पेंट या ग्रीस की परत लगाना: लोहे की सतह पर पेंट, वार्निश या ग्रीस लगाने से लोहे का वायुमंडल की ऑक्सीजन तथा नमी (जलवाष्प) से सीधा संपर्क टूट जाता है।
- यशदलेपन / गैल्वेनीकरण (Galvanisation): लोहे एवं इस्पात की वस्तुओं पर पिघले हुए जिंक (जस्ता) की पतली सुरक्षात्मक परत चढ़ा दी जाती है। जिंक की परत नष्ट हो जाने पर भी जिंक का संक्षारण पहले होता है और लोहा सुरक्षित रहता है।
प्रश्न 10
ऑक्सीजन के साथ संयुक्त होकर धातुएँ कैसे ऑक्साइड बनाती हैं?
उत्तर: धातुएँ ऑक्सीजन के साथ संयोग करके सामान्यतः क्षारकीय ऑक्साइड (Basic Oxides) बनाती हैं।
- ये धात्विक ऑक्साइड जल में घुलकर क्षार बनाते हैं और लाल लिटमस को नीला कर देते हैं:
Na2O(s) + H2O(l) → 2NaOH(aq)
- उभयधर्मी ऑक्साइड (Amphoteric Oxides): ऐलुमिनियम ऑक्साइड (Al2O3) और जिंक ऑक्साइड (ZnO) जैसे कुछ ऑक्साइड अम्ल और क्षार दोनों से अभिक्रिया करके लवण तथा जल बनाते हैं।
प्रश्न 11
कारण बताइए:
- (a) प्लेटिनम, सोना एवं चाँदी का उपयोग आभूषण बनाने के लिए किया जाता है:
क्योंकि ये धातुएँ अत्यंत चमकदार, अत्यधिक आघातवर्ध्य तथा तन्य होती हैं। सबसे मुख्य बात यह है कि ये वायु, जल या अम्लों से क्रिया नहीं करतीं और कभी संक्षारित या मलीन नहीं होतीं। - (b) सोडियम, पोटैशियम एवं लिथियम को तेल के अंदर संग्रहित किया जाता है:
ये अत्यधिक क्रियाशील धातुएँ हैं। खुले में रखने पर ये वायु की ऑक्सीजन व नमी से अति तीव्र ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया करके तुरंत आग पकड़ लेती हैं। दुर्घटना से बचाव हेतु इन्हें मिट्टी के तेल में डुबोकर रखते हैं। - (c) ऐलुमिनियम अत्यंत अभिक्रियाशील धातु है, फिर भी इसका उपयोग खाना बनाने वाले बर्तन बनाने के लिए किया जाता है:
ऐलुमिनियम वायु के संपर्क में आने पर अपने ऊपर ऐलुमिनियम ऑक्साइड (Al2O3) की एक अत्यंत सुदृढ़, अभेद्य सुरक्षात्मक परत बना लेता है, जो धातु को आगे संक्षारित होने से रोकती है। साथ ही, यह ऊष्मा का उत्तम सुचालक और सस्ता होता है। - (d) निष्कर्षण प्रक्रम में कार्बोनेट एवं सल्फाइड अयस्क को ऑक्साइड में परिवर्तित किया जाता है:
क्योंकि सल्फाइड (MS) या कार्बोनेट (MCO3) की तुलना में धातु ऑक्साइड (MO) का अपचयन करके शुद्ध धातु प्राप्त करना रासायनिक रूप से अत्यधिक सरल और किफायती होता है। इसलिए भर्जन व निस्तापन द्वारा पहले उन्हें ऑक्साइड में बदला जाता है।
प्रश्न 12
आपने तांबे के मलीन बर्तन को नींबू या इमली के रस से साफ़ करते अवश्य देखा होगा। यह खट्टे पदार्थ बर्तन को साफ़ करने में क्यों प्रभावी हैं?
उत्तर:
- नम वायु और कार्बन डाइऑक्साइड के संपर्क में रहने से ताँबे के बर्तन पर क्षारीय कॉपर कार्बोनेट (बेसिक कॉपर कार्बोनेट / CuCO3·Cu(OH)2) की एक हरी मलीन परत जम जाती है।
- यह हरी परत क्षारकीय प्रकृति की होती है।
- नींबू में साइट्रिक अम्ल तथा इमली में टार्टरिक अम्ल उपस्थित होता है। जब खट्टे रस से बर्तन को रगड़ा जाता है, तो यह अम्ल क्षारीय कॉपर कार्बोनेट के साथ उदासीनीकरण अभिक्रिया करके उसे जल में घुलनशील लवण में बदल देता है, जो पानी से धोने पर बह जाता है और ताँबे का बर्तन पुनः चमकने लगता है।
प्रश्न 13
रासायनिक गुणधर्मों के आधार पर धातुओं एवं अधातुओं में विभेद कीजिए।
उत्तर: रासायनिक गुणधर्मों में अंतर:
| गुणधर्म | धातु (Metals) | अधातु (Non-Metals) |
|---|---|---|
| इलेक्ट्रॉनों की प्रवृत्ति | इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन बनाती हैं (विद्युत-धनात्मक)। उदा. Na → Na+ + e- | इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन बनाती हैं (विद्युत-ऋणात्मक)। उदा. Cl + e- → Cl- |
| ऑक्साइड की प्रकृति | इनके ऑक्साइड क्षारकीय (या उभयधर्मी) होते हैं। लाल लिटमस को नीला करते हैं। | इनके ऑक्साइड अम्लीय अथवा उदासीन होते हैं। नीले लिटमस को लाल करते हैं। |
| तनु अम्लों से क्रिया | तनु अम्लों से क्रिया करके H2 गैस विस्थापित करती हैं। | तनु अम्लों से हाइड्रोजन विस्थापित नहीं करतीं। |
| अपचायक / ऑक्सीकारक | प्रबल अपचायक होती हैं। | सामान्यतः ऑक्सीकारक होती हैं। |
प्रश्न 14
एक्वा रेजिया (अम्लराज) क्या है? (सोने के गहने साफ करने वाले ठग सुनार की कहानी पर आधारित)
उत्तर:
- एक्वा रेजिया (Aqua Regia / अम्लराज): सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (conc. HCl) एवं सांद्र नाइट्रिक अम्ल (conc. HNO3) का 3 : 1 के अनुपात में बनाया गया ताजा सधूम मिश्रण होता है।
- यह एक अत्यंत प्रबल संक्षारक और धुआँधार द्रव है जो उत्कृष्ट धातुओं जैसे सोना (Au) एवं प्लैटिनम (Pt) को भी अपने भीतर पूरी तरह घोलने की क्षमता रखता है (जबकि ये धातुएँ अकेले किसी अम्ल में नहीं घुलतीं)।
- जब वह व्यक्ति सोने की पुरानी चूड़ियों को इस घोल में डालता है, तो सोने की बाहरी धूलयुक्त परत के साथ-साथ ठोस सोने की एक भारी मात्रा अम्लराज में घुलकर विलीन हो जाती है। चूड़ियाँ बाहर से चमकने तो लगती हैं, परंतु उनका वजन काफी कम हो जाता है और वह व्यक्ति इस घुले हुए सोने को बाद में रासायनिक रूप से अलग करके लाभ कमा लेता है।
प्रश्न 15
गर्म जल का टैंक बनाने में तांबे का उपयोग होता है परंतु इस्पात (स्टील) का नहीं। इसका कारण बताइए।
उत्तर:
- संक्षारण प्रतिरोध: ताँबा (Cu) सक्रियता श्रेणी में हाइड्रोजन से नीचे स्थित है, अतः यह किसी भी परिस्थिति में न तो ठंडे जल, न गर्म जल और न ही जलवाष्प (भाप) के साथ कोई रासायनिक अभिक्रिया करता है। इसके विपरीत, इस्पात (स्टील, जो लोहे की मिश्रधातु है) गर्म पानी की भाप के साथ क्रिया करके जंग पकड़ लेता है और कुछ ही समय में संक्षारित होकर नष्ट हो जाता है:
3Fe(s) + 4H2O(g) → Fe3O4(s) + 4H2(g)↑
- ऊष्मा चालकता: ताँबा ऊष्मा का अत्यंत उत्तम सुचालक है (स्टील की तुलना में कई गुना अधिक), जिससे पानी बहुत तेजी से गर्म होता है।
💡 बिहार बोर्ड परीक्षा उपयोगी टिप: इस अध्याय से सक्रियता श्रेणी पर आधारित विस्थापन अभिक्रियाएँ, इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण द्वारा Na2O एवं MgO का बनना, भर्जन एवं निस्तापन में अंतर, तथा उभयधर्मी ऑक्साइड (Al2O3) के रासायनिक समीकरण 5 अंक के दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों में बार-बार पूछे जाते हैं। इन समीकरणों को लिखकर अभ्यास अवश्य करें!
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