अध्याय 2: अम्ल, क्षारक एवं लवण
BSEB Class 10 विज्ञान (रसायनशास्त्र) | सूचक, pH पैमाना, लवण परिवार, समीकरण एवं सम्पूर्ण अध्याय नोट्स
- अम्ल (Acids) स्वाद में कैसे होते हैं? — खट्टे (Sour)।
- क्षारक (Bases) स्वाद में कैसे तथा स्पर्श करने पर कैसे प्रतीत होते हैं? — कड़वे तथा साबुन जैसे चिकने।
- अम्ल नीले लिटमस पत्र को किस रंग में बदल देते हैं? — लाल रंग में।
- क्षारक लाल लिटमस पत्र को किस रंग में परिवर्तित करते हैं? — नीले रंग में।
- लिटमस विलयन किस पौधे से निष्कर्षित किया जाने वाला एक प्राकृतिक सूचक है? — थैलोफाइटा वर्ग के 'लाइकेन' (Lichen) से।
- जब लिटमस विलयन न तो अम्लीय होता है और न ही क्षारीय, तब इसका मूल रंग कैसा होता है? — बैंगनी (Purple)।
- हल्दी (Turmeric) किस प्रकार का सूचक है और क्षारक के संपर्क में इसका रंग कैसा हो जाता है? — प्राकृतिक सूचक, लाल-भूरा।
- अम्लीय माध्यम में संश्लेषित सूचक फीनॉल्फथैलिन का रंग कैसा होता है? — रंगहीन (Colorless)।
- क्षारीय माध्यम में फीनॉल्फथैलिन का रंग कैसा हो जाता है? — गुलाबी (Pink)।
- मेथिल ऑरेंज सूचक का रंग अम्लीय विलयन में कैसा होता है? — लाल (Red)।
- मेथिल ऑरेंज सूचक का रंग क्षारीय माध्यम में कैसा हो जाता है? — पीला (Yellow)।
- ऐसे सूचक जिनकी गंध अम्लीय या क्षारीय माध्यम में बदल जाती है, क्या कहलाते हैं? — गंधीय सूचक (Olfactory Indicators - वैनिला, प्याज, लौंग का तेल)।
- जब कोई अम्ल किसी सक्रिय धातु से क्रिया करता है, तो कौन-सी गैस मुक्त होती है? — हाइड्रोजन गैस (H2)।
- हाइड्रोजन गैस की उपस्थिति की पुष्टि किस परीक्षण द्वारा की जाती है? — जलती हुई तीली ले जाने पर 'पॉप' (Pop Sound) ध्वनि के साथ जलना।
- जिंक धातु की सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) के साथ क्रिया से कौन-सा लवण बनता है? — सोडियम जिंकेट (Na2ZnO2)।
- चूने के पानी [Ca(OH)2] में कार्बन डाइऑक्साइड गैस प्रवाहित करने पर वह दूधिया क्यों हो जाता है? — अघुलनशील कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO3) बनने के कारण।
- चूने के पानी में अत्यधिक मात्रा में CO2 प्रवाहित करने पर दूधियापन क्यों गायब हो जाता है? — जल में घुलनशील कैल्शियम हाइड्रोजनकार्बोनेट [Ca(HCO3)2] बनने से।
- अम्ल एवं क्षारक की परस्पर अभिक्रिया से लवण तथा जल बनने की क्रिया क्या कहलाती है? — उदासीनीकरण अभिक्रिया (Neutralization Reaction)।
- धात्विक ऑक्साइडों (जैसे CuO, MgO) की रासायनिक प्रकृति सामान्यतः कैसी होती है? — क्षारकीय (Basic)।
- अधात्विक ऑक्साइडों (जैसे CO2, SO2) की रासायनिक प्रकृति कैसी होती है? — अम्लीय (Acidic)।
- सभी अम्लों के जलीय विलयन में कौन-सा आयन अनिवार्य रूप से उत्पन्न होता है? — हाइड्रोजन आयन (H+) अथवा हाइड्रोनियम आयन (H3O+)।
- सभी क्षारकों के जलीय विलयन में कौन-सा आयन उत्पन्न होता है? — हाइड्रॉक्साइड आयन (OH-)।
- जल में घुलनशील क्षारकों को विशेष रूप से क्या कहा जाता है? — क्षार (Alkali)।
- शुष्क हाइड्रोक्लोरिक गैस (HCl) शुष्क नीले लिटमस पत्र का रंग क्यों नहीं बदलती? — जल के अभाव में H+ आयन उत्पन्न न होने के कारण।
- अम्ल को तनुकृत करते समय जल में अम्ल मिलाना चाहिए या अम्ल में जल? — सदैव जल में बूंद-बूंद करके हिलाते हुए अम्ल मिलाना चाहिए।
- अम्ल के तनुकरण (Dilution) की प्रक्रिया ऊष्माक्षेपी होती है या ऊष्माशोषी? — अत्यधिक ऊष्माक्षेपी (Exothermic)।
- pH पैमाने की खोज 1909 में किस डेनिश रसायनज्ञ ने की थी? — डॉ. सोरेनसन (S.P.L. Sørensen) ने।
- pH पैमाने में 'p' किस जर्मन शब्द का सूचक है और इसका क्या अर्थ है? — पोटांस (Potenz), जिसका अर्थ 'शक्ति' (Power) है।
- कमरे के ताप (25°C) पर शुद्ध उदासीन जल का pH मान कितना होता है? — 7.0।
- अम्लीय विलयन का pH मान कितना होता है? — 7 से कम (pH < 7)।
- क्षारीय विलयन का pH मान कितना होता है? — 7 से अधिक (pH > 7)।
- मानव शरीर की जैविक क्रियाएं किस संकीर्ण pH परास के भीतर सुचारू रूप से कार्य करती हैं? — 7.0 से 7.8 के बीच।
- वर्षा के जल का pH मान कितने से कम होने पर उसे 'अम्लीय वर्षा' (Acid Rain) कहते हैं? — 5.6 से कम होने पर।
- मानव आमाशय में भोजन के पाचन हेतु कौन-सा अम्ल प्राकृतिक रूप से स्रावित होता है? — हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl)।
- उदर में अत्यधिक अम्लता (एसिडिटी) को शांत करने हेतु प्रयुक्त दुर्बल क्षारक को क्या कहते हैं? — प्रतिअम्ल (एंटासिड / Antacid जैसे Mg(OH)2 - मिल्क ऑफ मैग्नीशिया)।
- मुँह का pH मान कितने से कम होने पर दांतों का इनेमल संक्षारित (दंतक्षय) होने लगता है? — 5.5 से कम होने पर।
- मानव शरीर का सबसे कठोरतम पदार्थ क्या है? — दांतों का इनेमल (दंतवल्क - कैल्शियम हाइड्रोक्सीएपैटाइट)।
- चींटी और मधुमक्खी के डंक में कौन-सा अम्ल पाया जाता है जो जलन व दर्द पैदा करता है? — मेथेनोइक अम्ल (फॉर्मिक अम्ल / HCOOH)।
- जंगलों में पाए जाने वाले नेटल (बिच्छू बूटी) पौधे के चुभने वाले बालों में कौन-सा अम्ल होता है? — मेथेनोइक अम्ल।
- नेटल के डंक के प्रभाव को तुरंत उदासीन करने के लिए किस क्षारीय पौधे की पत्ती रगड़ी जाती है? — डॉक (Dock) के पौधे की पत्ती।
- सिरके (Vinegar) में कौन-सा प्राकृतिक कार्बनिक अम्ल पाया जाता है? — एसिटिक अम्ल (एथेनोइक अम्ल / CH3COOH)।
- संतरे और नींबू में मुख्य रूप से कौन-सा अम्ल उपस्थित होता है? — सिट्रिक अम्ल (Citric Acid)।
- इमली में कौन-सा प्राकृतिक कार्बनिक अम्ल पाया जाता है? — टार्टरिक अम्ल (Tartaric Acid)।
- टमाटर में कौन-सा अम्ल उपस्थित होता है? — ऑक्जेलिक अम्ल (Oxalic Acid)।
- खट्टे दूध या दही में कौन-सा अम्ल उपस्थित होता है? — लैक्टिक अम्ल (Lactic Acid)।
- सोडियम क्लोराइड के जलीय विलयन (ब्राइन) के विद्युत अपघटन से NaOH बनाने का प्रक्रम क्या कहलाता है? — क्लोरो-क्षार प्रक्रम (Chlor-Alkali Process)।
- विरंजक चूर्ण (Bleaching Powder) का रासायनिक नाम और सूत्र क्या है? — कैल्शियम ऑक्सीक्लोराइड (CaOCl2)।
- बेकिंग सोडा (खाने का सोडा) का रासायनिक नाम और सूत्र क्या है? — सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट (NaHCO3)।
- धावन सोडा (धोने का सोडा) का रासायनिक नाम और सूत्र क्या है? — सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट (Na2CO3·10H2O)।
- प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) का रासायनिक सूत्र क्या है? — CaSO4·½H2O (कैल्शियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट)।
अम्ल: वे रासायनिक पदार्थ जो जल में घुलकर हाइड्रोजन आयन (H+) अथवा हाइड्रोनियम आयन (H3O+) प्रदान करते हैं, अम्ल कहलाते हैं (जैसे HCl → H+ + Cl-)।
क्षारक: वे पदार्थ जो जल में वियोजित होकर केवल हाइड्रॉक्साइड आयन (OH-) देते हैं, क्षारक कहलाते हैं (जैसे NaOH → Na+ + OH-)।
दही एवं अन्य खट्टे खाद्य पदार्थों में विभिन्न प्राकृतिक कार्बनिक अम्ल (जैसे लैक्टिक अम्ल, सिट्रिक अम्ल) उपस्थित होते हैं। ये अम्ल तांबे और पीतल की धातुओं के साथ रासायनिक अभिक्रिया करके विषाक्त धात्विक लवण बना लेते हैं। यदि ऐसे दूषित भोजन का सेवन किया जाए, तो यह हमारे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक और जानलेवा (फूड पॉइजनिंग) सिद्ध हो सकता है।
जब धातु कार्बोनेट या हाइड्रोजनकार्बोनेट किसी तनु अम्ल से क्रिया करते हैं, तो संगत धातु लवण, जल तथा तीव्र बुदबुदाहट के साथ कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) गैस उत्पन्न होती है:
जब किसी अम्ल और क्षारक की परस्पर अभिक्रिया कराई जाती है, तो वे एक-दूसरे के अम्लीय व क्षारीय प्रभावों को समाप्त कर लवण तथा जल का निर्माण करते हैं। इस ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया को उदासीनीकरण अभिक्रिया कहते हैं:
धात्विक ऑक्साइड (जैसे कॉपर ऑक्साइड, मैग्नीशियम ऑक्साइड) अम्लों के साथ क्रिया करके ठीक क्षारकों की भांति लवण तथा जल बनाते हैं। चूंकि इनका रासायनिक व्यवहार क्षारक के समान होता है, अतः इन्हें क्षारकीय ऑक्साइड कहते हैं:
अधातुओं के ऑक्साइड (जैसे कार्बन डाइऑक्साइड CO2, सल्फर डाइऑक्साइड SO2) क्षारकों के साथ क्रिया करके लवण और जल बनाते हैं, जो कि अम्लों का लाक्षणिक गुण है। अतः इनकी प्रकृति अम्लीय होती है:
विद्युत धारा के चालन हेतु स्वतंत्र गतिशील आयनों की आवश्यकता होती है। आसुत जल पूर्णतः शुद्ध होता है और इसमें आयनों का अभाव होता है, अतः यह विद्युत का कुचालक है। इसके विपरीत, वर्षा का जल वायुमंडल से नीचे आते समय उसमें उपस्थित गैसों (जैसे CO2, SO2, NO2) को घोलकर कार्बोनिक व सल्फ्यूरिक अम्ल बना लेता है, जो जल में आयनीकृत होकर H+ आयन मुक्त करते हैं। इन आयनों के कारण वर्षा का जल विद्युत का चालन करता है।
अम्ल के अम्लीय गुणों (जैसे नीले लिटमस को लाल करना, धातुओं से क्रिया) के लिए स्वतंत्र हाइड्रोजन आयन (H+) उत्तरदायी होते हैं। अम्ल के अणुओं से H+ आयनों का पृथक्करण केवल जल की उपस्थिति में ही संभव है। जल की अनुपस्थिति में अम्ल अपने आयनों में नहीं टूट पाता, अतः वह अम्लीय व्यवहार प्रदर्शित नहीं कर सकता।
सांद्र अम्ल का जल में घुलना एक अत्यधिक ऊष्माक्षेपी प्रक्रम है। यदि सांद्र अम्ल में जल डाला जाए, तो एक साथ प्रचंड ऊष्मा उत्पन्न होती है, जिससे अत्यधिक गर्म अम्ल छलक कर हमारे चेहरे या हाथों पर गिर सकता है और गंभीर तेजाबी घाव बना सकता है। साथ ही स्थानीय अति-तापन से कांच का पात्र टूट भी सकता है। अतः सुरक्षा की दृष्टि से जल में धीरे-धीरे हिलाते हुए अम्ल मिलाना चाहिए।
pH पैमाना हाइड्रोजन आयनों की सांद्रता के ऋणात्मक लघुगणक पर आधारित होता है (pH = -log[H+])। अतः विलयन में H+ आयनों की सांद्रता जितनी अधिक होगी, उस विलयन का pH मान उतना ही कम (अधिक अम्लीय) होगा। इसके विपरीत, जब H+ आयन घटते हैं, तो pH मान बढ़ जाता है।
हाँ, क्षारीय विलयनों में भी जल के स्वतः-आयनीकरण के कारण H+ आयन सूक्ष्म मात्रा में उपस्थित रहते हैं। परंतु वे क्षारीय इसलिए होते हैं क्योंकि ऐसे विलयनों में हाइड्रॉक्साइड आयनों (OH-) की सांद्रता हाइड्रोजन आयनों (H+) की सांद्रता से कहीं अधिक ([OH-] >> [H+]) होती है।
सार्वत्रिक सूचक अनेक रासायनिक सूचकों का एक ऐसा सुव्यवस्थित मिश्रण होता है जो भिन्न-भिन्न pH मानों वाले विलयनों में अलग-अलग विशिष्ट रंग प्रदर्शित करता है।
श्रेष्ठता: साधारण लिटमस पत्र केवल यह बताता है कि कोई पदार्थ 'अम्ल' है या 'क्षारक'; परंतु सार्वत्रिक सूचक रंग के आधार पर यह भी स्पष्ट कर देता है कि अम्ल या क्षारक की वास्तविक प्रबलता (pH मान) कितनी है।
जब हम मीठा या शर्करायुक्त भोजन करते हैं, तो मुँह में उपस्थित अवशिष्ट बैक्टीरिया भोजन कणों का किण्वन करके अम्ल उत्पन्न करते हैं। यदि मुँह का pH मान 5.5 से कम हो जाए, तो हमारे दांतों का सबसे कठोर इनेमल (कैल्शियम फॉस्फेट) घुलने लगता है, जिसे दंतक्षय कहते हैं।
बचाव: भोजन के पश्चात भोजन के कणों को साफ करना तथा क्षारीय टूथपेस्ट का उपयोग करना, जो अतिरिक्त अम्ल को उदासीन कर देता है।
शुष्क बुझे हुए चूने [Ca(OH)2] पर 40°C ताप पर क्लोरीन गैस (Cl2) प्रवाहित करने पर विरंजक चूर्ण (ब्लीचिंग पाउडर) का निर्माण होता है:
1. रोगाणुनाशी के रूप में: पेयजल (पीने के पानी) में उपस्थित हानिकारक कीटाणुओं और जीवाणुओं को नष्ट करके जल को पूरी तरह रोगाणुमुक्त बनाने में।
2. वस्त्र एवं कागज उद्योग में: सूती एवं लिनेन के कपड़ों के विरंजन (रंग उड़ाने) हेतु तथा रासायनिक उद्योगों में एक शक्तिशाली ऑक्सीकारक के रूप में।
बेकिंग सोडा: यह शुद्ध सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट (NaHCO3) का एकल यौगिक है। इसे गर्म करने पर बनने वाले Na2CO3 के कारण भोजन का स्वाद कड़वा हो सकता है।
बेकिंग पाउडर: यह बेकिंग सोडा (NaHCO3) तथा एक मंद खाद्य कार्बनिक अम्ल (जैसे टार्टरिक अम्ल) का तैयार मिश्रण होता है। टार्टरिक अम्ल बनने वाले सोडियम कार्बोनेट को तुरंत उदासीन कर देता है, जिससे केक कड़वा नहीं होता बल्कि स्वादिष्ट और स्पंजी बनता है।
जब बेकिंग पाउडर को जल में मिलाकर गर्म किया जाता है, तो निम्नलिखित रासायनिक अभिक्रिया होती है:
सोडियम कार्बोनेट के जलीय विलयन के पुनःक्रिस्टलीकरण से धावन सोडा बनता है:
किसी लवण के एक सूत्र इकाई में निश्चित रूप से जुड़े जल के अणुओं की निश्चित संख्या को क्रिस्टलन का जल कहते हैं। ये अणु लवण के क्रिस्टल जालक का अभिन्न अंग होते हैं और उसे विशिष्ट रंग व ज्यामिति प्रदान करते हैं।
उदाहरण: जलयोजित कॉपर सल्फेट (CuSO4·5H2O) में क्रिस्टलन जल के 5 अणु होते हैं, जिसके कारण इसका रंग नीला होता है।
नीले कॉपर सल्फेट के क्रिस्टलों का सूत्र CuSO4·5H2O होता है। जब इसे शुष्क परखनली में गर्म किया जाता है, तो इसके क्रिस्टलन जल के पांचों अणु वाष्पीकृत होकर बाहर निकल जाते हैं और यह निर्जल कॉपर सल्फेट (CuSO4) में बदल जाता है, जो कि बिल्कुल श्वेत (सफेद) रंग का होता है:
प्लास्टर ऑफ पेरिस (CaSO4·½H2O) वायुमंडल की नमी या जलवाष्प को बहुत तेजी से अवशोषित कर लेता है और पुनः कठोर पत्थर जैसी संरचना जिप्सम में परिवर्तित होकर जम जाता है:
प्रबल अम्ल: वे अम्ल जो जलीय विलयन में लगभग पूर्णतः आयनीकृत होकर भारी मात्रा में H+ आयन उत्पन्न करते हैं (जैसे—हाइड्रोक्लोरिक अम्ल HCl, सल्फ्यूरिक अम्ल H2SO4, नाइट्रिक अम्ल HNO3)।
दुर्बल अम्ल: वे अम्ल जो जलीय विलयन में केवल आंशिक रूप से आयनीकृत होते हैं और कम मात्रा में H+ आयन देते हैं (जैसे—एसिटिक अम्ल CH3COOH, कार्बोनिक अम्ल H2CO3)।
1. उदासीन लवण (pH = 7): प्रबल अम्ल + प्रबल क्षारक के संयोजन से (जैसे NaCl, KNO3)।
2. अम्लीय लवण (pH < 7): प्रबल अम्ल + दुर्बल क्षारक के संयोजन से (जैसे NH4Cl, CuSO4)।
3. क्षारीय लवण (pH > 7): दुर्बल अम्ल + प्रबल क्षारक के संयोजन से (जैसे CH3COONa, Na2CO3)।
इसमें सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट (NaHCO3) का सांद्र जलीय विलयन तथा एक कांच की शीशी में सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4) भरा होता है। जब यंत्र के घुंडी पर प्रहार किया जाता है, तो अम्ल बेकिंग सोडा विलयन में गिर जाता है, जिससे अत्यधिक तीव्र वेग से कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) गैस का झागदार फव्वारा निकलता है। भारी होने के कारण CO2 आग को चारों ओर से ढककर वायु की ऑक्सीजन की आपूर्ति काट देती है और आग तुरंत बुझ जाती है।
कॉपर सल्फेट (CuSO4) एक ऐसा लवण है जो दुर्बल क्षारक [Cu(OH)2] तथा प्रबल अम्ल [H2SO4] की उदासीनीकरण अभिक्रिया से बनता है। जब इसे जल में घोला जाता है, तो जल-अपघटन के फलस्वरूप विलयन में प्रबल अम्ल के कारण मुक्त H+ आयनों की सांद्रता OH- आयनों से अधिक हो जाती है, जिससे विलयन का pH मान 7 से कम (अम्लीय) हो जाता है।
अम्ल और क्षारक रासायनिक रूप से अत्यधिक सक्रिय पदार्थ हैं। इनके प्रमुख रासायनिक गुणधर्म निम्नलिखित हैं:
- 1. धातुओं के साथ अभिक्रिया: सक्रिय धातुएं अम्लों से क्रिया करके हाइड्रोजन गैस मुक्त करती हैं:
Zn(s) + H2SO4(aq) → ZnSO4(aq) + H2(g)↑प्रबल क्षारक भी कुछ विशिष्ट धातुओं (जैसे Zn, Al) के साथ क्रिया कर हाइड्रोजन गैस निकालते हैं:2NaOH(aq) + Zn(s) → Na2ZnO2(aq) [सोडियम जिंकेट] + H2(g)↑
- 2. धातु कार्बोनेट एवं बाइकार्बोनेट के साथ अभिक्रिया: अम्ल इनसे क्रिया कर लवण, जल तथा कार्बन डाइऑक्साइड गैस उत्पन्न करते हैं:
CaCO3(s) + 2HCl(aq) → CaCl2(aq) + H2O(l) + CO2(g)↑(क्षारक धातु कार्बोनेटों के साथ कोई सामान्य अभिक्रिया नहीं करते)।
- 3. परस्पर अभिक्रिया (उदासीनीकरण): अम्ल और क्षारक क्रिया करके लवण और जल बनाते हैं:
HNO3(aq) + KOH(aq) → KNO3(aq) + H2O(l)
- 4. धात्विक ऑक्साइडों के साथ अम्लों की अभिक्रिया: धात्विक ऑक्साइड मूलतः क्षारकीय होते हैं, अतः वे अम्लों से क्रिया कर लवण व जल बनाते हैं:
MgO(s) + 2HCl(aq) → MgCl2(aq) + H2O(l)
- 5. अधात्विक ऑक्साइडों के साथ क्षारकों की अभिक्रिया: अधात्विक ऑक्साइड अम्लीय प्रकृति के होते हैं, जो क्षारकों के साथ क्रिया कर लवण व जल बनाते हैं:
2NaOH(aq) + SO2(g) → Na2SO3(aq) + H2O(l)
सिद्धांत: सोडियम क्लोराइड के सांद्र जलीय विलयन (जिसे ब्राइन / Brine कहते हैं) में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर यह वियोजित होकर सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) उत्पन्न करता है। इस प्रक्रिया में क्लोरीन गैस (क्लोरो) तथा सोडियम हाइड्रॉक्साइड (क्षार) का निर्माण होता है, अतः इसे क्लोरो-क्षार प्रक्रम कहते हैं।
तीनों प्रमुख उत्पादों की प्राप्ति स्थल एवं उनके औद्योगिक उपयोग:
- 1. क्लोरीन गैस (Cl2) — एनोड (धनात्मक इलेक्ट्रोड) पर:
• उपयोग: जल की स्वच्छता एवं शुद्धिकरण में, स्विमिंग पूल को रोगाणुमुक्त करने में, PVC पाइपों के निर्माण में, सीएफसी (CFCs) तथा विरंजक चूर्ण (CaOCl2) बनाने में। - 2. हाइड्रोजन गैस (H2) — कैथोड (ऋणात्मक इलेक्ट्रोड) पर:
• उपयोग: रॉकेटों के लिए तरल ईंधन के रूप में, वनस्पति तेलों के हाइड्रोजनीकरण द्वारा वनस्पति घी (डालडा) बनाने में, तथा अमोनिया उर्वरक के संश्लेषण में। - 3. सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) — कैथोड के पास विलयन के रूप में:
• उपयोग: धातुओं से ग्रीस हटाने में, साबुन एवं डिटर्जेंट उद्योग में, कागज निर्माण की लुगदी तैयार करने में तथा कृत्रिम रेशे (रेयान) बनाने में।
pH पैमाना: किसी विलयन में उपस्थित हाइड्रोजन आयनों (H+) की सांद्रता मापने के लिए विकसित पैमाने को pH पैमाना कहते हैं (pH = -log[H+])। इसका परास 0 (अत्यधिक अम्लीय) से 14 (अत्यधिक क्षारीय) तक होता है; 7 उदासीन मान है।
दैनिक जीवन में pH का महत्व:
- 1. मानव शरीर की कार्यप्रणाली: हमारा संपूर्ण शरीर 7.0 से 7.8 pH परास के संकीर्ण दायरे में कार्य करता है। रक्त का pH 7.4 होता है। इसमें 0.2 का भी विचलन मानव जीवन के लिए घातक हो सकता है।
- 2. पाचन तंत्र में pH: आमाशय भोजन के पाचन हेतु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (pH ≈ 1.2 - 1.8) स्रावित करता है। अपच की स्थिति में अतिरिक्त अम्ल बनने पर पेट में जलन व दर्द होता है, जिसे ठीक करने के लिए दुर्बल क्षारक जैसे मिल्क ऑफ मैग्नीशिया [Mg(OH)2] या बेकिंग सोडा का उपयोग प्रतिअम्ल (Antacid) के रूप में किया जाता है।
- 3. दंतक्षय का नियंत्रण: मुँह में बचे भोजन पर बैक्टीरिया अम्ल उत्पन्न करते हैं। यदि मुँह का pH 5.5 से कम हो जाता है, तो दांतों का सबसे कठोर इनेमल (कैल्शियम हाइड्रोक्सीएपैटाइट) संक्षारित होने लगता है। क्षारीय टूथपेस्ट इस अम्ल को उदासीन कर दंतक्षय रोकता है।
- 4. पौधों के लिए मृदा का pH: अच्छी और स्वस्थ फसल उत्पादन के लिए मिट्टी का एक विशिष्ट अनुकूल pH (लगभग 6.5 से 7.5) होना अनिवार्य है। अत्यधिक अम्लीय मिट्टी को बुझा चूना [Ca(OH)2] या चाक डालकर तथा अत्यधिक क्षारीय मिट्टी को जिप्सम या जैविक खाद डालकर सुधारा जाता है।
- 5. जलीय जीवों की उत्तरजीविता एवं अम्लीय वर्षा: जब वर्षा के जल का pH 5.6 से कम हो जाता है, तो इसे 'अम्लीय वर्षा' कहते हैं। यह जल जब नदियों और झीलों में बहता है, तो जल का pH गिर जाता है, जिससे मछलियों, प्लवकों और अन्य जलीय जीवों का जीवन संकट में पड़ जाता है।
रासायनिक नाम: सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट / सोडियम बाइकार्बोनेट।
रासायनिक सूत्र: NaHCO3
निर्माण की विधि (साल्वे प्रक्रम / Solvay Process):
सोडियम क्लोराइड के ठंडे सांद्र जलीय विलयन (ब्राइन) में अमोनिया (NH3) और कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) गैसें प्रवाहित करके इसका निर्माण किया जाता है:
गुणधर्म एवं ऊष्मा का प्रभाव:
- यह एक सफेद क्रिस्टलीय ठोस पदार्थ है जो जल में अल्प विलेय है। इसका जलीय विलयन हल्का क्षारीय होता है।
- ऊष्मा का प्रभाव: भोजन पकाते समय इसे गर्म करने पर यह अपघटित होकर सोडियम कार्बोनेट, जल तथा CO2 गैस मुक्त करता है:
2NaHCO3 →ऊष्मा (Δ) Na2CO3 + H2O + CO2↑
प्रमुख उपयोग:
- 1. रसोईघर में स्वादिष्ट खस्ता पकौड़े और बेकिंग पाउडर बनाने में।
- 2. पेट की अत्यधिक अम्लता को दूर करने वाले प्रतिअम्ल (Antacid) के संघटक के रूप में।
- 3. सोडा-अम्ल अग्निशामक यंत्रों (Fire Extinguishers) में आग बुझाने हेतु।
- 4. त्वचा के हल्के संक्रमणों में पूतिरोधी (Antiseptic) के रूप में।
रासायनिक नाम: सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट।
रासायनिक सूत्र: Na2CO3·10H2O
निर्माण की विधि (तीन चरण):
- चरण 1: साल्वे प्रक्रम द्वारा सर्वप्रथम सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट बनाया जाता है:
NaCl + H2O + CO2 + NH3 → NH4Cl + NaHCO3
- चरण 2: बेकिंग सोडा को गर्म करके निर्जल सोडियम कार्बोनेट (सोडा ऐश / Soda Ash) प्राप्त किया जाता है:
2NaHCO3 →Δ Na2CO3 + H2O + CO2↑
- चरण 3 (पुनःक्रिस्टलीकरण): निर्जल सोडियम कार्बोनेट को जल में घोलकर उसका पुनःक्रिस्टलीकरण करने पर धावन सोडा के क्रिस्टल प्राप्त होते हैं:
Na2CO3 + 10H2O → Na2CO3·10H2O
क्रिस्टलन जल का महत्व: इसमें उपस्थित 10 जल अणु क्रिस्टल जालक को स्थिरता प्रदान करते हैं। खुली शुष्क हवा में रखने पर यह 9 जल अणु त्यागकर एक श्वेत चूर्ण (सोडियम कार्बोनेट मोनोहाइड्रेट) में बदल जाता है, जिसे उत्फुल्लन (Efflorescence) कहते हैं।
प्रमुख उपयोग:
- 1. जल की स्थायी कठोरता (कैल्शियम व मैग्नीशियम सल्फेट/क्लोराइड) को रासायनिक रूप से दूर करने में।
- 2. कांच, साबुन एवं कागज निर्माण कारखानों में कच्चे माल के रूप में।
- 3. बोरेक्स (Na2B4O7·10H2O) जैसे उपयोगी सोडियम यौगिकों के औद्योगिक निर्माण में।
- 4. घरेलू स्तर पर कपड़ों एवं वस्त्रों की धुलाई तथा सफाई अभिकर्ता के रूप में।
रासायनिक नाम: कैल्शियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट (अर्ध-हाइड्रेट)।
रासायनिक सूत्र: CaSO4·½H2O (अथवा [CaSO4]2·H2O)।
निर्माण की विधि:
जब जिप्सम (CaSO4·2H2O) को एक विशेष भट्ठी में नियंत्रित रूप से 373 K (100°C) तापमान पर गर्म किया जाता है, तो यह अपने क्रिस्टलन जल का 1½ अणु त्यागकर प्लास्टर ऑफ पेरिस में बदल जाता है:
तापमान नियंत्रण का महत्व: यदि तापमान 373 K से अधिक (लगभग 400 K से ऊपर) हो जाए, तो जिप्सम का संपूर्ण जल बाहर निकल जाता है और मृत तापित प्लास्टर (Dead Burnt Plaster - निर्जल CaSO4) बन जाता है, जिसमें जल मिलाने पर जमने का कोई गुण नहीं होता।
जमने की क्रियाविधि (Setting of POP):
जब POP के सफेद चूर्ण में उचित मात्रा में जल मिलाया जाता है, तो यह एक सुघट्य (Plasticky) पेस्ट बन जाता है और 10 से 15 मिनट के भीतर ऊष्मा मुक्त करते हुए पुनः कठोर ठोस जिप्सम में परिवर्तित होकर जम जाता है:
प्रमुख उपयोग:
- 1. चिकित्सा क्षेत्र में: टूटी हुई अस्थियों (हड्डियों) को सही स्थान पर स्थिर रखने हेतु प्लास्टर चढ़ाने में।
- 2. गृह निर्माण में: कमरों की छतों और दीवारों को चिकना बनाने तथा सुंदर फॉल-सीलिंग डिजाइन तैयार करने में।
- 3. मूर्तिकला एवं खिलौना उद्योग में: देवी-देवताओं की सुंदर मूर्तियां, खिलौने, चाक और दंत चिकित्सा के सांचे बनाने में।
- 4. प्रयोगशाला में वायु-रुद्ध (Airtight) सील लगाने में।
सूचक: वे रंजक या रासायनिक पदार्थ जो अपने रंग अथवा गंध में परिवर्तन द्वारा किसी विलयन के अम्लीय, क्षारीय अथवा उदासीन होने की सूचना देते हैं, सूचक कहलाते हैं।
| सूचक का नाम | सूचक का प्रकार | मूल रंग / अवस्था | अम्लीय माध्यम में रंग | क्षारीय माध्यम में रंग |
|---|---|---|---|---|
| लिटमस | प्राकृतिक (लाइकेन) | बैंगनी | लाल | नीला |
| हल्दी | प्राकृतिक | पीला | पीला (अपरिवर्तित) | लाल-भूरा |
| लाल पत्तागोभी रस | प्राकृतिक | लाल-बैंगनी | लाल | हरा / पीला |
| फीनॉल्फथैलिन | संश्लेषित | रंगहीन | रंगहीन | गुलाबी (Pink) |
| मेथिल ऑरेंज | संश्लेषित | नारंगी | लाल | पीला |
| प्याज का रस / वैनिला | गंधीय (Olfactory) | तीक्ष्ण विशिष्ट गंध | गंध बनी रहती है | गंध समाप्त हो जाती है |
सार्वत्रिक सूचक (Universal Indicator): यह कई कार्बनिक रंजकों का पेटेंट मिश्रण होता है। यह 0 से 14 तक प्रत्येक pH मान के लिए एक निश्चित रंग प्रदर्शित करता है—प्रबल अम्ल हेतु गहरा लाल, दुर्बल अम्ल हेतु नारंगी/पीला, उदासीन हेतु हरा, दुर्बल क्षार हेतु नीला, तथा प्रबल क्षार हेतु गहरा बैंगनी।
प्रयोग का उद्देश्य: यह प्रदर्शित करना कि यद्यपि ग्लूकोज (C6H12O6) और एथिल ऐल्कोहॉल (C2H5OH) में हाइड्रोजन उपस्थित होता है, परंतु वे अम्ल नहीं हैं क्योंकि वे जलीय विलयन में H+ आयन मुक्त नहीं करते।
प्रायोगिक व्यवस्था:
- एक 100 mL का बीकर लेते हैं और एक कॉर्क पर लोहे की दो कीलें लगाकर उसे बीकर के पेंदे में रख देते हैं।
- कीलों को 6 वोल्ट की एक बैटरी, एक टॉर्च बल्ब तथा एक स्विच के साथ श्रेणीक्रम में तारों द्वारा जोड़ते हैं।
क्रमवार परीक्षण एवं प्रेक्षण:
- परीक्षण 1 (तनु HCl विलयन): बीकर में थोड़ा तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल डालकर स्विच ऑन करते हैं।
प्रेक्षण: बल्ब तुरंत तीव्रता से जल उठता है और अमीटर में विक्षेप आता है।
कारण: HCl जल में आयनीकृत होकर स्वतंत्र H+ तथा Cl- आयन उत्पन्न करता है, जो विद्युत धारा का संवहन करते हैं। - परीक्षण 2 (ग्लूकोज विलयन): बीकर को धोकर उसमें ग्लूकोज का जलीय घोल डालते हैं और स्विच चालू करते हैं।
प्रेक्षण: बल्ब बिल्कुल नहीं जलता। - परीक्षण 3 (एल्कोहॉल विलयन): बीकर में एथेनॉल का जलीय विलयन डालकर स्विच ऑन करते हैं।
प्रेक्षण: इस बार भी बल्ब नहीं जलता।
निष्कर्ष: ग्लूकोज और ऐल्कोहॉल में हाइड्रोजन परमाणु उपस्थित होने के बावजूद वे जलीय विलयन में आयनीकृत होकर स्वतंत्र H+ आयन नहीं छोड़ते। चूंकि अम्लीयता केवल H+ आयनों के कारण होती है, अतः सिद्ध होता है कि सभी अम्ल हाइड्रोजन युक्त होते हैं, परंतु सभी हाइड्रोजन युक्त यौगिक अम्ल नहीं होते।
हाइड्रोजन आयन और हाइड्रोनियम आयन की प्रकृति:
- जब किसी अम्ल को जल में घोला जाता है, तो जल के ध्रुवीय अणु अम्ल के सहसंयोजक बंध को तोड़कर प्रोटॉन (H+) को अलग कर देते हैं:
HCl + H2O → H+(aq) + Cl-(aq)
- हाइड्रोजन आयन (H+) वस्तुतः केवल एक प्रोटॉन है जिसका आकार अत्यंत सूक्ष्म (∼ 10-15 m) होता है और इस पर अत्यधिक उच्च धनावेश घनत्व होता है। अतः यह जलीय विलयन में कभी भी स्वतंत्र अवस्था में अकेला नहीं रह सकता।
- यह तुरंत जल के उदासीन अणु (H2O) के एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म के साथ एक उपसहसंयोजक बंध बनाकर हाइड्रोनियम आयन (H3O+) के रूप में स्थायी हो जाता है:
H+ + H2O → H3O+ (हाइड्रोनियम आयन)अतः अम्ल के जलीय विलयन में विद्युत चालन और अम्लीय गुण वस्तुतः H3O+ आयनों के कारण होते हैं।
क्षारक का व्यवहार: क्षारक जल में घुलकर सीधे हाइड्रॉक्साइड आयन देते हैं:
तनुकरण का आयन सांद्रता पर प्रभाव:
जब किसी अम्ल या क्षारक में अधिक जल मिलाया जाता है (तनुकरण), तो प्रति इकाई आयतन (per unit volume) में उपस्थित हाइड्रोनियम आयनों (H3O+) अथवा हाइड्रॉक्साइड आयनों (OH-) की सांद्रता घट जाती है। अम्ल का तनुकरण करने पर उसका pH मान 7 की ओर बढ़ता है, जबकि क्षारक का तनुकरण करने पर उसका pH मान 7 की ओर घटता है।
जब किसी लवण को जल में घोला जाता है, तो लवण के घटक आयनों की जल के आयनों (H+ तथा OH-) के साथ होने वाली पारस्परिक अंतःक्रिया को लवण का जल-अपघटन कहते हैं। इसके आधार पर तीन मुख्य स्थितियां बनती हैं:
- 1. उदासीन लवण (उदासीन विलयन, pH = 7):
जब लवण प्रबल अम्ल और प्रबल क्षारक का उत्पाद होता है (जैसे NaCl, KNO3, Na2SO4)। जल में इनके आयन (Na+, Cl-) जल के अणुओं को अपघटित नहीं करते। जल में [H+] = [OH-] का संतुलन बना रहता है, अतः विलयन उदासीन रहता है और लिटमस पर कोई प्रभाव नहीं डालता। - 2. अम्लीय लवण (अम्लीय विलयन, pH < 7):
जब लवण प्रबल अम्ल और दुर्बल क्षारक से बनता है (जैसे अमोनियम क्लोराइड NH4Cl, कॉपर सल्फेट CuSO4)। जल में इसका दुर्बल धनायन (NH4+) जल-अपघटित होकर अतिरिक्त H+ आयन छोड़ता है:NH4+(aq) + H2O(l) ⇌ NH4OH(aq) [दुर्बल क्षारक] + H+(aq) [प्रबल आयन]विलयन में [H+] > [OH-] होने से विलयन अम्लीय हो जाता है और नीले लिटमस को लाल कर देता है। - 3. क्षारीय लवण (क्षारीय विलयन, pH > 7):
जब लवण दुर्बल अम्ल और प्रबल क्षारक से बनता है (जैसे सोडियम कार्बोनेट Na2CO3, सोडियम एसीटेट CH3COONa)। इसका दुर्बल ऋणायन जल से क्रिया करके अतिरिक्त OH- आयन मुक्त करता है:CH3COO-(aq) + H2O(l) ⇌ CH3COOH(aq) [दुर्बल अम्ल] + OH-(aq) [प्रबल क्षारक]विलयन में [OH-] > [H+] होने के कारण विलयन क्षारीय हो जाता है और लाल लिटमस को नीला कर देता है।
क्रिस्टलन का जल: किसी लवण की नियमित क्रिस्टलीय संरचना को बनाए रखने के लिए उसके प्रति सूत्र इकाई में रासायनिक रूप से बंधे जल के अणुओं की निश्चित संख्या को क्रिस्टलन का जल कहते हैं। देखने में ये लवण पूर्णतः सूखे ठोस लगते हैं, परंतु गर्म करने पर ये जल त्याग देते हैं।
प्रमुख उदाहरण:
- जलयोजित कॉपर सल्फेट (नीला थोथा): CuSO4·5H2O (5 जल अणु)
- जलयोजित फेरस सल्फेट (हरा कसीस): FeSO4·7H2O (7 जल अणु)
- जिप्सम: CaSO4·2H2O (2 जल अणु)
- धावन सोडा: Na2CO3·10H2O (10 जल अणु)
प्रायोगिक क्रियाकलाप:
- विधि: एक पूर्णतः शुष्क (सूखी) क्वथन नली में नीले कॉपर सल्फेट के कुछ क्रिस्टल लेते हैं और बर्नर की लौ पर गर्म करते हैं।
- प्रेक्षण:
1. गर्म करने पर कॉपर सल्फेट के क्रिस्टलों का सुंदर नीला रंग उड़ जाता है और वे एक सफेद चूर्ण में बदल जाते हैं।
2. क्वथन नली के ठंडे ऊपरी भीतरी किनारों पर जल की सूक्ष्म बूंदें संघनित होकर जमा हो जाती हैं। - पुष्टि परीक्षण: जब इस श्वेत निर्जल चूर्ण पर ड्रॉपर से पुनः जल की 2-3 बूंदें डाली जाती हैं, तो जादुई रूप से उसका नीला रंग तुरंत वापस लौट आता है:
CuSO4·5H2O [नीला] ⇌ऊष्मा / +जल CuSO4 [सफेद] + 5H2O
निष्कर्ष: यह प्रयोग सिद्ध करता है कि क्रिस्टलों का नीला रंग और ज्यामितीय आकार उसमें उपस्थित क्रिस्टलन के जल के 5 अणुओं के कारण ही था।
प्रकृति में अनेक सजीवों ने शिकारियों से अपनी रक्षा करने हेतु जटिल रासायनिक प्रणालियां विकसित की हैं, जो उदासीनीकरण के सिद्धांतों पर कार्य करती हैं:
- 1. मधुमक्खी तथा लाल चींटी का डंक:
• रसायन: जब मधुमक्खी या चींटी काटती है, तो वह त्वचा के भीतर मेथेनोइक अम्ल (फॉर्मिक अम्ल / HCOOH) का अंतःक्षेपण कर देती है, जिससे त्वचा में असहनीय जलन, दर्द और सूजन आ जाती है।
• वैज्ञानिक उपचार: डंक वाले स्थान पर दुर्बल क्षारक जैसे बेकिंग सोडा (NaHCO3) अथवा कैलामाइन लोशन (ZnCO3) का पेस्ट लगाने से अम्ल तुरंत उदासीन हो जाता है और दर्द से तत्काल राहत मिलती है। - 2. ततैया (Wasp) का डंक:
• रसायन: ततैया का डंक मधुमक्खी के विपरीत क्षारीय तरल छोड़ता है।
• वैज्ञानिक उपचार: इसके डंक पर बेकिंग सोडा काम नहीं करता; बल्कि किसी दुर्बल अम्ल जैसे सिरका (एसिटिक अम्ल) अथवा नींबू का रस लगाने से क्षारक उदासीन होता है और आराम मिलता है। - 3. नेटल (बिच्छू बूटी) पादप:
• रसायन: पर्वतीय जंगलों में उगने वाले इस शाकीय पौधे की पत्तियों पर सूक्ष्म नुकीले डंकनुमा बाल होते हैं। अनजाने में छू जाने पर ये रोम त्वचा में मेथेनोइक अम्ल चुभो देते हैं जिससे अत्यधिक तेज जलन होती है।
• प्रकृति का संतुलन (डॉक पादप): कुदरत ने नेटल के पौधे के ठीक पास ही प्रायः डॉक (Dock) का पौधा उगाया होता है। डॉक की पत्तियों में क्षारीय रस होता है। नेटल के डंक वाले स्थान पर डॉक की पत्ती को रगड़ते ही अम्ल उदासीन हो जाता है और पीड़ा समाप्त हो जाती है।
अम्लीय वर्षा की परिभाषा: जब वायुमंडलीय प्रदूषण के कारण वर्षा के जल का pH मान 5.6 से कम हो जाता है, तो उसे अम्लीय वर्षा कहते हैं।
निर्माण की रासायनिक क्रियाविधि:
जीवाश्म ईंधनों (कोयला, पेट्रोलियम) के दहन तथा ताप विद्युत गृहों व वाहनों से भारी मात्रा में सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) तथा नाइट्रोजन के ऑक्साइड (NO2) वायुमंडल में उत्सर्जित होते हैं। ये गैसें वायुमंडलीय जलवाष्प और ऑक्सीजन से क्रिया करके सल्फ्यूरिक अम्ल तथा नाइट्रिक अम्ल बना लेती हैं:
विनाशकारी प्रभाव:
- 1. ऐतिहासिक स्मारकों का संक्षारण (मार्बल कैंसर): संगमरमर (CaCO3) से बने ताजमहल जैसे विश्व धरोहर स्मारक अम्लीय वर्षा के सल्फ्यूरिक अम्ल से क्रिया करके कैल्शियम सल्फेट में बदल रहे हैं, जिससे संगमरमर पीला पड़ रहा है और उसका क्षरण हो रहा है:
CaCO3 + H2SO4 → CaSO4 + H2O + CO2↑
- 2. जलीय जीवन का विनाश: अम्लीय वर्षा का जल जब नदियों और झीलों में जाता है, तो जल का pH स्तर अत्यधिक गिर जाता है। अम्लीय जल में मछलियों के अंडे नष्ट हो जाते हैं और मछलियां व जलीय जीव दम घुटने से मर जाते हैं।
- 3. मृदा एवं वनों की क्षति: अम्लीय वर्षा मिट्टी के पोषक तत्वों (कैल्शियम, मैग्नीशियम) को बहाकर नष्ट कर देती है तथा मिट्टी में उपस्थित विषाक्त भारी धातुओं (जैसे एल्युमीनियम) को घोल देती है, जिससे वनों के वृक्ष सूख जाते हैं और कृषि उपज घट जाती है।
चरणबद्ध वैज्ञानिक विश्लेषण एवं पहचान:
- निकलने वाली गैस 'B' जलती हुई मोमबत्ती को बुझा देती है (अग्निशामक गुण) तथा चूने के पानी को दूधिया कर देती है। यह सर्वविदित लाक्षणिक गुण केवल कार्बन डाइऑक्साइड गैस (CO2) का है। अतः गैस B = CO2 है।
- चूंकि अभिक्रिया में एक उत्पाद कैल्शियम क्लोराइड (CaCl2) बन रहा है और गैस CO2 निकल रही है, अतः प्रारंभिक धातु यौगिक 'A' अवश्य ही कैल्शियम का कार्बोनेट अथवा हाइड्रोजनकार्बोनेट होना चाहिए। सामान्यतः यह कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO3 / संगमरमर या चूना पत्थर) है।
संतुलित रासायनिक अभिक्रियाएं:
- मुख्य अभिक्रिया (यौगिक A और अम्ल की क्रिया):
CaCO3(s) [यौगिक A] + 2HCl(aq) → CaCl2(aq) + H2O(l) + CO2(g)↑ [गैस B]
- चूने के पानी के परीक्षण की अभिक्रिया:
Ca(OH)2(aq) [चूने का पानी] + CO2(g) → CaCO3(s)↓ [दूधिया अवक्षेप] + H2O(l)
अंतिम परिणाम:
• यौगिक A: कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO3)
• गैस B: कार्बन डाइऑक्साइड (CO2)।
साधारण नमक (सोडियम क्लोराइड / NaCl): समुद्र जल से प्राप्त साधारण नमक केवल भोजन का स्वाद बढ़ाने वाला घटक नहीं है, बल्कि यह अकार्बनिक भारी रासायनिक उद्योग (Inorganic Chemical Industry) की रीढ़ है। साधारण नमक से संश्लेषित होने वाले पाँच प्रमुख मूल्यवान रासायनिक पदार्थ निम्नलिखित हैं:
- 1. सोडियम हाइड्रॉक्साइड (कॉस्टिक सोडा / NaOH):
ब्राइन के विद्युत अपघटन (क्लोरो-क्षार प्रक्रम) से बनता है। इसका उपयोग साबुन, डिटर्जेंट, कृत्रिम रेशे (रेयान) और कागज उद्योग में लुगदी बनाने में किया जाता है। - 2. विरंजक चूर्ण (Bleaching Powder / CaOCl2):
नमक के विद्युत अपघटन से प्राप्त क्लोरीन गैस की शुष्क बुझे चूने पर क्रिया से बनता है। यह वस्त्र उद्योग में ब्लीचिंग एजेंट तथा पेयजल को कीटाणुमुक्त करने में प्रयुक्त होता है। - 3. बेकिंग सोडा (मीठा सोडा / NaHCO3):
साल्वे विधि में NaCl, जल, NH3 तथा CO2 से बनाया जाता है। यह बेकिंग पाउडर, पेट की अम्लता के एंटासिड तथा फोम अग्निशामकों का मुख्य घटक है। - 4. धावन सोडा (धोने का सोडा / Na2CO3·10H2O):
बेकिंग सोडा को गर्म कर पुनःक्रिस्टलीकरण से बनता है। यह कांच, साबुन, बोरेक्स उद्योग और जल की स्थायी कठोरता निवारण में प्रयुक्त होता है। - 5. हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl):
क्लोरो-क्षार प्रक्रम की उप-उत्पाद हाइड्रोजन और क्लोरीन गैसों के सीधे संयोजन से बनता है। इसका उपयोग इस्पात की सफाई, बॉयलर स्केलिंग हटाने तथा ग्लूकोज निर्माण में होता है।
निष्कर्ष: चूंकि आधुनिक रसायन विज्ञान के लगभग सभी दैनिक एवं औद्योगिक उत्पाद प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से NaCl से ही आरंभ होते हैं, अतः साधारण नमक को रसायनों का 'कच्चा माल भंडार' कहा जाता है।
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