BSEB Class 10 Science Solutions
अध्याय 2: अम्ल, क्षारक एवं लवण
अध्याय 2: अम्ल, क्षारक एवं लवण
(Acids, Bases, and Salts)
पाठगत (In-Text) एवं मुख्य अभ्यास प्रश्नों के पूर्ण, सटीक एवं रासायनिक समीकरण सहित हल
स्वागत है आपका! यदि आप बिहार बोर्ड (BSEB) कक्षा 10वीं के छात्र हैं और रसायन विज्ञान के अध्याय 2 – "अम्ल, क्षारक एवं लवण" के सभी पाठगत और अभ्यास प्रश्नों के संपूर्ण तथा आसान उत्तर खोज रहे हैं, तो यह विस्तृत मार्गदर्शिका आपके लिए तैयार की गई है। यहाँ सूचकों के रंग परिवर्तन, $\text{pH}$ मान, रासायनिक अभिक्रियाओं के संतुलित समीकरण तथा महत्वपूर्ण लवणों के निर्माण की विधियाँ प्रामाणिक रूप से प्रस्तुत की गई हैं।
🔬 दैनिक जीवन में उपयोगी महत्वपूर्ण रासायनिक लवण (Master Salts Sheet):
| व्यापारिक नाम | रासायनिक नाम | रासायनिक सूत्र (Chemical Formula) |
|---|---|---|
| विरंजक चूर्ण (Bleaching Powder) | कैल्शियम ऑक्सीक्लोराइड | CaOCl2 |
| बेकिंग सोडा (खाने का सोडा) | सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट | NaHCO3 |
| धोने का सोडा (Washing Soda) | सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट | Na2CO3·10H2O |
| प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) | कैल्शियम सल्फेट अर्ध-हाइड्रेट | CaSO4·½H2O |
| जिप्सम (Gypsum) | कैल्शियम सल्फेट डाइहाइड्रेट | CaSO4·2H2O |
pH स्केल का नियम:
📌 पृष्ठ संख्या 20 के प्रश्न (In-Text Questions)
प्रश्न 1
आपको तीन परखनलियाँ दी गई हैं। इनमें से एक में आसुत जल एवं शेष दो में से एक में अम्लीय विलयन तथा दूसरे में क्षारक विलयन है। यदि आपको केवल लाल लिटमस पत्र दिया गया है तो आप प्रत्येक परखनली में रखे गए पदार्थ की पहचान कैसे करेंगे?
उत्तर: केवल लाल लिटमस पत्र द्वारा तीनों परखनलियों की पहचान के चरण:
- दिए गए लाल लिटमस पत्र की कुछ पट्टियाँ लेकर तीनों परखनलियों में बारी-बारी से डुबोते हैं।
- क्षारक की पहचान: जिस परखनली में लाल लिटमस पत्र का रंग बदलकर नीला (Blue) हो जाता है, वह निश्चित रूप से क्षारक विलयन है (क्योंकि क्षारक लाल लिटमस को नीला कर देते हैं)।
- अब इस नीले हो चुके लिटमस पत्र को शेष बची दोनों परखनलियों के विलयनों में डालते हैं:
- अम्ल की पहचान: जिस परखनली में नीला लिटमस पत्र पुनः लाल (Red) हो जाता है, वह अम्लीय विलयन है।
- आसुत जल की पहचान: जिस परखनली में लिटमस पत्र के रंग में कोई परिवर्तन नहीं होता (नीला का नीला ही रहता है), वह आसुत जल है (क्योंकि शुद्ध जल उदासीन होता है)।
📌 पृष्ठ संख्या 23-24 के प्रश्न (In-Text Questions)
प्रश्न 1
पीतल एवं तांबे के बर्तनों में दही एवं खट्टे पदार्थ क्यों नहीं रखने चाहिए?
उत्तर:
- दही एवं अन्य खट्टे खाद्य पदार्थों में विभिन्न प्रकार के कार्बनिक अम्ल (जैसे दही में लैक्टिक अम्ल, नींबू में साइट्रिक अम्ल आदि) उपस्थित होते हैं।
- पीतल (कॉपर व जिंक की मिश्रधातु) और ताँबा (Cu) धातुएँ इन अम्लों के साथ रासायनिक अभिक्रिया करके विषैले धात्विक लवण (Toxic Metal Salts) और हाइड्रोजन गैस बनाती हैं।
- ये विषैले यौगिक भोजन को दूषित कर देते हैं, जिससे भोजन का स्वाद खराब हो जाता है और ऐसा भोजन ग्रहण करने पर फूड पॉइजनिंग (विषाक्तता) तथा स्वास्थ्य को गंभीर हानि हो सकती है।
प्रश्न 2
धातु के साथ अम्ल की अभिक्रिया होने पर, सामान्यतः कौन सी गैस निकलती है? एक उदाहरण के द्वारा समझाइए। इस गैस की जाँच आप कैसे करेंगे?
उत्तर:
- धातु की तनु अम्ल के साथ अभिक्रिया से सामान्यतः हाइड्रोजन गैस (H2) मुक्त होती है।
- उदाहरण: जब परखनली में दानेदार जिंक (Zn) पर तनु सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4) डाला जाता है, तो तीव्र बुदबुदाहट के साथ हाइड्रोजन गैस निकलती है:
Zn(s) + H2SO4(aq) → ZnSO4(aq) + H2(g)↑
- गैस की जाँच (पॉप टेस्ट / Pop Sound Test): जब निकलने वाली गैस के बुलबुलों के पास एक जलती हुई तीली या मोमबत्ती लाई जाती है, तो वह विशिष्ट 'पॉप' (फट-फट) की ध्वनि के साथ नीली लौ में जलती है। यह ध्वनि केवल हाइड्रोजन गैस की उपस्थिति की पुष्टि करती है।
प्रश्न 3
कोई धातु यौगिक 'A' तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया करता है तो बुदबुदाहट उत्पन्न होती है। इससे उत्पन्न गैस जलती हुई मोमबत्ती को बुझा देती है। यदि उत्पन्न यौगिकों में से एक कैल्सियम क्लोराइड है, तो इस अभिक्रिया के लिए संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए।
हल एवं व्याख्या:
- जलती हुई मोमबत्ती को बुझाने वाली और बुदबुदाहट पैदा करने वाली गैस कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) है।
- चूँकि बनने वाला मुख्य यौगिक कैल्सियम क्लोराइड (CaCl2) है, अतः धातु यौगिक 'A' निश्चित रूप से कैल्सियम कार्बोनेट (CaCO3) (संगमरमर/खड़िया) है।
CaCO3(s) + 2HCl(aq) → CaCl2(aq) + H2O(l) + CO2(g)↑
📌 पृष्ठ संख्या 26-27 के प्रश्न (In-Text Questions)
प्रश्न 1
HCl, HNO3 आदि जलीय विलयन में अम्लीय अभिलक्षण क्यों प्रदर्शित करते हैं, जबकि ऐल्कोहॉल एवं ग्लूकोस जैसे यौगिकों के जलीय विलयन में अम्लता के अभिलक्षण प्रदर्शित नहीं होते हैं?
उत्तर:
- अम्लीय अभिलक्षण विलयन में मुक्त हाइड्रोजन आयनों (H+) अथवा हाइड्रोनियम आयनों (H3O+) की उपस्थिति पर निर्भर करते हैं।
- HCl तथा HNO3 ध्रुवीय सहसंयोजी यौगिक हैं जो जल में घुलने पर पूरी तरह आयनित होकर प्रचुर H+(aq) आयन मुक्त करते हैं:
HCl + H2O → H3O+ + Cl-
- इसके विपरीत, ऐल्कोहॉल (C2H5OH) तथा ग्लूकोस (C6H12O6) के अणुओं में हाइड्रोजन उपस्थित होने पर भी वे जल में आयनित नहीं होते और H+ आयन पृथक नहीं करते। अतः वे अम्लीय गुण प्रदर्शित नहीं करते।
प्रश्न 2
अम्ल का जलीय विलयन क्यों विद्युत का चालन करता है?
उत्तर: द्रव माध्यम में विद्युत चालन हेतु मुक्त आवेशित कणों (आयनों) की उपस्थिति अनिवार्य होती है। जब अम्ल को जल में घोला जाता है, तो वह आयनित होकर धनायन (H3O+) तथा संबंधित ऋणायन (जैसे Cl-, SO42-) उत्पन्न करता है। ये मुक्त गतिशील आयन विलयन में विद्युत आवेश को एक इलेक्ट्रोड से दूसरे इलेक्ट्रोड तक ले जाते हैं, जिससे विद्युत का चालन होता है।
प्रश्न 3
शुष्क हाइड्रोक्लोरिक गैस शुष्क लिटमस पत्र के रंग को क्यों नहीं बदलती है?
उत्तर: लिटमस पत्र के रंग में परिवर्तन केवल स्वतंत्र हाइड्रोजन आयनों (H+) की उपस्थिति में ही संभव होता है।
हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से H+ आयनों का पृथक्करण केवल जल (नमी) की उपस्थिति में ही हो सकता है। शुष्क HCl गैस तथा शुष्क लिटमस पत्र दोनों में ही जल पूर्णतः अनुपस्थित होता है, अतः H+ आयन उत्पन्न नहीं होते और लिटमस पत्र के रंग में कोई परिवर्तन नहीं होता।
हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से H+ आयनों का पृथक्करण केवल जल (नमी) की उपस्थिति में ही हो सकता है। शुष्क HCl गैस तथा शुष्क लिटमस पत्र दोनों में ही जल पूर्णतः अनुपस्थित होता है, अतः H+ आयन उत्पन्न नहीं होते और लिटमस पत्र के रंग में कोई परिवर्तन नहीं होता।
प्रश्न 4
अम्ल को तनुकृत करते समय यह क्यों अनुशंसित करते हैं कि अम्ल को जल में मिलाना चाहिए, न कि जल को अम्ल में?
उत्तर: सांद्र अम्ल में जल का मिलना अत्यधिक ऊष्माक्षेपी (Highly Exothermic) प्रक्रिया है।
- यदि हम सांद्र अम्ल में जल डालते हैं, तो संपर्क बिंदु पर एकाएक अत्यधिक तीव्र ऊष्मा उत्पन्न होती है। इससे स्थानीय जल तुरंत वाष्प में बदलकर खौलने लगता है और अम्ल का तीक्ष्ण मिश्रण छलककर चेहरे, आँखों व हाथों पर गिर सकता है, जिससे गंभीर रासायनिक जलन हो सकती है। साथ ही अत्यधिक ऊष्मा से काँच का पात्र भी टूट सकता है।
- इसके विपरीत, जब पर्याप्त जल में लगातार हिलाते हुए सांद्र अम्ल की बूँद-बूँद धीरे-धीरे मिलाई जाती है, तो उत्पन्न ऊष्मा जल की विशाल मात्रा द्वारा तुरंत अवशोषित हो जाती है और कोई दुर्घटना नहीं होती।
प्रश्न 5
अम्ल के विलयन को तनुकृत करते समय हाइड्रोनियम आयन (H3O+) की सांद्रता कैसे प्रभावित होती है?
उत्तर: जब किसी अम्ल के विलयन में जल मिलाया जाता है (तनुकृत किया जाता है), तो प्रति इकाई आयतन में हाइड्रोनियम आयनों (H3O+) की संख्या घट जाती है। फलस्वरूप, H3O+ आयनों की सांद्रता में कमी आती है और अम्ल की शक्ति कम हो जाती है।
प्रश्न 6
जब सोडियम हाइड्रोक्साइड विलयन में अधिक क्षारक मिलाते हैं तो हाइड्रोक्साइड आयन (OH-) की सांद्रता कैसे प्रभावित होती है?
उत्तर: जब पहले से उपस्थित सोडियम हाइड्रोक्साइड (NaOH) विलयन में और अधिक क्षारक घोला जाता है, तो विलयन के प्रति इकाई आयतन में हाइड्रोक्साइड आयनों (OH-) की संख्या बढ़ जाती है। अतः OH- आयनों की सांद्रता में वृद्धि होती है।
📌 पृष्ठ संख्या 29-30 के प्रश्न (In-Text Questions)
प्रश्न 1
आपके पास दो विलयन 'A' एवं 'B' हैं। विलयन 'A' के pH का मान 6 है एवं विलयन 'B' के pH का मान 8 है। किस विलयन में हाइड्रोजन आयन की सांद्रता अधिक है? इनमें से कौन अम्लीय है तथा कौन क्षारीय?
हल एवं उत्तर:
- हम जानते हैं कि pH = -log[H+], अर्थात् pH मान जितना कम होगा, हाइड्रोजन आयन की सांद्रता उतनी ही अधिक होगी।
- हाइड्रोजन आयन सांद्रता: विलयन 'A' (pH = 6) में हाइड्रोजन आयन (H+) की सांद्रता विलयन 'B' (pH = 8) की तुलना में 100 गुना अधिक है।
- प्रकृति:
- विलयन 'A' (pH = 6 < 7) अम्लीय (Acidic) है।
- विलयन 'B' (pH = 8 > 7) क्षारकीय (Basic) है।
प्रश्न 2
H+(aq) आयनों की सांद्रता का विलयन की प्रकृति पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर: H+(aq) आयनों की सांद्रता सीधे विलयन की अम्लीय तीव्रता को निर्धारित करती है:
- यदि [H+] > 10-7 M (सांद्रता अधिक), तो विलयन अम्लीय होता है और pH मान 7 से कम होता है। सांद्रता जितनी अधिक होगी, अम्ल उतना ही प्रबल होगा।
- यदि [H+] = 10-7 M, तो विलयन उदासीन होता है (pH = 7)।
- यदि [H+] < 10-7 M (सांद्रता कम), तो विलयन क्षारकीय होता है और pH मान 7 से अधिक होता है।
प्रश्न 3
क्या क्षारीय विलयन में H+(aq) आयन होते हैं? यदि हाँ, तो यह क्षारीय क्यों होता है?
उत्तर: हाँ, क्षारीय विलयन में भी H+(aq) आयन उपस्थित होते हैं।
क्षारीय होने का कारण: जल के स्वतः आयनीकरण ([H+][OH-] = 10-14) के कारण प्रत्येक जलीय घोल में दोनों आयन होते हैं। क्षारीय विलयनों में हाइड्रोक्साइड आयनों (OH-) की सांद्रता हाइड्रोजन आयनों (H+) की तुलना में अत्यधिक अधिक ([OH-] >> [H+]) होती है। OH- आयनों के इस भारी आधिक्य के कारण ही विलयन का व्यवहार क्षारीय होता है।
क्षारीय होने का कारण: जल के स्वतः आयनीकरण ([H+][OH-] = 10-14) के कारण प्रत्येक जलीय घोल में दोनों आयन होते हैं। क्षारीय विलयनों में हाइड्रोक्साइड आयनों (OH-) की सांद्रता हाइड्रोजन आयनों (H+) की तुलना में अत्यधिक अधिक ([OH-] >> [H+]) होती है। OH- आयनों के इस भारी आधिक्य के कारण ही विलयन का व्यवहार क्षारीय होता है।
प्रश्न 4
कोई किसान खेत की मृदा की किस परिस्थिति में बिना बुझे हुए चूने (CaO), बुझे हुए चूने [Ca(OH)2], या खड़िया (CaCO3) का उपयोग करेगा?
उत्तर: जब अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग अथवा अम्लीय वर्षा के कारण खेत की मिट्टी बहुत अधिक अम्लीय हो जाती है (अर्थात् मृदा का pH मान 6.5 से काफी नीचे गिर जाता है), तब किसान चूने का प्रयोग करता है।
कैल्शियम ऑक्साइड, कैल्शियम हाइड्रोक्साइड तथा चाक सभी क्षारकीय पदार्थ हैं। ये मृदा में उपस्थित अतिरिक्त अम्लों को उदासीन करके मृदा के pH को फसलों की वृद्धि हेतु आदर्श स्तर (pH 6.5 से 7.5) पर ले आते हैं।
कैल्शियम ऑक्साइड, कैल्शियम हाइड्रोक्साइड तथा चाक सभी क्षारकीय पदार्थ हैं। ये मृदा में उपस्थित अतिरिक्त अम्लों को उदासीन करके मृदा के pH को फसलों की वृद्धि हेतु आदर्श स्तर (pH 6.5 से 7.5) पर ले आते हैं।
📌 पृष्ठ संख्या 36 के प्रश्न (In-Text Questions)
प्रश्न 1
CaOCl2 यौगिक का प्रचलित नाम क्या है?
उत्तर: CaOCl2 का प्रचलित व्यावसायिक नाम विरंजक चूर्ण (Bleaching Powder) है। इसका रासायनिक नाम कैल्शियम ऑक्सीक्लोराइड है।
प्रश्न 2
उस पदार्थ का नाम बताइए जो क्लोरीन से क्रिया करके विरंजक चूर्ण बनाता है?
उत्तर: शुष्क बुझा हुआ चूना [कैल्शियम हाइड्रोक्साइड — Ca(OH)2]।
अभिक्रिया:
अभिक्रिया:
Ca(OH)2 + Cl2 → CaOCl2 + H2O
प्रश्न 3
कठोर जल को मृदु करने के लिए किस सोडियम यौगिक का उपयोग किया जाता है?
उत्तर: कठोर जल की स्थायी कठोरता दूर करने के लिए धोने का सोडा (Washing Soda / सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट — Na2CO3·10H2O) का उपयोग किया जाता है।
प्रश्न 4
सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट के विलयन को गर्म करने पर क्या होगा? इस अभिक्रिया के लिए समीकरण लिखिए।
उत्तर: जब सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट (बेकिंग सोडा) को गर्म किया जाता है, तो इसका ऊष्मीय वियोजन हो जाता है, जिससे सोडियम कार्बोनेट, जल तथा कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) गैस बनती है:
2NaHCO3(s) —ऊष्मा (Δ)→ Na2CO3(s) + H2O(l) + CO2(g)↑
प्रश्न 5
प्लास्टर ऑफ़ पेरिस की जल के साथ अभिक्रिया के लिए समीकरण लिखिए।
उत्तर: जब सफेद चूर्ण प्लास्टर ऑफ पेरिस को जल के साथ मिलाया जाता है, तो यह जल के अणुओं को जोड़कर लगभग 10-15 मिनट में एक कठोर ठोस पदार्थ जिप्सम में परिवर्तित हो जाता है:
CaSO4·½H2O + 1½H2O → CaSO4·2H2O (जिप्सम - कठोर ठोस)
📌 पाठ के अंत में दिए गए अभ्यास प्रश्न (Textbook Exercises)
प्रश्न 1
कोई विलयन लाल लिटमस को नीला कर देता है, इसका pH सम्भवतः क्या होगा?
✅ उत्तर: (d) 10
(लाल लिटमस को नीला करने वाला विलयन क्षारक होता है, और क्षारकों का pH मान सदैव 7 से अधिक होता है।)
(लाल लिटमस को नीला करने वाला विलयन क्षारक होता है, और क्षारकों का pH मान सदैव 7 से अधिक होता है।)
प्रश्न 2
कोई विलयन अण्डे के पिसे हुए कवच से अभिक्रिया कर एक गैस उत्पन्न करता है जो चूने के पानी को दूधिया कर देती है। इस विलयन में क्या होगा?
✅ उत्तर: (b) HCl (हाइड्रोक्लोरिक अम्ल)
(अण्डे का कवच मुख्य रूप से CaCO3 का बना होता है। यह HCl अम्ल से क्रिया करके CO2 गैस बनाता है जो चूने के पानी को दूधिया कर देती है।)
(अण्डे का कवच मुख्य रूप से CaCO3 का बना होता है। यह HCl अम्ल से क्रिया करके CO2 गैस बनाता है जो चूने के पानी को दूधिया कर देती है।)
प्रश्न 3
NaOH का 10 mL विलयन, HCl के 8 mL विलयन से पूर्णतः उदासीन हो जाता है। यदि हम NaOH के उसी विलयन का 20 mL लें तो इसे उदासीन करने के लिए HCl के उसी विलयन की कितनी मात्रा की आवश्यकता होगी?
✅ उत्तर: (d) 16 mL
(10 mL NaOH उदासीन करता है = 8 mL HCl; अतः 20 mL NaOH उदासीन करेगा = (8/10) × 20 = 16 mL HCl)
(10 mL NaOH उदासीन करता है = 8 mL HCl; अतः 20 mL NaOH उदासीन करेगा = (8/10) × 20 = 16 mL HCl)
प्रश्न 4
अपच (Indigestion) का उपचार करने के लिए निम्न में से किस औषधि का उपयोग होता है?
✅ उत्तर: (c) ऐन्टैसिड (Antacid)
(ऐन्टैसिड जैसे मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड या मिल्क ऑफ मैग्नीशिया आमाशय के अतिरिक्त अम्ल को उदासीन कर राहत पहुँचाते हैं।)
(ऐन्टैसिड जैसे मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड या मिल्क ऑफ मैग्नीशिया आमाशय के अतिरिक्त अम्ल को उदासीन कर राहत पहुँचाते हैं।)
प्रश्न 5
निम्न अभिक्रियाओं के लिए पहले शब्द-समीकरण लिखिए तथा उसके बाद संतुलित समीकरण लिखिए:
(a) तनु सल्फ्यूरिक अम्ल दानेदार जिंक के साथ अभिक्रिया करता है:
- शब्द-समीकरण: जिंक + सल्फ्यूरिक अम्ल → जिंक सल्फेट + हाइड्रोजन
- संतुलित समीकरण:
Zn(s) + H2SO4(aq) → ZnSO4(aq) + H2(g)↑
(b) तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल मैग्नीशियम पट्टी के साथ अभिक्रिया करता है:
- शब्द-समीकरण: मैग्नीशियम + हाइड्रोक्लोरिक अम्ल → मैग्नीशियम क्लोराइड + हाइड्रोजन
- संतुलित समीकरण:
Mg(s) + 2HCl(aq) → MgCl2(aq) + H2(g)↑
(c) तनु सल्फ्यूरिक अम्ल ऐलुमिनियम चूर्ण के साथ अभिक्रिया करता है:
- शब्द-समीकरण: ऐलुमिनियम + सल्फ्यूरिक अम्ल → ऐलुमिनियम सल्फेट + हाइड्रोजन
- संतुलित समीकरण:
2Al(s) + 3H2SO4(aq) → Al2(SO4)3(aq) + 3H2(g)↑
(d) तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल लौह के छीलन (आयरन) के साथ अभिक्रिया करता है:
- शब्द-समीकरण: आयरन + हाइड्रोक्लोरिक अम्ल → आयरन(II) क्लोराइड + हाइड्रोजन
- संतुलित समीकरण:
Fe(s) + 2HCl(aq) → FeCl2(aq) + H2(g)↑
प्रश्न 6
ऐल्कोहॉल एवं ग्लूकोस जैसे यौगिकों में भी हाइड्रोजन होते हैं लेकिन इनका वर्गीकरण अम्ल की तरह नहीं होता है। एक क्रियाकलाप द्वारा इसे साबित कीजिए।
उत्तर: प्रायोगिक क्रियाकलाप:
- एक बीकर में एक रबर कॉर्क पर दो लोहे की कीलें लगाकर उन्हें 6 वोल्ट की बैटरी, एक बल्ब तथा एक स्विच के साथ श्रेणीक्रम में जोड़ते हैं।
- बीकर में थोड़ा तनु HCl डालकर स्विच ऑन करते हैं; हम देखते हैं कि बल्ब जल उठता है, क्योंकि अम्ल आयनों में टूटकर विद्युत चालन करता है।
- अब बीकर को धोकर उसमें बारी-बारी से ग्लूकोस (C6H12O6) तथा ऐल्कोहॉल (C2H5OH) का जलीय घोल डालते हैं और स्विच चालू करते हैं।
- प्रेक्षण: दोनों ही स्थितियों में बल्ब नहीं जलता।
- निष्कर्ष: ग्लूकोस और ऐल्कोहॉल के जलीय विलयन में हाइड्रोजन होने पर भी वे H+ आयनों में वियोजित नहीं होते हैं। चूँकि अम्ल का मूल लक्षण H+ आयन देना है, अतः इन्हें अम्लों के रूप में वर्गीकृत नहीं किया जा सकता।
प्रश्न 7
आसुत जल विद्युत का चालन क्यों नहीं करता जबकि वर्षा जल करता है?
उत्तर:
- आसुत जल (Distilled Water): यह जल का विशुद्धतम रूप है जिसमें कोई भी विलेय लवण या खनिज अशुद्धियाँ उपस्थित नहीं होती हैं। आयनों के पूर्ण अभाव के कारण आसुत जल विद्युत का कुचालक होता है।
- वर्षा का जल: जब वर्षा की बूँदें वायुमंडल से होकर गिरती हैं, तो वायु में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड (CO2), सल्फर डाइऑक्साइड आदि गैसें इसमें घुल जाती हैं। CO2 जल से क्रिया करके दुर्बल कार्बोनिक अम्ल बनाती है:
H2O + CO2 ↔ H2CO3 ↔ H+ + HCO3-इन मुक्त आयनों (H+, HCO3-) की उपस्थिति के कारण वर्षा जल विद्युत का सुचालक बन जाता है।
प्रश्न 8
जल की अनुपस्थिति में अम्ल का व्यवहार अम्लीय क्यों नहीं होता है?
उत्तर: किसी भी अम्ल का अम्लीय व्यवहार उसमें से हाइड्रोजन आयन (H+) के वियोजन के कारण ही प्रकट होता है।
अम्ल के अणु से H+ आयन का पृथक्करण केवल जल के अणुओं के प्रबल आकर्षण के कारण ही संभव हो पाता है, जहाँ H+ जल से जुड़कर हाइड्रोनियम आयन (H3O+) बना लेता है:
अम्ल के अणु से H+ आयन का पृथक्करण केवल जल के अणुओं के प्रबल आकर्षण के कारण ही संभव हो पाता है, जहाँ H+ जल से जुड़कर हाइड्रोनियम आयन (H3O+) बना लेता है:
HCl + H2O → H3O+ + Cl-
जल की अनुपस्थिति में अम्ल आयनित नहीं हो पाता और H+ आयन मुक्त नहीं होते। अतः जल के बिना अम्ल का व्यवहार अम्लीय नहीं होता।
प्रश्न 9
पाँच विलयनों A, B, C, D व E की जब सार्वत्रिक सूचक से जाँच की जाती है तो pH के मान क्रमशः 4, 1, 11, 7 एवं 9 प्राप्त होते हैं। कौन सा विलयन: (a) उदासीन है? (b) प्रबल क्षारीय है? (c) प्रबल अम्लीय है? (d) दुर्बल अम्लीय है? (e) दुर्बल क्षारीय है? pH मानों को H+ आयन सांद्रता के आरोही क्रम में लिखिए।
उत्तर:
चूँकि pH मान जितना अधिक होता है, उसमें H+ आयन की सांद्रता उतनी ही कम होती है, अतः बढ़ता हुआ क्रम होगा:
- (a) उदासीन विलयन: विलयन D (pH = 7)
- (b) प्रबल क्षारीय विलयन: विलयन C (pH = 11)
- (c) प्रबल अम्लीय विलयन: विलयन B (pH = 1)
- (d) दुर्बल अम्लीय विलयन: विलयन A (pH = 4)
- (e) दुर्बल क्षारीय विलयन: विलयन E (pH = 9)
चूँकि pH मान जितना अधिक होता है, उसमें H+ आयन की सांद्रता उतनी ही कम होती है, अतः बढ़ता हुआ क्रम होगा:
C (pH 11) < E (pH 9) < D (pH 7) < A (pH 4) < B (pH 1)
प्रश्न 10
परखनली 'A' एवं 'B' में समान लंबाई की मैग्नीशियम की पट्टी लीजिए। परखनली 'A' में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) तथा परखनली 'B' में ऐसीटिक अम्ल (CH3COOH) डालिए। दोनों अम्लों की मात्रा तथा सांद्रता समान है। किस परखनली में अधिक तेजी से बुदबुदाहट होगी तथा क्यों?
उत्तर: परखनली 'A' में अधिक तीव्र गति से और जोरदार बुदबुदाहट होगी।
वैज्ञानिक कारण:
वैज्ञानिक कारण:
- हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) एक प्रबल अम्ल (Strong Acid) है जो जलीय विलयन में पूर्णतः आयनित होकर अत्यंत उच्च सांद्रता में H+ आयन मुक्त करता है।
- ऐसीटिक अम्ल (CH3COOH) एक दुर्बल अम्ल (Weak Acid) है जो केवल आंशिक रूप से आयनित होता है और कम H+ आयन देता है।
- उच्च H+ सांद्रता के कारण परखनली 'A' में मैग्नीशियम धातु के साथ अभिक्रिया की दर बहुत तीव्र होगी और हाइड्रोजन गैस (H2) बहुत तेजी से मुक्त होगी, जिससे तीव्र बुदबुदाहट उत्पन्न होगी।
प्रश्न 11
ताजे दूध के pH का मान 6 होता है। दही बन जाने पर इसके pH के मान में क्या परिवर्तन होगा? अपने उत्तर को समझाइए।
उत्तर: दही बन जाने पर इसके pH का मान घट जाएगा (अर्थात् pH < 6 हो जाएगा)।
कारण: जब दूध का किण्वन होकर दही बनता है, तो लैक्टोबैसिलस जीवाणु दूध में उपस्थित लैक्टोज शर्करा को लैक्टिक अम्ल (Lactic Acid) में परिवर्तित कर देते हैं। इस अम्ल के बनने से घोल में मुक्त H+ आयनों की सांद्रता बढ़ जाती है, जिससे अम्लता बढ़ती है और pH मान 6 से गिरकर लगभग 4.5 – 5 के बीच आ जाता है।
कारण: जब दूध का किण्वन होकर दही बनता है, तो लैक्टोबैसिलस जीवाणु दूध में उपस्थित लैक्टोज शर्करा को लैक्टिक अम्ल (Lactic Acid) में परिवर्तित कर देते हैं। इस अम्ल के बनने से घोल में मुक्त H+ आयनों की सांद्रता बढ़ जाती है, जिससे अम्लता बढ़ती है और pH मान 6 से गिरकर लगभग 4.5 – 5 के बीच आ जाता है।
प्रश्न 12
एक ग्वाला ताजे दूध में थोड़ा बेकिंग सोडा मिलाता है: (a) दूध के pH को 6 से थोड़ा क्षारीय क्यों करता है? (b) दही बनने में अधिक समय क्यों लगता है?
उत्तर:
(a) दूध को थोड़ा क्षारीय बनाने का कारण:
ताजा दूध वातावरण में उपस्थित जीवाणुओं द्वारा लैक्टिक अम्ल बनने के कारण कुछ ही घंटों में खट्टा होकर फट जाता है। थोड़ा क्षारीय बेकिंग सोडा (NaHCO3) मिलाने से दूध का pH 6 से बढ़कर 7 से अधिक हो जाता है। यह क्षार बनने वाले प्रारंभिक लैक्टिक अम्ल को उदासीन करता रहता है, जिससे दूध लंबे समय तक फटने से सुरक्षित रहता है।
(b) दही बनने में अधिक समय लगने का कारण:
दूध को दही में जमने के लिए एक निश्चित अम्लीय माध्यम की आवश्यकता होती है। जब दूध में बेकिंग सोडा मिला होता है, तो लैक्टोबैसिलस द्वारा उत्पादित प्रारंभिक अम्ल पहले दूध में मौजूद क्षार (बेकिंग सोडा) को उदासीन करने में व्यय होता है। जब सारा क्षार समाप्त हो जाता है, उसके बाद ही दूध अम्लीय होकर दही में जमता है, इसलिए इस प्रक्रिया में सामान्य से अधिक समय लगता है।
(a) दूध को थोड़ा क्षारीय बनाने का कारण:
ताजा दूध वातावरण में उपस्थित जीवाणुओं द्वारा लैक्टिक अम्ल बनने के कारण कुछ ही घंटों में खट्टा होकर फट जाता है। थोड़ा क्षारीय बेकिंग सोडा (NaHCO3) मिलाने से दूध का pH 6 से बढ़कर 7 से अधिक हो जाता है। यह क्षार बनने वाले प्रारंभिक लैक्टिक अम्ल को उदासीन करता रहता है, जिससे दूध लंबे समय तक फटने से सुरक्षित रहता है।
(b) दही बनने में अधिक समय लगने का कारण:
दूध को दही में जमने के लिए एक निश्चित अम्लीय माध्यम की आवश्यकता होती है। जब दूध में बेकिंग सोडा मिला होता है, तो लैक्टोबैसिलस द्वारा उत्पादित प्रारंभिक अम्ल पहले दूध में मौजूद क्षार (बेकिंग सोडा) को उदासीन करने में व्यय होता है। जब सारा क्षार समाप्त हो जाता है, उसके बाद ही दूध अम्लीय होकर दही में जमता है, इसलिए इस प्रक्रिया में सामान्य से अधिक समय लगता है।
प्रश्न 13
प्लास्टर ऑफ़ पेरिस को आर्द्र-रोधी बर्तन में क्यों रखना चाहिए? इसकी व्याख्या कीजिए।
उत्तर: प्लास्टर ऑफ पेरिस (CaSO4·½H2O) नमी के प्रति अत्यधिक सुग्राही होता है।
यदि इसे खुले या नमीयुक्त बर्तन में रखा जाए, तो यह वायुमंडल से जलवाष्प (नमी) को तुरंत अवशोषित करके जिप्सम (CaSO4·2H2O) नामक अत्यंत कठोर ठोस पत्थर में बदल जाता है:
यदि इसे खुले या नमीयुक्त बर्तन में रखा जाए, तो यह वायुमंडल से जलवाष्प (नमी) को तुरंत अवशोषित करके जिप्सम (CaSO4·2H2O) नामक अत्यंत कठोर ठोस पत्थर में बदल जाता है:
CaSO4·½H2O (POP) + 1½H2O → CaSO4·2H2O (जिप्सम)
एक बार जिप्सम बन जाने पर इसका जमने का विशेष गुण समाप्त हो जाता है और यह सांचे व मूर्तियाँ बनाने या टूटी हड्डियों को जोड़ने के अयोग्य हो जाता है। अतः इसे सुरक्षित रखने हेतु आर्द्र-रोधी (Moisture-proof) डिब्बों में रखा जाता है।
प्रश्न 14
उदासीनीकरण अभिक्रिया क्या है? दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर: उदासीनीकरण अभिक्रिया (Neutralisation Reaction):
जब कोई अम्ल किसी क्षारक के साथ परस्पर अभिक्रिया करता है, तो वे एक-दूसरे के अम्लीय व क्षारकीय गुणों को समाप्त करके लवण (Salt) तथा जल (Water) का निर्माण करते हैं। इस अभिक्रिया को उदासीनीकरण अभिक्रिया कहते हैं:
जब कोई अम्ल किसी क्षारक के साथ परस्पर अभिक्रिया करता है, तो वे एक-दूसरे के अम्लीय व क्षारकीय गुणों को समाप्त करके लवण (Salt) तथा जल (Water) का निर्माण करते हैं। इस अभिक्रिया को उदासीनीकरण अभिक्रिया कहते हैं:
अम्ल + क्षारक → लवण + जल + ऊष्मा
प्रमुख उदाहरण:
- सोडियम हाइड्रोक्साइड की हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया:
NaOH(aq) + HCl(aq) → NaCl(aq) + H2O(l)
- पोटैशियम हाइड्रोक्साइड की नाइट्रिक अम्ल के साथ अभिक्रिया:
KOH(aq) + HNO3(aq) → KNO3(aq) + H2O(l)
प्रश्न 15
धोने का सोडा एवं बेकिंग सोडा के दो-दो प्रमुख उपयोग बताइए।
1. धोने का सोडा (सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट — Na2CO3·10H2O) के उपयोग:
- काँच, साबुन एवं कागज उद्योगों में प्रमुख कच्चे माल के रूप में।
- जल की स्थायी कठोरता को दूर करने तथा घरेलू साफ-सफाई (अपमार्जक के रूप में) में।
2. बेकिंग सोडा (सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट — NaHCO3) के उपयोग:
- बेकिंग पाउडर बनाने में: इसे टार्टरिक अम्ल के साथ मिलाकर बेकिंग पाउडर बनाते हैं, जो ब्रेड एवं केक को फुलाकर स्पंजी और मुलायम बनाता है।
- ऐन्टैसिड एवं अग्निशामक में: पेट की अम्लता दूर करने हेतु औषधि के रूप में तथा सोडा-अम्ल अग्निशामक यंत्रों में CO2 गैस उत्पन्न कर आग बुझाने में।
💡 बिहार बोर्ड परीक्षा उपयोगी टिप: इस अध्याय से विरंजक चूर्ण, बेकिंग सोडा, धोने का सोडा और प्लास्टर ऑफ पेरिस के रासायनिक नाम, सूत्र व उपयोग से 5 अंक के दीर्घ उत्तरीय प्रश्न प्रतिवर्ष पूछे जाते हैं। साथ ही pH मान एवं लिटमस पत्र के रंग परिवर्तन पर आधारित प्रश्नों का अभ्यास अनिवार्य रूप से करें!
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