बिहार बोर्ड कक्षा 10 गणित: अध्याय 1 – वास्तविक संख्याएँ (Real Numbers)
संपूर्ण रिवीजन नोट्स, सूत्र संग्रह, 50 वस्तुनिष्ठ (One Liner), 25 लघु उत्तरीय एवं 15 दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
अध्याय परिचय एवं महत्त्वपूर्ण सूत्र संग्रह
बिहार बोर्ड (BSEB) मैट्रिक गणित परीक्षा में अध्याय 1: वास्तविक संख्याएँ (Real Numbers) संख्या पद्धति (Number System) का आधार है। परिमेय संख्याओं और अपरिमेय संख्याओं के संपूर्ण संग्रह को वास्तविक संख्याएँ (Real Numbers) कहते हैं। इस अध्याय से वस्तुनिष्ठ, लघु और दीर्घ उत्तरीय मिलाकर लगभग 10 अंक के प्रश्न प्रतिवर्ष पूछे जाते हैं।
1. यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका (Euclid's Division Lemma):
दो धनात्मक पूर्णांक a और b दिए रहने पर, ऐसी अद्वितीय पूर्ण संख्याएँ q और r विद्यमान हैं कि:
a = bq + r, जहाँ 0 ≤ r < b
यहाँ a = भाज्य (Dividend), b = भाजक (Divisor), q = भागफल (Quotient) तथा r = शेषफल (Remainder) है।
2. अंकगणित की आधारभूत प्रमेय (Fundamental Theorem of Arithmetic):
प्रत्येक भाज्य संख्या को अभाज्य संख्याओं के एक गुणनफल के रूप में व्यक्त (गुणनखंडित) किया जा सकता है, तथा यह गुणनखंडन अभाज्य गुणनखंडों के आने वाले क्रम के बिना अद्वितीय होता है।
3. ल.स.प. (LCM) और म.स.प. (HCF) में संबंध:
किन्हीं दो धनात्मक पूर्णांकों a और b के लिए:
HCF(a, b) × LCM(a, b) = a × b (दो संख्याओं का गुणनफल)
⇒ HCF(a, b) = (a × b) / LCM(a, b)
⇒ LCM(a, b) = (a × b) / HCF(a, b)
4. परिमेय संख्याओं का दशमलव प्रसार:
माना x = p/q एक परिमेय संख्या है, जहाँ p और q सह-अभाज्य पूर्णांक हैं (q ≠ 0):
- यदि हर q का अभाज्य गुणनखंडन 2n × 5m के रूप का है (जहाँ n, m अऋणात्मक पूर्णांक हैं), तो x का दशमलव प्रसार सांत (Terminating) होता है।
- यदि हर q का अभाज्य गुणनखंडन 2n × 5m के रूप का नहीं है (अर्थात् 2 और 5 के अतिरिक्त कोई अन्य अभाज्य संख्या जैसे 3, 7, 11 आदि आए), तो x का दशमलव प्रसार अशांत आवर्ती (Non-terminating Repeating) होता है।
- अपरिमेय संख्याओं का दशमलव प्रसार सदैव अशांत अनावर्ती (Non-terminating Non-repeating) होता है।
भाग 1: 50 वस्तुनिष्ठ / एक पंक्ति प्रश्नोत्तर (One Liner Q&A)
भाग 2: 25 लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (2 अंक वाले)
यहाँ 225 > 135 है।
चरण 1: 225 = 135 × 1 + 90 (चूंकि शेषफल 90 ≠ 0)
चरण 2: 135 = 90 × 1 + 45 (चूंकि शेषफल 45 ≠ 0)
चरण 3: 90 = 45 × 2 + 0
यहाँ शेषफल 0 प्राप्त हो गया और इस चरण का भाजक 45 है।
अतः HCF(135, 225) = 45.
867 > 255.
867 = 255 × 3 + 102
255 = 102 × 2 + 51
102 = 51 × 2 + 0
अंतिम भाजक 51 है। अतः HCF(867, 255) = 51.
140 = 2 × 70
= 2 × 2 × 35
= 2 × 2 × 5 × 7 = 22 × 5 × 7.
156 = 2 × 78
= 2 × 2 × 39
= 2 × 2 × 3 × 13 = 22 × 3 × 13.
96 = 25 × 3
404 = 22 × 101
HCF(96, 404) = 22 = 4.
हम जानते हैं: LCM = (a × b) / HCF
LCM(96, 404) = (96 × 404) / 4 = 96 × 101 = 9696.
सूत्र: LCM × HCF = दोनों संख्याओं का गुणनफल
LCM(306, 657) = (306 × 657) / HCF(306, 657)
= (306 × 657) / 9 = 34 × 657 = 22,338.
यदि कोई संख्या अंक 0 पर समाप्त होना चाहती है, तो उसके अभाज्य गुणनखंडन में 2 और 5 दोनों का होना अनिवार्य है (अर्थात् 2 × 5 = 10 रूप)।
यहाँ 6n = (2 × 3)n = 2n × 3n.
6n के अभाज्य गुणनखंडों में केवल 2 और 3 हैं, 5 नहीं है।
अतः अंकगणित की आधारभूत प्रमेय की अद्वितीयता के अनुसार, ऐसी कोई प्राकृत संख्या n नहीं है जिसके लिए 6n अंक 0 पर समाप्त हो सके।
7 × 11 × 13 + 13 = 13 × (7 × 11 + 1)
= 13 × (77 + 1) = 13 × 78 = 13 × (2 × 3 × 13)
चूंकि दी गई संख्या को 1 और स्वयं के अतिरिक्त अन्य अभाज्य गुणनखंडों (2, 3, 13) के गुणनफल के रूप में व्यक्त किया जा सकता है, अतः यह एक भाज्य संख्या है।
यदि संभव हो तो माना कि 3 + 2√5 एक परिमेय संख्या r है।
3 + 2√5 = r ⇒ 2√5 = r - 3 ⇒ √5 = (r - 3) / 2.
चूंकि r परिमेय है, अतः (r - 3)/2 भी एक परिमेय संख्या होगी।
इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि √5 एक परिमेय संख्या है, जो कि इस सर्वमान्य तथ्य का विरोधाभास है कि √5 एक अपरिमेय संख्या है।
अतः हमारी कल्पना असत्य है। अतः 3 + 2√5 एक अपरिमेय संख्या है।
माना x = 0.6666... ...(1)
दोनों पक्षों में 10 से गुणा करने पर:
10x = 6.6666... ...(2)
समीकरण (2) में से (1) घटाने पर:
9x = 6 ⇒ x = 6/9 = 2/3.
माना x = 0.4777... ...(1)
10 से गुणा करने पर: 10x = 4.777... ...(2)
100 से गुणा करने पर: 100x = 47.777... ...(3)
(3) में से (2) घटाने पर: 90x = 43 ⇒ x = 43/90.
हर 3125 का अभाज्य गुणनखंडन:
3125 = 5 × 5 × 5 × 5 × 5 = 55 = 20 × 55.
चूंकि हर का गुणनखंड 2n × 5m के रूप का है, अतः इसका दशमलव प्रसार सांत (Terminating) है।
हर 455 = 5 × 7 × 13.
चूंकि हर के गुणनखंड में 5 के अतिरिक्त 7 और 13 भी उपस्थित हैं (यह 2n × 5m रूप का नहीं है), अतः इसका दशमलव प्रसार अशांत आवर्ती है।
12 = 22 × 3
15 = 3 × 5
21 = 3 × 7
HCF = उभयनिष्ठ न्यूनतम घात = 31 = 3.
LCM = सभी गुणनखंडों की अधिकतम घात = 22 × 3 × 5 × 7 = 4 × 3 × 5 × 7 = 420.
माना 1/√2 एक परिमेय संख्या a/b है (जहाँ a, b सह-अभाज्य पूर्णांक हैं, b ≠ 0)।
व्युत्क्रम करने पर: √2 = b/a.
चूंकि b और a पूर्णांक हैं, अतः b/a एक परिमेय संख्या है।
इससे सिद्ध होता है कि √2 एक परिमेय संख्या है, जो कि सर्वविदित असत्य है।
अतः 1/√2 एक अपरिमेय संख्या है।
पुनः मिलने का समय = LCM(18, 12).
18 = 2 × 32
12 = 22 × 3
LCM = 22 × 32 = 4 × 9 = 36 मिनट.
अतः वे 36 मिनट बाद पुनः प्रारंभिक स्थान पर मिलेंगे।
17/8 = 17 / 23 = (17 × 53) / (23 × 53)
= (17 × 125) / 103 = 2125 / 1000 = 2.125.
35/50 = 7/10 = 0.7.
यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका से a = bq + r. यहाँ b = 2 लेने पर r = 0 या 1.
यदि r = 0, तो a = 2q (जो 2 से विभाज्य है, अतः सम है)।
यदि r = 1, तो a = 2q + 1 (जो 2 से विभाज्य नहीं है, अतः विषम है)।
दूसरी संख्या = (HCF × LCM) / पहली संख्या
= (13 × 182) / 26 = 182 / 2 = 91.
0.15 = 15/100 = (15 ÷ 5) / (100 ÷ 5) = 3/20.
हर में 2 की अधिकतम घात 4 है (चूंकि 4 > 3), अतः इसका दशमलव प्रसार 4 दशमलव स्थानों के बाद सांत होगा।
माना 7√5 एक परिमेय संख्या a/b है (b ≠ 0).
√5 = a / (7b).
चूंकि a और b पूर्णांक हैं, अतः a/(7b) एक परिमेय संख्या है। इससे सिद्ध होता है कि √5 परिमेय है, जो कि असत्य है।
अतः 7√5 एक अपरिमेय संख्या है।
3 उभयनिष्ठ लेने पर: 3 × (7 × 5 × 2 + 1) = 3 × (70 + 1) = 3 × 71.
चूंकि इसके दो से अधिक गुणनखंड हैं, अतः यह भाज्य संख्या है, अभाज्य नहीं।
510 = 2 × 3 × 5 × 17
92 = 22 × 23
HCF = 21 = 2.
LCM = 22 × 3 × 5 × 17 × 23 = 4 × 3 × 5 × 17 × 23 = 23,460.
भाग 3: 15 दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर (5 अंक वाले – बोर्ड मॉडल)
उपपत्ति:
माना इसके विपरीत कि √5 एक परिमेय संख्या है।
अतः हम दो सह-अभाज्य पूर्णांक a और b (b ≠ 0) प्राप्त कर सकते हैं कि:
√5 = a / b (जहाँ a और b में 1 के अतिरिक्त कोई उभयनिष्ठ गुणनखंड नहीं है)।
वज्र-गुणन करने पर: a = b√5
दोनों पक्षों का वर्ग करने पर:
a2 = 5b2 ...(समीकरण 1)
समीकरण (1) से स्पष्ट है कि 5, a2 को विभाजित करता है।
प्रमेय के अनुसार, यदि 5, a2 को विभाजित करता है, तो 5, a को भी विभाजित करेगा। ...(कथन A)
अतः हम a = 5c लिख सकते हैं (जहाँ c कोई पूर्णांक है)।
a का यह मान समीकरण (1) में रखने पर:
(5c)2 = 5b2
25c2 = 5b2 ⇒ b2 = 5c2
इसका अर्थ है कि 5, b2 को विभाजित करता है, इसलिए 5, b को भी विभाजित करेगा। ...(कथन B)
कथन (A) और (B) से यह निष्कर्ष निकलता है कि 5, a और b दोनों का एक उभयनिष्ठ गुणनखंड है।
परंतु यह हमारी इस प्रारंभिक मान्यता का विरोधाभास है कि a और b सह-अभाज्य हैं (उनका 1 के अतिरिक्त कोई उभयनिष्ठ गुणनखंड नहीं है)।
यह विरोधाभास हमारी गलत कल्पना के कारण प्राप्त हुआ है कि √5 एक परिमेय संख्या है।
अतः निष्कर्ष निकलता है कि √5 एक अपरिमेय संख्या है। (इति सिद्धम्)
माना √3 एक परिमेय संख्या a/b है, जहाँ a और b सह-अभाज्य पूर्णांक हैं (b ≠ 0)।
a = b√3 ⇒ a2 = 3b2 ...(1)
अतः 3, a2 को विभाजित करता है ⇒ 3, a को विभाजित करता है।
माना a = 3c. मान समीकरण (1) में रखने पर:
(3c)2 = 3b2 ⇒ 9c2 = 3b2 ⇒ b2 = 3c2.
अतः 3, b2 को विभाजित करता है ⇒ 3, b को विभाजित करता है।
इस प्रकार 3, a और b दोनों का उभयनिष्ठ गुणनखंड है, जो कि a और b के सह-अभाज्य होने का विरोधाभास है।
अतः हमारी कल्पना असत्य है। अतः √3 एक अपरिमेय संख्या है। (इति सिद्धम्)
माना √2 = a/b परिमेय है, जहाँ a और b सह-अभाज्य पूर्णांक हैं।
a = b√2 ⇒ a2 = 2b2 ...(1)
अतः 2, a2 को विभाजित करता है ⇒ 2, a को भी विभाजित करता है।
माना a = 2c. मान (1) में रखने पर:
4c2 = 2b2 ⇒ b2 = 2c2.
अतः 2, b2 को विभाजित करता है ⇒ 2, b को भी विभाजित करता है।
अतः 2, a और b का उभयनिष्ठ गुणनखंड है, जो पूर्व मान्यता का विरोधाभास है।
अतः √2 एक अपरिमेय संख्या है। (इति सिद्धम्)
माना a कोई धनात्मक पूर्णांक है तथा b = 6.
यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका से: a = 6q + r, जहाँ 0 ≤ r < 6.
अतः r के संभावित मान 0, 1, 2, 3, 4 या 5 हो सकते हैं।
इस प्रकार a संख्याएँ हो सकती हैं:
a = 6q = 2(3q) ⇒ सम संख्या
a = 6q + 1 = 2(3q) + 1 ⇒ विषम संख्या
a = 6q + 2 = 2(3q + 1) ⇒ सम संख्या
a = 6q + 3 = 2(3q + 1) + 1 ⇒ विषम संख्या
a = 6q + 4 = 2(3q + 2) ⇒ सम संख्या
a = 6q + 5 = 2(3q + 2) + 1 ⇒ विषम संख्या
चूंकि 6q, 6q + 2 तथा 6q + 4, 2 से पूर्णतः विभाज्य हैं, अतः ये सम पूर्णांक हैं।
अतः कोई भी धनात्मक विषम पूर्णांक 6q + 1, 6q + 3 या 6q + 5 के रूप का ही होता है। (इति सिद्धम्)
माना a कोई धनात्मक पूर्णांक है तथा b = 3.
यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका से a = 3q + r, जहाँ r = 0, 1, 2.
अतः a = 3q, 3q + 1 या 3q + 2.
स्थिति 1 (जब a = 3q):
a2 = (3q)2 = 9q2 = 3(3q2) = 3m (जहाँ m = 3q2).
स्थिति 2 (जब a = 3q + 1):
a2 = (3q + 1)2 = 9q2 + 6q + 1 = 3(3q2 + 2q) + 1 = 3m + 1 (जहाँ m = 3q2 + 2q).
स्थिति 3 (जब a = 3q + 2):
a2 = (3q + 2)2 = 9q2 + 12q + 4 = 9q2 + 12q + 3 + 1
= 3(3q2 + 4q + 1) + 1 = 3m + 1 (जहाँ m = 3q2 + 4q + 1).
अतः किसी भी धनात्मक पूर्णांक का वर्ग सदैव 3m या 3m + 1 के रूप का होता है। (इति सिद्धम्)
माना a कोई धनात्मक पूर्णांक है तथा b = 3. a = 3q, 3q + 1 या 3q + 2.
स्थिति 1 (a = 3q):
a3 = (3q)3 = 27q3 = 9(3q3) = 9m (जहाँ m = 3q3).
स्थिति 2 (a = 3q + 1):
a3 = (3q + 1)3 = 27q3 + 27q2 + 9q + 1
= 9(3q3 + 3q2 + q) + 1 = 9m + 1.
स्थिति 3 (a = 3q + 2):
a3 = (3q + 2)3 = 27q3 + 54q2 + 36q + 8
= 9(3q3 + 6q2 + 4q) + 8 = 9m + 8.
अतः किसी धनात्मक पूर्णांक का घन सदैव 9m, 9m + 1 या 9m + 8 के रूप का होता है। (इति सिद्धम्)
स्तंभों की अधिकतम संख्या = HCF(616, 32).
यूक्लिड विभाजन एल्गोरिद्म का प्रयोग करने पर:
616 > 32.
616 = 32 × 19 + 8
32 = 8 × 4 + 0
यहाँ अंतिम शेषफल 0 है तथा भाजक 8 है।
अतः HCF(616, 32) = 8.
अतः उन स्तंभों की अधिकतम संख्या 8 है।
न्यूनतम स्थान घेरने के लिए प्रत्येक ढेरी में अधिकतम बर्फियाँ होनी चाहिए।
प्रत्येक ढेरी में बर्फियों की संख्या = HCF(420, 130).
यूक्लिड विभाजन एल्गोरिद्म से:
420 = 130 × 3 + 30
130 = 30 × 4 + 10
30 = 10 × 3 + 0
अंतिम भाजक 10 है।
अतः HCF(420, 130) = 10.
अतः प्रत्येक ढेरी में 10 बर्फियाँ रखी जा सकती हैं।
माना x = 0.2353535... ...(1)
एक अंक (2) की पुनरावृत्ति नहीं हो रही है, अतः दोनों पक्षों को 10 से गुणा करने पर:
10x = 2.353535... ...(2)
दो अंकों (35) की पुनरावृत्ति हो रही है, अतः (2) को 100 से गुणा करने पर:
1000x = 235.353535... ...(3)
समीकरण (3) में से (2) को घटाने पर:
1000x - 10x = 235.3535... - 2.3535...
990x = 233
x = 233 / 990.
अतः अभीष्ट परिमेय रूप 233/990 है।
यदि संभव हो तो माना कि √2 + √3 एक परिमेय संख्या x है।
x = √2 + √3
दोनों पक्षों का वर्ग करने पर:
x2 = (√2 + √3)2
x2 = 2 + 3 + 2√6
x2 = 5 + 2√6
x2 - 5 = 2√6
√6 = (x2 - 5) / 2.
चूंकि x परिमेय है, अतः (x2 - 5)/2 भी एक परिमेय संख्या होगी।
इससे यह सिद्ध होता है कि √6 एक परिमेय संख्या है, जो कि असत्य है (क्योंकि 6 पूर्ण वर्ग नहीं है और √6 अपरिमेय है)।
अतः हमारा मानना गलत था। अतः √2 + √3 एक अपरिमेय संख्या है। (इति सिद्धम्)
(i) यदि कोई संख्या शून्य (0) पर समाप्त होती है, तो उसके अभाज्य गुणनखंड में 2 और 5 दोनों का होना अनिवार्य है।
(ii) यदि कोई संख्या पाँच (5) पर समाप्त होती है, तो वह 5 से विभाज्य होनी चाहिए (गुणनखंड 5 होना चाहिए) परंतु 2 नहीं होना चाहिए।
यहाँ 12n = (22 × 3)n = 22n × 3n.
12n के अभाज्य गुणनखंडों में केवल 2 और 3 ही हैं, 5 अनुपस्थित है।
अतः अंकगणित की आधारभूत प्रमेय की अद्वितीयता से 12n कभी भी अंक 0 या 5 पर समाप्त नहीं हो सकता।
माना √p + √q = r (एक परिमेय संख्या है)।
√p = r - √q
दोनों ओर वर्ग करने पर:
p = r2 + q - 2r√q
2r√q = r2 + q - p
√q = (r2 + q - p) / (2r).
चूंकि r, p, q परिमेय पूर्णांक हैं, अतः दायाँ पक्ष एक परिमेय संख्या है।
इससे निष्कर्ष निकलता है कि √q एक परिमेय संख्या है, जो इस तथ्य का विरोधाभास है कि किसी अभाज्य संख्या का वर्गमूल अपरिमेय होता है।
अतः √p + √q एक अपरिमेय संख्या है। (इति सिद्धम्)
867 = 255 × 3 + 102 ...(1)
255 = 102 × 2 + 51 ...(2)
102 = 51 × 2 + 0 ...(3)
अतः HCF = 51.
समीकरण (2) से: 51 = 255 - 102 × 2
समीकरण (1) से 102 = 867 - 255 × 3 रखने पर:
51 = 255 - [ 867 - 255 × 3 ] × 2
51 = 255 - 867 × 2 + 255 × 6
51 = 255 × 7 + 867 × (-2)
अतः 51 = 867(-2) + 255(7), जहाँ m = -2 तथा n = 7.
सूत्र HCF × LCM = a × b केवल दो संख्याओं के लिए मान्य है, तीन संख्याओं के लिए नहीं।
उदाहरण: माना तीन संख्याएँ 6, 8 और 12 हैं।
6 = 2 × 3
8 = 23
12 = 22 × 3
HCF(6, 8, 12) = 21 = 2.
LCM(6, 8, 12) = 23 × 3 = 8 × 3 = 24.
HCF × LCM = 2 × 24 = 48.
तीनों संख्याओं का गुणनफल = 6 × 8 × 12 = 576.
यहाँ 48 ≠ 576, अतः सिद्ध हुआ कि तीन संख्याओं के लिए यह सूत्र लागू नहीं होता।
हर 5000 का अभाज्य गुणनखंडन:
5000 = 5 × 1000 = 5 × 103 = 5 × 23 × 53 = 23 × 54.
यहाँ m = 3 तथा n = 4 है।
दशमलव प्रसार हेतु 2 और 5 की घातें समान (4) बनानी होंगी। अतः अंश और हर में 2 से गुणा करने पर:
257 / 5000 = (257 × 2) / (23 × 54 × 2)
= 514 / (24 × 54) = 514 / (10)4 = 514 / 10000 = 0.0514.
अतः इसका दशमलव प्रसार 0.0514 है।
मैट्रिक परीक्षा उपयोगी महत्त्वपूर्ण टिप्स (BSEB Exam Tips)
- √2, √3 या √5 की अपरिमेयता का सिद्धीकरण: यह प्रश्न बोर्ड परीक्षा में 3 या 5 अंक में निश्चित रूप से पूछा जाता है। इसे 'विरोधाभास विधि' के सभी चरणों (कथन A, B और सह-अभाज्य की परिभाषा) के साथ स्वच्छ लिखें।
- यूक्लिड विभाजन एल्गोरिद्म: HCF ज्ञात करते समय चरणबद्ध तरीके से लिखें। अंतिम भाजक ही HCF होता है, भागफल नहीं।
- सांत और अशांत की पहचान: भिन्न को पहले सरलतम रूप (काटकर) में लाएँ, फिर हर का गुणनखंड देखें। उदाहरण के लिए 6/15 को सीधे 15 देखकर अशांत न कहें, 6/15 = 2/5 (सांत) होता है।
- π और 22/7 का अंतर: π एक अपरिमेय संख्या है, जबकि 22/7 एक परिमेय संख्या है। यह वस्तुनिष्ठ प्रश्न का सबसे लोकप्रिय प्रश्न है।
- सूत्र की जाँच: दो संख्याओं के लिए HCF × LCM = a × b का उपयोग करके उत्तर की जाँच स्वयं परीक्षा हॉल में कर लें।
निष्कर्ष (Conclusion)
बिहार बोर्ड मैट्रिक गणित परीक्षा में 'अध्याय 1 – वास्तविक संख्याएँ' पूरे पाठ्यक्रम की नींव है। यह अध्याय अत्यंत सरल और 100% स्कोरिंग है। इस पोस्ट में संकलित सभी 50 वस्तुनिष्ठ, 25 लघु और 15 दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों को यदि आप अपनी कॉपी में लिखकर अभ्यास कर लेते हैं, तो बोर्ड परीक्षा में इस अध्याय से आने वाला एक भी अंक आपसे नहीं छूटेगा। इस उत्कृष्ट अध्ययन सामग्री को अपने मित्रों और सहपाठियों के साथ अवश्य शेयर करें और परीक्षा में पूरे 100 अंक प्राप्त करने का लक्ष्य बनाएं।
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