Chapter 7. हिरोशिमा | BSEB 10 Hindi Solution


Class 10 Hindi (गोधूलि भाग-2: काव्य खंड)

अध्याय 7: हिरोशिमा (रचयिता: सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय')

I. कविता के साथ (प्रश्न-उत्तर)
प्रश्न 1: कविता के प्रथम अनुच्छेद में निकलने वाला सूरज क्या है? वह कैसे निकलता है?
उत्तर:
कविता के प्रथम अनुच्छेद में निकलने वाला 'सूरज' प्राकृतिक सूर्य न होकर मानव निर्मित परमाणु बम है।

यह सूरज पूर्व दिशा के क्षितिज से न निकलकर हिरोशिमा नगर के बीचों-बीच (चौक पर) अचानक प्रस्फुटित होता है। इसकी धूप आकाश से नहीं, बल्कि फटी हुई धरती (परमाणु विस्फोट के महाविनाश) से बरसती है।
प्रश्न 2: छायाएँ दिशाहीन सब ओर क्यों पड़ती हैं? स्पष्ट करें।
उत्तर:
प्राकृतिक सूर्य पूर्व में उगता है, इसलिए उसकी धूप पड़ने पर छायाएँ एक निश्चित दिशा (पश्चिम) में बनती हैं। परंतु हिरोशिमा पर गिरा परमाणु बम रूपी सूरज नगर के मध्य अचानक प्रस्फुटित हुआ, जिसकी तीव्र ज्वाला और प्रकाश की किरणें दसों दिशाओं में एक साथ बिखर गईं। इसी सर्वव्यापी तीव्र प्रकाश और ताप के कारण मनुष्यों की छायाएँ किसी एक दिशा में न बनकर सब ओर (दिशाहीन) पड़ गईं।
प्रश्न 3: प्रज्वलित क्षण की दोपहरी से कवि का आशय क्या है?
उत्तर:
'प्रज्वलित क्षण की दोपहरी' से कवि का आशय उस भयंकर क्षण से है जब परमाणु बम का विस्फोट हुआ। उस एक ही प्रज्वलित क्षण में इतनी अत्यधिक ऊष्मा, ताप और विनाशकारी प्रकाश पैदा हुआ जिसने क्षण भर में दोपहर जैसी प्रचंड तपन उत्पन्न कर दी और हिरोशिमा के समस्त मानव जीवन को सोखकर स्वाहा कर दिया।
प्रश्न 4: मनुष्य की छायाएँ कहाँ और क्यों पड़ी हुई हैं?
उत्तर:
मनुष्य की छायाएँ हिरोशिमा के झुलसे हुए पत्थरों पर तथा उजड़ी हुई सड़कों की गच (पक्की दरारों/फर्श) पर पड़ी हुई हैं।

कारण: परमाणु बम के भीषण ताप से मनुष्य पल भर में भाप बनकर उड़ गए और लुप्त हो गए, परंतु उनकी जलकर बनी काली छायाएँ (निशान) पत्थरों और सड़कों पर हमेशा के लिए छप कर रह गईं।
प्रश्न 5: हिरोशिमा में मनुष्य की साखी के रूप में क्या है?
उत्तर:
हिरोशिमा में मनुष्य की 'साखी' (साक्षी/गवाही) के रूप में झुलसे हुए पत्थरों और सड़कों की गच पर छपी मानव की जली हुई छायाएँ मौजूद हैं। ये छायाएँ इस बात की गवाह हैं कि किस प्रकार मनुष्य के द्वारा ही बनाए गए विज्ञान और परमाणु हथियार ने स्वयं मानव जाति का क्रूरतापूर्वक संहार कर दिया।
प्रश्न 6: व्याख्या करें –
(क) "एक दिन सहसा / सूरज निकला"
प्रसंग: प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक 'गोधूलि भाग-2' की 'हिरोशिमा' शीर्षक कविता से उद्धृत हैं, जिसके रचयिता आधुनिक प्रयोगवादी कवि 'अज्ञेय' हैं।
व्याख्या: कवि कहते हैं कि एक दिन अचानक हिरोशिमा शहर में एक अभूतपूर्व घटना घटी। पूर्व दिशा से नहीं, बल्कि शहर के चौक पर एक विनाशकारी 'सूरज' (परमाणु बम) प्रस्फुटित हुआ। यह प्राकृतिक प्रकाश का नहीं, बल्कि मानव निर्मित परमाणु तबाही का प्रतीक था।
(ख) "काल-सूर्य के रथ के / पहियों के ज्यों अरे टूट कर / बिख़र गये हों / दसों दिशा में"
प्रसंग: प्रस्तुत पंक्तियाँ 'अज्ञेय' द्वारा रचित 'हिरोशिमा' कविता से ली गई हैं।
व्याख्या: कवि परमाणु विस्फोट के भीषण दृश्य का वर्णन करते हुए कहते हैं कि ऐसा लगा मानो साक्षात मृत्यु (काल) रूपी सूर्य के रथ के पहियों की तीलियाँ (अरे) टूटकर चारों ओर बिखर गई हों। परमाणु विस्फोट का अत्यधिक प्रकाश और घातक विकिरण दसों दिशाओं में तबाही फैलाता हुआ फैल गया।
(ग) "मानव का रचा हुआ सूरज / मानव को भाप बना कर सोख गया"
प्रसंग: प्रस्तुत पंक्तियाँ कवि 'अज्ञेय' रचित 'हिरोशिमा' कविता की अंतिम पंक्तियों से उद्धृत हैं।
व्याख्या: कवि विज्ञान के दुरुपयोग पर करारा व्यंग्य करते हुए कहते हैं कि मनुष्य ने अपनी बुद्धि से जिस परमाणु रूपी 'सूरज' का निर्माण किया था, उसी विनाशकारी सूरज की ज्वाला ने हिरोशिमा के हज़ारों-लाखों मनुष्यों को पल भर में वाष्पीकृत (भाप बना) करके नष्ट कर दिया। यह मानव निर्मित विनाश का वीभत्स रूप है।
प्रश्न 7: आज के युग में इस कविता की प्रासंगिकता स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
आज के युग में यह कविता अत्यंत प्रासंगिक है। वर्तमान समय में दुनिया भर के शक्तिशाली देशों के बीच परमाणु हथियारों और घातक जैविक-रासायनिक अस्त्रों को बनाने की होड़ लगी हुई है। 'हिरोशिमा' कविता मानवता को यह चेतावनी देती है कि यदि विज्ञान का प्रयोग मानव कल्याण के बजाय विनाश के लिए किया गया, तो संपूर्ण पृथ्वी का अस्तित्व ही मिट जाएगा। यह कविता शांति, अहिंसा और विज्ञान के विवेकपूर्ण प्रयोग का आह्वान करती है।
II. कविता के आस-पास
1. हिरोशिमा कहाँ है? इतिहास में उसकी प्रसिद्धि किसलिए है? शिक्षक की सहायता से मालूम करें।
उत्तर:
  • स्थान: हिरोशिमा जापान देश का एक प्रसिद्ध शहर है।
  • इतिहास में प्रसिद्धि: द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 6 अगस्त 1945 को अमेरिका ने हिरोशिमा पर 'लिटिल बॉय' नामक दुनिया का पहला परमाणु बम गिराया था। इस महाविनाश में पूरा शहर राख हो गया और लाखों बेकसूर लोग मारे गए थे। इसी त्रासदी के कारण हिरोशिमा इतिहास में प्रसिद्ध और दर्ज है।
2. जापान को उगते हुए सूरज का देश क्यों कहा जाता है? कारणों को ध्यान में रखते हुए इस कविता पर टिप्पणी कीजिए।
उत्तर:
  • उगते सूरज का देश: भौगोलिक स्थिति के अनुसार जापान विश्व के पूर्वोत्तर भाग में स्थित है, जहाँ सूर्योदय की किरणें सबसे पहले पहुँचती हैं, इसीलिए जापान को 'उगते सूरज का देश' कहा जाता है।
  • कविता पर टिप्पणी: 'उगता सूरज' जीवन, आशा और नव-निर्माण का प्रतीक है, परंतु इस कविता में अज्ञेय जी ने जापान के हिरोशिमा पर उगे मानव निर्मित 'परमाणु सूरज' को विनाश और मृत्यु का प्रतीक बताया है। जो देश प्राकृतिक सूरज के सौंदर्य के लिए जाना जाता था, वह मानव रचित कृत्रिम सूरज के कारण श्मशान बन गया।
3. हिरोशिमा के साथ इसी प्रसंग में जापान के और किस शहर का उल्लेख होता है? जापान के मानचित्र में इन नगरों को चिह्नित करें।
उत्तर:
हिरोशिमा के साथ इसी प्रसंग में जापान के 'नागासाकी' शहर का उल्लेख होता है, जिस पर 9 अगस्त 1945 को अमेरिका द्वारा दूसरा परमाणु बम ('फैट मैन') गिराया गया था।
(विद्यार्थी जापान के मानचित्र पर हिरोशिमा और नागासाकी को अंकित करें।)
4. द्वितीय विश्वयुद्ध में पक्ष-विपक्ष और तटस्थ देशों की सूची बनाएँ। इनमें भारत की स्थिति क्या थी?
उत्तर:
  • मित्र राष्ट्र (पक्ष): ब्रिटेन, फ्रांस, सोवियत संघ (रूस), अमेरिका, चीन आदि।
  • धुरी राष्ट्र (विपक्ष): जर्मनी, इटली, जापान।
  • तटस्थ देश: स्विट्ज़रलैंड, स्वीडन, स्पेन आदि।
  • भारत की स्थिति: द्वितीय विश्व युद्ध (1939-1945) के समय भारत पर ब्रिटिश शासन था। इसलिए ब्रिटिश सरकार ने भारतीय सहमति के बिना भारत को मित्र राष्ट्रों के पक्ष में युद्ध में ढकेल दिया था। भारतीय सैनिकों ने मित्र राष्ट्रों की ओर से युद्ध लड़ा था।
III. भाषा की बात

1. कविता में प्रयुक्त निम्नांकित शब्दों का कारक स्पष्ट कीजिए –

शब्द कारक विभक्ति / अर्थ
क्षितिजअधिकरण कारकक्षितिज पर
अंतरिक्षअपादान कारकअंतरिक्ष से
चौकअधिकरण / संबंध कारकचौक पर / के चौक
मिट्टीकरण / अपादान कारकमिट्टी से
बीचो-बीचअधिकरण कारकनगर के बीचो-बीच
नगरसंबंध कारकनगर के
रथसंबंध कारकरथ के
गचअधिकरण कारकगच पर
छायाकर्ता कारकछायाएँ

2. कविता में प्रयुक्त क्रियारूपों का चयन करते हुए उनकी काल रचना स्पष्ट कीजिए –

क्रिया रूप काल
निकलासामान्य भूतकाल
बरसीसामान्य भूतकाल
पड़ींसामान्य भूतकाल
बिख़र गयेसामान्य भूतकाल
हो गयेसामान्य भूतकाल
लिखी हैंपूर्ण वर्तमानकाल / आसन्न भूतकाल

3. कविता से तद्भव शब्द चुनिए और उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए –

  • सूरज (तद्भव - तत्सम: सूर्य): सुबह पूर्व दिशा में सूरज उगता है।
  • धूप (तद्भव): सर्दियों में धूप सेंकना अच्छा लगता है।
  • मिट्टी (तद्भव - तत्सम: मृत्तिका): कुम्हार मिट्टी से बर्तन बनाता है।
  • पहिया (तद्भव - तत्सम: पहियों/प्रधि): गाड़ी का पहिया तेज़ी से घूम रहा है।
  • भाप (तद्भव - तत्सम: वाष्प): पानी उबलकर भाप बन गया।
  • पत्थर (तद्भव - तत्सम: प्रस्तर): मूर्तिकार ने पत्थर को तराशकर मूर्ति बनाई।

4. कविता से संज्ञा पद चुनें और उनका प्रकार भी बताएँ –

संज्ञा पद संज्ञा का प्रकार
सूरजव्यक्तिवाचक संज्ञा
नगर / शहरजातिवाचक संज्ञा
चौकजातिवाचक संज्ञा
दिशाजातिवाचक संज्ञा
रथजातिवाचक संज्ञा
पहियों / अरेजातिवाचक संज्ञा
दोपहरीभाववाचक / कालवाचक संज्ञा
मानव / जनजातिवाचक संज्ञा
छायाभाववाचक संज्ञा
पत्थरद्रव्यवाचक / जातिवाचक संज्ञा
सड़क / गचजातिवाचक संज्ञा

5. निम्नांकित के वचन परिवर्तित कीजिए –

एकवचन / बहुवचन परिवर्तित रूप
छायाएँछाया
पड़ींपड़ी
उगाउगे
हैंहै
पहियोंपहिया
अरेअरा
पत्थरोंपत्थर
साखीसाखियाँ
IV. शब्द निधि (शब्दार्थ)
शब्द अर्थ
अरे पहिये की धुरी और परिधि या नेमि को जोड़ने वाले दंड (तीलियाँ)
गच पत्थर या सीमेंट से बना पक्का धरातल / फर्श
साखी (साक्षी) गवाही, सबूत

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