Chapter 7. परम्परा का मूल्यांकन | BSEB 10 Hindi Notes


पाठ 7: परम्परा का मूल्यांकन

बिहार बोर्ड (BSEB) कक्षा 10वीं हिंदी (गोधूलि भाग-2, गद्य खंड) | सम्पूर्ण नोट्स

1. पाठ का संक्षिप्त परिचय (Overview)

  • पाठ का नाम: परम्परा का मूल्यांकन
  • विधा: निबंध (आलोचनात्मक निबंध)
  • लेखक: डॉ० रामविलास शर्मा (हिंदी के मूर्धन्य प्रगतिशील आलोचक)
  • संकलन स्रोत: लेखक की पुस्तक 'परम्परा का मूल्यांकन' से संपादित अंश।
  • मूल भाव: समाज, साहित्य और परंपरा के अंतर्संबंधों का सैद्धांतिक व व्यावहारिक विश्लेषण। लेखक के अनुसार, जो लोग रूढ़ियों को तोड़कर क्रांतिकारी साहित्य रचना चाहते हैं, उनके लिए साहित्य की परंपरा का ज्ञान अत्यंत आवश्यक है। यह निबंध साहित्य के विकास में प्रतिभाशाली व्यक्तियों और राष्ट्रीय जातीय अस्मिता की निर्णायक भूमिका को रेखांकित करता है।

2. लेखक परिचय (डॉ० रामविलास शर्मा)

  • जन्म: 10 अक्टूबर 1912 ई० को उँचगाँव सानी, जिला उन्नाव (उत्तर प्रदेश) में।
  • शिक्षा: लखनऊ विश्वविद्यालय से 1932 ई० में बी० ए० तथा 1934 ई० में अंग्रेज़ी साहित्य में एम० ए० किया। 1938 ई० तक शोधकार्य में रत रहे।
  • कार्य/पेशा:
    • 1938 से 1943 ई० तक लखनऊ विश्वविद्यालय के अंग्रेज़ी विभाग में अध्यापन।
    • 1943 से 1971 ई० तक बलवंत राजपूत कॉलेज, आगरा में अध्यापन कार्य।
    • कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी (के० एम०) हिंदी विद्यापीठ/संस्थान, आगरा के निदेशक पद से 1974 ई० में सेवानिवृत्त।
    • 1949 से 1953 ई० तक 'भारतीय प्रगतिशील लेखक संघ' के महामंत्री रहे।
  • निधन: 30 मई 2000 ई० को दिल्ली में।
  • साहित्यिक विशेषताएँ: भाषाविज्ञान और हिंदी आलोचना को मार्क्सवादी व वैज्ञानिक दृष्टि प्रदान की। देशभक्ति और मार्क्सवादी चेतना इनके केंद्र-बिंदु हैं।
  • प्रमुख कृतियाँ:
    • 'निराला की साहित्य साधना' (3 खंड)
    • 'आचार्य रामचंद्र शुक्ल और हिंदी आलोचना'
    • 'भारतेन्दु हरिश्चंद्र', 'प्रेमचंद और उनका युग'
    • 'भाषा और समाज', 'महावीर प्रसाद द्विवेदी और हिंदी नवजागरण'
    • 'भारत की भाषा समस्या', 'नयी कविता और अस्तित्ववाद'
    • 'भारत में अंग्रेज़ी राज और मार्क्सवाद'
    • 'भारत के प्राचीन भाषा परिवार और हिंदी'
    • 'विराम चिह्न', 'बड़े भाई' आदि।
  • पुरस्कार एवं सम्मान: 'निराला की साहित्य साधना' पर साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्राप्त हुआ।

3. पाठ का विस्तृत सारांश एवं मुख्य विचार (Detailed Summary & Analysis)

1. परंपरा के ज्ञान की आवश्यकता:
  • जो लोग साहित्य में युग-परिवर्तन करना चाहते हैं, जो लकीर के फकीर नहीं हैं और रूढ़ियों को तोड़कर क्रांतिकारी साहित्य रचना चाहते हैं, उनके लिए साहित्य की परंपरा का ज्ञान सबसे अधिक आवश्यक है।
  • समाज में परिवर्तन चाहने वाले ऐतिहासिक भौतिकवाद को मानते हैं। जो महत्व ऐतिहासिक भौतिकवाद के लिए 'इतिहास' का है, वही आलोचना के लिए 'साहित्य की परंपरा' का है।
2. साहित्य के मूल्य का निर्धारण:
  • साहित्य की परंपरा का मूल्यांकन करते समय सबसे पहले उस साहित्य का मूल्य निर्धारित किया जाता है जो शोषक वर्गों के विरुद्ध श्रमिक जनता के हितों को प्रतिबिंबित करता है।
  • साहित्य का हर स्तर वर्ग-युद्ध नहीं होता; उसमें मानवीय संवेदनाएँ और इंद्रिय-बोध भी जुड़े होते हैं, जो अधिक स्थायी होते हैं।
3. साहित्य की सापेक्ष स्वाधीनता:
  • सामाजिक विकास क्रम में सामंती सभ्यता की अपेक्षा पूँजीवादी सभ्यता और पूँजीवादी की अपेक्षा समाजवादी सभ्यता अधिक प्रभावी होती है, परंतु यह आवश्यक नहीं कि सामंती समाज के कवि की तुलना में पूँजीवादी समाज का कवि श्रेष्ठ हो।
  • द्वंद्वात्मक भौतिकवाद मनुष्य की चेतना को आर्थिक संबंधों से प्रभावित तो मानता है, परंतु उसकी सापेक्ष स्वाधीनता भी स्वीकार करता है।
  • परिस्थितियाँ मनुष्य का निर्माण करती हैं और मनुष्य भी परिस्थितियों का निर्माण करता है; इसलिए साहित्य अपने आप में सापेक्ष रूप से स्वाधीन होता है।
  • उदाहरण: गुलामी अमेरिका और एथेंस दोनों में थी, परंतु एथेंस की सभ्यता ने समूचे यूरोप को प्रभावित किया, जबकि अमेरिकी दासों के मालिकों ने संस्कृति को कुछ नहीं दिया।
4. प्रतिभाशाली मनुष्यों की भूमिका:
  • सामंती दुनिया में महान कविता के दो प्रमुख केंद्र थे—भारत और ईरान।
  • पूँजीवादी विकास के दौर में राफेल, लियोनार्डो दा विंची और माइकल एंजेलो जैसी महान कलाकृतियाँ इटली की देन थीं।
  • साहित्य निर्माण में प्रतिभाशाली व्यक्तियों की भूमिका निर्णायक होती है। अंग्रेजी कवि टेनिसन ने वर्जिल पर लिखा कि रोमन साम्राज्य का वैभव नष्ट हो गया, परंतु वर्जिल के काव्य की ध्वनि-तरंगें आज भी आनंद देती हैं। इसी प्रकार ब्रिटिश साम्राज्य के समाप्त होने पर भी शेक्सपियर, मिल्टन और शेली की चमक सदैव बनी रहेगी।
5. जातीय अस्मिता और साहित्य:
  • साहित्य के विकास में जनसमुदायों की जातीय अस्मिता का बहुत बड़ा हाथ होता है। प्राचीन यूनान अनेक नगर-राज्यों में बँटा था, फिर भी उनकी सांस्कृतिक एकात्मकता अक्षुण्ण रही।
  • जब राष्ट्र पर संकट आता है, तो जातीय अस्मिता जगती है। जैसे द्वितीय विश्वयुद्ध में हिटलर के आक्रमण के समय सोवियत जनता ने अपनी महान साहित्यिक परंपरा (टॉलस्टॉय आदि) का स्मरण किया था।
  • बहुजातीय राष्ट्र के रूप में भारत का मुकाबला संसार का कोई देश नहीं कर सकता। हमारे देश की संस्कृति के निर्माण में महर्षि वाल्मीकि और वेदव्यास (रामायण और महाभारत) की भूमिका सर्वोच्च और निर्णायक है।
6. समाजवादी व्यवस्था और भारतीय साहित्य का भविष्य:
  • देश की राष्ट्रीय क्षमता का पूर्ण विकास और साहित्य की परंपरा का संपूर्ण ज्ञान केवल समाजवादी व्यवस्था में ही संभव है।
  • जब भारत की करोड़ों निर्धन और निरक्षर जनता साक्षर होगी, तो वे व्यास और वाल्मीकि को मूल संस्कृत में पढ़ेंगे।
  • तब उत्तर भारत के लोग सुब्रह्मण्य भारती (तमिल) को मूल भाषा में पढ़ेंगे और दक्षिण के लोग रवींद्रनाथ (बाँग्ला) को पढ़ेंगे। इस प्रकार देश में एक विशाल सांस्कृतिक आदान-प्रदान संभव होगा।

4. परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Important One-Liners)

  • 'परम्परा का मूल्यांकन' निबंध के लेखक कौन हैं — डॉ० रामविलास शर्मा
  • डॉ० रामविलास शर्मा का जन्म कब और कहाँ हुआ था — 10 अक्टूबर 1912 ई० को उँचगाँव सानी, उन्नाव (उ० प्र०) में
  • रामविलास शर्मा ने एम० ए० किस विषय में किया था — अंग्रेज़ी साहित्य में (लखनऊ विश्वविद्यालय से)।
  • लेखक 1949 से 1953 तक किस संस्था के महामंत्री रहे — भारतीय प्रगतिशील लेखक संघ के।
  • रामविलास शर्मा को किस पुस्तक पर साहित्य अकादेमी पुरस्कार मिला — 'निराला की साहित्य साधना' पर।
  • डॉ० रामविलास शर्मा का निधन कब हुआ — 30 मई 2000 ई० को दिल्ली में
  • रूढ़ियाँ तोड़कर क्रांतिकारी साहित्य रचने वालों के लिए किसका ज्ञान आवश्यक है — साहित्य की परंपरा का ज्ञान
  • साहित्य का निर्माण मुख्यतः कैसा होता है — सापेक्ष रूप से स्वाधीन
  • एथेंस की सभ्यता ने किस महाद्वीप को गहरे स्तर पर प्रभावित किया — यूरोप को
  • सामंती दुनिया में महान कविता के दो प्रमुख केंद्र कौन-से थे — भारत और ईरान
  • लियोनार्डो दा विंची, राफेल और माइकल एंजेलो किस देश की देन हैं — इटली की
  • अंग्रेजी कवि टेनिसन ने किस लैटिन कवि पर अच्छी कविता लिखी थी — वर्जिल पर
  • द्वितीय विश्वयुद्ध में सोवियत संघ पर किसने आक्रमण किया था — हिटलर ने
  • भारतीय संस्कृति की आंतरिक एकता को बनाए रखने वाले दो महान ग्रंथ कौन-से हैं — रामायण और महाभारत (वाल्मीकि और व्यास द्वारा रचित)।
  • भारत की राष्ट्रीय क्षमता का पूर्ण विकास किस व्यवस्था में संभव है — समाजवादी व्यवस्था में
  • सुब्रह्मण्य भारती किस भाषा के प्रसिद्ध कवि थे — तमिल भाषा के

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