BSEB Class 10 Hindi Chapter 7 "परंपरा का मूल्यांकन" PDF Download
बिहार बोर्ड (BSEB) कक्षा 10वीं के विद्यार्थियों के लिए हिंदी (गोधूलि भाग-2) गद्य खंड का अध्याय 7 "परंपरा का मूल्यांकन" (Parampara Ka Mulyankan) हिंदी के प्रख्यात आलोचक और निबंधकार डॉ. रामविलास शर्मा द्वारा रचित एक विचारप्रधान निबंध है। यदि आप इस पाठ की PDF को ऑनलाइन पढ़ना चाहते हैं या डाउनलोड करना चाहते हैं, तो नीचे एम्बेडेड PDF व्यूअर और डाउनलोड बटन उपलब्ध है।
| बोर्ड (Board) | बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) |
|---|---|
| कक्षा (Class) | 10वीं (Class 10th) |
| विषय (Subject) | हिंदी (गोधूलि भाग-2 - गद्य खंड) |
| अध्याय (Chapter) | अध्याय 7 (Chapter 7) - परंपरा का मूल्यांकन |
| लेखक (Author) | डॉ. रामविलास शर्मा (Dr. Ram Vilas Sharma) |
| विधा (Genre) | निबंध (Essay/Critical Article) |
पाठ का सारांश (Chapter Overview)
'परंपरा का मूल्यांकन' प्रगतिशील समीक्षा के शिखर पुरुष डॉ. रामविलास शर्मा द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण निबंध है। यह निबंध इसी नाम की उनकी प्रसिद्ध पुस्तक से लिया गया है।
इस पाठ में लेखक ने साहित्य और समाज की प्रगति में परंपरा के महत्व पर प्रकाश डाला है। लेखक के अनुसार, परंपरा का ज्ञान केवल उन्हीं लोगों के लिए उपयोगी होता है जो समाज में क्रांतिकारी परिवर्तन लाना चाहते हैं और प्रगतिशील साहित्य का निर्माण करना चाहते हैं। साहित्य केवल आर्थिक परिस्थितियों का प्रतिबिंब नहीं होता, बल्कि वह मानव चेतना की स्वायत्तता और जातीय अस्मिता से जुड़ा होता है। रामविलास शर्मा जी बताते हैं कि भारतीय संस्कृति और साहित्य की परंपरा अत्यंत समृद्ध है, जो विविधता में एकता का संदेश देती है।
पढ़ें: BSEB Class 10 Hindi Chapter 7 PDF
आप नीचे दिए गए फ़्रेम में सीधे इस पाठ की PDF ऑनलाइन पढ़ सकते हैं:
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न (Important Points)
- 'परंपरा का मूल्यांकन' पाठ के लेखक कौन हैं? - डॉ. रामविलास शर्मा।
- परंपरा का ज्ञान किनके लिए सबसे अधिक आवश्यक है? - जो लोग समाज में मौलिक परिवर्तन करना चाहते हैं और प्रगतिशील साहित्य रचना चाहते हैं।
- साहित्य की परंपरा का मूल्यांकन किस आधार पर होना चाहिए? - साहित्य के मानवतावादी मूल्यों और जातीय पहचान के आधार पर।
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