BSEB Class 10 Hindi Chapter 4 "स्वदेशी" PDF Download
बिहार बोर्ड (BSEB) कक्षा 10वीं के विद्यार्थियों के लिए हिंदी (गोधूलि भाग-2) काव्य खंड का अध्याय 4 "स्वदेशी" (Swadeshi) राष्ट्रीय चेतना और अपनी संस्कृति के प्रति गौरव जगाने वाला एक प्रमुख पाठ है। यदि आप इस पाठ की PDF को ऑनलाइन पढ़ना चाहते हैं या डाउनलोड करना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए एम्बेडेड PDF व्यूअर और डाउनलोड बटन का उपयोग कर सकते हैं।
| बोर्ड (Board) | बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) |
|---|---|
| कक्षा (Class) | 10वीं (Class 10th) |
| विषय (Subject) | हिंदी (गोधूलि भाग-2 - काव्य खंड) |
| अध्याय (Chapter) | अध्याय 4 (Chapter 4) - स्वदेशी |
| कवि (Poet) | बद्रीनारायण चौधरी 'प्रेमघन' |
पाठ का सारांश (Chapter Overview)
'स्वदेशी' भारतेंदु युग के प्रमुख कवि बद्रीनारायण चौधरी 'प्रेमघन' द्वारा रचित एक देशभक्तिपूर्ण कविता है। यह कविता उनके काव्य-संग्रह 'प्रेमघन सर्वस्व' से संकलित दोहों पर आधारित है।
इस कविता में कवि ने अंग्रेजी शासन के दौरान भारतीय समाज में विदेशी संस्कृति, भाषा, वेशभूषा और रीति-रिवाजों के बढ़ते प्रभाव पर गहरा दुख व्यक्त किया है। कवि कहते हैं कि अब भारत में भारतीयता ढूँढे से भी नहीं मिलती। लोगों की रुचि, पहनावा, भाषा और आचरण सब कुछ विदेशी हो गया है। जो लोग अपनी मातृभाषा हिंदी बोलने में भी झिझकते हैं, वे अंग्रेजों के पिछलग्गू बनकर अपनी पहचान खो रहे हैं। कवि स्वदेशी वस्तुओं, मातृभाषा और भारतीय संस्कृति को अपनाने का संदेश देते हैं।
पढ़ें: BSEB Class 10 Hindi Chapter 4 PDF
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परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न (Important Points)
- 'स्वदेशी' कविता के रचयिता कौन हैं? - बद्रीनारायण चौधरी 'प्रेमघन'।
- कवि को भारत में 'भारतीयता' क्यों नहीं दिखाई देती? - क्योंकि लोगों का पहनावा, खान-पान, भाषा, रीति-रिवाज और सोच सब कुछ विदेशी हो गया है।
- 'स्वदेशी' कविता किस युग की रचना है? - भारतेंदु युग की रचना है।
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