Chapter 6. जनतंत्र का जन्म | BSEB 10 Hindi Solution


Class 10 Hindi (गोधूलि भाग-2: काव्य खंड)

अध्याय 6: जनतंत्र का जन्म (रचयिता: रामधारी सिंह 'दिनकर')

I. कविता के साथ (प्रश्न-उत्तर)
प्रश्न 1: कवि की दृष्टि में समय के रथ का घरघर-नाद क्या है? स्पष्ट करें।
उत्तर:
कवि की दृष्टि में समय के रथ का घरघर-नाद सदियों की पराधीनता और राजतंत्र के अंत तथा भारत में जनतंत्र (प्रजातंत्र) के आगमन की गूँज है। इसका अर्थ यह है कि समय का पहिया तेज़ी से बदल रहा है और अब सत्ता राजा या किसी निरंकुश शासक के हाथों में न रहकर देश की आम जनता के हाथों में आ रही है।
प्रश्न 2: कविता के आरंभ में कवि भारतीय जनता का वर्णन किस रूप में करता है?
उत्तर:
कविता के आरंभ में कवि भारतीय जनता का वर्णन सदियों से शोषित, दमित और निष्प्राण पड़ी मिट्टी की अबोध मूरतों के रूप में करता है। वह बताता है कि जनता जाड़े-पाले की पीड़ा सहन करती है तथा उसके अंग-अंग में शोषण रूपी साँप डस रहे हैं, फिर भी वह बिना कोई शिकायत किए शांत और मौन रहकर दुख सहती आई है।
प्रश्न 3: कवि के अनुसार किन लोगों की दृष्टि में जनता फूल या दूधमुँही बच्ची की तरह है और क्यों? कवि क्या कहकर उनका प्रतिवाद करता है?
उत्तर:
  • किनकी दृष्टि में और क्यों: स्वार्थी शासकों और नेताओं की दृष्टि में जनता 'फूल' या 'दूधमुँही बच्ची' की तरह है। वे मानते हैं कि जिस तरह फूल को जब चाहे सजा लो और उतार दो, या दूधमुँही बच्ची को चार खिलौने देकर बहला दो, वैसे ही जनता को भी थोड़े से प्रलोभन और बहकावे में रखा जा सकता है।
  • प्रतिवाद: कवि इसका कड़ा प्रतिवाद करते हुए कहता है कि जनता जब क्रोधित होती है, तो भूडोल (भूकंप) आ जाता है और बवंडर उठ खड़े होते हैं। जनता की हुंकारों से राजमहलों की नींव उखड़ जाती है और हवा में शासकों के ताज उड़ जाते हैं।
प्रश्न 4: कवि जनता के स्वप्न का किस तरह चित्र खींचता है?
उत्तर:
कवि जनता के स्वप्न को अजय (अजेय) और अत्यंत शक्तिशाली बताता है। जनतंत्र की स्थापना का यह स्वप्न अंधकार रूपी तिमिर का वक्ष चीरकर बाहर आता है। सदियों की ठंडी-बुझी राख में क्रांति की चिंगारी सुलग उठी है और मिट्टी (जनता) अब सोने का मुकुट पहनकर इठलाने को तैयार है।
प्रश्न 5: विराट जनतंत्र का स्वरूप क्या है? कवि किसके सिर पर मुकुट धरने की बात करता है और क्यों?
उत्तर:
  • विराट जनतंत्र का स्वरूप: भारत का जनतंत्र विश्व का सबसे बड़ा (विराट) जनतंत्र है, जो ३३ करोड़ (तैंतीस कोटि) जनता की जन-शक्ति और जनमत पर आधारित है।
  • किसके सिर पर मुकुट और क्यों: कवि ३३ करोड़ आम प्रजा (जनता) के सिर पर मुकुट धरने की बात करता है। क्योंकि वास्तविक राजा अब कोई एक व्यक्ति या शासक नहीं है, बल्कि देश का हर एक नागरिक ही इस जनतंत्र का असली स्वामी है।
प्रश्न 6: कवि की दृष्टि में आज के देवता कौन हैं और वे कहाँ मिलेंगे?
उत्तर:
कवि की दृष्टि में आज के देवता मंदिरों, राजप्रासादों या तहखानों में रहने वाली मूर्तियाँ या राजा नहीं हैं, बल्कि देश के मेहनतकश किसान और मजदूर हैं। वे सड़कों पर गिट्टी तोड़ते हुए और खेतों तथा खलिहानों में कड़ी धूप और पसीने में काम करते हुए मिलेंगे।
प्रश्न 7: कविता का मूल भाव क्या है? संक्षेप में स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
'जनतंत्र का जन्म' कविता का मूल भाव भारत में सदियों पुरानी विदेशी परतंत्रता और राजशाही व्यवस्था का अंत कर प्रजातांत्रिक (लोकतांत्रिक) मूल्यों की स्थापना का जयघोष करना है। यह कविता स्पष्ट करती है कि सत्ता की असली शक्ति जनता है। किसानों और मजदूरों के श्रम से ही देश का निर्माण होता है, इसलिए जनतंत्र में वास्तविक सिंहासन और मुकुट के अधिकारी भी वही हैं।
प्रश्न 8: व्याख्या करें –
(क) "सदियों की ठंडी-बुझी राख सुगबुगा उठी,
मिट्टी सोने का ताज पहन इठलाती है;"
प्रसंग: प्रस्तुत पंक्तियाँ राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' द्वारा रचित 'जनतंत्र का जन्म' शीर्षक कविता से उद्धृत हैं।
व्याख्या: कवि कहते हैं कि सदियों की गुलामी और दमन से जो भारतीय जनता निष्प्राण और हताश पड़ी थी, उसमें अब स्वतंत्रता और जनतंत्र की चेतना सुलग उठी है। जिस साधारण मिट्टी (जनता) को तुच्छ समझा जाता था, वह अब अपने अधिकारों को प्राप्त कर स्वाभिमान से सिंहासन पर विराजमान होने जा रही है।
(ख) "हुंकारों से महलों की नींव उखड़ जाती,
साँसों के बल से ताज हवा में उड़ता है;
जनता की रोके राह, समय में ताव कहाँ?
वह जिधर चाहती, काल उधर ही मुड़ता है।"
प्रसंग: प्रस्तुत पंक्तियाँ रामधारी सिंह 'दिनकर' की कविता 'जनतंत्र का जन्म' से ली गई हैं।
व्याख्या: इन पंक्तियों में कवि ने अपार जन-शक्ति का ओजस्वी वर्णन किया है। कवि कहते हैं कि जब जनता अपने अधिकारों के लिए हुंकार भरती है, तो बड़े-बड़े राजमहलों और अन्यायी शासकों के सिंहासन उखड़ जाते हैं। समय की धारा में इतनी सामर्थ्य नहीं कि वह उमड़ती हुई जन-शक्ति का रास्ता रोक सके; जनता जिस दिशा में संघर्ष का रुख मोड़ती है, इतिहास और काल को भी उसी ओर झुकना पड़ता है।
II. कविता के आस-पास
1. हिंदी में राष्ट्रकवि का सम्मान किन-किन कवियों को प्राप्त हुआ है? कौन-से कवि हैं जिन्हें आप राष्ट्रकवि कहना चाहेंगे और क्यों?
उत्तर:
  • सम्मानित कवि: हिंदी साहित्य में मुख्य रूप से मैथिलीशरण गुप्त और रामधारी सिंह 'दिनकर' को 'राष्ट्रकवि' के सम्मान से अलंकृत किया गया है।
  • हमारा विचार: हम रामधारी सिंह 'दिनकर' को राष्ट्रकवि कहना चाहेंगे क्योंकि उनकी रचनाओं में राष्ट्रीय चेतना, ओज, देशप्रेम और आम जनता के जागरण का स्वर अत्यंत प्रखर और प्रभावी रूप में व्यक्त हुआ है।
2. दिनकर उत्तर छायावाद के कवि हैं। उत्तर छायावाद क्या है? बिहार के अन्य उत्तर छायावादी कवियों की सूची शिक्षक की सहायता से बनाएँ।
उत्तर:
  • उत्तर छायावाद: छायावाद के उत्तरार्ध (लगभग 1930 के बाद) की वह काव्य धारा जिसमें छायावादी रहस्यवाद और अति-काल्पनिकता से हटकर राष्ट्रीयता, प्रगतिशीलता, यथार्थवाद और जन-जागरण के प्रखर स्वर प्रमुख बने, उसे 'उत्तर छायावाद' कहा जाता है।
  • बिहार के प्रमुख उत्तर छायावादी कवि:
    • रामधारी सिंह 'दिनकर'
    • जानकी वल्लभ शास्त्री
    • आर० सी० प्रसाद सिंह
    • नेपाल सिंह 'नेपाल'
3. दिनकर का एक गद्य पाठ बारहवीं कक्षा की पाठ्यपुस्तक 'दिगंत भाग-2' में संकलित है। इस पाठ को उपलब्ध कर पढ़ें एवं अपने मित्रों तथा शिक्षकों से विमर्श करें।
उत्तर:
(कक्षा १२वीं की पाठ्यपुस्तक 'दिगंत भाग-2' में रामधारी सिंह 'दिनकर' जी का प्रसिद्ध निबंध 'अर्धनारीश्वर' संकलित है। विद्यार्थी पुस्तकालय या शिक्षक की सहायता से इसे पढ़कर स्त्री-पुरुष की समानता पर आधारित विचारों का अध्ययन करें।)
III. भाषा की बात

1. निम्नांकित शब्दों के पर्यायवाची लिखें –

शब्द पर्यायवाची शब्द
सदीशताब्दी, सौ वर्ष
राखभस्म, विभूति
ताजमुकुट, किरीट
सिंहासनराजगादी, तख्त
कसकटीस, दर्द, पीड़ा
दर्ददुख, व्यथा, पीड़ा
कसमसौगंध, शपथ
जनमतलोकमत, प्रजा की राय
फूलपुष्प, कुसुम, सुमन
भूडोलभूकंप, भूचाल
भुकुटीभौंह, भृकुटि
कालसमय, वक्त, मृत्यु
तिमिरअंधकार, अँधेरा
नादध्वनि, शब्द, स्वर
राजप्रासादराजमहल, महल
मंदिरदेवालय, शिवाला

2. निम्नांकित के लिंग-निर्णय करें –

शब्द लिंग वाक्य प्रयोग
तावपुल्लिंगउसका ताव चढ़ गया।
दर्दपुल्लिंगसीने में दर्द हो रहा है।
वेदनास्त्रीलिंगउसकी वेदना असह्य थी।
कसमस्त्रीलिंगमैंने कसम खाई है।
हुंकारस्त्रीलिंगजनता की हुंकार गूँज उठी।
बवंडरपुल्लिंगज़ोरदार बवंडर उठा।
गवाक्षपुल्लिंगबड़ा गवाक्ष खुला है।
जगतपुल्लिंगयह जगत परिवर्तनशील है।
अभिषेकपुल्लिंगराजा का अभिषेक हुआ।
श्रृंगारपुल्लिंगउसने सुंदर श्रृंगार किया।
प्रजास्त्रीलिंगप्रजा सुखी है।

3. कविता से सामासिक पद चुनें एवं उनके समास निर्दिष्ट करें –

सामासिक पद समास का नाम स्पष्टीकरण
अंग-अंगअव्ययीभाव समासपुनरुक्त शब्द
दूधमुँहीबहुव्रीहि समासदूध पीते मुँह वाली - बच्ची
कोपाकुलतत्पुरुष समासकोप से आकुल - करण तत्पुरुष
घरघर-नादकर्मधारय / तत्पुरुष समासघरघर का नाद
राजप्रासादतत्पुरुष समासराजा का प्रासाद - संबंध तत्पुरुष
तहखानातत्पुरुष समासतह का खाना
राजदंडतत्पुरुष समासराज्य का दंड
धूसरताभाववाचक संज्ञासमास पद नहीं
३३ कोटि (तैंतीस कोटि)द्विगु समाससंख्यावाचक पद
IV. शब्द निधि (शब्दार्थ)
शब्द अर्थ
नादस्वर, ध्वनि
गूढ़रहस्यपूर्ण
भूडोलधरती का हिलना-डोलना, भूकंप
कोपाकुलक्रोध से बेचैन
ताजमुकुट
अब्धवर्ष, साल
गवाक्षबड़ी खिड़की, झरोखा
तिमिरअंधकार
राजदंडराज्याधिकार, शासन करने का अधिकार
धूसरतामटमैलापन

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