Chapter 6. बहादुर | BSEB 10 Hindi Notes


पाठ 6: बहादुर

बिहार बोर्ड (BSEB) कक्षा 10वीं हिंदी (गोधूलि भाग-2, गद्य खंड) | सम्पूर्ण नोट्स

1. पाठ का संक्षिप्त परिचय (Overview)

  • पाठ का नाम: बहादुर
  • विधा: कहानी
  • लेखक: अमरकांत
  • मूल भाव: मँझोले शहर के एक निम्न-मध्यमवर्गीय परिवार में काम करने वाले एक नेपाली घरेलू नौकर (बहादुर) के माध्यम से मानवीय संवेदना, शोषण, वर्ग-भेद और आत्मसम्मान का यथार्थवादी चित्रण। यह कहानी दिखाती है कि कैसे स्नेह और विश्वास के अभाव में एक सीधा-सादा बालक अपने स्वाभिमान की रक्षा के लिए बिना कुछ लिए चुपचाप घर छोड़कर चला जाता है, जिससे बाद में परिवार के सभी लोग अपराध-बोध और पश्चाताप की आग में जलते हैं।

2. लेखक परिचय (अमरकांत)

  • जन्म: जुलाई 1925 ई० में नगरा, बलिया (उत्तर प्रदेश) में।
  • शिक्षा:
    • गवर्नमेंट हाईस्कूल, बलिया से हाईस्कूल।
    • 1942 के स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भाग लेने के कारण पढ़ाई कुछ समय बाधित रही; अंततः 1946 ई० में सतीशचंद्र कॉलेज, बलिया से इंटरमीडिएट किया।
    • 1947 ई० में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बी० ए० की डिग्री प्राप्त की।
  • पत्रकारिता एवं कार्य:
    • 1948 ई० में आगरा के दैनिक पत्र 'सैनिक' के संपादकीय विभाग में नौकरी की।
    • आगरा में ही 'प्रगतिशील लेखक संघ' से जुड़े।
    • दैनिक 'अमृत पत्रिका' (इलाहाबाद), दैनिक 'भारत' (इलाहाबाद), मासिक पत्रिका 'कहानी' और 'मनोरमा' के संपादकीय विभागों से संबद्ध रहे।
  • साहित्यिक विशेषताएँ: स्वाधीनता के बाद के हिंदी कथा साहित्य के प्रमुख हस्ताक्षर। निम्न-मध्यमवर्ग के जीवन-अनुभवों, जिजीविषा और फक्कड़पन का मुहावरेदार व देशज भाषा में सजीव चित्रण।
  • प्रमुख कृतियाँ:
    • कहानी संग्रह: 'जिंदगी और जोंक', 'देश के लोग', 'मौत का नगर', 'मित्र-मिलन', 'कुहासा'।
    • उपन्यास: 'सूखा पत्ता', 'आकाशपक्षी', 'काले उजले दिन', 'सुखजीवी', 'बीच की दीवार', 'ग्राम सेविका'।
    • बाल उपन्यास: 'वानर सेना'।
  • पुरस्कार एवं सम्मान: अखिल भारतीय कहानी प्रतियोगिता में कहानी 'डिप्टी कलेक्टरी' पुरस्कृत। कथा लेखन के लिए 'साहित्य अकादेमी पुरस्कार' से सम्मानित।

3. कहानी का विस्तृत सारांश (Summary)

बहादुर का घर छोड़ना और लेखक के घर आगमन:

बहादुर नेपाल और बिहार की सीमा पर स्थित गाँव का रहने वाला 12-13 वर्ष का एक नेपाली गँवई गोरखा था। उसका कद ठिगना, शरीर चकइठ, रंग गोरा और मुँह चपटा था। उसके पिता की मृत्यु युद्ध में हो गई थी। गुस्सैल माँ द्वारा भैंस को पीटने के आरोप में अत्यधिक पिटाई किए जाने के कारण वह घर से माँ की हाँडी से 2 रुपये चुराकर भाग गया और गोरखपुर आ गया। लेखक के साले साहब उसे लेखक के घर नौकर के रूप में लेकर आए। लेखक की पत्नी निर्मला ने उसके नाम 'दिलबहादुर' में से 'दिल' शब्द उड़ाकर उसका नाम केवल 'बहादुर' रख दिया।

प्रारंभिक सुख और बहादुर की दिनचर्या:

शुरू में बहादुर बहुत हँसमुख और मेहनती साबित हुआ। वह सुबह नीम की दातुन तोड़ने से लेकर घर की सफाई, पोंछा, कपड़े धोना, बर्तन मलना और चाय-खाना बनाना सब काम तत्परता से करता था। रात को वह अपनी टूटी बाँसखट पर बैठकर नेपाली टोपी पहनता, आईने में मुँह देखता और गोलियों, ताश की गड्डी, ब्लेड व कागज की नावों के साथ खेलते हुए पहाड़ी लोकगीत गुनगुनाता था।

शोषण और दुर्व्यवहार की शुरुआत:

धीरे-धीरे लेखक के बड़े लड़के किशोर ने अपने सारे काम (जूता पॉलिश, साइकिल सफाई, कपड़े धुलवाना, मालिश) बहादुर पर थोप दिए। ज़रा-सी गलती पर किशोर उसे डंडे से मारता और भद्दी गालियाँ देता। बाद में निर्मला ने भी पड़ोसियों की बातों में आकर उसके लिए रोटियाँ बनाना बंद कर दिया और खुद रोटी न बनाने पर उसे थप्पड़ मारे। बहादुर घर के सभी सदस्यों की प्रताड़ना का शिकार होने लगा।

चोरी का झूठा आरोप और पिटाई:

एक रविवार को लेखक के साले/रिश्तेदार परिवार सहित आए। रिश्तेदार की पत्नी ने प्रपंच रचते हुए आरोप लगाया कि चारपाई पर रखे उसके ₹11 (ग्यारह रुपये) खो गए हैं और शक बहादुर पर किया। रिश्तेदार ने उसे पुलिस में देने की धमकी दी और लेखक ने भी गुस्से में आकर बहादुर को ज़ोरदार तमाचा जड़ दिया। बहादुर निर्दोष था और रोते हुए मना करता रहा।

बहादुर का निष्क्रमण और सबका पश्चाताप:

इस अपमान और रोज़ की मार-पीट से बहादुर का मन टूट गया। एक दिन दोपहर में सिलबट्टा हाथ से छूटकर गिर जाने पर टूटने के डर से वह अपना सारा सामान (कपड़े, जूते, बिस्तर, जमा की गई तनख्वाह के पैसे) छोड़कर चुपचाप घर से भाग गया। उसके जाने के बाद पूरे घर में सन्नाटा छा गया। निर्मला रोने लगी, किशोर ने शहर भर में उसे ढूँढा और पछतावा किया, तथा लेखक भी अपने किए पर भारी ग्लानि और लघुता का अनुभव करने लगे।

4. परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Important One-Liners)

  • 'बहादुर' कहानी के लेखक कौन हैं — अमरकांत
  • अमरकांत का जन्म कब और कहाँ हुआ — जुलाई 1925 ई० में नगरा, बलिया (उत्तर प्रदेश)
  • अमरकांत की किस कहानी को अखिल भारतीय स्तर पर पुरस्कार मिला — 'डिप्टी कलेक्टरी'
  • अमरकांत का बाल उपन्यास कौन-सा है — 'वानर सेना'
  • बहादुर का पूरा नाम क्या था — दिलबहादुर
  • बहादुर के नाम से 'दिल' शब्द किसने हटाया — निर्मला (लेखक की पत्नी) ने
  • बहादुर कहाँ का रहने वाला था — नेपाल और बिहार की सीमा पर स्थित एक गाँव का
  • बहादुर की उम्र कितनी थी — 12–13 वर्ष
  • बहादुर के पिता कहाँ मारे गए थे — युद्ध में
  • बहादुर घर छोड़कर क्यों भागा था — माँ की अत्यधिक पिटाई के कारण (भैंस को मारने पर हुई पिटाई)
  • बहादुर घर से भागते समय माँ की हाँडी से कितने रुपये लेकर भागा था — 2 रुपये
  • लेखक के घर बहादुर को कौन लाया था — लेखक के साले साहब
  • लेखक के बड़े लड़के का नाम क्या था — किशोर
  • रिश्तेदार की पत्नी ने कितने रुपये चोरी होने का प्रपंच रचा — 11 रुपये (₹11)
  • बहादुर घर से भागते समय अपने साथ क्या ले गया — कुछ भी नहीं (कपड़े, जूते, बिस्तर और कमाई सब छोड़ गया)
  • बहादुर के चले जाने पर किसे सबसे अधिक पश्चाताप हुआ — लेखक, निर्मला और किशोर (समस्त परिवार को)

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