बिहार बोर्ड कक्षा 10 हिन्दी (गद्य खंड) | पाठ 3: "भारत से हम क्या सीखें" — फ्रेडरिक मैक्समूलर
सम्पूर्ण 50 महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ, लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
उत्तर: यह एक भाषण (आलेख) है और इसके लेखक विश्वविख्यात भारतविद् फ्रेडरिक मैक्समूलर हैं।
उत्तर: 6 दिसंबर 1823 ई० को आधुनिक जर्मनी के डेसाउ नामक नगर में।
उत्तर: विल्हेल्म मूलर।
उत्तर: लिपजिंग विश्वविद्यालय से।
उत्तर: 'हितोपदेश' का।
उत्तर: 'कठ' और 'केन' उपनिषदों का।
उत्तर: 'मेघदूत' का।
उत्तर: 'वेदांतियों का भी वेदांती'।
उत्तर: 'नाइट' की उपाधि से।
उत्तर: 28 अक्टूबर 1900 ई० में।
उत्तर: डॉ० भवानीशंकर त्रिवेदी ने।
उत्तर: भारतीय सिविल सेवा (ICS) हेतु चयनित युवा अंग्रेज अधिकारियों को।
उत्तर: भारत को।
उत्तर: भारत के गाँवों में (ग्रामवासियों के बीच)।
उत्तर: हर्कस को।
उत्तर: श्री हेकल का।
उत्तर: एक घड़ा।
उत्तर: प्राचीन काल का एक प्रसिद्ध सोने का सिक्का।
उत्तर: उनका ऐतिहासिक महत्व समझे बिना उन्हें गला डाला।
उत्तर: प्लेटो के 'क्रटिलस' में।
उत्तर: 'इग्निस' (Ignis)।
उत्तर: ग्रीक में 'मूस' और लैटिन में 'मुस'।
उत्तर: 'अस्मि' क्रिया।
उत्तर: तीन हजार (3000) से भी अधिक वर्षों तक।
उत्तर: डॉ० क्ली ने।
उत्तर: सर विलियम जोन्स ने।
उत्तर: जरथुस्त्र धर्म की।
उत्तर: मानव के उद्भव, विकास और उसकी प्रजातियों के अध्ययन से।
उत्तर: यूरोप के।
उत्तर: यूरोप से।
उत्तर: मैक्समूलर के अनुसार सच्चे भारत के दर्शन कलकत्ता, बंबई या मद्रास जैसे आधुनिक नगरों में नहीं, बल्कि भारत के पारंपरिक गाँवों में हो सकते हैं; क्योंकि वहाँ की संस्कृति, रीति-रिवाज और प्राचीन जीवन-मूल्य आज भी जीवंत हैं।
उत्तर: वारेन हेस्टिंग्स ने सोने के सिक्के कंपनी के निदेशकों को भेजे, किंतु उन्होंने उनका ऐतिहासिक महत्व जाने बिना उन्हें गला दिया। इससे सीख मिलती है कि अज्ञानता के कारण दुर्लभ ऐतिहासिक धरोहरों को नष्ट होने से बचाना चाहिए।
उत्तर: भारत ब्राह्मण (वैदिक) धर्म की भूमि है, बौद्ध धर्म की जन्मस्थली है तथा पारसियों के जरथुस्त्र धर्म की शरणस्थली रहा है। यहाँ विश्व के सभी प्रमुख धर्मों के वास्तविक उद्भव और विकास का प्रत्यक्ष परिचय मिलता है।
उत्तर: संस्कृत विश्व की प्राचीनतम भाषाओं में से एक है। इसकी संरचना अत्यंत वैज्ञानिक है और यह ग्रीक, लैटिन, गोथिक तथा पुरानी स्लाव आदि सभी भारोपीय भाषाओं की अग्रजा (बड़ी बहन) है।
उत्तर: संस्कृत के प्रकाश में आने के बाद ही यूरोपीय विद्वानों को ग्रीक, लैटिन और जर्मन भाषाओं की पारिवारिक समानता का ज्ञान हुआ, जिससे आधुनिक तुलनात्मक भाषाविज्ञान का जन्म संभव हो सका।
उत्तर: भारत नीति-कथाओं और दंतकथाओं का मूल उद्गम स्थल है। यहाँ से पंचतंत्र और बौद्ध जातक कथाओं के माध्यम से अनेक कहानियाँ (जैसे शेर की खाल में गधा) पश्चिम और यूनान के देशों तक पहुँचीं।
उत्तर: 1783 में भारत यात्रा के दौरान उन्होंने अनुभव किया कि एशिया की यह पावन भूमि नानाविध ज्ञान-विज्ञान की धात्री, ललित कलाओं की जननी और मानव प्रतिभा के उत्पादन के लिए अत्यंत उर्वर क्षेत्र है।
उत्तर: उन्होंने कहा कि नए अंग्रेज अधिकारियों को यह सोचकर निराश नहीं होना चाहिए कि भारत में अब कुछ नया खोजने को नहीं बचा; गंगा और सिंधु के मैदानों में ज्ञान, इतिहास और अनुसंधान की असीम संभावनाएँ आज भी शेष हैं।
उत्तर: भारत में विभिन्न जातियों, जनजातियों, भाषाओं, आचार-विचारों और प्राचीन रीति-रिवाजों का ऐसा वैविध्य विद्यमान है जो मानव-शास्त्र के विद्यार्थियों को विश्व में अन्यत्र कहीं नहीं मिल सकता।
उत्तर: यदि किसी को पुरातत्त्व में रुचि है, तो जनरल कनिंघम की रिपोर्ट पढ़कर नालंदा, राजगृह जैसे बौद्ध विहारों और प्राचीन स्मारकों के उत्खनन द्वारा भारत के गौरवशाली अतीत को खोजा जा सकता है।
उत्तर: क्योंकि पाश्चात्य विद्वान होते हुए भी मैक्समूलर ने भारतीय उपनिषदों, वेदों और अद्वैत वेदांत के गंभीर दर्शन को अत्यंत श्रद्धा और निष्ठा के साथ आत्मसात किया था।
उत्तर: मैक्समूलर सच्चे भारत-भक्त और निष्काम विद्या-व्यसनी थे। उनके लिए वेदों और भारतीय ज्ञान-साधना के सान्निध्य के आगे सांसारिक पदवियाँ और मान-सम्मान अत्यंत तुच्छ थे।
उत्तर: भारत के प्राचीन धर्मसूत्र (जैसे मानव धर्मशास्त्र) और ग्रामीण पंचायत प्रणाली विधि-शास्त्र के विद्यार्थियों को प्राचीन कानूनी संस्थाओं और स्वशासन के विकास को समझने की समृद्ध सामग्री प्रदान करते हैं।
उत्तर: संस्कृत का 'अग्नि', लैटिन का 'इग्निस' और लिथुआनियन का 'उग्निस' यह सिद्ध करते हैं कि प्राचीन काल में आर्य जातियाँ विभाजित होने से पूर्व एक ही मूल स्थान पर रहती थीं और एक ही भाषा बोलती थीं।
उत्तर: चार वर्ष की आयु में पिता के देहांत के बाद घोर आर्थिक तंगी के बावजूद मैक्समूलर ने संगीत, ग्रीक, लैटिन और 18 वर्ष की आयु में लिपजिंग से संस्कृत का गहन अध्ययन किया।
उत्तर: 'भारत से हम क्या सीखें' फ्रेडरिक मैक्समूलर द्वारा भारतीय सिविल सेवा के युवा अंग्रेज अधिकारियों के समक्ष दिया गया एक अत्यंत प्रेरणादायी और विचारोत्तेजक भाषण है। मैक्समूलर भारत को सर्वविध संपदा और प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण ऐसा देश बताते हैं जहाँ भूतल पर ही स्वर्ग की छटा दिखाई देती है। वे स्पष्ट करते हैं कि मानव मस्तिष्क के दार्शनिक चिंतन, धर्म, भाषाविज्ञान, पुरातत्त्व, नृवंश विद्या, कानून और नीति-कथाओं के अध्ययन के लिए भारत विश्व की सबसे समृद्ध प्रयोगशाला है। संस्कृत भाषा की वैज्ञानिकता और प्राचीनता ने समूचे यूरोपीय भाषाविज्ञान को नई दिशा दी। मैक्समूलर नवागंतुक अधिकारियों से आह्वान करते हैं कि वे भारत को केवल औपनिवेशिक दृष्टि से न देखें, बल्कि सर विलियम जोन्स की भाँति एक अन्वेषक बनकर यहाँ के ज्ञान-भंडार, ग्रामीण जीवन और गौरवशाली सभ्यता से मानवता के कल्याण का पाठ सीखें।
उत्तर: मैक्समूलर ने विभिन्न ज्ञान-क्षेत्रों के माध्यम से भारत की अद्वितीयता सिद्ध की है:
- दर्शन और अध्यात्म: प्लेटो और कांट जैसे पाश्चात्य विचारकों की जटिलतम समस्याओं के समाधान उपनिषदों और वेदांत दर्शन में पहले ही खोजे जा चुके हैं।
- भाषाविज्ञान: संस्कृत ने ग्रीक, लैटिन और ट्यूटानिक भाषाओं के आपसी संबंध को स्पष्ट कर भाषाविज्ञान की आधारशिला रखी।
- पुरातत्त्व व इतिहास: नालंदा और प्राचीन बौद्ध विहारों के अवशेष विश्व इतिहास के अनसुलझे अध्यायों को प्रामाणिकता प्रदान करते हैं।
- प्रकृति व जीव-विज्ञान: हिमालय से श्रीलंका तक का भू-भाग, वनस्पति (हर्कस) और समुद्री जीव (हेकल) वैज्ञानिकों के लिए असीम अध्ययन का केंद्र हैं।
- धर्म और समाज: भारत सभी प्रमुख धर्मों के ऐतिहासिक विकास और ग्राम पंचायतों के रूप में प्राचीनतम स्वशासन प्रणाली का प्रत्यक्ष साक्षी है।
उत्तर: 18वीं शताब्दी के अंत तक यूरोपीय विद्वान ग्रीक और लैटिन की समानताओं को लेकर भ्रमित थे। किंतु जैसे ही संस्कृत भाषा का परिचय पाश्चात्य जगत से हुआ, भाषाविज्ञान में एक युगांतरकारी क्रांति आ गई। संस्कृत ने यह स्पष्ट कर दिया कि संस्कृत, ग्रीक, लैटिन, फारसी, गोथिक और पुरानी अंग्रेजी एक ही मूल भारोपीय (Indo-European) भाषा-परिवार की शाखाएँ हैं। 'मातृ' (Mother), 'पितृ' (Father), 'अग्नि' (Ignis), 'अस्मि' (मैं हूँ) जैसे शब्दों के साक्ष्य ने यह सिद्ध कर दिया कि पूर्व और पश्चिम की जातियाँ कभी एक ही परिवार के रूप में साथ रहती थीं। इस अध्ययन ने न केवल भाषा के रहस्यों को खोला, बल्कि संकीर्ण नस्लीय दीवारों को तोड़कर संपूर्ण मानव जाति के साझा इतिहास को रेखांकित किया।
उत्तर: यह शीर्षक अत्यंत सार्थक, विनम्र और विचारोत्तेजक है। 19वीं सदी में जब ब्रिटिश शासक भारत को पिछड़ा और असभ्य मानकर उस पर शासन करने का दंभ भरते थे, उस दौर में एक यूरोपीय विद्वान द्वारा 'भारत से सीखने' की बात कहना औपनिवेशिक अहंकार पर गहरी चोट थी। मैक्समूलर ने सिद्ध किया कि भारत केवल भौतिक वस्तुओं का देश नहीं, बल्कि ज्ञान, दर्शन, सहिष्णुता, धर्म और भाषा की जननी है। पश्चिमी जगत को अपने जीवन को सर्वांगीण, मानवीय और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाने के लिए भारत के शाश्वत चिंतन की शरण लेनी ही होगी। अतः यह शीर्षक व्याख्यान की मूल आत्मा को पूर्णतः अभिव्यक्त करता है।
उत्तर:
- प्रसंग: प्रस्तुत गद्यांश महान भारतविद् फ्रेडरिक मैक्समूलर द्वारा रचित तथा डॉ० भवानीशंकर त्रिवेदी द्वारा अनूदित आलेख 'भारत से हम क्या सीखें' के प्रारंभिक अंश से उद्धृत है।
- व्याख्या: मैक्समूलर भारत की प्राकृतिक सुषमा और बौद्धिक गरिमा की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहते हैं कि यदि पूरी पृथ्वी का भ्रमण करके किसी ऐसे देश की पहचान करनी हो जो संपूर्ण प्राकृतिक वैभव और आत्मिक शांति से संपन्न हो, तो वह एकमात्र देश भारत ही है। यहाँ का नैसर्गिक सौंदर्य धरती पर साक्षात् स्वर्ग का अहसास कराता है। इसके अतिरिक्त, यदि मानव चेतना और बौद्धिक चिंतन के सर्वोच्च शिखर—अर्थात् जीवन, मृत्यु, आत्मा और परमात्मा के गूढ़ रहस्यों के समाधान—का प्रथम साक्षात्कार करने वाले देश की बात की जाए, तो वह भी केवल भारत ही है जिसने उपनिषदों और वेदों के माध्यम से समूचे विश्व को ज्ञान का दिव्य आलोक प्रदान किया।
0 Comments