Chapter 3. भारत से हम क्या सीखें | BSEB 10 Hindi Solution


Class 10 Hindi (गोधूलि भाग-2: गद्य खंड)

अध्याय 3: भारत से हम क्या सीखें (रचयिता: फ्रेडरिक मैक्समूलर | भाषांतरण: डॉ० भवानीशंकर त्रिवेदी)

I. पाठ के साथ (प्रश्न-उत्तर)
प्रश्न 1: समस्त भूमंडल में सर्वविद् सम्पदा और प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण देश भारत है। – लेखक ने ऐसा क्यों कहा है?
उत्तर:
लेखक मैक्समूलर ने भारत को सर्वविद् संपदा और प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण देश इसलिए कहा है क्योंकि यहाँ भूतल पर ही स्वर्ग की छटा निखरती है। मानव मस्तिष्क की उत्कृष्टतम उपलब्धियों का सर्वप्रथम साक्षात्कार भारत में ही हुआ है। जीवन की सबसे बड़ी-बड़ी समस्याओं पर विचार कर दार्शनिक समाधान निकालने में भारत विश्व में अग्रणी रहा है। यहाँ का प्राकृतिक वातावरण, भू-विज्ञान, वनस्पति जगत और नृवंश विद्या संसार भर के शोधकर्ताओं व विद्वानों को अपनी ओर आकर्षित करती है।
प्रश्न 2: लेखक की दृष्टि में सच्चे भारत के दर्शन कहाँ हो सकते हैं और क्यों?
उत्तर:
लेखक की दृष्टि में सच्चे भारत के दर्शन कोलकाता, मुंबई, चेन्नई या दिल्ली जैसे आधुनिक शहरों में नहीं, बल्कि भारत के गाँवों (ग्रामवासियों) में हो सकते हैं।

कारण: भारत की वास्तविक संस्कृति, सरलता, प्राचीन परंपराएँ, रीति-रिवाज और आत्मीयता आज भी ग्रामीण जीवन में ही सुरक्षित हैं। शहरों में तो पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव अधिक देखने को मिलता है।
प्रश्न 3: भारत को पहचान सकने वाली दृष्टि की आवश्यकता किनके लिए वांछनीय है और क्यों?
उत्तर:
भारत को पहचान सकने वाली दृष्टि की आवश्यकता यूरोपीय लोगों, विशेषकर भारत आने वाले युवा सिविल सेवा अधिकारियों तथा शोधार्थियों के लिए वांछनीय है।

कारण: क्योंकि भारत केवल अतीत का देश नहीं है, बल्कि आज भी यहाँ ऐसी अनेक समस्याएँ और ज्ञान के विस्तृत क्षेत्र विद्यमान हैं, जिनका अध्ययन व समाधान 19वीं-20वीं सदी के यूरोपीय समाज के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत उपयोगी और प्रेरणादायक है।
प्रश्न 4: लेखक ने किन विशेष क्षेत्रों में अभिरुचि रखने वालों के लिए भारत का प्रत्यक्ष ज्ञान आवश्यक बताया है?
उत्तर:
लेखक ने निम्नलिखित क्षेत्रों में रुचि रखने वालों के लिए भारत का प्रत्यक्ष ज्ञान अत्यंत आवश्यक बताया है:
  • भू-विज्ञान: हिमालय से श्रीलंका तक के विशाल भू-भाग के अध्ययन हेतु।
  • वनस्पति शास्त्र: हकस जैसे वनस्पति वैज्ञानिकों को आकर्षित करने वाली प्राकृतिक विविधता के लिए।
  • जीव-विज्ञान: भारतीय समुद्र तट और जीवों के अध्ययन (जैसे हेकल का अध्ययन) के लिए।
  • पुरातत्त्व एवं नृवंश विद्या: प्राचीन सभ्यताओं (नालंदा जैसे खंडहरों) और मानव जातियों के अध्ययन के लिए।
  • सिक्का शास्त्र (मुद्रा विज्ञान): प्राचीन ईरानी, ग्रीक, शक, कुषाण और इस्लामी सिक्कों के अध्ययन के लिए।
  • भाषा विज्ञान व विधिशास्त्र (कानून): संस्कृत और प्राचीन धर्मसूत्रों के अध्ययन के लिए।
प्रश्न 5: लेखक ने वारेन हेस्टिंग्स से संबंधित किस दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना का हवाला दिया है और क्यों?
उत्तर:
  • दुर्घटना: जब वारेन हेस्टिंग्स भारत का गवर्नर जनरल था, तब उसे वाराणसी के पास 172 'दारिस' (सोने के प्राचीन सिक्के) से भरा एक घड़ा मिला था। उसने अपने मालिक ईस्ट इंडिया कंपनी के निदेशक मंडल को उपहार स्वरूप ये सिक्के भिजवाए। परंतु कंपनी के निदेशकों ने उन प्राचीन सिक्कों का ऐतिहासिक महत्व न समझकर उन्हें गला डाला। जब हेस्टिंग्स इंग्लैंड लौटा, तब तक वे दुर्लभ ऐतिहासिक मुद्राएँ नष्ट हो चुकी थीं।
  • हवाला देने का कारण: लेखक यह दुर्घटना इसलिए बताता है ताकि भविष्य में आने वाले अंग्रेज अधिकारी ऐसी गलती न दोहराएँ और भारत की प्राचीन ऐतिहासिक धरोहरों का महत्व समझकर उनका संरक्षण करें।
प्रश्न 6: लेखक ने नीतिकथाओं के क्षेत्र में किस तरह भारतीय अवदान को रेखांकित किया है?
उत्तर:
लेखक ने स्पष्ट किया है कि भारत नीतिकथाओं और दंतकथाओं का उद्गम स्रोत रहा है। भारत के माध्यम से ही समय-समय पर अनेक नीतिकथाएँ पूर्व से पश्चिम (यूरोप) की ओर पहुँचीं। उदाहरण के लिए 'शेर की खाल में गधा' की कहावत सबसे पहले यूनानी दार्शनिक प्लेटो के 'क्रैटिलस' में मिलती है, जो वास्तव में भारतीय कथा से प्रेरित थी। इसी प्रकार बौद्ध धर्म की जातक कथाओं और पंचतंत्र ने पूरे विश्व के नीति-साहित्य को समृद्ध किया है।
प्रश्न 7: भारत के साथ यूरोप के व्यापारिक संबंध के प्राचीन प्रमाण लेखक ने क्या दिखाए हैं?
उत्तर:
लेखक ने बाइबिल और ऐतिहासिक स्रोतों के आधार पर बताया है कि सोलोमन के समय में ही भारत, सीरिया और फिलीस्तीन के बीच व्यापारिक संबंध थे। बाइबिल में उल्लिखित हाथी-दाँत, बंदर, मोर और चंदन की लकड़ी जैसी वस्तुएँ केवल भारत से ही 'ओफिर' बंदरगाह भेजी जाती थीं। इसके अतिरिक्त 'शाहनामा' के रचनाकाल (10वीं-11वीं सदी) में भी भारत और यूरोप के बीच व्यापारिक संबंध निरंतर जारी रहे।
प्रश्न 8: भारत की ग्राम पंचायतों को किस अर्थ में और किनके लिए लेखक ने महत्त्वपूर्ण बतलाया है? स्पष्ट करें।
उत्तर:
लेखक ने भारत की ग्राम पंचायतों को प्राचीन युग की सरल राजनीतिक इकाइयों और स्थानीय स्वशासन व्यवस्था को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बतलाया है। यह उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो राजनीति शास्त्र, विधिशास्त्र (कानून के प्राचीन स्वरूप) और शासन प्रणाली के ऐतिहासिक विकास का अध्ययन करना चाहते हैं।
प्रश्न 9: धर्मों की दृष्टि से भारत का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
धर्मों की दृष्टि से भारत का महत्व अद्वितीय है:
  • भारत ब्राह्मण (वैदिक) धर्म की भूमि है।
  • यह बौद्ध धर्म तथा जैन धर्म की जन्मभूमि है।
  • यह पारसियों के 'ज़रथुश्त्र धर्म' की शरणस्थली रहा है।
  • यहाँ आज भी नित्य नए-नए मत-मतांतर प्रकट और विकसित होते रहते हैं। इसलिए धर्म के वास्तविक उद्भव और विकास को समझने के लिए भारत एक आदर्श प्रयोगशाला है।
प्रश्न 10: भारत किस तरह अतीत और सुदूर भविष्य को जोड़ता है? स्पष्ट करें।
उत्तर:
भारत की भूमि पर एक ओर जहाँ अत्यंत प्राचीन इतिहास, वैदिक ज्ञान, भाषा और दर्शन सुरक्षित हैं, वहीं दूसरी ओर आज की आधुनिक समस्याओं (जैसे लोकप्रिय शिक्षा, कानून निर्माण, स्थानीय शासन) के ऐसे व्यावहारिक समाधान मिलते हैं जो आने वाले सुदूर भविष्य को सही दिशा दे सकते हैं। इस प्रकार भारत अपने समृद्ध अतीत से शिक्षा लेकर उज्ज्वल भविष्य के निर्माण की कड़ी बनता है।
प्रश्न 11: मैक्समूलर ने संस्कृत की कौन-सी विशेषताएँ और महत्त्व बतलाये हैं?
उत्तर:
मैक्समूलर के अनुसार संस्कृत की प्रमुख विशेषताएँ एवं महत्व निम्नलिखित हैं:
  • अति प्राचीनता: संस्कृत भाषा ग्रीक और लैटिन से भी अधिक प्राचीन है।
  • मूल स्वरूप का संरक्षण: इसके प्राचीन रूप आज भी भली-भाँति सुरक्षित हैं।
  • विश्व भाषाओं की अग्रजा: संस्कृत ही वह भाषा है जिसने ग्रीक, लैटिन, गॉथिक, केल्टिक आदि भारोपीय भाषाओं के पारस्परिक संबंध और समानता के रहस्य को उजागर किया।
  • विशद साहित्य: इसका ज्ञान-भंडार, दर्शन और व्याकरण अत्यंत परिष्कृत एवं वैज्ञानिक है।
प्रश्न 12: लेखक वास्तविक इतिहास किसे मानता है और क्यों?
उत्तर:
लेखक केवल युद्धों, राजाओं के जय-पराजय और साम्राज्यों के उत्थान-पतन के विवरण को वास्तविक इतिहास नहीं मानता। उसकी दृष्टि में वास्तविक इतिहास वह है जो मानव मस्तिष्क के विकास, ज्ञान-विज्ञान की साधना, धर्म, दर्शन, रीति-रिवाजों और विभिन्न संस्कृतियों के पारस्परिक आदान-प्रदान को दर्शाता है। यह सच्चा इतिहास केवल भारत के अध्ययन से ही पूर्णतः समझा जा सकता है।
प्रश्न 13: संस्कृत और दूसरी भारतीय भाषाओं के अध्ययन से पाश्चात्य जगत् को प्रमुख लाभ क्या-क्या हुए?
उत्तर:
  • भाषा विज्ञान का जन्म: संस्कृत के अध्ययन से पाश्चात्य जगत को 'तुलनात्मक भाषा विज्ञान' की नई दृष्टि मिली।
  • पारस्परिक संबंधों की समझ: यूरोपीय भाषाओं (ग्रीक, लैटिन आदि) का पारिवारिक संबंध संस्कृत के माध्यम से ही स्पष्ट हुआ।
  • मानव इतिहास का बोध: आर्य जाति के प्राचीन चिंतन, धर्म, दर्शन और आदिम जीवन के बारे में प्रामाणिक ज्ञान प्राप्त हुआ।
प्रश्न 14: लेखक ने भारत के लिए नवागंतुक अधिकारियों को किसकी तरह सपने देखने के लिए प्रेरित किया है और क्यों?
उत्तर:
लेखक ने नवागंतुक अधिकारियों को सर विलियम जोन्स की तरह सपने देखने के लिए प्रेरित किया है।

कारण: जब सर विलियम जोन्स 37 वर्ष की आयु में भारत की यात्रा पर निकले थे, तो उन्होंने जहाज के डेक पर खड़े होकर भारत के ज्ञान, साहित्य और संस्कृति को जानने का एक सुनहरा स्वप्न देखा था और यहाँ आकर 'एशियाटिक सोसाइटी' की स्थापना कर अद्भुत खोजें की थीं। लेखक चाहता है कि नए अधिकारी भी उसी निष्ठा और लगन से भारत को समझें।
प्रश्न 15: लेखक ने नया सिकंदर किसे कहा है? ऐसा कहना क्या उचित है? लेखक का अभिप्राय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
  • नया सिकंदर: लेखक ने भारत आने वाले युवा अंग्रेज अधिकारियों और अन्वेषकों को 'नया सिकंदर' कहा है।
  • औचित्य एवं अभिप्राय: यह कहना सर्वथा उचित है। सिकंदर केवल तलवार के बल पर भू-भाग जीतने आया था, परंतु लेखक का अभिप्राय यह है कि इन नए सिकंदरों को भारत के ज्ञान, साहित्य, दर्शन और संस्कृति के असीम सागर पर विजय प्राप्त करनी चाहिए। गंगा और सिंधु के मैदानों में अभी भी ज्ञान-साधना की ऐसी अपार विजय प्राप्त करना शेष है जो तलवार की विजय से कहीं अधिक श्रेष्ठ और स्थायी है।
II. पाठ के आस-पास
1. जनरल कनिंघम कौन थे और उनका क्या महत्त्व है? शिक्षक से मालूम करें।
उत्तर:
जनरल अलेक्जेंडर कनिंघम ब्रिटिश सेना के इंजीनियर तथा 'भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण' (ASI) के प्रथम महानिदेशक (फादर ऑफ इंडियन आर्कियोलॉजी) थे। उन्होंने भारत में नालंदा, सारनाथ, सांची आदि अनेक प्राचीन बौद्ध स्थलों और ऐतिहासिक अवशेषों का उत्खनन कर उन्हें विश्व पटल पर उजागर किया।
2. विलियम जोन्स के बारे में अधिक-से-अधिक जानकारी इकट्ठी कर मित्रों से उन पर चर्चा करें।
उत्तर:
सर विलियम जोन्स (1746–1794) एक प्रसिद्ध ब्रिटिश प्राच्यविद्याविद, भाषाशास्त्री और कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। उन्होंने 1784 ई० में 'एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल' की स्थापना की। उन्होंने कालिदास के प्रसिद्ध संस्कृत नाटक 'अभिज्ञानशाकुंतलम्' और 'गीतगोविंद' का अंग्रेजी में अनुवाद किया तथा यह सिद्ध किया कि संस्कृत, ग्रीक और लैटिन भाषाएँ एक ही मूल भाषा परिवार की शाखाएँ हैं।
3. सिकंदर कौन थे? भारत के प्रसंग में उनका किस तरह उल्लेख होता है? इतिहास के शिक्षक से जानकारी प्राप्त करें।
उत्तर:
सिकंदर (अलेक्जेंडर द ग्रेट) प्राचीन यूनान के मकदूनिया (मैसेडोनिया) का प्रतापी सम्राट था, जिसने विश्व-विजय का अभियान चलाया था। भारत के प्रसंग में 326 ई० पूर्व में उसने पश्चिमोत्तर भारत (पंजाब) पर आक्रमण किया था जहाँ उसका राजा पुरु (पोरस) के साथ ऐतिहासिक युद्ध हुआ था।
4. धर्मसूत्र और समयाचारिक सूत्र क्या हैं? कुछ प्रमुख सूत्रों के नाम मालूम करें।
उत्तर:
  • धर्मसूत्र एवं समयाचारिक सूत्र: प्राचीन भारतीय वैदिक साहित्य के वे कल्पसूत्र ग्रंथ हैं जिनमें सामाजिक विधि-विधान, आचार-विचार, वर्ण-धर्म, राजा के कर्तव्य और कानून से संबंधित नियम दिए गए हैं। ये स्मृतियों और हिंदू विधिशास्त्र के आधार हैं।
  • प्रमुख सूत्र: आपस्तंब धर्मसूत्र, गौतम धर्मसूत्र, बौधायन धर्मसूत्र और वशिष्ठ धर्मसूत्र।
5. मैक्समूलर के जीवन और कार्यों के बारे में जानकारी एकत्र कर अपने शिक्षक से चर्चा करें।
उत्तर:
फ्रेडरिक मैक्समूलर (1823–1900 ई०) जर्मनी में जन्मे एक महान भाषाशास्त्री और प्राच्यविद्याविद् थे, जिन्होंने अपना अधिकांश जीवन इंग्लैंड (ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय) में बिताया। उन्होंने 'ऋग्वेद' का संपादन और सायण-भाष्य सहित प्रकाशन कराया तथा 50 खंडों में 'सेक्रेड बुक्स ऑफ द ईस्ट' ग्रंथमाला का संपादन किया। स्वामी विवेकानंद ने उन्हें 'वेदांतियों का भी वेदांती' कहा था।
6. पाठ में आए ऐतिहासिक जातियों और देशों के सूचक शब्दों को चुनकर उनके अर्थ मालूम करें।
उत्तर:
  • यूनानी (ग्रीक): प्राचीन ग्रीस (यूनान) देश के निवासी।
  • रोमन: प्राचीन रोम साम्राज्य के निवासी।
  • सेमेटिक जाति (यहूदी): पश्चिमी एशिया की प्राचीन हिब्रू/यहूदी जाति।
  • शक, कुषाण, हूण: प्राचीन काल में मध्य एशिया से भारत पर आक्रमण करने वाली और यहीं बस जाने वाली ऐतिहासिक जातियाँ।
  • पारसी (ज़रथुश्त्री): प्राचीन ईरान (फारस) के निवासी जो अग्निपूजक थे।
  • केल्टिक, गॉथिक, स्लाव: प्राचीन यूरोप की प्रमुख भाषा-भाषी जातियाँ।
III. भाषा की बात

1. निम्नांकित वाक्यों से विशेष्य और विशेषण पद चुनें –

  • (क) उत्कृष्टतम उपलब्धियों का सर्वप्रथम साक्षात्कार
    ➔ विशेषण: उत्कृष्टतम, सर्वप्रथम | विशेष्य: उपलब्धियों, साक्षात्कार
  • (ख) प्लेटो और काण्ट जैसे दार्शनिकों का अध्ययन करनेवाले हम यूरोपियन लोग
    ➔ विशेषण: प्लेटो और काण्ट जैसे, यूरोपियन | विशेष्य: दार्शनिकों, लोग
  • (ग) अगला जन्म तथा शाश्वत जीवन
    ➔ विशेषण: अगला, शाश्वत | विशेष्य: जन्म, जीवन
  • (घ) दो-तीन हज़ार वर्ष पुराना ही क्यों, आज का भारत भी
    ➔ विशेषण: दो-तीन हज़ार वर्ष पुराना, आज का | विशेष्य: भारत
  • (ङ) भूले-बिसरे बचपन की मधुर स्मृतियाँ
    ➔ विशेषण: भूले-बिसरे, मधुर | विशेष्य: बचपन, स्मृतियाँ
  • (च) लाखों-करोड़ों अजनबियों तथा बर्बर समझे जानेवाले लोगों को भी
    ➔ विशेषण: लाखों-करोड़ों, बर्बर समझे जानेवाले | विशेष्य: अजनबियों, लोगों

2. 'अग्रजा' की तरह 'जा' प्रत्यय जोड़कर तीन-तीन शब्द बनाएँ –

'जा' प्रत्यय युक्त शब्द: अनुजा (अनु + जा), आत्मजा (आत्म + जा), गिरिजा (गिरि + जा), जलजा (जल + जा)।

3. निम्नलिखित उपसर्गों से तीन-तीन शब्द बनाएँ –

  • प्र: प्रकाश, प्रगति, प्रबल
  • निः / निर्: निश्चय, निष्फल, निर्बल
  • अनु: अनुवाद, अनुकरण, अनुभव
  • अभि: अभिभाषण, अभिज्ञान, अभिरुचि
  • वि: विदेश, विज्ञान, विशेष

4. 'वास्तविक' में 'इक' प्रत्यय है। 'इक' प्रत्यय से पाँच शब्द बनाएँ –

'इक' प्रत्यय युक्त शब्द: ऐतिहासिक (इतिहास + इक), प्राकृतिक (प्रकृति + इक), दार्शनिक (दर्शन + इक), वैज्ञानिक (विज्ञान + इक), सामाजिक (समाज + इक)।

IV. शब्द निधि (शब्दार्थ)
शब्द अर्थ
अवलोकनदेखना, प्रतीति करना, महसूस करना
अवगाहनस्नान, गहराई में डूबकर समझने की कोशिश करना
वांछनीयचाहने योग्य, कामना करने योग्य
नृवंश विद्यानृतत्त्व शास्त्र, मानव शास्त्र (Anthropology)
परिमाणमात्रा
दारिसमुद्रा (सोने के सिक्के) का एक प्राचीन प्रकार
प्रेषितभेजा हुआ
दैवत विज्ञानदेव विज्ञान (Mythology)
प्रत्नयुगप्रागैतिहासिक युग, प्राचीन युग
अनुरूपतासमानता, सादृश्य
क्षयछीजन, विनाश
अपरिहार्यजिसे छोड़ा न जा सके, अनिवार्य
क्षीयमाणनष्ट होता हुआ
मसलामुद्दा, विषय
सदाशयताउदारता, भलमनसाहत
सर्वातिशायीजिसमें सारी चीज़ें समाहित हो जाएँ, सर्वश्रेष्ठ
विद्यमानवर्तमान, उपस्थित
अहेतुकवादऐसा सिद्धांत जिसमें हेतु या कारण की पहचान न हो सके
सर्वथापूरी तरह से
ज्ञातव्यजानने योग्य
सारभूतसार या निष्कर्ष कहा जाने योग्य
अजनबीअपरिचित, अज्ञात
बर्बरजंगली, असभ्य
सुविस्तीर्णअतिविस्तृत, पूरी तरह से फैला हुआ
अनिर्वाचनीयजिसकी व्याख्या शब्दों में न की जा सके
धात्रीपालन-पोषण करने वाली, धारण करने वाली
अपरान्तपश्चिमी
परिणतपरिवर्तित, जिसका परिणाम सामने आ गया हो
प्राच्यपूर्वी (पाश्चात्य का विलोम), भारतीय/एशियाई संदर्भ में

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