Chapter 3. भारत से हम क्या सीखें | BSEB 10 Hindi Notes


पाठ 3: भारत से हम क्या सीखें

बिहार बोर्ड (BSEB) कक्षा 10वीं हिंदी (गोधूलि भाग-2, गद्य खंड) | सम्पूर्ण नोट्स

1. पाठ का संक्षिप्त परिचय (Overview)

  • पाठ का नाम: भारत से हम क्या सीखें
  • विधा: भाषण (Speech)
  • लेखक: फ्रेडरिक मैक्समूलर
  • हिंदी भाषांतरण: डॉ० भवानीशंकर त्रिवेदी
  • मूल भाव: यह पाठ भारतीय सिविल सेवा (ICS) के युवा अंग्रेज अधिकारियों को संबोधित एक भाषण है। इसमें मैक्समूलर ने भारत की प्राचीनता, महानता, समृद्ध संस्कृति, और विभिन्न विज्ञानों (भाषा, दर्शन, पुरातत्व आदि) में भारत के अमूल्य योगदान का वर्णन किया है, ताकि अंग्रेज अधिकारी भारत को मात्र एक गुलाम देश न समझें, बल्कि उससे बहुत कुछ सीखें।

2. लेखक परिचय (मैक्समूलर)

  • जन्म: विश्वविख्यात विद्वान फ्रेडरिक मैक्समूलर का जन्म 6 दिसंबर 1823 ई० को जर्मनी के डेसाउ (Dessau) नामक नगर में हुआ था।
  • पिता का नाम: विल्हेल्म मूलर। (जब मैक्समूलर 4 वर्ष के थे, तब इनके पिता का निधन हो गया था)।
  • शिक्षा: बचपन में ही ग्रीक और लैटिन भाषा में निपुण। 18 वर्ष की उम्र में लिपजिंग विश्वविद्यालय से संस्कृत का अध्ययन आरंभ किया।
  • प्रमुख अनुवाद कार्य: इन्होंने 'हितोपदेश', 'कठ' व 'केन' उपनिषदों तथा कालिदास कृत 'मेघदूत' का जर्मन भाषा में पद्यानुवाद किया।
  • स्वामी विवेकानंद का कथन: स्वामी विवेकानंद ने मैक्समूलर को "वेदांतियों का भी वेदांती" कहा था।
  • महारानी विक्टोरिया से भेंट: 1868 ई० में साम्राज्ञी विक्टोरिया ने इन्हें ऋग्वेद और संस्कृत पर व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया। उनके भाषण से प्रभावित होकर विक्टोरिया ने इन्हें 'नाइट' (Knight) की उपाधि देनी चाही, परंतु मैक्समूलर ने इसे अत्यंत तुच्छ समझकर अस्वीकार कर दिया।
  • निधन: 28 अक्टूबर 1900 ई० को।

3. पाठ का भावार्थ एवं मुख्य बिंदु (Core Concepts)

  • सच्चे भारत के दर्शन: मैक्समूलर के अनुसार यदि कोई सर्वविध संपदा और प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण देश है, तो वह भारत है जो भूतल पर स्वर्ग के समान है। उनके अनुसार सच्चे भारत के दर्शन कलकत्ता, बंबई या मद्रास जैसे शहरों में नहीं, बल्कि भारत के ग्रामवासियों (गाँवों) में हो सकते हैं।
  • विभिन्न विज्ञानों की प्रयोगशाला:
    • भू-विज्ञान: हिमालय से लेकर श्रीलंका तक का विशाल क्षेत्र।
    • वनस्पति विज्ञान: भारत एक ऐसी फुलवारी है जो 'हकर्स' जैसे वैज्ञानिकों को आकृष्ट करती है।
    • जीव-जंतु विज्ञान: 'हेकल' जैसे विद्वानों के लिए यहाँ बहुत कुछ है।
    • पुरातत्व विज्ञान: 'जनरल कनिंघम' जैसे लोगों के लिए नालंदा जैसे प्राचीन विश्वविद्यालय खजाने के समान हैं।
  • वारेन हेस्टिंग्स और 172 दारिस (सिक्के): जब वारेन हेस्टिंग्स भारत का गवर्नर जनरल था, तो उसे वाराणसी के पास 172 दारिस (सोने के प्राचीन सिक्के) से भरा एक घड़ा मिला था। उसने वे सिक्के ईस्ट इंडिया कंपनी के निदेशकों को भिजवाए, लेकिन ऐतिहासिक महत्व न समझने के कारण उन मूर्ख निदेशकों ने सिक्कों को गला डाला। यह एक बहुत बड़ी दुर्घटना थी।
  • भाषा विज्ञान और संस्कृत की महत्ता: मैक्समूलर स्पष्ट करते हैं कि संस्कृत भाषा ग्रीक और लैटिन से भी अत्यंत प्राचीन है। संस्कृत के माध्यम से ही आर्य, द्रविड़ और मुंडा भाषाओं का गहरा अध्ययन संभव है। लैटिन का 'इग्निस' (Ignis) संस्कृत के 'अग्नि' से और 'मुस' (Mus) संस्कृत के 'मूष' (चूहा) से मिलता है, जो सिद्ध करता है कि इन सभी जातियों का मूल स्रोत एक ही था।
  • सर विलियम जोंस का स्वप्न: सर विलियम जोंस 1783 ई० में भारत आए थे। समुद्री यात्रा के दौरान जब उन्होंने पहली बार भारत के तट को देखा, तो वे इसकी महानता और ज्ञान-विज्ञान की थाती की कल्पना से अभिभूत हो गए। मैक्समूलर कहते हैं कि आज भी भारत को सर विलियम जोंस जैसे स्वप्नदर्शियों की आवश्यकता है।
  • धर्म और नीति कथाएँ: भारत ब्राह्मण (वैदिक) धर्म और बौद्ध धर्म की जन्मभूमि है, तथा पारसियों के 'जरथुस्र' धर्म की शरणस्थली है। 'शेर की खाल में गधा' जैसी भारतीय नीति कथाएँ पश्चिम के देशों (यूनान आदि) तक पहुँचीं।

4. पाठ का सारांश (Summary)

'भारत से हम क्या सीखें' भाषण में मैक्समूलर ने नव-नियुक्त अंग्रेज अधिकारियों को भारत की वास्तविक और गौरवशाली तस्वीर दिखाई है। लेखक का मानना है कि मानव मस्तिष्क की उत्कृष्टतम उपलब्धियों का सबसे पहला साक्षात्कार भारत में हुआ है। प्लेटो और कांट जैसे दार्शनिकों की समस्याओं का समाधान भी भारत के पास है। सच्चे भारत का दर्शन गाँवों में होता है। भारत इतिहास, भाषा विज्ञान, पुरातत्व, धर्म और विधि शास्त्र की सबसे बड़ी प्रयोगशाला है। संस्कृत भाषा इंडो-यूरोपीय भाषाओं की जननी के समान है, जिसने विश्व को एक सूत्र में पिरोया है। अंत में, लेखक नवयुवकों को सर विलियम जोंस की तरह भारत में शोध और ज्ञानार्जन के नए क्षितिज तलाशने की प्रेरणा देते हैं।

5. परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Important One-Liners)

  • 'भारत से हम क्या सीखें' पाठ के लेखक कौन हैं? — फ्रेडरिक मैक्समूलर
  • यह पाठ साहित्य की किस विधा के अंतर्गत आता है? — भाषण
  • इस भाषण का हिंदी भाषांतरण किसने किया है? — डॉ० भवानीशंकर त्रिवेदी ने
  • मैक्समूलर का जन्म कब और कहाँ हुआ था? — 6 दिसंबर 1823 ई० को जर्मनी के डेसाउ में
  • मैक्समूलर को "वेदांतियों का भी वेदांती" किसने कहा था? — स्वामी विवेकानंद ने
  • महारानी विक्टोरिया ने मैक्समूलर को कौन-सी उपाधि देनी चाही थी? — 'नाइट' (Knight)
  • सच्चे भारत के दर्शन कहाँ हो सकते हैं? — गाँवों में (ग्रामवासियों में)
  • वारेन हेस्टिंग्स को वाराणसी के पास क्या मिला था? — 172 दारिस (सोने के प्राचीन सिक्के) से भरा घड़ा
  • वारेन हेस्टिंग्स कौन था? — भारत का गवर्नर जनरल
  • 'दारिस' क्या है? — प्राचीनकालीन सोने का सिक्का
  • पारसियों के धर्म का क्या नाम है? — जरथुस्र
  • सर विलियम जोंस समुद्री यात्रा करते हुए भारत कब पहुँचे थे? — अगस्त 1783 ई० में
  • लैटिन भाषा का शब्द 'इग्निस' (Ignis) संस्कृत के किस शब्द से मिलता है? — अग्नि से
  • 'मेघदूत' और 'हितोपदेश' का जर्मन में अनुवाद किसने किया? — मैक्समूलर ने

0 Comments