Chapter 2. विष के दाँत | BSEB 10 Hindi Book PDF download


BSEB Class 10 Hindi Chapter 2 "विष के दाँत" PDF Download

बिहार बोर्ड (BSEB) कक्षा 10वीं के विद्यार्थियों के लिए हिंदी (गोधूलि भाग-2) गद्य खंड का अध्याय 2 "विष के दाँत" (Vish Ke Dant) मध्यमवर्ग के अंतर्विरोधों और वर्ग-संघर्ष को उजागर करने वाली एक प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक कहानी है। यदि आप इस पाठ की PDF को पढ़ना चाहते हैं या डाउनलोड करना चाहते हैं, तो नीचे एम्बेडेड PDF व्यूअर और डाउनलोड बटन उपलब्ध कराया गया है।

बोर्ड (Board) बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB)
कक्षा (Class) 10वीं (Class 10th)
विषय (Subject) हिंदी (गोधूलि भाग-2 - गद्य खंड)
अध्याय (Chapter) अध्याय 2 (Chapter 2) - विष के दाँत
लेखक (Author) नलिन विलोचन शर्मा (Nalin Vilochan Sharma)
विधा (Genre) कहानी (Story)

पाठ का सारांश (Chapter Overview)

'विष के दाँत' प्रपद्यवाद के प्रवर्तक एवं प्रसिद्ध आलोचक नलिन विलोचन शर्मा द्वारा रचित एक यथार्थवादी और मनोवैज्ञानिक कहानी है। यह कहानी विष के दाँत तथा अन्य कहानियों के संग्रह से ली गई है।

कहानी में उच्च वर्ग के अमीर 'सेन साहब' और उनके किरानी (क्लर्क) 'गिरधरलाल' के परिवारों के बीच के सामाजिक व आर्थिक संघर्ष को दिखाया गया है। सेन साहब का इकलौता बेटा 'काशू' (खोखा) अत्यंत बिगड़ैल और दंभी है, जिसे घर में हर तरह की छूट मिली हुई है। वहीं दूसरी ओर गिरधरलाल का बेटा 'मदन' एक स्वाभिमानी और निर्भीक बालक है। जब काशू मदन की गली में जाकर जबरदस्ती लट्टू नचाने की जिद करता है और रौब झाड़ता है, तो मदन उसका मुकाबला करता है और मारपीट में काशू के दो सामने के दाँत तोड़ डालता है। मदन का यह कदम अमीरी के अहंकार और शोषक वर्ग के 'विष के दाँतों' को उखाड़ फेंकने का प्रतीक है।

मुख्य संदेश: "मदन द्वारा काशू के दो दाँत तोड़ना"—यह घटना शोषित वर्ग द्वारा अमीर वर्ग के अन्याय और अहंकार का मुंहतोड़ जवाब देने की प्रतीक है।

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परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न (Important Points)

  • 'विष के दाँत' कहानी के कहानीकार कौन हैं? - नलिन विलोचन शर्मा।
  • सेन साहब की नई कार का रंग कैसा था? - काली (कीमत: 7,500 रुपये)।
  • काशू (खोखा) कौन था? - सेन साहब का इकलौता लाड़ला बेटा।
  • मदन कौन था? - सेन साहब की फैक्ट्री में काम करने वाले क्लर्क 'गिरधरलाल' का बेटा।
  • मदन ने काशू के कितने दाँत तोड़े थे? - दो दाँत (सामने के)।

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