बिहार बोर्ड (BSEB) कक्षा 10 संस्कृत
पीयूषम् (भाग-2) | नवमः पाठः – "स्वामी दयानन्दः"
महत्वपूर्ण विषयनिष्ठ (Subjective) प्रश्नोत्तर
लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक वाले)
प्र. 1
स्वामी दयानन्द कौन थे? पाठ के आधार पर उत्तर दें।
स्वामी दयानन्द आधुनिक भारत के महान समाज सुधारक और शिक्षा के उद्धारक थे। उन्होंने 'आर्यसमाज' नामक संस्था की स्थापना की और समाज में फैली कुरीतियों का खंडन करके शुद्ध ज्ञान का प्रचार किया।
प्र. 2
मध्यकाल में भारतीय समाज में कौन-कौन सी कुरीतियाँ (दूषित प्रथाएँ) व्याप्त थीं?
मध्यकाल में जातिगत विषमता, छुआछूत (अस्पृश्यता), धार्मिक आडंबर, स्त्रियों की अशिक्षा, विधवाओं की शोचनीय स्थिति और शिक्षा की अव्यापकता जैसी अनेक कुरीतियाँ व्याप्त थीं।
प्र. 3
स्वामी दयानन्द का जन्म कब, कहाँ और किस परिवार में हुआ था?
स्वामी दयानन्द का जन्म गुजरात राज्य के 'टंकारा' नामक गाँव में 1824 ईस्वी में एक कर्मकांडी और शिव-उपासक परिवार में हुआ था।
प्र. 4
स्वामी दयानन्द के बचपन का नाम क्या था और उनकी शिक्षा किस भाषा में प्रारंभ हुई?
स्वामी दयानन्द के बचपन का नाम मूलशंकर था और उनकी प्रारम्भिक शिक्षा संस्कृत भाषा में हुई।
प्र. 5
मूलशंकर के जीवन में मूर्तिपूजा के प्रति अनास्था (अविश्वास) कैसे उत्पन्न हुई?
शिवरात्रि के महापर्व पर रात्रि-जागरण के समय मूलशंकर ने देखा कि भगवान शिव की मूर्ति (विग्रह) पर चढ़कर चूहा मोदक/प्रसाद खा रहा है। यह देखकर उनके मन में विचार आया कि प्रतिमा में ईश्वर प्रत्यक्ष नहीं हैं और उनकी मूर्तिपूजा से अनास्था हो गई।
प्र. 6
रात्रि-जागरण छोड़कर मूलशंकर कहाँ चले गए और उन्होंने क्या किया?
रात्रि-जागरण छोड़कर मूलशंकर अपने घर चले गए और उन्होंने मूर्तिपूजा का त्याग कर दिया।
प्र. 7
मूलशंकर के मन में वैराग्य भाव कब उत्पन्न हुआ?
दो वर्ष के भीतर ही उनकी प्रिय बहन की मृत्यु हो गई, जिसके बाद मूलशंकर के मन में वैराग्य भाव समाहित हो गया।
प्र. 8
घर छोड़ने के बाद मूलशंकर कहाँ गए और उनके गुरु कौन बने?
घर छोड़ने के बाद वे साधुओं की संगति में घूमते हुए मथुरा पहुँचे, जहाँ प्रज्ञाचक्षु (नेत्रहीन) विद्वान स्वामी विरजानन्द उनके गुरु बने।
प्र. 9
स्वामी विरजानन्द के उपदेश से स्वामी दयानन्द ने क्या संकल्प लिया?
स्वामी विरजानन्द के उपदेश से उन्होंने वैदिक धर्म और सत्य के प्रचार-प्रसार के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित करने का संकल्प लिया।
प्र. 10
स्वामी दयानन्द का मुख्य ग्रन्थ कौन-सा है और यह किस भाषा में रचा गया है?
स्वामी दयानन्द का मुख्य ग्रन्थ 'सत्यार्थप्रकाशः' है, जो उनकी राष्ट्रभाषा हिंदी में रचा गया है।
प्र. 11
स्वामी दयानन्द ने 'आर्यसमाज' की स्थापना कब और कहाँ की?
उन्होंने 1875 ईस्वी में मुंबई शहर में आर्यसमाज संस्था की स्थापना की।
प्र. 12
स्वामी दयानन्द ने समाज में सुधार के लिए किन-किन विषयों पर बल दिया?
उन्होंने स्त्री-शिक्षा, विधवा-विवाह, बाल-विवाह निवारण, अस्पृश्यता उन्मूलन और मूर्तिपूजा के खंडन पर विशेष बल दिया।
प्र. 13
वेदों के प्रचार के लिए स्वामी दयानन्द ने क्या-क्या कार्य किए?
उन्होंने सब धर्मानुयायियों का ध्यान वेदों की ओर आकर्षित किया और स्वयं संस्कृत व हिंदी दोनों भाषाओं में वेद-भाष्य की रचना की।
प्र. 14
D.A.V. (डी० ए० वी०) विद्यालयों की स्थापना किसने और कब की?
स्वामी दयानन्द की मृत्यु (1883 ईस्वी) के पश्चात् उनके अनुयायियों ने उनकी स्मृति में 'दयानन्द एंग्लो वैदिक' (D.A.V.) विद्यालयों के समूह की स्थापना की।
प्र. 15
वर्तमान शिक्षा पद्धति में स्वामी दयानन्द और आर्यसमाज का क्या योगदान है?
प्राचीन शिक्षा पद्धति के दोषों को दूर कर गुरुकुलों तथा डी.ए.वी. विद्यालयों के माध्यम से आधुनिक एवं वैदिक शिक्षा के समन्वय में उनका योगदान स्मरणीय है।
प्र. 16
मध्यकाल में दलित वर्ग के लोगों ने धर्मांतरण क्यों स्वीकार किया?
हिंदू समाज में अपमानित और तिरस्कृत होकर विषमता का शिकार होने के कारण अनेक दलितों ने धर्मांतरण स्वीकार किया।
प्र. 17
स्वामी दयानन्द को समाज सुधारकों में 'शिखर स्थानीय' क्यों माना जाता है?
विचारों की व्यापकता, समाजोद्धार के दृढ़ संकल्प और व्यापक कार्यों के कारण उन्हें समाज सुधारकों में सर्वोच्च/शिखर स्थानीय माना जाता है।
प्र. 18
शिवरात्रि पर्व मूलशंकर के लिए 'उद्बोधक' (दिशा देने वाला) कैसे सिद्ध हुआ?
शिवरात्रि के दिन चूहे को मूर्ति पर चढ़कर प्रसाद खाते देखकर उनके मन में मूर्तिपूजा के प्रति अनास्था जगी, जिससे वे सत्य की खोज में निकले।
प्र. 19
स्वामी दयानन्द ने पाखंड और धर्माडंबर का खंडन किस प्रकार किया?
उन्होंने जगह-जगह शास्त्रार्थ करके अनेक विद्वानों को पराजित किया और वैदिक सिद्धांतों में दीक्षित कर धार्मिक आडंबरों का खंडन किया।
प्र. 20
आर्यसमाज संस्था का मुख्य उद्देश्य क्या है?
समाज के दोषों को दूर करना, वैदिक धर्म का प्रचार करना और शिक्षा का प्रसार करना इसका मुख्य उद्देश्य है।
प्र. 21
स्वामी दयानन्द की मृत्यु कब हुई थी?
स्वामी दयानन्द की मृत्यु 1883 ईस्वी में हुई थी।
प्र. 22
स्वामी दयानन्द ने अपनी महान रचना 'सत्यार्थप्रकाश' में किस बात का निरूपण किया है?
उन्होंने अपने सिद्धांतों का संकलन कर समाज सुधार और सत्य धर्म का निरूपण किया है।
प्र. 23
19वीं शताब्दी के समाज सुधारकों में स्वामी दयानन्द का क्या स्थान है?
19वीं शताब्दी (ऊनविंशशतक) में वे भारत वर्ष के अग्रगण्य धर्मोद्धारक और समाज सुधारक माने जाते हैं।
प्र. 24
स्वामी दयानन्द के परिवार में किस देव की पूजा होती थी?
उनके परिवार में भगवान शिव (शिवोपासक परिवार) की पूजा होती थी।
प्र. 25
स्वामी दयानन्द ने स्वदेश और राष्ट्रभाषा के लिए क्या योगदान दिया?
उन्होंने राष्ट्रभाषा हिंदी में 'सत्यार्थप्रकाश' लिखकर देश में राष्ट्रीयता का बोध कराया और अपनी संस्कृति के प्रति सम्मान जगाया।
प्र. 26
'प्रज्ञाचक्षुः' का क्या अर्थ है और यह शब्द पाठ में किसके लिए आया है?
'प्रज्ञाचक्षुः' का अर्थ ज्ञानी या नेत्रहीन होता है और यह शब्द मथुरा के स्वामी विरजानन्द के लिए आया है।
प्र. 27
आर्यसमाज की शाखाएँ कहाँ-कहाँ स्थित हैं?
आर्यसमाज की शाखाएं देश और विदेश के प्रायः प्रत्येक नगर में कार्यरत हैं।
प्र. 28
मूलशंकर में धार्मिक सुधार की भावना कब उत्पन्न हुई?
शिवरात्रि की घटना और तत्पश्चात बहन की मृत्यु से उत्पन्न वैराग्य के बाद उनमें सुधार की भावना जाग्रत हुई।
प्र. 29
स्वामी दयानन्द ने समाज में स्त्रियों की दशा सुधारने के लिए क्या किया?
उन्होंने स्त्री-शिक्षा को बढ़ावा दिया और विधवा-पुनर्विवाह का समर्थन कर समाज में उन्हें सम्मान दिलाया।
प्र. 30
'स्वामी दयानन्दः' पाठ से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?
इस पाठ से हमें रूढ़िवादिता और सामाजिक कुरीतियों को त्यागकर सत्य, शिक्षा और समाज सेवा के पथ पर चलने की प्रेरणा मिलती है।
दीर्घ उत्तरीय एवं व्याख्यात्मक प्रश्न (5 अंक वाले)
प्र. 31
'स्वामी दयानन्दः' पाठ का सारांश अपने शब्दों में लिखें।
'स्वामी दयानन्दः' पाठ आधुनिक भारत के महान समाज सुधारक स्वामी दयानन्द के जीवन और उनके योगदान पर आधारित है। उनका जन्म 1824 में गुजरात के टंकारा गाँव में हुआ था। बचपन का नाम मूलशंकर था। शिवरात्रि की घटना से उनका मूर्तिपूजा से विश्वास उठ गया। घर छोड़कर वे मथुरा में स्वामी विरजानन्द के शिष्य बने और वैदिक साहित्य का ज्ञान प्राप्त किया। उन्होंने समाज से छुआछूत, बाल-विवाह, स्त्री-अशिक्षा जैसी कुरीतियों को दूर करने का प्रयास किया। 1875 में उन्होंने मुंबई में आर्यसमाज की स्थापना की। हिंदी में 'सत्यार्थप्रकाश' लिखकर वेदों के ज्ञान का प्रचार किया। उनकी मृत्यु के बाद उनके अनुयायियों ने D.A.V. विद्यालयों की स्थापना की।
प्र. 32
स्वामी दयानन्द के समाज सुधार संबंधी योगदानों पर प्रकाश डालें।
स्वामी दयानन्द 19वीं सदी के प्रमुख समाज सुधारक थे। उनके प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:
- कुरीतियों का विरोध: उन्होंने बाल-विवाह, मूर्तिपूजा, छुआछूत और धार्मिक आडंबरों का कड़ा विरोध किया।
- स्त्री-शिक्षा एवं विधवा पुनर्विवाह: उन्होंने समाज में महिलाओं के उत्थान हेतु स्त्री-शिक्षा और विधवा विवाह का समर्थन किया।
- आर्यसमाज की स्थापना: 1875 में मुंबई में आर्यसमाज संस्था बनाई, जो आज भी समाज सुधार में कार्यरत है।
- वेदों का प्रचार: उन्होंने 'वेदों की ओर लौटें' का संदेश दिया और हिंदी-संस्कृत में वेद-भाष्य लिखा।
प्र. 33
मूलशंकर (स्वामी दयानन्द) का वैराग्य भाव कैसे जागा? पूरी घटना का वर्णन करें।
मूलशंकर का परिवार भगवान शिव का उपासक था। शिवरात्रि के दिन परिवार के साथ रात्रि-जागरण के दौरान मूलशंकर ने देखा कि शिवलिंग पर चढ़े प्रसाद को एक चूहा खा रहा है। उन्होंने सोचा कि जो मूर्ति स्वयं पर चढ़े प्रसाद की रक्षा एक चूहे से नहीं कर सकती, वह ईश्वर की वास्तविक प्रतिमा नहीं हो सकती। इस घटना से उनका मूर्तिपूजा से विश्वास उठ गया। इसके बाद जब उनकी बहन की मृत्यु हुई, तो सांसारिक नश्वरता को देखकर उनके मन में स्थायी वैराग्य उत्पन्न हो गया और उन्होंने घर का त्याग कर दिया।
प्र. 34
शिक्षा पद्धति के सुधार में स्वामी दयानन्द तथा उनके अनुयायियों का क्या योगदान है?
स्वामी दयानन्द ने तत्कालीन शिक्षा पद्धति के दोषों को उजागर कर नवीन शिक्षा प्रणाली का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने प्राचीन वैदिक शिक्षा को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ने पर जोर दिया। उनकी मृत्यु के बाद 1883 के पश्चात उनके अनुयायियों ने दयानन्द एंग्लो वैदिक (D.A.V.) विद्यालयों और गुरुकुलों का विशाल नेटवर्क खड़ा किया। यह संस्था आज भी देश-विदेश में लाखों विद्यार्थियों को संस्कारयुक्त और वैज्ञानिक शिक्षा प्रदान कर रही है।
प्र. 35
'सत्यार्थप्रकाशः' ग्रन्थ का महत्व एवं स्वामी दयानन्द का मातृभाषा के प्रति प्रेम स्पष्ट करें।
'सत्यार्थप्रकाशः' स्वामी दयानन्द की सबसे प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण कृति है। इसमें उन्होंने सत्य के सिद्धांतों, वैदिक धर्म तथा सामाजिक जीवन के नियमों का विस्तृत प्रतिपादन किया है। यद्यपि वे संस्कृत के प्रकांड विद्वान थे, फिर भी जन-सामान्य तक अपना संदेश पहुँचाने के लिए उन्होंने इस ग्रन्थ की रचना अपनी राष्ट्रभाषा हिंदी में की। इससे उनका अपनी भाषा और देश के प्रति अगाध प्रेम प्रकट होता है।
एक-पंक्तिय (One-Liner) अभ्यास प्रश्न एवं उत्तर
प्र. 36
आधुनिक भारत में समाज के महान उद्धारक कौन थे?
स्वामी दयानन्दः।
प्र. 37
आर्यसमाज नामक संस्था की स्थापना किसने की?
स्वामी दयानन्द ने।
प्र. 38
स्वामी दयानन्द का जन्म किस राज्य में हुआ था?
गुजरात राज्य में।
प्र. 39
स्वामी दयानन्द के गाँव का क्या नाम था?
टंकारा (Tankara)।
प्र. 40
बालक का मूल नाम (बचपन का नाम) क्या रखा गया था?
मूलशंकरः।
प्र. 41
मूलशंकर का जन्म किस वर्ष में हुआ था?
1824 ईस्वी में।
प्र. 42
मूलशंकर का परिवार किसकी उपासना करता था?
भगवान शिव की (शिवोपासक)।
प्र. 43
मूलशंकर के लिए कौन-सा पर्व उद्बोधक सिद्ध हुआ?
शिवरात्रि महापर्व।
प्र. 44
शिव की मूर्ति पर चढ़कर कौन द्रव्य खा रहा था?
मूषकः (चूहा)।
प्र. 45
मूलशंकर के गुरु स्वामी विरजानन्द कहाँ रहते थे?
मथुरा में।
प्र. 46
स्वामी विरजानन्द कैसे विद्वान थे?
प्रज्ञाचक्षु (नेत्रहीन) विद्वान।
प्र. 47
'सत्यार्थप्रकाश' नामक ग्रन्थ की रचना किसने की?
स्वामी दयानन्द ने।
प्र. 48
मुंबई नगर में आर्यसमाज की स्थापना किस वर्ष हुई?
1875 ईस्वी में।
प्र. 49
स्वामी दयानन्द का निधन किस वर्ष हुआ?
1883 ईस्वी में।
प्र. 50
D.A.V. का पूर्ण रूप क्या है?
दयानन्द एंग्लो वैदिक (Dayanand Anglo Vedic)।
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