बिहार बोर्ड (BSEB) कक्षा 10 संस्कृत
पीयूषम् (भाग-2) | सप्तमः पाठः – "नीतिश्लोकाः"
महत्वपूर्ण विषयनिष्ठ (Subjective) प्रश्नोत्तर
लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक वाले)
प्र. 1
'नीतिश्लोकाः' पाठ किस प्रसिद्ध ग्रन्थ से संकलित है?
यह पाठ महर्षि वेदव्यास रचित सुप्रसिद्ध ग्रन्थ 'महाभारत' के उद्योगपर्व (अध्याय 33-40) के अंतर्गत 'विदुरनीति' से संकलित है।
प्र. 2
'विदुरनीति' की रचना किस संदर्भ में हुई थी?
महाभारत युद्ध की आसन्न परिस्थिति में अपनी मानसिक शांति के लिए धृतराष्ट्र ने मंत्री प्रवर विदुर से नीति संबंधी प्रश्न पूछे थे, जिनके समुचित उत्तरों के रूप में 'विदुरनीति' की रचना हुई।
प्र. 3
पाठ के अनुसार 'पण्डित' किसे कहा गया है?
जिसके कार्यों में सर्दी, गर्मी, भय, अति-अनुराग, समृद्धि या असमृद्धि बाधा नहीं पहुँचाते, तथा जो सभी जीवों के तत्त्व को जानने वाला और सभी कर्मों का उपाय जानने वाला होता है, उसे पण्डित कहा गया है।
प्र. 4
'मूर्ख' या 'नराधम' के क्या लक्षण बताए गए हैं?
जो बिना बुलाए प्रवेश करता है, बिना पूछे बहुत बोलता है और अविश्वसनीय व्यक्ति पर भी विश्वास कर लेता है, वह मूढ़चेता (अज्ञानी) और नराधम (मनुष्यों में नीच) कहलाता है।
प्र. 5
परम श्रेय (कल्याण) देने वाला क्या है?
'एक मात्र धर्म' ही संसार में परम श्रेय या सर्वश्रेष्ठ कल्याण देने वाला है।
प्र. 6
उत्तमा शान्ति (सर्वश्रेष्ठ शांति) किससे मिलती है?
'क्षमा' से उत्तमा शांति प्राप्त होती है।
प्र. 7
परम तृप्ति (परम संतोष) देने वाली वस्तु क्या है?
'विद्या' ही मनुष्य को परम तृप्ति प्रदान करती है।
प्र. 8
परम सुख देने वाला साधन क्या है?
'अहिंसा' ही परम सुख (सुखावहा) देने वाला साधन है।
प्र. 9
नरक के तीन द्वार कौन-कौन से हैं और इनसे क्या हानि होती है?
नरक के तीन द्वार— काम, क्रोध और लोभ हैं। ये तीनों मनुष्य की आत्मा का नाश करने वाले (आत्मनः नाशनम्) होते हैं।
प्र. 10
उन्नति (ऐश्वर्य/भूति) चाहने वाले व्यक्ति को किन छह दोषों का त्याग कर देना चाहिए?
उन्नति चाहने वाले पुरुष को छह दोषों— निद्रा (अत्यधिक सोना), तन्द्रा (ऊंघना), भय, क्रोध, आलस्य और दीर्घसूत्रता (काम को टालने की आदत) का त्याग कर देना चाहिए।
प्र. 11
सत्य से किसकी रक्षा होती है?
सत्य से धर्म की रक्षा होती है।
प्र. 12
अभ्यास (योग) से किसकी रक्षा होती है?
निरंतर अभ्यास या योग से विद्या की रक्षा होती है।
प्र. 13
उबटन या सफाई (मृजया) से किसकी रक्षा होती है?
उबटन, स्वच्छता या मंजन (मृजया) से रूप (सुंदरता) की रक्षा होती है।
प्र. 14
सदाचार या अच्छे आचरण (वृत्तेन) से किसकी रक्षा होती है?
सदाचार या चरित्र (वृत्तेन) से कुल (वंश/खानदान) की रक्षा होती है।
प्र. 15
संसार में किस प्रकार के पुरुष आसानी से (सुलभ) मिल जाते हैं?
हमेशा प्रिय (मीठा) बोलने वाले पुरुष संसार में आसानी से (सुलभ) मिल जाते हैं।
प्र. 16
संसार में किस प्रकार के वक्ता और श्रोता मिलना दुर्लभ हैं?
अप्रिय किंतु परिणाम में हितकारी (पथ्य) बात बोलने वाले वक्ता और सुनने वाले श्रोता अत्यंत दुर्लभ होते हैं।
प्र. 17
स्त्रियों को घर में क्या स्थान दिया गया है?
स्त्रियों को पूजनीय, महाभाग्या, पुण्यात्मा तथा घर की लक्ष्मी (गृहदीप्तयः) माना गया है, इसलिए उनकी विशेष रूप से रक्षा की जानी चाहिए।
प्र. 18
विनम्रता (विनय) किसको मारती है?
विनम्रता (विनय) अपयश या अकीर्ति का नाश करती है।
प्र. 19
पराक्रम (शौर्य) किसको समाप्त करता है?
पराक्रम अनर्थ या संकट को नष्ट करता है।
प्र. 20
क्षमा और सदाचार किसका नाश करते हैं?
क्षमा क्रोध का नाश करती है तथा सदाचार/सद्गुण कुलक्षण या अशोभनीय व्यवहार का नाश करता है।
प्र. 21
धृतराष्ट्र के प्रश्नों का उत्तर कौन दे रहे हैं?
महात्मा विदुर धृतराष्ट्र के प्रश्नों का समुचित उत्तर दे रहे हैं।
प्र. 22
'दीर्घसूत्रता' का क्या अर्थ है और इसका क्या दुष्परिणाम होता है?
दीर्घसूत्रता का अर्थ है— किसी कार्य को देरी से करना या कल पर टालना। यह मनुष्य की प्रगति को रोक देती है।
प्र. 23
'अनाहूतः प्रविशति' किस श्लोक की पंक्ति है और इसका अर्थ क्या है?
यह 'नीतिश्लोकाः' पाठ की पंक्ति है। इसका अर्थ है— "बिना बुलाए प्रवेश करने वाला व्यक्ति नीच और अज्ञानी होता है।"
प्र. 24
'विदुरनीति' की तुलना महाभारत के किस अन्य भाग से की गई है?
'विदुरनीति' की तुलना महाभारत की ही तरह एक स्वतंत्र और व्यावहारिक नीति-ग्रन्थ के रूप में 'श्रीमद्भगवद्गीता' से की गई है।
प्र. 25
काम, क्रोध और लोभ को क्यों त्याग देना चाहिए?
क्योंकि ये तीनों नरक के द्वार हैं जो व्यक्ति के विवेक और आत्मा का सर्वनाश कर देते हैं।
प्र. 26
'विद्या योगेन रक्ष्यते' पंक्ति का भाव स्पष्ट करें।
विद्या की रक्षा निरंतर अभ्यास और चिंतन (योग) से ही संभव है; बिना अभ्यास के ज्ञान विस्मृत हो जाता है।
प्र. 27
'मृजया रक्ष्यते रूपम्' का क्या तात्पर्य है?
शारीरिक स्वच्छता, प्रसाधन और देखभाल (मृजया) से ही शरीर के रूप और कांति की रक्षा होती है।
प्र. 28
गृहदीप्तयः (घर की लक्ष्मी) किसे कहा गया है और क्यों?
स्त्रियों को गृहदीप्तयः कहा गया है क्योंकि वे घर की शोभा, मंगल और सुख-समृद्धि की आधारशिला होती हैं।
प्र. 29
मनुष्य के छह दोषों को संस्कृत में क्या कहते हैं?
निद्रा, तन्द्रा, भयम्, क्रोधः, आलस्यम् और दीर्घसूत्रता।
प्र. 30
'नीतिश्लोकाः' पाठ का मूल संदेश क्या है?
इसका मूल संदेश मानव जीवन में धर्म, नीति, सदाचार, विवेक और कर्तव्यपरायणता को अपनाकर सर्वतोमुखी उन्नति प्राप्त करना है।
दीर्घ उत्तरीय एवं व्याख्यात्मक प्रश्न (5 अंक वाले)
प्र. 31
'नीतिश्लोकाः' पाठ का सारांश अपने शब्दों में लिखें।
'नीतिश्लोकाः' पाठ महाभारत के उद्योगपर्व के अंतर्गत विदुरनीति से उद्धृत है। इसमें महात्मा विदुर ने राजा धृतराष्ट्र को व्यावहारिक जीवन और राजनीति के गूढ़ सिद्धांतों की शिक्षा दी है। पाठ में पण्डित और मूर्ख के लक्षण, धर्म, क्षमा, विद्या और अहिंसा का महत्व बताया गया है। नरक के तीन द्वारों (काम, क्रोध, लोभ) तथा मनुष्य के छह दोषों को त्यागने का परामर्श दिया गया है। सत्य, अभ्यास, स्वच्छता और सदाचार से क्रमशः धर्म, विद्या, रूप और कुल की रक्षा होती है। स्त्रियों को गृहलक्ष्मी मानकर सम्मान देने तथा प्रिय बोलने वाले चाटुकारों से बचकर हितकारी बातें सुनने पर बल दिया गया है।
प्र. 32
पण्डित और मूर्ख में क्या अंतर है? नीतिश्लोकाः पाठ के आधार पर स्पष्ट करें।
- पण्डित: ज्ञानी या पण्डित वह है जिसके कर्तव्य में मौसम (शीत-उष्ण), भय, प्रेम, धन की अधिकता या कमी बाधा नहीं डालती। जो सभी प्राणियों के गुण-दोषों को जानता है और संकटों का समाधान खोज लेता है, वही पण्डित है।
- मूर्ख (मूढ़चेता): अज्ञानी व्यक्ति बिना बुलाए किसी के घर चला जाता है, बिना पूछे व्यर्थ में बहुत बोलता है तथा जिस पर भरोसा नहीं करना चाहिए, उस पर भी आँख मूँदकर विश्वास कर लेता है।
प्र. 33
"त्रिविधं नरकस्येदं द्वारं नाशनमात्मनः..." श्लोक की व्याख्या करें।
प्रसंग: यह श्लोक 'नीतिश्लोकाः' पाठ से उद्धृत है, जिसमें मानव के पतन के कारणों को रेखांकित किया गया है।
व्याख्या: महात्मा विदुर कहते हैं कि काम (अत्यधिक वासना), क्रोध और लोभ—ये तीन नरक के मुख्य द्वार हैं। ये मनुष्य की आत्मा और उसके चरित्र का पूर्ण विनाश कर देते हैं। जो व्यक्ति अपने जीवन में उन्नति चाहता है, उसे इन तीनों मानसिक विकारों का अविलंब त्याग कर देना चाहिए, अन्यथा उसका सर्वनाश निश्चित है।
प्र. 34
मनुष्य की उन्नति में बाधक छह दोषों (षड् दोषाः) का वर्णन करें।
नीतिशास्त्र के अनुसार मनुष्य की प्रगति में छह दोष मुख्य बाधा हैं:
- निद्रा: आवश्यकता से अधिक सोना।
- तन्द्रा: हमेशा आलस्य में ऊंघते रहना।
- भय: किसी कार्य को शुरू करने से पहले ही डर जाना।
- क्रोध: छोटी-छोटी बातों पर आपा खो देना।
- आलस्य: कार्य को समय पर न करके टालना।
- दीर्घसूत्रता: किसी सीधे-साधे काम को बहुत लंबे समय तक अटका कर रखना।
इन छह दोषों का त्याग किए बिना कोई भी व्यक्ति सफलता या समृद्धि प्राप्त नहीं कर सकता।
प्र. 35
धर्म, विद्या, रूप और कुल की रक्षा किस-किस प्रकार होती है?
विदुरनीति के अनुसार:
- धर्म की रक्षा: सदैव 'सत्य' बोलने और सत्य के आचरण से होती है।
- विद्या की रक्षा: निरंतर 'अभ्यास' (योग) और पुनरावृत्ति से होती है।
- रूप की रक्षा: शारीरिक 'सफाई' (मृजया), प्रसाधन और उबटन आदि से होती है।
- कुल की रक्षा: व्यक्ति के 'सदाचार' (सद्वृत्त) और अच्छे चरित्र से होती है।
एक-पंक्तिय (One-Liner) अभ्यास प्रश्न एवं उत्तर
प्र. 36
'नीतिश्लोकाः' पाठ के रचयिता कौन हैं?
महर्षि वेदव्यास (विदुर के माध्यम से)।
प्र. 37
विदुर कौन थे?
धृतराष्ट्र के मंत्रीप्रवर।
प्र. 38
धृतराष्ट्र ने विदुर से प्रश्न क्यों पूछे थे?
अपनी मानसिक शांति (स्वचित्तस्य शांतये) के लिए।
प्र. 39
'सर्वभूतानां तत्त्वज्ञः' कौन कहलाता है?
पण्डितः।
प्र. 40
'अनाहूतः प्रविशति' कौन करता है?
मूढ़चेता नराधमः (मूर्ख व्यक्ति)।
प्र. 41
एका विद्या किं ददाति? (एकमात्र विद्या क्या देती है?)
परमा तृप्तिः (परम संतोष)।
प्र. 42
एका क्षमा का भवति? (एकमात्र क्षमा क्या है?)
उत्तमा शांतिः।
प्र. 43
नरक के कितने द्वार बताए गए हैं?
त्रीणि (तीन)।
प्र. 44
'षड् दोषाः' किसके द्वारा त्यागे जाने चाहिए?
भूतिमिच्छता पुरुषों (उन्नति चाहने वाले पुरुष द्वारा)।
प्र. 45
'सत्येन रक्ष्यते...' क्या?
धर्मः।
प्र. 46
कुल की रक्षा किससे होती है?
वृत्तेन (सदाचार या चरित्र से)।
प्र. 47
'सुलभाः पुरुषाः' कैसे होते हैं?
सततं प्रियवादिनः (हमेशा मीठा बोलने वाले)।
प्र. 48
'पुण्याः गृहदीप्तयः' किसे माना गया है?
स्त्रियः (स्त्रियों को)।
प्र. 49
'विनयः कं हन्ति?' (विनम्रता किसका नाश करती है?)
अकीर्तिम् (अपयश को)।
प्र. 50
'हन्त्यनर्थं...' क्या?
पराक्रमः (पराक्रम अनर्थ को समाप्त करता है)।
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