बिहार बोर्ड (BSEB) कक्षा 10 संस्कृत
पीयूषम् (भाग-2) | षष्ठः पाठः – "भारतीयसंस्काराः"
महत्वपूर्ण विषयनिष्ठ (Subjective) प्रश्नोत्तर
लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक वाले)
प्र. 1
भारतीय संस्कृति की सबसे मुख्य विशेषता क्या है?
भारतीय संस्कृति की मुख्य विशेषता यह है कि यहाँ मानव जीवन में समय-समय पर विभिन्न संस्कारों का अनुष्ठान किया जाता है, जो मनुष्य के व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं।
प्र. 2
भारतीय जीवन में संस्कारों का क्या महत्व है?
संस्कार मनुष्य के दोषों को दूर करते हैं (दोषापनयने), परिमार्जन (शुद्धि) करते हैं और नए गुणों का आधान (गुणाधान) करते हैं।
प्र. 3
संस्कार कुल कितने होते हैं और उन्हें कितनी श्रेणियों में बाँटा गया है?
संस्कार कुल सोलह (16) होते हैं और इन्हें पाँच श्रेणियों (जन्मपूर्व, शैशव, शैक्षणिक, गृहस्थ और मरणोत्तर) में बाँटा गया है।
प्र. 4
जन्म से पूर्व (जन्मपूर्व) कितने संस्कार होते हैं? उनके नाम लिखें।
जन्म से पूर्व कुल तीन (3) संस्कार होते हैं: 1. गर्भाधानम्, 2. पुंसवनम्, और 3. सीमन्तोन्नयनम्।
प्र. 5
जन्मपूर्व संस्कारों के आयोजन के मुख्य उद्देश्य क्या हैं?
गर्भ की रक्षा करना, गर्भस्थ शिशु में संस्कारों का आधान करना और गर्भवती स्त्री की प्रसन्नता ही जन्मपूर्व संस्कारों के मुख्य उद्देश्य हैं।
प्र. 6
शैशव (बाल्यावस्था) संस्कार कितने हैं? उनके नाम लिखें।
शैशव संस्कार कुल छह (6) हैं: 1. जातकर्म, 2. नामकरणम्, 3. निष्क्रमणम्, 4. अन्नप्राशनम्, 5. चूड़ाकर्म (मुंडन), और 6. कर्णवेधः।
प्र. 7
शिक्षा संबंधी (शैक्षणिक) संस्कार कितने होते हैं? उनके नाम लिखें।
शिक्षा संबंधी संस्कार कुल पाँच (5) होते हैं: 1. अक्षारम्भः, 2. उपनयनम्, 3. वेदारम्भः, 4. केशान्तः, और 5. समावर्त्तनम्।
प्र. 8
'अक्षारम्भ' संस्कार में बालक क्या करता है?
अक्षारम्भ संस्कार में शिशु अक्षर लिखना और अंक लिखना (अक्षरलेखनं अङ्कलेखनञ्च) प्रारंभ करता है।
प्र. 9
'उपनयन' संस्कार का क्या अर्थ है?
उपनयन संस्कार का अर्थ है— गुरु द्वारा शिष्य को अपने घर ले जाना, जहाँ शिष्य ब्रह्मचर्य व्रत के नियमों का पालन करते हुए अध्ययन करता है।
प्र. 10
प्राचीन काल में शिष्य को क्या कहा जाता था और क्यों?
प्राचीन काल में शिष्य को 'ब्रह्मचारी' कहा जाता था क्योंकि वह गुरु के आश्रम में रहकर ब्रह्मचर्य के नियमों का पालन करते हुए विद्या अध्ययन करता था।
प्र. 11
'केशान्त' संस्कार का नामांतर 'गोदान संस्कार' क्यों है?
केशान्त संस्कार में गुरु के आश्रम में ही शिष्य का प्रथम क्षौरकर्म (हजामत/बाल काटना) होता था, जिसमें गोदान (गाय का दान) मुख्य कर्म था। इसलिए इसे 'गोदान संस्कार' भी कहा जाता है।
प्र. 12
'समावर्त्तन' संस्कार का मुख्य उद्देश्य क्या है?
समावर्त्तन संस्कार का उद्देश्य शिष्य का गुरुगृह से शिक्षा समाप्त कर गृहस्थ जीवन में प्रवेश करना होता था।
प्र. 13
शिक्षा समाप्त करते समय गुरु शिष्य को क्या उपदेश देते थे?
गुरु शिष्य को जीवन के व्यावहारिक धर्मों का उपदेश देते थे; जैसे— "सत्यं वद (सत्य बोलो), धर्मं चर (धर्म का आचरण करो), स्वाध्यायान्मा प्रमदः (स्वाध्याय में आलस्य मत करो)" आदि।
प्र. 14
गृहस्थ जीवन का एकमात्र संस्कार कौन-सा है?
गृहस्थ जीवन का एकमात्र संस्कार विवाह संस्कार है।
प्र. 15
विवाह संस्कार को पवित्र क्यों माना गया है?
क्योंकि इसी संस्कार के माध्यम से मनुष्य वस्तुतः गृहस्थ जीवन में प्रवेश करता है और इसमें अनेक पवित्र धार्मिक कर्मकांड किए जाते हैं।
प्र. 16
विवाह संस्कार के प्रमुख कर्मकांड कौन-कौन से हैं?
वाग्दानम् (सगाई/वचन देना), मण्डपनिर्माणम्, वधूगृह में वरपक्ष का स्वागत, कन्यादानम्, अग्निस्थापनम्, पाणिग्रहणम्, लाजाहोमः, सप्तपदी और सिन्दूरदानम् आदि।
प्र. 17
मरणोत्तर (मृत्यु के बाद) कौन-सा संस्कार अनुष्ठित किया जाता है?
मृत्यु के पश्चात् अन्त्येष्टि संस्कार (दाह संस्कार) किया जाता है।
प्र. 18
विदेशी लोग भारतीय संस्कारों के प्रति क्यों आकर्षित हैं?
भारतीय संस्कारों की महानता, उनके गूढ़ आध्यात्मिक अर्थ और व्यक्तित्व निर्माण में योगदान के कारण विदेशी लोग भी इनके प्रति उत्सुक और जिज्ञासु हैं।
प्र. 19
ऋषियों की संस्कार संबंधी क्या कल्पना थी?
ऋषियों की कल्पना थी कि जीवन के सभी मुख्य अवसरों पर वेद मंत्रों का पाठ, वरिष्ठों का आशीर्वाद, हवन तथा परिवार के सदस्यों का सम्मेलन होना चाहिए।
प्र. 20
'पाणिग्रहणम्' और 'सप्तपदी' किस संस्कार के अंग हैं?
ये दोनों विवाह संस्कार के प्रमुख अंग हैं।
प्र. 21
प्राचीन शिक्षा में वेदों का क्या स्थान था?
प्राचीन शिक्षा व्यवस्था में वेदों का अध्ययन अत्यंत श्रेष्ठ और उत्कृष्ट माना जाता था।
प्र. 22
'संस्कार' शब्द का प्रयोग आजकल किस रूप में होता है?
आजकल 'संस्कार' शब्द का प्रयोग सीमित या व्यंग्य रूप में (Sarcastic/Limited sense) होने लगा है, यद्यपि यह भारत का मौलिक उपकरण है।
प्र. 23
'लाजाहोमः' कर्मकांड में क्या किया जाता है?
विवाह संस्कार के दौरान धान के लवे (खील) से अग्नि में आहुति दी जाती है, जिसे 'लाजाहोम' कहते हैं।
प्र. 24
'जातकर्म' संस्कार कब और क्यों किया जाता है?
यह शैशव संस्कारों में से एक है, जो बालक के जन्म लेते ही उसकी शुद्धि और कल्याण के लिए किया जाता है।
प्र. 25
विवाह संस्कार के बाद जीवनचक्र किस प्रकार घूमता है?
विवाह के बाद मनुष्य गृहस्थ बनता है, और फिर पुनः गर्भाधान आदि संस्कारों का चक्र आरंभ होकर जीवन चक्र घूमता रहता है।
प्र. 26
'कल्याणप्रद उपदेश' गुरु शिष्य को कब देते थे?
गुरु शिष्य को शिक्षा समाप्ति के अवसर पर (समावर्त्तन संस्कार के समय) आश्रम से विदा करते हुए देते थे।
प्र. 27
'वेदारम्भ' संस्कार कहाँ और किसके मार्गदर्शन में होता था?
वेदारम्भ संस्कार गुरु के घर (गुरुगृहे) पर ही गुरु के मार्गदर्शन में होता था।
प्र. 28
'कर्णवेधः' संस्कार का क्या अर्थ है?
यह शैशव संस्कारों का एक अंग है, जिसमें बालक के कान बिंधे जाते हैं।
प्र. 29
संस्कारों के द्वारा मानव में कौन-कौन से सुधार आते हैं?
संस्कारों से मानव के दोष दूर होते हैं, आत्मिक शुद्धि होती है और उसमें नैतिक तथा मानवीय गुणों का समावेश होता है।
प्र. 30
'भारतीयसंस्काराः' पाठ से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?
इस पाठ से हमें अपनी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और संस्कारों का सम्मान करने तथा जीवन में नैतिक मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा मिलती है।
दीर्घ उत्तरीय एवं व्याख्यात्मक प्रश्न (5 अंक वाले)
प्र. 31
'भारतीयसंस्काराः' पाठ का सारांश अपने शब्दों में लिखें।
'भारतीयसंस्काराः' पाठ में भारतीय संस्कृति के एक महत्वपूर्ण स्तंभ— 'संस्कारों' का वर्णन है। भारतीय जीवन में प्राचीनकाल से संस्कारों का विशेष स्थान रहा है। कुल 16 संस्कारों को पाँच भागों में विभाजित किया गया है— जन्मपूर्व (3), शैशव (6), शैक्षणिक (5), गृहस्थ (1) और मरणोत्तर (1)। ये संस्कार केवल कर्मकांड नहीं हैं, बल्कि ये मनुष्य के दोषों का परिमार्जन कर उसमें गुणों का आधान करते हैं। शैशव और शिक्षा के संस्कार बालक को अनुशासित बनाते हैं, विवाह संस्कार से वह गृहस्थ जीवन में प्रवेश करता है और अंत में अन्त्येष्टि संस्कार से जीवन की इहलोक यात्रा समाप्त होती है।
प्र. 32
भारतीय संस्कारों के पाँचों प्रकारों का संक्षिप्त परिचय दें।
- जन्मपूर्व संस्कार (3): गर्भाधान, पुंसवन तथा सीमन्तोन्नयन। इनका उद्देश्य गर्भ-रक्षा और शिशु में संस्कार रोपना है।
- शैशव संस्कार (6): जातकर्म, नामकरण, निष्क्रमण, अन्नप्राशन, चूड़ाकर्म और कर्णवेध। यह बाल्यावस्था के शारीरिक व मानसिक विकास से संबंधित हैं।
- शैक्षणिक संस्कार (5): अक्षारम्भ, उपनयन, वेदारम्भ, केशान्त और समावर्त्तन। इनका संबंध ज्ञानार्जन और चरित्र निर्माण से है।
- गृहस्थ संस्कार (1): विवाह संस्कार। यह मनुष्य को सामाजिक एवं पारिवारिक उत्तरदायित्व सौंपता है।
- मरणोत्तर संस्कार (1): अन्त्येष्टि संस्कार। मृत्यु के बाद किया जाने वाला अंतिम संस्कार।
प्र. 33
विवाह संस्कार का विस्तृत वर्णन करें।
विवाह संस्कार को एक अत्यंत पवित्र संस्कार माना गया है, जिसके माध्यम से मनुष्य गृहस्थ जीवन में प्रवेश करता है। इसमें अनेक प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान और कर्मकांड होते हैं। मुख्य कर्मकांडों में— वाग्दानम् (सगाई), मंडप निर्माण, वर पक्ष का वधू पक्ष के घर स्वागत, वधू-वर का परस्पर निरीक्षण, कन्यादान, अग्नि स्थापन, पाणिग्रहण (हाथ थामना), लाजाहोम (खील से आहुति), सप्तपदी (सात फेरे) और सिन्दूरदान शामिल हैं। यह संस्कार दो परिवारों के बीच अटूट संबंध स्थापित करता है।
प्र. 34
प्राचीन शिक्षा व्यवस्था में संस्कारों के महत्व पर प्रकाश डालें।
प्राचीनकाल में शिक्षा संस्कारों पर ही आधारित थी। बालक का 'अक्षारम्भ' होने के बाद 'उपनयन' संस्कार द्वारा गुरु उसे अपने आश्रम में लाते थे। वहाँ बालक 'ब्रह्मचारी' बनकर कड़े नियमों का पालन करता था। आश्रम में 'वेदारम्भ' और 'केशान्त (गोदान)' संस्कार होते थे। शिक्षा पूर्ण होने पर 'समावर्त्तन' संस्कार के समय गुरु उसे सत्य बोलने, धर्म का पालन करने जैसे व्यावहारिक उपदेश देकर गृहस्थ जीवन के लिए विदा करते थे।
प्र. 35
"संस्काराः मानवस्य क्रमशः परिमार्जने दोषानयने गुणाधाने च योगदानं कुर्वन्ति" - इस कथन की समीक्षा करें।
इस कथन का अर्थ है कि संस्कार मनुष्य की कमियों/दोषों को दूर कर उसमें सद्गुणों की स्थापना करते हैं। भारतीय दर्शन में व्यक्ति को जन्म से ही सुसंस्कृत करने का विधान है। जन्मपूर्व संस्कारों से शारीरिक व मानसिक नींव पड़ती है, शैशव व शिक्षा संस्कारों से बुद्धि व चरित्र का परिमार्जन होता है तथा विवाह संस्कार से सामाजिक दायित्व का बोध होता है। अतः संस्कार मनुष्य को एक सभ्य और श्रेष्ठ नागरिक बनाने का कार्य करते हैं।
एक-पंक्तिय (One-Liner) अभ्यास प्रश्न एवं उत्तर
प्र. 36
भारतीय संस्कृति का अनूठा व्यक्तित्व किससे रचा जाता है?
संस्कारैः (संस्कारों से)।
प्र. 37
संस्कारों की कुल संख्या कितनी है?
षोडश (16)।
प्र. 38
जन्मपूर्व संस्कार कितने होते हैं?
त्रयः (3)।
प्र. 39
शैशव संस्कार कितने होते हैं?
षट् (6)।
प्र. 40
शैक्षणिक संस्कार कितने होते हैं?
पञ्च (5)।
प्र. 41
गृहस्थ संस्कार कितना है?
एकः (विवाह रूप)।
प्र. 42
मरणोत्तर संस्कार कौन-सा है?
अन्त्येष्टिः।
प्र. 43
'पुंसवन' संस्कार कब किया जाता है?
जन्म से पूर्व (जन्मपूर्वम्)।
प्र. 44
'अन्नप्राशन' किस श्रेणी का संस्कार है?
शैशव संस्कारः।
प्र. 45
प्राचीन काल में शिष्य को क्या कहते थे?
ब्रह्मचारी।
प्र. 46
गुरुगृह में शिष्य का प्रथम क्षौरकर्म किस संस्कार में होता था?
केशान्त संस्कारे (गोदान संस्कारे)।
प्र. 47
'सप्तपदी' क्रिया किस संस्कार में होती है?
विवाह संस्कारे।
प्र. 48
"सत्यं वद, धर्मं चर" उपदेश कौन देते थे?
गुरुः (शिक्षक)।
प्र. 49
'सीमांतोन्नयन' कैसा संस्कार है?
जन्मपूर्व संस्कारः।
प्र. 50
अक्षारम्भ में शिशु क्या लिखना प्रारंभ करता है?
अक्षरलेखनम् अङ्कलेखनञ्च (अक्षर और अंक)।
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