बिहार बोर्ड (BSEB) कक्षा 10 संस्कृत
पीयूषम् (भाग-2) | पञ्चमः पाठः – "भारतमहिमा"
महत्वपूर्ण विषयनिष्ठ (Subjective) प्रश्नोत्तर
लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक वाले)
प्र. 1
'भारतमहिमा' पाठ में कुल कितने पद (श्लोक) हैं और उन्हें किन भागों में बाँटा गया है?
इस पाठ में कुल 5 पद हैं। प्रथम दो पद 'पौराणिकी' (विष्णुपुराण तथा श्रीमद्भागवतपुराण) से लिए गए हैं तथा अंतिम तीन पद 'आधुनिकी' (अध्यक्ष द्वारा रचित) हैं।
प्र. 2
'भारतमहिमा' पाठ के आधार पर भारत देश की क्या विशेषताएँ हैं?
भारत देश अत्यंत प्रसिद्ध, निर्मल, ममतामयी (वत्सला) और विशाल भूमि है, जहाँ देवता भी जन्म लेने की इच्छा प्रकट करते हैं।
प्र. 3
देवता भारतभूमि के गीत क्यों गाते हैं?
क्योंकि भारतभूमि स्वर्ग और मोक्ष प्राप्त करने का साधन- स्वरूप मार्ग है। यहाँ जन्म लेने वाले मनुष्य देवत्व प्राप्त करते हैं।
प्र. 4
"गायन्ति देवाः किल गीतकानि..." श्लोक किस पुराण से संकलित है?
यह प्रसिद्ध श्लोक विष्णुपुराण से संकलित है।
प्र. 5
"अहो अमीषां किमकारि शोभनम्..." श्लोक किस पुराण से लिया गया है?
यह श्लोक श्रीमद्भागवतपुराण से लिया गया है।
प्र. 6
भारत में विभिन्न धर्मों और जातियों के लोग किस प्रकार रहते हैं?
भारत में विभिन्न धर्म और जातियों के लोग भेदभाव (प्रभेद) को भुलाकर एकता के भाव (एकत्वभावं) को धारण करते हुए एक साथ निवास करते हैं।
प्र. 7
हमारी मातृभूमि (भारतीय धरा) कैसी है?
हमारी मातृभूमि अत्यंत विशाल, रमणीय, निर्मल, कल्याणकारी तथा ममतामयी (वत्सला) है।
प्र. 8
भारतभूमि की सेवा कौन-कौन करते हैं?
भारतभूमि की सेवा सागर, पर्वत, झरने (निर्झर) और बहती हुई नदियाँ (आपगा) निरंतर करती हैं।
प्र. 9
भारतीयों की देशभक्ति कैसी होनी चाहिए?
सभी नागरिकों की देशभक्ति श्रेष्ठ, आदरणीय तथा दूसरों के लिए आदर्श स्वरूपा होनी चाहिए।
प्र. 10
जगत् का गौरव कौन-सा देश है और यह हमारे द्वारा क्यों पूजनीय है?
भारत देश पूरे जगत् का गौरव (जगद्गौरवम्) और शोभनीय है। अपनी महान संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता के कारण यह हमारे द्वारा सदा पूजनीय है।
प्र. 11
भगवान (श्रीहरि) किन मनुष्यों से प्रसन्न रहते हैं?
भगवान उन मनुष्यों पर प्रसन्न रहते हैं जो भारतभूमि के आंगने (भारताजिरे) में जन्म लेकर भगवान मुकुंद (श्रीहरि) की सेवा के योग्य बनते हैं।
प्र. 12
भारत को 'स्वर्गापवर्गस्पदमार्गभूते' क्यों कहा गया है?
क्योंकि यह भूमि स्वर्ग और मोक्ष (अपवर्ग) प्रदान करने वाली साधना का साधन-स्थल/मार्ग है।
प्र. 13
'भारतमहिमा' पाठ के प्रति हमारा क्या कर्तव्य है?
अपने देश भारत के प्रति अगाध भक्ति और देशप्रेम की भावना रखना हमारा परम कर्तव्य है।
प्र. 14
'निर्मला वत्सला मातृभूमिः' से क्या आशय है?
इसका आशय है कि हमारी भारतभूमि निष्कलंक (पवित्र) है और अपनी संतानों के प्रति माँ के समान वात्सल्य तथा स्नेह बरसाने वाली है।
प्र. 15
'अस्माकं देशः' का नाम क्या है और इसकी महिमा कहाँ गाई जाती है?
हमारे देश का नाम 'भारतवर्ष' है और इसकी महिमा सर्वत्र (सभी जगह) गाई जाती है।
प्र. 16
देवता लोग बार-बार क्या इच्छा (स्पृहा) करते हैं?
देवता लोग इच्छा प्रकट करते हैं कि वे भी मनुष्य रूप में भारतभूमि में जन्म लें ताकि श्रीहरि की सेवा कर सकें।
प्र. 17
'आपगाभिः' शब्द का क्या अर्थ है और पाठ में इसका क्या उपयोग है?
'आपगाभिः' का अर्थ "नदियों द्वारा" है। पाठ में बताया गया है कि बहती हुई नदियाँ निरंतर भारतभूमि की सेवा करती हैं।
प्र. 18
विशाल भारतीय धरा की प्राकृतिक सुषमा कैसी है?
यह विशाल धरा प्राकृतिक सुंदरता से परिपूर्ण है, जिसके तटों पर सागर, विशाल पर्वत, घने वन तथा कल-कल बहते झरने हैं।
प्र. 19
भारत में विविधता में एकता का स्वरूप कैसे दिखाई देता है?
भारत में अलग-अलग धर्मों, जातियों और भाषाओं के लोग बिना किसी वैमनस्य के मिलकर एकत्व की भावना से रहते हैं।
प्र. 20
'मुकुन्दसेवौपयिकम्' का क्या तात्पर्य है?
इसका तात्पर्य भगवान विष्णु (मुकुंद) की सेवा के योग्य होना है, जो केवल भारत में जन्म लेने से सुलभ होता है।
प्र. 21
आधुनिक पदों (आधुनिकी) में भारत का क्या स्वरूप प्रस्तुत किया गया है?
आधुनिक पदों में भारत को विशाल, निर्मल, वत्सला, पूजनीय, जगत् का गौरव और महान प्राकृतिक संसाधनों से संपन्न बताया गया है।
प्र. 22
'आवर्जनीया' शब्द का क्या अर्थ है और इसका उपयोग किस संदर्भ में हुआ है?
'आवर्जनीया' का अर्थ "आकर्षक" या "आदरणीय" है। इसका प्रयोग भारतीयों की अनुकरणीय और आदरणीय देशभक्ति के लिए हुआ है।
प्र. 23
पुराणों में भारत का क्या स्थान माना गया है?
पुराणों में भारत को सर्वोपरि और पावन भूमि माना गया है, जहाँ स्वयं देवता भी जन्म लेने के लिए लालायित रहते हैं।
प्र. 24
'सुरत्वात्' शब्द का क्या अर्थ है?
'सुरत्वात्' का अर्थ "देवत्व के कारण" या "देवता होने से" है।
प्र. 25
भारतभूमि पर जन्म लेने वाले मनुष्यों को धन्य क्यों कहा गया है?
क्योंकि भारत में जन्म लेकर मनुष्य सहज ही सत्कर्मों के द्वारा मोक्ष और श्रीहरि का सानिध्य प्राप्त कर सकता है।
प्र. 26
'अस्माकं कर्तव्यरूपेण किम् वर्तते?' (हमारा कर्तव्य क्या है?)
भारत देश के प्रति अपनी देशभक्ति और असीम श्रद्धा/भक्ति रखना हमारा मूल कर्तव्य है।
प्र. 27
'रम्यरूपा' भारतभूमि की क्या विशेषता है?
'रम्यरूपा' का अर्थ है अत्यंत सुंदर रूप वाली। भारतभूमि अपने प्राकृतिक सौंदर्य, वनों, पर्वतों और नदियों से सुशोभित है।
प्र. 28
'परादर्शरूपा' देशभक्ति से क्या तात्पर्य है?
इसका तात्पर्य ऐसी श्रेष्ठ और परा-उत्कृष्ट देशभक्ति से है जो दूसरों के समक्ष आदर्श प्रस्तुत करे।
प्र. 29
भारत देश का नाम किसके आधार पर प्रसिद्ध है?
इसे प्राचीन काल से ही 'भारतवर्ष' के नाम से जाना जाता है।
प्र. 30
'भारतमहिमा' पाठ से हमें क्या मुख्य संदेश मिलता है?
इस पाठ से हमें अपनी मातृभूमि का सम्मान करने, राष्ट्रीय एकता बनाए रखने और निस्वार्थ देशभक्ति अपनाने का संदेश मिलता है।
दीर्घ उत्तरीय एवं व्याख्यात्मक प्रश्न (5 अंक वाले)
प्र. 31
'भारतमहिमा' पाठ का सारांश अपने शब्दों में लिखें।
'भारतमहिमा' पाठ में भारतवर्ष की गरिमा, प्राकृतिक सुंदरता और महानता का निरूपण किया गया है। पौराणिक श्लोकों में बताया गया है कि भारत वह पावन भूमि है जहाँ जन्म लेने के लिए देवता भी तरसते हैं, क्योंकि यह स्वर्ग और मोक्ष प्राप्ति का साधन है। आधुनिक श्लोकों में भारत को एक विशाल, निर्मल, वात्सल्यमयी मातृभूमि कहा गया है। यहाँ अनेक धर्मों और जातियों के लोग एकता की भावना के साथ निवास करते हैं। समुद्र, पर्वत और नदियाँ इसकी निरंतर सेवा करते हैं। संपूर्ण जगत् में भारत का स्थान पूजनीय है।
प्र. 32
"गायन्ति देवाः किल गीतकानि धन्यास्तु ते भारतभूमिभागे..." श्लोक का सप्रसंग भावार्थ स्पष्ट करें।
प्रसंग: यह श्लोक 'भारतमहिमा' पाठ के पौराणिक भाग (विष्णुपुराण) से उद्धृत है।
भावार्थ: देवतागण भारतवर्ष के गुण गाते हुए कहते हैं कि वे मनुष्य सचमुच धन्य हैं, जिनका जन्म स्वर्ग और मोक्ष प्रदान करने वाले मार्ग स्वरूप भारतभूमि पर हुआ है। देवता होकर भी भारत में जन्म लेना सौभाग्य की बात है क्योंकि यहाँ से व्यक्ति आध्यात्मिक उन्नति कर ईश्वर पद पा सकता है।
प्र. 33
"इयं निर्मला वत्सला मातृभूमिः..." श्लोक की व्याख्या करें।
प्रसंग: यह श्लोक 'भारतमहिमा' पाठ के आधुनिक भाग से लिया गया है।
व्याख्या: कवि भारत की धरती की विशेषताओं का वर्णन करते हुए कहते हैं कि यह भारतवर्ष हमेशा से ही प्रसिद्ध रहा है। हमारी यह मातृभूमि निर्मल (पवित्र) और ममतामयी है। यहाँ विभिन्न धर्मों और सम्प्रदायों के लोग आपसी भेदों को मिटाकर भाईचारे और एकात्म भाव के साथ प्रेमपूर्वक रहते हैं।
प्र. 34
भारत की प्राकृतिक शोभा और इसके आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालें।
भारत प्राकृतिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टिकोणों से अद्वितीय है। प्राकृतिक दृष्टि से यह विशाल भूमि सागरों, पर्वतों, वनों और कल-कल बहती नदियों द्वारा सेवित और अलंकृत है। आध्यात्मिक रूप से, इसे मुकुंद (श्रीहरि) की सेवा का सर्वोत्तम स्थान माना गया है। यहाँ की संस्कृति त्याग, समरसता और 'वसुधैव कुटुम्बकम्' का पाठ पढ़ाती है, जिसके कारण यह पूरे विश्व में गौरवशाली और पूजनीय मानी जाती है।
प्र. 35
राष्ट्र निर्माण और समाज में 'देशभक्ति' के महत्व को 'भारतमहिमा' पाठ के आधार पर स्पष्ट करें।
पाठ के अंतिम श्लोक में कहा गया है कि "समेषां जनानां परादर्शरूपा सदावर्जनीया देशभक्तिः भवेत्"। अर्थात सभी नागरिकों में अनुकरणीय और आदरणीय देशभक्ति होनी चाहिए। देशभक्ति ही वह सूत्र है जो विभिन्न धर्म-जाति के लोगों को एक धागे में बाँधकर रखती है। जब नागरिकों में राष्ट्र-प्रथम की भावना होगी, तभी देश अखंड, गौरवशाली और विश्व-मंच पर पूजनीय बना रहेगा।
एक-पंक्तिय (One-Liner) अभ्यास प्रश्न एवं उत्तर
प्र. 36
'भारतमहिमा' पाठ में कितने पुराणों से श्लोक संकलित हैं?
दो (विष्णुपुराण और भागवतपुराण)।
प्र. 37
'गीतकानि' कौन गाते हैं?
देवाः (देवता)।
प्र. 38
स्वर्ग और मोक्ष प्रदान करने वाली भूमि कौन-सी है?
भारतभूमिः।
प्र. 39
'अहो अमीषां किमकारि शोभनम्' - यह उक्ति किसकी है?
देवानाम (देवताओं की)।
प्र. 40
हमारी मातृभूमि कैसी है?
निर्मला और वत्सला।
प्र. 41
विभिन्न जनाः किम वहन्तः बसन्ति? (विभिन्न लोग क्या धारण करते हुए रहते हैं?)
एकत्वभावम् (एकता का भाव)।
प्र. 42
अस्माकं भारतीया धरा कैसी है?
विशाला।
प्र. 43
सागरैः, पर्वतैः, निर्झरैः का सेविता?
भारतीया धरा (भारतभूमि)।
प्र. 44
जगत् का गौरव कौन है?
भारतम्।
प्र. 45
जगद्गौरवं भारतम् अस्माभिः किम् भवेत्?
पूजनीयम् (सदा पूजनीय)।
प्र. 46
जनानां देशभक्तिः का भवेत्?
परादर्शरूपा।
प्र. 47
विष्णुपुराण से कौन-सा पद लिया गया है?
प्रथम पद ("गायन्ति देवाः...")।
प्र. 48
भागवतपुराण से कौन-सा पद उद्धृत है?
द्वितीय पद ("अहो अमीषाम्...")।
प्र. 49
'अजिरे' शब्द का क्या अर्थ है?
आंगने (प्रांगण में)।
प्र. 50
'स्पृहा' शब्द का क्या अर्थ है?
इच्छा / चाह।
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