Chapter 3. अलसकथा | BSEB 10 Sanskrit Subjective


BSEB Class 10 Sanskrit Chapter 3 - अलसकथा Subjective Questions

बिहार बोर्ड (BSEB) कक्षा 10 संस्कृत

पीयूषम् (भाग-2) | तृतीयः पाठः – "अलसकथा"

महत्वपूर्ण विषयनिष्ठ (Subjective) प्रश्नोत्तर

लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक वाले)
प्र. 1 'अलसकथा' पाठ किस कथाग्रन्थ से संकलित है और इसके रचयिता कौन हैं?
'अलसकथा' पाठ प्रसिद्ध मैथिली कवि विद्यापति द्वारा रचित नीतिकथा ग्रन्थ 'पुरुषपरीक्षा' से संकलित है।
प्र. 2 मिथिला के मन्त्री का क्या नाम था और उनका स्वभाव कैसा था?
मिथिला के मन्त्री का नाम वीरेश्वर था। वे स्वभाव से अत्यंत दानशील, दयालु तथा संकटग्रस्तों और अनाथों को प्रतिदिन इच्छापूर्वक भोजन देने वाले थे।
प्र. 3 अलसशाला (आलसियों के गृह) की स्थापना क्यों की गई थी?
मन्त्री वीरेश्वर द्वारा आलसियों, अनाथों और संकटग्रस्त लोगों को अन्न तथा वस्त्र निःशुल्क प्रदान करने के लिए अलसशाला की स्थापना की गई थी।
प्र. 4 बनावटी आलस्य दिखाकर अलसशाला में कौन भोजन ग्रहण करने लगे थे?
आलसियों के लिए मिलने वाली सुविधाओं को देखकर धूर्त (कपट) लोग भी बनावटी आलस्य दिखाकर अलसशाला से भोजन और वस्तुएँ ग्रहण करने लगे थे।
प्र. 5 अलसशाला में धूर्तों की पहचान के लिए नियोगी पुरुषों (कर्मचारियों) ने क्या किया?
नियोगी पुरुषों ने अलसशाला में बढ़ते धन-व्यय को देखकर असली आलसियों की परीक्षा लेने हेतु अलसशाला में आग लगा दी (वह्निं प्रावर्धयन्)।
प्र. 6 अलसशाला में आग लगी देखकर धूर्त पुरुषों ने क्या किया?
आग लगी देखकर सभी बनावटी आलसी (धूर्त पुरुष) तुरंत वहाँ से भाग गए।
प्र. 7 अलसशाला में आग लगने पर भी कुल कितने आलसी वही पड़े रह गए?
आग लगने पर भी कुल चार (4) वास्तविक आलसी वहीं सोए रहे और आपस में बातें करते रहे।
प्र. 8 पहले आलसी ने अपना मुँह ढककर क्या कहा?
पहले आलसी ने कहा— "अहो! यह कैसा कोलाहल (हल्ला) हो रहा है?"
प्र. 9 दूसरे आलसी ने आग के विषय में क्या अनुमान लगाया?
दूसरे आलसी ने कहा— "लगता है इस घर में आग लग गई है।"
प्र. 10 तीसरे आलसी ने क्या उपाय सुझाया?
तीसरे आलसी ने कहा— "क्या यहाँ कोई दयालु व्यक्ति नहीं है जो इस समय जल से भीगे वस्त्र या चटाई से हमें ढक दे?"
प्र. 11 चौथे आलसी ने अन्य आलसियों से क्या कहा?
चौथे आलसी ने कहा— "अरे वाचालों! कितना बोलते हो? शांत क्यों नहीं रहते?"
प्र. 12 नियोगी पुरुषों (कर्मचारियों) ने चारों आलसियों को आग से कैसे बचाया?
नियोगी पुरुषों ने चारों आलसियों के ऊपर आग गिरते देखकर उनके बालों को पकड़कर (केशेष्वाकृष्य) उन्हें घर से बाहर निकाला।
प्र. 13 "पतिरेव गतिः स्त्रीणां..." श्लोक का क्या अर्थ है?
स्त्रियों की गति (रक्षक) केवल उनका पति होता है, बच्चों की गति उनकी माता होती है, और संसार में आलसियों की गति केवल दयालु (कारुणिक) व्यक्ति ही होता है।
प्र. 14 चारों आलसियों को बाहर निकालने के बाद मन्त्री ने क्या किया?
चारों वास्तविक आलसियों को आग से सुरक्षित बाहर निकालने के बाद मन्त्री वीरेश्वर ने उन्हें पहले से भी अधिक वस्तुएँ और धन इनाम में दिया।
प्र. 15 विद्यापति कौन थे? पाठ के आधार पर स्पष्ट करें।
विद्यापति एक प्रसिद्ध मैथिली कवि और संस्कृत के महान लेखक थे। उन्होंने नीतिशास्त्र को मनुष्य का प्रमुख गुण माना है।
प्र. 16 नीतिकार आलस्य को क्या मानते हैं?
नीतिकार आलस्य को मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु (रिपु) मानते हैं।
प्र. 17 धूर्त पुरुषों की परीक्षा क्यों ली गई?
क्योंकि बनावटी आलसी राजा के धन का अनधिकृत व्यय कर रहे थे, जिससे राज्य का कोष व्यर्थ नष्ट हो रहा था।
प्र. 18 "स्थितिः सौकर्यमूला हि सर्वेषामपि संहननम्..." श्लोक का भाव क्या है?
सुविधाजनक स्थिति को देखकर सभी जीव एकत्र हो जाते हैं। अपनी जाति के सुख को देखकर कौन ऐसा प्राणी है जो वहाँ न दौड़े?
प्र. 19 वीरेश्वर का दानशील स्वभाव आलसियों के लिए कैसा सिद्ध हुआ?
वीरेश्वर का दानशील स्वभाव वास्तविक आलसियों के लिए जीवन रक्षक सिद्ध हुआ, किंतु धूर्तों के आने से अलसशाला का व्यय बढ़ गया।
प्र. 20 अलसशाला के कर्मचारियों ने आग क्यों लगाई?
वास्तविक और बनावटी आलसियों के बीच अंतर स्पष्ट करने तथा धूर्तों को अलसशाला से बाहर निकालने के लिए आग लगाई गई।
प्र. 21 आलसियों के संवाद से उनकी किस मनोवृत्ति का पता चलता है?
उनके संवाद से पता चलता है कि वे प्राण संकट में होने पर भी कोई शारीरिक श्रम नहीं करना चाहते थे और केवल दूसरों की दया पर आश्रित रहना चाहते थे।
प्र. 22 'कारुणिक' शब्द का प्रयोग किसके लिए और क्यों हुआ है?
'कारुणिक' का प्रयोग दयालु पुरुषों के लिए हुआ है, क्योंकि इस संसार में आलसियों का भरण-पोषण केवल दयालु व्यक्ति ही कर सकते हैं।
प्र. 23 चारों आलसियों के बाल पकड़कर क्यों खींचे गए?
क्योंकि आग उनके ऊपर गिरने वाली थी और वे स्वयं उठकर भागने के लिए तैयार नहीं थे, अतः उनकी जान बचाने के लिए उनके केश पकड़कर बाहर निकाला गया।
प्र. 24 'पुरुषपरीक्षा' ग्रन्थ का मुख्य उद्देश्य क्या है?
मानव जीवन के दोषों का निवारण करना तथा विभिन्न व्यावहारिक गुणों का उपदेश देना इस ग्रन्थ का मुख्य उद्देश्य है।
प्र. 25 अलसकथा पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
इस पाठ से शिक्षा मिलती है कि आलस्य मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। हमें बनावटी या कपटी बनकर दूसरों के आश्रय पर जीने का प्रयास नहीं करना चाहिए।
प्र. 26 'तुष्णीं' शब्द का क्या अर्थ है?
'तुष्णीं' शब्द का अर्थ "चुप" या "शांत" होता है।
प्र. 27 'जलाद्रैर्वासोभिः' शब्द का अर्थ पाठ के अनुसार क्या है?
जल से भीगे वस्त्रों (कपड़ों) द्वारा।
प्र. 28 'कटाैैः' शब्द का क्या अर्थ है?
चटाई या आच्छादन (आवरण)।
प्र. 29 आलसियों को किस बात का सबसे बड़ा सहारा होता है?
आलसियों को केवल दयालु पुरुषों की करुणा का ही एकमात्र सहारा होता है।
प्र. 30 मिश्रित भीड़ (धूर्त) अलसशाला में क्यों जमा हुई थी?
बिना किसी श्रम के मुफ्त में भोजन और वस्त्र प्राप्त करने की सुविधा देखकर धूर्तों की भीड़ जमा हुई थी।
दीर्घ उत्तरीय एवं व्याख्यात्मक प्रश्न (5 अंक वाले)
प्र. 31 'अलसकथा' पाठ का सारांश अपने शब्दों में लिखें।
'अलसकथा' विद्यापति रचित 'पुरुषपरीक्षा' से ली गई है। मिथिला के दयालु मन्त्री वीरेश्वर अनाथों और आलसियों को मुफ्त भोजन-वस्त्र देते थे। यह देखकर अनेक धूर्त लोग भी बनावटी आलसी बनकर सुविधाएँ लेने लगे। व्यय बढ़ने पर कर्मचारियों ने अलसशाला में आग लगा दी। आग लगते ही सभी धूर्त भाग गए, किंतु चार वास्तविक आलसी सोए रहे और बाहर निकलने के बजाय दयालु व्यक्ति के आने की प्रतीक्षा करते रहे। कर्मचारियों ने उन्हें बालों से पकड़कर सुरक्षित निकाला। मन्त्री ने चारों आलसियों को भारी पुरस्कार दिया। यह पाठ आलस्य को त्यागने का संदेश देता है।
प्र. 32 अलसशाला में आग लगाने पर चारों आलसियों के बीच हुई बातचीत का वर्णन करें।

जब अलसशाला में आग लगी, तो चारों आलसी भागे नहीं बल्कि कपड़े से मुँह ढककर बातें करने लगे:

  • पहला: "अहो! यह कैसा कोलाहल हो रहा है?"
  • दूसरा: "लगता है इस घर में आग लग गई है।"
  • तीसरा: "क्या कोई ऐसा दयालु व्यक्ति नहीं है जो जल से भीगे वस्त्र या चटाई से हमें ढका दे?"
  • चौथा: "अरे वाचालों! कितना बोलते हो? शांत क्यों नहीं बैठते?"

यह बातचीत उनकी अत्यधिक आलसी प्रवृत्ति को दर्शाती है।

प्र. 33 "पतिरेव गतिः स्त्रीणां बालानां जननी गतिः। नालसानां गतिः काचिल्लोके कारुणिकं बिना॥" - इस श्लोक की व्याख्या करें।

प्रसंग: यह श्लोक 'अलसकथा' पाठ के अंत में उद्धृत है।

व्याख्या: इस श्लोक में बताया गया है कि संसार में हर असहाय का कोई न कोई रक्षक होता है; जैसे स्त्रियों की रक्षा और गति उनका पति होता है तथा बालकों की गति उनकी माता होती है। परंतु इस संसार में आलसियों का कोई अपना रक्षक नहीं होता, उनका भरण-पोषण और रक्षा केवल दयालु (कारुणिक) व्यक्ति ही कर सकता है।

प्र. 34 वीरेश्वर का चरित्र-चित्रण करें।
वीरेश्वर मिथिला के मन्त्री थे। वे स्वभाव से अत्यंत दानशील, दयालु और सहृदय व्यक्ति थे। वे सभी अनाथों, निर्धनों और संकटग्रस्त लोगों को प्रतिदिन इच्छापूर्वक भोजन और वस्त्र प्रदान करते थे। आलसियों के प्रति भी उनके मन में अगाध सहानुभूति थी। जब उन्हें अलसशाला के वास्तविक आलसियों के बारे में पता चला, तो उन्होंने उन्हें और अधिक सहायता प्रदान की। वे एक आदर्श और प्रजावत्सल मन्त्री थे।
प्र. 35 'अलसकथा' पाठ के आधार पर आलस्य के दुष्परिणामों पर प्रकाश डालें।
आलस्य मनुष्य का सबसे बड़ा आंतरिक शत्रु है। आलसी व्यक्ति भूखा रहकर कष्ट सह सकता है, लेकिन अपने उदर (पेट) की ज्वाला शांत करने के लिए भी मेहनत नहीं कर सकता। आलसियों की आत्मनिर्भरता समाप्त हो जाती है और वे पूर्णतः समाज या दयालु व्यक्तियों पर निर्भर हो जाते हैं। संकट के समय (जैसे आग लगने पर) भी वे स्वयं की रक्षा नहीं कर पाते। अतः जीवन में प्रगति हेतु आलस्य का त्याग अनिवार्य है।
एक-पंक्तिय (One-Liner) अभ्यास प्रश्न एवं उत्तर
प्र. 36 'अलसकथा' के कथाकार कौन हैं?
विद्यापतिः।
प्र. 37 'पुरुषपरीक्षा' किस भाषा में रचित ग्रन्थ है?
संस्कृत भाषा में (संस्कृतग्रन्थः)।
प्र. 38 मिथिला के मन्त्री कौन थे?
वीरेश्वरः।
प्र. 39 नीतिकार आलस्य को क्या मानते हैं?
रिपुम् (शत्रु)।
प्र. 40 अलसशाला में आग क्यों लगाई गई?
आलसियों की परीक्षा लेने के लिए (अलसानां परीक्षार्थम्)।
प्र. 41 आग लगने पर कौन भाग गए?
सभी धूर्त पुरुष (सर्वे धूर्ताः)।
प्र. 42 आग लगने पर कितने पुरुष सोए रह गए?
चत्वारः (चार)।
प्र. 43 "अहो कथम् अयं कोलाहलः" यह किसने कहा?
प्रथम आलसी ने (प्रथमेन)।
प्र. 44 "अग्निर्दग्धोऽस्ति" का अनुमान किसने लगाया?
द्वितीय आलसी ने (द्वितीयेन)।
प्र. 45 "कोऽपि तथा धार्मिको नास्ति" यह विचार किसका था?
तृतीय आलसी का (तृतीयेन)।
प्र. 46 "अये वाचालाः! कति वचनानि वक्तुं शक्नुथ" किसने कहा?
चतुर्थ आलसी ने (चतुर्थेन)।
प्र. 47 आलसियों को घर से बाहर कैसे निकाला गया?
केश पकड़कर (केशेष्वाकृष्य)।
प्र. 48 बालकों की गति (रक्षक) कौन होती है?
जननी (माता)।
प्र. 49 स्त्रियों की गति कौन होता है?
पतिः।
प्र. 50 आलसियों का रक्षक संसार में कौन होता है?
कारुणिकः (दयालु पुरुष)।

0 Comments