Chapter 24. नरस्य | BSEB 10 Sanskrit Objective


पाठ-24 : नरस्य (वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तरी)

पाठ-24 : नरस्य (वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तरी)

50 बहुविकल्पीय वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Questions) उत्तर एवं विस्तृत व्याख्या सहित

1–10: नरस्य मित्रम्, शत्रुः, आभूषणम् च (Friend, Enemy & Ornament)
1. नरस्य मित्रं किम् अस्ति? (मनुष्य का मित्र क्या है?)
(A) धनम्
(B) धर्मः
(C) बन्धुः
(D) पुस्तकम्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) धर्मः
व्याख्या: पाठ के अनुसार मनुष्य का सच्चा मित्र धर्म है— "मित्रम् – धर्मः"
2. नरस्य शत्रुः कः अस्ति? (मनुष्य का शत्रु कौन है?)
(A) दोषः (अवगुणः)
(B) कालः
(C) रोगः
(D) दरिद्रता
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) दोषः (अवगुणः)
व्याख्या: मनुष्य का असली शत्रु उसके अपने दोष या अवगुण हैं— "शत्रुः – दोषः (अवगुणः)"
3. नरस्य आभूषणम् किम् अस्ति? (मनुष्य का आभूषण क्या है?)
(A) सुवर्णम्
(B) सद्वाणी
(C) वस्त्रम्
(D) रत्नम्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) सद्वाणी
व्याख्या: मनुष्य का सच्चा आभूषण उसकी मीठी व अच्छी वाणी (सद्वाणी) है— "आभूषणम् – सद्वाणी"
4. धर्मः कस्य मित्रम् अस्ति? (धर्म किसका मित्र है?)
(A) देवस्य
(B) नरस्य
(C) पशोः
(D) दानवस्य
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) नरस्य
व्याख्या: यह संपूर्ण पाठ 'नरस्य' (मनुष्य के) सद्गुणों एवं कर्तव्यों पर आधारित है।
5. अवगुणः (दोषः) नरस्य किम् अस्ति? (अवगुण मनुष्य का क्या है?)
(A) मित्रम्
(B) शत्रुः
(C) आभूषणम्
(D) गुरुः
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) शत्रुः
व्याख्या: दोष/अवगुण व्यक्ति का विनाश करते हैं, इसलिए वे शत्रु कहे गए हैं।
6. सद्वाणी कस्य आभूषणम् अस्ति? (सद्वाणी किसका आभूषण है?)
(A) नरस्य
(B) नृपस्य
(C) कवेः
(D) साधोः
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) नरस्य
व्याख्या: पाठ 'नरस्य' के अनुसार सद्वाणी मनुष्य का वास्तविक आभूषण है।
7. का नरस्य आभूषणम् उच्चते? (क्या मनुष्य का आभूषण कही जाती है?)
(A) कटुवाणी
(B) सद्वाणी
(C) मौनम्
(D) मिथ्यावाणी
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) सद्वाणी
व्याख्या: श्रेष्ठ और मधुर वाणी ही सच्चा गहना है।
8. नरस्य शत्रौ कः शब्दः कोष्ठके दत्तः अस्ति? ('शत्रुः' के सामने कोष्ठक में कौन-सा शब्द दिया गया है?)
(A) गुणः
(B) अवगुणः
(C) पापम्
(D) भयम्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) अवगुणः
व्याख्या: तालिका में स्पष्ट रूप से "दोषः (अवगुणः)" अंकित है।
9. 'मित्रम्' इति पदस्य विलोमपदम् अत्र किम् अस्ति? ('मित्रम्' का विलोम पद यहाँ क्या है?)
(A) रिपुः
(B) शत्रुः
(C) बैरी
(D) अरातिः
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) शत्रुः
व्याख्या: पाठ की तालिका में 'मित्रम्' के बाद 'शत्रुः' पद का प्रयोग किया गया है।
10. सद्वाणी इति पदस्य समास-विग्रहः कः? (सद्वाणी पद का सही अर्थ क्या है?)
(A) मदिरा
(B) सत्या मधुरा च वाणी (सत्य व मीठी वाणी)
(C) कटुवचनम्
(D) असत्यम्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) सत्या मधुरा च वाणी (सत्य व मीठी वाणी)
व्याख्या: 'सत्' (अच्छी/सत्य) वाणी ही सद्वाणी कहलाती है।
11–20: गुरुः, ज्ञानम्, दया, धर्मः च (Guru, Knowledge, Compassion & Duty)
11. नरस्य गुरुः कौ स्तः? (मनुष्य के गुरु कौन हैं?)
(A) शिक्षकः
(B) पितरौ
(C) ईश्वरः
(D) शास्त्रम्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) पितरौ
व्याख्या: पाठ के अनुसार माता-पिता (पितरौ) ही मनुष्य के प्राथमिक गुरु हैं— "गुरुः – पितरौ"
12. 'पितरौ' इति पदे कौ अन्तर्भवतः? ('पितरौ' पद में कौन दोनों आते हैं?)
(A) माता भ्राता च
(B) माता पिता च
(C) पिता पितामहः च
(D) गुरुः शिष्यः च
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) माता पिता च
व्याख्या: 'पितरौ' एकशेष द्वन्द्व समास है, जिसका अर्थ 'माता और पिता' होता है।
13. नरस्य ज्ञानम् किम् अस्ति? (मनुष्य का ज्ञान क्या है?)
(A) शास्त्रपठनम्
(B) तत्त्वार्थसम्बोधः
(C) स्मरणम्
(D) लेखनम्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) तत्त्वार्थसम्बोधः
व्याख्या: परम सत्य और तत्त्व का ज्ञान ही वास्तविक ज्ञान है— "ज्ञानम् – तत्त्वार्थसम्बोधः"
14. तत्त्वार्थसम्बोधः किम् उच्यते? (तत्त्वार्थसम्बोध क्या कहा जाता है?)
(A) धर्मः
(B) ज्ञानम्
(C) दया
(D) कार्यम्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) ज्ञानम्
व्याख्या: सत्य के तत्त्व को समझना ही ज्ञान है।
15. नरस्य दया का अस्ति? (मनुष्य की दया क्या है?)
(A) सर्वसुखैषित्वम्
(B) दानम्
(C) अहिंसा
(D) करुणा
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) सर्वसुखैषित्वम्
व्याख्या: सभी के सुख की इच्छा रखना ही सच्ची दया है— "दया – सर्वसुखैषित्वम्"
16. सर्वसुखैषित्वम् का उच्चते? (सभी के सुख की चाह क्या कहलाती है?)
(A) भक्तिः
(B) दया
(C) प्रीतिः
(D) शान्तिः
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) दया
व्याख्या: 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' की भावना ही दया है।
17. नरस्य धर्मः कः अस्ति? (मनुष्य का धर्म क्या है?)
(A) पूजा
(B) कर्तव्यपरायणता
(C) जपः
(D) यज्ञः
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) कर्तव्यपरायणता
व्याख्या: अपने कर्तव्य का निष्ठापूर्वक पालन करना ही धर्म है— "धर्मः – कर्तव्यपरायणता"
18. कर्तव्यपरायणता किम् अस्ति? (कर्तव्यपरायणता क्या है?)
(A) कर्म
(B) धर्मः
(C) मोक्षः
(D) ज्ञानम्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) धर्मः
व्याख्या: पाठ के अनुसार मनुष्य का धर्म ही उसकी कर्तव्यपरायणता है।
19. 'पितरौ' इति पदे कः समासः अस्ति? ('पितरौ' पद में कौन-सा समास है?)
(A) तत्पुरुषः
(B) द्वन्द्वः
(C) बहुव्रीहिः
(D) अव्ययीभावः
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) द्वन्द्वः
व्याख्या: माता च पिता च = पितरौ (एकशेष द्वन्द्व समास)।
20. 'सर्वसुखैषित्वम्' इति पदे कः सन्धिः अस्ति? ('सर्वसुखैषित्वम्' में कौन-सी सन्धि है?)
(A) दीर्घः
(B) वृद्धिः
(C) गुणः
(D) यण्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) वृद्धिः
व्याख्या: सर्वसुख + एषित्वम् = सर्वसुखैषित्वम् (अ + ए = ऐ, वृद्धि सन्धि)।
21–30: कार्यम्, अमूल्यवस्तु, पूजास्थलम्, रक्षकः, हन्ता च (Work, Value, Place of Worship & Protector)
21. नरस्य कार्यम् किम् अस्ति? (मनुष्य का कार्य क्या है?)
(A) स्वार्थचिन्तनम्
(B) सर्वजीवकल्याणम्
(C) धनार्जनम्
(D) भ्रमणम्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) सर्वजीवकल्याणम्
व्याख्या: सभी जीवों का भला करना ही मनुष्य का असली काम है— "कार्यम् – सर्वजीवकल्याणम्"
22. सर्वजीवकल्याणम् नरस्य किम् अस्ति? (सब जीवों का कल्याण मनुष्य का क्या है?)
(A) धर्मः
(B) कार्यम्
(C) ज्ञानम्
(D) लाभः
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) कार्यम्
व्याख्या: पाठ में निर्दिष्ट है कि मनुष्य का मुख्य कार्य सर्वजीव कल्याण है।
23. नरस्य अमूल्यं वस्तु किम् अस्ति? (मनुष्य की अमूल्य वस्तु क्या है?)
(A) हीरकम्
(B) समयः
(C) स्वर्णम्
(D) गृहम्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) समयः
व्याख्या: समय ही जीवन की सबसे कीमती संपत्ति है— "अमूल्यं वस्तु – समयः"
24. समयः नरस्य किम् अस्ति? (समय मनुष्य का क्या है?)
(A) मित्रम्
(B) अमूल्यं वस्तु
(C) रक्षकः
(D) शत्रुः
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) अमूल्यं वस्तु
व्याख्या: समय को वापस नहीं लाया जा सकता, इसलिए यह अमूल्य वस्तु है।
25. नरस्य पूजास्थलम् किम् अस्ति? (मनुष्य का पूजास्थल क्या है?)
(A) मन्दिरम्
(B) स्वकर्मस्थलम्
(C) तीर्थम्
(D) वनम्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) स्वकर्मस्थलम्
व्याख्या: अपना कर्मक्षेत्र ही वास्तविक पूजा स्थल है— "पूजास्थलम् – स्वकर्मस्थलम्"
26. स्वकर्मस्थलम् नरस्य किम् अस्ति? (अपना कर्मक्षेत्र मनुष्य का क्या है?)
(A) कार्यालयः
(B) पूजास्थलम्
(C) गृहम्
(D) विद्यालयः
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) पूजास्थलम्
व्याख्या: 'कर्म ही पूजा है' (Work is Worship) के सिद्धांत के अनुसार स्वकर्मस्थल ही पूजास्थल है।
27. नरस्य रक्षकः कः अस्ति? (मनुष्य का रक्षक कौन है?)
(A) राजा
(B) स्वकर्म
(C) सैनिकः
(D) ईश्वरः
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) स्वकर्म
व्याख्या: मनुष्य के अपने अच्छे कर्म ही उसकी रक्षा करते हैं— "रक्षकः – स्वकर्म"
28. नरस्य हन्ता कः अस्ति? (मनुष्य का विनाशक/हंता कौन है?)
(A) कालः
(B) स्वकर्म
(C) शत्रुः
(D) व्याधिः
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) स्वकर्म
व्याख्या: मनुष्य के अपने बुरे कर्म ही उसका विनाश करते हैं— "हन्ता – स्वकर्म"
29. स्वकर्म एव नरस्य किम् किम् अस्ति? (अपना कर्म ही मनुष्य का क्या-क्या है?)
(A) रक्षकः हन्ता च
(B) मित्रं शत्रुः च
(C) पिता माता च
(D) गुरुः शिष्यः च
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) रक्षकः हन्ता च
व्याख्या: अच्छा कर्म रक्षक है और बुरा कर्म विनाशक (हन्ता) है।
30. 'अमूल्यम्' इति पदे कः समासः अस्ति? ('अमूल्यम्' में कौन-सा समास है?)
(A) नञ् तत्पुरुषः
(B) कर्मधारयः
(C) अव्ययीभावः
(D) द्विगुः
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) नञ् तत्पुरुषः
व्याख्या: न मूल्यम् इति अमूल्यम् (जिसका मूल्य न आँका जा सके, नञ् तत्पुरुष)।
31–40: ध्रुवसत्यम्, आलोचना, पुस्तकम्, उपलब्धिः, व्याधिः च (Truth, Criticism, Book & Disease)
31. नरस्य ध्रुवसत्यम् किम् अस्ति? (मनुष्य का परम/ध्रुव सत्य क्या है?)
(A) जन्म
(B) मृत्युः
(C) सत्यम्
(D) जीवनम्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) मृत्युः
व्याख्या: इस संसार में मृत्यु ही अटल सत्य है— "ध्रुवसत्यम् – मृत्युः"
32. मृत्युः नरस्य किम् अस्ति? (मृत्यु मनुष्य का क्या है?)
(A) भयम्
(B) ध्रुवसत्यम्
(C) दुःखम्
(D) अन्तः
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) ध्रुवसत्यम्
व्याख्या: जिसका जन्म हुआ है उसकी मृत्यु निश्चित (ध्रुवसत्य) है।
33. नरस्य आलोचना का अस्ति? (मनुष्य की आलोचना क्या होनी चाहिए?)
(A) परालोचना
(B) आत्मालोचना
(C) निन्दा
(D) प्रशंसा
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) आत्मालोचना
व्याख्या: दूसरों की कमी देखने के बजाय स्वयं की समीक्षा करना— "आलोचना – आत्मालोचना"
34. आत्मालोचना का उच्यते? (आत्मालोचना किसे कहा गया है?)
(A) आलोचना
(B) उपलब्धिः
(C) समीक्षा
(D) दोषः
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) आलोचना
व्याख्या: आत्म-निरीक्षण (आत्मालोचना) ही सच्ची आलोचना है।
35. नरस्य पुस्तकम् किम् अस्ति? (मनुष्य की पुस्तक क्या है?)
(A) ग्रन्थः
(B) संसारः
(C) वेदः
(D) काव्यम्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) संसारः
व्याख्या: यह संपूर्ण संसार ही सीखने के लिए खुली किताब है— "पुस्तकम् – संसारः"
36. संसारः नरस्य किम् अस्ति? (संसार मनुष्य का क्या है?)
(A) गृहम्
(B) पुस्तकम्
(C) मेला
(D) बन्धनम्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) पुस्तकम्
व्याख्या: मनुष्य संसार रूपी पुस्तक से जीवन के विविध अनुभव सीखता है।
37. नरस्य उपलब्धिः का अस्ति? (मनुष्य की वास्तविक उपलब्धि क्या है?)
(A) धनसञ्चयः
(B) परहितरक्षा
(C) जयः
(D) पदम्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) परहितरक्षा
व्याख्या: दूसरों के हित की रक्षा करना ही सबसे बड़ी उपलब्धि है— "उपलब्धिः – परहितरक्षा"
38. परहितरक्षा का उच्यते? (दूसरों के हित की रक्षा क्या कहलाती है?)
(A) धर्मः
(B) उपलब्धिः
(C) दया
(D) कार्यम्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) उपलब्धिः
व्याख्या: पाठ के अनुसार परोपकार ही जीवन की वास्तविक उपलब्धि (Achievement) है।
39. नरस्य व्याधिः का अस्ति? (मनुष्य का रोग/व्याधि क्या है?)
(A) ज्वरः
(B) हृदयपरितापः
(C) कैंसरः
(D) आलस्यम्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) हृदयपरितापः
व्याख्या: मन/हृदय का संताप और मानसिक दुःख ही सबसे बड़ी व्याधि है— "व्याधिः – हृदयपरितापः"
40. हृदयपरितापः का उच्यते? (हृदय की जलन/दुःख क्या कही जाती है?)
(A) शोकः
(B) व्याधिः
(C) रोगः
(D) मानसिकश्रमः
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) व्याधिः
व्याख्या: पाठ 'नरस्य' में मानसिक संताप (हृदयपरिताप) को व्याधि कहा गया है।
41–50: पाठ्यांश अभ्यास प्रश्न, व्याकरण एवं प्रेरणा (Exercise & General Grammar)
41. 'परहितरक्षा' इति पदे कः समासः? ('परहितरक्षा' पद में कौन-सा समास है?)
(A) तृतीया तत्पुरुषः
(B) षष्ठी तत्पुरुषः
(C) कर्मधारयः
(D) बहुव्रीहिः
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) षष्ठी तत्पुरुषः
व्याख्या: परेषां हितायाः रक्षा (दूसरों के हित की रक्षा) = षष्ठी तत्पुरुष समास।
42. 'हृदयपरितापः' इति पदस्य कः अर्थः? ('हृदयपरितापः' का क्या अर्थ है?)
(A) हृदय रोग
(B) मन का दुःख/संताप
(C) प्रसन्नता
(D) क्रोधः
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) मन का दुःख/संताप
व्याख्या: परितापः का अर्थ संताप या दुःख होता है, अतः हृदयपरितापः = मानसिक कष्ट।
43. 'नरस्य' इति पदे का विभक्तिः अस्ति? ('नरस्य' पद में कौन-सी विभक्ति है?)
(A) प्रथमा
(B) षष्ठी
(C) सप्तमी
(D) तृतीया
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) षष्ठी
व्याख्या: 'नर' अकारान्त पुंल्लिङ्ग शब्द का षष्ठी विभक्ति एकवचन रूप 'नरस्य' होता है (अर्थ: मनुष्य का/की/के)।
44. अनेन पाठेन का प्रेरणा प्राप्यते? (इस पाठ से क्या प्रेरणा मिलती है?)
(A) धनार्जनस्य
(B) जीवनमूल्यानाम् आचरणस्य
(C) युद्धस्य
(D) आमोद-प्रमोदस्य
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) जीवनमूल्यानाम् आचरणस्य
व्याख्या: यह पाठ हमें सत्य, धर्म, कर्तव्यपरायणता और सद्गुणी जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
45. मनुष्यस्य परमं सत्यं किम्? (मनुष्य का परम सत्य क्या है?)
(A) जन्म
(B) मृत्युः
(C) संपत्तिः
(D) शक्तिः
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) मृत्युः
व्याख्या: तालिका में 'ध्रुवसत्यम् – मृत्युः' वर्णित है।
46. मनुष्यस्य मुख्यः गुरुः कः मन्यते? (मनुष्य के मुख्य गुरु कौन माने गए हैं?)
(A) भ्राता
(B) पितरौ (माता-पिता)
(C) मित्रम्
(D) राजा
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) पितरौ (माता-पिता)
व्याख्या: माता-पिता ही प्रथम गुरु एवं मार्गदर्शक होते हैं।
47. 'संसारः' कस्य स्थानं गृह्णाति? ('संसार' किसका स्थान लेता है?)
(A) पुस्तकस्य
(B) गृहस्य
(C) विद्यालयस्य
(D) नगरस्य
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) पुस्तकस्य
व्याख्या: तालिका में लिखा है— "पुस्तकम् – संसारः"
48. 'हन्ता' इति पदस्य कः प्रत्ययः? ('हन्ता' पद में कौन-सा प्रत्यय है?)
(A) तृच्
(B) क्त्वा
(C) शतृ
(D) ल्युट्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) तृच्
व्याख्या: हन् धातु + तृच् प्रत्यय = हन्तृ (प्रथमा एकवचन में 'हन्ता' बनता है, अर्थ: मारने वाला/विनाशक)।
49. मनुष्यस्य रक्षकः हन्ता च कः? (मनुष्य का रक्षक और विनाशक कौन है?)
(A) ईश्वरः
(B) स्वकर्म
(C) भाग्यम्
(D) समाजः
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) स्वकर्म
व्याख्या: व्यक्ति के अपने सत्कर्म ही रक्षक और दुष्कर्म ही विनाशक (हन्ता) होते हैं।
50. 'नरस्य' पाठः कस्मिन् ग्रन्थे/पुस्तके सङ्कलितः अस्ति? ('नरस्य' पाठ किस पुस्तक में संकलित है?)
(A) पीयूषम् (द्रुतपाठाय)
(B) अमृता
(C) शेमुषी
(D) मणिका
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) पीयूषम् (द्रुतपाठाय)
व्याख्या: पृष्ठ के निचले भाग में स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है— "पीयूषम् द्रुतपाठाय"

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