Chapter 23. क्रियताम् एतत् | BSEB 10 Sanskrit Objective


पाठ - 23 : क्रियताम् एतत्....... (वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तरी)

पाठ - 23 : क्रियताम् एतत्.......

50 बहुविकल्पीय वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Questions) उत्तर तथा विस्तृत व्याख्या सहित

1–10: पाठ्यांशस्य विषयाः - १ (विषय-वस्तु पर आधारित प्रश्न - 1)
1. यदि किमपि करणीयम् इति इच्छा तर्हि किम् क्रियताम्? (यदि कुछ करने की इच्छा हो तो क्या करना चाहिए?)
(A) स्वार्थः
(B) परोपकारः
(C) व्यापारः
(D) अधर्मः
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) परोपकारः
व्याख्या: पाठ के प्रथम वाक्य में स्पष्ट है— "यदि किमपि करणीयम् इति इच्छा तर्हि परोपकारः क्रियताम्।"
2. यदि किमपि पालनीयम् इति इच्छा तर्हि किम् पाल्यताम्? (यदि किसी चीज़ का पालन करने की इच्छा हो तो किसका पालन करना चाहिए?)
(A) नियमः
(B) धर्मः
(C) प्रतिज्ञा
(D) राजा
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) धर्मः
व्याख्या: गद्यांश में कहा गया है— "यदि किमपि पालनीयम् इति इच्छा तर्हि धर्मः पाल्यताम्।"
3. यदि किमपि वक्तव्यम् इति इच्छा तर्हि किम् उच्यताम्? (यदि कुछ बोलने की इच्छा हो तो क्या बोलना चाहिए?)
(A) असत्यम्
(B) कटुवचनम्
(C) सत्यम्
(D) मिथ्या
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (C) सत्यम्
व्याख्या: पाठ के अनुसार सदा सत्य बोलना चाहिए— "यदि किमपि वक्तव्यम् इति इच्छा तर्हि सत्यम् उच्यताम्।"
4. केषां सङ्गः करणीयः? (किसकी संगति करनी चाहिए?)
(A) दुर्जनानाम्
(B) सज्जनानाम्
(C) मूर्खाणाम्
(D) शत्रूणाम्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) सज्जनानाम्
व्याख्या: पाठ में निर्देश है— "यदि सङ्गः करणीयः इति इच्छा तर्हि सज्जनानां सङ्गः क्रियताम्।"
5. यदि व्यसने इच्छा अस्ति तर्हि किम् पाल्यताम्? (यदि बुरी आदत/व्यसन ही पालना हो तो कौन-सा व्यसन पालना चाहिए?)
(A) द्यूतव्यसनम्
(B) दानव्यसनम्
(C) मद्यपानम्
(D) क्रोधावेशः
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) दानव्यसनम्
व्याख्या: पाठ के अनुसार दान देने की आदत (दानव्यसनम्) अपनानी चाहिए— "यदि व्यसने इच्छा अस्ति तर्हि दानव्यसनम् पाल्यताम्।"
6. परोपकारः कदा करणीयः? (परोपकार कब करना चाहिए?)
(A) यदा किमपि कर्तुम् इच्छा भवति
(B) यदा धनम् अस्ति
(C) केवलं वार्धक्ये
(D) न कदापि
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) यदा किमपि कर्तुम् इच्छा भवति
व्याख्या: कुछ भी कर्म करने की इच्छा होने पर परोपकार ही श्रेष्ठ कर्म है।
7. सज्जनानां किम् करणीयम्? (सज्जनों का क्या करना चाहिए?)
(A) निन्दा
(B) सङ्गः
(C) त्यागः
(D) विरोधः
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) सङ्गः
व्याख्या: सत्संगति (सज्जनों का साथ) ही कल्याणकारी है।
8. सत्यं कदा वक्तव्यम्? (सत्य कब बोलना चाहिए?)
(A) यदा वक्तुम् इच्छा भवति
(B) यदा लाभः भवति
(C) यदा भयम् न अस्ति
(D) सर्वदा
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) यदा वक्तुम् इच्छा भवति
व्याख्या: कुछ भी कहने की इच्छा हो तो केवल सत्य ही बोलना चाहिए।
9. 'दानव्यसनम्' इति पदस्य कः अर्थः? ('दानव्यसनम्' पद का क्या अर्थ है?)
(A) दान देने की आदत/लगन
(B) दान न देना
(C) दान माँगना
(D) धन की हानि
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) दान देने की आदत/लगन
व्याख्या: व्यसन का अर्थ यहाँ सकारात्मक रूप से 'निरंतर आदत या लगन' से है।
10. कस्य पालने इच्छा करणीया? (किसका पालन करने की इच्छा करनी चाहिए?)
(A) अधर्मस्य
(B) धर्मस्य
(C) आलस्यस्य
(D) भयस्य
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) धर्मस्य
व्याख्या: धर्म ही धारण और पालन करने योग्य है।
11–20: पाठ्यांशस्य विषयाः - २ (विषय-वस्तु पर आधारित प्रश्न - 2)
11. यदि किमपि ग्रहीतव्यम् इति इच्छा तर्हि केषां गुणाः गृह्यन्ताम्? (यदि कुछ ग्रहण करने की इच्छा हो तो किसके गुण ग्रहण करने चाहिए?)
(A) दुर्जनानाम्
(B) सज्जनानाम्
(C) शत्रूणाम्
(D) देवानाम्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) सज्जनानाम्
व्याख्या: पाठ के अनुसार— "यदि किमपि ग्रहीतव्यम् इति इच्छा सज्जनानां गुणाः गृह्यन्ताम्।"
12. लोभः कुत्र स्थाप्यताम्? (लोभ कहाँ रखना चाहिए?)
(A) धने
(B) सद्गुणेषु
(C) वस्त्रेषु
(D) भोजनस्य वस्तुषु
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) सद्गुणेषु
व्याख्या: पाठ के अनुसार— "यदि लोभः कोऽपि आस्थेयः तर्हि सद्गुणेषु लोभः स्थाप्यताम्।" (सद्गुण प्राप्त करने का लोभ होना चाहिए)।
13. केषां निन्दा करणीया? (किसकी निंदा करनी चाहिए?)
(A) अन्येषाम्
(B) स्वदोषाः
(C) सज्जनानाम्
(D) शत्रूणाम्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) स्वदोषाः
व्याख्या: पाठ के अनुसार दूसरों के बजाय अपने दोषों की निंदा करनी चाहिए— "तर्हि स्वदोषाः निन्द्यन्ताम्।"
14. कोपे तीव्रेच्छा अस्ति चेत् कुत्र कुप्यताम्? (यदि क्रोध करने की तीव्र इच्छा हो तो किस पर क्रोध करना चाहिए?)
(A) मित्रे
(B) कोपविषये एव
(C) भृत्ये
(D) स्वजने
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) कोपविषये एव
व्याख्या: पाठ के अनुसार— "यदि कोपे तीव्रेच्छा तर्हि कोपविषये एव कुप्यताम्।" (क्रोध के मूल कारण या विषय पर ही क्रोधित होना चाहिए)।
15. कस्मात् दूरे स्थीयताम्? (किससे दूर रहना चाहिए?)
(A) परिग्रहात्
(B) सम्बन्धात्
(C) गृहात्
(D) विद्यालयात्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) परिग्रहात्
व्याख्या: पाठ के अनुसार— "यदि कस्माच्चित् दूरं गन्तव्यम् तर्हि परिग्रहात् दूरे स्थीयताम्।" (संग्रह/परिग्रह की प्रवृत्ति से दूर रहना चाहिए)।
16. सज्जनानां किम् ग्रहीतव्यम्? (सज्जनों का क्या ग्रहण करना चाहिए?)
(A) धनम्
(B) गुणाः
(C) दोषाः
(D) वस्त्रम्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) गुणाः
व्याख्या: सज्जनों के केवल गुणों को अपनाना चाहिए।
17. सद्गुणेषु किम् स्थाप्यताम्? (सद्गुणों में क्या रखना चाहिए?)
(A) द्वेषः
(B) लोभः
(C) भयम्
(D) क्रोधः
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) लोभः
व्याख्या: अच्छे गुणों को बटोरने में ही लोभ करना चाहिए।
18. केषां निन्दा न करणीया? (किसकी निंदा नहीं करनी चाहिए?)
(A) स्वदोषाणाम्
(B) परेषाम् (दूसरों की)
(C) पापस्य
(D) असत्यस्य
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) परेषाम् (दूसरों की)
व्याख्या: पाठ सिखाता है कि बिना कारण दूसरों की निंदा न करके अपने दोषों को देखना चाहिए।
19. 'परिग्रहः' इति पदस्य कः अर्थः? ('परिग्रहः' पद का क्या अर्थ है?)
(A) वस्तुओं का अत्यधिक संचय/संग्रह
(B) दानम्
(C) त्यागः
(D) सेवा
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) वस्तुओं का अत्यधिक संचय/संग्रह
व्याख्या: आवश्यकता से अधिक संचय करना परिग्रह कहलाता है, जिससे दूर रहने की सलाह दी गई है।
20. कस्मात् दूरं गन्तव्यम्? (किससे दूर जाना चाहिए?)
(A) परिग्रहात्
(B) धर्मात्
(C) सत्यस्य मार्गात्
(D) ज्ञानात्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) परिग्रहात्
व्याख्या: अत्यधिक धन-संपत्ति के संग्रह से दूर रहना चाहिए।
21–30: पाठ्यांशस्य विषयाः - ३ (विषय-वस्तु पर आधारित प्रश्न - 3)
21. यदि किमपि द्रष्टव्यम् इति इच्छा तर्हि किम् दृश्यताम्? (यदि कुछ देखने की इच्छा हो तो किसे देखना चाहिए?)
(A) संसारम्
(B) आत्मा एव
(C) चित्रम्
(D) परदोषम्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) आत्मा एव
व्याख्या: पाठ के अनुसार— "यदि किमपि द्रष्टव्यम् इति इच्छा तर्हि आत्मा एव दृश्यताम्।" (अपने अंतरात्मा/स्वयं को देखना चाहिए)।
22. कौ शत्रुभावेन द्रष्टव्यौ? (किन दोनों को शत्रु भाव से देखना चाहिए?)
(A) जनौ
(B) रागद्वेषौ
(C) भ्रातरौ
(D) मित्र-अमित्रौ
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) रागद्वेषौ
व्याख्या: पाठ में वर्णित है— "तर्हि रागद्वेषौ शत्रुभावेन दृश्यताम्।" (आसक्ति और द्वेष को ही अपना वास्तविक शत्रु मानना चाहिए)।
23. कस्मात् भेतव्यम्? (किससे डरना चाहिए?)
(A) सर्पात्
(B) स्वस्य कुकृत्येभ्यः
(C) शत्रोः
(D) अन्धकारात्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) स्वस्य कुकृत्येभ्यः
व्याख्या: पाठ के अनुसार— "यदि भेतव्यं तर्हि स्वस्य कुकृत्येभ्यः भीयताम्।" (अपने ही बुरे कर्मों से डरना चाहिए)।
24. 'कुकृत्यम्' इति पदस्य कः अर्थः? ('कुकृत्यम्' पद का क्या अर्थ है?)
(A) दुष्कर्म / बुरा कार्य
(B) सत्कर्म
(C) पुण्यम्
(D) पूजा
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) दुष्कर्म / बुरा कार्य
व्याख्या: कु + कृत्यम् = बुरा कार्य/पाप कर्म।
25. रागद्वेषौ कथम् द्रष्टव्यौ? (राग और द्वेष को किस भाव से देखना चाहिए?)
(A) मित्रभावेन
(B) शत्रुभावेन
(C) उदासीनभावेन
(D) पूज्यभावेन
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) शत्रुभावेन
व्याख्या: राग (मोह) और द्वेष (ईर्ष्या) को मनुष्य का शत्रु समझना चाहिए।
26. 'आत्मा एव दृश्यताम्' इति केन सम्बन्धितम्? ('आत्मा ही देखा जाए' यह किससे संबंधित है?)
(A) आत्मनिरीक्षणेन
(B) बाह्यसौन्दर्येण
(C) धनेन
(D) वस्त्रेण
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) आत्मनिरीक्षणेन
व्याख्या: यह पंक्ति आत्म-निरीक्षण (Self-reflection) का संदेश देती है।
27. स्वस्य कुकृत्येभ्यः किम् करणीयम्? (अपने बुरे कर्मों से क्या करना चाहिए?)
(A) भेतव्यम् (डरना चाहिए)
(B) हसितव्यम्
(C) गर्जितव्यम्
(D) रक्षितव्यम्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) भेतव्यम् (डरना चाहिए)
व्याख्या: मनुष्य को केवल अपने पाप और कुकृत्यों से डरना चाहिए।
28. किम् न शत्रुभावेन द्रष्टव्यम्? (किसे शत्रु भाव से नहीं देखना चाहिए?)
(A) रागद्वेषौ
(B) मनुष्यम् / प्राणी
(C) कुकृत्यम्
(D) दोषम्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) मनुष्यम् / प्राणी
व्याख्या: व्यक्तियों को नहीं, बल्कि मन के विकार (राग-द्वेष) को शत्रु मानना चाहिए।
29. अस्य पाठस्य मुख्यं प्रयोजनम् किम् अस्ति? (इस पाठ का मुख्य उद्देश्य क्या है?)
(A) नैतिकशिक्षा / सन्मार्गप्रदर्शनम्
(B) युद्धशिक्षा
(C) धनलाभः
(D) मनोरंजनम्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) नैतिकशिक्षा / सन्मार्गप्रदर्शनम्
व्याख्या: यह पूरा पाठ मनुष्य की प्रवृत्तियों को सकारात्मक और नैतिक दिशा में मोड़ने के लिए है।
30. पाठानुसारं मनुष्यस्य वास्तविकः भयहेतुः कः? (पाठ के अनुसार मनुष्य के भय का वास्तविक कारण क्या है?)
(A) राजा
(B) स्वस्य कुकृत्यानि
(C) व्याघ्रः
(D) मृत्युः
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) स्वस्य कुकृत्यानि
व्याख्या: व्यक्ति के अपने बुरे कर्म ही उसे भयभीत करते हैं।
31–40: व्याकरणम् - प्रत्ययाः लकाराश्च (Grammar - Suffixes & Verbs)
31. 'करणीयम्' इति पदे कः प्रत्ययः अस्ति? ('करणीयम्' पद में कौन-सा प्रत्यय है?)
(A) अनीयर्
(B) तव्यत्
(C) यत्
(D) क्त्वा
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) अनीयर्
व्याख्या: कृ धातु + अनीयर् प्रत्यय = करणीयम् (चाहिए या योग्य के अर्थ में)।
32. 'पालनीयम्' इति पदे कः प्रत्ययः? ('पालनीयम्' पद में कौन-सा प्रत्यय है?)
(A) तव्यत्
(B) अनीयर्
(C) ल्यप्
(D) तुमुन्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) अनीयर्
व्याख्या: पाल् धातु + अनीयर् = पालनीयम्।
33. 'वक्तव्यम्' इति पदे कः प्रत्ययः अस्ति? ('वक्तव्यम्' में कौन-सा प्रत्यय है?)
(A) तव्यत्
(B) अनीयर्
(C) यत्
(D) क्त्वा
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) तव्यत्
व्याख्या: वच् धातु + तव्यत् प्रत्यय = वक्तव्यम् (बोलना चाहिए)।
34. 'ग्रहीतव्यम्' इति पदे कः प्रत्ययः अस्ति? ('ग्रहीतव्यम्' में कौन-सा प्रत्यय है?)
(A) तुमुन्
(B) तव्यत्
(C) ल्यप्
(D) अनीयर्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) तव्यत्
व्याख्या: ग्रह् धातु + तव्यत् = ग्रहीतव्यम्।
35. 'द्रष्टव्यम्' इति पदे मूलधातुः कः अस्ति? ('द्रष्टव्यम्' में मूल धातु कौन-सी है?)
(A) द्रश्
(B) दृश्
(C) पश्य
(D) दृष्ट
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) दृश्
व्याख्या: दृश् धातु + तव्यत् प्रत्यय = द्रष्टव्यम्।
36. 'भेतव्यम्' इति पदे का धातुः अस्ति? ('भेतव्यम्' में कौन-सी धातु है?)
(A) भी
(B) भे
(C) भय
(D) भू
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) भी
व्याख्या: भी (डरना) धातु + तव्यत् = भेतव्यम्।
37. 'स्थातुम्' इति पदे कः प्रत्ययः अस्ति? ('स्थातुम्' पद में कौन-सा प्रत्यय है?)
(A) तुमुन्
(B) क्त्वा
(C) ल्यप्
(D) शतृ
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) तुमुन्
व्याख्या: स्था धातु + तुमुन् प्रत्यय = स्थातुम् (रहने/ठहरने के लिए)।
38. 'क्रियताम्' इति क्रियापदे कः लकारः अस्ति? ('क्रियताम्' में कौन-सा लकार है?)
(A) लट् लकारः
(B) लोट् लकारः
(C) लङ् लकारः
(D) विधिः
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) लोट् लकारः
व्याख्या: 'क्रियताम्' कर्मवाच्य लोट् लकार प्रथम पुरुष एकवचन का रूप है।
39. 'पाल्यताम्' इति पदं कस्यां वाच्ये अस्ति? ('पाल्यताम्' पद किस वाच्य में है?)
(A) कर्तृवाच्ये
(B) कर्मवाच्ये
(C) भाववाच्ये
(D) न किमपि
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) कर्मवाच्ये
व्याख्या: पाठ के ये सभी वाक्य (क्रियताम्, पाल्यताम्, उच्यताम्) कर्मवाच्य लोट् लकार में प्रयुक्त हैं।
40. 'दृश्यताम्' इति पदे मूलधातुः का? ('दृश्यताम्' पद में मूल धातु कौन-सी है?)
(A) पश्य
(B) दृश्
(C) दर्श
(D) दृश्य
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) दृश्
व्याख्या: दृश् धातु से कर्मवाच्य में 'दृश्यताम्' बनता है।
41–50: व्याकरणम्, अभ्यासाः पाठ्यपुस्तकं च (Grammar, Exercises & Book Info)
41. 'सज्जनानाम्' इति पदे का विभक्तिः कञ्च वचनम्? ('सज्जनानाम्' में कौन-सी विभक्ति और वचन है?)
(A) षष्ठी, बहुवचनम्
(B) पंचमी, एकवचनम्
(C) सप्तमी, बहुवचनम्
(D) तृतीया, एकवचनम्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) षष्ठी, बहुवचनम्
व्याख्या: सज्जन (पुंल्लिङ्ग) शब्द का षष्ठी विभक्ति बहुवचन रूप 'सज्जनानाम्' (अर्थ: सज्जनों का/की/के) होता है।
42. 'स्वदोषाः' इति पदस्य विग्रहः कः? ('स्वदोषाः' पद का सही समास-विग्रह क्या है?)
(A) स्वस्य दोषाः
(B) स्वेन दोषाः
(C) स्वस्मै दोषाः
(D) स्वात् दोषाः
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) स्वस्य दोषाः
व्याख्या: स्वस्य दोषाः = स्वदोषाः (अपने दोष - षष्ठी तत्पुरुष समास)।
43. 'कस्माच्चित्' इति पदे सन्धि-विच्छेदः कः? ('कस्माच्चित्' का सन्धि-विच्छेद क्या है?)
(A) कस्मात् + चित्
(B) कस्म + चित्
(C) कस्मात् + चिति
(D) कश्चित् + मात्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) कस्मात् + चित्
व्याख्या: त् + च = च्च (श्चुत्व सन्धि के नियम से कस्मात् + चित् = कस्माच्चित्)।
44. 'सद्गुणाः' इति पदस्य विलोमपदम् किम्? ('सद्गुणाः' का विलोम पद क्या है?)
(A) निर्गुणाः
(B) दुर्गुणाः / दोषाः
(C) गुणाः
(D) अव्ययाः
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) दुर्गुणाः / दोषाः
व्याख्या: सद्गुण (अच्छे गुण) का विपरीतार्थक 'दुर्गुण' या 'दोष' होता है।
45. 'कोपे' इति पदे का विभक्तिः अस्ति? ('कोपे' पद में कौन-सी विभक्ति है?)
(A) प्रथमा
(B) द्वितीया
(C) सप्तमी
(D) पंचमी
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (C) सप्तमी
व्याख्या: 'कोप' अकारान्त शब्द की सप्तमी विभक्ति एकवचन में 'कोपे' (क्रोध में) रूप बनता है।
46. 'कुकृत्यम्' इति पदस्य विलोमपदम् किम्? ('कुकृत्यम्' शब्द का विलोम पद क्या है?)
(A) सुकृत्यम् / सत्कर्म
(B) अकृत्यम्
(C) दुष्कृत्यम्
(D) पापम्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) सुकृत्यम् / सत्कर्म
व्याख्या: कुकृत्य (बुरा काम) का विलोम सुकृत्य (अच्छा काम) होता है।
47. "जनैः किम् करणीयम्, पालनीयम्, वक्तव्यम् च?" इति अभ्यासप्रश्नस्य उत्तरं किम्? (अभ्यास प्रश्न 2 का सही उत्तर क्या है?)
(A) परोपकारः करणीयः, धर्मः पालनीयः, सत्यम् वक्तव्यम् च
(B) पापं करणीयम्
(C) असत्यम् वक्तव्यम्
(D) किमपि न
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) परोपकारः करणीयः, धर्मः पालनीयः, सत्यम् वक्तव्यम् च
व्याख्या: पाठ के प्रथम तीन वाक्यों का यही सही सार व उत्तर है।
48. 'परिग्रहात्' इति पदे का विभक्तिः अस्ति? ('परिग्रहात्' पद में कौन-सी विभक्ति है?)
(A) तृतीया
(B) पंचमी
(C) षष्ठी
(D) सप्तमी
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (B) पंचमी
व्याख्या: 'परिग्रह' शब्द के पंचमी विभक्ति एकवचन में 'परिग्रहात्' (परिग्रह से) रूप बनता है।
49. 'भीयताम्' इति क्रियापदे का धातुः? ('भीयताम्' क्रिया पद में मूल धातु क्या है?)
(A) भी
(B) भय
(C) भा
(D) भू
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) भी
व्याख्या: भी (डरना) धातु से कर्मवाच्य/भाववाच्य लोट् लकार में 'भीयताम्' बनता है।
50. अयं पाठः कस्यां पुस्तके सङ्कलितः अस्ति? (यह पाठ किस पुस्तक में संकलित है?)
(A) पीयूषम् द्रुतपाठाय (पृष्ठ ४३)
(B) शेमुषी
(C) अमृता
(D) मणिका
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) पीयूषम् द्रुतपाठाय (पृष्ठ ४३)
व्याख्या: पृष्ठ के निचले भाग में स्पष्ट अंकित है— "पीयूषम् द्रुतपाठाय ( 43 )"

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