द्वितीयः पाठः : जयदेवस्य औदार्यम्
50 बहुविकल्पीय वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Questions) उत्तर तथा विस्तृत व्याख्या सहित
1–10: जयदेवस्य परिचयः लुण्ठकैः सह घटना च (जयदेव का परिचय और डाकुओं का आक्रमण)
1. 'गीतगोविन्दस्य' रचयिता कः आसीत्? ('गीतगोविंद' के रचयिता कौन थे?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) जयदेवः
व्याख्या: पाठ के प्रथम वाक्य में स्पष्ट उल्लेख है— "गीतगोविन्दस्य रचयिता जयदेवः सुप्रसिद्धः महाकविः।"
2. जयदेवः एकदा किम् कुर्वन् आसीत्? (जयदेव एक बार क्या कर रहे थे?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) तीर्थयात्राम्
व्याख्या: गद्यांश में लिखा है— "सः कदाचित् तीर्थयात्रां कुर्वन् आसीत्।"
3. के जयदेवस्य धनम् अपहर्तुम् उपायम् अचिन्तयन्? (किन्होंने जयदेव का धन लूटने का उपाय सोचा?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) केचन लुण्ठकाः
व्याख्या: "केचन लुण्ठकाः एतत् ज्ञातवन्तः। जयदेवस्य धनम् अपहर्तुं ते एकम् उपायं चिन्तितवन्तः।"
4. लुण्ठकाः किम् कृत्वा जयदेवेन सह मिलिताः? (डाकुओं ने क्या करके जयदेव के साथ यात्रा शुरू की?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) यात्रिकाः इव वेषपरिवर्तनम् कृत्वा
व्याख्या: डाकुओं ने यात्रियों जैसा वेश बनाकर धोखे से जयदेव का विश्वास जीता।
5. अरण्ये प्रविष्टे सति लुण्ठकाः जयदेवस्य किम् अकुर्वन्? (जंगल में पहुँचने पर डाकुओं ने जयदेव के साथ क्या किया?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) पाणिपादं कर्तयित्वा तं कूपे क्षिप्तवन्तः
व्याख्या: क्रूर डाकुओं ने जयदेव के हाथ-पैर (पाणिपादम्) काट दिए और उन्हें एक सूखे कुएँ में फेंक दिया।
6. लुण्ठकाः जयदेवस्य धनं गृहीत्वा किम् अकुर्वन्? (डाकुओं ने धन लूटकर क्या किया?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) पलायनम्
व्याख्या: "तदीयं धनं सर्वम् अपहृत्य ततः पलायनं कृतवन्तः।"
7. 'गीतगोविन्दम्' कस्य प्रसिद्धं काव्यम् अस्ति? ('गीतगोविंद' किसकी प्रसिद्ध रचना है?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) महाकवेः जयदेवस्य
व्याख्या: गीतगोविंद महाकवि जयदेव की अमर गीति-काव्य रचना है।
8. 'लुण्ठकाः' इति पदस्य कः अर्थः? ('लुण्ठकाः' पद का क्या अर्थ है?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) चोराः / डाकू लोग (Robbers)
व्याख्या: संस्कृत में लूटपाट करने वाले डाकुओं/लुटेरों को 'लुण्ठकाः' कहा जाता है।
9. 'पाणिपादम्' इति पदे कः समासः अस्ति? ('पाणिपादम्' पद में कौन-सा समास है?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) समाहार द्वन्द्व समासः
व्याख्या: पाणी च पादौ च तयोः समाहारः = पाणिपादम् (हाथ और पैर का समूह)।
10. 'कर्तयित्वा' इति पदे कः प्रत्ययः अस्ति? ('कर्तयित्वा' पद में कौन-सा प्रत्यय है?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) क्त्वा
व्याख्या: कृत् धातु (णिजन्त) + क्त्वा प्रत्यय = कर्तयित्वा (काटकर)।
11–20: कूपे जयदेवः गौडेश्वर-लक्ष्मणसेनस्य आगमनञ्च (कुएँ में जयदेव और गौड़ेश्वर की कृपा)
11. कूपे पतितः जयदेवः चेतनां प्राप्य किम् अकरोत्? (कुएँ में गिरे जयदेव ने होश में आने पर क्या किया?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) उच्चैः भगवतः नामस्मरणम्
व्याख्या: "कूपे पतितः जयदेवः... उच्चैः भगवतः नामस्मरणं कर्तुम् आरब्धवान्।"
12. तद्दिने तेन मार्गेण कः गच्छन् आसीत्? (उस दिन उस रास्ते से कौन जा रहा था?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) गौडेश्वरः लक्ष्मणसेनः
व्याख्या: गद्यांश में लिखा है— "तद्दिने गौडेश्वरः लक्ष्मणसेनः तेन एव मार्गेण गच्छन् आसीत्।"
13. लक्ष्मणसेनः कूपतः जयदेवम् केन उपरि आनायितवान्? (लक्ष्मणसेन ने कुएँ से जयदेव को किससे बाहर निकलवाया?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) सेवकैः
व्याख्या: "सः कूपतः मनुष्यस्य ध्वनिं श्रुत्वा सेवकैः तत्र पतितं जयदेवम् उपरि आनायितवान्।"
14. महाराजः लक्ष्मणसेनः जयदेवं कुत्र नीतवान्? (राजा लक्ष्मणसेन जयदेव को कहाँ ले गए?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) राजधानीम्
व्याख्या: "तं स्वेन सह राजधानीं नीतवान् च।"
15. जयदेवस्य भक्तिं साधुस्वभावं च दृष्ट्वा राजा तं किम् अकरोत्? (जयदेव की भक्ति और सज्जनता देखकर राजा ने उन्हें क्या बनाया?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) आस्थानपण्डितम्
व्याख्या: "राजा एवं प्रभावितः अभवत् यत् सः तं स्वस्य आस्थानपण्डितम् अकरोत्।"
16. जयदेवः बहुवारं पृष्टे अपि लुण्ठकानां विषये किम् अवदत्? (बार-बार पूछने पर भी जयदेव ने डाकुओं के बारे में क्या कहा?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) किञ्चिदपि न उक्तवान् (मौनम् अवहत्)
व्याख्या: जयदेव ने क्षमाशीलता दिखाते हुए डाकुओं के नाम या रहस्य के बारे में किसी को कुछ नहीं बताया।
17. 'गौडेश्वरः' इति कस्य नृपस्य उपाधिः/सम्बोधनम् आसीत्? ('गौडेश्वर' किस राजा को कहा गया है?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) लक्ष्मणसेनस्य
व्याख्या: बंगाल (गौड देश) के शासक होने के कारण राजा लक्ष्मणसेन को गौडेश्वर कहा गया।
18. 'आस्थानपण्डितम्' इति पदस्य कः अर्थः? ('आस्थानपण्डितम्' पद का क्या अर्थ है?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) राजकविः / दरबारी विद्वान्
व्याख्या: राजसभा (आस्थान) में सम्माननीय पद पर स्थित विद्वान को आस्थानपण्डित कहते हैं।
19. 'आनायितवान्' इति पदे कः प्रत्ययः अस्ति? ('आनायितवान्' पद में कौन-सा प्रत्यय है?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) क्तवतु
व्याख्या: आ + नी + णिच् + क्तवतु = आनायितवान् (निकलवाया/मंगवाया)।
20. 'नामस्मरणम्' इति पदे कः समासः? ('नामस्मरणम्' में कौन-सा समास है?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) षष्ठी तत्पुरुषः
व्याख्या: नाम्नः स्मरणम् = नामस्मरणम् (परमात्मा के नाम का जाप करना)।
21–30: उत्सवे लुण्ठकानाम् आगमनम् जयदेवस्य औदार्यञ्च (उत्सव में डाकुओं का आना और जयदेव की उदारता)
21. राजभवने आयोजित-उत्सवे के-के सम्मिलिताः? (राजभवन के उत्सव में कौन-कौन शामिल हुए?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) बहवः साधवः, ब्राह्मणाः, भिक्षुकाश्च
व्याख्या: "तदा बहवः साधवः, ब्राह्मणाः, भिक्षुकाश्च भोजनार्थं तत्र सम्मिलिताः।"
22. लुण्ठकाः केन वेषेण राजभवनं समागताः? (डाकू किस वेश में राजभवन में आए?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) भिक्षुकवेषेण
व्याख्या: "तेऽपि लुण्ठकाः भिक्षुकवेषेण तत्र आगताः आसन्।"
23. पण्डितस्थाने छिन्नगात्रं जयदेवं दृष्ट्वा लुण्ठकानाम् अवस्था का अभवत्? (जयदेव को राजकवि के रूप में देखकर डाकुओं की क्या हालत हुई?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) तेषां प्राणाः गताः इव
व्याख्या: डर के मारे उनके प्राण ही सूख गए कि कहीं जयदेव राजा से कहकर हमें मृत्युदंड न दिलवा दें!
24. जयदेवः तान् दृष्ट्वा राजानं प्रति किम् अवदत्? (जयदेव ने उन्हें पहचानकर राजा से क्या कहा?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) "एते सन्ति मम पूर्वतनसुहृदः, एतेभ्यः किमपि दातुम् अर्हति"
व्याख्या: जयदेव ने महानता दिखाते हुए डाकुओं को अपना 'पुराना मित्र' (पूर्वतनसुहृदः) बताया और दान देने की विनती की।
25. महाराजः तान् लुण्ठकान् किम् अकरोत्? (महाराज ने उन डाकुओं के साथ क्या किया?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) भूरिधनदानेन सत्कृतवान्
व्याख्या: "महाराजः तान् समीपम् आहूतवान्। भूरिधनदानेन तान् सत्कृतवान् च।"
26. महाराजः सेवकैः लुण्ठकानां विषये किम् आदिशत्? (राजा ने सेवकों को डाकुओं के बारे में क्या आज्ञा दी?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) "एतान् सुरक्षितरूपेण गृहं प्राप्य आगच्छन्तु"
व्याख्या: राजा ने सेवकों को उन्हें बहुत सारा धन देकर सुरक्षित घर पहुँचाने का हुक्म दिया।
27. 'छिन्नगात्रम्' इति पदस्य कः अर्थः? ('छिन्नगात्रम्' पद का क्या अर्थ है?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) जिसके हाथ-पैर कटे हुए हों / अपंगम्
व्याख्या: छिन्नं गात्रं यस्य तम् = छिन्नगात्रम्।
28. 'भूरिधनम्' इति पदे 'भूरि' पदस्य कः अर्थः? ('भूरि' शब्द का क्या अर्थ है?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) अत्यधिकम् / प्रचुरम्
व्याख्या: संस्कृत में 'भूरि' का अर्थ बहुत अधिक मात्रा में होता है।
29. 'पूर्वतनसुहृदः' इति पदे कः समासः? ('पूर्वतनसुहृदः' में कौन-सा समास है?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) कर्मधारयः / तत्पुरुषः
व्याख्या: पूर्वतनाः च ते सुहृदः = पूर्वतनसुहृदः (पुराने मित्र)।
30. 'आहूतवान्' इति पदे कः प्रत्ययः अस्ति? ('आहूतवान्' में कौन-सा प्रत्यय है?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) क्तवतु
व्याख्या: आ + ह्वे + क्तवतु (पुंल्लिङ्ग) = आहूतवान् (बुलाया)।
31–40: लुण्ठकानां कुटिलता भूमेः विदीर्णता च (डाकुओं का कपट और पृथ्वी का फटना)
31. मार्गे गमनसमये सेवकाः कुतूहलेन लुण्ठकान् किम् अपृच्छन्? (रास्ते में सेवकों ने कौतूहलवश डाकुओं से क्या पूछा?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) "भवताम् अस्माकम् आस्थानपण्डितस्य च कः सम्बन्धः?"
व्याख्या: सेवकों ने पूछा कि हमारे राजकवि जयदेव से आपका क्या रिश्ता है?
32. दुरात्मनः लुण्ठकाः जयदेवस्य विषये किम् असत्यं वञ्चनापूर्णं च अवदन्? (दुष्ट डाकुओं ने जयदेव के बारे में क्या झूठी कहानी गढ़ी?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) "अनेन राजापराधात् अस्य वधदण्डः आसीत्, परं वयं अस्य पाणिपादं केवलं कर्तयित्वा सजीवं मोचितवन्तः"
व्याख्या: डाकुओं ने नीचता की हद पार करते हुए कहा कि जयदेव अपराधी थे और हमने दया करके केवल इनके हाथ-पैर काटे थे!
33. डाकुओं का ऐसा घोर असत्य और दुष्ट व्यवहार सहन न कर पाने के कारण क्या हुआ?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) भूमिः स्वयमेव विदीर्णा अभवत्, लुण्ठकाः पतित्वा मृताः
व्याख्या: पाप का घड़ा भरने पर धरती माता फट गई और दोनों डाकू उसमें धँसकर मर गए।
34. लुण्ठकानां मरणवार्तां श्रुत्वा जयदेवः किम् अकरोत्? (डाकुओं के मरने की खबर सुनकर जयदेव ने क्या किया?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) खेदेन ईश्वरं तेषां सद्गतये प्रार्थनाम् अकरोत्
व्याख्या: संत जयदेव ने दुःखी होकर प्रार्थना की— "हे भगवान! इन अज्ञानियों की आत्मा को सद्गति प्रदान करना"।
35. जयदेवस्य निष्काम प्रार्थनायाः अनन्तरं किम् अद्भुतम् अभवत्? (जयदेव की प्रार्थना के बाद क्या चमत्कार हुआ?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) तत्क्षणात् जयदेवस्य कर्तितं पाणिपादं पुनः यथापूर्वम् उत्पन्नम्
व्याख्या: उनकी अटूट क्षमाशीलता और औदार्य से ईश्वर की कृपा हुई और उनके कटे हुए हाथ-पैर पहले की तरह जुड़ गए।
36. 'विदीर्णा' इति पदस्य कः अर्थः? ('विदीर्णा' पद का क्या अर्थ है?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) फटी हुई / दो भागों में बँटी हुई (Split)
व्याख्या: 'भूमिः विदीर्णा अभवत्' का अर्थ है कि धरती फट गई।
37. 'सद्गतिम्' इति पदे कः समासः? ('सद्गतिम्' में कौन-सा समास है?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) कर्मधारय समासः
व्याख्या: सती च असौ गतिः = सद्गतिः (उत्तम/पवित्र गति)।
38. 'सोढुम्' इति पदे कः प्रत्ययः अस्ति? ('सोढुम्' पद में कौन-सा प्रत्यय है?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) तुमुन्
व्याख्या: सह् (सहन करना) धातु + तुमुन् प्रत्यय = सोढुम् (सहन करने के लिए)।
39. 'विग्रहे/प्रतिगम्य' इति पदे कः प्रत्ययः? ('प्रतिगम्य' पद में कौन-सा प्रत्यय है?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) ल्यप्
व्याख्या: प्रति + गम् + ल्यप् = प्रतिगम्य (वापस लौटकर)।
40. 'सजीवम्' इति पदे कः समासः? ('सजीवम्' में कौन-सा समास है?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) अव्ययीभाव समासः
व्याख्या: जीवेन सह = सजीवम् (जीवित ही - सहार्थे अव्ययीभाव)।
41–50: अभ्यासाः, व्याकरणम् पुस्तक-सूचना च (अभ्यास प्रश्न व पुस्तक परिचय)
41. "जयदेवः कः आसीत्?" इति प्रथम-अभ्यासप्रश्नस्य उत्तरं किम्? (अभ्यास प्रश्न 1 का सही उत्तर क्या है?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) 'गीतगोविन्दस्य' रचयिता सुप्रसिद्धः महाकविः
व्याख्या: चित्र संख्या 3 में दिए गए अभ्यास प्रश्न 1 का सीधा उत्तर 'गीतगोविंद के रचयिता महाकवि' है।
42. "अनया कथया का शिक्षा प्राप्यते?" इति द्वितीय-अभ्यासप्रश्नस्य उत्तरं किम्? (अभ्यास प्रश्न 2 का उत्तर क्या है?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) शत्रुषु अपि क्षमाशीलता, औदार्यम् परोपकारभावश्च स्थापनीयः
व्याख्या: यह कहानी सिखाती है कि अपने शत्रुओं और अहित करने वालों के प्रति भी क्षमा और उदारता रखनी चाहिए।
43. "मार्गे सेवकैः पृष्टाः लुण्ठकाः किम् उक्तवन्तः?" इति तृतीय-अभ्यासप्रश्नस्य उत्तरं किम्? (अभ्यास प्रश्न 3 का उत्तर क्या है?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) "जयदेवः राजतापराधी आसीत्, वयं तस्य दयाम् कृत्वा केवलं पाणिपादं कर्तनं कृतवन्तः"
व्याख्या: डाकुओं ने झूठ बोलकर खुद को निर्दोष और जयदेव को अपराधी साबित करने की कोशिश की थी।
44. 'औदार्यम्' इति पदस्य कः अर्थः अस्ति? ('औदार्यम्' पद का क्या अर्थ है?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) उदारता / महानता (Generosity)
व्याख्या: विशाल हृदय और दूसरों को क्षमा करने के गुण को 'औदार्यम्' कहते हैं।
45. 'तत्क्षणात्' इति पदस्य सन्धि-विच्छेदः कः? ('तत्क्षणात्' का सही सन्धि-विच्छेद क्या होगा?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) तत् + क्षणात्
व्याख्या: तत् + क्षणात् = तत्क्षणात् (उसी समय/तुरंत)।
46. 'निर्दोषस्य' इति पदस्य विलोमपदम् किम्? ('निर्दोषस्य' का विलोम क्या होगा?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) सदोषस्य / पराधिनः
व्याख्या: निर्दोष (बेकसूर) का विलोम सदोष या अपराधी होता है।
47. 'प्रसृता' इति पदे कः प्रत्ययः? ('प्रसृता' पद में कौन-सा प्रत्यय है?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) क्त (स्त्रीलिङ्ग - टाप्)
व्याख्या: प्र + सृ + क्त + टाप् = प्रसृता (फैली हुई)।
48. जयदेवस्य हस्ते कटे हुए अंग पुनः कैसे प्रकट हुए?
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) ईश्वरकृपया जयदेवस्य सत्प्रार्थनया च
व्याख्या: जयदेव की निश्छल भक्ति और क्षमा भाव के प्रभाव से भगवान की कृपा बरस पड़ी।
49. 'जयदेवस्य औदार्यम्' इति कतमः पाठः अस्ति? ('जयदेवस्य औदार्यम्' कौन-सा पाठ है?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) द्वितीयः पाठः (पाठ-2)
व्याख्या: चित्र संख्या 1 में सबसे ऊपर स्पष्ट लिखा है— "द्वितीयः पाठः जयदेवस्य औदार्यम्"।
50. 'जयदेवस्य औदार्यम्' इति पाठः कस्यां पुस्तके संकलितः अस्ति? (यह पाठ किस पुस्तक में संकलित है?)
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) पीयूषम् द्रुतपाठाय (पृष्ठ २-४)
व्याख्या: पृष्ठों के निचले भाग में स्पष्ट अंकित है— "पीयूषम् द्रुतपाठाय ( 2 ) / ( 3 ) / ( 4 )"।
0 Comments