Chapter 8. प्रेस-संस्कृति एवं राष्ट्रवाद | BSEB 10 History Subjective


बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) कक्षा 10 इतिहास

अध्याय 8: "प्रेस-संस्कृति एवं राष्ट्रवाद" — 50 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर

अति-लघु उत्तरीय प्रश्न (One-Liner / 1 अंक वाले प्रश्न)
1. छापाखाना का आविष्कार सबसे पहले किस देश में हुआ?
चीन में काष्ठ ब्लॉक (Block Printing) तकनीक से छापाखाना की शुरुआत हुई।
2. आधुनिक प्रिंटिंग प्रेस का आविष्कार किसने किया?
जोहानेस गुटेनबर्ग ने जर्मनी के मेंज नगर में किया।
3. गुटेनबर्ग द्वारा छापी गई पहली पुस्तक कौन-सी थी?
बाइबिल।
4. भारत में पहला छापाखाना किनके द्वारा और कहाँ लाया गया?
सोलहवीं शताब्दी में पुर्तगाली जेसुइट मिशनरियों द्वारा गोवा लाया गया।
5. भारत में प्रकाशित होने वाला पहला समाचार पत्र कौन-सा था?
1780 में जेम्स ऑगस्टस हिक्की द्वारा संपादित 'द बंगाल गजट'।
6. वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट कब और किस वायसराय के समय पारित हुआ?
1878 ई. में लॉर्ड लिटन के कार्यकाल में पारित हुआ।
7. किस पत्रिका ने वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट से बचने के लिए रातों-रात अपनी भाषा बांग्ला से अंग्रेजी में बदल ली?
अमृत बाजार पत्रिका ने (शिशिर कुमार घोष एवं मोतीलाल घोष द्वारा संपादित)।
8. 'संवाद कौमुदी' और 'मिरात-उल-अखबार' का प्रकाशन किसने शुरू किया?
राजा राममोहन राय ने।
9. 'केसरी' और 'मराठा' समाचार पत्रों का संपादन किसने किया?
बाल गंगाधर तिलक ने (केसरी मराठी में, मराठा अंग्रेजी में)।
10. महात्मा गांधी द्वारा संपादित दो प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं के नाम लिखें।
यंग इंडिया और हरिजन।
11. कागज बनाने की कला सबसे पहले किस देश ने विकसित की?
105 ई. में त्साई लुन (Ts'ai Lun) ने चीन में।
12. यूरोप में वुडब्लॉक प्रिंटिंग तकनीक चीन से कौन लाया?
1295 ई. में इटली का प्रसिद्ध यात्री मार्को पोलो।
13. 'अल-हिलाल' पत्रिका के संपादक कौन थे?
मौलाना अबुल कलाम आजाद।
14. मार्टिन लूथर कौन था और उसका मुद्रण से क्या संबंध था?
जर्मन धर्मसुधारक; उसने अपनी 95 स्थापनाएँ (Theses) छापकर कैथोलिक चर्च की कुरीतियों का विरोध किया था।
15. वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट को किस वायसराय ने रद्द (निरस्त) किया?
1881 ई. में लॉर्ड रिपन ने।
16. 'प्रताप' समाचार पत्र का संपादन किसने किया था?
गणेश शंकर विद्यार्थी ने (कानपुर से)।
17. 'गदर' पत्रिका का प्रकाशन किसने और कहाँ से किया?
1913 ई. में लाला हरदयाल ने सैन फ्रांसिस्को (अमेरिका) से।
18. इंडेक्स (प्रतिबंधित पुस्तकों की सूची) किसने और कब जारी किया?
रोमन कैथोलिक चर्च ने 1558 ई. से धर्मविरोधी पुस्तकों पर रोक लगाने के लिए जारी किया।
19. बेलनाकार प्रेस (Rotary Press) का आविष्कार किसने किया?
न्यूयॉर्क के रिचर्ड एम. हो ने।
20. 'गुलामगिरी' पुस्तक के लेखक कौन थे?
ज्योतिबा फुले (1871 ई.)।
लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions / 2-3 अंक वाले प्रश्न)
21. गुटेनबर्ग ने मुद्रण तकनीक का विकास कैसे किया?
गुटेनबर्ग ने जैतून और अंगूर के तेल पेरने वाले यंत्रों से प्रेरणा लेकर प्रिंटिंग प्रेस का ढाँचा तैयार किया। उसने धातु के चलने वाले टाइप (Movable Metal Type) बनाए और सीसा, टिन तथा एंटीमनी के मिश्रण से अक्षरों की ढलाई की। इस प्रकार उसने पहली बार 1448 के आसपास तेज और सुव्यवस्थित मुद्रण प्रणाली बनाई।
22. पांडुलिपि क्या है? इसकी दो मुख्य कमियों का उल्लेख करें।
हस्तलिखित दस्तावेजों को पांडुलिपि (Manuscript) कहा जाता है। कमियाँ:
  • ये अत्यंत नाजुक, महंगी और बनाने में अत्यधिक समय लेने वाली होती थीं।
  • इन्हें संभालना, पढ़ना और एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाना कठिन था।
23. वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट (1878) क्या था? इसे क्यों लागू किया गया?
लॉर्ड लिटन द्वारा 1878 में पारित यह कानून देशी (भारतीय) भाषाओं के समाचार पत्रों पर कड़ा सेंसर लगाने के लिए लाया गया था। इसका उद्देश्य सरकार की आलोचना करने वाले भारतीय अखबारों की स्वतंत्रता छीनना तथा दमनकारी नीतियां लागू करना था।
24. 'अमृत बाजार पत्रिका' ने वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट का विरोध किस चालाकी से किया?
अमृत बाजार पत्रिका मूलतः बांग्ला भाषा में छपती थी। वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट केवल देशी भाषाओं के अखबारों पर लागू होता था, अंग्रेजी पर नहीं। इस कानून से बचने के लिए इसके संपादकों ने रातों-रात पत्रिका को पूरी तरह अंग्रेजी भाषा के अखबार में बदल दिया।
25. मार्टिन लूथर ने मुद्रण के महत्व को किस प्रकार रेखांकित किया?
मार्टिन लूथर ने कहा था: "मुद्रण ईश्वर की दी हुई महानतम देन है, सबसे बड़ा तोहफा।" मुद्रण की मदद से ही लूथर के विचार और बाइबिल का जर्मन अनुवाद आम लोगों तक तुरंत पहुँचा, जिसने प्रोटेस्टेंट धर्म सुधार आंदोलन को जन्म दिया।
26. प्रेस ने भारतीय राष्ट्रवाद के विकास में क्या भूमिका निभाई?
समाचार पत्रों ने ब्रिटिश शासन की शोषक आर्थिक नीतियों, अकाल के समय सरकारी संवेदनहीनता और नस्लीय भेदभाव को उजागर किया। इससे देश के अलग-अलग क्षेत्रों के लोग एक-दूसरे की समस्याओं से जुड़े और अखिल भारतीय राष्ट्रीय चेतना का निर्माण हुआ।
27. बाल गंगाधर तिलक ने मुद्रण माध्यम का उपयोग किस प्रकार किया?
तिलक ने 'केसरी' और 'मराठा' के जरिए अंग्रेजों की नीतियों के खिलाफ जनमत तैयार किया। उन्होंने शिवाजी उत्सव और गणपति उत्सव को राष्ट्रीय मंच बनाकर जनता में स्वदेशी और स्वतंत्रता की भावना भरी। 1897 में प्लेग संकट के दौरान उनके आक्रामक लेखों के कारण उन्हें जेल भी भेजा गया।
28. काष्ठ ब्लॉक (Woodblock) मुद्रण तकनीक क्या थी?
इस तकनीक में लकड़ी के तख्ते पर अक्षरों या आकृतियों को उल्टा उकेरा जाता था। इसके बाद उभरे हुए भाग पर स्याही लगाकर उसे कागज पर दबाया जाता था। चीन में 594 ई. से पुस्तकें इसी तकनीक से मुद्रित की जाती थीं।
29. मुद्रण क्रांति ने ज्ञान के प्रसार को कैसे बदला?
मुद्रण के आने से पुस्तकों की लागत बहुत कम हो गई और उनका उत्पादन कई गुना बढ़ गया। पहले जो ज्ञान अभिजात्य वर्ग और पादरियों तक सीमित था, वह आम जनता, व्यापारियों और श्रमिकों तक सहज उपलब्ध होने लगा।
30. रोमन कैथोलिक चर्च ने 'इंडेक्स ऑफ प्रोहिबिटेड बुक्स' क्यों जारी किया?
छापेखाने से बाइबिल के विभिन्न अनुवाद और स्वतंत्र विचार जन-जन तक पहुँचने लगे। इससे पादरियों और चर्च के एकाधिकार को चुनौती मिली तथा लोग चर्च की मान्यताओं पर सवाल उठाने लगे। चर्च ने अपने प्रभुत्व को बनाए रखने और धर्मविरोधी विचारों को दबाने के लिए प्रतिबंधित पुस्तकों की सूची जारी की।
31. इरास्मस कौन था और मुद्रित पुस्तकों पर उसका क्या विचार था?
इरास्मस लैटिन का प्रख्यात विद्वान और कैथोलिक सुधारक था। उसका मानना था कि छापेखाने के कारण ज्ञान के साथ-साथ मूर्खतापूर्ण, धर्मविरोधी और अराजक साहित्य का अंबार लग गया है, जिससे समाज में भटकाव फैल रहा है।
32. 19वीं सदी में महिलाओं पर मुद्रण संस्कृति का क्या प्रभाव पड़ा?
मुद्रण ने महिलाओं के जीवन में गहरा बदलाव लाया। उनके लिए विशेष पत्रिकाएँ, गृहस्थी और नैतिक शिक्षा की पुस्तकें छपीं। राशसुंदरी देवी और ताराबाई शिंदे जैसी लेखिकाओं ने पुस्तकों के माध्यम से महिलाओं की पीड़ा, शिक्षा और समाज में समानता के अधिकार की मांग उठाई।
33. भारत में 19वीं सदी के सामाजिक-धार्मिक सुधारों में प्रेस की भूमिका स्पष्ट करें।
राजा राममोहन राय जैसे सुधारकों ने सती प्रथा, बाल विवाह और जातिवाद के विरुद्ध जनमत तैयार करने के लिए पत्र-पत्रिकाओं का सहारा लिया। वहीं रूढ़िवादियों ने अपने विचारों के बचाव में 'समाचार चंद्रिका' जैसे पत्र निकाले। इससे समाज में तार्किक संवाद की संस्कृति पनपी।
34. छापाखाना के आगमन से पहले भारत में पुस्तकें कैसे तैयार की जाती थीं?
भारत में ताड़ के पत्तों (ताड़पत्र) या भोजपत्र पर हाथ से सुलेखन (कैलियोग्राफी) द्वारा संस्कृत, फारसी और प्राकृत भाषाओं में पांडुलिपियाँ तैयार की जाती थीं। इन्हें सुरक्षित रखने के लिए लकड़ी की पट्टियों के बीच सिलकर रखा जाता था।
35. राजा राममोहन राय के मुद्रण कार्यों पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
राजा राममोहन राय भारतीय पत्रकारिता के अग्रदूत थे। उन्होंने 1821 में बांग्ला में संवाद कौमुदी और 1822 में फारसी में मिरात-उल-अखबार शुरू किया। उन्होंने इनके जरिए धार्मिक अंधविश्वासों, मूर्तिपूजा और सती प्रथा का कड़ा विरोध किया।
36. गांधीजी के अनुसार समाचार पत्रों का मूल उद्देश्य क्या होना चाहिए?
गांधीजी का मानना था कि समाचार पत्र का मुख्य उद्देश्य जनता की भावनाओं को समझना, जनहित के मुद्दों को प्रकट करना और लोगों की कमियों को निर्भीकता से सामने लाना है। पत्रकारिता को व्यवसाय न बनकर लोक-सेवा का माध्यम होना चाहिए।
37. 'पेनी चैपबुक्स' (Penny Chapbooks) क्या थीं?
18वीं और 19वीं सदी में इंग्लैंड में फेरीवालों (Chapmen) द्वारा बेची जाने वाली एक पैसे की छोटी और सस्ती जेब-पुस्तकों को 'पेनी चैपबुक्स' कहा जाता था। इन्हें गरीब मजदूर वर्ग भी आसानी से खरीदकर पढ़ सकता था।
38. प्रेस कानून (Press Act of 1835 / मेटकाफ एक्ट) का क्या महत्व था?
चार्ल्स मेटकाफ ने 1835 में प्रेस से कड़े प्रतिबंध हटाकर भारतीय समाचार पत्रों को पूर्ण स्वतंत्रता दी। इसी कारण मेटकाफ को 'भारतीय प्रेस का मुक्तिदाता' (Liberator of the Indian Press) कहा जाता है।
39. अठारहवीं सदी में यूरोप में पाठक वर्ग (Reading Public) का विस्तार कैसे हुआ?
साक्षरता दर में तीव्र वृद्धि, प्राथमिक विद्यालयों की स्थापना और सस्ती पुस्तकों (पॉकेट बुक्स) के प्रचलन से यूरोप के किसान, कारीगर और महिलाएं भी पाठक वर्ग का हिस्सा बन गए।
40. भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उर्दू प्रेस का क्या योगदान था?
उर्दू अखबारों जैसे जमींदार, अल-हिलाल और कौमी आवाज ने उत्तर भारत के जनमानस में ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ विद्रोह और हिंदू-मुस्लिम एकता की अलख जगाई।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions / 4-5 अंक वाले प्रश्न)
41. मुद्रण संस्कृति ने फ्रांसीसी क्रांति के लिए अनुकूल परिस्थितियां कैसे तैयार कीं? व्याख्या करें।
इतिहासकारों के अनुसार मुद्रण क्रांति ने फ्रांसीसी क्रांति (1789) की वैचारिक जमीन तैयार की:
  • प्रबोधन विचारकों के विचारों का प्रसार: वोल्टेयर, रूसो और मोंटेस्क्यू के विचारों को व्यापक रूप से छापा गया। लोगों ने परंपरा और अंधविश्वास की जगह तर्क और विवेक के आधार पर सोचना शुरू किया।
  • राजशाही की निरंकुशता पर प्रहार: कार्टूनों, पैम्फलेटों और व्यंग्य चित्रों के माध्यम से राजा और पादरियों की विलासिता तथा जनता की गरीबी के विरोधाभास को उजागर किया गया।
  • जनसंवाद और सार्वजनिक क्षेत्र का निर्माण: पुस्तकों ने एक ऐसे 'पब्लिक स्फीयर' का निर्माण किया जहाँ आम नागरिक सत्ता और सामाजिक संरचना पर खुलकर बहस करने लगे, जिससे राजशाही के प्रति जन-आक्रोश भड़का।
42. भारत में मुद्रण संस्कृति के विकास और इसके सामाजिक सुधार आंदोलनों पर पड़े प्रभावों का वर्णन करें।
भारत में 16वीं सदी में पुर्तगालियों के साथ प्रिंटिंग प्रेस आई, लेकिन 19वीं सदी के आरंभ से इसने सामाजिक क्रांति का रूप ले लिया:
  • कुरीतियों पर वैचारिक प्रहार: राजा राममोहन राय, ईश्वरचंद्र विद्यासागर और दयानंद सरस्वती ने वेदों, उपनिषदों और तर्कसंगत ग्रंथों को स्थानीय भाषाओं में छापकर सती प्रथा, विधवा विवाह निषेध और छुआछूत का विरोध किया।
  • निम्न जातियों में चेतना: ज्योतिबा फुले ने गुलामगिरी (1871) लिखकर जाति व्यवस्था के शोषण को उजागर किया। दक्षिण भारत में ई.वी. रामास्वामी पेरियार और महाराष्ट्र में डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने पत्र-पत्रिकाओं के जरिए दलित चेतना का बिगुल फूंका।
  • स्त्री शिक्षा का समर्थन: मुद्रित साहित्य ने महिलाओं को पढ़ने के लिए प्रेरित किया, जिससे सामाजिक रूढ़ियों को तोड़कर महिलाएं सार्वजनिक जीवन में भाग लेने लगीं।
43. ब्रिटिश शासन के दौरान प्रेस पर लगाए गए प्रमुख प्रतिबंधों (सेंसरशिप) का कालक्रमानुसार विश्लेषण करें।
ब्रिटिश हुकूमत ने भारतीय प्रेस की मुखर आवाज को दबाने के लिए लगातार कठोर कानून बनाए:
  • 1799 का सेंसरशिप एक्ट: लॉर्ड वेलेजली ने फ्रांसीसी आक्रमण के डर से अखबारों पर पूर्ण प्री-सेंसरशिप लागू की।
  • 1823 का लाइसेंसिंग रेगुलेशन: जॉन एडम्स द्वारा लाया गया कानून, जिसके तहत बिना सरकारी लाइसेंस के अखबार छापना अपराध घोषित किया गया (इसी कानून के तहत राजा राममोहन राय का मिरात-उल-अखबार बंद हुआ)।
  • 1878 का वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट: लॉर्ड लिटन ने केवल भारतीय भाषाई अखबारों को दबाने के लिए यह दमनकारी कानून बनाया, जिसमें अखबार की संपत्ति जब्त करने का अधिकार मजिस्ट्रेट को था।
  • 1908 और 1910 का प्रेस एक्ट: स्वतंत्रता आंदोलन और क्रांतिकारी गतिविधियों को रोकने के लिए जमानत राशि जब्त करने और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया।
44. 19वीं शताब्दी में भारत में राष्ट्रवाद के उदय में प्रेस की भूमिका की विस्तार से समीक्षा करें।
प्रेस ने भारत में स्वतंत्रता की अलख जगाने में केंद्रीय भूमिका निभाई:
  • राष्ट्रीय चेतना का प्रसार: अमृत बाजार पत्रिका, द हिंदू, केसरी, बंगाली जैसे पत्रों ने कश्मीर से कन्याकुमारी तक के लोगों में यह साझा भावना भरी कि उनका वास्तविक शोषक ब्रिटिश साम्राज्य है।
  • सरकारी नीतियों की पोल खोलना: दादाभाई नौरोजी के 'धन निष्कासन सिद्धांत' (Drain of Wealth Theory) को प्रेस ने जनता तक सरल भाषा में पहुँचाया। 1876-78 और 1896-97 के अकाल में राहत कार्यों की विफलता को अखबारों ने प्रमुखता से उठाया।
  • जनआंदोलनों को दिशा देना: स्वदेशी आंदोलन, असहयोग आंदोलन और सविनय अवज्ञा आंदोलन के कार्यक्रमों, सभाओं और नेताओं के भाषणों को देशभर में पहुँचाने का काम प्रेस ने किया।
  • क्रांतिकारी विचारों का संचार: युगांतर, संध्या और गदर जैसे पत्रों ने युवाओं में देश के लिए बलिदान की भावना को प्रेरित किया।
45. गुटेनबर्ग की प्रिंटिंग प्रेस की तकनीकी विशेषताओं और इसके ऐतिहासिक महत्व का विश्लेषण करें।
गुटेनबर्ग की खोज ने संचार के इतिहास को बदल दिया:
  • तकनीकी विशेषताएं:
    • मूवेबल मेटल टाइप: उसने वर्णमाला के प्रत्येक अक्षर के अलग-अलग धातु के टाइप बनाए, जिन्हें बार-बार नए पन्नों के लिए व्यवस्थित किया जा सकता था।
    • स्थायी स्याही: उसने पानी-आधारित स्याही की जगह तेल-आधारित (ऑयल-बेस्ड) स्याही बनाई, जो धातु के अक्षरों पर आसानी से चिपकती थी और कागज पर फैलती नहीं थी।
    • स्क्रू प्रेस मैकेनिज्म: जैतून के तेल निकालने वाली प्रेस की तकनीक से कागज पर एकसमान दबाव डालकर साफ छपाई की।
  • ऐतिहासिक महत्व: हाथ से एक बाइबिल लिखने में सालों लगते थे, जबकि गुटेनबर्ग ने तीन साल में 180 बाइबिलें छाप दीं। इसने पुनर्जागरण (Renaissance) और वैज्ञानिक क्रांति की राह खोली।
46. "मुद्रण ने केवल विचार नहीं बदले, बल्कि लोगों का संपूर्ण जीवन बदल दिया।" इस कथन के आलोक में मुद्रण क्रांति के बहुआयामी प्रभावों की चर्चा करें।
मुद्रण क्रांति केवल तकनीकी प्रगति नहीं बल्कि एक सामाजिक-सांस्कृतिक क्रांति थी:
  • धार्मिक प्रभाव: धार्मिक ग्रंथों का स्थानीय भाषाओं में अनुवाद हुआ, जिससे धार्मिक बिचौलियों (पुरोहितों/पादरियों) का प्रभाव घटा।
  • वैज्ञानिक सोच का विकास: कॉपरनिकस, न्यूटन और गैलीलियो के शोध आम जनता और वैज्ञानिकों तक तेजी से पहुँचे, जिससे मध्यकालीन अंधविश्वासों का अंत हुआ और वैज्ञानिक क्रांति आई।
  • श्रमजीवी और बच्चों का वर्ग: 19वीं सदी में बच्चों के लिए परियों की कहानियाँ, लोककथाएँ और स्कूली पाठ्यपुस्तकें छपीं। मजदूरों ने अपने अधिकारों के लिए पर्चे छापे और मजदूर आंदोलनों को संगठित किया।
  • सार्वजनिक राय (Public Opinion): पहली बार समाज में जनमत एक शक्ति बना, जिससे निरंकुश शासकों को भी जनता की आवाज सुनने पर विवश होना पड़ा।
47. गांधीजी के विभिन्न आंदोलनों में समाचार पत्रों एवं साहित्य के योगदान पर प्रकाश डालें।
महात्मा गांधी ने अपने विचारों और सत्याग्रह के संदेश को आम जन तक पहुँचाने के लिए प्रेस का अत्यधिक प्रभावी उपयोग किया:
  • दक्षिण अफ्रीका में शुरुआत: 1903 में उन्होंने इंडियन ओपिनियन अखबार शुरू कर रंगभेद के खिलाफ भारतीयों को संगठित किया।
  • भारत में प्रमुख पत्र: 1919 में उन्होंने यंग इंडिया (अंग्रेजी) और नवजीवन (गुजराती) का संपादन संभाला। 1933 में उन्होंने दलित उत्थान और अस्पृश्यता निवारण के लिए हरिजन पत्रिका निकाली।
  • आंदोलनों की रणनीति का प्रचार: गांधीजी इन पत्रों में लेख लिखकर अहिंसा, सत्याग्रह, चरखा, विदेशी वस्त्र बहिष्कार और सविनय अवज्ञा की रणनीति सीधे जनता को समझाते थे। उनके अखबार बिना विज्ञापनों के केवल जन-सहयोग से चलते थे, जो उनकी निष्पक्षता का प्रतीक था।
48. मुद्रण संस्कृति और भारत के मजदूर/दलित वर्ग के बीच संबंधों का विश्लेषण करें।
19वीं और 20वीं सदी में मुद्रण ने समाज के हाशिए पर खड़े वर्गों को स्वर दिया:
  • जातिगत उत्पीड़न के खिलाफ आवाज: ज्योतिबा फुले की गुलामगिरी और डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा शुरू किए गए पत्र मूकनायक व बहिष्कृत भारत ने दलितों पर होने वाले अत्याचारों को राष्ट्रीय विमर्श का मुद्दा बनाया।
  • मजदूर वर्ग का साहित्य: कानपुर के सूती मिल मजदूर 'काशीबाबा' ने 1938 में छोटे और बड़े का सवाल लिखकर मिल मालिकों द्वारा किए जा रहे आर्थिक शोषण को सामने रखा।
  • पुस्तकालय आंदोलन: बंगलुरु और मुंबई के मिल इलाकों में मजदूरों के आत्म-सुधार और शिक्षा के लिए पुस्तकालय स्थापित किए गए, जिससे श्रमिकों में राजनीतिक चेतना का उदय हुआ।
49. भारत में मुद्रण तकनीक के विकास के प्रमुख चरणों का कालानुक्रमिक विवरण दें।
भारत में प्रिंटिंग का सफर कई चरणों से गुजरा:
  • प्रारंभिक काल (16वीं-17वीं सदी): 1556 में गोवा में पुर्तगालियों ने पहली प्रेस लगाई। यहाँ धार्मिक पुस्तकें तमिल, मलयालम और कोंकणी भाषा में छापी गईं।
  • ईस्ट इंडिया कंपनी का काल (18वीं सदी): 1780 में जेम्स ऑगस्टस हिक्की ने पहला अखबार द बंगाल गजट निकाला। इसके बाद कलकत्ता, मद्रास और बंबई से कई अंग्रेज अखबार शुरू हुए।
  • भारतीय भाषाई प्रेस का उदय (19वीं सदी का आरंभ): 1818 में सेरामपुर मिशनरी प्रेस ने बांग्ला में समाचार दर्पण निकाला। 1821 में राजा राममोहन राय ने देशी पत्रकारिता की मजबूत नींव रखी।
  • स्वदेशी एवं राष्ट्रवादी दौर (19वीं सदी के अंत से 20वीं सदी): मुद्रण तकनीक पूरे देश में फैली और हिंदी, मराठी, तमिल, गुजराती व उर्दू में हजारों राष्ट्रवादी अखबार और पुस्तकें प्रकाशित होने लगीं।
50. पांडुलिपियों और मुद्रित पुस्तकों के बीच तुलनात्मक अंतर स्पष्ट करें।
आधार पांडुलिपि (Manuscript) मुद्रित पुस्तक (Printed Book)
निर्माण प्रक्रिया हाथ से लिखकर एक-एक प्रति तैयार की जाती थी। मशीनी टाइप और प्रेस के माध्यम से हजारों प्रतियां एक साथ छापी जाती हैं।
लागत एवं मूल्य अत्यधिक श्रम और समय लगने के कारण अत्यंत महंगी। बड़े पैमाने पर उत्पादन के कारण लागत और मूल्य काफी कम।
उपलब्धता केवल राजाओं, मठों और धनी लोगों तक सीमित। आम जनता, छात्रों और मजदूरों तक सहज सुलभ।
सटीकता एवं एकरूपता नकल करने वाले की त्रुटियों के कारण प्रतियों में भिन्नता संभव थी। सभी प्रतियों में अक्षर, वर्तनी और पृष्ठ विन्यास पूरी तरह समान।
रखरखाव नाजुक सामग्री (ताड़पत्र/भोजपत्र) पर होने के कारण संभालना कठिन। मजबूत कागज और जिल्दसाजी के कारण लंबे समय तक टिकाऊ।

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