बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) कक्षा 10 इतिहास
अध्याय 4: "भारत में राष्ट्रवाद" — 50 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर
अति-लघु उत्तरीय प्रश्न (One-Liner / 1 अंक वाले प्रश्न)
1. गांधीजी दक्षिण अफ्रीका से भारत कब लौटे थे?
9 जनवरी 1915 को।
2. गांधीजी ने भारत में सत्याग्रह का पहला प्रयोग कहाँ और कब किया था?
1917 ई. में बिहार के चंपारण में।
3. जलियांवाला बाग हत्याकांड कब और कहाँ हुआ था?
13 अप्रैल 1919 को अमृतसर (पंजाब) में।
4. जलियांवाला बाग में निहत्थी भीड़ पर गोली चलाने का आदेश किसने दिया था?
जनरल एडवर्ड हैरी डायर (General Dyer) ने।
5. रोलेट एक्ट (Rowlatt Act) किस वर्ष पारित हुआ था?
मार्च 1919 ई. में (इसे "काला कानून" भी कहा गया)।
6. खिलाफत आंदोलन किनके नेतृत्व में शुरू हुआ था?
अली बंधुओं—मौलाना मोहम्मद अली और शौकत अली के नेतृत्व में।
7. असहयोग आंदोलन किस वर्ष शुरू हुआ और इसका प्रस्ताव कांग्रेस के किस अधिवेशन में पारित हुआ?
1920 ई. में शुरू हुआ; प्रस्ताव दिसंबर 1920 के नागपुर अधिवेशन में स्वीकृत हुआ।
8. चौरी-चौरा कांड कब घटित हुआ था?
5 फरवरी 1922 को (उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में)।
9. चौरी-चौरा कांड के बाद गांधीजी ने किस आंदोलन को स्थगित कर दिया था?
असहयोग आंदोलन को (12 फरवरी 1922 को)।
10. स्वराज पार्टी की स्थापना कब और किसने की थी?
1 जनवरी 1923 को चितरंजन दास (अध्यक्ष) और मोतीलाल नेहरू (सचिव) ने।
11. साइमन कमीशन भारत कब आया था?
3 फरवरी 1928 को (बंबई पहुँचा)।
12. साइमन कमीशन में कुल कितने सदस्य थे और इसका विरोध क्यों हुआ?
7 सदस्य थे; सभी सदस्य अंग्रेज (श्वेत) थे, एक भी भारतीय शामिल नहीं था।
13. लाहौर में साइमन कमीशन विरोधी प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज से किस नेता की मृत्यु हुई थी?
लाला लाजपत राय की।
14. पूर्ण स्वराज की मांग कांग्रेस के किस अधिवेशन में और कब की गई?
1929 ई. के ऐतिहासिक लाहौर अधिवेशन में (पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में)।
15. प्रथम स्वतंत्रता दिवस कब मनाया गया था?
26 जनवरी 1930 को।
16. दांडी यात्रा कब शुरू हुई और नमक कानून कब तोड़ा गया?
12 मार्च 1930 को साबरमती से शुरू हुई और 6 अप्रैल 1930 को दांडी में नमक बनाकर कानून तोड़ा गया।
17. गांधी-इरविन समझौता (दिल्ली समझौता) कब हुआ था?
5 मार्च 1931 को।
18. पूना पैक्ट (Poona Pact) कब और किनके बीच हुआ था?
24 सितंबर 1932 को महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर के बीच।
19. अखिल भारतीय किसान सभा का गठन कब और कहाँ हुआ था?
11 अप्रैल 1936 को लखनऊ में (स्वामी सहजानंद सरस्वती इसके प्रथम अध्यक्ष बने)।
20. 'करो या मरो' (Do or Die) का नारा गांधीजी ने किस आंदोलन के दौरान दिया था?
1942 के भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement) के दौरान।
लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions / 2-3 अंक वाले प्रश्न)
21. रोलेट एक्ट क्या था? भारतीयों ने इसका विरोध क्यों किया?
यह 1919 में सर सिडनी रोलेट की अध्यक्षता में बना एक दमनकारी कानून था। इसके तहत ब्रिटिश सरकार किसी भी व्यक्ति को बिना वारंट, बिना कारण बताए और बिना मुकदमा चलाए अनिश्चित काल के लिए जेल में बंद कर सकती थी। भारतीयों ने इसे "बिना वकील, बिना अपील, बिना दलील" का कानून कहकर इसका कड़ा विरोध किया।
22. जलियांवाला बाग हत्याकांड पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
13 अप्रैल 1919 (बैसाखी के दिन) को अमृतसर के जलियांवाला बाग में रोलेट एक्ट के विरोध और अपने लोकप्रिय नेताओं डॉ. सैफुद्दीन किचलू व सत्यपाल की गिरफ्तारी के खिलाफ शांतिपूर्ण सभा हो रही थी। जनरल डायर ने बाग के एकमात्र संकरे निकास द्वार को सैनिकों से घेर लिया और निहत्थी भीड़ पर बिना चेतावनी के अंधाधुंध गोलियां चलवाईं, जिसमें सैकड़ों निर्दोष लोग मारे गए।
23. खिलाफत आंदोलन क्यों शुरू हुआ था?
प्रथम विश्व युद्ध में तुर्की की पराजय के बाद ब्रिटेन ने तुर्की के सुल्तान (जिन्हें पूरी दुनिया के मुसलमान अपना धार्मिक खलीफा मानते थे) पर सेवर्स की अपमानजनक संधि थोप दी और खलीफा की सत्ता छीनने का प्रयास किया। तुर्की के खलीफा के पद और प्रतिष्ठा की पुनर्स्थापना के लिए भारतीय मुसलमानों ने अली बंधुओं के नेतृत्व में खिलाफत आंदोलन छेड़ा।
24. असहयोग आंदोलन के कोई तीन प्रमुख कारण बताएं।
- प्रथम विश्व युद्ध का प्रभाव: युद्ध के कारण भारत में कमरतोड़ महंगाई, बेरोजगारी, अकाल और प्लेग फैला, जिससे जनता में ब्रिटिश शासन के खिलाफ गहरा असंतोष था।
- रोलेट एक्ट और जलियांवाला बाग हत्याकांड: इन क्रूर घटनाओं ने ब्रिटिश न्याय प्रणाली से भारतीयों का विश्वास पूरी तरह समाप्त कर दिया।
- हंटर कमेटी की लीपापोती: हत्याकांड की जांच के लिए बनी हंटर कमेटी ने जनरल डायर को निर्दोष ठहराने का प्रयास किया, जिससे जन-आक्रोश भड़क उठा।
25. चौरी-चौरा की घटना क्या थी? इसका क्या परिणाम हुआ?
5 फरवरी 1922 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के चौरी-चौरा नामक स्थान पर पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चला दी। उत्तेजित भीड़ ने पुलिस थाने को घेरकर आग लगा दी, जिसमें एक थानेदार और 21 पुलिसकर्मी जिंदा जलकर मर गए। गांधीजी अहिंसा के सिद्धांत के प्रति समर्पित थे; अतः उन्होंने हिंसा से दुखी होकर 12 फरवरी 1922 को असहयोग आंदोलन तुरंत वापस ले लिया।
26. स्वराज पार्टी की स्थापना का मुख्य उद्देश्य क्या था?
असहयोग आंदोलन स्थगित होने के बाद चितरंजन दास और मोतीलाल नेहरू विधान परिषदों में प्रवेश करने के पक्षधर थे। उनका उद्देश्य चुनाव जीतकर विधान परिषदों के भीतर प्रवेश करना, ब्रिटिश सरकार की जनविरोधी नीतियों का संवैधानिक रूप से बहिष्कार करना और सरकार के कामकाज में गतिरोध पैदा कर औपनिवेशिक तंत्र को ठप करना था।
27. साइमन कमीशन का गठन क्यों किया गया था और भारत में इसका विरोध क्यों हुआ?
1919 के मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार (भारत शासन अधिनियम) की कार्यप्रणाली की समीक्षा करने और प्रशासनिक सुधारों की सिफारिश के लिए ब्रिटिश सरकार ने 1927 में साइमन कमीशन बनाया। इसका कड़ा विरोध इसलिए हुआ क्योंकि इसके सभी सातों सदस्य अंग्रेज थे। भारतीयों का मानना था कि जिस आयोग में कोई भारतीय शामिल नहीं, वह भारतीयों के भविष्य का फैसला नहीं कर सकता।
28. मेरठ षड्यंत्र केस (Meerut Conspiracy Case) क्या था?
मार्च 1929 में ब्रिटिश हुकूमत ने भारत में बढ़ते साम्यवादी (कम्युनिस्ट) और मजदूर आंदोलन को कुचलने के लिए मुजफ्फर अहमद, एस.ए. डांगे, शौकत उस्मानी सहित 31 प्रमुख श्रमिक व वामपंथी नेताओं को गिरफ्तार कर लिया। इन पर मेरठ अदालत में साढ़े चार साल तक देशद्रोह का मुकदमा चलाया गया, जिसे मेरठ षड्यंत्र केस कहा जाता है।
29. चंपारण सत्याग्रह (1917) के कारणों और परिणाम की विवेचना करें।
चंपारण (बिहार) में यूरोपीय नीलहे बागान मालिकों द्वारा किसानों पर 'तिनकठिया प्रणाली' थोपी गई थी, जिसके तहत जमीन के 3/20 भाग पर नील की खेती करना अनिवार्य था। जर्मनी में रासायनिक रंगों के आने के बाद जब नील की मांग घटी, तो मालिकों ने किसानों को मुक्त करने के बदले भारी गैरकानूनी लगान वसूला। गांधीजी ने राजकुमार शुक्ल के आग्रह पर वहाँ सत्याग्रह किया, जिसके परिणामस्वरूप ब्रिटिश सरकार झुकी और तिनकठिया प्रथा समाप्त हुई तथा 25% अवैध वसूली वापस की गई।
30. खेड़ा सत्याग्रह (1918) क्यों हुआ था?
1918 में गुजरात के खेड़ा जिले में भीषण सूखे के कारण फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई थीं। सरकारी राजस्व नियमों के अनुसार फसल खराब होने पर लगान माफ होना चाहिए था, लेकिन अंग्रेज अधिकारी किसानों से जबरन लगान वसूल रहे थे। गांधीजी और वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में किसानों ने कर देने से इनकार कर दिया, जिसके बाद सरकार ने केवल सक्षम किसानों से ही लगान लेने का गुप्त आदेश जारी किया।
31. अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन (1918) का विवरण दें।
अहमदाबाद में प्लेग महामारी समाप्त होने के बाद मिल मालिकों ने 'प्लेग बोनस' समाप्त करने का फैसला किया, जबकि प्रथम विश्व युद्ध के कारण महंगाई आसमान छू रही थी। मजदूर 50% बोनस या महंगाई भत्ते की मांग कर रहे थे, जबकि मालिक केवल 20% देने को तैयार थे। गांधीजी ने मजदूरों के समर्थन में पहली बार भूख हड़ताल की, जिसके दबाव में ट्रिब्यूनल ने मजदूरों को 35% भत्ता स्वीकार किया।
32. गांधीजी ने नमक को ही सविनय अवज्ञा आंदोलन का मुख्य हथियार क्यों चुना?
नमक प्रकृति की एक ऐसी मुफ्त देन है जिसका उपयोग अमीर, गरीब, हिंदू, मुस्लिम—हर भारतीय समान रूप से करता है। ब्रिटिश सरकार ने नमक उत्पादन पर सरकारी एकाधिकार बना रखा था और उस पर भारी कर लगा दिया था। गांधीजी जानते थे कि नमक से हर भारतीय भावनात्मक रूप से जुड़ा है, इसलिए यह कर ब्रिटिश शासन की सबसे दमनकारी प्रवृत्ति का प्रतीक था और देश को एकजुट करने का सबसे सरल माध्यम था।
33. गांधी-इरविन समझौता (1931) की मुख्य शर्तें क्या थीं?
- ब्रिटिश सरकार उन सभी राजनीतिक कैदियों को रिहा करेगी जिन पर हिंसा का आरोप नहीं है।
- तटीय इलाकों के लोगों को व्यक्तिगत उपयोग के लिए बिना टैक्स नमक बनाने की छूट दी जाएगी।
- शराब और विदेशी कपड़ों की दुकानों पर शांतिपूर्ण धरने की अनुमति होगी।
- इसके बदले में कांग्रेस ने सविनय अवज्ञा आंदोलन स्थगित करने और दूसरे गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने की सहमति दी।
34. पूना पैक्ट (1932) की प्रमुख शर्तें क्या थीं?
अगस्त 1932 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैमसे मैकडोनाल्ड द्वारा दलितों को अलग निर्वाचन क्षेत्र (कम्युनल अवार्ड) देने के खिलाफ गांधीजी ने यरवदा जेल में आमरण अनशन शुरू कर दिया। 24 सितंबर 1932 को हुए पूना पैक्ट के तहत:
- दलितों (हरिजनों) के लिए पृथक निर्वाचन व्यवस्था समाप्त कर दी गई।
- प्रांतीय विधानमंडलों में दलितों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या 71 से बढ़ाकर 147 कर दी गई।
35. अल्लूरी सीताराम राजू कौन थे? उनका क्या योगदान था?
अल्लूरी सीताराम राजू आंध्र प्रदेश के गुडेम पहाड़ियों के लोकप्रिय आदिवासी नेता थे। उन्होंने आदिवासियों पर थोपे गए वन कानूनों (जंगल में पशु चराने और लकड़ी काटने पर रोक) के खिलाफ 'रम्पा विद्रोह' (1922-1924) का नेतृत्व किया। वे गांधीजी से प्रेरित थे, लोगों को खादी पहनने और शराब छोड़ने को कहते थे, लेकिन उनका मानना था कि भारत को स्वतंत्रता केवल बल प्रयोग (गुरिल्ला युद्ध) से मिल सकती है।
36. बिहार में किसान आंदोलन के विकास में स्वामी सहजानंद सरस्वती का क्या योगदान था?
स्वामी सहजानंद सरस्वती बिहार किसान सभा (1929) और अखिल भारतीय किसान सभा (1936) के संस्थापक अध्यक्ष थे। उन्होंने जमींदारी प्रथा, अवैध करों और 'बकाश्त भूमि' की जब्ती के खिलाफ बिहार के किसानों को संगठित किया। उनके नारे "कैसे लोगे मालगुजारी, लठिया हमारा जिंदाबाद" ने किसानों में अपने अधिकारों के लिए लड़ने का नया साहस भरा।
37. ताना भगत आंदोलन क्या था?
यह 1914 से 1919 के दौरान छोटानागपुर (वर्तमान झारखंड) के उरांव आदिवासियों द्वारा जतरा भगत के नेतृत्व में चलाया गया एक धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक आंदोलन था। ताना भगतों ने मांस-मदिरा छोड़कर सात्विक जीवन अपनाया और बाद में गांधीजी के असहयोग आंदोलन से जुड़कर अंग्रेजों को मालगुजारी व चौकीदारी टैक्स देने से मना कर दिया।
38. मोपला विद्रोह (1921) पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
केरल के मालाबार तट पर मुस्लिम काश्तकारों (जिन्हें मोपला कहा जाता था) ने हिंदू जमींदारों (नंबूदिरी व नायर) के भारी लगान और ब्रिटिश पुलिस के अत्याचारों के खिलाफ हिंसक विद्रोह कर दिया। यह विद्रोह खिलाफत आंदोलन और असहयोग आंदोलन से गहराई से जुड़ा हुआ था, जिसने बाद में सांप्रदायिक मोड़ ले लिया।
39. खुदाई खिदमतगार (लाल कुर्ती दल) क्या था?
पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत में खान अब्दुल गफ्फार खान (जिन्हें 'सीमांत गांधी' कहा जाता है) ने 'खुदाई खिदमतगार' (ईश्वर के सेवक) नामक एक अहिंसक स्वयंसेवी संगठन बनाया। इसके सदस्य लाल रंग का कुर्ता पहनते थे, इसलिए इन्हें 'लाल कुर्ती' दल कहा गया। इन्होंने पेशावर में सविनय अवज्ञा आंदोलन में अभूतपूर्व वीरता और अहिंसक अनुशासन का परिचय दिया।
40. क्रिप्स मिशन (1942) भारत क्यों आया और यह क्यों असफल रहा?
द्वितीय विश्व युद्ध में जापानी सेना के भारत की सीमाओं के निकट पहुँचने पर भारतीयों का सैन्य सहयोग पाने के लिए ब्रिटिश सरकार ने सर स्टैफोर्ड क्रिप्स को भारत भेजा। क्रिप्स ने युद्ध के बाद भारत को केवल डोमिनियन स्टेट (उपनिवेश) देने की बात कही, जिसे कांग्रेस ने खारिज कर दिया क्योंकि कांग्रेस को पूर्ण स्वतंत्रता चाहिए थी, और मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान की मांग न माने जाने के कारण इसे ठुकरा दिया। गांधीजी ने इसे "दिवालिया बैंक के नाम का उत्तर-तिथियों का चेक" (Post-dated Cheque) कहा।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions / 4-5 अंक वाले प्रश्न)
41. असहयोग आंदोलन के कारणों, कार्यक्रमों एवं इसके ऐतिहासिक महत्व की विस्तृत विवेचना करें।
महात्मा गांधी के नेतृत्व में 1920 में शुरू हुआ असहयोग आंदोलन पहला अखिल भारतीय जन-आंदोलन था:
- आंदोलन के प्रमुख कारण:
- प्रथम विश्व युद्ध के दुष्प्रभाव: देश में भारी महंगाई, अनाज की कमी और जबरन सैन्य भर्ती से असंतोष।
- रोलेट एक्ट (1919): बिना वकील, बिना दलील वाले कानून द्वारा मौलिक अधिकारों का हनन।
- जलियांवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919): निर्दोषों के नरसंहार से उपजा राष्ट्रीय आक्रोश।
- खिलाफत का मुद्दा: तुर्की के खलीफा के अधिकारों की बहाली के लिए हिंदू-मुस्लिम एकता का निर्माण।
- आंदोलन के कार्यक्रम (दोहरे पहलू):
- नकारात्मक/बहिष्कारवादी पक्ष: सरकारी उपाधियों और पदों का त्याग (गांधीजी ने 'कैसर-ए-हिंद' लौटाया), सरकारी स्कूलों-कॉलेजों, अदालतों, विदेशी वस्त्रों और विधान परिषद चुनावों का पूर्ण बहिष्कार।
- सकारात्मक/रचनात्मक पक्ष: राष्ट्रीय शिक्षण संस्थानों (जैसे काशी विद्यापीठ, जामिया मिलिया) की स्थापना, हथकरघा व चरखे का प्रचार, शराबबंदी और अस्पृश्यता उन्मूलन।
- ऐतिहासिक महत्व: यद्यपि चौरी-चौरा कांड के कारण इसे वापस लेना पड़ा, लेकिन इसने भारतीय राजनीति को अभिजात्य वर्ग के कमरों से निकालकर करोड़ों किसानों, मजदूरों, महिलाओं और छात्रों का आंदोलन बना दिया। इसने भारतीयों के मन से ब्रिटिश हुकूमत का डर हमेशा के लिए निकाल दिया।
42. सविनय अवज्ञा आंदोलन के कारण, स्वरूप और इसके परिणामों का विस्तृत विश्लेषण करें।
1930 में गांधीजी के नेतृत्व में शुरू हुआ सविनय अवज्ञा आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक निर्णायक मोड़ था:
- प्रमुख कारण:
- साइमन कमीशन का बहिष्कार: 1928 में बिना किसी भारतीय सदस्य वाले आयोग के आगमन से पूरे देश में रोष फैला।
- नेहरू रिपोर्ट की अस्वीकृति: कांग्रेस द्वारा प्रस्तुत डोमिनियन स्टेटस के प्रस्ताव को ब्रिटिश सरकार ने ठुकरा दिया।
- लाहौर अधिवेशन (1929): रावी नदी के तट पर पूर्ण स्वराज का ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया गया।
- गांधीजी की 11 सूत्री मांगें: वायसराय लॉर्ड इरविन ने गांधीजी की मांगों (नमक कर की समाप्ति, भू-राजस्व में 50% कटौती, राजनीतिक कैदियों की रिहाई) पर ध्यान नहीं दिया।
- आंदोलन का स्वरूप: 12 मार्च 1930 को साबरमती से 78 अनुयायियों के साथ 240 मील की दांडी यात्रा शुरू हुई। 6 अप्रैल 1930 को गांधीजी ने समुद्र तट पर नमक बनाकर नमक कानून तोड़ा। इसके बाद देशभर में नमक कानून तोड़ा गया, विदेशी कपड़ों और शराब की दुकानों पर धरने दिए गए, करों (जैसे चौकीदारी टैक्स) का भुगतान रोक दिया गया और सरकारी कर्मचारियों ने इस्तीफे दिए।
- परिणाम: इस आंदोलन में बड़े पैमाने पर महिलाओं ने पर्दा तोड़कर भाग लिया। ब्रिटिश सरकार पहली बार भारतीयों के साथ बराबरी के स्तर पर बातचीत करने के लिए विवश हुई, जिसके परिणामस्वरूप 1931 का गांधी-इरविन समझौता हुआ।
43. भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में वामपंथी (कम्युनिस्ट एवं समाजवादी) आंदोलन के उदय और भूमिका का मूल्यांकन करें।
1917 की रूसी बोल्शेविक क्रांति के प्रभाव से 1920 के दशक में भारत में वामपंथी विचारधारा का तीव्र प्रसार हुआ:
- कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना: 1920 में ताशकंद में एम.एन. रॉय ने और 1925 में कानपुर में सत्यभक्त ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) की स्थापना की।
- मजदूर-किसान राजनीति: वामपंथियों ने 'वर्कर्स एंड पीजेंड्स पार्टी' (WPP) बनाकर कारखानों के मजदूरों और गांवों के गरीब किसानों को एकजुट किया। बंबई, कलकत्ता और कानपुर में विशाल हड़तालें की गईं।
- कांग्रेस समाजवादी पार्टी (CSP): 1934 में जयप्रकाश नारायण, आचार्य नरेंद्र देव और राम मनोहर लोहिया ने कांग्रेस के भीतर रहकर समाजवादी दल बनाया। इन्होंने राष्ट्रीय आंदोलन को केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित न रखकर भूमि सुधार, जमींदारी उन्मूलन और समाजवाद से जोड़ा।
- क्रांतिकारियों पर प्रभाव: भगत सिंह और उनके संगठन 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) ने समाजवाद को अपना अंतिम लक्ष्य घोषित किया।
44. 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' (Quit India Movement) की पृष्ठभूमि, प्रसार और इसके महत्व की समीक्षा करें।
यह ब्रिटिश सत्ता के ताबूत में अंतिम कील साबित होने वाला सबसे विशाल जन-विद्रोह था:
- पृष्ठभूमि: क्रिप्स मिशन की विफलता, द्वितीय विश्व युद्ध के कारण देश में चावल और दैनिक वस्तुओं का भीषण अभाव, तथा दक्षिण-पूर्व एशिया में ब्रिटिश सेना के पीछे हटने से जापानी आक्रमण का बढ़ता खतरा।
- शुरुआत और दमन: 8 अगस्त 1942 को बंबई के गवालिया टैंक मैदान में कांग्रेस ने 'भारत छोड़ो' प्रस्ताव पारित किया और गांधीजी ने "करो या मरो" का ऐतिहासिक मंत्र दिया। 9 अगस्त की भोर में ही अंग्रेजों ने 'ऑपरेशन जीरो आवर' चलाकर गांधीजी, नेहरू, पटेल समेत सभी शीर्ष नेताओं को गिरफ्तार कर लिया।
- स्वतःस्फूर्त जन-विद्रोह: नेतृत्वविहीन आंदोलन पूरी तरह जनता के हाथ में आ गया। सरकारी थानों, डाकघरों, रेलवे स्टेशनों को फूंका गया। बलिया (चित्तू पांडे के नेतृत्व में), तामलुक (मिदनापुर) और सतारा में समानांतर सरकारें स्थापित की गईं।
- भूमिगत आंदोलन: जयप्रकाश नारायण (हजारीबाग जेल से भागकर), अरुणा आसफ अली, राम मनोहर लोहिया और उषा मेहता (आजाद रेडियो के जरिए) ने भूमिगत रहकर युवाओं का मार्गदर्शन किया।
- महत्व: इस आंदोलन ने अंग्रेजों को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया कि अब वे भारतीयों की इच्छा के विरुद्ध उन पर अधिक समय तक शासन नहीं कर सकते।
45. भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी पर एक निबंध लिखें।
गांधीवादी युग में महिलाओं ने घर की चारदीवारी से निकलकर स्वतंत्रता संग्राम में अभूतपूर्व योगदान दिया:
- असहयोग आंदोलन में भूमिका: कस्तूरबा गांधी, बसंती देवी (चितरंजन दास की पत्नी) और सरोजिनी नायडू के नेतृत्व में महिलाओं ने विदेशी कपड़ों के बहिष्कार और शराब की दुकानों पर धरने में अग्रणी भूमिका निभाई तथा तिलक स्वराज फंड के लिए अपने गहने दान किए।
- सविनय अवज्ञा आंदोलन और नमक सत्याग्रह: 1930 में सरोजिनी नायडू ने गुजरात के धरसाना नमक डिपो पर निहत्थे सत्याग्रहियों का नेतृत्व किया, जहाँ ब्रिटिश पुलिस के भीषण लाठीचार्ज के बावजूद महिलाएं डटी रहीं। कमला देवी चट्टोपाध्याय ने बंबई में नमक कानून तोड़ा।
- क्रांतिकारी आंदोलन में वीरांगनाएं: बंगाल में बीना दास ने गवर्नर स्टेनली जैक्सन पर दीक्षांत समारोह में गोली चलाई; प्रीतिलता वाद्देदार ने चटगांव में यूरोपियन क्लब पर हमला किया; और मातंगिनी हाजरा ने 1942 में गोलियां लगने के बावजूद तिरंगा हाथ से नहीं गिरने दिया।
- आजाद हिंद फौज (INA): सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित 'रानी झांसी रेजिमेंट' की कमान कैप्टन लक्ष्मी सहगल ने संभाली, जिसमें सैकड़ों भारतीय महिलाओं ने बंदूक उठाकर युद्ध लड़ा।
46. बिहार के संदर्भ में भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन (चंपारण से 1942 तक) के प्रमुख पड़ावों का वर्णन करें।
बिहार भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक अत्यंत सक्रिय और ऊर्जावान केंद्र रहा:
- चंपारण सत्याग्रह (1917): गांधीजी की पहली कर्मभूमि बना, जहाँ डॉ. राजेंद्र प्रसाद, अनुग्रह नारायण सिंह और ब्रजकिशोर प्रसाद जैसे नेताओं ने गांधीजी का सहयोग किया।
- असहयोग आंदोलन: मौलाना मजहरुल हक ने पटना में 'सदाकत आश्रम' की स्थापना की और 'द मदरलैंड' अखबार निकाला। बिहार विद्यापीठ की स्थापना हुई।
- सविनय अवज्ञा आंदोलन और नमक सत्याग्रह: बिहार समुद्र तट से दूर था, इसलिए यहाँ 15 अप्रैल 1930 को चंपारण और सारण में नमकीन मिट्टी से शोरा बनाकर नमक कानून तोड़ा गया। मुंगेर और भागलपुर में 'चौकीदारी कर बंदी' आंदोलन अत्यंत सफल रहा।
- 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन और सचिवालय गोलीकांड: 11 अगस्त 1942 को पटना सचिवालय पर तिरंगा फहराते हुए 7 वीर छात्र (उमाकांत, रामानंद, सतीश आदि) पुलिस की गोलियों से शहीद हो गए। सीवान में फुलेना प्रसाद प्रभु शहीद हुए। जयप्रकाश नारायण ने नेपाल की तराई में 'आजाद दस्ता' बनाकर गुरिल्ला युद्ध छेड़ा।
47. आजाद हिंद फौज (INA) और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के योगदान का ऐतिहासिक मूल्यांकन करें।
सुभाष चंद्र बोस ने सशस्त्र क्रांति के माध्यम से देश को आजाद कराने का अद्वितीय प्रयास किया:
- फॉरवर्ड ब्लॉक और पलायन: 1939 में गांधीजी से वैचारिक मतभेदों के बाद कांग्रेस अध्यक्ष पद छोड़कर उन्होंने फॉरवर्ड ब्लॉक बनाया। 1941 में वे अंग्रेजों की नजरबंदी से भागकर जर्मनी और फिर जापान पहुँचे।
- INA का पुनर्गठन: कैप्टन मोहन सिंह और रास बिहारी बोस द्वारा स्थापित 'आजाद हिंद फौज' की बागडोर 1943 में सिंगापुर में सुभाष चंद्र बोस ने संभाली। उन्होंने 'आरजी हुकूमत-ए-आजाद हिंद' (अस्थाई सरकार) की स्थापना की।
- रणनीतिक अभियान: उन्होंने "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा" और "दिल्ली चलो" का नारा दिया। जापान की सहायता से अंडमान और निकोबार द्वीपों को मुक्त कराया (शहीद और स्वराज द्वीप नाम दिया) और कोहिमा व इंफाल के मोर्चे पर ब्रिटिश सेना को कड़ी टक्कर दी।
- प्रभाव: यद्यपि जापान की पराजय से अभियान रुक गया, लेकिन लाल किले में INA के अधिकारियों (सहगल, ढिल्लों, शाहनवाज) पर चले मुकदमे और 1946 के रॉयल इंडियन नेवी (नौसेना) विद्रोह ने ब्रिटिश हुकूमत की चूलें हिला दीं।
48. भारतीय राष्ट्रवाद के उदय के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक कारणों की समीक्षा करें।
19वीं सदी के उत्तरार्ध में विभिन्न शक्तियों के संगम से आधुनिक राष्ट्रवाद का जन्म हुआ:
- राजनीतिक एवं प्रशासनिक एकीकरण: अंग्रेजों ने पूरे देश में एक समान कानून, एक न्याय प्रणाली और केंद्रीकृत शासन लागू किया, जिससे भारतीयों में एक साझा पहचान की भावना जगी।
- आर्थिक शोषण: दादाभाई नौरोजी के 'धन निष्कासन सिद्धांत' ने उजागर किया कि कैसे ब्रिटिश नीतियां भारत की संपदा को सोखकर ब्रिटेन भेज रही हैं। कुटीर उद्योगों का विनाश और बार-बार पड़ने वाले अकालों ने सभी वर्गों को अंग्रेजों के खिलाफ खड़ा किया।
- संचार और परिवहन का विकास: रेलवे, टेलीग्राफ और डाक व्यवस्था ने विभिन्न प्रांतों के लोगों और नेताओं के बीच संपर्क आसान बना दिया।
- पश्चिमी शिक्षा और पुनर्जागरण: अंग्रेजी शिक्षा से भारतीयों को स्वतंत्रता, समानता और लोकतंत्र जैसे आधुनिक विचारों का ज्ञान हुआ। साथ ही राजा राममोहन राय, स्वामी विवेकानंद और दयानंद सरस्वती के सामाजिक सुधारों ने भारतीयों में आत्मसम्मान की भावना भरी।
- प्रेस एवं साहित्य की भूमिका: अमृत बाजार पत्रिका, केसरी, और आनंदमठ (वंदे मातरम्) जैसे अखबारों और पुस्तकों ने देशभक्ति की लहर पैदा की।
49. जनजातीय (आदिवासी) आंदोलनों के स्वरूप और कारणों पर प्रकाश डालें।
ब्रिटिश औपनिवेशिक नीतियों ने शांत और स्वायत्त आदिवासी समाज को सर्वाधिक प्रभावित किया:
- विद्रोह के कारण:
- वनों पर आदिवासियों के पारंपरिक अधिकारों को छीनने वाले 'वन कानून'।
- बाहरी लोगों—जमींदारों, महाजनों और व्यापारियों (जिन्हें आदिवासी 'दिक्कू' कहते थे)—द्वारा बेहिसाब शोषण और बेगारी।
- ईसाई मिशनरियों द्वारा उनकी पारंपरिक संस्कृति और धर्म में हस्तक्षेप।
- प्रमुख आंदोलन:
- संथाल विद्रोह (1855-56): सिदो और कान्हू के नेतृत्व में भागलपुर से राजमहल की पहाड़ियों के बीच भीषण सशस्त्र विद्रोह।
- मुंडा विद्रोह (उलगुलान 1899-1900): बिरसा मुंडा के नेतृत्व में छोटानागपुर में 'खुंटकट्टी' (सामूहिक भू-स्वामित्व) प्रथा की पुनर्स्थापना के लिए संघर्ष।
- रम्पा विद्रोह (1922-24): अल्लूरी सीताराम राजू के नेतृत्व में गुरिल्ला संघर्ष।
- स्वरूप: ये आंदोलन स्थानीय थे, जिनमें पारंपरिक हथियारों (तीर-धनुष) का उपयोग हुआ और इनमें अद्भुत शौर्य व बलिदान की भावना दिखाई दी।
50. असहयोग आंदोलन (1920) और सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930) के बीच तुलनात्मक अंतर स्पष्ट करें।
| आधार | असहयोग आंदोलन (Non-Cooperation Movement) | सविनय अवज्ञा आंदोलन (Civil Disobedience Movement) |
|---|---|---|
| मूल उद्देश्य | जलियांवाला बाग के अन्याय का प्रतिकार, खिलाफत का समर्थन और एक वर्ष में 'स्वराज्य' की प्राप्ति। | 'पूर्ण स्वराज' की औपचारिक मांग और औपनिवेशिक कानूनों को तोड़ना। |
| कार्यप्रणाली | ब्रिटिश सरकार के साथ सहयोग न करना (उपाधियों, स्कूलों, अदालतों और विदेशी वस्त्रों का शांतिपूर्ण बहिष्कार)। | कानूनों का जानबूझकर और सविनय उल्लंघन करना (जैसे नमक कानून तोड़ना, टैक्स न देना, वन कानून तोड़ना)। |
| सामाजिक भागीदारी | शहरी मध्यम वर्ग और मुसलमानों की भागीदारी बड़े पैमाने पर थी। | किसानों, व्यापारियों, उद्योगपतियों और विशेष रूप से महिलाओं की व्यापक भागीदारी थी (मुस्लिम सहभागिता अपेक्षाकृत कम रही)। |
| सरकारी रुख | प्रारंभिक स्तर पर सरकार ने उपेक्षा की, बाद में स्थानीय स्तर पर दमन किया। | शुरुआत से ही कठोर दमन चक्र चलाया गया; एक लाख से अधिक सत्याग्रहियों को जेल में ठूंसा गया। |
| परिणाम | 1922 में चौरी-चौरा की हिंसक घटना के बाद गांधीजी द्वारा एकाएक स्थगित। | गांधी-इरविन समझौते (1931) के बाद पहले स्थगित, दूसरे गोलमेज सम्मेलन की विफलता के बाद पुनः शुरू होकर 1934 में समाप्त हुआ। |
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