बिहार बोर्ड (BSEB) कक्षा 10
राजनीति विज्ञान — अध्याय 5
लोकतंत्र की चुनौतियाँ (Challenges to Democracy)
पाठ का परिचय एवं अवलोकन (Overview & Introduction)
यह अध्याय लोकतांत्रिक व्यवस्था की वास्तविक कार्यप्रणाली, उसके सम्मुख आने वाली प्रमुख बाधाओं और उन्हें दूर करने के उपायों का गहन विश्लेषण करता है। लोकतंत्र विश्व की सर्वोत्तम शासन प्रणाली मानी जाती है क्योंकि यह जनता की संप्रभुता, समानता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर आधारित है। इसके बावजूद, कोई भी लोकतांत्रिक देश समस्याओं से पूरी तरह मुक्त नहीं है।
अध्याय के मुख्य वैचारिक स्तंभ:
- चुनौती की परिभाषा: हर समस्या चुनौती नहीं होती। चुनौती वह गंभीर बाधा है जिसे दूर करने पर व्यवस्था पहले से अधिक मजबूत, पारदर्शी और प्रभावी बनती है।
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विश्व स्तर पर लोकतंत्र की तीन प्रमुख चुनौतियाँ:
- बुनियादी आधार बनाने की चुनौती (Foundational Challenge): जहाँ गैर-लोकतांत्रिक शासन है, वहाँ लोकतांत्रिक संस्थाओं की नींव रखना।
- विस्तार की चुनौती (Challenge of Expansion): समाज के हर वर्ग, क्षेत्र और संस्थागत स्तर (स्थानीय निकाय, महिलाएँ, अल्पसंख्यक) तक लोकतंत्र का प्रसार करना।
- गहन बनाने की चुनौती (Challenge of Deepening): लोकतांत्रिक संस्थाओं और परंपराओं की गुणवत्ता और जन-भागीदारी को सुदृढ़ करना।
- भारतीय लोकतंत्र की आंतरिक चुनौतियाँ: जातिवाद, क्षेत्रवाद, संप्रदायवाद, परिवारवाद, भ्रष्टाचार, आपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों का चुनावी राजनीति में प्रभाव और आर्थिक असमानता।
- सुधार और भविष्य: राजनीतिक सुधार, कानूनी प्रावधान (जैसे सूचना का अधिकार अधिनियम - RTI), चुनाव सुधार और नागरिकों की सक्रिय सहभागिता के माध्यम से लोकतंत्र को समृद्ध बनाना।
1. लोकतंत्र की अवधारणा एवं बुनियादी सिद्धांत
1. अब्राहम लिंकन के अनुसार लोकतंत्र "जनता का, जनता द्वारा और जनता के लिए शासन" है।
2. लोकतंत्र ग्रीक भाषा के दो शब्दों 'डेमोस' (Demos = जनता) और 'क्रेटिया' (Kratia = शासन) से मिलकर बना है।
3. लोकतंत्र शासन का वह रूप है जिसमें शासकों का चुनाव प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जनता करती है।
4. विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान और सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत है।
5. आधुनिक लोकतंत्र का जनक सामान्यतः ब्रिटेन (यूके) को माना जाता है।
6. प्रत्यक्ष लोकतंत्र का सबसे प्रमुख उदाहरण वर्तमान में स्विट्जरलैंड है।
7. भारत, अमेरिका और ब्रिटेन में अप्रत्यक्ष (प्रतिनिधिक) लोकतंत्र लागू है।
8. लोकतांत्रिक व्यवस्था कानून के शासन (Rule of Law) और संविधान की सर्वोच्चता पर टिकी होती है।
9. लोकतंत्र में अंतिम संप्रभु शक्ति जनता में निहित होती है।
10. लोकतंत्र का मुख्य आधार नागरिकों के मौलिक अधिकार और नागरिक स्वतंत्रता है।
2. चुनौतियों का वर्गीकरण एवं वैश्विक संदर्भ
11. राजनीति विज्ञान में चुनौती का तात्पर्य ऐसी बाधा से है जिसे पार करके व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके।
12. दुनिया के लगभग एक-चौथाई हिस्से में अभी भी लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था पूरी तरह स्थापित नहीं है।
13. गैर-लोकतांत्रिक देशों में राजशाही, सैन्य तानाशाही या एकदलीय शासन को हटाकर लोकतांत्रिक ढांचा खड़ा करना 'बुनियादी आधार की चुनौती' कहलाता है।
14. स्थापित लोकतंत्रों में सत्ता के विकेंद्रीकरण और हर तबके तक अधिकार पहुँचाने को 'विस्तार की चुनौती' कहा जाता है।
15. नागरिकों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाना और संस्थाओं की पारदर्शिता को मजबूत करना 'लोकतंत्र को गहरा बनाने की चुनौती' है।
16. नेपाल में वर्ष 2006 में राजशाही के अंत और लोकतंत्र की पुनर्स्थापना के लिए ऐतिहासिक जन-आंदोलन हुआ था।
17. नेपाल में राजा ज्ञानेंद्र ने फरवरी 2005 में चुनी हुई सरकार को बर्खास्त कर पूर्ण सत्ता अपने हाथ में ले ली थी।
18. नेपाल के सफल आंदोलन के बाद गिरिजा प्रसाद कोइराला को अंतरिम सरकार का प्रधानमंत्री चुना गया था।
19. म्यांमार (बर्मा) में लोकतंत्र की स्थापना के लिए लंबा संघर्ष करने वाली प्रमुख नेत्री आंग सान सू ची हैं।
20. आंग सान सू ची को शांति और लोकतंत्र के समर्थन के लिए वर्ष 1991 में नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किया गया था।
21. चिली में 1973 में जनरल ऑगस्टो पिनोशे ने सैन्य तख्तापलट कर लोकतंत्र को समाप्त किया था, जो बाद में 1988 के जनमत संग्रह से पुनः बहाल हुआ।
22. घाना में स्वतंत्रता के बाद लोकतंत्र स्थापित करने में क्वामे नक्रमा ने मुख्य भूमिका निभाई थी।
23. पोलैंड में लेक वालेसा के नेतृत्व में 'सॉलिडेरिटी' (Solidarity) आंदोलन ने कम्युनिस्ट तानाशाही के अंत की राह खोली।
24. बोलिविया में जल आपूर्ति के निजीकरण के खिलाफ हुआ संघर्ष 'बोलिविया का जल युद्ध' कहलाता है।
25. बेल्जियम ने बहुसांस्कृतिक और भाषाई विविधता का सफल समायोजन सत्ता की साझेदारी मॉडल से किया।
26. श्रीलंका में सिंहली और तमिल समुदायों के बीच सत्ता के असमान वितरण के कारण लंबा गृहयुद्ध चला।
27. दक्षिण अफ्रीका में नेल्सन मंडेला के नेतृत्व में 1994 में रंगभेद (Apartheid) नीति का अंत हुआ।
28. अमेरिका में नागरिक अधिकार आंदोलन (Civil Rights Movement) का नेतृत्व मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने किया था।
29. ब्रिटेन में महिलाओं को मताधिकार 1928 में पुरुषों के समान पूर्ण रूप से मिला (प्रारंभिक अधिकार 1918 में मिला था)।
30. संयुक्त राज्य अमेरिका में अश्वेतों को मतदान का वास्तविक अधिकार मतदान अधिकार अधिनियम 1965 के तहत सुरक्षित हुआ।
3. भारतीय लोकतंत्र की प्रमुख चुनौतियाँ: जातिवाद, संप्रदायवाद और क्षेत्रवाद
31. भारतीय लोकतंत्र के सम्मुख जातिवाद सबसे गंभीर सामाजिक-राजनीतिक विकृतियों में से एक है।
32. राजनीति में जातिगत पहचान का अनुचित उपयोग मतदान को योग्यता और विकास के मुद्दों से भटकाता है।
33. जाति आधारित गोलबंदी से चुनावी लाभ प्राप्त करने की प्रवृत्ति राजनीतिक विखंडन को जन्म देती है।
34. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15 के अनुसार धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव प्रतिबंधित है।
35. धर्म को राजनीति का प्रमुख औजार बनाकर नफरत फैलाना संप्रदायवाद (Communalism) कहलाता है।
36. भारत एक पंथनिरपेक्ष (Secular) राज्य है, जिसका कोई आधिकारिक राज्य-धर्म नहीं है।
37. भारतीय संविधान की प्रस्तावना में 'पंथनिरपेक्ष' शब्द 42वें संविधान संशोधन अधिनियम (1976) द्वारा जोड़ा गया।
38. संप्रदायवाद राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता के लिए प्रत्यक्ष खतरा पैदा करता है।
39. अपने विशिष्ट क्षेत्र, भाषा या संस्कृति के प्रति अत्यधिक निष्ठा और शेष राष्ट्र के प्रति उपेक्षा की भावना 'क्षेत्रवाद' कहलाती है।
40. "असम केवल असमियों के लिए" या "मराठी मानुष" जैसी माँगें संकीर्ण क्षेत्रवाद के प्रमुख उदाहरण हैं।
41. क्षेत्रवाद का स्वस्थ रूप संतुलित क्षेत्रीय विकास की माँग है, जबकि इसका उग्र रूप अलगाववाद को बढ़ावा देता है।
42. पूर्वोत्तर भारत और जम्मू-कश्मीर में दशकों तक क्षेत्रवाद और उग्रवाद आंतरिक सुरक्षा एवं लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए चुनौती बने रहे।
43. भारत में राज्यों का पुनर्गठन भाषा के आधार पर करने हेतु 1953 में राज्य पुनर्गठन आयोग गठित किया गया था।
44. भाषाई आधार पर गठित होने वाला भारत का पहला राज्य आंध्र प्रदेश (1953) था।
4. राजनीतिक दल, परिवारवाद और आंतरिक लोकतंत्र
45. राजनीतिक दलों को लोकतंत्र का 'प्राण' (Lifeblood) कहा जाता है।
46. किसी राजनीतिक दल में शीर्ष पद का केवल एक ही परिवार के सदस्यों के लिए आरक्षित रहना 'परिवारवाद' (Dynastic Succession) कहलाता है।
47. परिवारवाद सामान्य और निष्ठावान कार्यकर्ताओं की योग्यता और नेतृत्व क्षमता को कुंद करता है।
48. भारत के अधिकांश राजनीतिक दलों में आंतरिक लोकतंत्र (नियमित आंतरिक चुनाव, खुली बहस) का भारी अभाव पाया जाता है।
49. दल-बदल (Defection) की प्रवृत्ति विधायकों और सांसदों द्वारा व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए निष्ठा बदलने से सरकार की स्थिरता को प्रभावित करती है।
50. भारतीय संसद ने 1985 में 52वें संविधान संशोधन के माध्यम से 'दल-बदल विरोधी कानून' पारित किया।
51. दल-बदल विरोधी कानून को संविधान की 10वीं अनुसूची (Tenth Schedule) में शामिल किया गया है।
52. राजनीतिक दलों के खातों में वित्तीय पारदर्शिता की कमी राजनीतिक भ्रष्टाचार का मुख्य स्रोत बनती है।
53. भारत में राजनीतिक दलों को मान्यता और चुनाव चिह्न प्रदान करने का कार्य भारत का निर्वाचन आयोग करता है।
5. अपराधीकरण और धन-बल (Money & Muscle Power)
54. राजनीति का अपराधीकरण (Criminalization of Politics) लोकतंत्र की निष्पक्षता पर सबसे बड़ा प्रहार है।
55. बाहुबलियों द्वारा मतदाताओं को डराना, बूथ कैप्चरिंग और हिंसा निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को बाधित करते हैं।
56. चुनाव प्रचार में अत्यधिक काले धन का प्रयोग सामान्य और योग्य नागरिकों को चुनाव लड़ने से वंचित करता है।
57. सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार अब प्रत्येक उम्मीदवार को नामांकन भरते समय अपनी संपत्ति, देनदारियों और आपराधिक मामलों का शपथ पत्र (Affidavit) देना अनिवार्य है।
58. एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) भारत में चुनावी सुधारों और उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि की निगरानी करने वाली प्रमुख संस्था है।
59. मतदाताओं को नोट के बदले वोट देने के लिए प्रलोभित करना लोकतांत्रिक मर्यादा के विरुद्ध दंडनीय अपराध है।
60. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of the People Act), 1951 भारत में चुनावों के संचालन और अयोग्यताओं को नियंत्रित करता है।
6. सामाजिक-आर्थिक विषमता और नागरिक सहभागिता
61. भारत में व्यापक गरीबी, निरक्षरता और बेरोजगारी लोकतंत्र के पूर्ण विकास में अवरोधक हैं।
62. आर्थिक असमानता के कारण अमीर और कॉर्पोरेट वर्ग नीति-निर्माण को अपने पक्ष में प्रभावित करने का प्रयास करते हैं।
63. भारत में महिलाओं की संसद और राज्य विधानसभाओं में भागीदारी ऐतिहासिक रूप से काफी कम रही है।
64. 73वें संविधान संशोधन (1992) के माध्यम से पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए न्यूनतम एक-तिहाई (33%) सीटें आरक्षित की गईं।
65. बिहार देश का पहला राज्य है जिसने वर्ष 2006 में पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को 50% आरक्षण दिया।
66. बिहार में नगर निकायों (Municipalities) में भी महिलाओं के लिए 50% आरक्षण की व्यवस्था लागू है।
67. भारत में सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार (Universal Adult Suffrage) की न्यूनतम आयु 18 वर्ष है।
68. 61वें संविधान संशोधन (1988, प्रभावी 1989) द्वारा मतदान की आयु सीमा 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष की गई।
69. नारी शक्ति वंदन अधिनियम (128वाँ संविधान संशोधन विधेयक / 106वाँ संविधान संशोधन अधिनियम) लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण प्रदान करने से संबंधित है।
70. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 324 स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचन आयोग का प्रावधान करता है।
7. पारदर्शिता, सूचना का अधिकार एवं विधिक सुधार
71. भारत में सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI - Right to Information Act) संसद द्वारा 2005 में पारित हुआ।
72. सूचना का अधिकार आंदोलन की शुरुआत राजस्थान में 'मजदूर किसान शक्ति संगठन' (MKSS) के नेतृत्व में अरुणा रॉय द्वारा की गई थी।
73. सूचना का अधिकार नागरिकों को सरकारी कामकाज, दस्तावेजों और निर्णयों की जाँच करने की शक्ति देता है।
74. आरटीआई को लोकतंत्र का 'तीसरा नेत्र' और शासन में पारदर्शिता का मजबूत हथियार माना जाता है।
75. भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था में लालफीताशाही (Red Tapism) और भ्रष्टाचार लोकतंत्र की दक्षता को कम करते हैं।
76. जनहित याचिका (PIL - Public Interest Litigation) की शुरुआत 1980 के दशक में न्यायमूर्ति पी. एन. भगवती और वी. आर. कृष्णा अय्यर द्वारा की गई।
77. पीआईएल के जरिए कोई भी सजग नागरिक या संस्था वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए सीधे अदालत जा सकती है।
78. भारत में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और उच्च पदों पर जाँच हेतु 'लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम' 2013 में पारित हुआ।
79. केंद्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्त की नियुक्ति भ्रष्टाचार निवारण के लिए की जाती है।
80. इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) का उपयोग पूरे भारत के आम चुनावों में सर्वप्रथम वर्ष 2004 में पूर्णतः किया गया।
81. चुनाव प्रणाली में मतदाताओं को सभी प्रत्याशियों को नकारने का विकल्प 'NOTA' (None of the Above) वर्ष 2013 में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से मिला।
82. मतपत्रों की भौतिक पर्ची से मिलान करने के लिए VVPAT (Voter Verifiable Paper Audit Trail) प्रणाली जोड़ी गई।
8. प्रशासनिक सुधार एवं विकेंद्रीकरण
83. सत्ता का विकेंद्रीकरण (Decentralization) लोकतंत्र को जमीनी स्तर तक ले जाने का सर्वोत्तम माध्यम है।
84. बलवंत राय मेहता समिति (1957) की सिफारिशों पर भारत में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था लागू की गई।
85. भारत में त्रिस्तरीय पंचायती राज की तीन कड़ियाँ हैं: ग्राम पंचायत (ग्राम स्तर), पंचायत समिति (प्रखंड स्तर) और जिला परिषद (जिला स्तर)।
86. 2 अक्टूबर 1959 को राजस्थान के नागौर जिले में पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा पंचायती राज का औपचारिक शुभारंभ हुआ था।
87. 74वाँ संविधान संशोधन अधिनियम (1992) शहरी स्थानीय स्वशासन (नगर पालिका, नगर परिषद, नगर निगम) से संबंधित है।
88. स्थानीय स्वशासन से नागरिकों में राजनीतिक जागरूकता और प्रत्यक्ष भागीदारी की क्षमता विकसित होती है।
89. विधि का शासन (Rule of Law) यह तय करता है कि कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है, चाहे वह कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो।
90. स्वतंत्र न्यायपालिका (Independent Judiciary) संविधान और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की संरक्षक होती है।
9. लोकतंत्र का पुनर्गठन, सुधार और मूल्यांकन
91. केवल कानूनी बदलावों से लोकतंत्र को सुधारा नहीं जा सकता; इसके लिए राजनीतिक कार्यकर्ताओं और जनता की नैतिक जागरूकता आवश्यक है।
92. लोकतंत्र एक परिणाम-उन्मुख (Outcome-oriented) और प्रक्रिया-उन्मुख (Procedure-oriented) दोनों प्रकार की व्यवस्था है।
93. लोकतंत्र की परीक्षा कभी समाप्त नहीं होती; एक चुनौती हल होते ही नागरिकों की नई अपेक्षाएँ सामने आती हैं।
94. तानाशाही व्यवस्था त्वरित निर्णय ले सकती है, लेकिन उन निर्णयों में जन-स्वीकार्यता और पारदर्शिता का अभाव होता है।
95. लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विचार-विमर्श और बहस के कारण निर्णय लेने में समय लग सकता है, लेकिन वे निर्णय अधिक स्थायी और जनहितैषी होते हैं।
96. लोकतंत्र विभिन्न सामाजिक विविधताओं, मतभेदों और टकरावों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने का सबसे वैध मंच प्रदान करता है।
97. लोकतंत्र नागरिकों की व्यक्तिगत गरिमा और स्वतंत्रता को बढ़ावा देने में किसी भी अन्य शासन प्रणाली से बेहतर है।
98. लोकतंत्र की कमियों का समाधान किसी अन्य व्यवस्था (जैसे तानाशाही) में नहीं, बल्कि 'और अधिक लोकतंत्र' (More Democracy) में निहित है।
99. एक सजग, शिक्षित और संगठित नागरिक समाज (Civil Society) ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी सुरक्षा-ढाल है।
100. लोकतंत्र की सफलता अंततः नागरिकों की सक्रिय राजनीतिक भागीदारी, निष्पक्ष मतदान और संवैधानिक मूल्यों के प्रति निष्ठा पर निर्भर करती है।
अध्ययन सुझाव: बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से इन सभी 100 बिंदुओं का नियमित पुनरावलोकन करें। यह सामग्री वस्तुनिष्ठ प्रश्नों (MCQs) और अति-लघु उत्तरीय प्रश्नों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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