Chapter 5. बिहार : कृषि एवं वन संसाधन | BSEB 10 Geography Subjective


बिहार बोर्ड कक्षा 10 भूगोल - अध्याय 5: बिहार : कृषि एवं वन संसाधन

बिहार बोर्ड (BSEB) कक्षा 10 भूगोल

खण्ड-क : भारत : संसाधन एवं उपयोग | अध्याय 5: बिहार : कृषि एवं वन संसाधन

भाग 1: 50 एक-पंक्तीय प्रश्नोत्तर (One-Liners / Fact Points)
क्र.सं. प्रश्न उत्तर
1 बिहार की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार क्या है? कृषि।
2 बिहार की कितनी प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि कार्यों पर निर्भर है? लगभग 80%।
3 बिहार के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग कितना प्रतिशत भाग कृषि योग्य है? लगभग 60%।
4 बिहार में किस प्रकार की कृषि प्रणाली प्रचलित है? जीवन-निर्वाह कृषि (Subsistence Agriculture)।
5 बिहार की मुख्य खाद्यान्न फसल कौन-सी है? धान (चावल)।
6 बिहार में धान का सर्वाधिक उत्पादन किस जिले में होता है? रोहतास में।
7 बिहार का कौन-सा जिला 'चावल का कटोरा' कहलाता है? रोहतास।
8 बिहार में गेहूं का सर्वाधिक उत्पादन किस जिले में होता है? रोहतास।
9 बिहार में मक्का उत्पादन में अग्रणी जिला कौन-सा है? खगड़िया (तथा कटिहार, बेगूसराय)।
10 बिहार में गन्ना (ईख) का मुख्य उत्पादक जिला कौन-सा है? पश्चिमी चंपारण।
11 बिहार में लीची का सबसे प्रसिद्ध उत्पादक जिला कौन-सा है? मुजफ्फरपुर (शाही लीची)।
12 बिहार में जर्दालू आम किस जिले का प्रसिद्ध है? भागलपुर।
13 बिहार में कतरनी चावल किस जिले की पहचान है? भागलपुर और बांका।
14 मखाना उत्पादन में भारत का कौन-सा राज्य एकाधिकार (लगभग 85-90%) रखता है? बिहार (मिथिलांचल क्षेत्र)।
15 बिहार में जूट (पटसन) का सर्वाधिक उत्पादन किस जिले में होता है? पूर्णिया (एवं कटिहार, किशनगंज)।
16 बिहार में जूट उद्योग के प्रमुख केंद्र किस प्रमंडल में स्थित हैं? पूर्णिया प्रमंडल।
17 बिहार में तंबाकू उत्पादक प्रमुख क्षेत्र कौन-सा है? गंगा का दियारा क्षेत्र (समस्तीपुर, वैशाली, बेगूसराय)।
18 सोन नहर परियोजना का निर्माण किस वर्ष प्रारंभ हुआ था? 1874 ईस्वी में।
19 बिहार की सबसे प्राचीन नहर प्रणाली कौन-सी है? सोन नहर प्रणाली।
20 सोन नहर से मुख्य रूप से किस जिले में सिंचाई होती है? रोहतास, भोजपुर, बक्सर और औरंगाबाद।
21 गंडक परियोजना किन दो राज्यों/राष्ट्र की संयुक्त परियोजना है? बिहार, उत्तर प्रदेश और नेपाल।
22 गंडक परियोजना के अंतर्गत मुख्य बराज कहाँ बनाया गया है? वाल्मीकिनगर (भैंसालोटन)।
23 कोसी परियोजना का मुख्य उद्देश्य क्या था? बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई और जल-विद्युत उत्पादन।
24 कोसी परियोजना के तहत बराज कहाँ बनाया गया है? भीमनगर (नेपाल सीमा के पास)।
25 बिहार में सिंचाई का सबसे प्रमुख एवं व्यापक साधन क्या है? नलकूप (ट्यूबवेल)।
26 बिहार में नलकूपों द्वारा कितने प्रतिशत क्षेत्र की सिंचाई होती है? लगभग 60% से अधिक।
27 बिहार में नहरों द्वारा सर्वाधिक सिंचित क्षेत्र किस जिले में है? रोहतास।
28 बिहार में कुओं और तालाबों द्वारा सिंचाई मुख्यतः कहाँ की जाती है? दक्षिणी और पूर्वी बिहार के कुछ जिलों में।
29 आहर-पइन सिंचाई प्रणाली का संबंध बिहार के किस भाग से है? दक्षिणी बिहार (गया, नवादा, औरंगाबाद, नालंदा)।
30 बिहार के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल के कितने प्रतिशत भू-भाग पर वन पाए जाते हैं? लगभग 7.84% (लगभग 7%)।
31 राष्ट्रीय वन नीति (1988) के अनुसार मैदानी/सामान्य क्षेत्रों में कितने प्रतिशत वन होने चाहिए? कम से कम 33%।
32 बिहार के किस जिले में सर्वाधिक वन क्षेत्र (क्षेत्रफल की दृष्टि से) पाया जाता है? कैमूर (भभुआ)।
33 प्रतिशत की दृष्टि से बिहार में सर्वाधिक वन आवरण वाला जिला कौन-सा है? कैमूर।
34 बिहार का सबसे न्यूनतम वन क्षेत्र वाला जिला कौन-सा है? शेखपुरा।
35 बिहार के वनों को मुख्य रूप से कितने वर्गों में बाँटा गया है? 2 वर्गों में (आर्द्र पर्णपाती वन और शुष्क पर्णपाती वन)।
36 आर्द्र पर्णपाती वन बिहार के किस भाग में मिलते हैं? उत्तर-पश्चिमी तराई भाग (पश्चिमी चंपारण) और किशनगंज।
37 शुष्क पर्णपाती वन बिहार के किस भाग में विस्तृत हैं? दक्षिणी पहाड़ी एवं मैदानी सीमांत भागों में (कैमूर, गया, मुंगेर, बांका)।
38 बिहार का एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान कौन-सा है? वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान।
39 वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान किस जिले में स्थित है? पश्चिमी चंपारण।
40 वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) मुख्य रूप से किस पशु के संरक्षण हेतु प्रसिद्ध है? बाघ (Tiger)।
41 कांवर झील पक्षी अभयारण्य बिहार के किस जिले में स्थित है? बेगूसराय (मंझौल अनुमंडल)।
42 कांवर झील को किस अंतरराष्ट्रीय समझौते के तहत रामसर स्थल (Ramsar Site) घोषित किया गया है? रामसर अभिसमय।
43 कुशेश्वर स्थान पक्षी अभयारण्य किस जिले में स्थित है? दरभंगा।
44 संजय गांधी जैविक उद्यान (चिड़ियाघर) कहाँ स्थित है? पटना।
45 गौतम बुद्ध पक्षी अभयारण्य कहाँ स्थित है? गया।
46 भीमबांध वन्यजीव अभयारण्य किस जिले में स्थित है? मुंगेर।
47 कैमूर वन्यजीव अभयारण्य कहाँ स्थित है? कैमूर और रोहतास।
48 विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन अभयारण्य किस जिले में स्थित है? भागलपुर।
49 बिहार का राज्य पक्षी कौन-सा है? गौरैया (House Sparrow)।
50 बिहार में रेशम (टसर/सिल्क) का मुख्य उत्पादक जिला कौन-सा है? भागलपुर (सिल्क सिटी)।
भाग 2: लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Questions)

प्रश्न 1. बिहार की कृषि की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख करें।

उत्तर: बिहार की कृषि की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • जीवन-निर्वाह स्वरूप: अधिकांश किसान केवल अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए पारंपरिक खेती करते हैं।
  • खाद्यान्नों की प्रधानता: कुल कृषि क्षेत्र के 80% से अधिक भाग पर खाद्यान्न फसलें (धान, गेहूं, मक्का) उगाई जाती हैं।
  • मानसून पर निर्भरता: उत्तम सिंचाई तंत्र के अभाव में कृषि आज भी मानसूनी वर्षा पर अत्यधिक निर्भर है।
  • छोटी जोतें: भूमि के उप-विभाजन के कारण खेतों का आकार अत्यंत छोटा और बिखरा हुआ है।

प्रश्न 2. बिहार में कृषि की प्रमुख समस्याओं को स्पष्ट करें।

उत्तर:

  • प्राकृतिक आपदाएं: उत्तरी बिहार में प्रतिवर्ष आने वाली भीषण बाढ़ और दक्षिणी बिहार में सूखे की समस्या।
  • खेतों का छोटा आकार: जोतों के विखंडन के कारण आधुनिक कृषि यंत्रों (ट्रैक्टर, हार्वेस्टर) का उपयोग कठिन हो जाता है।
  • पूंजी और ऋण की कमी: अधिकांश किसान निर्धन हैं, जिससे वे उन्नत बीज, उर्वरक और कीटनाशक खरीदने में असमर्थ रहते हैं।
  • सिंचाई सुविधाओं की अपर्याप्तता: बारहमासी सिंचाई व्यवस्था का अभाव तथा बिजली/डीजल की अधिक लागत।

प्रश्न 3. बिहार में चावल (धान) उत्पादन के लिए उपयुक्त भौगोलिक दशाओं का वर्णन करें।

उत्तर:

  • तापमान: बोते समय 20°C से 22°C तथा पकते समय 25°C से 27°C तापमान।
  • वर्षा: 100 सेमी से 200 सेमी तक प्रचुर वर्षा (अथवा सुनिश्चित नहर सिंचाई)।
  • मिट्टी: गंगा के मैदान की गहरी, उपजाऊ चीकायुक्त दोमट अथवा नवीन जलोढ़ मिट्टी (खादर)।
  • श्रम: रोपाई, निराई और कटाई के लिए प्रचुर मात्रा में सस्ता मानवीय श्रम।

प्रश्न 4. सोन नहर प्रणाली पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।

उत्तर: सोन नहर बिहार की सबसे प्राचीन एवं महत्वपूर्ण सिंचाई प्रणाली है, जिसका निर्माण 1874 ईस्वी में डेहरी-ऑन-सोन (रोहतास) के निकट सोन नदी पर बांध बनाकर किया गया था। इसकी दो मुख्य शाखाएं हैं:

  • पूर्वी सोन नहर: यह औरंगाबाद, जहानाबाद, अरवल और गया जिलों के खेतों की सिंचाई करती है।
  • पश्चिमी सोन नहर: यह रोहतास, बक्सर और भोजपुर जिलों में विस्तृत है। इस नहर के कारण ही रोहतास जिला बिहार में खाद्यान्न उत्पादन का सिरमौर बना हुआ है।

प्रश्न 5. बिहार में वन विनाश (ह्रास) के मुख्य कारणों का उल्लेख करें।

उत्तर:

  • विभाजन का प्रभाव: 15 नवंबर 2000 को बिहार से झारखंड के अलग होने पर लगभग 79% समृद्ध खनिज और वन संपदा झारखंड में चली गई, जिससे बिहार में मात्र 7-8% वन बचे।
  • कृषि भूमि का विस्तार: बढ़ती जनसंख्या के भरण-पोषण के लिए वनों को काटकर कृषि योग्य भूमि में बदला गया।
  • अवैध कटाई एवं जलावन: ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू ईंधन और इमारती लकड़ी के लिए पेड़ों की अनियंत्रित कटाई।
  • पशु चारण: खुले पशु चारण के कारण नए पौधे पनपने से पहले ही नष्ट हो जाते हैं।

प्रश्न 6. बिहार में पाए जाने वाले वनों के प्रकार बताइए।

उत्तर: बिहार में मुख्य रूप से दो प्रकार के पर्णपाती (पतझड़) वन पाए जाते हैं:

  • आर्द्र पर्णपाती वन: जहाँ 120 सेमी से अधिक वर्षा होती है (पश्चिमी चंपारण का सोमेश्वर श्रेणी क्षेत्र और किशनगंज)। मुख्य वृक्ष: साल, सेमल, सागवान और बांस।
  • शुष्क पर्णपाती वन: जहाँ 120 सेमी से कम वर्षा होती है (दक्षिणी पहाड़ी सीमांत जिले जैसे कैमूर, रोहतास, गया, मुंगेर)। मुख्य वृक्ष: शीशम, महुआ, पलाश, खैर, आंवला और नीम।

प्रश्न 7. कांवर झील पक्षी अभयारण्य का भौगोलिक महत्व क्या है?

उत्तर: कांवर झील बिहार के बेगूसराय जिले के मंझौल अनुमंडल में स्थित एशिया की सबसे बड़ी मीठे जल की गोखुर झील (Ox-bow Lake) है, जिसका निर्माण गंडक नदी के विसर्पण से हुआ है। यह शीत ऋतु में मध्य एशिया और साइबेरिया से आने वाले हजारों प्रवासी पक्षियों का बसेरा बनती है। इसकी समृद्ध जैव-विविधता के कारण इसे भारत का 39वां और बिहार का पहला 'रामसर स्थल' घोषित किया गया है।

भाग 3: दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Long Answer Questions)

प्रश्न 1. बिहार में कृषि के पिछड़ेपन के प्रमुख कारणों की विवेचना करते हुए इसके सुधार और आधुनिकीकरण के ठोस उपाय सुझाइए।

उत्तर: बिहार एक विशुद्ध कृषि प्रधान राज्य है, फिर भी यहाँ की कृषि राष्ट्रीय औसत की तुलना में पिछड़ी हुई है। इसके कारण और समाधान निम्नलिखित हैं:

1. कृषि के पिछड़ेपन के प्रमुख कारण:
  • बाढ़ और सूखे का दोहरा संकट: उत्तरी बिहार की कोसी, बागमती, गंडक नदियां प्रतिवर्ष लाखों हेक्टेयर फसल जलमग्न कर देती हैं, जबकि दक्षिणी बिहार अल्पवृष्टि के कारण सूखे की मार झेलता है।
  • खेतों का उप-विभाजन एवं अपखंडन (Land Fragmentation): उत्तराधिकार नियमों के कारण जमीन पीढ़ियों में बंटकर इतनी छोटी हो चुकी है कि उस पर वैज्ञानिक खेती या ट्रैक्टर चलाना अलाभकारी हो जाता है।
  • परंपरागत कृषि तकनीक: आज भी अधिकांश किसान उन्नत बीजों (HYV Seeds), आधुनिक कीटनाशकों और संतुलित उर्वरकों के स्थान पर पुरानी पद्धति पर निर्भर हैं।
  • साख (क्रेडिट) एवं भंडारण का अभाव: किसानों को समय पर सस्ता संस्थागत ऋण नहीं मिलता, जिससे वे महाजनों के कर्ज जाल में फंसते हैं। शीतगृहों (Cold Storage) और गोदामों के अभाव में फसल को औने-पौने दाम पर बेचना पड़ता है।
  • जलजमाव (चौर और मन): उत्तरी बिहार में लाखों हेक्टेयर भूमि स्थायी जलजमाव के कारण खेती से वंचित रह जाती है।
2. सुधार एवं आधुनिकीकरण के उपाय:
  • सिंचाई तंत्र का विस्तार एवं नवीनीकरण: सोन, गंडक और कोसी नहरों का पुनरुद्धार तथा किसानों को नलकूपों के लिए मुफ्त/सस्ती कृषि बिजली फीडर उपलब्ध कराना।
  • उन्नत बीजों और तकनीकों का प्रसार: बिहार कृषि विश्वविद्यालय (सबौर) तथा डॉ० राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (पूसा) द्वारा विकसित बाढ़-रोधी और सूखा-रोधी बीजों को ग्राम स्तर तक वितरित करना।
  • फसल विविवीकरण (Crop Diversification): केवल पारंपरिक धान-गेहूं के बदले नकदी फसलों (मखाना, मशरूम, सुगंधित चावल, जूट, स्ट्रॉबेरी, औषधीय पौधे) को बढ़ावा देना।
  • कृषि रोड मैप का प्रभावी क्रियान्वयन: राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे 'कृषि रोड मैप' के तहत जैविक खेती, ड्रिप इरिगेशन, भंडारण व्यवस्था और एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टर विकसित करना।
  • समेकित जल प्रबंधन: 'हर खेत तक सिंचाई का पानी' योजना के तहत आहर-पइन का जीर्णोद्धार और चौर क्षेत्रों में मत्स्य पालन सह कृषि मॉडल लागू करना।

प्रश्न 2. बिहार में वन एवं वन्यजीव संपदा के वर्तमान वितरण का विश्लेषण कीजिए तथा इनके संरक्षण हेतु सरकार एवं समाज द्वारा किए जा रहे प्रयासों का मूल्यांकन कीजिए।

उत्तर: 15 नवंबर 2000 को बिहार के पुनर्गठन के पश्चात अधिकांश सघन वन क्षेत्र झारखंड राज्य के हिस्से में चले गए। वर्तमान में बिहार के कुल 94,163 वर्ग किलोमीटर भौगोलिक क्षेत्रफल में से मात्र लगभग 7,381 वर्ग किमी (लगभग 7.84%) पर ही वनों का विस्तार है, जो राष्ट्रीय औसत और पर्यावरण संतुलन मानक (33%) से काफी कम है।

1. वनों का भौगोलिक वितरण:
  • उत्तर-पश्चिमी तराई क्षेत्र (पश्चिमी चंपारण): यह बिहार का सर्वाधिक सघन वन क्षेत्र है। सोमेश्वर और दून पहाड़ियों पर आर्द्र पर्णपाती वन पाए जाते हैं। यहाँ साल, खैर, सेमल, जामुन और बेंत के सघन जंगल हैं।
  • दक्षिणी सीमांत पहाड़ी क्षेत्र (कैमूर, रोहतास, गया, नवादा, जमुई, बांका, मुंगेर): यहाँ शुष्क पर्णपाती वन और कंटीली झाड़ियां पाई जाती हैं। कैमूर जिले में बिहार का सबसे बड़ा वन क्षेत्र विस्तृत है। यहाँ महुआ, पलाश, केंदू पत्ता, आंवला, बबूल और हर्रे-बहेड़ा के वृक्ष प्रमुख हैं।
  • मैदानी क्षेत्र: मध्य गंगा का मैदानी भाग अत्यंत सघन आबादी और गहन कृषि के कारण लगभग वन-विहीन है; यहाँ केवल सड़कों, नहरों के किनारे और निजी बगीचों में ही वृक्ष पाए जाते हैं।
2. वन्यजीव संसाधन एवं प्रमुख संरक्षित क्षेत्र:
  • वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान एवं टाइगर रिजर्व (पश्चिमी चंपारण): यह बिहार का एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान और बाघ अभयारण्य है, जो रॉयल बंगाल टाइगर, तेंदुआ, चीतल, सांभर और भारतीय गौर का घर है।
  • विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन अभयारण्य (भागलपुर): सुल्तानगंज से कहलगांव तक गंगा नदी में 60 किमी के क्षेत्र में विस्तृत यह भारत का एकमात्र नदीय डॉल्फिन संरक्षित क्षेत्र है, जो राष्ट्रीय जलीय जीव 'गंगा डॉल्फिन' (सोंस) की रक्षा करता है।
  • पक्षी अभयारण्य: बेगूसराय का 'कांवर झील पक्षी अभयारण्य' (रामसर स्थल), दरभंगा का 'कुशेश्वर स्थान' तथा जमुई के 'नागी-नकटी पक्षी अभयारण्य' देश-विदेश के प्रवासी पक्षियों के लिए प्रसिद्ध हैं।
3. संरक्षण हेतु सरकारी एवं सामाजिक प्रयास:
  • जल-जीवन-हरियाली अभियान: पर्यावरण संतुलन और भूजल संवर्धन हेतु राज्य स्तर पर शुरू किया गया महा-अभियान, जिसके तहत करोड़ों पौधे रोपे गए हैं और पोखर-तालाबों का जीर्णोद्धार किया गया है।
  • सामाजिक वानिकी एवं कृषि वानिकी (Agro-Forestry): सड़कों, रेलवे ट्रैकों और नहरों के किनारे पौधारोपण तथा किसानों को अपनी मेड़ों पर शीशम, महोगनी और पॉपुलर लगाने के लिए सब्सिडी देना।
  • वन्यजीव संरक्षण अधिनियम का कड़ाई से पालन: शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध, वन अपराधों के लिए कड़े दंड तथा वन रक्षकों की आधुनिक हथियारों और वाहनों से तैनाती।
  • नागी-नकटी पक्षी महोत्सव ('कलरव'): आम जनता और छात्रों में वन्यजीवों व पक्षियों के प्रति चेतना जाग्रत करने के लिए राज्य स्तरीय पक्षी उत्सवों का आयोजन।
निष्कर्ष:

सीमित वन क्षेत्र के बावजूद बिहार में जैव-विविधता का अनोखा स्वरूप है। कृषि-वानिकी और जन-भागीदारी को जोड़कर ही राज्य के हरित आवरण को 15-17% तक पहुँचाया जा सकता है, जिससे पर्यावरण और आजीविका दोनों सुरक्षित हो सकेंगी।

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