BSEB Class 10 Civics Chapter 3 Solutions in Hindi
लोकतंत्र में प्रतिस्पर्धा एवं संघर्ष: बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) मैट्रिक बोर्ड परीक्षा के नवीनतम पाठ्यक्रम पर आधारित सामाजिक विज्ञान (लोकतांत्रिक राजनीति-II) के अध्याय 3 के सभी अभ्यास प्रश्नों के संपूर्ण व प्रामाणिक हल।
I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Questions)
1. वर्ष 1975 भारतीय राजनीति में किस लिए जाना जाता है?
(क) इस वर्ष आम चुनाव हुए थे
(ख) श्रीमती इंदिरा गाँधी प्रधानमंत्री बनी थीं
(ग) देश के अंदर आपातकाल लागू हुआ था
(घ) जनता पार्टी की सरकार बनी थी
उत्तर: (ग) देश के अंदर आपातकाल लागू हुआ था
2. भारतीय लोकतंत्र में सत्ता के विरुद्ध जन आक्रोश किस दशक से प्रारंभ हुआ?
(क) 1960 के दशक से
(ख) 1970 के दशक से
(ग) 1980 के दशक से
(घ) 1990 के दशक से
उत्तर: (ख) 1970 के दशक से
3. बिहार में संपूर्ण क्रांति का नेतृत्व निम्नलिखित में से किसने किया?
(क) मोरारजी देसाई
(ख) नीतीश कुमार
(ग) इंदिरा गाँधी
(घ) जयप्रकाश नारायण
उत्तर: (घ) जयप्रकाश नारायण
4. भारत में हुए 1977 में आम चुनाव में किस पार्टी को बहुमत मिला था?
(क) काँग्रेस पार्टी को
(ख) जनता पार्टी को
(ग) कम्युनिस्ट पार्टी
(घ) किसी पार्टी को भी नहीं
उत्तर: (ख) जनता पार्टी को
5. 'चिपको आन्दोलन' निम्नलिखित में से किससे संबंधित नहीं है?
(क) अंगू के पेड़ काटने की अनुमति से
(ख) आर्थिक शोषण से मुक्ति से
(ग) शराबखोरी के विरुद्ध आवाज से
(घ) काँग्रेस पार्टी के विरोध से
उत्तर: (घ) काँग्रेस पार्टी के विरोध से
6. 'दलित पैंथर्स' के कार्यक्रम निम्नलिखित में से कौन संबंधित नहीं है?
(क) जाति प्रथा का उन्मूलन
(ख) दलित सेना का गठन
(ग) भूमिहीन गरीब किसान की उन्नति
(घ) औद्योगिक मजदूरों का शोषण से मुक्ति
उत्तर: (ख) दलित सेना का गठन
7. निम्नलिखित में से कौन 'भारतीय किसान यूनियन' के प्रमुख नेता थे?
(क) मोरारजी देसाई
(ख) जयप्रकाश नारायण
(ग) महेंद्र सिंह टिकैत
(घ) चौधरी चरण सिंह
उत्तर: (ग) महेंद्र सिंह टिकैत
8. 'ताड़ी विरोधी आंदोलन' निम्नलिखित में से किस प्रांत में शुरू किया गया?
(क) बिहार
(ख) उत्तर प्रदेश
(ग) आंध्र प्रदेश
(घ) तमिलनाडु
उत्तर: (ग) आंध्र प्रदेश
9. 'नर्मदा घाटी परियोजना' किन राज्यों से संबंधित है?
(क) बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश
(ख) तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक
(ग) पं० बंगाल, उत्तर प्रदेश, पंजाब
(घ) गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश
उत्तर: (घ) गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश
10. 'सूचना के अधिकार आंदोलन' की शुरुआत कहाँ से हुई?
(क) राजस्थान
(ख) दिल्ली
(ग) तमिलनाडु
(घ) बिहार
उत्तर: (क) राजस्थान
11. 'सूचना के अधिकार' संबंधी कानून कब बना?
(क) 2004 में
(ख) 2005 में
(ग) 2006 में
(घ) 2007 में
उत्तर: (ख) 2005 में
12. नेपाल में सप्तदलीय गठबंधन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
(क) राजा को देश छोड़ने पर मजबूर करना
(ख) लोकतंत्र की स्थापना करना
(ग) भारत-नेपाल के बीच संबंधों को और बेहतर बनाना
(घ) सर्वदलीय सरकार की स्थापना करना
उत्तर: (ख) लोकतंत्र की स्थापना करना
13. बोलिविया में जनसंघर्ष का मुख्य कारण था—
(क) पानी की कीमत में वृद्धि
(ख) खाद्यान्न की कीमत में वृद्धि
(ग) पेट्रोल की कीमत में वृद्धि
(घ) जीवन रक्षक दवाओं की कीमत में वृद्धि
उत्तर: (क) पानी की कीमत में वृद्धि
14. श्रीलंका कब आजाद हुआ?
(क) 1947 में
(ख) 1948 में
(ग) 1949 में
(घ) 1950 में
उत्तर: (ख) 1948 में
15. राजनीतिक दल का आशय है—
(क) अफसरों के समूह से
(ख) सेनाओं के समूह से
(ग) व्यक्तियों के समूह से
(घ) किसानों के समूह से
उत्तर: (ग) व्यक्तियों के समूह से
16. निम्नलिखित में से कौन-सा प्रमुख उद्देश्य प्रायः सभी राजनीतिक दलों का होता है?
(क) सत्ता प्राप्त करना
(ख) सरकारी पदों को प्राप्त करना
(ग) चुनाव लड़ना
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (क) सत्ता प्राप्त करना
17. राजनीतिक दलों की नींव सर्वप्रथम किस देश में पड़ी?
(क) ब्रिटेन में
(ख) भारत में
(ग) फ्रांस में
(घ) संयुक्त राज्य अमेरिका में
उत्तर: (क) ब्रिटेन में
18. निम्नलिखित में से किसे लोकतंत्र का प्राण माना जाता है?
(क) सरकार को
(ख) न्यायपालिका को
(ग) संविधान को
(घ) राजनीतिक दल को
उत्तर: (घ) राजनीतिक दल को
19. निम्नलिखित में से कौन-सा कार्य राजनीतिक दल नहीं करता है?
(क) चुनाव लड़ना
(ख) सरकार की आलोचना करना
(ग) प्राकृतिक आपदा में राहत से
(घ) अफसरों की बहाली संबंधित कार्य
उत्तर: (घ) अफसरों की बहाली संबंधित कार्य
20. निम्नलिखित में से कौन-सा विचार लोकतंत्र में राजनीतिक दलों से मेल नहीं खाता है?
(क) राजनीतिक दल लोगों की भावनाओं एवं विचारों को जोड़कर सरकार के सामने रखता है।
(ख) राजनीतिक दल देश में एकता और अखंडता स्थापित करने का साधन है।
(ग) देश के विकास के लिए सरकारी नीतियों में राजनीतिक दल बाधा उत्पन्न करता है।
(घ) राजनीति दल विभिन्न वर्गों, जातियों, धर्मों की समस्याएँ सरकार तक पहुँचाता है।
उत्तर: (ग) देश के विकास के लिए सरकारी नीतियों में राजनीतिक दल बाधा उत्पन्न करता है।
21. किस देश में बहुदलीय व्यवस्था नहीं है?
(क) पाकिस्तान
(ख) भारत
(ग) बांग्लादेश
(घ) ब्रिटेन
उत्तर: (घ) ब्रिटेन (ब्रिटेन में मुख्य रूप से द्विदलीय व्यवस्था है)
22. गठबंधन की सरकार बनाने की संभावना किस प्रकार की दलीय व्यवस्था में रहती है?
(क) एकदलीय व्यवस्था
(ख) द्विदलीय व्यवस्था
(ग) बहुदलीय व्यवस्था
(घ) उपर्युक्त में से किसी में भी नहीं
उत्तर: (ग) बहुदलीय व्यवस्था
23. किसी भी देश में राजनीतिक स्थायित्व के लिए निम्नलिखित में से क्या नहीं आवश्यक है?
(क) सभी दलों द्वारा सरकार को रचनात्मक सहयोग देना
(ख) किसी भी ढंग से सरकार को अपदस्थ करना
(ग) निर्णय प्रक्रिया में सरकार द्वारा सबकी सहमति लेना
(घ) सरकार द्वारा विरोधी दलों को नजरबंद करना
उत्तर: (ख) किसी भी ढंग से सरकार को अपदस्थ करना
(तथा विकल्प घ भी अलोकतांत्रिक है; पाठ्यपुस्तक के अनुसार प्राथमिक कुकृत्य 'ख' है)
24. निम्नलिखित में से कौन-सी चुनौती राजनीतिक दलों की नहीं है?
(क) राजनीतिक दलों के भीतर समय पर सांगठनिक चुनाव नहीं होना
(ख) राजनीतिक दलों में युवाओं और महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिलना
(ग) राजनीतिक दलों द्वारा जनता की समस्याओं को सरकार के पास रखना
(घ) विपरीत सिद्धांत रखनेवाले राजनीतिक दलों से गठबंधन करना
उत्तर: (ग) राजनीतिक दलों द्वारा जनता की समस्याओं को सरकार के पास रखना (यह चुनौती नहीं, बल्कि दल का मौलिक कार्य है)
25. दल-बदल कानून निम्नलिखित में से किस पर लागू होता है?
(क) सांसदों एवं विधायकों पर
(ख) राष्ट्रपति पर
(ग) उपराष्ट्रपति पर
(घ) उपर्युक्त में से सभी पर
उत्तर: (क) सांसदों एवं विधायकों पर
26. राजनीतिक दलों की मान्यता और उसका चिह्न किसके द्वारा प्रदान किया जाता है?
(क) राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा
(ख) प्रधानमंत्री सचिवालय द्वारा
(ग) निर्वाचन आयोग द्वारा
(घ) संसद द्वारा
उत्तर: (ग) निर्वाचन आयोग द्वारा
27. निम्नलिखित में से कौन राष्ट्रीय दल नहीं है?
(क) राष्ट्रीय जनता दल
(ख) बहुजन समाज पार्टी
(ग) लोक जनशक्ति पार्टी
(घ) भारतीय जनता पार्टी
उत्तर: (क) राष्ट्रीय जनता दल
(तथा 'ग' लोजपा भी क्षेत्रीय दल है; प्रश्न में प्राथमिक क्षेत्रीय दल के रूप में राजद/लोजपा दोनों राज्यस्तरीय दल हैं, विकल्प अनुसार राजद/लोजपा राज्यस्तरीय दल हैं)
28. जनता दल (यूनाइटेड) पार्टी का गठन कब हुआ?
(क) 1992 में
(ख) 1999 में
(ग) 2000 में
(घ) 2004 में
उत्तर: (ख) 1999 में (शरद यादव गुट और समता पार्टी के विलय की प्रक्रिया 1999 में शुरू हुई थी)
II. मिलान करें (Match the following)
(i) सही मिलान (राजनीतिक दल एवं चुनाव चिह्न):
| राजनीतिक दल | चुनाव चिह्न |
|---|---|
| समाजवादी पार्टी | साइकिल |
| राजद (RJD) | लालटेन |
| लोजपा (LJP) | बंगला |
| जेडीयू (JDU) | तीर |
(ii) सही मिलान (दल एवं उनकी स्थिति / गठबंधन):
| दल / पार्टी | गठबंधन / दल की श्रेणी |
|---|---|
| काँग्रेस पार्टी | यू० पी० ए० (UPA) |
| भारतीय जनता पार्टी | एनडीए (NDA) |
| कम्युनिस्ट पार्टी | राष्ट्रीय पार्टी (पाठ्यपुस्तक मिसप्रिंट 'क्षेत्रीय पार्टी' को 'राष्ट्रीय दल' पढ़ें) |
| झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) | क्षेत्रीय दल |
लघु उत्तरीय प्रश्न (Short-Answer Questions)
1. बिहार में हुए 'छात्र आंदोलन' के प्रमुख कारण क्या थे?
उत्तर: वर्ष 1974 में बिहार में छात्रों द्वारा शुरू किए गए ऐतिहासिक आंदोलन के प्रमुख कारण थे:
- आवश्यक उपभोग्य वस्तुओं की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि (महंगाई)।
- राज्य में बड़े पैमाने पर फैली बेरोजगारी और भुखमरी।
- सरकारी कामकाज में व्याप्त भ्रष्टाचार और कालाबाजारी।
- शिक्षण संस्थानों में व्याप्त अव्यवस्था और छात्रों की अनसुनी मांगें।
2. 'चिपको आंदोलन' का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर: चिपको आंदोलन 1970 के दशक की शुरुआत में उत्तराखंड (तत्कालीन उत्तर प्रदेश) के गढ़वाल क्षेत्र में सुंदरलाल बहुगुणा और चंडी प्रसाद भट्ट के नेतृत्व में शुरू हुआ था। इसके मुख्य उद्देश्य थे:
- अंगू और अन्य वनीय वृक्षों की व्यावसायिक अंधाधुंध कटाई पर रोक लगाना।
- स्थानीय जल, जंगल और जमीन पर स्थानीय ग्रामीणों का पारंपरिक नियंत्रण बहाल करना।
- पर्वतीय पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करना तथा वनों पर आधारित स्थानीय लघु उद्योगों को बढ़ावा देना।
3. स्वतंत्र राजनीतिक संगठन कौन होता है?
उत्तर: स्वतंत्र राजनीतिक संगठन वह गैर-दलीय संगठन या दबाव समूह होता है जो किसी स्थापित राजनीतिक पार्टी के नियंत्रण में नहीं होता। यह समाज के किसी विशिष्ट वर्ग (जैसे किसान, मजदूर, छात्र या पर्यावरणविद्) के हितों की रक्षा के लिए स्वतंत्र रूप से आंदोलन, प्रदर्शन और जनमत तैयार कर सरकार की नीतियों को प्रभावित करता है।
4. भारतीय किसान यूनियन की मुख्य माँगें क्या थीं?
उत्तर: महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में सक्रिय भारतीय किसान यूनियन (BKU) की प्रमुख मांगें थीं:
- गन्ना और गेहूं की सरकारी खरीद मूल्य में यथोचित वृद्धि की जाए।
- किसानों के कृषि ऋण और बिजली के बकाया बिल माफ किए जाएं।
- कृषि कार्य हेतु रियायती दरों पर निर्बाध 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराई जाए।
- किसानों के लिए पेंशन योजना लागू की जाए तथा कृषि उपजों के अंतर्राज्यीय आवागमन पर लगे प्रतिबंध हटाए जाएं।
5. सूचना के अधिकार आंदोलन के मुख्य उद्देश्य क्या थे?
उत्तर: राजस्थान के देवडूंगरी क्षेत्र से 'मजदूर किसान शक्ति संगठन' (MKSS) द्वारा शुरू किए गए इस आंदोलन के मुख्य उद्देश्य थे:
- सरकारी विकास योजनाओं और राहत कार्यों में खर्च किए गए पैसे के मस्टर रोल और बिल-वाउचर सार्वजनिक करना।
- प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता लाना और भ्रष्टाचार को उजागर करना।
- सरकारी फैसलों और नीतियों तक आम जनता की सीधी पहुँच सुनिश्चित कर लोकतंत्र को वास्तविक अर्थों में सहभागी बनाना।
6. राजनीतिक दल की परिभाषा दें।
उत्तर: समान राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक विचारों वाले व्यक्तियों का ऐसा संगठित समूह जो संवैधानिक साधनों (चुनाव) के माध्यम से शासन की बागडोर संभालने और अपनी नीतियों द्वारा राष्ट्रीय हितों को पूरा करने का प्रयास करता है, राजनीतिक दल कहलाता है। गिलक्राइस्ट के अनुसार, "राजनीतिक दल नागरिकों का एक ऐसा संगठित समूह है जो एक जैसी राजनीतिक धारणाएं रखते हैं और एक राजनीतिक इकाई के रूप में काम करते हैं।"
7. किस आधार पर आप कह सकते हैं कि राजनीतिक दल जनता एवं सरकार के बीच कड़ी का काम करता है?
उत्तर: राजनीतिक दल जनता और शासन के बीच सेतु का कार्य निम्नलिखित आधारों पर करते हैं:
- वे जनता की बुनियादी समस्याओं, जरूरतों, मांगों और शिकायतों को एकत्र कर संसद, विधानसभा और प्रशासनिक मंचों पर उठाते हैं।
- सरकार द्वारा बनाए गए कानूनों, योजनाओं और नीतियों को आम जनता तक पहुँचाकर उन्हें उनके लाभों से अवगत कराते हैं।
- इस प्रकार, वे न केवल जनमत का निर्माण करते हैं बल्कि जनता की आवाज को शासन की नीति में बदलवाते हैं।
8. दल-बदल कानून क्या है?
उत्तर: जनप्रतिनिधियों (सांसदों और विधायकों) द्वारा चुनाव जीतने के बाद व्यक्तिगत स्वार्थ या मंत्री पद के लोभ में अपनी मूल पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में शामिल होने की प्रवृत्ति को रोकने के लिए 1985 में 52वें संविधान संशोधन द्वारा बनाया गया कानून 'दल-बदल कानून' कहलाता है। इसके तहत यदि कोई निर्वाचित सदस्य स्वेच्छा से अपनी पार्टी छोड़ता है या पार्टी व्हिप का उल्लंघन करता है, तो उसकी सदन की सदस्यता समाप्त कर दी जाती है।
9. राष्ट्रीय राजनीतिक दल किसे कहते हैं?
उत्तर: ऐसा राजनीतिक दल जिसका कार्यक्षेत्र और प्रभाव संपूर्ण देश में विस्तृत होता है और जो चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित राष्ट्रीय दल की अर्हताओं को पूरा करता है, राष्ट्रीय दल कहलाता है। भारत में किसी दल को राष्ट्रीय दल की मान्यता तब मिलती है जब वह लोकसभा या 4 राज्यों के विधानसभा चुनावों में कम से कम 6% वैध मत प्राप्त करे और कम से कम 4 लोकसभा सीटें जीते, अथवा कम से कम 3 अलग-अलग राज्यों से लोकसभा की कुल सीटों का 2% प्राप्त करे।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long-Answer Questions)
1. "जनसंघर्ष से भी लोकतंत्र मजबूत होता है।" क्या आप इस कथन से सहमत हैं? अपने पक्ष में उत्तर दें।
उत्तर:
हाँ, हम इस कथन से पूर्णतः सहमत हैं कि जनसंघर्ष लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाता है। इसके मुख्य तर्क निम्नलिखित हैं:
हाँ, हम इस कथन से पूर्णतः सहमत हैं कि जनसंघर्ष लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाता है। इसके मुख्य तर्क निम्नलिखित हैं:
- लोकतंत्र का विकास जनसंघर्षों से ही संभव है: ऐतिहासिक रूप से लोकतंत्र का जन्म और विस्तार राजशाही या तानाशाही के विरुद्ध जनसंघर्षों के बल पर ही हुआ है। नेपाल में राजशाही का अंत और लोकतंत्र की पुनर्स्थापना इसका सशक्त उदाहरण है।
- सत्ता की निरंकुशता पर नियंत्रण: जब चुनी हुई सरकारें जनता की आकांक्षाओं को भूलकर मनमाने और दमनकारी फैसले लेने लगती हैं, तब जनआंदोलन ही सरकार को अपनी सीमा में रहने और संविधान का पालन करने के लिए बाध्य करते हैं।
- वंचित वर्गों का सशक्तिकरण: दलित पैंथर्स, चिपको आंदोलन और नर्मदा बचाओ आंदोलन जैसे जनसंघर्षों ने समाज के कमजोर और हाशिए पर खड़े लोगों को संगठित होकर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने की ताकत दी है।
- नीतियों में सुधार और पारदर्शिता: बोलिविया में पानी के निजीकरण के खिलाफ हुआ जनसंघर्ष या भारत में सूचना का अधिकार (RTI) आंदोलन जनसंघर्ष की ही देन हैं, जिन्होंने आम जनता के हित में सरकारी नीतियों को बदलने पर विवश किया।
2. किस आधार पर आप कह सकते हैं कि बिहार से शुरू हुआ 'छात्र आंदोलन' का स्वरूप राष्ट्रीय हो गया?
उत्तर:
मार्च 1974 में बिहार के छात्रों द्वारा महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के विरोध में शुरू किया गया आंदोलन निम्नलिखित कारणों से राष्ट्रीय स्वरूप में बदल गया:
मार्च 1974 में बिहार के छात्रों द्वारा महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के विरोध में शुरू किया गया आंदोलन निम्नलिखित कारणों से राष्ट्रीय स्वरूप में बदल गया:
- जयप्रकाश नारायण का ऐतिहासिक नेतृत्व: छात्रों के आग्रह पर लोकनायक जयप्रकाश नारायण (JP) ने इस आंदोलन का नेतृत्व संभाला। उन्होंने आंदोलन को अहिंसक रखने की शर्त रखी और स्पष्ट किया कि यह केवल बिहार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे देश में फैलेगा।
- 'संपूर्ण क्रांति' का आह्वान: जेपी ने पटना के गांधी मैदान से "संपूर्ण क्रांति" का नारा दिया, जिसका लक्ष्य केवल सरकार बदलना नहीं बल्कि समाज, राजनीति, शिक्षा और अर्थव्यवस्था में आमूलचूल क्रांतिकारी परिवर्तन लाना था।
- विपक्षी दलों की राष्ट्रीय एकजुटता: देश के अधिकांश गैर-कांग्रेसी दलों (जनसंघ, सोशलिस्ट पार्टी, संगठन कांग्रेस, भारतीय लोकदल आदि) ने इस आंदोलन को समर्थन दिया और जेपी के नेतृत्व में एकजुट होकर कांग्रेस के विकल्प के रूप में सामने आए।
- 1975 का आपातकाल और 1977 का चुनाव: इस आंदोलन के दबाव के कारण केंद्र की इंदिरा गांधी सरकार ने जून 1975 में आंतरिक आपातकाल की घोषणा कर दी। आपातकाल समाप्त होने के बाद 1977 के लोकसभा चुनाव में सभी विपक्षी दलों ने मिलकर 'जनता पार्टी' बनाई और केंद्र से कांग्रेस का एकाधिकार समाप्त कर पहली बार गैर-कांग्रेसी सरकार बनाई। इस प्रकार, बिहार से शुरू हुआ छात्र आंदोलन देश की राष्ट्रीय राजनीति की दिशा बदलने वाला ऐतिहासिक आंदोलन बन गया।
3. निम्नलिखित वक्तव्यों को पढ़ें और अपने पक्ष में उत्तर दें—
- (क) क्षेत्रीय भावना लोकतंत्र को मजबूत करती है।
उत्तर: यह वक्तव्य आंशिक रूप से सही है। जब क्षेत्रीय भावना अपने क्षेत्र की उपेक्षा, पिछड़ेपन और विकास के लिए आवाज उठाती है, तो यह लोकतंत्र को समावेशी बनाती है और संघीय ढांचे को सशक्त करती है। परंतु जब क्षेत्रीय भावना संकीर्ण होकर दूसरे राज्यों के नागरिकों से भेदभाव करने लगे या देश की एकता-अखंडता को चुनौती देकर अलगाववाद को बढ़ावा देने लगे, तो यह लोकतंत्र के लिए अत्यंत घातक सिद्ध होती है। - (ख) दबाव समूह स्वार्थी तत्वों का समूह है। इसीलिए इसे समाप्त कर देना चाहिए।
उत्तर: यह कथन पूरी तरह अनुचित है। दबाव समूह केवल स्वार्थी तत्व नहीं हैं, बल्कि वे समाज के विविध वर्गों (मजदूर, किसान, शिक्षक, व्यापारी) की जायज मांगों को सरकार तक पहुँचाने वाले माध्यम हैं। लोकतंत्र में सभी नागरिक सीधे सरकार तक नहीं पहुँच सकते; दबाव समूह सरकार को किसी एक वर्ग के दबाव में जनविरोधी निर्णय लेने से रोकते हैं और सत्ता का संतुलन बनाए रखते हैं। - (ग) जनसंघर्ष लोकतंत्र का विरोधी है।
उत्तर: यह कथन सर्वथा गलत है। जनसंघर्ष लोकतंत्र का विरोधी नहीं, बल्कि उसका प्राणतत्व है। जब संसद या विधायिका में जनता की समस्याओं की उपेक्षा होती है, तब शांतिपूर्ण जनसंघर्ष, धरने और प्रदर्शन ही सरकार को जनहितैषी कदम उठाने पर विवश करते हैं। लोकतंत्र में जनसहमति और जनविरोध दोनों को समान महत्व प्राप्त है। - (घ) भारत में लोकतंत्र के लिए हुए आंदोलनों में महिलाओं की भूमिका नगण्य है।
उत्तर: यह कथन ऐतिहासिक तथ्यों के विपरीत और असत्य है। स्वतंत्रता संग्राम से लेकर स्वतंत्र भारत के सभी आंदोलनों में महिलाओं की भागीदारी अग्रणी रही है। उत्तराखंड के 'चिपको आंदोलन' में महिलाओं ने पेड़ों से चिपककर उनकी रक्षा की; आंध्र प्रदेश का 'ताड़ी विरोधी आंदोलन' पूर्णतः ग्रामीण महिलाओं की एकजुटता का परिणाम था। आज भी पर्यावरण, जल संरक्षण और शराबबंदी जैसे आंदोलनों में महिलाएं सबसे आगे हैं।
4. राजनीतिक दल को 'लोकतंत्र का प्राण' क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
राजनीतिक दलों को लोकतंत्र का हृदय और प्राण माना जाता है क्योंकि उनके बिना लोकतांत्रिक प्रणाली का संचालन असंभव है। इसके प्रमुख कारण हैं:
राजनीतिक दलों को लोकतंत्र का हृदय और प्राण माना जाता है क्योंकि उनके बिना लोकतांत्रिक प्रणाली का संचालन असंभव है। इसके प्रमुख कारण हैं:
- जनमत का निर्माण: राजनीतिक दल देश की ज्वलंत समस्याओं पर सार्वजनिक बहस आयोजित करते हैं, सभाएं करते हैं और मीडिया के माध्यम से जनता को जागरूक कर जनमत तैयार करते हैं।
- चुनावों का संचालन: लोकतांत्रिक व्यवस्था में बिना दलों के निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं है। राजनीतिक दल अपने प्रत्याशी खड़े करते हैं, घोषणापत्र जारी करते हैं और मतदाताओं को विकल्प प्रदान करते हैं।
- सरकार का गठन और संचालन: चुनाव में बहुमत प्राप्त करने वाला दल सरकार बनाता है और नीतियों का निर्माण करता है, जिससे देश में राजनीतिक स्थिरता बनी रहती है।
- सजग विपक्ष की भूमिका: जो दल चुनाव हार जाते हैं, वे विपक्ष में बैठकर सरकार की मनमानी, गलत नीतियों और भ्रष्टाचार पर निरंतर अंकुश लगाते हैं।
- जनता और सरकार के मध्य सेतु: राजनीतिक दल आम नागरिकों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुँचाते हैं और सरकारी योजनाओं का लाभ जनता तक ले जाते हैं।
5. राजनीतिक दल राष्ट्रीय विकास में किस प्रकार योगदान करते हैं?
उत्तर:
राजनीतिक दल देश के समग्र विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं:
राजनीतिक दल देश के समग्र विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं:
- दूरगामी विकास नीतियों का निर्माण: सत्ता में आने के बाद राजनीतिक दल कृषि, उद्योग, विज्ञान, रक्षा, तकनीकी और बुनियादी ढांचे (सड़क, बिजली, पानी) के विकास के लिए पंचवर्षीय और दीर्घकालिक योजनाएं बनाते हैं।
- सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता: भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में राजनीतिक दल विभिन्न जातियों, धर्मों और भाषाओं के लोगों को एक साझा राजनीतिक मंच पर लाते हैं, जिससे राष्ट्रीय अखंडता सुदृढ़ होती है।
- गरीबी उन्मूलन और कल्याणकारी योजनाएं: राजनीतिक दल समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के उत्थान के लिए निःशुल्क शिक्षा, स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और मनरेगा जैसी रोजगार योजनाएं लागू करते हैं।
- संकट के समय जनसेवा: बाढ़, सूखा, भूकंप या महामारी जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राजनीतिक दल राहत सामग्री वितरण और सेवा कार्यों में सक्रिय योगदान देते हैं।
6. राजनीतिक दलों के प्रमुख कार्य बताएं।
उत्तर:
राजनीतिक दलों के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:
राजनीतिक दलों के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:
- नीतियां और कार्यक्रम तय करना: राजनीतिक दल जनता के समक्ष अपनी नीतियां, आर्थिक कार्यक्रम और भावी योजनाएं प्रस्तुत करते हैं ताकि जनता उनके आधार पर अपना प्रतिनिधि चुन सके।
- चुनाव लड़ना: योग्य उम्मीदवारों का चयन करना, चुनाव प्रचार संचालित करना और अपने पक्ष में मतदाताओं को प्रेरित करना दलों का प्राथमिक कार्य है।
- सरकार का गठन करना: चुनाव में स्पष्ट जनादेश हासिल कर मंत्रिमंडल का गठन करना और देश के शासन का संचालन करना।
- विपक्ष की भूमिका निभाना: चुनाव हारने वाले दल विपक्ष में बैठकर सत्ताधारी दल की निरंकुशता को रोकते हैं और संसद में रचनात्मक आलोचना करते हैं।
- कानून निर्माण में भागीदारी: देश की संसद और विधानसभाओं में बनने वाले सभी कानूनों पर राजनीतिक दलों के सदस्य ही बहस करते हैं और मतदान द्वारा कानून पारित करते हैं।
- जनता की शिकायतों का निवारण: स्थानीय स्तर पर नागरिकों की प्रशासनिक समस्याओं को अधिकारियों और मंत्रियों के समक्ष रखकर उनका त्वरित समाधान कराना।
7. राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों की मान्यता कौन प्रदान करते हैं और इसके मापदंड क्या हैं?
उत्तर:
भारत में राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय (क्षेत्रीय) राजनीतिक दलों को मान्यता और चुनाव चिह्न प्रदान करने का सर्वाधिकार भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) के पास है। चुनाव आयोग द्वारा इसके लिए निम्नलिखित वैधानिक मापदंड तय किए गए हैं:
भारत में राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय (क्षेत्रीय) राजनीतिक दलों को मान्यता और चुनाव चिह्न प्रदान करने का सर्वाधिकार भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) के पास है। चुनाव आयोग द्वारा इसके लिए निम्नलिखित वैधानिक मापदंड तय किए गए हैं:
- राज्य स्तरीय (क्षेत्रीय) दल की मान्यता के मापदंड:
- संबंधित पार्टी ने राज्य के पिछले विधानसभा चुनाव में कुल पड़े वैध मतों का न्यूनतम 6 प्रतिशत मत प्राप्त किया हो, और साथ ही कम से कम 2 विधानसभा सीटें जीती हों; अथवा
- उस दल ने विधानसभा की कुल सदस्य संख्या की न्यूनतम 3 प्रतिशत सीटें या कम से कम 3 सीटें (जो भी अधिक हो) जीती हों।
- राष्ट्रीय दल की मान्यता के मापदंड:
- संबंधित पार्टी ने लोकसभा अथवा कम से कम 4 राज्यों के विधानसभा चुनाव में डाले गए कुल वैध मतों का न्यूनतम 6 प्रतिशत मत प्राप्त किया हो, और इसके साथ ही किसी राज्य या राज्यों से कम से कम 4 लोकसभा सीटें जीती हों; अथवा
- उस दल ने लोकसभा के पिछले आम चुनाव में कुल सीटों की कम से कम 2 प्रतिशत सीटें (अर्थात 11 सीटें) जीती हों और ये सदस्य कम से कम 3 अलग-अलग राज्यों से चुने गए हों; अथवा
- वह पार्टी कम से कम 4 राज्यों में राज्य स्तरीय दल के रूप में मान्यता प्राप्त हो।
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