Chapter 3. लोकतंत्र में प्रतिस्पर्धा एवं संघर्ष | BSEB 10 Polity Notes


बिहार बोर्ड (BSEB) कक्षा 10

राजनीति विज्ञान (लोकतांत्रिक राजनीति-II) — अध्याय 3

लोकतंत्र में प्रतिस्पर्धा एवं संघर्ष (Competition and Contestations in Democracy)

पाठ का परिचय एवं अवलोकन (Overview & Introduction)

लोकतंत्र कोई स्थिर या जड़ व्यवस्था नहीं है; यह जन-संघर्षों, प्रतिस्पर्धा और जन-आंदोलनों के माध्यम से निरंतर विकसित और सशक्त होती है। यह अध्याय स्पष्ट करता है कि लोकतंत्र में विभिन्न सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक समूहों के बीच हितों का टकराव और चुनावी प्रतिस्पर्धा स्वाभाविक ही नहीं, बल्कि अनिवार्य है। जब नागरिक और जनसमूह सरकार की जनविरोधी नीतियों या उपेक्षा के विरुद्ध लामबंद होते हैं, तो वे लोकतंत्र को अधिक समावेशी और पारदर्शी बनाते हैं।

अध्याय के मुख्य वैचारिक आयाम:

  • जन-संघर्ष के जरिए लोकतंत्र का विकास:
    लोकतंत्र केवल संसद या विधानसभाओं की चारदीवारी में नहीं बनता, बल्कि सड़कों पर होने वाले जन-आंदोलनों से आकार लेता है। नेपाल में राजशाही के विरुद्ध सात-दलीय गठबंधन (SPA) का आंदोलन और बोलिविया का 'जल युद्ध' (Water War) इसके वैश्विक उदाहरण हैं, जहाँ जन-दबाव ने सत्ता को झुकने पर मजबूर किया।
  • भारत के प्रमुख जनांदोलन:
    स्वतंत्र भारत में अधिकारों और पर्यावरण की रक्षा के लिए अनेक संघर्ष हुए—उत्तराखंड का चिपको आंदोलन, बिहार का 1974 का छात्र आंदोलन (संपूर्ण क्रांति), दलित पैंथर्स का उभार, भारतीय किसान यूनियन (BKU) के धरने, ताड़ी-विरोधी आंदोलन तथा नर्मदा बचाओ आंदोलन। इन आंदोलनों ने हासिये के वर्गों की आवाज़ को नीति-निर्माण के केंद्र में ला खड़ा किया।
  • दबाव समूह और हित समूह (Pressure Groups and Interest Groups):
    ऐसे संगठन जो स्वयं प्रत्यक्ष चुनाव नहीं लड़ते और न ही सत्ता हथियाना चाहते हैं, बल्कि अपने सदस्यों के हितों की रक्षा हेतु सरकारी नीतियों को प्रभावित करते हैं। ये 'विशेष हित समूह' (जैसे व्यावसायिक संघ, ट्रेड यूनियन) या 'जन-सामान्य हित समूह' (जैसे BAMCEF, पर्यावरण समूह) हो सकते हैं।
  • राजनीतिक दल (Political Parties):
    राजनीतिक दलों को "लोकतंत्र का प्राण" कहा जाता है। ये जनता और सरकार के बीच एक आवश्यक कड़ी का कार्य करते हैं। चुनाव लड़ना, नीतियां बनाना, जनमत निर्माण करना और विपक्ष के रूप में सरकार पर नियंत्रण रखना इनके प्रमुख कार्य हैं। भारत में राष्ट्रीय दल और क्षेत्रीय दलों की सह-मौजूदगी ने गठबंधन राजनीति (Coalition Politics) के युग को जन्म दिया है।

1. लोकतंत्र में जन-संघर्ष और वैश्विक संदर्भ

1. लोकतंत्र का विकास जन-संघर्षों और जन-आंदोलनों के माध्यम से ही होता है।
2. लोकतंत्र में राजनीतिक संघर्ष का समाधान व्यापक जन-भागीदारी और संस्थागत माध्यमों (संसद, अदालत, जनमत) से होता है।
3. नेपाल में 1990 के दशक में संवैधानिक राजतंत्र की स्थापना हुई थी।
4. नेपाल के राजा बीरेंद्र की हत्या 2001 में एक रहस्यमयी शाही हत्याकांड में हुई थी।
5. बीरेंद्र के बाद नेपाल के नए राजा ज्ञानेंद्र बने, जिन्होंने लोकतंत्र को समाप्त करने का प्रयास किया।
6. राजा ज्ञानेंद्र ने फरवरी 2005 में चुनी हुई संसद को भंग कर पूर्ण सत्ता अपने हाथ में ले ली।
7. नेपाल में लोकतंत्र की पुनर्स्थापना के लिए 2006 के अप्रैल माह में ऐतिहासिक जन-आंदोलन शुरू हुआ।
8. नेपाल के संसद के सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने मिलकर 'सप्तदलीय गठबंधन' (Seven Party Alliance - SPA) बनाया।
9. नेपाल के 2006 के आंदोलन में माओवादी बागियों और विभिन्न नागरिक संगठनों ने भी SPA का साथ दिया।
10. काठमांडू में चार दिनों के अनिश्चितकालीन बंद के आह्वान ने अभूतपूर्व विशाल जन-विद्रोह का रूप ले लिया।
11. 24 अप्रैल 2006 को राजा ज्ञानेंद्र ने आंदोलनकारियों की तीनों प्रमुख माँगें (संसद की बहाली, सर्वदलीय सरकार और संविधान सभा का गठन) स्वीकार कर लीं।
12. नेपाल में बहाल संसद ने गिरिजा प्रसाद कोइराला को अंतरिम सरकार का प्रधानमंत्री चुना।
13. नेपाल 2008 में राजतंत्र को पूरी तरह समाप्त कर एक 'संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य' बना।
14. 2015 में नेपाल ने अपने नए लोकतांत्रिक संविधान को औपचारिक रूप से अंगीकार किया।
15. बोलिविया लातिनी अमेरिका (दक्षिण अमेरिका) का एक निर्धन देश है।
16. बोलिविया में पानी के निजीकरण के विरुद्ध हुए सफल जन-आंदोलन को 'बोलिविया का जल युद्ध' कहा जाता है।
17. विश्व बैंक (World Bank) के दबाव में बोलिविया सरकार ने 'कोचबंबा' (Cochabamba) शहर की जल आपूर्ति का अधिकार एक बहुराष्ट्रीय कंपनी को बेच दिया।
18. बहुराष्ट्रीय कंपनी ने कोचबंबा में पानी की दरों में चार गुना तक भारी वृद्धि कर दी।
19. कोचबंबा में लोगों के मासिक पानी के बिल ₹1000 तक पहुँच गए, जबकि औसत मासिक आय लगभग ₹5000 थी।
20. बोलिविया में जल संघर्ष का नेतृत्व 'फेडेकोर' (FEDECOR) नामक संगठन ने किया।
21. फेडेकोर (FEDECOR) में इंजीनियर, पर्यावरणविद्, श्रमिक, छात्र और कारखाने के कामगार शामिल थे।
22. सरकार को भारी जन-दबाव के आगे झुकना पड़ा, बहुराष्ट्रीय कंपनी का अनुबंध रद्द हुआ और जलापूर्ति पुनः नगर पालिका को सौंपी गई।
23. नेपाल का संघर्ष 'लोकतंत्र की स्थापना' के लिए था, जबकि बोलिविया का संघर्ष 'लोकतांत्रिक सरकार की एक नीति' के विरुद्ध था।

2. भारत के प्रमुख ऐतिहासिक जनांदोलन

24. भारत में 1970 और 1980 के दशकों में गैर-दलीय जनांदोलनों का व्यापक उभार देखा गया।
25. 'चिपको आंदोलन' की शुरुआत 1973 में तत्कालीन उत्तर प्रदेश (वर्तमान उत्तराखंड) के चमोली जिले से हुई थी।
26. चिपको आंदोलन में ग्रामीणों ने वन विभाग द्वारा व्यावसायिक कंपनियों को अंगू के पेड़ काटने की अनुमति देने का कड़ा विरोध किया।
27. चिपको आंदोलन में ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं ने पेड़ों को अपनी बाहों में घेरकर (चिपककर) कटाई से बचाया।
28. सुंदरलाल बहुगुणा, चंडी प्रसाद भट्ट और गौरा देवी चिपको आंदोलन के प्रमुख अगुआ नेता थे।
29. चिपको आंदोलन के दबाव में सरकार ने हिमालयी क्षेत्रों में 15 वर्षों के लिए वनों की व्यावसायिक कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया।
30. बिहार में 1974 का छात्र आंदोलन बढ़ती महँगाई, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और खाद्यान्न संकट के विरोध में शुरू हुआ।
31. छात्रों के विशेष आग्रह पर जयप्रकाश नारायण (जेपी) ने मार्च 1974 में छात्र आंदोलन का ऐतिहासिक नेतृत्व संभाला।
32. जयप्रकाश नारायण ने इस आंदोलन को केवल बिहार तक सीमित न रखकर 'संपूर्ण क्रांति' (Total Revolution) का नारा दिया।
33. 5 जून 1974 को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में जयप्रकाश नारायण ने संपूर्ण क्रांति का औपचारिक आह्वान किया।
34. संपूर्ण क्रांति का उद्देश्य राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव लाना था।
35. इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली तत्कालीन केंद्र सरकार ने 25 जून 1975 को देश में आंतरिक अशांति के आधार पर 'राष्ट्रीय आपातकाल' (National Emergency) लागू किया।
36. आपातकाल के समय भारतीय संविधान के अनुच्छेद 352 का प्रयोग किया गया था।
37. आपातकाल के दौरान नागरिकों के सभी मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए और विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया गया।
38. 1977 में आपातकाल हटने के बाद हुए छठे लोकसभा चुनाव में पहली बार गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी।
39. 1977 में मोरारजी देसाई भारत के पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने।
40. 1977 के चुनाव में जयप्रकाश नारायण के प्रयासों से कई विपक्षी दलों का जनता पार्टी में ऐतिहासिक विलय हुआ था।
41. 'दलित पैंथर्स' (Dalit Panthers) नामक उग्र युवा संगठन का गठन 1972 में महाराष्ट्र में हुआ था।
42. नामदेव ढसाल और अर्जुन डांगले दलित पैंथर्स के प्रमुख संस्थापक नेताओं में से थे।
43. दलित पैंथर्स का मुख्य उद्देश्य दलितों पर होने वाले सामाजिक अत्याचारों, जातिवाद और छुआछूत के खिलाफ सीधी लड़ाई लड़ना था।
44. दलित पैंथर्स ने अमेरिका के 'ब्लैक पैंथर्स' (Black Panther Party) आंदोलन से प्रेरणा ली थी।
45. दलित पैंथर्स के लगातार संघर्षों के परिणामस्वरूप 1989 में संसद ने 'अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम' (SC/ST Prevention of Atrocities Act) पारित किया।
46. 'भारतीय किसान यूनियन' (BKU) पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के किसानों का एक प्रमुख गैर-दलीय दबाव संगठन था।
47. महेंद्र सिंह टिकैत लंबे समय तक भारतीय किसान यूनियन (BKU) के सर्वमान्य शीर्ष नेता रहे।
48. 1988 में बिजली की बढ़ी दरों के खिलाफ BKU के नेतृत्व में मेरठ जिला मुख्यालय पर किसानों का विशाल ऐतिहासिक घेराव हुआ था।
49. BKU की मुख्य माँगों में बिजली दरों में कमी, फसलों के लाभकारी मूल्य, कृषि ऋण की माफी और किसानों को पेंशन शामिल थीं।
50. 'ताड़ी-विरोधी आंदोलन' (Anti-Arrack Movement) 1992 में आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले के 'दुबरगंटा' गाँव से प्रारंभ हुआ था।
51. ताड़ी-विरोधी आंदोलन पूर्णतः ग्रामीण महिलाओं का एक स्वतःस्फूर्त आंदोलन था।
52. इस आंदोलन का मूल कारण ग्रामीण पुरुषों में ताड़ी और शराब की लत थी, जिससे घरेलू हिंसा और आर्थिक तबाही हो रही थी।
53. ताड़ी-विरोधी आंदोलन आगे चलकर केवल शराबबंदी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि घरेलू हिंसा, दहेज और महिला सशक्तिकरण का बड़ा मंच बन गया।
54. महिलाओं की राजनीतिक लामबंदी के फलस्वरूप ही 73वें संविधान संशोधन (1992) में स्थानीय निकायों में महिलाओं को 33% आरक्षण सुनिश्चित हुआ।
55. 'नर्मदा बचाओ आंदोलन' (NBA) नर्मदा घाटी में सरदार सरोवर बाँध और अन्य बड़े बाँधों के निर्माण के विरुद्ध चलाया गया।
56. नर्मदा बचाओ आंदोलन की प्रमुख अगुआ नेत्री मेधा पाटकर हैं।
57. नर्मदा बचाओ आंदोलन ने पर्यावरण विनाश और बाँध निर्माण से विस्थापित होने वाले स्थानीय ग्रामीणों व आदिवासियों के उचित पुनर्वास का मुद्दा उठाया।
58. सरदार सरोवर बाँध गुजरात में नर्मदा नदी पर निर्मित एक विशाल बहुउद्देश्यीय बाँध परियोजना है।
59. इस आंदोलन ने वैश्विक स्तर पर विकास के ऐसे मॉडल पर सवाल खड़े किए जो पर्यावरण और मानवीय आबादी को उजाड़ते हैं।
60. राजस्थान में 'मजदूर किसान शक्ति संगठन' (MKSS) ने सूचना के अधिकार (RTI) के लिए देशव्यापी आंदोलन चलाया।
61. अरुणा रॉय मजदूर किसान शक्ति संगठन (MKSS) की प्रमुख अगुआ सामाजिक कार्यकर्ता हैं।
62. MKSS ने सूखा राहत कार्यों में मजदूरी भुगतान और सरकारी रिकॉर्ड में पारदर्शिता की माँग को लेकर आंदोलन छेड़ा था।
63. नागरिकों के लंबे संघर्ष के बाद भारत की संसद ने वर्ष 2005 में ऐतिहासिक 'सूचना का अधिकार अधिनियम' (RTI Act) पारित किया।

3. दबाव समूह और हित समूह (Pressure Groups & Interest Groups)

64. दबाव समूह (Pressure Groups) ऐसे संगठित समूह होते हैं जो प्रत्यक्ष चुनाव लड़े बिना सत्ता और सरकारी नीतियों को प्रभावित करते हैं।
65. दबाव समूहों का उद्देश्य राजनीतिक सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि अपने सदस्यों के विशिष्ट हितों की पूर्ति करना होता है।
66. दबाव समूहों को राजनीतिक प्रक्रिया में 'अदृश्य साम्राज्य' (Invisible Empire) भी कहा जाता है।
67. जो दबाव समूह समाज के किसी एक खास हिस्से (जैसे मजदूर, व्यापारी, शिक्षक) के हितों की बात करते हैं, उन्हें 'विशेष हित समूह' (Sectional Interest Groups) कहते हैं।
68. 'फिक्की' (FICCI) और 'एसोचैम' (ASSOCHAM) भारत के प्रमुख उद्योगपतियों और व्यापारिक घरानों के हित समूह हैं।
69. ट्रेड यूनियन (जैसे AITUC, INTUC, BMS, CITU) श्रमिकों के अधिकारों के संरक्षण के लिए कार्यरत दबाव समूह हैं।
70. जो समूह पूरे समाज के कल्याण, पर्यावरण या मानवाधिकारों के लिए काम करते हैं, उन्हें 'जन-सामान्य हित समूह' (Public Interest Groups) कहा जाता है।
71. BAMCEF (Backward and Minority Communities Employees Federation) सरकारी कर्मचारियों का संगठन है, जो सामाजिक न्याय के लिए लड़ता है।
72. दबाव समूह हड़ताल, धरना, प्रदर्शन, ज्ञापन और लॉबिंग (Lobbying) के जरिए सरकार पर दबाव बनाते हैं।
73. दबाव समूह कभी-कभी जनमत को अपने पक्ष में करने के लिए मीडिया और प्रचार अभियानों का भी सहारा लेते हैं।
74. दबाव समूह सरकार को किसी एक वर्ग के अत्यधिक प्रभाव में आने से रोककर विभिन्न सामाजिक हितों में संतुलन स्थापित करते हैं।

4. राजनीतिक दल: प्रकृति, कार्य और महत्व

75. राजनीतिक दल लोगों का ऐसा संगठित समूह है जो समान विचारधारा पर आधारित होकर चुनाव लड़ने और सत्ता हासिल करने के उद्देश्य से कार्य करता है।
76. राजनीतिक दलों को लोकतंत्र का 'प्राण' (Lifeblood of Democracy) कहा जाता है।
77. गिलक्राइस्ट के अनुसार राजनीतिक दल उन नागरिकों का संगठित समूह है जो एक राजनीतिक इकाई के रूप में काम करते हैं।
78. राजनीतिक दल का प्राथमिक और अंतिम उद्देश्य राजनीतिक सत्ता (शासन) प्राप्त करना या उसमें भागीदारी करना होता है।
79. राजनीतिक दल जनता के समक्ष अपनी नीतियां और कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं, जिन्हें 'घोषणापत्र' (Manifesto) कहा जाता है।
80. राजनीतिक दल विधायिका में कानून निर्माण में निर्णायक और बुनियादी भूमिका निभाते हैं।
81. चुनाव में बहुमत प्राप्त करने वाला दल सरकार बनाता है और नीतियों का संचालन करता है।
82. चुनाव में पराजित दल संसद और विधानसभाओं में 'विपक्ष' (Opposition) की भूमिका निभाता है।
83. विपक्ष का मुख्य कार्य सरकार की गलत नीतियों, भ्रष्टाचार और कमियों की रचनात्मक आलोचना करना है।
84. राजनीतिक दल जनता और सरकार के बीच एक विश्वसनीय सेतु (पुल) का काम करते हैं।
85. जनमत (Public Opinion) के निर्माण और जन-जागरण में राजनीतिक दल सबसे सक्रिय भूमिका निभाते हैं।

5. दलीय प्रणालियाँ और भारत में राजनीतिक दल

86. जिस देश में केवल एक ही दल को सरकार बनाने और चलाने की अनुमति होती है, उसे 'एकदलीय प्रणाली' (जैसे चीन) कहते हैं।
87. जिस देश में सत्ता मुख्य रूप से दो प्रमुख दलों के बीच बदलती रहती है, उसे 'द्विदलीय प्रणाली' (जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका और ब्रिटेन) कहते हैं।
88. जिस देश में दो से अधिक राजनीतिक दल सत्ता की दौड़ में स्वतंत्र रूप से प्रतिस्पर्धी होते हैं, उसे 'बहुदलीय प्रणाली' कहते हैं।
89. भारत और फ्रांस बहुदलीय शासन प्रणाली के प्रमुख उदाहरण हैं।
90. भारत का सबसे पुराना राजनीतिक दल 'भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस' (INC) है, जिसकी स्थापना 28 दिसंबर 1885 को बंबई में हुई थी।
91. कांग्रेस पार्टी के संस्थापक ए. ओ. ह्यूम (A. O. Hume) थे और इसके पहले अध्यक्ष व्योमेश चंद्र बनर्जी थे।
92. 'भारतीय जनता पार्टी' (BJP) की स्थापना 6 अप्रैल 1980 को हुई, जिसके पहले अध्यक्ष अटल बिहारी वाजपेयी थे।
93. भारतीय जनता पार्टी की पूर्ववर्ती संस्था 'भारतीय जनसंघ' थी, जिसकी स्थापना 1951 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने की थी।
94. 'कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया' (CPI) की स्थापना 1925 में एम. एन. रॉय के प्रयासों से हुई थी।
95. बहुजन समाज पार्टी (BSP) की स्थापना 1984 में कांशीराम द्वारा दलितों और बहुजन वर्ग के हितों के लिए की गई थी।
96. भारत में राजनीतिक दलों को मान्यता और चुनाव चिह्न प्रदान करने का एकमात्र कानूनी अधिकार 'भारत निर्वाचन आयोग' (Election Commission) को है।
97. जो दल चार या अधिक राज्यों में एक निश्चित मत प्रतिशत और सीटें प्राप्त करते हैं, उन्हें चुनाव आयोग द्वारा 'राष्ट्रीय दल' (National Party) का दर्जा दिया जाता है।
98. भारत में किसी राज्य विशेष में प्रभाव रखने वाले दलों को 'राज्य स्तरीय' या 'क्षेत्रीय दल' (Regional Party) कहा जाता है (जैसे राजद, जदयू, द्रमुक, तृणमूल कांग्रेस)।
99. जब किसी एक दल को चुनाव में पूर्ण बहुमत नहीं मिलता, तो कई दल मिलकर 'गठबंधन सरकार' (Coalition Government) बनाते हैं।
100. 1989 के बाद भारतीय राजनीति में राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन सरकारों (जैसे संप्रग - UPA और राजग - NDA) का एक लंबा दौर शुरू हुआ, जिसने क्षेत्रीय दलों की महत्ता को बहुत बढ़ा दिया।
बोर्ड परीक्षा विशेष सुझाव: इन सभी 100 बिंदुओं का नियमित रूप से अभ्यास करें। वस्तुनिष्ठ प्रश्नों (MCQs) और अति-लघु उत्तरीय प्रश्नों की पूर्ण तैयारी के लिए यह एक अत्यंत उपयोगी संकलन है।

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