बिहार बोर्ड (BSEB) कक्षा 10 भूगोल
खण्ड-क : भारत : संसाधन एवं उपयोग | इकाई 2: कृषि (Agriculture)
| क्र.सं. | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| 1 | भारत की लगभग कितनी प्रतिशत आबादी अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है? | लगभग दो-तिहाई (55% से 60%) आबादी। |
| 2 | सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में प्राथमिक क्षेत्र का आधार क्या है? | कृषि एवं संबंधित कार्यकलाप। |
| 3 | भारत की कृषि को किस मौसमी परिघटना का 'जुआ' कहा जाता है? | मानसून का। |
| 4 | ऋतुओं के आधार पर भारत में फसलों को कितने वर्गों में बाँटा गया है? | 3 वर्गों में (खरीफ, रबी और जायद)। |
| 5 | खरीफ फसलें कब बोई और काटी जाती हैं? | जून-जुलाई (मानसून आगमन) में बोई और सितंबर-अक्टूबर में काटी जाती हैं। |
| 6 | खरीफ ऋतु की मुख्य फसलें कौन-सी हैं? | धान (चावल), मक्का, ज्वार, बाजरा, कपास, जूट और मूंगफली। |
| 7 | रबी फसलें किस मौसम में बोई और काटी जाती हैं? | शीत ऋतु (अक्टूबर-नवंबर) में बोई और ग्रीष्म (मार्च-अप्रैल) में काटी जाती हैं। |
| 8 | रबी ऋतु की प्रमुख फसलें कौन-सी हैं? | गेहूं, जौ, चना, मटर, सरसों और आलू। |
| 9 | जायद (Zaid) फसलें किस समयावधि में उगाई जाती हैं? | रबी और खरीफ के बीच ग्रीष्म ऋतु (अप्रैल से जून) में। |
| 10 | जायद फसलों के प्रमुख उदाहरण क्या हैं? | तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी और सब्जियां। |
| 11 | कर्तन-दहन प्रणाली (Slash and Burn) को भारत में किस नाम से जाना जाता है? | झूम कृषि (Jhum Cultivation)। |
| 12 | झूम कृषि भारत के किस भौगोलिक क्षेत्र में सर्वाधिक प्रचलित है? | उत्तर-पूर्वी पहाड़ी राज्यों (असम, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड)। |
| 13 | गहन जीविका कृषि (Intensive Subsistence Farming) किन क्षेत्रों में की जाती है? | जहाँ भूमि पर जनसंख्या का दबाव बहुत अधिक होता है। |
| 14 | रोपण कृषि (Plantation Agriculture) की मुख्य विशेषता क्या है? | एक विस्तृत क्षेत्र में बड़े पैमाने पर केवल एक ही नकदी फसल का उत्पादन करना। |
| 15 | रोपण कृषि की प्रमुख फसलों के उदाहरण क्या हैं? | चाय, कॉफी, रबड़, गन्ना, केला और नारियल। |
| 16 | भारत की सर्वप्रमुख एवं अधिकांश जनता की मुख्य खाद्यान्न फसल कौन-सी है? | चावल (धान)। |
| 17 | चावल उत्पादन में भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है? | दूसरा स्थान (चीन के बाद)। |
| 18 | चावल उत्पादन के लिए कितनी वार्षिक वर्षा और तापमान उपयुक्त माना जाता है? | 100 सेमी से अधिक वर्षा तथा 25°C से ऊपर तापमान। |
| 19 | भारत का सर्वाधिक चावल उत्पादक राज्य कौन-सा है? | पश्चिम बंगाल। |
| 20 | पश्चिम बंगाल में किसान धान की एक वर्ष में कौन-सी तीन फसलें लेते हैं? | औस, अमन और बोरो। |
| 21 | भारत की दूसरी सबसे प्रमुख खाद्यान्न फसल कौन-सी है? | गेहूं (Wheat)। |
| 22 | गेहूं उत्पादन के लिए उपयुक्त तापमान कितना होना चाहिए? | बोते समय 10°C-15°C तथा पकते समय खिली धूप (20°C-25°C)। |
| 23 | गेहूं उत्पादन में भारत का प्रथम राज्य कौन-सा है? | उत्तर प्रदेश (प्रति हेक्टेयर उत्पादकता में पंजाब प्रथम)। |
| 24 | 'मोटे अनाज' (Millets / पोषक अनाज) किन्हें कहा जाता है? | ज्वार, बाजरा और रागी को। |
| 25 | मोटे अनाजों में किस पोषक तत्व की प्रचुरता होती है? | आयरन, कैल्शियम और सूक्ष्म पोषक तत्वों की (रागी में प्रचुर कैल्शियम)। |
| 26 | देश की तीसरी प्रमुख खाद्यान्न फसल कौन-सी है? | ज्वार (Jowar)। |
| 27 | ज्वार का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य कौन-सा है? | महाराष्ट्र। |
| 28 | बाजरा उत्पादन में भारत का अग्रणी राज्य कौन-सा है? | राजस्थान। |
| 29 | रागी उत्पादन में देश का प्रथम राज्य कौन-सा है? | कर्नाटक। |
| 30 | मक्का किस प्रकार की फसल है? | यह खाद्यान्न और चारा दोनों रूपों में प्रयुक्त होती है (बिहार में रबी मक्का भी प्रसिद्ध है)। |
| 31 | मक्का उत्पादन के लिए कौन-सी मिट्टी सर्वोत्तम मानी जाती है? | पुरानी जलोढ़ मिट्टी (बांगर)। |
| 32 | मक्का उत्पादन में अग्रणी राज्य कौन-सा है? | कर्नाटक। |
| 33 | विश्व में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता देश कौन-सा है? | भारत। |
| 34 | दालों की जड़ों में कौन-सा जीवाणु पाया जाता है जो वायुमंडलीय नाइट्रोजन स्थिरीकरण करता है? | राइजोबियम (Rhizobium)। |
| 35 | कौन-सी दलहनी फसल वायु से नाइट्रोजन का स्थिरीकरण नहीं करती? | अरहर (तूर)। |
| 36 | भारत का सर्वाधिक दाल उत्पादक राज्य कौन-सा है? | मध्य प्रदेश। |
| 37 | गन्ना उत्पादन में भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है? | दूसरा (ब्राजील के बाद)। |
| 38 | भारत में गन्ना का सर्वाधिक उत्पादन किस राज्य में होता है? | उत्तर प्रदेश। |
| 39 | तिलहन उत्पादन में भारत का मुख्य स्थान किस फसल का है? | मूंगफली। |
| 40 | मूंगफली उत्पादन में भारत का अग्रणी राज्य कौन-सा है? | गुजरात। |
| 41 | सरसों उत्पादन में देश का प्रथम राज्य कौन-सा है? | राजस्थान। |
| 42 | 'पेय फसल' (Beverage Crops) के दो मुख्य उदाहरण क्या हैं? | चाय और कॉफी (कहवा)। |
| 43 | भारत में चाय की खेती का प्रारंभ सर्वप्रथम कहाँ हुआ था? | 1840 में असम की ब्रह्मपुत्र घाटी में। |
| 44 | चाय उत्पादन में भारत का अग्रणी राज्य कौन-सा है? | असम। |
| 45 | चाय के पौधे की जड़ों में क्या नहीं रुकना चाहिए? | खड़ा पानी (जलजमाव), इसलिए यह ढलवां भूमि पर उगाई जाती है। |
| 46 | भारत में उगाई जाने वाली उच्च कोटि की कॉफी की किस्म कौन-सी है? | अरेबिका (Arabica), जो यमन से लाई गई थी। |
| 47 | भारत में कॉफी की खेती की शुरुआत किस पहाड़ी से हुई थी? | बाबा बुदन की पहाड़ियों से (कर्नाटक)। |
| 48 | भारत का सर्वाधिक कॉफी उत्पादक राज्य कौन-सा है? | कर्नाटक। |
| 49 | कपास उत्पादन के लिए सर्वोत्तम मिट्टी कौन-सी मानी जाती है? | काली मिट्टी (रेगुर मिट्टी)। |
| 50 | कपास की फसल को पाला-रहित कितने दिनों की आवश्यकता होती है? | 210 पाला-रहित दिन। |
प्रश्न 1. खरीफ और रबी फसलों में सोदाहरण अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर:
- खरीफ फसल: यह मानसूनी वर्षा के आगमन (जून-जुलाई) के साथ बोई जाती है और शीत ऋतु के आरंभ (सितंबर-अक्टूबर) में काटी जाती है। इन्हें अधिक तापमान और अत्यधिक नमी की आवश्यकता होती है। उदाहरण: धान, मक्का, कपास, जूट।
- रबी फसल: यह शीत ऋतु (अक्टूबर-दिसंबर) में बोई जाती है और ग्रीष्म ऋतु (मार्च-अप्रैल) में काटी जाती है। इन्हें पकते समय ठंडी जलवायु और कम आर्द्रता चाहिए। उदाहरण: गेहूं, जौ, चना, सरसों, मटर।
प्रश्न 2. झूम कृषि (स्थानांतरित कृषि) क्या है? इसकी दो मुख्य कमियां बताएं।
उत्तर: यह आदिम कृषि का एक स्वरूप है, जिसमें किसान जंगलों के एक भू-भाग को काटकर और जलाकर साफ करते हैं तथा उस राख मिश्रित भूमि पर 2-3 वर्षों तक परंपरागत औजारों से खेती करते हैं। भूमि की उर्वरता समाप्त होने पर वे नए स्थान पर चले जाते हैं।
कमियां:
- वनों की अंधाधुंध कटाई से पर्यावरण ह्रास और मृदा अपरदन बढ़ता है।
- इसमें आधुनिक खाद या सिंचाई का उपयोग न होने से प्रति हेक्टेयर उत्पादन अत्यधिक कम रहता है।
प्रश्न 3. रोपण कृषि (Plantation Agriculture) की मुख्य विशेषताएं लिखिए।
उत्तर:
- यह एक बड़े भू-भाग पर की जाने वाली एकल-फसली व्यापारिक कृषि है।
- इसमें भारी पूंजी निवेश, आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक प्रबंधन की आवश्यकता होती है।
- इसका संपूर्ण उत्पादन उद्योगों के लिए कच्चे माल के रूप में बाजार हेतु तैयार किया जाता है।
- उदाहरण: चाय, कॉफी, रबड़, गन्ना और केला बागान।
प्रश्न 4. चावल (धान) के उत्पादन के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाओं का संक्षेप में उल्लेख करें।
उत्तर:
- तापमान: उष्णकटिबंधीय जलवायु, बोते समय 20°C-22°C तथा पकते समय 25°C-27°C तापमान।
- वर्षा: 100 सेमी से 200 सेमी तक प्रचुर वर्षा (कम वर्षा वाले क्षेत्रों में सिंचाई अनिवार्य)।
- मिट्टी: गहरी, उपजाऊ जलोढ़ या चीकायुक्त दोमट मिट्टी जिसमें जल-धारण क्षमता अधिक हो।
- श्रम: धान की रोपाई, निराई और कटाई के लिए प्रचुर मात्रा में सस्ते और कुशल श्रमिक।
प्रश्न 5. गेहूं के उत्पादन के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाएं क्या हैं?
उत्तर:
- तापमान: शीतोष्ण जलवायु; बोते समय शीतल मौसम (10°C से 15°C) और दाना पकते समय खिली चमकदार धूप (20°C से 25°C)।
- वर्षा: 50 सेमी से 75 सेमी की सामान्य वर्षा (वार्षिक वर्षा समान रूप से वितरित हो या 4-5 हल्की सिंचाई)।
- मिट्टी: सुअपवाहित दोमट या बलुई-दोमट मिट्टी।
- पाला-मुक्त मौसम: पकते समय ओलावृष्टि या असमय बारिश से मुक्त वातावरण।
प्रश्न 6. दालों के उत्पादन का भारतीय कृषि एवं आहार में क्या महत्व है?
उत्तर:
- प्रोटीन का प्रमुख स्रोत: शाकाहारी भारतीय आबादी के भोजन में दालें प्रोटीन का सबसे प्राथमिक और सुलभ स्रोत हैं।
- मृदा उर्वरता संवर्धन: अरहर को छोड़कर अन्य सभी दलहनी फसलें (चना, मूंग, उड़द) अपनी जड़ों में मौजूद राइजोबियम बैक्टीरिया द्वारा वायुमंडलीय नाइट्रोजन को मिट्टी में स्थिर करके भूमि की प्राकृतिक उर्वरता बढ़ाती हैं। इसलिए इन्हें प्रायः फसल चक्र (Crop Rotation) में उगाया जाता है।
प्रश्न 7. कपास की खेती के लिए कौन-सी भौगोलिक परिस्थितियां अनुकूल मानी जाती हैं?
उत्तर:
- मिट्टी: दक्कन के पठार की लावा जनित काली मिट्टी (रेगुर), जो नमी को लंबे समय तक बनाए रखती है।
- तापमान व जलवायु: 21°C से 30°C उच्च तापमान, प्रचुर धूप और कम से कम 210 पाला-रहित दिन।
- वर्षा: 50 से 100 सेमी की हल्की वर्षा या सुनिश्चित सिंचाई व्यवस्था।
- कपास चुनना: कपास के डोडे (Bolls) चुनने के लिए सस्ते मानवीय श्रम की उपलब्धता।
प्रश्न 1. भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि के महत्व पर प्रकाश डालते हुए भारतीय कृषि की प्रमुख समस्याओं एवं उनके समाधान के उपायों की विस्तृत विवेचना करें।
उत्तर: भारत एक कृषि-प्रधान देश है, जहाँ कृषि केवल एक व्यवसाय नहीं बल्कि जीवन जीने की एक पद्धति है।
- खाद्य सुरक्षा: देश की विशाल 140 करोड़ से अधिक आबादी के भरण-पोषण के लिए खाद्यान्नों की आपूर्ति कृषि से ही होती है।
- रोजगार का वृहद स्रोत: देश के कुल कार्यबल का 50% से अधिक भाग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि एवं पशुपालन पर निर्भर है।
- उद्योगों के लिए कच्चा माल: वस्त्र (सूती, जूट, रेशमी), चीनी, खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing), वनस्पति तेल और चाय-कॉफी जैसे विशाल उद्योग पूरी तरह कृषि उत्पादों पर आधारित हैं।
- विदेशी मुद्रा अर्जन: चाय, बासमती चावल, मसाले, फल, सब्जियां और तंबाकू के निर्यात से देश को बहुमूल्य विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है।
- मानसून की अनिश्चितता: आज भी लगभग 50% कृषि क्षेत्र मानसूनी बारिश पर निर्भर है। सूखा और बाढ़ हर साल फसलों को बर्बाद करते हैं।
- खेतों का छोटा आकार (अपखंडन): पीढ़ियों में भूमि विभाजन के कारण औसत जोत का आकार घटकर 1 हेक्टेयर से भी कम रह गया है, जिससे आधुनिक मशीनों का प्रयोग अलाभकारी हो जाता है।
- पूंजी की कमी और ऋणग्रस्तता: सीमांत और छोटे किसानों के पास आधुनिक बीज, रासायनिक उर्वरक और कृषि यंत्र खरीदने हेतु पर्याप्त धन नहीं होता, जिससे वे साहूकारों के कर्ज-जाल में फंस जाते हैं।
- परंपरागत तकनीक एवं निम्न उत्पादकता: कई क्षेत्रों में उन्नत तकनीकों का अभाव है, जिससे विकसित देशों की तुलना में प्रति हेक्टेयर उत्पादन काफी कम है।
- भंडारण एवं विपणन सुविधाओं का अभाव: गोदामों और कोल्ड स्टोरेज की कमी के कारण किसानों को फसल कटाई के तुरंत बाद अपनी उपज औने-पौने दामों पर बिचौलियों को बेचनी पड़ती है।
- सिंचाई तंत्र का विस्तार: 'हर खेत को पानी' और 'प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना' के माध्यम से ड्रिप व स्प्रिंकलर सिंचाई को बढ़ावा देना।
- संस्थागत सुधार: चकबंदी (Consolidation of holdings) को कड़ाई से लागू करना तथा किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के जरिए सस्ता बैंक ऋण उपलब्ध कराना।
- उन्नत बीजों और तकनीकों का प्रसार: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा विकसित जलवायु-सहिष्णु और अधिक उपज वाले बीजों (HYV Seeds) का ग्राम स्तर पर वितरण।
- फसल बीमा और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP): प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से प्राकृतिक आपदाओं के नुकसान की भरपाई करना तथा फसलों का लाभकारी समर्थन मूल्य सुनिश्चित करना।
प्रश्न 2. भारत में 'हरित क्रांति' (Green Revolution) क्या है? इसके मुख्य घटकों, उपलब्धियों तथा भारतीय कृषि पर पड़े इसके सकारात्मक व नकारात्मक प्रभावों का समग्र मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर: 1960 के दशक के मध्य (1966-67) में भारत में कृषि उत्पादन, विशेषकर खाद्यान्नों (गेहूं और चावल) के उत्पादन में अभूतपूर्व और क्रांतिकारी वृद्धि लाने के लिए अपनाई गई नई कृषि रणनीति को 'हरित क्रांति' कहा जाता है। भारत में इसके जनक डॉ० एम० एस० स्वामीनाथन थे, जबकि वैश्विक स्तर पर इसके प्रणेता डॉ० नॉर्मन बोरलॉग थे।
- मेक्सिको से आयातित उच्च उपज देने वाली संकर किस्में (HYV Seeds - बौनी किस्में)।
- रासायनिक उर्वरकों (NPK) और कीटनाशकों का संतुलित व बड़े पैमाने पर उपयोग।
- सुनिश्चित और नियंत्रित नलकूप/नहर सिंचाई प्रणाली।
- आधुनिक कृषि यंत्रों जैसे ट्रैक्टर, थ्रेशर, पंपसेट और हार्वेस्टर का व्यापक प्रयोग।
- खाद्यान्नों में आत्मनिर्भरता: भारत जो पहले खाद्यान्न के लिए अमेरिकी सहायता (PL-480) पर निर्भर था, वह न केवल आत्मनिर्भर बना बल्कि खाद्यान्न निर्यातक राष्ट्र की श्रेणी में आ गया।
- गेहूं और चावल के उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि: इसे मुख्य रूप से 'गेहूं क्रांति' भी कहा गया क्योंकि गेहूं के उत्पादन में कई गुना ऐतिहासिक उछाल दर्ज किया गया।
- किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार: पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों की आय में भारी वृद्धि हुई और उनका जीवन स्तर सुधरा।
- उद्योगों को बढ़ावा: कृषि यंत्र बनाने वाले उद्योगों तथा उर्वरक व कीटनाशक कारखानों का तेजी से विस्तार हुआ।
- क्षेत्रीय असंतुलन: इसका लाभ केवल कुछ चुनिंदा राज्यों (पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश) तक सीमित रहा; पूर्वी भारत (बिहार, ओडिशा, बंगाल) लंबे समय तक इससे वंचित रहा।
- फसल विषमता: इसका फायदा केवल गेहूं और चावल को मिला; दालें, मोटे अनाज और तिलहन उपेक्षित रह गए।
- मृदा प्रदूषण एवं क्षारीयता: रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता घटी और अत्यधिक नहरी सिंचाई से भूमि क्षारीय/लवणीय (Saline) हो गई।
- भूजल स्तर में भारी गिरावट: धान और गेहूं की बार-बार खेती के लिए ट्यूबवेलों से अनियंत्रित पानी खींचने के कारण पंजाब और हरियाणा में भूजल स्तर खतरनाक स्तर तक नीचे चला गया।
हरित क्रांति ने भारत को भूखमरी के कगार से निकालकर खाद्य सुरक्षा प्रदान की। वर्तमान समय में इसके नकारात्मक प्रभावों को दूर करने के लिए पर्यावरण-अनुकूल 'सदाबहार क्रांति' (Evergreen Revolution) और जैविक/प्राकृतिक खेती (Organic Farming) को अपनाना समय की सबसे बड़ी मांग है।
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