अध्याय 2: प्राकृतिक आपदा एवं प्रबंधन : बाढ़ एवं सुखाड़ — Complete Question Answer Solution
इस आर्टिकल में पाठ्यपुस्तक के सभी वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs), लघु उत्तरीय प्रश्न, दीर्घ उत्तरीय प्रश्न तथा परियोजना कार्य के संपूर्ण एवं सटीक उत्तर सरल हिंदी भाषा में दिए गए हैं।
वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Questions)
लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)
प्रश्न 1. बाढ़ कैसे आती है? स्पष्ट करें।
उत्तर: नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों में अत्यधिक और मूसलाधार वर्षा होने के कारण नदियों में जल की मात्रा उसकी वहन क्षमता से अधिक हो जाती है। इसके साथ ही जब नदी के तल में बालू और गाद जमा हो जाती है, तो पानी का स्तर ऊपर उठ जाता है और नदी किनारों व तटबंधों को तोड़कर आसपास के रिहायशी और कृषि क्षेत्रों में फैल जाती है। इस प्रकार बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होती है।
प्रश्न 2. बाढ़ से होनेवाली हानियों की चर्चा करें।
उत्तर: बाढ़ से निम्नलिखित प्रमुख हानियाँ होती हैं:
- फसलों की बर्बादी: खेतों में हफ्तों तक पानी जमा रहने से धान और अन्य फसलें सड़कर नष्ट हो जाती हैं।
- धन-जन एवं मवेशियों की हानि: कच्चे मकान ढह जाते हैं, लोग बेघर हो जाते हैं और सैकड़ों मवेशी पानी में बह जाते हैं।
- महामारियों का प्रकोप: बाढ़ का पानी उतरने के बाद हैजा, मलेरिया, डायरिया और त्वचा रोग जैसी संक्रामक बीमारियाँ तेजी से फैलती हैं।
- परिवहन व संचार ठप: सड़कें, पुल-पुलिया और रेल पटरियां कट जाने से संपर्क पूरी तरह टूट जाता है।
प्रश्न 3. बाढ़ से सुरक्षा हेतु अपनाई जानेवाली सावधानियों को लिखें।
उत्तर: बाढ़ से बचने के लिए निम्नलिखित सावधानियाँ बरतनी चाहिए:
- बाढ़ की चेतावनी मिलते ही तुरंत आवश्यक सामान (दवा, टॉर्च, सूखा राशन) लेकर किसी सुरक्षित और ऊँचे स्थान पर चले जाना चाहिए।
- पीने के पानी को हमेशा उबालकर या हैलोजन टैबलेट डालकर शुद्ध करके ही पीना चाहिए।
- बिजली के खंभों, गिरे हुए तारों और तेज धार वाले पानी में उतरने से बचना चाहिए।
- साँप और विषैले कीड़े-मकोड़ों से सतर्क रहना चाहिए क्योंकि वे भी सूखी जगहों पर शरण लेते हैं।
प्रश्न 4. बाढ़ नियंत्रण के लिए उपाय बतायें।
उत्तर: बाढ़ नियंत्रण के प्रमुख उपाय इस प्रकार हैं:
- तटबंधों का निर्माण व सुदृढ़ीकरण: नदियों के दोनों किनारों पर मजबूत बांध बनाए जाएं और मानसून से पहले उनकी दरारों की मरम्मत की जाए।
- सघन वृक्षारोपण: नदी के ऊपरी कैचमेंट एरिया में अधिक से अधिक पेड़ लगाए जाएं ताकि मिट्टी का कटाव कम हो और पानी का तेज बहाव रुके।
- जलाशयों एवं नहरों का निर्माण: नदियों पर बांध बनाकर अतिरिक्त जल को जलाशयों में एकत्र किया जाए और सूखी जगहों पर नहरों द्वारा मोड़ा जाए।
- नदियों की गाद (Dredging) निकालना: नदी के तल से समय-समय पर सिल्ट निकाली जाए ताकि नदी की गहराई और जल-वहन क्षमता बनी रहे।
प्रश्न 5. सूखे की स्थिति को परिभाषित करें।
उत्तर: सामान्यतः जब किसी क्षेत्र में औसत वार्षिक वर्षा की तुलना में 25% या उससे अधिक की कमी दर्ज की जाती है, तो उस स्थिति को 'सूखा' (Drought) कहा जाता है। इस स्थिति में मिट्टी की भीतरी नमी खत्म हो जाती है, भूमिगत जलस्तर (Water Table) काफी नीचे चला जाता है, फसलें सूख जाती हैं और इंसानों व मवेशियों के लिए पीने के पानी और चारे का गंभीर संकट उत्पन्न हो जाता है।
प्रश्न 6. सुखाड़ के लिए जिम्मेवार कारकों का वर्णन करें।
उत्तर: सुखाड़ के लिए निम्नलिखित कारक मुख्य रूप से उत्तरदायी हैं:
- वर्षा की अनिश्चितता व कमी: मानसून का देर से आना, समय से पहले समाप्त हो जाना या बहुत कम बारिश होना।
- वनों की अंधाधुंध कटाई: पेड़ों की कटाई से वाष्पोत्सर्जन चक्र प्रभावित होता है, जिससे वर्षा की मात्रा घटती है।
- भूजल का अत्यधिक दोहन: नलकूपों और समरसेबल पंपों के जरिए बिना सोचे-समझे भूजल निकालने से वाटर टेबल का अत्यधिक गिर जाना।
- पारंपरिक जलस्रोतों की उपेक्षा: कुओं, तालाबों, पोखरों और आहर-पइन का संरक्षण न करना और उन पर अतिक्रमण होना।
प्रश्न 7. सुखाड़ से बचाव के तरीकों उल्लेख करें।
उत्तर: सुखाड़ से बचाव के मुख्य तरीके निम्नलिखित हैं:
- वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting): छतों और खुले मैदानों के वर्षा जल को गड्ढों या टैंकों में जमा कर भूजल को रिचार्ज करना।
- सूखा-रोधी फसलों की खेती: कम पानी में तैयार होने वाली फसलें जैसे मक्का, बाजरा, दलहन और तिलहन की बुआई को बढ़ावा देना।
- टपकन (ड्रिप) और फव्वारा (स्प्रिंकलर) सिंचाई: आधुनिक सिंचाई विधियों का उपयोग करना, जिससे पानी की बर्बादी रुके।
- तालाबों और चेकडैमों का निर्माण: ग्रामीण स्तर पर आहर, पइन और चेकडैम बनाकर सतही जल को सुरक्षित रखना।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)
प्रश्न 1. बिहार में बाढ़ की स्थिति का वर्णन करें।
उत्तर:
बिहार देश का सर्वाधिक बाढ़ प्रवृत्त राज्य है। राज्य का उत्तरी मैदान लगभग हर वर्ष विनाशकारी बाढ़ की विभीषिका झेलता है। भौगोलिक रूप से उत्तरी बिहार नेपाल की तराई से सटा हुआ है। जब नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में भारी मानसूनी वर्षा होती है, तो कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, कमला-बलान और महानंदा जैसी नदियाँ उफान पर आ जाती हैं।
- उत्तरी बिहार के सहरसा, सुपौल, मधुबनी, दरभंगा, खगड़िया, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी जिले बाढ़ से सबसे ज्यादा तबाह होते हैं।
- कोसी नदी अपनी धारा बदलने की प्रवृत्ति के कारण सबसे भयानक तबाही लाती है।
- बाढ़ के कारण हर साल लाखों हेक्टेयर में लगी धान व मक्के की फसलें नष्ट हो जाती हैं, सड़कें बह जाती हैं और लाखों लोग बेघर होकर तटबंधों पर शरण लेने को मजबूर होते हैं।
- पानी उतरने के बाद संक्रामक रोग और भुखमरी जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। अतः बिहार का विकास तब तक अधूरा है जब तक कि उत्तरी बिहार की बाढ़ समस्या का स्थाई समाधान (नेपाल से द्विपक्षीय बातचीत द्वारा उच्च बांध निर्माण) नहीं निकल जाता।
प्रश्न 2. बाढ़ के कारणों एवं इसकी सुरक्षा संबंधी उपायों का विस्तृत वर्णन करें।
उत्तर:
- अत्यधिक मानसूनी वर्षा: मानसून के दौरान कुछ ही दिनों में मूसलाधार बारिश होने से नदियों में जल स्तर क्षमता से अधिक बढ़ जाता है।
- नदी तल में गाद (सिल्ट) का जमाव: वनों के कटने से मिट्टी कटकर नदियों में जमा हो जाती है, जिससे नदी की गहराई कम हो जाती है।
- तटबंधों का टूटना: कमजोर और पुराने तटबंध अत्यधिक जल दबाव के कारण टूट जाते हैं और अचानक बस्तियों में पानी भर जाता है।
- अव्यवस्थित निर्माण एवं जलनिकासी का अभाव: सड़कों, रेलवे लाइनों और आवासीय कॉलोनियों के अनियोजित निर्माण ने प्राकृतिक जल निकासी (Drainage) को अवरुद्ध कर दिया है।
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दीर्घकालिक उपाय:
- नदियों के संगम और ऊपरी भागों पर बहुउद्देशीय जलाशयों (Dams) का निर्माण कर अतिरिक्त जल को नियंत्रित करना।
- नदी जोड़ो परियोजना (Inter-linking of Rivers) के माध्यम से बाढ़ वाले क्षेत्रों के अतिरिक्त पानी को सूखाग्रस्त क्षेत्रों में भेजना।
- जलग्रहण क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर वनीकरण (Afforestation) करना।
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अल्पकालिक एवं आकस्मिक उपाय:
- आधुनिक उपग्रहों और रडार प्रणाली से बाढ़ का सटीक पूर्वानुमान और समय पूर्व चेतावनी जारी करना।
- मानसून पूर्व तटबंधों की मजबूती और निगरानी सुनिश्चित करना।
- राहत शिविरों में नावों, लाइफ जैकेटों, शुद्ध पेयजल, दवाइयों और सूखे भोजन का अग्रिम भंडारण करना।
प्रश्न 3. सुखाड़ के कारणों एवं इनके बचाव के तरीकों विस्तृत वर्णन करें।
उत्तर:
- जलवायु परिवर्तन एवं वर्षा की अनिश्चितता: वैश्विक तापमान बढ़ने से मानसूनी पवनों के चक्र में असंतुलन आ गया है, जिससे कई बार लंबे समय तक बारिश नहीं होती।
- वनों का विनाश: जंगलों की कटाई के कारण पर्यावरण का जल चक्र बाधित हुआ है, जिससे स्थानीय स्तर पर वर्षा में निरंतर कमी आई है।
- भूजल का अनियंत्रित दोहन: कृषि और घरेलू कार्यों के लिए ट्यूबवेलों द्वारा भूजल का इतना अधिक निष्कर्षण किया गया है कि वाटर टेबल बहुत गहराई में चला गया है।
- पारंपरिक जल संरचनाओं का क्षरण: पुराने तालाबों, पोखरों, कुओं और आहर-पइन प्रणाली की सफाई न होना और उन पर मकान बना लेना।
- 1. वर्षा जल संचयन (Water Harvesting): हर गांव और कस्बे में वर्षा जल को सीधे जमीन के अंदर उतारने (Groundwater Recharge) के लिए सोख्ता गड्ढे और वाटर रिचार्ज वेल बनाए जाएं।
- 2. पारंपरिक जल स्रोतों का पुनरुद्धार: 'जल-जीवन-हरियाली' जैसे अभियानों के तहत सभी पुराने कुओं, तालाबों और नहरों की उड़ाही (सफाई) की जाए।
- 3. वैज्ञानिक कृषि प्रणाली: किसानों को कम पानी वाली फसलों (मोटा अनाज, दलहन) की खेती के लिए प्रेरित किया जाए तथा स्प्रिंकलर व ड्रिप इरिगेशन पर सब्सिडी दी जाए।
- 4. सूखा प्रबंधन कोष एवं बीमा: किसानों को सूखे की मार से बचाने के लिए फसल बीमा योजना का दायरा बढ़ाया जाए और आपातकालीन चारागाहों की व्यवस्था की जाए।
परियोजना कार्य (Project Work)
1. किसी क्षेत्र में बाढ़ से होनेवाली हानि का आँकड़ा इकट्ठा करें।
संकेत/प्रारूप (विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट फाइल हेतु):
- क्षेत्र का नाम: उत्तरी बिहार (उदा. दरभंगा/सुपौल जिला)
- क्षतिग्रस्त फसल क्षेत्र: लगभग 2.5 लाख हेक्टेयर भूमि
- प्रभावित जनसंख्या: 15 लाख से अधिक लोग
- मवेशियों की क्षति: सैकड़ों पशु बह गए या चारे के अभाव में प्रभावित हुए
- आवासीय क्षति: लगभग 20,000 कच्चे मकान आंशिक या पूर्ण रूप से ध्वस्त
- सार्वजनिक संपत्ति: कई ग्रामीण सड़कें, 12 से अधिक पुलिया और बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त
2. अपने राज्य के सुखार ग्रस्त जिलों की पहचान करें।
उत्तर (बिहार राज्य के संदर्भ में):
बिहार के मुख्य रूप से दक्षिणी और दक्षिण-पश्चिमी जिले सूखे की चपेट में आते हैं। प्रमुख सूखाग्रस्त जिले निम्नलिखित हैं:
- गया
- औरंगाबाद
- नवादा
- जहानाबाद
- अरवल
- रोहतास (पठारी भाग)
- कैमूर
- जमुई
- बांका
(इन जिलों में मानसूनी वर्षा की भारी कमी तथा पथरीली भूमि के कारण जल संकट उत्पन्न होता है)।
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