BSEB कक्षा 10 भूगोल (खंड-क)
इकाई 1: भारत : संसाधन एवं उपयोग (सभी उपखंडों सहित)
150 महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs), सटीक उत्तर एवं विस्तृत व्याख्या
भाग 1: संसाधन की संकल्पना, वर्गीकरण एवं संरक्षण (प्रश्न 1 से 25)
- (A) जिम्मरमैन
- (B) इरेटोस्थनीज
- (C) डार्विन
- (D) मालथस
व्याख्या: प्रसिद्ध अर्थशास्त्री व भूगोलवेत्ता जिम्मरमैन के अनुसार कोई भी वस्तु तब तक संसाधन नहीं बनती जब तक मानव अपनी तकनीक, ज्ञान और आवश्यकता से उसका उपयोग न करे।
- (A) 2
- (B) 3
- (C) 4
- (D) 5
व्याख्या: उत्पत्ति के आधार पर संसाधन दो प्रकार के होते हैं: जैव संसाधन (सजीव जैसे वनस्पति, जीव) और अजैव संसाधन (निर्जीव जैसे चट्टानें, धातुएं)।
- (A) दो (नवीकरणीय और अनवीकरणीय)
- (B) तीन
- (C) चार
- (D) पांच
व्याख्या: जिन्हें भौतिक या रासायनिक प्रक्रियाओं द्वारा पुनः प्राप्त किया जा सके वे नवीकरणीय (सौर ऊर्जा, जल) हैं तथा जिनके निर्माण में लाखों वर्ष लगते हैं वे अनवीकरणीय (कोयला, पेट्रोलियम) हैं।
- (A) सौर ऊर्जा
- (B) पवन ऊर्जा
- (C) जीवाश्म ईंधन (कोयला/पेट्रोलियम)
- (D) जल ऊर्जा
व्याख्या: कोयला और खनिज तेल का भंडार सीमित है और एक बार दोहन के बाद इनका पुनर्भरण संभव नहीं होता।
- (A) 100 NM
- (B) 200 NM
- (C) 150 NM
- (D) 250 NM
व्याख्या: अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून के अनुसार किसी राष्ट्र के तट से 200 नॉटिकल मील (लगभग 370.4 किमी) तक का समुद्री क्षेत्र अनन्य आर्थिक क्षेत्र होता है।
- (A) 10.2 किमी
- (B) 12 समुद्री मील (लगभग 19.2 या 22.2 किमी)
- (C) 200 किमी
- (D) 50 किमी
व्याख्या: किसी भी संप्रभु देश का प्रादेशिक जल (Territorial Waters) तटरेखा से 12 समुद्री मील (22.2 किमी) तक विस्तृत होता है।
- (A) जवाहरलाल नेहरू
- (B) महात्मा गांधी
- (C) डॉ. राजेंद्र प्रसाद
- (D) सुंदरलाल बहुगुणा
व्याख्या: महात्मा गांधी ने संसाधनों के अंधाधुंध दोहन और लालच के विरोध में तथा सतत पोषणीय विकास के पक्ष में यह ऐतिहासिक विचार व्यक्त किया था।
- (A) शुमाकर
- (B) जिम्मरमैन
- (C) अमर्त्य सेन
- (D) एडम स्मिथ
व्याख्या: ई. एफ. शुमाकर ने 1974 में यह पुस्तक लिखी थी, जिसमें उन्होंने गांधीवादी आर्थिक व संसाधन संरक्षण चिंतन को प्रस्तुत किया।
- (A) रियो डी जेनेरो (ब्राजील)
- (B) न्यूयॉर्क (अमेरिका)
- (C) जोहान्सबर्ग (द. अफ्रीका)
- (D) टोक्यो (जापान)
व्याख्या: जून 1992 में ब्राजील के रियो डी जेनेरो में 170 से अधिक देशों के प्रतिनिधि पर्यावरण संरक्षण और 'एजेंडा 21' को स्वीकार करने हेतु एकत्र हुए थे।
- (A) परमाणु अप्रसार
- (B) सतत पोषणीय विकास (Sustainable Development)
- (C) सैन्य गठबंधन
- (D) वैश्विक व्यापार कर
व्याख्या: एजेंडा 21 इक्कीसवीं सदी में पर्यावरण विनाश, गरीबी और बीमारियों से निपटने के लिए स्वीकृत 40 सूत्रीय वैश्विक कार्य योजना है।
- (A) न्यूयॉर्क
- (B) पेरिस
- (C) जेनेवा
- (D) क्योटो
व्याख्या: 1992 के रियो सम्मेलन की पांच वर्षों की प्रगति की समीक्षा के लिए 1997 में न्यूयॉर्क में यह सम्मेलन हुआ था।
- (A) रियो डी जेनेरो
- (B) जोहान्सबर्ग (दक्षिण अफ्रीका)
- (C) नई दिल्ली
- (D) लंदन
व्याख्या: सतत विकास पर विश्व शिखर सम्मेलन अगस्त-सितंबर 2002 में दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में संपन्न हुआ था।
- (A) ओजोन क्षरण और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती (ग्लोबल वार्मिंग)
- (B) प्लास्टिक प्रदूषण
- (C) ध्वनि प्रदूषण
- (D) मरुस्थलीकरण
व्याख्या: जापान के क्योटो में ग्रीनहाउस गैसों (विशेषकर कार्बन डाइऑक्साइड) के उत्सर्जन को सीमित करने हेतु बाध्यकारी संधि हुई थी।
- (A) 1968
- (B) 1972
- (C) 1980
- (D) 1990
व्याख्या: अंतरराष्ट्रीय बौद्धिक संस्था 'क्लब ऑफ रोम' ने 1968 में वैश्विक स्तर पर अनियंत्रित औद्योगिक दोहन को रोकने के लिए संसाधन संरक्षण का प्रस्ताव रखा था।
- (A) ब्रुंटलैंड आयोग (Our Common Future, 1987)
- (B) साइमन कमीशन
- (C) योजना आयोग
- (D) कोठारी आयोग
व्याख्या: 1987 में ब्रुंटलैंड रिपोर्ट 'अवर कॉमन फ्यूचर' में भावी पीढ़ियों की आवश्यकताओं से समझौता किए बिना वर्तमान का विकास करने की परिभाषा दी गई।
- (A) संभाव्य संसाधन (Potential Resources)
- (B) विकसित संसाधन
- (C) भंडार
- (D) संचित कोष
व्याख्या: पश्चिमी भारत (राजस्थान व गुजरात) में सौर और पवन ऊर्जा की भारी संभावना है, किंतु समुचित पूंजी और तकनीक के अभाव में अभी पूर्ण उपयोग नहीं हो पाया है।
- (A) भंडार (Stock)
- (B) संचित कोष
- (C) नवीकरणीय
- (D) व्यक्तिगत
व्याख्या: पर्यावरण में उपलब्ध वे पदार्थ जो मानवीय आवश्यकताओं को पूरा कर सकते हैं लेकिन उपयुक्त तकनीक के अभाव में पहुंच से बाहर हैं, 'भंडार' कहलाते हैं।
- (A) भंडार का
- (B) व्यक्तिगत का
- (C) राष्ट्रीय का
- (D) अंतरराष्ट्रीय का
व्याख्या: संचित कोष भंडार का वह हिस्सा है जिसे उपलब्ध तकनीकी ज्ञान की सहायता से प्रयोग में लाया जा सकता है, किंतु भविष्य के लिए बचाकर रखा गया है (जैसे बांधों का पानी)।
- (A) व्यक्तिगत संसाधन
- (B) सामुदायिक संसाधन
- (C) अंतरराष्ट्रीय संसाधन
- (D) संभावित संसाधन
व्याख्या: जिन संसाधनों पर पूरे समुदाय या समाज का सामूहिक अधिकार होता है, वे सामुदायिक संसाधन कहलाते हैं।
- (A) 32.87 लाख वर्ग किलोमीटर
- (B) 28.5 लाख वर्ग किलोमीटर
- (C) 42.1 लाख वर्ग किलोमीटर
- (D) 35.0 लाख वर्ग किलोमीटर
व्याख्या: भारत का संपूर्ण भौगोलिक क्षेत्रफल 32,87,263 वर्ग किलोमीटर है, जो विश्व के कुल स्थलीय क्षेत्रफल का लगभग 2.4% है।
- (A) 43%
- (B) 30%
- (C) 27%
- (D) 50%
व्याख्या: भारत में 43% भू-भाग मैदानी है जो कृषि और उद्योग के लिए सुलभ है, 30% भाग पर्वतीय है तथा 27% भाग खनिज संपन्न पठारी है।
- (A) 43%
- (B) 30%
- (C) 27%
- (D) 10%
व्याख्या: देश का लगभग 30% भू-क्षेत्र सदाबहार नदियों के प्रवाह और पर्यटन को बढ़ावा देने वाली पर्वत श्रृंखलाओं से आच्छादित है।
- (A) 27%
- (B) 43%
- (C) 30%
- (D) 15%
व्याख्या: भारत का 27% हिस्सा पठारी है, जहाँ देश के अधिकांश धात्विक खनिज, कोयला और वन संचित हैं।
- (A) क्योंकि यहाँ संसाधनों की भारी क्षेत्रीय विविधता और असमान वितरण है
- (B) क्योंकि भारत में कोई संसाधन नहीं है
- (C) क्योंकि सभी राज्य पूर्णतः आत्मनिर्भर हैं
- (D) केवल विदेशी व्यापार बढ़ाने के लिए
व्याख्या: झारखंड-ओडिशा खनिजों में धनी हैं पर जल में नहीं; अरुणाचल जल में धनी है पर अवसंरचना में कमजोर है, इसलिए संतुलित नियोजन आवश्यक है।
- (A) सुंदरलाल बहुगुणा और चंडी प्रसाद भट्ट
- (B) मेधा पाटकर
- (C) डॉ. वर्गीज कुरियन
- (D) अमर्त्य सेन
व्याख्या: 1970 के दशक में उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल क्षेत्र में ग्रामीणों ने पेड़ों से चिपककर उनकी रक्षा की थी, जिसका नेतृत्व सुंदरलाल बहुगुणा ने किया।
भाग 2: प्राकृतिक संसाधन / भूमि एवं मृदा संसाधन (प्रश्न 26 से 50)
- (A) लगभग 80%
- (B) 40%
- (C) 20%
- (D) 10%
व्याख्या: गहन सिंचाई और हरित क्रांति के कारण पंजाब और हरियाणा के 80% से अधिक क्षेत्र पर फसलें उगाई जाती हैं, जबकि पूर्वोत्तर में यह 10% से भी कम है।
- (A) काली मिट्टी
- (B) जलोढ़ मिट्टी (Alluvial Soil)
- (C) लाल एवं पीली मिट्टी
- (D) लेटेराइट मिट्टी
व्याख्या: देश के उत्तरी विशाल मैदान और तटीय डेल्टाई भागों में लगभग 45% (14-15 करोड़ हेक्टेयर) भूमि पर उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी फैली हुई है।
- (A) बांगर
- (B) खादर
- (C) रेगुर
- (D) भाभर
व्याख्या: जो मिट्टी प्रतिवर्ष नदियों की बाढ़ द्वारा नवीन परतों के रूप में बिछाई जाती है, वह बारीक कणों वाली 'खादर' कहलाती है और अत्यधिक उपजाऊ होती है।
- (A) खादर
- (B) बांगर
- (C) लेटेराइट
- (D) बलुई
व्याख्या: बाढ़ के मैदानों से दूर उच्च स्तर पर पाई जाने वाली पुरानी तलछट वाली मिट्टी को बांगर कहते हैं, जिसकी उर्वरता खादर से कम होती है।
- (A) बलुई मिट्टी
- (B) रेगुर मिट्टी (Regur Soil)
- (C) लाल मिट्टी
- (D) पर्वतीय मिट्टी
व्याख्या: काली मिट्टी को स्थानीय भाषा में रेगुर मिट्टी कहते हैं; यह बेसाल्ट चट्टानों के टूटने से बनती है और कपास के लिए सर्वोत्तम होती है।
- (A) कपास
- (B) चाय
- (C) गेहूं
- (D) जूट
व्याख्या: काली मिट्टी की जल-धारण क्षमता बहुत अधिक होती है और इसमें चूना व मैग्नीशियम प्रचुर होता है, जो कपास की जड़ों के लिए आदर्श है।
- (A) महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश (दक्कन का लावा पठार)
- (B) पंजाब और हरियाणा
- (C) असम और नागालैंड
- (D) केरल और तमिलनाडु
व्याख्या: दक्कन ट्रैप की प्राचीन ज्वालामुखी लावा शैलों के अपरदन से महाराष्ट्र और काठियावाड़ (गुजरात) में काली मिट्टी विस्तृत है।
- (A) लेटर (Later)
- (B) लिथोस
- (C) लैपिस
- (D) लेक्स
व्याख्या: ग्रीक शब्द 'Later' का अर्थ ईंट होता है। यह मिट्टी सूखने पर ईंट जैसी अत्यंत कठोर और भीगने पर मक्खन जैसी मुलायम हो जाती है।
- (A) तीव्र निक्षालन (Leaching / लीचिंग) द्वारा
- (B) पवन अपरदन द्वारा
- (C) ज्वालामुखी विस्फोट द्वारा
- (D) नदी निक्षेप द्वारा
व्याख्या: अत्यधिक तापमान और भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में जल में घुलनशील सिलिका और चूना बह जाते हैं, जिससे लोहा व एल्युमिनियम युक्त लेटेराइट मिट्टी बचती है।
- (A) लाल लेटेराइट मिट्टी
- (B) काली मिट्टी
- (C) जलोढ़ मिट्टी
- (D) खारी मिट्टी
व्याख्या: तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश में उचित खाद व उर्वरक के प्रयोग से लाल लेटेराइट मिट्टी काजू के उत्पादन के लिए सर्वोत्तम है।
- (A) राजस्थान
- (B) उत्तर प्रदेश
- (C) बिहार
- (D) मध्य प्रदेश
व्याख्या: थार मरुस्थल के कारण पश्चिमी राजस्थान में बालू के कणों वाली, लवण युक्त और अल्प ह्यूमस वाली मरुस्थलीय मिट्टी पाई जाती है।
- (A) बेंजीन
- (B) यूरिया
- (C) एंड्रिन (Endrin)
- (D) फॉस्फोरस
व्याख्या: खेतों में कीटनाशक के रूप में प्रयुक्त एंड्रिन रसायन जलस्रोतों में मिलकर उभयचरों (मेंढकों) की प्रजनन क्षमता को समाप्त कर देता है।
- (A) उत्तराखंड एवं हिमाचल प्रदेश
- (B) बिहार के मैदानी भाग
- (C) पंजाब
- (D) हरियाणा
व्याख्या: पर्वतीय ढलानों पर मिट्टी के तीव्र कटाव और जल प्रवाह को रोकने के लिए सीढ़ीनुमा खेत बनाकर खेती की जाती है।
- (A) रक्षक मेखला (Shelter Belts)
- (B) झूम खेती
- (C) समोच्च जुताई
- (D) पट्टी कृषि
व्याख्या: हवा के वेग को मंद करने और बालू के टीलों को स्थिर करने के लिए खेतों के किनारों पर पेड़ों की लंबी बाड़ लगाना रक्षक मेखला कहलाता है।
- (A) समोच्च जुताई (Contour Ploughing)
- (B) गहन जुताई
- (C) स्थानांतरण जुताई
- (D) शुष्क जुताई
व्याख्या: ढलान के समानांतर समोच्च रेखाओं पर हल चलाने से प्राकृतिक बांध बन जाते हैं जो वर्षा जल के बहाव को रोकते हैं।
- (A) वनोन्मूलन
- (B) अति पशुचारण
- (C) अत्यधिक सिंचाई (Over-irrigation)
- (D) खनन कार्य
व्याख्या: अत्यधिक नहरी व नलकूप सिंचाई से पंजाब की मिट्टी में जलभराव (Waterlogging) हो गया है, जिससे मिट्टी की लवणता और क्षारीयता बढ़ गई है।
- (A) अति पशुचारण (Overgrazing)
- (B) अत्यधिक रासायनिक खाद
- (C) अत्यधिक वर्षा
- (D) भूस्खलन
व्याख्या: मवेशियों द्वारा घास के अत्यधिक चरने से मिट्टी की ऊपरी परत की वनस्पति नष्ट हो जाती है, जिससे तेज हवा और बारिश से मिट्टी कटने लगती है।
- (A) खनन के उपरांत खुली खदानों को छोड़ना और वनोन्मूलन
- (B) अत्यधिक नहरी सिंचाई
- (C) तेज समुद्री लहरें
- (D) बर्फबारी
व्याख्या: कोयला और लौह-अयस्क के गहरे उत्खनन के कारण जंगलों की कटाई और मलबे के फैलाव से लाखों हेक्टेयर भूमि बंजर हो चुकी है।
- (A) मैग्नीशियम की अधिकता
- (B) लौह अंश (आयरन ऑक्साइड) के व्यापक प्रसार के कारण
- (C) चूने के कारण
- (D) फॉस्फोरस के कारण
व्याख्या: आग्नेय और रूपांतरित चट्टानों में लोहे के यौगिकों के विसरण से इसका रंग लाल दिखता है; जल मिलने पर यह पीली दिखाई देती है।
- (A) लगभग 13 करोड़ हेक्टेयर
- (B) 5 करोड़ हेक्टेयर
- (C) 25 करोड़ हेक्टेयर
- (D) 2 करोड़ हेक्टेयर
व्याख्या: देश की लगभग 130 मिलियन (13 करोड़) हेक्टेयर भूमि जल अपरदन, वायु अपरदन और लवणता के कारण गंभीर रूप से निम्नीकृत है।
- (A) 4
- (B) 6
- (C) 8
- (D) 12
व्याख्या: ICAR ने भारतीय मृदा को जलोढ़, काली, लाल-पीली, लेटेराइट, मरुस्थलीय, पर्वतीय, लवणीय और जैव/पीट मिट्टियों में वर्गीकृत किया है।
- (A) लेटेराइट मिट्टी
- (B) मरुस्थलीय मिट्टी
- (C) काली मिट्टी
- (D) जलोढ़ मिट्टी
व्याख्या: इन भागों में भारी मानसूनी वर्षा के कारण तीव्र लीचिंग से लेटेराइट मिट्टी के मोटे संस्तर विकसित हुए हैं।
- (A) जलोढ़ मिट्टी
- (B) लाल मिट्टी
- (C) काली मिट्टी
- (D) लेटेराइट मिट्टी
व्याख्या: सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी प्रणालियों द्वारा लाखों वर्षों से लाए गए गाद के निरंतर जमाव से इस मैदान का निर्माण हुआ है।
- (A) वर्तमान परती भूमि (Current Fallow)
- (B) बंजर भूमि
- (C) स्थायी चारागाह
- (D) शुद्ध बोया गया क्षेत्र
व्याख्या: मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता को पुनः लौटाने के लिए जब किसान खेत को एक सीजन या एक वर्ष के लिए खाली छोड़ते हैं, तो उसे वर्तमान परती कहते हैं।
- (A) 20%
- (B) 25%
- (C) 33%
- (D) 40%
व्याख्या: पारिस्थितिक संतुलन और पर्यावरणीय स्थिरता बनाए रखने के लिए न्यूनतम 33% भू-भाग पर वनाच्छादन अनिवार्य माना गया है।
भाग 3: जल संसाधन (प्रश्न 51 से 75)
- (A) 71%
- (B) 60%
- (C) 80%
- (D) 50%
व्याख्या: पृथ्वी के लगभग 71% भाग पर महासागर व जलमंडल है और केवल 29% भाग पर स्थल है; अंतरिक्ष से नीले दिखने के कारण इसे 'नीला ग्रह' कहते हैं।
- (A) 96.5%
- (B) 90%
- (C) 75%
- (D) 50%
व्याख्या: कुल वैश्विक जल का 96.5% हिस्सा सागरों व महासागरों में अत्यधिक लवणीय रूप में है, और केवल 2.5% जल ही मीठा (अलवणीय) है।
- (A) लगभग 70%
- (B) 20%
- (C) 10%
- (D) 50%
व्याख्या: अलवणीय जल का लगभग 68.7% भाग अंटार्कटिका, ग्रीनलैंड और हिमालय के ग्लेशियरों में स्थायी रूप से जमा हुआ है।
- (A) 4%
- (B) 10%
- (C) 16%
- (D) 1%
व्याख्या: भारत में विश्व की लगभग 17.5% आबादी निवास करती है, किंतु देश के हिस्से में वैश्विक नवीकरणीय जल संसाधनों का मात्र 4% आता है।
- (A) दामोदर घाटी परियोजना (DVC)
- (B) भाखड़ा नांगल
- (C) हीराकुंड
- (D) कोसी परियोजना
व्याख्या: संयुक्त राज्य अमेरिका की टेनेसी वैली योजना पर आधारित दामोदर घाटी निगम की स्थापना 7 जुलाई 1948 को हुई थी।
- (A) महात्मा गांधी
- (B) पंडित जवाहरलाल नेहरू
- (C) सरदार वल्लभभाई पटेल
- (D) लाल बहादुर शास्त्री
व्याख्या: देश के पहले प्रधानमंत्री नेहरू ने बांधों को आधुनिक भारत का मंदिर कहा था क्योंकि वे कृषि और औद्योगीकरण दोनों को एक साथ गति देते हैं।
- (A) हीराकुंड बांध
- (B) भाखड़ा बांध
- (C) टिहरी बांध
- (D) सरदार सरोवर
व्याख्या: ओडिशा के संबलपुर के पास महानदी पर निर्मित हीराकुंड बांध मुख्य रूप से 4.8 किमी और तटबंधों सहित लगभग 25.8 किमी लंबा विश्वप्रसिद्ध बांध है।
- (A) भाखड़ा नांगल बांध
- (B) नागार्जुन सागर
- (C) रिहंद बांध
- (D) तुंगभद्रा बांध
व्याख्या: पंजाब और हिमाचल की सीमा पर सतलुज नदी पर बना भाखड़ा बांध 226 मीटर ऊंचा कंक्रीट का सीधा गुरुत्वीय बांध है।
- (A) टिहरी बांध (उत्तराखंड)
- (B) भाखड़ा
- (C) हीराकुंड
- (D) नागार्जुन सागर
व्याख्या: उत्तराखंड के गढ़वाल में भागीरथी और भिलंगना नदी के संगम पर बना टिहरी बांध 260.5 मीटर ऊंचा है।
- (A) कृष्णा नदी
- (B) गोदावरी नदी
- (C) कावेरी नदी
- (D) नर्मदा नदी
व्याख्या: आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की सीमा पर कृष्णा नदी पर नागार्जुन सागर विशाल चिनाई बांध बनाया गया है।
- (A) नर्मदा नदी
- (B) ताप्ती नदी
- (C) साबरमती
- (D) माही
व्याख्या: गुजरात के नवगाम के पास नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर बांध बनाया गया है, जो गुजरात और राजस्थान के सूखाग्रस्त इलाकों को पानी देता है।
- (A) मेधा पाटकर
- (B) सुंदरलाल बहुगुणा
- (C) चंडी प्रसाद
- (D) मेनका गांधी
व्याख्या: सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई बढ़ाने से विस्थापित होने वाले आदिवासियों और वनों के डूबने के विरोध में मेधा पाटकर ने यह गैर-सरकारी आंदोलन चलाया।
- (A) सोन नदी घाटी परियोजना
- (B) कोसी परियोजना
- (C) गंडक परियोजना
- (D) बागमती परियोजना
व्याख्या: ब्रिटिश शासनकाल में 1874 में डेहरी में सोन नदी पर बांध बनाकर दक्षिण-पश्चिम बिहार के लिए यह ऐतिहासिक नहर प्रणाली विकसित की गई थी।
- (A) 1955
- (B) 1948
- (C) 1970
- (D) 1985
व्याख्या: कोसी की विनाशकारी बाढ़ को रोकने के लिए भारत और नेपाल के समझौते के बाद 1955 में बीरपुर बराज का निर्माण प्रारंभ हुआ था।
- (A) तमिलनाडु
- (B) राजस्थान
- (C) बिहार
- (D) पंजाब
व्याख्या: तमिलनाडु देश का पहला राज्य है जहाँ भूजल पुनर्भरण के लिए हर पक्के मकान की छत पर वर्षा जल संचयन तंत्र अनिवार्य कर दिया गया है।
- (A) टांका (Tanka)
- (B) कुआं
- (C) बावली
- (D) तालाब
व्याख्या: बीकानेर, बाड़मेर और फलोदी में छतों के साफ पानी को घर के आंगनों में पक्के ढके हुए भूमिगत कुंडों (टांका) में साल भर के लिए संचित किया जाता है।
- (A) पार्लर पानी (Palar Pani)
- (B) अमृत जल
- (C) खारा जल
- (D) जीवन नीर
व्याख्या: मरुस्थलीय राजस्थान में प्राकृतिक वर्षा से प्राप्त शुद्धतम मीठे पानी को 'पार्लर पानी' कहा जाता है।
- (A) बांस ड्रिप सिंचाई प्रणाली (Bamboo Drip Irrigation)
- (B) ट्यूबवेल
- (C) नहर
- (D) रहट
व्याख्या: पहाड़ी झरनों के जल को बांस के खोखले पाइपों से सैकड़ों मीटर दूर ले जाकर पौधों की जड़ों पर टपकाने की यह स्वदेशी तकनीक है।
- (A) जल प्रदूषण और औद्योगिक रसायनों का जलस्रोतों में मिलना
- (B) बढ़ता शहरीकरण और अत्यधिक दोहन
- (C) जल का असमान वितरण
- (D) उपर्युक्त सभी
व्याख्या: दूषित जल पीने योग्य नहीं रहता, तथा अत्यधिक आबादी और उद्योगों द्वारा भूजल का अनियंत्रित दोहन जल संकट को जन्म देता है।
- (A) तालाब
- (B) नलकूप
- (C) बड़ी नहरें
- (D) स्प्रिंकलर
व्याख्या: दक्कन के प्रायद्वीपीय पठार की चट्टानी कठोर संरचना के कारण कुएं या नहरें खोदना कठिन होता है, अतः प्राकृतिक गड्ढों में तालाब बनाकर जल रोका जाता है।
- (A) नलकूप (Tube-wells)
- (B) नहरें
- (C) तालाब
- (D) कुएं
व्याख्या: हरित क्रांति के बाद देश की 60% से अधिक कृषि भूमि नलकूपों (बिजली और डीजल पंपसेटों) के माध्यम से सींची जाती है।
- (A) सितंबर 1987
- (B) 1950
- (C) 2000
- (D) 2014
व्याख्या: जल को दुर्लभ राष्ट्रीय संपत्ति मानते हुए पहली बार 1987 में राष्ट्रीय जल नीति बनी, जिसे बाद में 2002 और 2012 में संशोधित किया गया।
- (A) इंदिरा गांधी नहर (राजस्थान नहर)
- (B) त्रिवेणी नहर
- (C) सरहिंद नहर
- (D) ऊपरी गंगा नहर
व्याख्या: पंजाब में सतलुज और ब्यास के संगम पर 'हरिके बराज' से निकाली गई यह 649 किमी लंबी नहर पश्चिमी राजस्थान की जीवन रेखा है।
- (A) उत्तर प्रदेश, गोविंद वल्लभ पंत सागर
- (B) बिहार, गांधी सागर
- (C) मध्य प्रदेश, जवाहर सागर
- (D) पंजाब, गोविंद सागर
व्याख्या: उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में रिहंद नदी पर बना 'गोविंद वल्लभ पंत सागर' भारत की सबसे बड़ी मानव निर्मित कृत्रिम झीलों में से एक है।
- (A) गांधी सागर, राणा प्रताप सागर और जवाहर सागर
- (B) हीराकुंड, टिहरी, भाखड़ा
- (C) तिलैया, मैथन, पंचेत
- (D) कोयना, उकाई, काकरापार
व्याख्या: मध्य प्रदेश में गांधी सागर तथा राजस्थान के कोटा-चित्तौड़गढ़ में राणा प्रताप सागर और जवाहर सागर बांध चंबल नदी पर निर्मित हैं।
भाग 4: वन एवं वन्यजीव संसाधन (प्रश्न 76 से 100)
- (A) 21.71% (वृक्षावरण सहित 24.62%)
- (B) 15%
- (C) 33%
- (D) 10%
व्याख्या: भारत में लगभग 7.13 लाख वर्ग किमी क्षेत्र पर वन फैले हैं जो कुल क्षेत्रफल का लगभग 21.71% है।
- (A) मध्य प्रदेश
- (B) अरुणाचल प्रदेश
- (C) मिजोरम
- (D) छत्तीसगढ़
व्याख्या: कुल वर्ग किलोमीटर (क्षेत्रफल) की दृष्टि से मध्य प्रदेश में देश का सबसे विशाल वन क्षेत्र (लगभग 77,000 वर्ग किमी) मौजूद है।
- (A) मिजोरम (लगभग 84.5%)
- (B) मध्य प्रदेश
- (C) बिहार
- (D) उत्तर प्रदेश
व्याख्या: मिजोरम के कुल क्षेत्रफल के 84.5% से अधिक भाग पर वनाच्छादन है, जो प्रतिशत अनुपात में देश में शीर्ष पर है।
- (A) तीन (आरक्षित, रक्षित और अवर्गीकृत वन)
- (B) दो
- (C) चार
- (D) पांच
व्याख्या: सरकार द्वारा वनों को आरक्षित (Reserved - पूर्ण प्रतिबंध), रक्षित (Protected - सीमित अनुमति) और अवर्गीकृत (Unclassed) में बांटा गया है।
- (A) आरक्षित वन (Reserved Forests)
- (B) रक्षित वन
- (C) अवर्गीकृत वन
- (D) निजी वन
व्याख्या: 54% से अधिक वन आरक्षित श्रेणी में हैं, जिन्हें स्थायी वन संपदा और वन्यजीव संरक्षण के लिए सबसे मूल्यवान माना जाता है।
- (A) अवर्गीकृत वन (Unclassed Forests)
- (B) आरक्षित वन
- (C) रक्षित वन
- (D) राष्ट्रीय उद्यान
व्याख्या: अवर्गीकृत वनों में सरकार के साथ-साथ जनजातीय समुदायों और निजी व्यक्तियों का मालिकाना हक होता है।
- (A) 1972
- (B) 1980
- (C) 1986
- (D) 1992
व्याख्या: वन्यजीवों के अवैध शिकार, तस्करी और उनके प्राकृतिक आवास के संरक्षण के लिए 1972 में यह ऐतिहासिक कानून पारित हुआ।
- (A) 1973
- (B) 1982
- (C) 1990
- (D) 1965
व्याख्या: भारत में बाघों की तेजी से घटती संख्या को रोकने के लिए 1 अप्रैल 1973 को जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क से प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत हुई थी।
- (A) उत्तराखंड
- (B) असम
- (C) मध्य प्रदेश
- (D) राजस्थान
व्याख्या: नैनीताल (उत्तराखंड) में स्थित इस अभयारण्य का पुराना नाम 'हेली नेशनल पार्क' था।
- (A) काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (असम)
- (B) रणथंभौर
- (C) सुंदरवन
- (D) बांदीपुर
व्याख्या: असम के गोलाघाट व नगांव जिलों में ब्रह्मपुत्र नदी के कछार में फैला काजीरंगा विश्व के दो-तिहाई एक सींग वाले गैंडों का घर है।
- (A) पश्चिम बंगाल; सुंदरी वृक्ष और रॉयल बंगाल टाइगर
- (B) ओडिशा; साल वृक्ष
- (C) असम; हाथी
- (D) गुजरात; एशियाई बब्बर शेर
व्याख्या: गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा में स्थित मैंग्रोव वन 'सुंदरी' वृक्षों के कारण सुंदरवन कहलाते हैं, जहाँ रॉयल बंगाल टाइगर रहते हैं।
- (A) एशियाई शेर (Asiatic Lion)
- (B) ध्रुवीय भालू
- (C) कस्तूरी मृग
- (D) हिम तेंदुआ
व्याख्या: सौराष्ट्र (गुजरात) का गिर वन दुनिया में एशियाई शेरों का अंतिम बचा हुआ प्राकृतिक शरणस्थल है।
- (A) रेड डाटा बुक (Red Data Book)
- (B) ग्रीन बुक
- (C) ब्लैक लिस्ट
- (D) ब्लू बुक
व्याख्या: इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) संकटग्रस्त, विलुप्तप्राय और दुर्लभ प्रजातियों का विवरण रेड डाटा बुक में प्रकाशित करता है।
- (A) गंगा डॉल्फिन (Gangetic Dolphin)
- (B) घड़ियाल
- (C) समुद्री कछुआ
- (D) व्हेल
व्याख्या: 5 अक्टूबर 2009 को भारत सरकार ने मीठे पानी की अंधी गंगा नदी डॉल्फिन (सोंस) को राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया।
- (A) भैरोंदेव डाकव 'सेंचुरी'
- (B) खेजड़ली अभयारण्य
- (C) बिश्नोई सेंचुरी
- (D) थार पार्क
व्याख्या: यहाँ के ग्रामीणों ने अपने नियम स्वयं बनाकर शिकार पर पूर्ण रोक लगाई और बाहरी हस्तक्षेप से वन्यजीवों की रक्षा की।
- (A) काला हिरण (कृष्णमृग), चिंकारा और खेजड़ी वृक्ष
- (B) बाघ
- (C) भालू
- (D) गैंडा
व्याख्या: 1730 में अमृता देवी बिश्नोई के नेतृत्व में 363 लोगों ने खेजड़ी के पेड़ों और हिरणों को बचाने के लिए आत्मबलिदान दिया था।
- (A) ओडिशा
- (B) पश्चिम बंगाल
- (C) बिहार
- (D) मध्य प्रदेश
व्याख्या: जेएफएम में स्थानीय ग्रामीण समुदाय और वन विभाग मिलकर नष्ट हुए वनों की बहाली करते हैं और गैर-इमारती वन उपज का लाभ साझा करते हैं।
- (A) लीसा (Resin)
- (B) कत्था
- (C) लाख
- (D) रबर
व्याख्या: हिमालयी चीड़ के तने से प्राप्त होने वाले लीसे से तारपीन का तेल, वार्निश और औषधियां बनाई जाती हैं।
- (A) हिमालयन यव (Taxus wallichiana)
- (B) नीम
- (C) तुलसी
- (D) सर्पगंधा
व्याख्या: हिमाचल प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश में पाए जाने वाले 'चीड़' जाति के सदाबहार वृक्ष यव की छाल और पत्तियों से टैक्सोल निकाला जाता है।
- (A) केवल भारत में
- (B) चीन में
- (C) रूस में
- (D) ब्राजील में
व्याख्या: सर्पगंधा भारत की पारंपरिक आयुर्वेदिक वनस्पति है जिसकी जड़ों से रक्तचाप और अनिद्रा की अचूक दवा बनती है।
- (A) वन्यजीवों तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से
- (B) मृदा संरक्षण से
- (C) जल बंटवारे से
- (D) कर संग्रह से
व्याख्या: भारतीय संविधान के नीति निर्देशक तत्वों (अनुच्छेद 48A) और कर्तव्यों (51A-g) के साथ धारा 21 पर्यावरण व वन्य जीवन के संवर्धन को जीवन के अधिकार से जोड़ती है।
- (A) मध्य प्रदेश (उमरिया)
- (B) राजस्थान
- (C) महाराष्ट्र
- (D) गुजरात
व्याख्या: बांधवगढ़ में बाघों का घनत्व भारत में सर्वाधिक है और यह ऐतिहासिक रूप से रीवा के सफेद बाघों का क्षेत्र रहा है।
- (A) केरल
- (B) तमिलनाडु
- (C) कर्नाटक
- (D) आंध्र प्रदेश
व्याख्या: पश्चिमी घाट की इलायची पहाड़ियों में स्थित पेरियार झील के चारों ओर यह प्रसिद्ध अभयारण्य फैला है।
- (A) मध्य प्रदेश
- (B) उत्तर प्रदेश
- (C) बिहार
- (D) असम
व्याख्या: मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान कान्हा है, जो बारहसिंगा (दलदल का हिरण) के संरक्षण के लिए विख्यात है।
- (A) पश्चिमी घाट और पूर्वी हिमालय
- (B) अरावली और विंध्याचल
- (C) थार मरुस्थल और सुंदरवन
- (D) गंगा का मैदान और मालवा पठार
व्याख्या: ये दोनों क्षेत्र वैश्विक स्तर पर अत्यधिक स्थानिक जैव विविधता और प्रजाति समृद्धि से संपन्न हैं।
भाग 5: खनिज संसाधन (प्रश्न 101 से 125)
- (A) राजस्थान
- (B) झारखंड
- (C) बिहार
- (D) मध्य प्रदेश
व्याख्या: राजस्थान में जस्ता, सीसा, संगमरमर, जिप्सम, चांदी आदि विभिन्न प्रकार के 80 से अधिक गैर-धात्विक व धात्विक खनिजों के भंडार पाए जाते हैं।
- (A) छोटानागपुर का पठार (झारखंड)
- (B) मालवा का पठार
- (C) शिलांग का पठार
- (D) तिब्बत का पठार
व्याख्या: भारत का लगभग 40% खनिज (कोयला, लोहा, अभ्रक, बॉक्साइट, तांबा) छोटानागपुर पठारी क्षेत्र में केंद्रित है।
- (A) लोहा (Iron)
- (B) सोना
- (C) तांबा
- (D) कोयला
व्याख्या: कोई भी छोटा औजार हो या विशाल मशीन, रेल पटरियां या इमारतें, सभी का निर्माण लोहे पर निर्भर है, इसलिए इसे आधुनिक उद्योगों की जननी कहते हैं।
- (A) मैग्नेटाइट (Magnetite)
- (B) हेमेटाइट
- (C) लिमोनाइट
- (D) सिडेराइट
व्याख्या: मैग्नेटाइट काले रंग का सर्वोत्तम चुंबकीय लौह अयस्क है जिसमें 72% तक शुद्ध लोहा पाया जाता है।
- (A) हेमेटाइट (Hematite)
- (B) मैग्नेटाइट
- (C) लिमोनाइट
- (D) पाइराइट
व्याख्या: भारत के कुल लौह अयस्क भंडार का सबसे बड़ा भाग हेमेटाइट (60-70% लौहांश) है, जो ओडिशा और झारखंड में प्रचुरता से मिलता है।
- (A) ओडिशा
- (B) कर्नाटक
- (C) छत्तीसगढ़
- (D) गोवा
व्याख्या: ओडिशा देश के कुल लौह अयस्क उत्पादन का 50% से अधिक हिस्सा अकेले मयूरभंज, क्योंझर और सुंदरगढ़ की खानों से निकालता है।
- (A) हेमेटाइट
- (B) लिग्नाइट
- (C) बॉक्साइट
- (D) सिडेराइट
व्याख्या: दंतेवाड़ा जिले की बैलाडीला पहाड़ियों से निकाले जाने वाले हेमेटाइट लोहे को विशाखापत्तनम बंदरगाह से जापान निर्यात किया जाता है।
- (A) कुद्रेमुख (Kudremukh)
- (B) बाबा बुदन
- (C) नीलगिरी
- (D) नल्लामलाई
व्याख्या: कुद्रेमुख (घोड़े के मुख जैसी पहाड़ी) से लौह अयस्क को घोल (Slurry) बनाकर पाइपलाइन द्वारा मंगलौर बंदरगाह भेजा जाता है।
- (A) 10 किलोग्राम
- (B) 5 किलोग्राम
- (C) 25 किलोग्राम
- (D) 50 किलोग्राम
व्याख्या: लोहे को कठोर, मजबूत और जंगरोधी स्टील तथा फेरो-मैंगनीज मिश्र धातु में बदलने के लिए प्रति टन लगभग 10 किग्रा मैंगनीज लगता है।
- (A) मध्य प्रदेश (बालाघाट)
- (B) ओडिशा
- (C) महाराष्ट्र
- (D) कर्नाटक
व्याख्या: मध्य प्रदेश का बालाघाट-छिंदवाड़ा क्षेत्र देश के कुल मैंगनीज उत्पादन में प्रथम स्थान रखता है।
- (A) बॉक्साइट (Bauxite)
- (B) हेमेटाइट
- (C) डोलोमाइट
- (D) चूना पत्थर
व्याख्या: बॉक्साइट एल्युमिनियम का जलयुक्त ऑक्साइड अयस्क है, जिससे शोधन कर एल्युमिना और फिर हल्की व जंगरोधी एल्युमिनियम धातु बनती है।
- (A) ओडिशा
- (B) गुजरात
- (C) झारखंड
- (D) महाराष्ट्र
व्याख्या: ओडिशा के कोरापुट जिले की 'पंचपतमली' खदानें देश का सबसे समृद्ध और बड़ा बॉक्साइट भंडार हैं।
- (A) तांबा (Copper)
- (B) लोहा
- (C) सोना
- (D) जस्ता
व्याख्या: सिंधु घाटी सभ्यता के समय से खेतड़ी तांबे के खनन का केंद्र रहा है; वर्तमान में हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड यहाँ कार्यरत है।
- (A) तांबा
- (B) कोयला
- (C) बॉक्साइट
- (D) जिप्सम
व्याख्या: बालाघाट जिले की मलांजखंड खुली तांबा खदान भारत के कुल तांबा उत्पादन का 50% से अधिक हिस्सा प्रदान करती है।
- (A) अभ्रक (Mica)
- (B) ग्रेफाइट
- (C) लोहा
- (D) तांबा
व्याख्या: अभ्रक उच्च वोल्टेज सहने वाला उत्कृष्ट पारदर्शी विद्युत-रोधी खनिज है, जो इलेक्ट्रॉनिक व रेडियो उद्योग में अनिवार्य है।
- (A) कोडरमा-हजारीबाग-गिरिडीह पेटी
- (B) धनबाद
- (C) रांची
- (D) जमशेदपुर
व्याख्या: झारखंड का कोडरमा जिला श्वेत और हल्के लाल रंग के उच्च कोटि के रूबी अभ्रक के उत्पादन में विश्व भर में विख्यात है।
- (A) चूना पत्थर (Limestone)
- (B) जिप्सम
- (C) कोयला
- (D) बालू
व्याख्या: पोर्टलैंड सीमेंट के निर्माण में 60 से 65% तक चूना पत्थर प्रयुक्त होता है, जो विंध्य और कड़प्पा शैलों से मिलता है।
- (A) रोहतास (कैमूर की पहाड़ी)
- (B) पटना
- (C) मुजफ्फरपुर
- (D) गया
व्याख्या: रोहतास और कैमूर की विंध्य चूना पत्थर पहाड़ियों के कारण ही डालमियानगर और बंजारी में सीमेंट कारखाने स्थापित हुए।
- (A) बरौनी (बेगूसराय)
- (B) पटना
- (C) गया
- (D) भागलपुर
व्याख्या: 1964 में सोवियत संघ के सहयोग से बरौनी में इंडियन ऑयल रिफाइनरी की स्थापना की गई थी।
- (A) जमुई (सोनो प्रखंड)
- (B) बांका
- (C) नवादा
- (D) मुंगेर
व्याख्या: भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के अनुसार जमुई जिले के करमटिया/सोनो इलाके में भारत का सबसे बड़ा स्वर्ण धातु अयस्क भंडार मौजूद है।
- (A) थोरियम (Thorium)
- (B) यूरेनियम
- (C) प्लूटोनियम
- (D) टाइटेनियम
व्याख्या: केरल के मालाबार समुद्री तट की काली मोनाजाइट रेत में भारत का विश्व में सबसे बड़ा थोरियम भंडार पाया जाता है।
- (A) जादूगोड़ा (झारखंड)
- (B) खेतड़ी
- (C) झरिया
- (D) डिगबोई
व्याख्या: पूर्वी सिंहभूम जिले के जादूगोड़ा में यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (UCIL) द्वारा 1967 से आणविक ईंधन का खनन किया जा रहा है।
- (A) राजस्थान (उदयपुर)
- (B) गुजरात
- (C) मध्य प्रदेश
- (D) आंध्र प्रदेश
व्याख्या: हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की जावर खदानें देश में जस्ते और चांदी की प्रमुख स्रोत हैं।
- (A) मूर्खों का सोना (Fool's Gold)
- (B) काला हीरा
- (C) श्वेत धातु
- (D) पीतल
व्याख्या: सोने जैसी पीली धात्विक चमक के कारण आयरन पाइराइट को मूर्खों का सोना कहा जाता है; बिहार के रोहतास (अमझोर) में इसके भंडार हैं।
- (A) धातुओं का पुनर्चक्रण (Recycling), अपशिष्ट कम करना और विकल्पों की खोज
- (B) खनन पर पूरी तरह रोक लगाना
- (C) सारा खनिज विदेशों से आयात करना
- (D) केवल गैर-धात्विक खनिजों का उपयोग करना
व्याख्या: स्क्रैप मेटल का बार-बार पुनर्चक्रण और उन्नत खनन तकनीक खनिजों की आयु को कई गुना बढ़ा देती है।
भाग 6: शक्ति या ऊर्जा संसाधन (प्रश्न 126 से 150)
- (A) कोयला (Coal)
- (B) पेट्रोलियम
- (C) परमाणु ऊर्जा
- (D) सौर ऊर्जा
व्याख्या: भारत की 55% से अधिक बिजली थर्मल पावर (ताप विद्युत संयंत्रों) में कोयला जलाकर ही पैदा की जाती है।
- (A) एन्थ्रेसाइट (Anthracite - 80-90% से अधिक कार्बन)
- (B) बिटुमिनस
- (C) लिग्नाइट
- (D) पीट
व्याख्या: एन्थ्रेसाइट सबसे शुद्ध व चमकदार कोयला है जो नीली लौ के साथ अत्यधिक ऊष्मा देता है; भारत में यह केवल जम्मू-कश्मीर में अल्प मात्रा में मिलता है।
- (A) बिटुमिनस (Bituminous)
- (B) एन्थ्रेसाइट
- (C) लिग्नाइट
- (D) पीट
व्याख्या: भारत के कुल कोयला भंडार का 90% से अधिक बिटुमिनस कोयला है, जिसका उपयोग धातु शोधन और बिजली बनाने में होता है।
- (A) लिग्नाइट (Lignite)
- (B) बिटुमिनस
- (C) पीट
- (D) कोक
व्याख्या: लिग्नाइट में नमी अधिक और कार्बन 40-55% होता है; इसका सबसे बड़ा भंडार तमिलनाडु के नेवेली बेसिन में है।
- (A) गोंडवाना समूह (Gondwana Formations)
- (B) टर्शियरी समूह
- (C) धारवाड़ समूह
- (D) विंध्य समूह
व्याख्या: लगभग 20 करोड़ वर्ष पुराने गोंडवाना कोयले के निक्षेप दामोदर, सोन, महानदी और गोदावरी नदी घाटियों में संचित हैं।
- (A) झारखंड
- (B) ओडिशा
- (C) छत्तीसगढ़
- (D) पश्चिम बंगाल
व्याख्या: झरिया, धनबाद, बोकारो और कर्णपुरा की खानों के कारण भारत के कुल संचित कोयला भंडार में झारखंड प्रथम स्थान रखता है।
- (A) रानीगंज (पश्चिम बंगाल)
- (B) झरिया
- (C) सिंगरौली
- (D) कोरबा
व्याख्या: दामोदर नदी के किनारे स्थित रानीगंज कोलफील्ड भारत में कोयले का जन्मस्थान माना जाता है।
- (A) डिगबोई (असम)
- (B) बॉम्बे हाई
- (C) अंकलेश्वर
- (D) कलोल
व्याख्या: असम के लखीमपुर जिले का डिगबोई एशिया और भारत का सबसे पहला सक्रिय तेल क्षेत्र और तेल शोधनागार है।
- (A) बॉम्बे हाई (Mumbai High)
- (B) बसीन
- (C) आलियाबेट
- (D) कावेरी बेसिन
व्याख्या: 1974 में खोजा गया बॉम्बे हाई एक अपतटीय मंच 'सागर सम्राट' द्वारा देश के कुल कच्चे तेल का सबसे बड़ा अंश उत्पादित करता है।
- (A) समुद्र में तेल खनन के लिए बनाया गया स्वचालित तैरता हुआ जलयान / ड्रिलिंग रिग
- (B) एक युद्धपोत
- (C) एक विशाल बांध
- (D) एक वैज्ञानिक उपग्रह
व्याख्या: ओएनजीसी (ONGC) ने जापान से यह विशेष जलयान मंगाया था, जो समुद्र के तल में गहरे कुएं खोदने में सक्षम है।
- (A) अंकलेश्वर
- (B) जामनगर
- (C) सूरत
- (D) वडोदरा
व्याख्या: भरूच जिले में नर्मदा घाटी के पास स्थित अंकलेश्वर को पंडित नेहरू ने तेल की समृद्धि के कारण 'वसुंधरा का फव्वारा' कहा था।
- (A) ONGC (तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम)
- (B) SAIL
- (C) BHEL
- (D) NTPC
व्याख्या: 14 अगस्त 1956 को स्थापित ओएनजीसी भारत के घरेलू हाइड्रोकार्बन अन्वेषण का मुख्य आधार है।
- (A) GAIL (गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड)
- (B) IOCL
- (C) BPCL
- (D) HPCL
व्याख्या: 1984 में स्थापित गेल भारत में हजीरा-विजयपुर-जगदीशपुर (HVJ) जैसी अंतर्राज्यीय गैस ग्रिडों का प्रबंधन करती है।
- (A) तारापुर (महाराष्ट्र)
- (B) रावतभाटा (राजस्थान)
- (C) कलपक्कम (तमिलनाडु)
- (D) नरोरा (उत्तर प्रदेश)
व्याख्या: अमेरिका के सहयोग से मुंबई के निकट तारापुर में भारत का पहला व्यावसायिक नाभिकीय विद्युत रिएक्टर चालू हुआ था।
- (A) राजस्थान
- (B) गुजरात
- (C) कर्नाटक
- (D) हरियाणा
व्याख्या: कोटा के पास रावतभाटा में कनाडा के सहयोग से दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWR) स्थापित किया गया है।
- (A) तमिलनाडु
- (B) केरल
- (C) आंध्र प्रदेश
- (D) ओडिशा
व्याख्या: चेन्नई के पास कलपक्कम में देश का पहला पूर्णतः स्वदेशी तकनीक से निर्मित परमाणु ऊर्जा केंद्र स्थित है।
- (A) नरोरा (Narora)
- (B) कैगा
- (C) काकरापार
- (D) कुडनकुलम
व्याख्या: नरोरा परमाणु ऊर्जा केंद्र गंगा के उत्तरी मैदान में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की बिजली आपूर्ति का मुख्य केंद्र है।
- (A) गुजरात (ताप्ती नदी के पास)
- (B) महाराष्ट्र
- (C) राजस्थान
- (D) मध्य प्रदेश
व्याख्या: सूरत के निकट काकरापार में भारी जल रिएक्टर संचालित हैं।
- (A) कर्नाटक
- (B) केरल
- (C) तमिलनाडु
- (D) गोवा
व्याख्या: पश्चिमी घाट के उत्तर कन्नड़ जिले में काली नदी के तट पर कैगा नाभिकीय संयंत्र स्थापित है।
- (A) रूस (Russia)
- (B) अमेरिका
- (C) फ्रांस
- (D) जापान
व्याख्या: 1000-1000 मेगावाट क्षमता वाले दो वीवीईआर रिएक्टर रूस के सहयोग से तिरुनेलवेली जिले के कुडनकुलम में चालू किए गए हैं।
- (A) राजस्थान और गुजरात
- (B) असम
- (C) बिहार
- (D) मेघालय
व्याख्या: वर्ष में 300 से अधिक दिन मेघ-रहित तेज धूप और विशाल बंजर मरुस्थलीय भूमि मिलने के कारण राजस्थान में सौर पार्क तेजी से लगाए गए हैं।
- (A) नागरकोइल से मदुरै (तमिलनाडु)
- (B) जैसलमेर (राजस्थान)
- (C) कच्छ (गुजरात)
- (D) ओडिशा तट
व्याख्या: तमिलनाडु में पश्चिमी घाट के पहाड़ी दर्रों से आने वाली तेज निरंतर पवनों के कारण नागरकोइल-मुप्पंदल क्षेत्र एशिया का सबसे बड़ा विंड फार्म है।
- (A) ज्वारीय एवं तरंग ऊर्जा (Tidal Energy)
- (B) भूतापीय ऊर्जा
- (C) परमाणु ऊर्जा
- (D) बायोमास
व्याख्या: यहाँ समुद्र में ज्वार-भाटा के समय पानी का उतार-चढ़ाव कई मीटर ऊंचा होता है, जिससे टरबाइन चलाकर ज्वारीय बिजली बनाई जा सकती है।
- (A) पार्वती घाटी मणिकरण (हिमाचल प्रदेश) और पूगा घाटी (लद्दाख)
- (B) राजगीर और मुंगेर
- (C) सुंदरवन और चिल्का
- (D) दार्जिलिंग और नैनीताल
व्याख्या: पृथ्वी के आंतरिक मैग्मा से गर्म होकर ऊपर आने वाले खौलते जल और भाप के प्राकृतिक स्रोतों से यहाँ विद्युत जनित्र चलाए जाते हैं।
- (A) बायोगैस / गोबर गैस
- (B) एलपीजी
- (C) सीएनजी
- (D) कोयला गैस
व्याख्या: अवायवीय जीवाणु अपघटन से 55-65% मीथेन गैस बनती है जो स्वच्छ ईंधन है, तथा बचा हुआ अवशेष नाइट्रोजन और फास्फोरस से भरपूर जैविक खाद बनता है।
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